आज कैसा रहा हिंदी अखबारों का फ्रंट पेज, पढ़ें यहां

दैनिक जागरण में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं, वहीं हिन्दुस्तान में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 23 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 23 November, 2019
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राजनीति में बाजी कितनी जल्दी पलट जाती है, महाराष्ट्र इसका सबसे सटीक उदाहरण है। कल रात तक शरद पवार, शिवसेना के साथ खड़े थे और सुबह होते ही पाला बदल लिया। इसलिए आज के अखबारों में महाराष्ट्र की सियासत को लेकर लगीं खबरें एकदम से पुरानी हो गई हैं।

सबसे पहले बात करते हैं नवभारत टाइम्स की। लीड महाराष्ट्र है, जिसमें उद्धव और उनके बेटे का हंसते हुए फोटो है। कोलकाता में पहली बार गुलाबी गेंद से हुए टेस्ट मैच को आज भी फ्रंट पेज पर जगह मिली है। ईशांत शर्मा ने पांच विकेट लेते हुए बांग्लादेश को महज 106 पर ऑल आउट कर दिया। वहीं, दिल्ली में चल रही पानी पर सियासत को भी पेज पर रखा गया है। जल बोर्ड का कहना है कि 9 में से 8 जगहों पर पानी पीने योग्य है।

इसके अलावा, जेएनयू सहित तीन अन्य समाचार भी पेज पर हैं। सरकार की ओर से गठित समिति ने जेएनयू के आंदोलनकारी छात्रों से बात की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। आधा पेज विज्ञापन होने के चलते इससे ज्यादा खबरों की गुंजाइश पेज पर नहीं थी।

वहीं, दैनिक जागरण में आज विज्ञापनों के चलते दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं। पहले पेज की लीड महाराष्ट्र है, जिसमें उद्धव और उनके बेटे आदित्य का हंसते हुए फोटो है। दूसरी और एकमात्र बड़ी खबर दिल्ली में सस्ते पेयजल कनेक्शन को मंजूरी है।

दूसरे फ्रेट पेज की बात करें तो लीड यहां एसपीजी सुरक्षा के सीमित होते दायरे को रखा गया है। सरकार संसद में इस संबंध में एक बिल पेश करने जा रही है, जिसके पारित होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्रियों के परिवार को एसपीजी सुरक्षा नहीं दी जाएगी। भारत-बांग्लादेश मैच को भी तीन कॉलम जगह मिली है। सबसे नीचे दो कॉलम में संजय मिश्र की बाईलाइन स्टोरी है, जिसमें उन्होंने संसद में न बैठने की सांसदों की आदत के बारे में बताया है।

अब दैनिक भास्कर पर नजर डालते हैं। फ्रंट पेज की शुरुआत गुलाबी गेंद से हुए टेस्ट मैच से हुई है। फोटो के साथ इस खबर को खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। लीड महाराष्ट्र है। एसपीजी सुरक्षा के घटते कवर को अखबार ने सिंगल में रखा है, वहीं एम्स के महंगे इलाज को बड़ी जगह मिली है।

एंकर में एक ऐसी खबर को सजाया गया है, जिसे सभी पैरेंट्स को जरूर पढ़ना चाहिए। भोपाल में एक बच्ची स्कूल से सीधे अदालत पहुंच गई और वहां उपस्थित जज से अपने माता-पिता को लड़ाई न करने का आदेश देने की गुहार लगाई। यह घटना पारिवारिक कलह से बच्चों के मन पर होने वाले प्रभाव को बखूबी बयां करती है। इसके अलावा, पेज पर इस अखबार की एक इनहाउस खबर भी है।

हिन्दुस्तान में आज जैकेट विज्ञापन के कारण तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड महाराष्ट्र है और गुलाबी गेंद से ईशांत के कमाल को फोटो के रूप में सजाया गया है। वहीं, दिल्ली के प्रदूषण पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर के दावे को भी पेज पर जगह मिली है। मंत्री महोदय का कहना है कि प्रदूषण को रोकने में दिल्ली बीजिंग को पछाड़ देगी।

महंगाई के दौर में इलाज के महंगे होने की खबर को भी अखबार ने पेज पर लगाया है। स्कंद विवेक धर ने अपनी बाईलाइन में बताया है कि एम्स में इलाज कराना अब महंगा होने जा रहा है। इसके अलावा, बनारस में हुए बवाल को भी पाठकों के समक्ष रखा गया है। डॉक्टर फिरोज की नियुक्ति के विरोध में पिछले 15 दिनों से चल रहा धरना फ़िलहाल समाप्त हो गया है। जेएनयू को आज अखबार ने सिंगल कॉलम में जगह दी है।

आखिर में आज अमर उजाला का रुख करें तो अखबार ने महाराष्ट्र को लीड लगाया है और दूसरी बड़ी खबर के रूप में गुलाबी गेंद से ईशांत के जलवे को फोटो के साथ पेज पर रखा है। झारखंड में नक्सली हमला और पूर्व मुख्यमंत्री के घर छापेमारी की खबर को भी प्रमुखता के साथ लगाया गया है। झारखंड में 30 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले नक्सलियों ने हमला किया, जिसमें 4 जवान शहीद हो गए।

वहीं, सीबीआई ने 32 करोड़ के घोटाले में मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री के घर पर छापा मारा। दिल्ली में 500 से कम टीडीएस पर आरओ नहीं चलाने की पाबंदी को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। इस खबर को अखबार ने दो कॉलम जगह दी है, इसके पास ही एक और स्थानीय समाचार है। दिल्ली में अब 2310 रुपए में पेयजल कनेक्शन की योजना को मंजूरी मिल गई है। एंकर में दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण को जगह मिली है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट में आज ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर सभी अखबारों के फ्रंट पेज अच्छे नजर आ रहे हैं।

2: खबरों की प्रस्तुति में भी ‘दैनिक जागरण’ के अलावा, सभी अखबार बेहतर हैं, लेकिन क्रिकेट की खबर के प्रस्तुतिकरण में ‘दैनिक भास्कर’ को अव्वल कहा जा सकता है।

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में आज भी सभी अखबार एक जैसे हैं, यानी किसी ने हेडलाइन को लेकर प्रयोग नहीं किया है।

4: खबरों की बात करें तो ‘दैनिक जागरण’ और ‘दैनिक भास्कर’ सबसे आगे हैं। क्योंकि दोनों ही अखबारों ने एसपीजी सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण समाचार को फ्रंट पेज पर रखा है।

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‘Outlook’ मैगजीन को लेकर लिया गया ये बड़ा फैसला

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इसकी चपेट में अब तक कई लोग आ चुके हैं। तमाम संस्थानों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
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‘कोरोनावायरस’ (COVID-19) के कारण देश में चल रहे लॉकडाउन के बीच अंग्रेजी की साप्ताहिक मैगजीन ‘आउटलुक’ (Outlook ) ने अपने प्रिंट एडिशन को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है।  ‘आउटलुक’  के एडिटर-इन-चीफ रूबेन बनर्जी (Ruben Banerjee) ने इस बारे में एक पत्र लिखकर जानकारी दी है। इस पत्र में बनर्जी ने लिखा है, ‘मुझे यह बताते हुए बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है कि आपकी पसंदीदा मैगजीन 'आउटलुक' की प्रिंटिंग फिलहाल बंद कर दी गई है।’

इस पत्र में उन्होंने यह भी कहा है, ‘कोरोनावायरस के कारण देशभर में आजकल जो स्थिति है, उस वजह से ही मैगजीन की प्रिंटिंग को बंद करने का निर्णय लिया गया है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण के जरिये फैल रहा है। वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार द्वारा लॉकडाउन की घोषणा की गई है। ऐसे में हम इस मैगजीन को डिस्ट्रीब्यूट नहीं कर सकते हैं। ऐसे समय में इस मैगजीन को वितरित न करने का निर्णय इसलिए लिया गया है, ताकि आप लोग किसी ऐसी चीज के संपर्क में न आएं, जो कई हाथों से होकर गुजरी हो और आपको खतरे में डाल सकती हो।’

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मीडिया पर कोरोना का असर, 300 से अधिक अखबारों का प्रकाशन अस्थायी रूप से बंद!

कोरोना के चलते विश्व की महाशक्तियों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। भारत में भी इसका असर इंडस्ट्री पर दिखाई देने लगा है। मीडिया इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है।

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Thursday, 02 April, 2020
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कोरोना वायरस पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस महामारी के चलते विश्व की महाशक्तियों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। भारत में भी कोरोना का असर इंडस्ट्री पर दिखाई देने लगा है। मीडिया इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। एक्सप्रेस ग्रुप से जहां एक दिन पहले खबर आयी कि वह अपने यहां काम कर रहे मीडियाकर्मियों की सैलरी में कटौती करेगा, तो वहीं अब एक और बुरी खबर सामने आयी है।

मध्य प्रदेश के 300 से अधिक छोटे और मझोले अखबार के मालिकों ने अपने-अपने अखबार अस्थायी रूप से छापने बंद कर दिये हैं।   

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने बताया, देशव्यापी लॉकडाउन के कारण यातायात की सुविधा के अभाव के साथ-साथ विज्ञापनों में आई भारी कमी ही इसकी मुख्य वजह है। लॉकडाउन से पहले इनमें से अधिकांश अखबार मध्य प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों से प्रकाशित हुआ करते थे।'

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, लोगों में यह डर है कि यदि वे समाचार पत्रों को इस महामारी के समय खरीदेंगे तो इसके जरिये वे भी इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। यह भी लोगों द्वारा समाचार पत्र न लेने के मुख्य कारणों में से एक है।

अधिकारी इस बात की भी जानकारी दी है कि मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग में करीब 670 समाचार पत्र पंजीकृत हैं, जिन्हें सरकारी विज्ञापन मिलते हैं। इनमें से करीब 287 अकेले भोपाल से ही प्रकाशित होते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन स्थिति अब ऐसी खराब हो गई है कि मध्य प्रदेश के 52 जिलों में से 95 फीसदी जिलों में इस तरह के अखबार नहीं छप रहे हैं।  

वहीं दूसरी तरफ, मझोले स्तर के समाचार पत्रों के कुछ मालिकों ने अपने अखबार को ई-पेपर्स के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है, ताकि समाचारों की दुनिया में अपना अस्तित्व बचाया जा सके।   

 

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कोरोना के आंकड़ों पर हिंदी अखबारों में यूं दिखा विरोधाभास

दिल्ली के निजामुद्दीन में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश की चिंता बढ़ा दी है। यही चिंता आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सबसे बड़ी खबर है।

नीरज नैयर by
Published - Thursday, 02 April, 2020
Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
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दिल्ली के निजामुद्दीन में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश की चिंता बढ़ा दी है। यही चिंता आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सबसे बड़ी खबर है। सबसे पहले बात करते हैं नवभारत टाइम्स की, जहां कोरोना की चिंता और लगातार बढ़ते मामलों को पूरे आठ कॉलम लीड लगाया गया है। वहीं, गोरखपुर में 25 वर्षीय एक युवक की मौत से खलबली मच गई है। मृतक में कोरोना की पुष्टि हुई है, इसी के साथ यह कोरोना से देश में सबसे कम उम्र के व्यक्ति की मौत का मामला बन गया है।

इस खबर के साथ ही कोरोना की चपेट में आ रहे डॉक्टर और अमेरिका में बिगड़ते हालात भी पेज पर हैं। एंकर में लोगों को अखबार पढ़ने के लिए जागरूक करता समाचार है। कोरोना के खौफ के चलते बड़े पैमाने पर लोगों ने अखबार मंगाना बंद कर दिया है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए केंद्र द्वारा जारी नियम और दो सिंगल समाचार भी पेज पर हैं। अब जो लोग घाटी में 15 साल रह चुके हैं, उन्हें भी मूल निवासी माना जाएगा।

दूसरे नंबर पर रुख करते हैं हिन्दुस्तान का। फ्रंट पेज की शुरुआत रामनवमी के मौके पर जाने-माने लेखक अमीश त्रिपाठी द्वारा बताई गईं नौ अच्छी आदतों से हुई है, जिन्हें अपनाकर कोरोना के ‘असुर’ का अंत किया जा सकता है। यह निश्चित रूप से एक अच्छा प्रयोग है। लीड की बात करें तो ‘तबलीगी जमात के 189 लोग संक्रमित मिले’ शीर्षक के साथ देश में बढ़ी चिंता को लगाया गया है। वहीं, एक दिन में सामने आये 437 नए मामले और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए केजरीवाल सरकार का ऐलान को भी पर्याप्त जगह मिली है। केजरीवाल के कहा है कि यदि किसी स्वास्थ्य कर्मी की संक्रमण से मौत होती है तो उसके परिवार को एक करोड़ दिए जाएंगे।

भारतीय मूल की प्रख्यात वैज्ञानिक गीता रामजी की दक्षिण अफ्रीका में कोरोना से मौत हो गई है। इस खबर को भी अखबार ने प्रमुखता से लगाया है। एंकर में तबलीगी जमात के मामले में एजेंसियों की लापरवाही को रेखांकित करता समाचार है। अखबार ने जम्मू-कश्मीर से जुड़ी खबर को सिंगल कॉलम में रखा है। खबर मूल निवासी वाले नियम से उठाने के बजाय नौकरी की व्यवस्था से उठाई गई है।

अब बात करते हैं अमर उजाला की, जहां टॉप बॉक्स में कोरोना से जूझते उत्तर प्रदेश का हाल है। कोरोना पीड़ित 25 वर्षीय युवक के साथ ही राज्य में दो लोगों की मौत हो चुकी है। लीड निजामुद्दीन से उपजी चिंता है। हालांकि, अमर उजाला ने तबलीगी मरकज से जुड़े 304 लोगों को संक्रमित बताया है, जबकि हिन्दुस्तान में यह संख्या 189 है। पेज पर तीसरी बड़ी खबर सीबीएसई का फैसला है, जिसके मुताबिक 9वीं और 12वीं के छात्र मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा में जाएंगे।

हिन्दुस्तान ने भी इस खबर को प्रमुखता से उठाया है। वहीं, वायरस की चपेट में आते डॉक्टरों सहित कोरोना के खौफ से जुड़ी तीन खबरों को रंगीन बॉक्स में रखा गया है। एंकर में जम्मू-कश्मीर में केंद्र द्वारा लागू किया गया डोमिसाइल कानून है। इसके अलावा, पेज पर कुछ अन्य समाचार भी हैं।

दैनिक जागरण के फ्रंट पेज पर नजर डालें तो यहां निजामुद्दीन कांड के बाद हरकत में आई सरकार को लीड लगाया गया है। देश में तबलीगी जमात के लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है। सेकंड लीड राकेश कुमार की बाईलाइन है, जिन्होंने बताया है कि कैसे निजामुद्दीन के मरकज में पनप रहा था देश की तबाही का वायरस।

जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल कानून, केजरीवाल सरकार और सीबीएसई के फैसलों सहित कोरोना की बढ़ती चाल भी पेज पर है। एंकर की बात करें तो यहां मनु त्यागी की बाईलाइन को सजाया गया है। मनु ने लॉकडाउन के सुनहरे पक्ष से पाठकों को रूबरू कराया है।

सबसे आखिरी में चलते हैं राजस्थान पत्रिका पर। लीड निजामुद्दीन कांड से बढ़ी चिंता और सरकार की कार्रवाई को लगाया गया है। हालांकि, संक्रमितों की संख्या को लेकर यहां भी गफलत का माहौल है। अखबार संक्रमित जमातियों की संख्या 261 बता रहा है, जबकि हिन्दुस्तान और अमर उजाला में आंकड़ा कुछ और है।

वहीं, जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल कानून और सीबीएसई के फैसले को पर्याप्त जगह उपलब्ध कराई गई है। साथ ही कोरोना से मुकाबले के लिए रेलवे की तैयारी से भी पाठकों को अवगत कराया गया है। एंकर में महेंद्र प्रताप सिंह की बाईलाइन है, जिन्होंने बताया है कि कोरोना के खौफ के बीच रामनवमी कैसे मन रही है।

आज का किंग कौन?

1: लेआउट की बात करें तो आज हिन्दुस्तान अव्वल है और दूसरा नंबर अमर उजाला का आता है।

2: खबरों की प्रस्तुति में मामला थोड़ा उल्टा है, यानी अमर उजाला प्रथम है और हिन्दुस्तान दूसरे नंबर पर।

3: कलात्मक शीर्षक आज किसी भी अखबार में नजर नहीं आ रहा है।

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एक्सप्रेस समूह पर दिखा कोरोना का 'असर', एंप्लाईज को लेकर उठाया ये स्टेप

समूह की ओर से इस बारे में अपने एंप्लाईज को एक पत्र लिखकर जानकारी दी गई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
एक्सप्रेस ग्रुप

दुनियाभर में खौफ का पर्याय बने 'कोरोनावायरस' (कोविड-19) का 'प्रकोप' अब संस्थानों पर भी दिखना शुरू हो गया है। दरअसल, कोरोना के कारण बिजनेस पर पड़े असर के कारण ‘एक्सप्रेस समूह’ (Express Group) ने अपने एंप्लाईज की सैलरी में अस्थायी रूप से कटौती किए जाने की घोषणा की है। इस बारे में समूह की ओर से अपने एंप्लाईज को एक पत्र भी लिखा गया है।

इस पत्र में कहा गया है, कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण वेंडर्स, आरडब्ल्यूए सभी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। रेल, सड़क और हवाई यातायात बंद होने के कारण इसका असर अखबर के डिस्ट्रीब्यूशन पर पड़ रहा है। बिजनेस बंद पड़े हुए हैं। ऐसे में हम अपने सभी केंद्रों पर प्रिंट ऑर्डर कम करने के लिए मजबूर हो गए हैं। यह पूरी तरह से अभूतपूर्व स्थिति है।’

एंप्लाईज को लिखे पत्र में यह भी कहा गया है कि ‘कोरोना के कारण हमारे एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पर काफी विपरीत असर पड़ा है और इन स्थितियों को देखकर लगता है कि स्थिति और खराब होने वाली है। ऐसे में एंप्लाईज की सैलरी में अस्थायी रूप से कुछ कटौती किए जाने का निर्णय लिया गया है।’

 

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इस बड़ी खबर को फ्रंट पेज पर रखने से चूके ये अखबार

जैकेट विज्ञापन के कारण नवभारत टाइम्स में आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by
Published - Tuesday, 31 March, 2020
Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
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कोरोना के खौफ के बीच दिल्ली में धार्मिक जलसे में लोगों का जुटना और उनमें से कई का पॉजिटिव आना स्थिति को और भी भयावह बना सकता है। यह खबर दिल्ली के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी, लेकिन कुछ ही अख़बार इसके महत्व को समझ पाए हैं। सबसे पहले आज बात करते हैं दैनिक जागरण की। अखबार ने टॉप बॉक्स में उस खबर को लगाया है, जो लोगों को थोड़ी राहत देगी। यानी लॉकडाउन की अवधि नहीं बढ़ाई जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लॉकडाउन 21 दिनों का ही रहेगा।

लीड, दिल्ली का धार्मिक जलसा है, मगर इसका शीर्षक काफी कठिन हो गया है। एक ही नजर में पाठकों के लिए समझना मुश्किल है कि आखिर किस बारे में बात हो रही है। वहीं, कोरोना से मुकाबले की तैयारियों में खामियों को लेकर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के डीएम को पद से हटा दिया है। इस समाचार को पूरे घटनाक्रम के साथ पेज पर रखा गया है। एंकर में लॉकडाउन को सही साबित करती खबर है। इसके अलावा, कुछ सिंगल खबरों को पेज पर स्थान मिला है।

अब चलते हैं नवभारत टाइम्स पर। जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है, लेकिन यहां भी काफी विज्ञापन है। लीड धार्मिक जलसा है, जिसे बेहद सरल शीर्षक ‘निजामुद्दीन बना कोरोना का केंद्र’ के साथ लगाया गया है। इस जलसे में 1900 लोग आये थे, जिनमें से 24 में कोरोना वायरस मिला है और 6 की तेलंगाना में मौत हो गई है।

नोएडा के डीएम को योगी की फटकार भी लीड का हिस्सा है। इसके अलावा, पेज पर केवल दो सिंगल समाचार ही आ सके हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है, लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर सरकार की सफाई।

अमर उजाला ने धार्मिक जलसे की खबर को काफी विस्तार से लीड लगाया है। वहीं, नोएडा के डीएम को योगी द्वारा लगाई गई फटकार को भी बड़ी जगह मिली है। अखबार ने देश में बढ़ती कोरोना की चाल से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। संक्रमितों का आंकड़ा 1200 से ज्यादा हो गया है। इसी खबर में ओडिशा में महिला डॉक्टर से घर खाली कराने के लिए दी गई दुष्कर्म की धमकी का भी जिक्र है। एंकर में कोरोना को लेकर सरकार की चेतावनी और लॉकडाउन की अवधि को लेकर स्पष्टीकरण है।

आज हिन्दुस्तान को देखें तो विज्ञापनों को लेकर स्थिति लगभग कल जैसी ही है। लीड लॉकडाउन की समयावधि पर सरकार की सफाई है। स्कन्द विवेक धर की बाईलाइन भी लीड का हिस्सा है, जिन्होंने एक दिन में सामने आये कोरोना के 227 मामलों के बारे में बताया है। हालांकि, इसमें दिल्ली के धार्मिक जलसे का कहीं जिक्र नहीं है। कोताही पर नोएडा के डीएम को योगी की फटकार के साथ ही सरकारी स्कूलों में बच्चों को पदोन्नत करने का दिल्ली सरकार का फैसला भी पेज पर है। इसके अलावा, चार सिंगल समाचारों को ही पेज पर जगह मिल सकी है, लेकिन महिला डॉक्टर को दुष्कर्म की धमकी पेज पर नहीं है।

सबसे आखिरी में रुख करते हैं राजस्थान पत्रिका का। लीड ‘ना लॉकडाउन बढ़ेगा, ना इमरजेंसी लगेगी’ शीर्षक के साथ सरकार की सफाई को लगाया गया है। इसमें पलायन करने वाले मजदूरों का एक फोटो भी है, जो लॉकडाउन की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। हालांकि, दिल्ली के धार्मिक जलसे का कहीं जिक्र नहीं है। ओडिशा में डॉक्टर को मिली दुष्कर्म की धमकी को अखबार ने दो कॉलम जगह दी है। पीड़िता पर लगातार मकान खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है।

वहीं, लॉकडाउन के दूसरे पहलू को उजागर करती एक अन्य खबर भी पेज पर है, जिसके मुताबिक पैदल घर लौटने की कवायद में 29 मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं। एंकर में पुष्पेश शर्मा की बाईलाइन को लगाया गया है, जिन्होंने बताया है कि चीन किस तरह कोरोना संक्रमितों का पता लगा रहा है। 

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के लिहाज से आज सभी अखबार एक जैसे नजर आ रहे हैं। इसलिए किसी एक को अव्वल नहीं कहा जा सकता।

2: खबरों की प्रस्तुति में नवभारत टाइम्स और अमर उजाला को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया जा सकता है।

3: कलात्मक शीर्षक आज किसी भी अखबार में नजर नहीं आ रहा है।

4: खबरों का जहां तक सवाल है तो नवभारत टाइम्स, अमर उजाला और दैनिक जागरण सबसे आगे हैं, क्योंकि तीनों ने दिल्ली के धार्मिक जलसे की खबर को फ्रंट पेज पर प्रमुखता से जगह दी है।

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मीडिया की यह परेशानी दूर करने के लिए सरकार ने बढ़ाया कदम  

कोरोना वायरस को लेकर आम जनता के खौफ को बढ़ाने में सोशल मीडिया का अहम योगदान है। सरकार की सख्ती के बावजूद ऐसी खबरें वायरल होती रहती हैं, जिनका सच से कोई लेना देना नहीं।

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
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कोरोना वायरस को लेकर आम जनता के खौफ को बढ़ाने में सोशल मीडिया का अहम योगदान है। सरकार की सख्ती के बावजूद ऐसी खबरें वायरल होती रहती हैं, जिनका सच से कोई लेना देना नहीं। उदाहरण के तौर पर अखबारों से कोरोना फैलता है। इस अफवाह के चलते लोग अखबार लेना बंद कर रहे हैं। बड़े शहरों में तो कुछ सोसाइटीज ने हॉकर्स के अंदर आने पर ही पाबंदी लगा दी है। हालांकि, सरकार लगातार इस भ्रम को दूर करने में लगी है। मीडिया हाउस अपने स्तर पर भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

इस बीच, सरकार ने लॉकडाउन के चलते मीडिया को हो रही परेशानी दूर करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा कि अखबार की गाड़ियों को न रोका जाए। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने इस बारे में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि लोगों तक अखबारों की डिलिवरी की इजाजत दी गई है। लिहाजा घरों तक अखबार पहुंचाने सहित प्रिंट मीडिया के तहत आने वाली सप्लाई चेन की गाड़ियों को न रोका जाए। सीधे शब्दों में कहें तो अखबार प्रिंट होने से लेकर गाड़ियों के जरिए डिपो तक पहुंचने और फिर वहां से वितरकों द्वारा पाठकों तक पहुंचने की इजाजत है।

गौरतलब है कि लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि अखबारों की गाड़ियों को रोका जा रहा है। मीडिया संस्थानों ने इस संबंध में सरकार का ध्यान आकर्षित किया था, जिसके बाद गृह मंत्रालय की तरफ से सभी राज्यों को स्पष्ट किया गया है कि मीडिया के काम को सुचारू रूप से चलने दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अखबार लोगों के घरों तक पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संकट काल में मीडिया के काम की सराहना कर चुके हैं। वहीं, कई विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस वक्त लोगों को अखबार पढ़ना चाहिए, ताकि वह कोरोना के मुकाबले के लिए सरकारी तैयारियों से अवगत हो सकें और वायरस से अपना बचाव कर सकें।

नहीं मान रहे लोग

सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने लोगों के दिलोदिमाग को इस कदर जकड़ लिया है कि वो कुछ सुनने को ही तैयार नहीं हैं। अधिकांश लोग यह मान बैठे हैं कि यदि उन्होंने अखबार मंगवाया, तो कोरोना भी उनके घर बिन बुलाये मेहमान की तरह पहुंच जाएगा। ऐसा तब है जब समाचार पत्रों ने बाकायदा संदेश जारी कर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि अखबारों से कोरोना का कोई खतरा नहीं है। वह लगातार बता रहे हैं कि मॉडर्न प्रिंटिंग तकनीक पूरी तरह ऑटोमेटेड है। इसमें हाथों का इस्तेमाल नहीं होता। अखबार बांटने वाली सप्लाई चेन पूरी तरह सैनिटाइज्ड होती है। बावजूद इसके सर्कुलेशन में कमी दर्ज की जा रही है। 

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COVID-19 के खिलाफ जंग में शामिल हुआ भास्कर ग्रुप, मदद के लिए बढ़ाया हाथ

कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। इस बीच दैनिक भास्कर ग्रुप भी कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में शामिल हो गया है।

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
DBGroup

कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। सोमवार को लॉकडाउन का छठा दिन है। इस दौरान न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर संकट खड़ा हो गया है, बल्कि दैनिक श्रमिकों के सामने परिवार का पेट भरने की समस्या भी उत्पन्न हो गयी है।

वहीं इस बीच दैनिक भास्कर ग्रुप भी COVID-19 महामारी के खिलाफ जंग में शामिल हो गया है। ग्रुप ने कोरोना वायरस से उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों को कम करने और ऐसे दैनिक श्रमिकों के लिए एक डोनेशन प्रक्रिया शुरू की है, जिसका नाम है ‘सेवा परमो धरमा’।

बता दें कि दैनिक भास्कर ग्रुप ने देश के 12 राज्यों के 40 शहरों में 1 लाख परिवारों को एक हफ्ते तक खाना पहुंचाने का संकल्प लिया है और इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए भास्कर ग्रुप 40 शहरों के लोकल एनजीओ की मदद ले रहा है।

वहीं, भास्कर ग्रुप और उसके सभी एम्प्लॉयीज ने 1 करोड़ रुपए डोनेट कर इस पहल की शुरुआत की है। इसके अतिरिक्त डोनेशन के लिए 7 करोड़ रुपए अन्य लोगों से जुटाने का लक्ष्य रखा है। वैसे आप सभी लोगों की मदद से तस्वीर बदल सकती है। लिहाजा दैनिक श्रमिकों की मदद के लिए आगे आकर दैनिक भास्कर की इस मुहिम का हिस्सा बन सकते हैं।

आप निम्न माध्यमों से दान कर सकते हैं:

• UPI Transfer through any UPI app (Google pay, Paytm, PhonePe, BHIM etc)

• UPI ID - Q47105727@ybl

• Bank Transfer (RTGS / NEFT)

• HDFC Bank

• Name - Bhaskar Foundation

• Account No. – 01441450000456

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बता दें कि वे सभी जो कुछ न कुछ राशि दानकर भास्कर ग्रुप की इस पहल के साथ जुड़ेंगे, वे आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत कर लाभ का पात्र होंगे। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.dbdigital.in/donate पर क्लिक करें।

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कल से नहीं छपेगा 50 साल पुराना यह अखबार

यह अखबार अब अपना प्रिंट एडिशन बंद कर रहा है। सोमवार यानी आज इस प्रमुख अखबार का आखिरी बार छापा जाएगा।

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
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इंटरनेट युग के आगमन के बाद कई समाचार पत्रों को संघर्ष करना पड़ रहा है, जिसमें से एक अखबार ‘इंडिया एब्रॉड’ भी है, जो अमेरिका में पिछले 50 वर्षों से भारतीय समुदाय की आवाज उठा रहा है। खबर है कि यह अखबार अब अपना प्रिंट एडिशन बंद कर रहा है। सोमवार यानी आज इस प्रमुख अखबार का आखिरी बार छापा जाएगा।

बता दें कि इस भारतीय अखबार की प्रकाशक संस्था ने इंटरनेट के बढ़ते प्रचलन के कारण प्रिंट संस्करण को बंद करने की घोषणा की दी है। 1970 में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक गोपाल राजू ने ‘इंडिया एब्रॉड’ नाम के इस अखबार की स्थापना की थी।

भारत से जुड़ी खबरों पर केंद्रित होने के चलते इस अखबार को बेहद चर्चा मिली और बहुत बड़ा पाठक वर्ग इसके साथ जुड़ गया। 2001 में रेडिफ डॉट कॉम ने इस अखबार का मालिकाना हक राजू से खरीद लिया था, जिसके बाद 2016 में रेडिफ ने इसका मालिकाना हक 8के माइल्स मीडिया इंक को बेच दिया था, जिसके चेयरमैन सुरेश वेंकटाचारी हैं।

वेंकटाचारी ने अपने एक बयान में प्रिंट एडिशन को रोकने के अपने निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि प्रिय पाठकों, मुझे यह बताते हुए खेद है कि ‘इंडिया एब्रॉड’ का आखिरी प्रिंट एडिशन मार्च 2020 को जारी किया जाएगा।

 

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आज किस हिंदी अखबार का फ्रंट पेज है सबसे बेहतर, पढ़ें यहां

दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों में आज लॉकडाउन को लेकर सरकार की सख्ती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माफी सबसे प्रमुख खबरें हैं

नीरज नैयर by
Published - Monday, 30 March, 2020
Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
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दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों में आज लॉकडाउन को लेकर सरकार की सख्ती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माफी सबसे प्रमुख खबरें हैं। शुरुआत करते हैं हिन्दुस्तान से, जहां फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन है। ‘लॉकडाउन तोड़ा तो 14 दिन अलग रहना होगा’, शीर्षक के साथ सरकार की सख्ती को लीड लगाया गया है। सरकार चाहती है कि लोग बिल्कुल भी घरों से बाहर न निकलें। कोरोना से मुकाबले के लिए यह जरूरी भी है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूरन उन्हें बाहर आना ही पड़ता है।

लीड में कोरोना की बढ़ती चाल का भी जिक्र है, देश में संक्रमितों का आंकड़ा एक हजार के पार निकल गया है। अखबार ने वायरस से प्रभावित देशों के हाल को एक टेबल में प्रदर्शित किया है, ताकि एक ही नजर में पाठकों को सबकुछ समझ आ जाए। दूसरी बड़ी खबर ‘मोदी के मन’ की बात है, जिसमें उन्होंने लॉकडाउन से हुई परेशानियों पर माफी मांगते हुए लोगों से स्थिति की गंभीरता को समझने को कहा है। वहीं, महामारी के डर से खुदखुशी करने वाले जर्मनी के मंत्री से जुड़ा समाचार और दो सिंगल खबरें भी पेज पर हैं। मसलन, ‘दिल्ली सरकार देगी मकान का किराया’ और ‘ईरान में फंसे 272 भारतीय वतन लौटे’। 

वहीं, नवभारत टाइम्स की बात करें तो लीड सरकार की सख्ती और मौजूदा हालातों को बनाया गया है। इसमें लॉकडाउन में लापरवाही बरतने वाले 4 अफसरों पर करवाई और पलायन कर रहे 5 मजदूरों की सड़क हादसे में मौत को भी रखा गया है। पीएम मोदी द्वारा मांगी गई माफी अलग से डेढ़ कॉलम में है और इसी के नीचे केजरीवाल के पलायन रोकने की अपील है।

देश में कोरोना वायरस की बढ़ती चाल के बारे में भी पाठकों को बताया गया है। एंकर में एक राहत पहुंचाने वाली खबर है। ऑनलाइन शॉपिंग संग होम डिलीवरी की शुरुआत हो गई है। हालांकि, कंपनियों को तमाम तरह की परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है, जिसमें पुलिस की रोकटोक भी शामिल है। इसके अलावा, जर्मनी के मंत्री की खुदकुशी के साथ ही कोरोना से जुड़ी कुछ अन्य खबरें भी पेज पर हैं।

अब रुख करते हैं अमर उजाला का। फ्रंट पेज की शुरुआत टॉपबॉक्स से हुई है, जिसमें सरकार की सख्ती और पीएम मोदी की माफी को जगह मिली है। लीड कोरोना की बढ़ती रफ्तार है। यूपी में वायरस के फैलाव को अलग से दो कॉलम रखा गया है। अमृतपाल सिंह बाली की बाईलाइन को प्रमुखता से पेज पर स्थान मिला है, जिन्होंने आतंकवाद के बाद कोरोना से जूझ रही घाटी के बारे में बताया है।

एंकर में ‘मन की बात’ में पीएम मोदी से आपबीती साझा करने वाले आगरा के अशोक कपूर हैं। कपूर परिवार के पांच सदस्य संक्रमित हो गए थे, लेकिन डॉक्टर उन्हें मौत के मुंह से बाहर खींच लाये। इसके अलावा, जर्मनी के मंत्री की खुदकुशी सहित कुछ अन्य समाचार भी पेज पर हैं।

राजस्थान पत्रिका ने आज भी अपने मास्टहेड में प्रयोग किया है। लीड मोदी की माफी और सरकार की सख्ती है। कोरोना की बढ़ती चाल को अलग से तीन कॉलम जगह मिली है। लॉकडाउन तोड़ने वालों के खिलाफ पुलिस बर्बरता को लेकर केरल हाई कोर्ट के न्यायाधीश के पत्र से भी अखबार ने पाठकों को रूबरू कराया है। जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा है कि बल प्रयोग न किया जाए।

एंकर में कोरोना से मुकाबले के लिए आईआईटी और एम्स के पूर्व छात्रों द्वारा तैयार किया गया रोबोट है। यह रोबोट शहरों को सैनेटाइज करेगा। इसके अलावा, पेज पर कुछ अन्य समाचार हैं, लेकिन आत्महत्या करने वाले जर्मनी के मंत्री का जिक्र नहीं है।

सबसे आखिरी में आज रुख करते हैं दैनिक जागरण का। फ्रंट पेज की शुरुआत मोदी की माफ़ी वाले टॉप बॉक्स से हुई है। लीड सरकार की सख्ती और निर्देश हैं। सरकार ने सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के साथ ही मकान मालिकों से एक महीने का किराया न लेने को कहा है।

वहीं, कोरोना की बढ़ती चाल के साथ ही लॉकडाउन से आगे की तैयारी भी पेज पर है। केंद्र ने सबकुछ पहले जैसा करने के लिए 11 समूहों का गठन किया है। एंकर की बात करें तो यहां मजदूरों के पलायन और उससे जुड़े संकट पर प्रकाश डाला गया है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के लिहाज से आज अमर उजाला सबसे बेहतर दिखाई दे रहा है। नवभारत टाइम्स के पास भी पूरा पेज था, लेकिन लेआउट में आज वह कुछ कमाल नहीं दिखा सका है। हिन्दुस्तान का फ्रंट पेज जरूर सीमित जगह में भी आकर्षक नजर आ रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति में भी अमर उजाला का बेहतर है, जबकि दूसरे स्थान पर हिन्दुस्तान को रखा जा सकता है।

3: शीर्षक को कलात्मक बनाने का प्रयास आज किसी भी अखबार ने नहीं किया है।

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नवभारत टाइम्स का यह शीर्षक दर्शाता है, बेवजह ‘हीरो’ न बनें और बचाव करें

कोरोना से मुकाबले के लिए वित्त मंत्रालय के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक भी आगे आया है।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 28 March, 2020
Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
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कोरोना से मुकाबले के लिए वित्त मंत्रालय के बाद अब रिजर्व बैंक भी आगे आया है। हालांकि, रिजर्व बैंक की ‘राहत’ उसी सूरत में जनता तक पहुंचेगी, जब बैंक चाहेंगे। इस राहत के साथ ही कोरोना से जुड़ी अन्य खबरें आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों में हैं। शुरुआत करते हैं नवभारत टाइम्स से, जहां फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं है। लीड रिजर्व बैंक का फैसला है, जिसने रेपो दरों में कमी करने के साथ ही बैंकों से ईएमआई तीन महीनों के लिए टालने को कहा है। यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि ‘ईएमआई’ सिर्फ टाली जाएंगी, यानी आपको उन्हें आगे देना होगा, वो माफ नहीं होंगी।

लॉकडाउन के दौरान नजर आई बेबसी की तस्वीर को भी प्रमुखता से पेज पर रखा गया है। इस तरह की खबरों को उठाना बेहद आवश्यक है, ताकि सरकार और प्रशासन ज्यादा संवेदनशील बन सकें। वहीं, केंद्र के निर्देश और दिल्ली सरकार की तैयारी को भी जगह मिली है। केंद्र ने राज्यों से उन लोगों को खोज निकालने को कहा है, जो विदेश से आये हैं। सरकार के मुताबिक पिछले 2 महीनों में तकरीबन 15 लाख लोग विदेश से आये हैं, लेकिन जांच केवल कुछ की ही हो सकी है। उधर, केजरीवाल सरकार रोजाना 4 लाख लोगों को खाना खिलाने जा रही है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, यह खबर भी पेज पर है। एंकर में लॉकडाउन की एक अलग तस्वीर से पाठकों को रूबरू कराया गया है।

अब चलते हैं हिन्दुस्तान पर, यहां फ्रंट पेज पर केवल एक विज्ञापन है। लीड रिजर्व बैंक का फैसला है, जिसे काफी सुलझे हुए ढंग से पाठकों के समक्ष पेश किया गया है। केजरीवाल सरकार के दावे और तैयारी को सेकंड लीड का दर्जा मिला है। वहीं, कोरोना पीड़ित ब्रिटिश प्रधानमंत्री और वायरस से निपटने के लिए सेना के ऑपरेशन ‘नमस्ते’ को भी पेज पर रखा गया है।

इसके अलावा, सरकार के एक महत्वपूर्ण आदेश से भी पाठकों को अवगत कराया गया है। जिसके तहत सभी जिलाधिकारी गांवों में जाकर संक्रमित खोजेंगे। एंकर में अरविंद मिश्र की बाईलाइन को जगह मिली है। उन्होंने एक आईएएस दंपति की मनमानी और कोरोना से निपटने में आम आदमी के सहयोग के बारे में बताया है।

वहीं, अमर उजाला के फ्रंट पेज पर नवभारत टाइम्स की तरह कोई विज्ञापन नहीं है। पेज की शुरुआत लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की स्थिति बयां करती तस्वीर से हुई है। लीड दूसरी बड़ी राहत है, जिसे सरल तरह से पाठकों को समझाने का प्रयास किया गया है। इसके पास ही देश में बढ़ती कोरोना की चाल है, संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 724 पहुंच गया है।

केजरीवाल सरकार की तैयारी, ब्रिटिश प्रधानमंत्री, केरल में होम क्वारनटाइन से भागे आईएएस के निलंबन के साथ ही खौफ पैदा करती एक और खबर पेज पर है। एंकर में ललित ओझा की बाईलाइन है, जिन्होंने राजस्थान में 24 हजार लोगों की स्क्रीनिंग के बारे में बताया है।

आज भी राजस्थान पत्रिका ने अपने फ्रंट पेज के मास्टहेड में प्रयोग किया है। लीड दूसरी बड़ी राहत है, जिसमें सरकार की तैयारियों का भी जिक्र है। वहीं, पीएम का रेडियो जॉकी से संवाद, सेना की तैयारी और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश भी पेज पर है।

संक्रमण के फैलाव से बचने के लिए सरकार ने राज्यों से मजदूरों के पलायन को रोकने को कहा है, इस खबर को भी जगह मिली है। एंकर में सीबीएसई सचिव के पत्र का जिक्र है. जिन्होंने छात्रों और शिक्षकों से सीखने एवं अपग्रेड होने को कहा है।

सबसे आखिरी में बात करते हैं दैनिक जागरण की। लीड ‘कर्ज सस्ता, ईएमआई में मोहलत’ शीर्षक के साथ दूसरी बड़ी राहत को लगाया गया है। सेकंड लीड मजदूरों के पलायन पर मोदी सरकार का निर्देश है।

अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि दुनिया मंदी में प्रवेश कर चुकी है, इस खबर के साथ ही भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद का बयान भी पेज पर है। परिषद का कहना है कि अभी बड़े पैमाने पर कोरोना का टेस्ट करने की जरूरत नहीं है, जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, दूरदर्शन पर आज से शुरू होने वाली ‘रामायण’ के बारे में भी पाठकों को सूचित किया गया है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में हिन्दुस्तान आज भी सबसे आगे है, जबकि दूसरे नंबर पर नवभारत टाइम्स को रखा जा सकता है।

2: खबरों की प्रस्तुति में भी हिन्दुस्तान अव्वल है और दूसरा स्थान अमर उजाला को दिया जा सकता है।

3: शीर्षक को कलात्मक बनाने का प्रयास आज केवल नवभारत टाइम्स और राजस्थान पत्रिका ने किया है। राजस्थान पत्रिका ने जहां लीड का शीर्षक लगाया है ‘ईएमआई की चिंता छोड़ें, कोरोना से लड़ें’। वहीं, नवभारत टाइम्स ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री से जुड़ी हेडलाइन में कलात्मकता का प्रदर्शन किया है। खबर का शीर्षक है, ‘कहते थे मैं हाथ मिलाऊंगा, ब्रिटिश पीएम को हुआ कोरोना’। यह शीर्षक उन लोगों के लिए एक सबक की तरह है, जो कहते हैं कि उन्हें कुछ नहीं होगा।

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