आज किस अखबार का फ्रंट पेज रहा ‘दमदार’, जानें यहां

नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं, अमर उजाला के फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं

नीरज नैयर by
Published - Friday, 20 December, 2019
Last Modified:
Friday, 20 December, 2019
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आज के अखबार वही कहानी बयां कर रहे हैं, जो पिछले कई दिनों से सुर्खियों में है यानी नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर हिंसा। शुरुआत आज नवभारत टाइम्स से करते हैं। अखबार ने इस कानून को लेकर लोगों के भ्रम को दूर करने का प्रयास किया है, जो मौजूदा वक्त में सबसे जरूरी है। अखबार में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं। पहले फ्रंट पेज पर ‘आधार-वोटर आईडी ही नहीं, एनआरसी में पहचान के लिए गवाह भी हो सकते हैं मान्य’ शीर्षक के साथ यह बताने की कोशिश की गई है कि नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडिया को लेकर जिस तरह की बातें की जा रही हैं असलियत उससे अलग है। इस समझाइश के बाद कानून को लेकर हुई हिंसा के बारे में बताया गया है। लखनऊ-मेंगलुरु में तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

इसके अलावा, पेज पर तीन अन्य समाचार हैं। पाकिस्तान की विशेष अदालत ने कहा है कि यदि मुशर्रफ फांसी की सजा से पहले मर जाते हैं, तो उनके शव को चौराहे पर 3 दिनों तक लटकाया जाए। यह खबर दो कॉलम में है, जबकि निर्भया के दोषी की नाकाम चाल और दिल्ली में फ्री वाई-फाई को सिंगल-सिंगल कॉलम जगह मिली है। निर्भया के कुसूरवार पवन ने नाबालिग होने का दावा करते हुए फांसी से बचने की चाल चली थी, लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इतना ही नहीं, पवन गुप्ता के वकील पर भी 25 हजार का जुर्माना लगाया है। दूसरे फ्रंट पेज की लीड विरोध-प्रदर्शन से जाम हुई दिल्ली है। राजधानी में कई जगह प्रदर्शन हुए, जिसके चलते सड़कों पर जाम लग गया। इस जाम का असर विमानों की उड़ानों पर भी पड़ा। कई पायलटों के जाम में फंसे होने की वजह से 30 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं। अखबार के पहले फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन होने के कारण खबरों वाला भाग ही शो हो रहा है, इसलिए यहां पर खबरों वाले भाग को ही लगाया गया है जबकि दूसरा फ्रंट पेज पूरा शो हो रहा है। 

हिन्दुस्तान में भी आज दो फ्रंट पेज हैं। पहला पेज नागरिकता कानून को लेकर हुई हिंसा के नाम है। इसका शीर्षक है ‘दिल्ली ठप, देशभर में हुए प्रदर्शन’। खबर में राजधानी का जाम और लखनऊ की हिंसा को फोटो के जरिये दर्शाया गया है। दूसरे फ्रंट पेज की लीड निर्भया के दोषी की नाकामयाब चाल है और आईपीएल के खिलाड़ियों की नीलामी को प्रमुखता के साथ टॉप में पांच कॉलम में सजाया गया है। पैट कमिंस सबसे महंगे खिलाड़ी साबित हुए हैं, उन्हें कोलकाता नाइट राइडर्स ने 15.5 करोड़ में खरीदा है।

मौसम का मिजाज और भारत-अमेरिका बातचीत भी पेज पर है। भारत और अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने पर तैयार हुए हैं। वहीं, अमेरिका से जुड़ी एक अन्य खबर को भी पेज पर जगह मिली है। डोनाल्ड ट्रम्प महाभियोग की पहली जंग हार गए हैं, निचले सदन में प्रस्ताव पास हो गया, अब उच्च सदन में ट्रम्प की अग्निपरीक्षा होगी। एंकर में आठ वर्षीय रेयान के कारनामे हैं, जिन्होंने यूट्यूब से 185 करोड़ की कमाई की है। इसके अलावा, फ्रंट पेज कुछ अन्य खबरें भी हैं।

आज दैनिक जागरण में भी पाठकों को दो फ्रंट पेज मिले हैं। पहले फ्रंट पेज पर दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों को लीड लगाया गया है, साथ ही एनआरसी पर सरकार की सफाई भी दो कॉलम में है। सबसे नीचे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को जगह मिली है, जिन्हें महाभियोग का सामना करना होगा। दूसरे फ्रंट पेज की बात करें तो यहां भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी पर दिए बयान को लीड का दर्जा मिला है। नड्डा का कहना है कि सरकार दोनों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इसी में ममता बनर्जी के बयान का भी जिक्र है, जिनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में सरकार जनमत संग्रह करवाए। अब यहां संयुक्त राष्ट्र कहां से आ गया, ये तो ममता ही बता सकती हैं। निर्भया के दोषी की नाकाम चाल प्रमुखता से पेज पर है, जबकि आईपीएल खिलाड़ियों की नीलामी को एंकर में रखा गया है। इसके अलावा नीलू रंजन की बाईलाइन को भी जगह मिली है, जिन्होंने बताया है कि राम मंदिर का पुजारी कोई दलित हो सकता है।

अब बात करते हैं दैनिक भास्कर की। अखबार ने दिल्ली के जाम की फोटो को मास्टहेड से लगाया है, लेकिन प्रस्तुति अपेक्षाकृत बेहतर है। खबर के बीच में हिंसा दर्शाती तस्वीर है। लीड का शीर्षक है ‘नागरिकता की अग्नि परीक्षा’ जिसमें ‘ता’ को ग्रे शेड दिया गया है, जिससे शीर्षक को कुछ इस तरह से भी पढ़ा जा सकता है ‘नागरिक की अग्नि परीक्षा’ जो कि मौजूदा परिदृश्य के हिसाब से बिलकुल सटीक है।

अखबार ने निर्भया के दोषी की चालबाजी पर आईपीएल खिलाड़ियों की नीलामी को तवज्जो देते हुए इस खबर को तीन कॉलम में रखा है। इसके अलावा महाभियोग का सामना करने वाले डोनाल्ड ट्रम्प, मुशर्रफ पर पाकिस्तानी अदालत का नया फैसला सहित कुछ अन्य खबरें भी हैं। एंकर में फोर्ब्स की सेलेब्रेटी सूची है, जिसमें पहली बार कोई खिलाड़ी शीर्ष पर पहुंचा है। विराट कोहली नंबर वन की पोजीशन पर हैं।

वहीं, राजस्थान पत्रिका ने नागरिकता संशोधन कानून पर हिंसा को पूरे आठ कॉलम लीड लगाया है, साथ ही ‘नवभारत टाइम्स’ की तरह कानून से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का भी प्रयास किया गया है। निर्भया के दोषी की नाकाम चालबाजी दूसरी बड़ी खबर के रूप में पेज पर है।

मुशर्रफ के संबंध में पाकिस्तानी अदालत का नया आदेश और आईपीएल खिलाड़ियों की नीलामी को सिंगल-सिंगल कॉलम में रखा गया है। आईपीएल की खबर को बड़ा लगाया जाता तो बेहतर होता, क्योंकि यह खबर ज्यादा पढ़ी जाएगी। एंकर में अंतरिक्ष से जुड़ी खबर है, जो बताती है कि चांद पर परमाणु ऊर्जा के रोबोट्स का बसेरा होगा। हमेशा की तरह एंकर के पास दो कॉलम खबर है, जिसमें कांग्रेस को घेरने के लिए भाजपा के दांव को जगह मिली है। भाजपा ने नागरिकता संशोधन कानून पर एतराज जताने वाली कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का विडियो दिखाया है।

आखिरी में आज अमर उजाला का रुख करते हैं। अखबार के फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं। पेज का फर्स्ट हाफ कानून पर चल रही हिंसा के नाम समर्पित है। अखबार ने दिल्ली में जाम की स्थिति बयां करने के लिए मास्टहेड से गुरुग्राम-दिल्ली एक्सप्रेस वे पर लगी गाड़ियों की कतारों का फोटो लगाया है। खबर के अंदर लखनऊ में हिंसा दर्शाती फोटो है।

दिल्ली की सर्दी पेज पर दूसरी बड़ी खबर है और निर्भया के दोषी को सबसे नीचे दो कॉलम में रखा गया है। आईपीएल के खिलाड़ियों की नीलामी को पेज के पहले कॉलम में जगह मिली है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में आज पहला नंबर ‘दैनिक भास्कर’ का है, जबकि ‘हिन्दुस्तान’ दूसरे नंबर पर है। 

2: खबरों की प्रस्तुति में भी आज ‘दैनिक भास्कर’ का जलवा है, दूसरे स्थान पर ‘अमर उजाला’ ने जगह बनाई है। ‘नवभारत टाइम्स’ ने पाठकों का भ्रम दूर करने का बेहतरीन प्रयास किया है, इसलिए उसकी सराहना के बिना बात खत्म नहीं हो सकती। 

3: कलात्मक शीर्ष के तौर पर आज भी हेडलाइन में ‘दैनिक भास्कर’ ने अच्छा प्रयोग किया है।

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The Hindu में वर्गीस के. जॉर्ज का हुआ प्रमोशन, अब मिली ये जिम्मेदारी

अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ (The Hindu) के एसोसिएट एडिटर वर्गीस के. जॉर्ज का प्रमोशन हुआ है।

Last Modified:
Monday, 02 August, 2021
Varghese K George

अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ (The Hindu) के एसोसिएट एडिटर वर्गीस के. जॉर्ज का प्रमोशन हुआ है। उन्हें अब पब्लिकेशन के रेजिडेंट एडिटर पद की जिम्मेदारी दी गई है। इस बारे में जारी एक इंटरनल कम्युनिकेशन के अनुसार, अपनी नई भूमिका में वह नई दिल्ली और उत्तर भारत के घटनाक्रमों को लेकर न्यूज को-ऑर्डिनेशन के प्रभारी होंगे। इसके साथ ही वह सुहासिनी हैदर के साथ राजनयिक और विदेशी मामलों पर भी समन्वय स्थापित करेंगे। वहीं, अमित बरुआ ऑनलाइन और मल्टीमीडिया कंटेंट का काम संभालेंगे।

बता दें कि जॉर्ज पूर्व में वॉशिंगटन में अखबार के अमेरिकी संवाददाता भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह दिल्ली में पॉलिटिकल एडिटर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उन्होंने राजनीति, राजनीतिक अर्थव्यवस्था, समाज के साथ-साथ भारत और अमेरिका की विदेश नीति, विशेष रूप से हाल के वर्षों में दोनों देशों में राष्ट्रवाद के उदय और दुनिया के साथ उनके संबंधों पर इसके प्रभाव पर काफी लिखा है।

‘द हिंदू’ में अपनी पारी शुरू करने से पहले वह ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के ब्यूरो चीफ पद पर भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में भी तमाम पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उन्हें रामनाथ गोयनका और प्रेम भाटिया मेमोरियल जैसे तमाम प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स मिल चुके हैं।

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राष्ट्रपति पर लिखी किताब में है कुछ ऐसा विवादित मसला, पत्रकार-प्रकाशक पर दर्ज हुआ मुकदमा

किताब के लेखक कैथरीन बेल्टन और उनके प्रकाशक को लंदन की अदालत में बुधवार को मानहानि के मुकदमे का सामना करना पड़ा।

Last Modified:
Thursday, 29 July, 2021
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर एक किताब लिखी गई है, जिसका नाम है ‘पुतिन्स पीपुल: हाउ द केजीबी टूक बैक रशिया ऐंड देन टूक ऑन द वेस्ट’। इस किताब का जिक्र इसलिए क्योंकि किताब के लेखक एक ब्रिटिश पत्रकार हैं, जिन पर मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया है। वैसे यह मुकदमा इसके प्रकाशक पर भी दर्ज हुआ है।

किताब के लेखक कैथरीन बेल्टन और उनके प्रकाशक को लंदन की अदालत में बुधवार को मानहानि के मुकदमे का सामना करना पड़ा। यह मुकदमा चेल्सिया फुटबॉल क्लब के अरबपति मालिक रोमन अब्रामोविच और अन्य रूसी संपन्न व्यक्तियों ने दायर कराया है। दरअसल, इस किताब में केजीबी के पूर्व एजेंट पुतिन और उनके सहयोगियों की संपत्ति में सोवियत संघ के टूटने के बाद हुई कथित वृद्धि का जिक्र है।

अब्रामोविच ने कहा कि किताब में दावा किया गया है कि उन्होंने पुतिन के निर्देश पर वर्ष 2003 में चेल्सिया टीम को खरीदा था जो ‘झूठा’ और ‘मानहानि’ करने वाला है। इसलिए वह मॉस्को में फाइनेंशियल टाइ्म्स की पूर्व संवाददाता कैथरीन और प्रकाशक हार्पर कॉलिंस के खिलाफ उच्च न्यायालय में वाद दाखिल किया है।

कैथरीन के खिलाफ रूस की सरकारी ऊर्जा कंपनी रोसन्फेट ने भी मुकदमा दर्ज कराया है। प्रकाशक के खिलाफ रूसी कारोबारी मिखाइल फ्रिडमैन ने भी मुकदमा दर्ज कराया है। हार्पर कॉलिंस के खिलाफ रूसी बैंकर पेट्रे एवन द्वारा डाटा सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

वहीं, फ्री स्पीच समूह ने इन मुदकमों पर चिंता जताते हुए कहा है कि अमीर लोगों द्वारा आलोचनाओं को शांत कराने के लिए ब्रिटिश अदालतों का इस्तेमाल करना आसान हो गया हैं। प्रकाशक ने कहा कि वह पूरी मजबूती से अपना बचाव करेगा।

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केंद्र सरकार ने मीडिया में दिए करोड़ों रुपये के विज्ञापनों का नहीं किया भुगतान

केंद्र सरकार ने मीडिया में दिए करोड़ों रुपये के विज्ञापनों का भुगतान नहीं किया है। यह जानकारी एक आरटीआई से सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 27 July, 2021
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केंद्र सरकार ने मीडिया में दिए करोड़ों रुपये के विज्ञापनों का भुगतान नहीं किया है। यह जानकारी एक आरटीआई से सामने आई है। बकाया राशि करीब 147 करोड़ रुपये की है।

बता दें कि इन बकाया राशि में सबसे पुराना बिल 2004 का है, जोकि सूचना-प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाले विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) के पास लंबित है।

‘द हिंदू’ की एक खबर के मुताबिक, प्रिंट मीडिया अभियानों के लिए 76,000 से अधिक बकाया बिल हैं। वहीं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का 67 करोड़ और आउट डोर प्रचार का 18 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है।

आरटीआई में उन बकायों की जानकारी दी गई है, जिन बिलों का बकाया केंद्रीय मंत्रालयों ने डीएवीपी को दिया था। प्रिंट मीडिया का सबसे ज्यादा बकाया रक्षा मंत्रालय पर है। रक्षा मंत्रालय पर 12271 बिल हैं जिनका करीब 16 करोड़ बकाया है। वही वित्त मंत्रालय के पास 6668 बिल हैं जिनका करीब 13 करोड़ रुपये बकाया है। यह जानकारी 21 जून, 2021 तक अपडेट की गई है।

मेरठ यूनिवर्सिटी के फर्स्ट ईयर लॉ स्टूडेंट अनिकेत गौरव ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत यह जानकारी प्राप्त की है।

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बकाया बिलों के बारे में पूछे जाने पर सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने बताया कि बकाया बिलों की संख्या की पूरी सूची अभी उपलब्ध नहीं है और ना ही बिलों की तारीख के बारे में रिकॉर्ड बनाया गया है। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लंबित भुगतानों के बारे में जो जानकारी दी गई है, उसके मुताबिक टीवी चैनलों को 67 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है, जिसमें सबसे ज्यादा बकाया सड़क परिवहन और राजमार्ग विभाग के पास है।

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जानें, समाचार पत्रों में विज्ञापनों पर असम की पिछली सरकार ने कितने किए खर्च

सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली असम की पिछली सरकार ने पांच साल में समाचार पत्रों में विज्ञापनों पर किए इतने खर्च

Last Modified:
Thursday, 15 July, 2021
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सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाली असम की पिछली सरकार ने पांच साल में समाचार पत्रों में विज्ञापनों पर 82.59 करोड़ रुपए खर्च किए। राज्य की विधानसभा को बुधवार को इसकी जानकारी दी गई।

प्रश्नकाल के दौरान ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक करीम उद्दीन बरभुया के एक सवाल का जवाब देते हुए, सूचना एवं जनसंपर्क (आईपीआर) मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि वे विज्ञापन राज्य की विभिन्न भाषाओं के 41 समाचार पत्रों में प्रकाशित किए गए थे।

एक संबंधित प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि आईपीआर विभाग ने असमिया भाषा में 13 समाचार पत्रों को सूचीबद्ध किया है, इसके बाद अंग्रेजी में नौ और बांग्ला व हिंदी में छह-छह समाचार पत्र सूचीबद्ध हैं।

हजारिका ने कहा कि सरकार के पास समाचार पत्रों के प्रबंधन द्वारा बताए गए सर्कुलेशन के आंकड़ों की पड़ताल करने का कोई तंत्र नहीं है, लेकिन इस पर विचार चल रहा है।

मंत्री ने सदन को बताया, 'पत्रों को प्रकाशित करने के लिए आवश्यक अखबारी कागज से जीएसटी एकत्र करने की कोई नीति नहीं है। हालांकि, सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है।'

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अमेरिका समेत 21 देशों ने इस अखबार के बंद का किया विरोध

हॉन्गकॉन्ग (Hong Kong) में एपल डेली को बलपूर्वक बंद कराए जाने और प्रशासन के अखबार के कर्मचारियों को गिरफ्तार करने के खिलाफ बीस से अधिक देशों ने चिंता जताई है।

Last Modified:
Monday, 12 July, 2021
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हॉन्गकॉन्ग (Hong Kong) में लागू हुए नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSL) की बड़ी कीमत वहां के एक अखबार ने चुकानी पड़ी है। दरअसल, यहां के लोकतंत्र समर्थक दैनिक अखबार ‘एपल डेली’ को चीन की दमनकारियों नीतियों से परेशान होकर अपना प्रकाशन बंद करना पड़ा। 24 जून को अखबार का आखिरी एडिशन छापा गया। अब अखबार को बलपूर्वक बंद कराए जाने और प्रशासन के अखबार के कर्मचारियों को गिरफ्तार करने के खिलाफ बीस से अधिक देशों ने चिंता जताई है।

मीडिया फ्रीडम कोएलेशन में शामिल ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, आइसलैंड, डेनमार्क, नीदरलैंड, न्यूजलैंड, इटली, जापान और ब्रिटेन समेत 21 देशों की सरकारों की ओर से जारी बयान में इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की गई है।

मीडिया फ्रीडम कोएलेशन में शामिल सदस्यों ने कहा कि पत्रकारिता को दबाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उपयोग एक गंभीर और नकारात्मक कदम है, जो हॉन्गकॉन्ग की उच्च स्तर की स्वायत्तता और हॉन्गकॉन्ग में लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता को कमजोर करता है, जैसा कि हॉन्गकॉन्ग के मूल कानून और चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा में प्रदान किया गया है।  

बयान में कहा गया है कि ‘एपल डेली’ के खिलाफ की गई कार्रवाई हॉन्गकॉन्ग में बढ़ी हुई मीडिया सेंसरशिप को दर्शाता है, जिसमें सार्वजनिक प्रसारक की स्वतंत्रता पर दबाव और पत्रकारों के खिलाफ हॉन्गकॉन्ग के अधिकारियों द्वारा हाल ही में कानूनी कार्रवाई शामिल है।

पिछले महीने ही एपल डेली ने अपने अंतिम संस्करण में बताया था कि उन पर दबाव डालकर उन्हें अखबार का प्रकाशन बंद करने के लिए विवश किया गया है। इस अखबार के संपादकों पर हॉन्गकॉन्ग के पिछले साल लागू नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। पिछले कुछ समय से हॉन्गकॉन्ग में चीनी शासन के दबाव में मीडिया पर सख्ती की जा रही है।

वहीं, कुछ दिन पहले ही चीन के विदेश मंत्रालय ने हॉन्गकॉन्ग के लोकतंत्र समर्थक एपल डेली अखबार को बंद करने पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बयान से नाराजगी जताते हुए कहा था कि अमेरिका को देश के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा था कि हॉन्गकॉन्ग चीन के आंतरिक मामलों के अंतर्गत आता है।

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इन अखबारों से हुआ सरकारी खजाने को नुकसान, BOC के अधिकारियों के खिलाफ CBI एक्शन

सीबीआई का आरोप है कि इन अखबारों को दिए गए विज्ञापनों से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का घाटा हुआ।

Last Modified:
Monday, 12 July, 2021
CBI

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित तौर पर गलत और जाली दस्तावेजों के आधार पर सरकारी विज्ञापनों के लिए अखबारों को सूचीबद्ध करने को लेकर ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (बीओसी) के अज्ञात अधिकारियों के साथ हरीश लांबा, आरती लांबा और अश्विनी कुमार के विरुद्ध मामला दर्ज किया है।

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद एजेंसी ने आरोप लगाया है कि बीओसी के अज्ञात अधिकारियों ने लांबा के साथ मिलकर ‘अर्जुन टाइम्स’, ‘हेल्थ ऑफ भारत’ और ‘दिल्ली हेल्थ’ के दो-दो संस्करणों (छह अखबार) को गलत और जाली दस्तावेज के आधार पर सूचीबद्ध किया। बीओसी को पहले विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) के नाम से जाना जाता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एजेंसी ने 30 अगस्त 2019 को की गई संयुक्त औचक जांच के आधार पर प्रारंभिक पड़ताल शुरू की थी। जांच में सामने आया था कि डीएवीपी के मानकों के अनुरूप नहीं होने के बावजूद इन अखबारों को सूचीबद्ध किया गया था और इसमें निदेशालय के अज्ञात अधिकारी शामिल थे।

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सरकारी विज्ञापन लेने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रमाण पत्रों समेत गलत दस्तावेज विभाग में सौंपे गए। सीबीआई का आरोप है कि इन अखबारों को दिए गए विज्ञापनों से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का घाटा हुआ।

एजेंसी ने कहा कि जिन अखबारों के पते दिए गए थे उन पर प्रकाशन का कोई काम नहीं होता था। जांच के दौरान एजेंसी ने पाया कि अर्जुन टाइम्स ने 2017 में जो कागजात सौंपे थे उसमें अश्विनी कुमार को प्रकाशक और हरीश लांबा को इस अखबार का मालिक बताया गया था।

सीबीआई का आरोप है कि यह अखबार फर्जी तरीके से डीएवीपी के साथ सूचीबद्ध हो गए और उन्हें 2016 से 2019 के बीच 62.24 लाख रुपए के विज्ञापन मिले।

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India Today ग्रुप ने सौरव मजूमदार को सौंपी इस पत्रिका की जिम्मेदारी

इंडिया टुडे ग्रुप ने अपनी इस पत्रिका के नए संपादक के तौर पर सौरव मजूमदार को नियुक्त किया है

Last Modified:
Thursday, 08 July, 2021
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इंडिया टुडे (India Today) ग्रुप  ने अपनी ‘बिजनेस टुडे’ पत्रिका के नए संपादक के तौर पर सौरव मजूमदार को नियुक्त किया है।

मजूमदार ने तीन दशकों के अपने लंबे करियर में देश के कुछ बड़े मीडिया हाउस के साथ काम किया है। उनके पास सभी प्लेटफॉर्म को लीड करने का अनुभव है।

शुरुआत में ही उन्हें ‘द फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ और ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ जैसे बड़े ब्रैंड्स के साथ काम करने का मौका मिला। अपनी सबसे हालिया भूमिका में वह फॉर्च्यून (Fortune) और फोर्ब्स (Forbes) के भारतीय संस्करणों के संपादक थे। इससे पहले मजूमदार एंत्रप्रेन्योर (Entrepreneur) के एडिटर-इन-चीफ थे।

आईटीजी (ITG) में अपनी नई भूमिका के बारे में उन्होंने कहा, ‘एक ऐसे संगठन से जुड़ना वास्तव में मेरे लिए खुशी की बात है, क्योंकि मुझे लगता है कि पत्रकारिता का स्वर्ण मानक है- इंडिया टुडे ग्रुप।’

उनकी नियुक्ति पर बोलते हुए इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन कली पुरी ने कहा, ‘कभी कभार ऐसा होता है कि व्यापार क्षेत्र बिना कुछ किए  बदलाव के दौर से गुजरता है। ऐसे घबराहट भरे माहौल में, वास्तविक पत्रकार और वास्तविक विचार ही दुनिया को नया रूप देते हैं। हम सबसे विश्वसनीय पत्रकारों, एक पुरानी विरासत और वास्तव में ओमनी प्लेटफॉर्म मल्टीमीडिया बिजनेस टुडे के अनुभव के साथ इस परिवर्तनकारी यात्रा के किनारे पर आकर खुश हैं।

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‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को भारत में चाहिए ऐसा पत्रकार, पर विवादों में आ गईं उसकी शर्तें

अपने जॉब कंटेंट को लेकर अमेरिका का मशहूर अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) विवादों में है।

Last Modified:
Saturday, 03 July, 2021
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अकसर ही यह देखने को मिला है कि पश्चिमी मीडिया भारत की छवि खराब करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता है, फिर चाहे वह कोविड हो, किसान आंदोलन हो, चीन के साथ सीमा विवाद हो या फिर भारत में होने वाले कोई दंगे हों। इस बार फिर ऐसा ही कुछ हुआ है, जिसकी सोशल मीडिया पर अवहेलना हो रही है।

दरअसल अपने जॉब कंटेंट को लेकर अमेरिका का मशहूर अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) विवादों में है। सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं के मुताबिक, न्यूयॉर्क टाइम्स भारत में ऐसे पत्रकार ढूंढ रहा है, जो दुष्प्रचार का एजेंडा चलाने में उसकी पूरी मदद कर सके और इसके लिए उसने आवेदन आमंत्रित किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अखबार ने 1 जुलाई 2021 को लिंक्डइन पर जॉब पोस्ट की। ये जॉब दिल्ली में साउथ एशिया बिजनेस संवाददाता के लिए है। इस पोस्ट में हायरिंग की शर्तें बेहद आपत्तिजनक हैं, जिसे देखकर ऐसा लगता है जैसे बिना हिंदू विरोधी हुए या फिर एंटी मोदी हुए वहां जॉब पाना बेहद मुश्किल है। 

आवेदन में लिखा है कि अभ्यर्थी ऐसा हो जो भारत सरकार के विरुद्ध लिख सके और सत्ता बदली की उनकी कोशिशों में अपना योगदान दे सके। पत्रकारों के लिए दिए गए आवेदन में 'एंटी मोदी' के साथ-साथ 'एंटी इंडिया' और 'हिंदू विरोधी' सोच उजागर की गई है।

इस पोस्ट में यह भी लिखा गया है कि वैसे तो भारत जनसंख्या के मामले में चीन को टक्कर दे रहा है, लेकिन फिर भी विश्व मंच पर बड़ी आवाज बनने की महत्वाकांक्षा रखे हुए है।

इसमें आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चीन के खिलाफ कार्रवाई को भारत का एक ड्रामा कहा गया है जो उनके मुताबिक सीमा और राष्ट्रीय राजधानियों के भीतर चल रहा है।

विवादित जॉब पोस्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के पीएम मोदी देश के हिंदू बहुमत पर केंद्रित होकर आत्मनिर्भर भारत और मजबूत राष्ट्रवाद की वकालत करते हैं। इस लाइन को लेकर भी अब सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या न्यूयॉर्क टाइम्स को ये दिक्कत है कि भारत आत्मनिर्भर हो रहा है या ये समस्या है कि पीएम भारत को आत्मनिर्भर बनाने में प्रयासरत हैं और वो चीन से घटते व्यापार से तिलमिलाया हुआ है।

दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि पिछले 4 सालों में न्यूयॉर्क टाइम्स को चीन की ओर से 50 हजार डॉलर के विज्ञापन मिले हैं। इसीलिए चीन और उसके हमदर्द न्यूयॉर्क टाइम्स को भारत से इतना दर्द है।   

मालूम हो कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की उपलब्धि को न्यूयॉर्क टाइम्स हमेशा खारिज करता रहा है। भारत के महत्वाकांक्षी स्पेस कार्यक्रम के बाद NYT ने एक नस्लवादी कार्टून छाप दिया था और बाद में इसके लिए माफी भी मांगी थी।

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200 साल का हुआ यह समाचार पत्र, मुंबई से है खास जुड़ाव

देश का सबसे पुराना समाचार पत्र ‘मुंबई समाचार’ (Mumbai Samachar) ने अपनी स्थापना के 200वें साल में प्रवेश कर लिया है

Last Modified:
Thursday, 01 July, 2021
Newspaper

देश का सबसे पुराना समाचार पत्र ‘मुंबई समाचार’ (Mumbai Samachar) ने अपनी स्थापना के 200वें साल में प्रवेश कर लिया है। दक्षिण मुंबई में ‘फोर्ट’ परिसर के बीचों-बीच स्थित ‘रेड हाउस’ नामक एक गहरे लाल रंग की इमारत में इस अखबार का दफ्तर है। इस अखबार को 1822 में पारसी विद्वान फर्दुनजी मर्जबान (Fardoonji Murazban) ने शुरू किया था। बताया जाता है कि यह देश का सबसे पुराना लगातार प्रकाशित होने वाला अखबार है।

इसे ‘बॉम्बे समाचार’ के नाम से एक साप्ताहिक पत्र के रूप में शुरू किया गया था। उस समय इसे पाठकों को मुख्य रूप से जहाजों की आवाजाही और वस्तुओं के बारे में सूचित करने के लिए शुरू किया गया था और धीरे-धीरे यह ऐसे समाचार पत्र के रूप में विकसित हो गया, जिसमें व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। शुरुआत के 10 वर्ष तक एक साप्ताहिक समाचार पत्र रहा, इसके बाद इसे द्वि-साप्ताहिक और 1855 से दैनिक कर दिया गया। तमाम हाथों से होते हुए 1933 में इस अखबार का संचालन कामा फैमिली के हाथों में आया। समाचार पत्र के निदेशक होर्मसजी कामा (Hormusji Cama) का कहना है कि अखबार ने 20 साल पहले एक शोध किया और पाया कि यह भारत का सबसे पुराना प्रकाशन है और दुनिया का चौथा सबसे पुराना प्रकाशन है, जो अब भी काम कर रहा है। उन्होंने कहा, 'जब तक आपकी विषय वस्तु की मांग है, तब तक आप टिके रहेंगे।' उन्होंने कहा, ‘एक समाचार पत्र के तौर पर हम 200 वर्षों से जीवित हैं। यह गर्व की बात है। आप जानते हैं कि हममें से कोई भी, यहां तक ​​कि प्रिंट मीडिया भी नहीं बचेगा। लेकिन उम्मीद है कि मुंबई समाचार अपने 300 साल भी पूरे करेगा।’   

गैर-लाभकारी निजी समाचार सहकारी संगठन ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (पीटीआई) के निदेशक मंडल के सदस्य कामा ने बताया कि कई कारणों से अखबार ने अपने कवर की कीमत बढ़ाकर 10 रुपए प्रति कॉपी कर दी और यह सिर्फ सबसे पुराना ही नहीं, बल्कि कोरोना वायरस महामारी के बीच सबसे महंगे अखबारों में से भी एक है।

उन्होंने कहा कि महामारी से पहले इसकी बिक्री 1.5 लाख थी, जिसमें भले ही गिरावट आई है, लेकिन इसके पाठकों की बदौलत यह उन कुछ समाचार पत्रों में शामिल है, जिन्होंने वित्त वर्ष 2020-21 में लाभ अर्जित किया।

कामा ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव को सीमित करने के लिए मुंबई समाचार ने अपने कवर की कीमत में दो रुपए की वृद्धि की, पृष्ठों की संख्या कम कर दी और वरिष्ठ प्रबंधन के वेतन में कटौती की। उन्होंने बताया कि समाचार पत्र के 150 कर्मियों में से किसी एक को भी वैश्विक महामारी के दौरान नौकरी से निकाला नहीं गया।

वर्तमान में, मुंबई के अलावा चार अन्य केंद्रों में भी अखबार का एक दैनिक संस्करण निकालते हैं। मुंबई समाचार एक पंचांग (ज्योतिषीय पंचांग) भी प्रकाशित करता है।

इस बारे में अखबार के एडिटर नीलेश दवे (Nilesh Dave) का कहना है कि मुंबई समाचार का हिस्सा बनना उनके जीवन का सपना रहा है। वर्ष 2003 में इस अखबार को जॉइन करने वाले दवे का कहना है, ‘महामारी के दौरान प्रिंट इंडस्ट्री को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। लोगों का भरोसा आज भी अखबारों पर कायम है, क्योंकि प्रिंट ही ऐसा माध्यम है, जहां पर आप फेक न्यूज नहीं फैला सकते हैं।’

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26 साल पुराना अखबार हुआ बंद, लोगों ने यूं दी विदाई

गुरुवार को इस अखबार का प्रकाशन बंद कर दिया गया, तो वहीं इसके एक संपादकीय लेखक को रविवार की रात हवाईअड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया

Last Modified:
Monday, 28 June, 2021
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हॉन्गकॉन्ग का 26 साल पुराना लोकतंत्र समर्थक अखबार एप्पल डेली (Apple Daily) बंद हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को उसका आखिरी संस्करण प्रकाशित हुआ। स्टाफ का उत्साह बढ़ाने के लिए लोग बारिश के बीच रात से ही अखबार के दफ्तर के बाहर पहुंचने लगे थे। देखते ही देखते सुबह 8 बजे तक अखबार की 10 लाख प्रतियां बिक गईं।

एप्पल डेली के लास्ट एडिशन में फ्रंट पेज पर एक स्टाफ के समर्थकों की तरफ हाथ हिलाते हुए फोटो थी, जिसमें इसकी हेडलाइन थी- ‘हॉन्गकॉन्ग निवासियों ने बारिश में दर्द भरा अलविदा कहा।’ वहीं, अखबार को देशभर के लोगों ने भावनात्मक विदाई दी।

बता दें कि ये अखबार हर दिन 80 हजार प्रतियां प्रकाशित करता था। ग्लोबल टाइम्स से अखबार के ग्राफिक्स डिजाइनर डिक्शन एनजी ने कहा- ‘आज हमारा अंतिम दिन और ये आखिरी संस्करण है. इसके खत्म होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि हॉन्गकॉन्ग में प्रेस की स्वतंत्रता खत्म हो रही है।’

गुरुवार को इस अखबार का प्रकाशन बंद कर दिया गया, तो वहीं इसके एक संपादकीय लेखक को रविवार की रात हवाईअड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह शहर से जाने का प्रयास कर रहे थे।

स्थानीय समाचार-पत्र ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ और ऑनलाइन समाचार संगठन ‘सिटिजन न्यूज’ ने अज्ञात सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि संपादकीय लेखक फंग वाई कोंग को राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए विदेशी साठगांठ करने के संदेह पर गिरफ्तार किया गया।

स्थानीय मीडिया में आई खबरों के अनुसार फंग को जब गिरफ्तार किया गया उस वक्त वह संभवत: ब्रिटेन के लिए रवाना हो रहे थे। पुलिस ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत रविवार रात हवाईअड्डे पर 57 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था लेकिन उसकी पहचान नहीं बताई।

फंग दो हफ्तों के भीतर गिरफ्तार किए गए एप्पल डेली के सातवें कार्यकारी है। हॉन्गकॉन्ग के अधिकारी अर्ध स्वायत्त शहर में असहमति की आवाजों को दबा रहे हैं, शहर की अधिकतर प्रख्यात लोकतंत्र समर्थक हस्तियों को गिरफ्तार कर रहे हैं और विधायिका से विपक्षी आवाजों को बाहर रखने के लिए हॉन्गकॉन्ग के चुनाव कानूनों में सुधार कर रहे हैं।

वहीं, इस अखबार के बंद होने पर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) ने इसे हॉन्गकॉन्ग और दुनियाभर में मीडिया की आजादी के लिए एक दुखद दिन करार दिया। व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्र भाषण को दंडित करने वाले कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के माध्यम से गिरफ्तारी, धमकियों और जबरदस्ती करके बीजिंग ने स्वतंत्र मीडिया को दबाने व असहमतिपूर्ण विचारों को चुप कराने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग किया है।

राष्ट्रपति बाइडन ने कहा, ‘स्वतंत्र मीडिया लचीला और समृद्ध समाजों में एक अहम भूमिका निभाता है. पत्रकार सच बोलने वाले होते हैं जो नेताओं को जवाबदेह ठहराते हैं और सूचनाओं को स्वतंत्र रूप से मुहैया कराते रहते हैं. अब इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक हॉन्गकॉन्ग में और दुनिया भर में उन जगहों पर है जहां लोकतंत्र खतरे में है।’

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन से स्वतंत्र प्रेस को निशाना बनाना बंद करने और हिरासत में लिए गए पत्रकारों व मीडिया अधिकारियों को रिहा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का काम अपराध नहीं है। बाइडन ने कहा, ‘हॉन्गकॉन्ग में लोगों को प्रेस की स्वतंत्रता का अधिकार है। इसके बजाय, बीजिंग बुनियादी स्वतंत्रता से इनकार कर रहा है और हॉन्गकॉन्ग की स्वायत्तता व लोकतांत्रिक संस्थानों और प्रक्रियाओं पर हमला कर रहा है, जो इसके अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के साथ असंगत है।’ 

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