हिंदी अखबारों में आज फ्रंट पेज पर इन खबरों को मिली प्राथमिकता

विज्ञापनों की अधिकता के कारण दैनिक जागरण में बनाए गए हैं दो फ्रंट पेज, हिन्दुस्तान और अमर उजाला में जैकेट विज्ञापन के कारण तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Saturday, 17 August, 2019
Last Modified:
Saturday, 17 August, 2019
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कश्मीर पर पाकिस्तान, चीन के कंधे पर सवार होकर भारत को घेरना चाहता है, लेकिन उसकी यह कोशिश परवान नहीं चढ़ रही है। वहीं, परमाणु हमले को लेकर रक्षामंत्री के बयान के भी बड़े मतलब निकाले जा रहे हैं। यही दो खबरें आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले लगभग सभी प्रमुख अखबारों की सुर्खियां हैं।

शुरुआत सबसे पहले नवोदय टाइम्स से करते हैं। अखबार ने कश्मीर पर सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान की हार को लीड रखा है और कश्मीर में सुधरते हालातों को भी लीड जैसा दर्जा दिया है। इन दो खबरों के लिए पूरे आठ कॉलम समर्पित किये गए हैं। राजनाथ सिंह के बयान को अलग से तीन कॉलम जगह मिली है और मेजर जनरल को महज सिंगल कॉलम में समेट दिया गया है। अगर राजनाथ को लीड का हिस्सा बनाकर मेजर जनरल की बर्खास्तगी को प्राथमिकता दी जाती तो पेज पर एक अतिरिक्त समाचार लग सकता था। ‘बिना कागजात के उड़ा विमान, लौटा’ इस खबर को डीप दो कॉलम में रखा गया है जो कि अच्छा फैसला है। यह खबर ज्यादा पढ़ी जाएगी। इसके अलावा पेज पर अमित शाह, बजरंग पूनिया और इमरान की ट्रम्प से बातचीत भी है। नवोदय टाइम्स के फ्रंट पेज के एंकर में आज मिसाल पेश करने वाली स्टोरी है, जिसे निश्चित रूप से न केवल पढ़ा जाएगा बल्कि यह दूसरों को भी कुछ अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इंदौर जिले के एक गांव में लोगों ने पैसे इकठ्ठा करके शहीद जवान के परिवार के लिए पक्का घर बनवाया है।

आज नवभारत टाइम्स ने परमाणु हथियारों पर राजनाथ के बयान को लीड लगाते हुए सुरक्षा परिषद् में कश्मीर पर पाक की पिटाई को उसका हिस्सा बनाया है। नवभारत ने हादसे की स्थानीय खबर को प्राथमिकता देते हुए ऊपर तीन कॉलम में जगह दी है, जिसमें बताया गया है कि मांझे से गला कटने के चलते एक स्कूटर सवार की मौत हो गई है। इसके नीचे तीन सिंगल हैं, जिनमें रवि शास्त्री, बजरंग पूनिया के साथ ही प्रॉपर्टी डी-सील करने से जुड़ा समाचार है। यौन उत्पीड़न के दोषी मेजर जनरल की खबर को भी अखबार ने प्रमुखता से लगाया है।      

दैनिक जागरण की बात करें तो अखबार में आज भी काफी विज्ञापन है, इसलिए दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं। पहले पेज पर परमाणु हथियारों पर रक्षामंत्री का बयान लीड है और इसके पास ही दो कॉलम में कश्मीर में सामान्य होते हालात हैं। जबकि दूसरे पेज पर कश्मीर पर पाकिस्तान को पटखनी को लीड लगाया गया है। हरियाणा के जींद में गृहमंत्री अमित शाह की रैली को ऊपर चार कॉलम जगह मिली है। इसके नीचे अनुच्छेद 370 पर दोषपूर्ण याचिकाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी है। इसके अलावा पेज पर चार धाम यात्रा की अड़चन दूर होने का समाचार है। दो फ्रंट पेज होने के बावजूद जागरण ने मेजर जनरल की बर्खास्तगी की खबर को नहीं लगाया है।

वहीं, हिन्दुस्तान में जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। ‘कश्मीर पर पाक सुरक्षा परिषद् में पिटा’ शीर्षक के साथ चार कॉलम में लीड है, और इसके पास तीन कॉलम में राजनाथ सिंह का परमाणु हथियारों को लेकर दिया गया बयान है। इसके नीचे अमित शाह को रखा गया है, जो हरियाणा में दो तिहाई सीटें जीतने का भरोसा जता रहे हैं। अयोध्या सुनवाई को आज भी प्रमुखता मिली है। आम आदमी से जुड़ी खबर ‘केबल सेवाएं सस्ती करने की तैयारी’ भी हिन्दुस्तान के फ्रंट पेज पर है। रवि शास्त्री और बजरंग पूनिया को सिंगल कॉलम में रखा गया है, शास्त्री जहां टीम इंडिया के कोच बने रहेंगे, वहीं पूनिया को खेल रत्न से नवाजा जाएगा। सबसे नीचे डीसीपी की खुदकुशी का फॉलोअप और यौन उत्पीड़न में सेना के मेजर जनरल की बर्खास्तगी का समाचार है।

आज अमर उजाला का फ्रंट पेज देखें तो जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड कश्मीर पर पाकिस्तान को झटका है और इसी में परमाणु हथियारों पर राजनाथ के बयान को रखा गया है। इसके पास डेढ़ कॉलम में यौन शोषण के आरोपी मेजर जनरल की बर्खास्तगी है। स्थानीय हादसे के समाचार को भी प्रमुखता दी गई है। जिसका शीर्षक है ‘राखी बंधवाने जा रहे युवक का चीनी मांझे से कटा गला, मौत’। एंकर में अयोध्या मामले की सुनवाई है। रामलला विराजमान की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई है कि सड़क पर नमाज पढ़ने से उसे मस्जिद नहीं मान लिया जाता। ‘न्यूज डायरी’ में रवि शास्त्री, अमित शाह सहित पांच महत्वपूर्ण समाचार हैं।      

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यौन उत्पीड़न के आरोप में घिरे इंडियन एक्सप्रेस के फोटो एडिटर ने उठाया ये कदम

एक महिला ने चंद रोज पहले फोटो जर्नलिस्ट के साथ बातचीत के स्क्रीनशॉट सार्वजनिक करते हुए उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
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यौन उत्पीड़न का आरोप झेल रहे ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के नेशनल फोटो एडिटर नीरज प्रियदर्शी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, प्रियदर्शी ने यह साफ नहीं किया है कि इस्तीफे का इस आरोप से कुछ लेना देना है या नहीं। गौरतलब है कि एक महिला ने चंद रोज पहले नीरज प्रियदर्शी के साथ बातचीत के स्क्रीनशॉट सार्वजनिक करते हुए उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। स्क्रीनशॉट में, नीरज उक्त महिला को ‘फ्रेडा बेबी’  के नाम से संबोधित करते हैं, जिसके जवाब में वह कहती है, ‘ओह मुझे इस नाम से मत बुलाओ।’

एक दूसरे स्क्रीनशॉट में यह बात सामने आई कि नीरज फोटोशूट के लिए पीड़िता पर दबाव डाल रहे थे, जिस पर उसने असहज होने की बात कही थी। आरोप लगाने वाली महिला ने प्रियदर्शी को चेतावनी भी दी थी कि यदि वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आये तो वह सबको इस बारे में बता देगी।

इस संबंध में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की लीगल डायरेक्टर वैदेही ठाकर का कहना है, ‘यौन शोषण के प्रति इंडियन एक्सप्रेस समूह में जीरो टॉलरेंस नीति है। हमें अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है, हालांकि हमने नेशनल फोटो एडिटर नीरज प्रियदर्शी पर लगे आरोपों का सज्ञान लिया है। मामले की जांच को देखते हुए प्रियदर्शी ने इस्तीफा दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।’

वहीं, आरोप लगाने वाली महिला का कहना है कि उन्होंने नीरज के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का फैसला कर लिया है। पीड़िता ने इंस्टाग्राम पर बताया है कि मामले को उजागर करने के बाद  ‘इंडियन एक्सप्रेस’ सहित कई राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के पत्रकारों ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन वह फिलहाल इस बारे में ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहतीं।

महिला ने अपना साथ देने के लिए सभी को धन्यवाद देते हुए उम्मीद जताई है कि और भी महिलाएं अब यौन उत्पीड़न के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगी। आरोपों को लेकर नीरज प्रियदर्शी की सफाई अब तक मीडिया में नहीं आई है। 

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जानें, आंकड़ों को लेकर आज भी कैसे अखबारों में दिखा विरोधाभास

हिन्दुस्तान में जैकेट विज्ञापन के कारण तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। दैनिक जागरण में भी तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। नवभारत टाइम्स में आज फ्रंट पेज पर एक बड़ा विज्ञापन है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
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दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों में आज भी नागरिकता संशोधन बिल को सबसे बड़ी खबर का दर्जा दिया गया है। शुरुआत हिन्दुस्तान से करते हैं। जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड बिल पर बवाल है, जिसे असम हिंसा दर्शाती फोटो के साथ लगाया गया है। अयोध्या विवाद पर दायर पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने को दो कॉलम जगह मिली है। हालांकि ‘संख्याओं’ को लेकर आज भी अखबारों में गफलत का माहौल है। ‘हिन्दुस्तान’ पुनर्विचार याचिकाओं की संख्या 18 बता रहा है, जबकि कई अखबारों में यह 19 है।

दिल्ली-एनसीआर में मौसम के बदले मिजाज के साथ ही महंगाई की बढ़ती रफ्तार भी पेज पर है। खुदरा महंगाई तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, निर्भया के दोषी अक्षय की याचिका पर कोर्ट 17 दिसंबर को सुनवाई करेगा। एंकर में नए देश के जन्म को जगह मिली है। जल्द ही बोगेनविल दुनिया का 196वां राष्ट्र होगा। इसके अलावा पेज पर सुनील पाण्डेय की बाईलाइन स्टोरी भी है, जो बता रहे हैं कि जेवर एयरपोर्ट को आईजीआई से जोड़ने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की जाएगी।

आज राजस्थान पत्रिका के फ्रंट पेज पर नजर डालें तो केवल लीड की प्रस्तुति ही अलग नजर आ रही है, बाकी पूरा पेज काफी हद तक पिछले दिनों जैसा है। खासकर सेकंड-हाफ में कुछ खास करने का प्रयास ही नहीं किया गया है। लीड बिल पर बवाल है और दूसरी बड़ी खबर के रूप में हैदराबाद एनकाउंटर की न्यायिक जांच के आदेश हैं।

अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करने के शीर्ष अदालत के फैसले को अखबार ने प्रमुखता से लगाया है। ‘राजस्थान पत्रिका’ याचिकाओं की संख्या के मामले में ‘हिन्दुस्तान’ के साथ है। यहां भी 18 याचिकाएं खारिज होने की बात कही गई है। रेप पीड़िता को धमकी सहित राजस्थान और महाराष्ट्र से जुड़ी कुछ अन्य खबरों को भी प्रमुखता के साथ पेज पर रखा गया है। एंकर में संदीप पाटिल की बाईलाइन स्टोरी है, जिन्होंने सूरत के व्यापारी की सराहनीय पहल पर प्रकाश डाला है। अश्विन सभाया ने 350 बाल मजदूरों की आजीवन पढ़ाई के खर्च का जिम्मा उठाया है।

अब दैनिक भास्कर की बात करें तो फ्रंट की शुरुआत मुकेश कौशिक और पवन कुमार की बाईलाइन से हुई है। वैसे, पिछले कुछ दिनों में फ्रंट पेज के फर्स्ट हाफ में खास बदलाव देखने को नहीं मिले हैं। कभी सात कॉलम बॉक्स लगा दिया जाता है और कभी उस जगह को थोड़ा बड़ा करके लीड सजा दी जाती है। फिलहाल, मुकेश और पवन ने निर्भया के दोषियों की फांसी को लेकर तिहाड़ की तैयारियों के बारे में पाठकों को बताया है।

लीड नागरिकता बिल पर बवाल है। अयोध्या पर पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने और हैदराबाद एनकाउंटर की न्यायिक जांच के आदेश को भी प्रमुखता के साथ लगाया गया है। सबसे नीचे खानपान को लेकर लंदन यूनिवर्सिटी के अध्ययन को जगह मिली है। इसमें बताया गया है कि क्या खाने पर कितना वर्कआउट करना चाहिए।

वहीं, दैनिक जागरण में फुल पेज विज्ञापन की वजह से आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। अखबार ने नागरिकता संशोधन पर असम में हुई हिंसा को दूसरी बड़ी खबर का दर्जा देते हुए लीड माला दीक्षित की स्टोरी को लगाया है। जिन्होंने अयोध्या पर दाखिल सभी पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने के बारे में बताया है। यहां भी पुनर्विचार याचिकाओं की संख्या 19 बताई गई है।

इसके अलावा, गौतम कुमार की बाईलाइन स्टोरी भी पेज पर है, जिसमें उन्होंने फांसी के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन की तैयारियों पर प्रकाश डाला है। हैदराबाद एनकाउंटर की न्यायिक जांच का आदेश तीन कॉलम में है, साथ ही पेज पर कुछ संक्षिप्त खबरें हैं।

सबसे आखिर में आज नवभारत टाइम्स का रुख करते हैं। अखबार के फ्रंट पेज की शुरुआत टॉप बॉक्स से हुई है। इसमें अयोध्या पर पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने का समाचार है। अखबार ने याचिकाओं की संख्या 19 बताई है। लीड बिल पर बवाल है, जिसे विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा गया है। वहीं, श्यामवीर की बाईलाइन स्टोरी को तवज्जो मिली है। इस स्टोरी के अनुसार, नोएडा में एक युवती के लिए पुलिस देवदूत बनकर आई।

इसके अलावा पेज पर शादाब रिजवी की बाईलाइन भी है। स्टोरी में बताया गया है कि किस तरह रेप की शिकार युवती को गवाही से रोकने के लिए धमकियां दी जा रही हैं। निर्भया के दोषी की याचिका पर 17 को होने वाली सुनवाई सिंगल कॉलम में है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट की बात करें तो ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘हिन्दुस्तान’ ने सीमित जगह में काफी अच्छा फ्रंट पेज तैयार किया है।

2: खबरों की प्रस्तुति में ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर सभी अखबार लगभग एक जैसे हैं। इसलिए किसी एक के सिर पर ताज सजाना मुश्किल है। 

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में सभी अखबारों के हाथ खाली दिखाई दे रहे हैं। हालांकि ‘नवभारत टाइम्स’ ने लीड के शीर्षक में प्रयोग किया है, लेकिन आम पाठक के लिए उसे समझना थोड़ा मुश्किल है।

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राष्ट्रीय सहारा: अब ये वरिष्ठ पत्रकार बने रीजनल हेड

‘सहारा इंडिया मीडिया’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय की ओर से इस बारे में जारी किया गया है एक पत्र

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 12 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 December, 2019
Rashtriya Sahara

‘सहारा इंडिया मीडिया’ (Sahara India Media) से एक बड़ी खबर सामने आई है। खबर है कि प्रबंधन ने 'राष्ट्रीय सहारा', कानपुर के यूनिट हेड देवकी नंदन मिश्रा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अब उन्हें लखनऊ और कानपुर की यूनिटों (हिंदी और उर्दू) का रीजनल हेड बनाया गया है। देवकी नंदन मिश्रा लंबे समय से सहारा समूह के साथ जुड़े हुए हैं और अब तक विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं।

इस बारे में ‘सहारा इंडिया मीडिया’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय की ओर से एक पत्र भी जारी किया गया है। इस पत्र में कहा गया है कि नए आदेश के तहत तत्काल प्रभाव से अब 'राष्ट्रीय सहारा' की इन दोनों यूनिटों के हेड के साथ ही रेजिडेंट एडिटर्स और प्रशासनिक हेड अपने रोजाना के कार्यों की रिपोर्ट देवकी नंदन मिश्रा को देंगे।

उपेंद्र राय की ओर से इस बारे में जारी किए गए आदेश की कॉपी आप यहां देख सकते हैं।  

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राज्यसभा में विपक्षी वोटों को लेकर अखबारों में 'कंफ्यूजन', हिन्दुस्तान ने मारी बाजी

दैनिक जागरण में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं, वहीं नवभारत टाइम्स में जैकेट विज्ञापन की वजह से तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Thursday, 12 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 December, 2019
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नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा में भी पास हो गया है। हालांकि, इस पर बवाल जारी है और इसके जल्द थमने की कोई संभावना नहीं है। आज के अखबारों में यही सबसे बड़ी खबर है। शुरुआत आज दैनिक भास्कर से करते हैं। अखबार ने बिल पर बवाल को पूरे सात कॉलम में जगह दी है। इस अखबार की खबर के ‘प्लस पॉइंट’ हैं गुवाहाटी से रविशंकर रवि की ग्राउंड रिपोर्ट और बिल के विरोध में आईजी अब्दुर रहमान के इस्तीफे की जानकारी।

मोदी को मिली क्लीन चिट प्रमुखता के साथ पेज पर है, जबकि दिल्ली के अग्निकांड में जान गंवाने वालों के अंतिम संस्कार की फोटो को मार्मिक हेडलाइन के साथ रखा गया है। एंकर में पवन कुमार की बाईलाइन स्टोरी है, जिसमें उन्होंने फांसी से पहले निर्भया के दोषियों के तनाव और जेल की तैयारियों के बारे में बताया है। इसके अलावा पेज पर चार सिंगल समाचार भी हैं। मसलन, हैदराबाद एनकाउंटर की पूर्व जज से जांच संभव, भारतीय चौकियों पर पाक की गोलाबारी, अयोध्या विवाद पर दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई आज और अब दुष्कर्म केस में 21 दिन में सुनवाई और फैसला।

आज दैनिक जागरण में दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं। पहले फ्रंट पेज पर नागरिकता संशोधन बिल के राज्यसभा में पास होने संबंधी समाचार है और दूसरे फ्रंट पेज पर इससे जुड़े बवाल को टॉप बॉक्स में रखा गया है। इस पेज पर लीड गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी को मिली क्लीन चिट है। वहीं, उन्नाव कांड में पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट को काफी जगह मिली है। एंकर स्टोरी में आज संसदीय समिति के सुझाव को रखा गया है। समिति का कहना है कि दिल्लीवासियों को जाम से निजात दिलाने के लिए लुटियन जोन में वीवीआईपी के लिए अलग लेन बनाई जाये।

हिन्दुस्तान की बात करें तो फ्रंट पेज पर आज दो बड़े विज्ञापन हैं। लीड नागरिकता बिल पर बवाल है। अखबार के मुताबिक, बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े और विपक्ष में 99, जबकि बाकी अखबार विपक्ष के वोटों की संख्या 105 बता रहे हैं। बताया गया है कि पहले राज्यसभा में 125 और 105 का नंबर ही घोषित हुआ था, पर कुछ समय बाद संशोधन के तहत विपक्षी वोटों की संख्या 99 कंफर्म की गई। तो ऐसे में दूसरे अखबारों की तुलना में हिन्दुस्तान पाठकों के समक्ष सही संख्या रखने में सफल हुआ।

लीड के पास ही दो कॉलम में मोदी को मिली क्लीन चिट है। अयोध्या पर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई और दिल्ली में बारिश की संभावना को भी प्रमुखता के साथ जगह दी गई है। इसके अलावा, पेज पर तीन सिंगल खबरें हैं। हैदराबाद एनकाउंटर की जांच पूर्व जज से संभव, हाफिज सईद पर पाक में आरोप तय और न्यूजर्सी में गोलीबारी।

वहीं, नवभारत टाइम्स में जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड नागरिकता बिल पर बवाल है। ऊपर सुलगते असम की फोटो के साथ खबर के बीच में नवजात को गोद में लिए एक महिला की फोटो है। इस फोटो के ऊपर लिखा है दिल्ली में ‘नागरिकता’ का जन्म। इस फोटो का सीधे तौर पर खबर से क्या मतलब है, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है, क्योंकि कैप्शन नदारद है। कम से कम ई-पेपर में तो कैप्शन दिखाई नहीं दे रहा है।

केजरीवाल सरकार की तीर्थयात्रा योजना पर रेलवे ने ब्रेक लगा दिया है, इस खबर को प्रमुखता के साथ तीन कॉलम में रखा गया है। टी-20 सीरीज में वेस्टइंडीज पर टीम इंडिया की जीत बतौर फोटो पेज पर है। अखबार ने मोदी को मिली क्लीन चिट को ज्यादा तवज्जो न देते हुए महज सिंगल में लगाया है, इसके अलावा पेज पर छह सिंगल समाचार हैं। 

सबसे आखिरी में आज रुख करते हैं राजस्थान पत्रिका का। अखबार का फ्रंट पेज देखने में अच्छा लग रहा है, लेकिन लेआउट, खासकर फर्स्ट हाफ में ज्यादा बदलाव करने का प्रयास आज भी नहीं किया गया है। लीड बिल पर बवाल है, जिसकी हेडिंग ‘संशोधन के शाह फिर पास’ गृहमंत्री अमित शाह की काबिलियत को बखूबी बयां करती है। वहीं, गोधरा कांड में नरेंद्र मोदी को मिली क्लीन चिट दूसरी प्रमुख खबर के रूप में पेज पर है। जांच करने वाले नानावटी आयोग का कहना है कि मोदी सिर्फ घटनास्थल का मुआयना करने गए थे।

बिहार के चंपारण में नाबालिग को केरोसिन छिड़ककर आग के हवाले कर दिया, इससे जुड़ी खबर के साथ ही हैदराबाद एनकाउंटर की जांच को तीन कॉलम जगह मिली है। सामाजिक कार्यकर्ता मेघा पाटकर का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है, इसकी वजह उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले हैं। यह समाचार भी फ्रंट पेज पर है। इसके अलावा, नेशनल कांफ्रेंस की खबर को अखबार ने सिंगल कॉलम में रखा है। खबर के अनुसार, पार्टी ने अनुच्छेद 370 की बहाली तक किसी भी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा न लेने का फैसला लिया है। एंकर में दुनिया के पहले इलेक्ट्रिक कमर्शियल विमान को सजाया गया है। बिजली से चलने वाले इस विमान ने कनाडा से उड़ान भरी।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में आज ‘दैनिक भास्कर’ सबसे बेहतर है। बाकी अखबारों की तुलना में ‘दैनिक भास्कर’ का फ्रंट पेज काफी खुला-खुला नजर आ रहा है। ‘राजस्थान पत्रिका’ को लेआउट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। एंकर के साथ सिंगल और दो कॉलम खबर लगभग हर दूसरे दिन देखने को मिल जाती है। 

2: खबरों की प्रस्तुति में भी पलड़ा ‘दैनिक भास्कर’ का भारी है। हालांकि, ‘राजस्थान पत्रिका’ ने भी बिल पर बवाल और मोदी को मिली क्लीन चिट को काफी बेहतर ढंग से पाठकों के समक्ष रखा है। 

3: कलात्मक शीर्षक की बात करें तो ‘हिन्दुस्तान’ और ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर बाकी सभी अखबारों ने लीड की हेडलाइन में प्रयोग किया है, लेकिन बाजी ‘राजस्थान पत्रिका’ के नाम रही है।

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दैनिक जागरण को बाय बोल पत्रकार आशुतोष यादव ने तलाशी नई मंजिल

मूल रूप से उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ के रहने वाले आशुतोष यादव दैनिक जागरण, गाजियाबाद में लंबे समय से निभा रहे थे जिम्मेदारी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 12 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 December, 2019
Ashutosh Yadav

पत्रकार आशुतोष यादव ने ‘दैनिक जागरण’ में अपनी करीब नौ साल लंबी पारी को विराम दे दिया है। वह पिछले काफी समय से गाजियाबाद में बतौर रिपोर्टर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने हेल्थ, एडमिनिस्ट्रेशन और क्राइम समेत तमाम बीट पर अपनी जिम्मेदारी निभाई। इन दिनों वह गाजियाबाद में सीबीआई कोर्ट भी देख रहे थे। अब उन्होंने यहां से बाय बोलकर बतौर रिपोर्टर अपनी नई पारी ’अमर उजाला’, गाजियाबाद के साथ शुरू की है।

उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ के मूल निवासी आशुतोष यादव ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत ‘दैनिक जागरण’ से की थी। उन्होंने फैजाबाद स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। इसी यूनिवर्सिटी से उन्होंने बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन और योग की पढ़ाई भी की है। इसके अलावा उन्होंने इलाहाबाद की राजर्षि टंडन यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री भी ली है। 

दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2013 में उनका ट्रांसफर हरियाणा के नारनौल में हुआ था। इस दौरान उन्होंने भिवानी के प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र से प्राकृतिक चिकित्सक एवं योग प्रशिक्षक की तीन वर्षीय डिग्री भी हासिल की है।

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वरिष्ठ संपादक कमल नयन पाण्डेय को मिलेगा ये प्रतिष्ठित पुरस्कार

भोपाल के गांधी भवन में नौ फरवरी को होने वाले एक कार्यक्रम में किया जाएगा सम्मानित

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 11 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
Kamal Nayan Pandey

त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘युगतेवर’ (सुल्तानपुर,उत्तर प्रदेश) के संपादक कमल नयन पाण्डेय को इस वर्ष का पंडित बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान दिया जाएगा। भोपाल के गांधी भवन में नौ फरवरी को होने वाले एक कार्यक्रम में उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।  

कमल नयन पांडेय पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य व लेखन में भी सक्रिय हैं। वे करीब 38 वर्षों से ‘युगतेवर’ का संपादन कर रहे हैं। पूर्व में इस पत्रिका को ‘तेवर’ नाम से प्रकाशित किया जाता था, लेकिन वर्ष 2006 में इसका नाम बदलकर ‘युगतेवर’ कर दिया गया।

त्रैमासिक पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ के कार्यकारी संपादक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि यह पुरस्कार प्रतिवर्ष हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है। इस अवॉर्ड का यह 12वां वर्ष है। ‘मीडिया विमर्श’ द्वारा शुरू किए गए इस अवॉर्ड के तहत ग्यारह हजार रुपए, शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह और सम्मान पत्र दिया जाता है। पुरस्कार के निर्णायक मंडल में नवभारत टाइम्स, मुंबई के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, छत्तीसगढ़ ग्रंथ अकादमी, रायपुर के पूर्व निदेशक रमेश नैयर तथा इंदिरा गांधी कला केंद्र,दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी शामिल हैं।

इससे पूर्व यह सम्मान वीणा(इंदौर) के संपादक स्व. श्यामसुंदर व्यास, दस्तावेज (गोरखपुर) के संपादक डॉ.विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, कथादेश (दिल्ली) के संपादक हरिनारायण, अक्सर (जयपुर) के संपादक डॉ. हेतु भारद्वाज, सद्भावना दर्पण (रायपुर) के संपादक गिरीश पंकज, व्यंग्य यात्रा (दिल्ली) के संपादक डॉ. प्रेम जनमेजय, कला समय (भोपाल) के संपादक विनय उपाध्याय, संवेद (दिल्ली) के संपादक किशन कालजयी, अक्षरा (भोपाल) के संपादक कैलाशचंद्र पंत, अलाव (दिल्ली) के संपादक रामकुमार कृषक और प्रेरणा (भोपाल) के संपादक अरुण तिवारी को दिया जा चुका है।

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आज कुछ ऐसे नजर आए हिंदी अखबारों के फ्रंट पेज

राजस्थान पत्रिका को छोड़कर अन्य अखबारों के फ्रंट पेज पर आज काफी विज्ञापन है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Wednesday, 11 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
Newspapers

नागरिकता संशोधन बिल पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। कल तक इस मुद्दे पर मोदी सरकार के साथ खड़ी शिवसेना ने अपने कदम वापस खींच लिए हैं। वहीं, निर्भया कांड के दोषी ने फांसी से बचने के लिए अजीब तर्क दिया है। इन दोनों खबरों को आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अधिकांश अखबारों ने प्रमुखता से जगह दी है। आज सबसे पहले बात करते हैं दैनिक जागरण की। अखबार का फ्रंट पेज हमेशा की तरह बेहद सामान्य दिखाई दे रहा है। लीड नागरिकता बिल है और इसके पास ही बिल पर अमेरिकी आयोग की टिप्पणी को रखा गया है।

उन्नाव कांड में 16 को आने वाला फैसला और निर्भया के दोषियों की फांसी की तैयारी भी पेज पर है। सबसे नीचे दो कॉलम में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत के प्रयासों की सराहना करती खबर है। इसके अनुसार भारत पहली बार जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में शीर्ष 10 में जगह बनाने में कामयाब रहा है।

आज हिन्दुस्तान को देखें तो फ्रंट पेज पर एक बड़ा विज्ञापन है। लीड नागरिकता बिल पर बवाल है। दूसरी बड़ी खबर के रूप में सौरभ शुक्ल की बाईलाइन स्टोरी है, जिसके अनुसार सरकार जीएसटी दरें बढ़ाने की तैयारी कर रही है। यानी महंगाई के दौर में कई वस्तुएं और महंगी होने वाली हैं। इसके साथ ही श्याम सुमन की बाईलाइन भी पेज पर है, जो बता रहे हैं कि उच्चतम न्यायालय ने हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति प्रक्रिया छह माह में पूरी करने को कहा है।

उन्नाव कांड में 16 को आने वाले फैसले को सिंगल में रखा गया है, जबकि एसबीआई की कारगुजारी दो कॉलम में है। देश के सबसे बड़े बैंक ने अपनी स्थिति अच्छी दर्शाने के लिए 12 हजार करोड़ रुपए के फंसे कर्ज को छिपाकर रखा था। वहीं, एंकर में निर्भया के दोषी द्वारा फांसी से बचने के लिए दिए गए अजीब तर्क को जगह मिली है। दोषी अक्षय कुमार का कहना है कि जब प्रदूषण से जिंदगी छोटी हो रही है तो फिर फांसी की क्या जरूरत?

नवभारत टाइम्स के फ्रंट पेज पर भी ज्यादा जगह नहीं है। लीड नागरिकता बिल पर बवाल है, लेकिन इसे वैश्विक स्तर पर हो रहे विरोध से उठाया गया है। इसका शीर्षक है ‘अमेरिका, यूरोप और पाक की घुसपैठ का विरोध। दरअसल, तीनों की तरफ से बिल पर आपत्ति जताई गई है, जिसे भारत ने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है।

निर्भया के दोषी के अजीब तर्क को टॉप में तीन कॉलम में रखा गया है। कश्मीर पर अमित शाह के बयान के अलावा दो सिंगल समाचार भी पेज पर हैं। पहला, शादी पार्टी में फायरिंग की तो 2 साल की जेल और दूसरा, 15 घंटों में 2 जवानों ने तीन अफसर मार गिराए।

अब अमर उजाला को देखें तो इस अखबार के फ्रंट पेज पर आज काफी विज्ञापन है। लीड नागरिकता बिल पर मचा बवाल है और इसके पास ही कश्मीर के बहाने अमित शाह द्वारा कांग्रेस पर दागे गए तीर को रखा गया है। छत्तीसगढ़ के बाद अब झारखंड में जवान ने अपने साथियों को गोलियों से भून डाला। इस खबर को प्रमुखता के साथ पेज पर जगह मिली है। इसके अलावा, उन्नाव कांड पर 16 को आने वाला फैसला और मैनपुरी का हादसा भी पेज पर है। मैनपुरी में बच्चों ने खेल-खेल में केरोसिन डालकर आग लगा ली। इस घटना में एक बच्ची झुलस गई है। अखबार ने निर्भया के दोषी के अजीब तर्क को जगह नहीं दी है, जो कि बेहद चौंकाने वाला है। आज 'अमर उजाला' का ई-पेपर ओपन न होने के कारण उसे यहां नहीं दिया जा रहा है। 

वहीं, राजस्थान पत्रिका का फ्रंट पेज कल जैसा ही नजर आ रहा है। यानी लेआउट में खास बदलाव करने की जहमत नहीं उठाई गई है। बड़ा अंतर बस इतना है कि लीड को थोड़ा नीचे खिसकाकर टॉप बॉक्स की जगह निकाली है। खैर, टॉप बॉक्स में राजस्थान के सैनिक स्कूल के शिक्षक की शर्मनाक हरकत को रखा गया है। आरोपित शिक्षक पिछले एक साल से 12 छात्रों का यौन शोषण कर रहा था। लीड नागरिकता संशोधन बिल पर बवाल है, जबकि निर्भया के दोषी का अजीब तर्क दो कॉलम में है।

बनारस यूनिवर्सिटी में डॉक्टर फिरोज खान ने संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में अपना पद छोड़ दिया है। वह अब कला में पढ़ाएंगे। इस खबर को भी प्रमुखता के साथ जगह मिली है। एंकर में वैज्ञानिक शोध को रखा गया है, जिसके अनुसार पौधों को भी दर्द होता है। उनकी अल्ट्रासॉनिक चीखें भी रिकॉर्ड की गई हैं। इसके अलावा पेज पर कुछ अन्य खबरें भी हैं।

सबसे आखिरी में बात करते हैं दैनिक भास्कर की। फांसी से बचने के लिए निर्भया के दोषी के अजीब तर्क को अखबार ने टॉप बॉक्स में काफी विस्तार से लगाया है, जो कि अच्छा फैसला है। आज यह खबर सबसे ज्यादा पढ़ी जाएगी। लीड नागरिकता बिल पर बवाल है। बीएचयू में डॉक्टर फिरोज की खबर को सिंगल में जगह मिली है, जबकि रडार इमेजिंग सैटेलाइट का आज होने वाला प्रक्षेपण तीन कॉलम में है। वहीं अर्थशास्त्र का नोबल स्वीकारते अभिजीत और उनकी पत्नी की फोटो भी पेज पर है। एसबीआई की खबर को ‘नवभारत टाइम्स’ की तरह ‘दैनिक भास्कर’ ने भी तवज्जो नहीं दी है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के नजरिये से देखें तो आज ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिन्दुस्तान’ के साथ ही ‘दैनिक भास्कर’ का फ्रंट पेज भी आकर्षक नजर आ रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति में ‘दैनिक भास्कर’ और ‘नवभारत टाइम्स’ सबसे आगे हैं। ‘दैनिक भास्कर’ ने जहां टॉप बॉक्स में निर्भया के दोषी के अजीब तर्क को विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा है, वहीं ‘नवभारत टाइम्स’ में लीड ली प्रस्तुति बेहतरीन है। वैसे, ‘अजीब तर्क’ को हिन्दुस्तान ने भी विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा है।

3: कलात्मक शीर्षक का ताज निसंदेह ‘नवभारत टाइम्स’ के सिर सजना चाहिए। नागरिकता संशोधन बिल पर बवाल को अखबार ने एक अलग अंदाज में उठाया और उसका शीर्षक भी सबसे अलग दिया।

4: खबरों के लिहाज से देखें तो ‘अमर उजाला’ और ‘दैनिक जागरण’ से चूक हुई है। दोनों ने निर्भया कांड के दोषी के अजीब तर्क को फ्रंट पेज पर जगह नहीं दी है, जबकि ये सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाले खबर है।

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फ्रंट पेज के मामले में आज कैसे रहे हिंदी के प्रमुख अखबार, जानें यहां

राजस्थान पत्रिका में आज फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं है, वहीं दैनिक जागरण में दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Tuesday, 10 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 10 December, 2019
Newspapers

नागरिकता संशोधन बिल भले ही लोकसभा में पारित हो गया हो, लेकिन इसे लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। यह बिल और बवाल आज के अखबारों की सबसे बड़ी खबर है। सबसे पहले बात करते हैं हिन्दुस्तान की। अखबार के फ्रंट पेज पर आज ज्यादा खबरों की गुंजाइश नहीं है। लीड नागरिकता बिल है और दिल्ली अग्निकांड की फॉलोअप स्टोरी को पांच कॉलम में जगह मिली है। कर्नाटक उपचुनाव में भाजपा की कामयाबी के साथ ही जेएनयू छात्रों की पुलिस से झड़प दो-दो कॉलम में है। कर्नाटक में भाजपा ने 15 में से 12 सीटें अपने नाम कर ली हैं।

पेज पर अरविन्द सिंह की बाईलाइन स्टोरी भी है, जिनके मुताबिक सरकार ने दो पहिया-तीन पहिया वाहनों की लम्बाई-चौड़ाई के नए मानक निर्धारित किये हैं। इस कवायद का उद्देश्य आकार में बड़े वाहनों के चलते होने वाले हादसों को कम करना है। इनके अलावा, पेज पर दो सिंगल समाचार और हैं। पहला, एसबीआई सहित तीन बैंकों ने कर्ज सस्ता किया और दूसरा, दिल्ली में सुबह से शाम तक निर्माण कार्यों को छूट।

आज नवभारत टाइम्स के फ्रंट पेज की शुरुआत टॉप बॉक्स से हुई है, जिसमें सुदामा यादव की दिल्ली अग्निकांड पर केंद्रित स्टोरी को लगाया गया है। लीड ‘शरणार्थियों की शरण में राजनीति’ शीर्षक के साथ नागरिकता बिल है। जेएनयू छात्रों के मार्च पर पुलिस का पहरा फोटो के रूप में पेज पर है।

कर्नाटक उपचुनावों में भाजपा की जीत और दिल्ली-एनसीआर में सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक निर्माण कार्य को मंजूरी, क्रमशः सिंगल-सिंगल कॉलम में हैं। मनीष अग्रवाल की बाईलाइन स्टोरी को भी तवज्जो मिली है। मनीष ने बताया है कि निर्भया के दोषियों की फांसी के लिए जेल प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके अलावा, विज्ञापनों के चलते पेज पर केवल कुछ संक्षिप्त खबरें ही आ सकी हैं।

अमर उजाला में लीड नागरिकता संशोधन विधेयक है। इसमें गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि यह बिल अल्पसंख्यकों नहीं, घुसपैठियों के खिलाफ है। लीड के बगल में दिल्ली में हुए अग्निकांड की फॉलोअप स्टोरी को जगह मिली है। कर्नाटक में हुए उपचुनाव में भाजपा की जीत को दो कॉलम में रखा गया है।

इसके बगल में अयोध्या से जुड़ा समाचार है। इस खबर के अनुसार हिंदू महासभा ने मुस्लिम पक्ष को जमीन देने का विरोध किया है। दिल्ली-एनसीआर में निर्माण पर लगी पाबंदी में राहत की खबर को अखबार ने बड़ी जगह दी है, वहीं एंकर में राष्ट्रपति भवन मार्च के दौरान जेएनयू छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की खबर को ऱखा गया है।  

अब राजस्थान पत्रिका की बात करें तो फ्रंट पेज पर आज कोई विज्ञापन नहीं है। लीड नागरिकता बिल है, जिसका शीर्षक भाजपा के हमले पर कांग्रेस के जवाब पर केंद्रित है। लीड के पास से ही दो-दो कॉलम की तीन खबरों को आधा पेज तक उतारा गया है। इसे पैकेजिंग के एक अच्छे उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि तीनों ही खबरें महिला अपराध से जुड़ी हैं। पहली, मुजफ्फरनगर में जलाई गई छात्रा कोमा में, दूसरी, उत्तर प्रदेश में खुलेंगे 218 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट और तीसरी, हैदराबाद एनकाउंटर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई।

कर्नाटक उपचुनाव में भाजपा की कामयाबी, सोशल सिक्योरिटी बिल और मानव विकास सूचकांक में भारत की स्थिति को बयां करती खबर को भी पेज पर जगह मिली है। सोशल सिक्योरिटी बिल यदि पारित हो जाता है तो कर्मचारियों को पीएफ घटाकर वेतनवृद्धि का विकल्प मिल सकेगा जबकि मानव विकास सूचकांक में पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारत से ज्यादा तरक्की कर ली है। एंकर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन है, जहां यह बताया गया है कि महासागरों में डेड जोन बढ़े हैं, जिससे शार्क जैसे जीवों को खतरा है। 

दैनिक जागरण में कल की तरह आज भी पाठकों को दो फ्रंट पेज मिले हैं। पहले पेज पर मात्र दो बड़ी खबरें हैं। लीड नागरिकता बिल है, जबकि शेष दो कॉलम में दिल्ली में निर्माणकार्यों को मिली छूट को रखा गया है। दूसरे पेज पर नजर डालें तो यहां दिल्ली अग्निकांड से जुड़ी निहाल सिंह की स्टोरी को लीड लगाया गया है। हादसे के बाद सभी जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। पेज पर दूसरी बड़ी खबर कर्नाटक उपचुनाव में भाजपा की कामयाबी है।

उत्तर प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्मियों की समय पूर्व रिहाई का ब्योरा मांगा है। इस खबर को ‘दैनिक जागरण’ ने प्रमुखता दी है। वहीं, सबसे नीचे दो कॉलम में रूस के ओलंपिक व फुटबाल विश्वकप से बाहर होने का समाचार है। विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी ने रूस पर यह प्रतिबंध लगाया है। ‘हिन्दुस्तान’ में भी यह खबर सिंगल में है।

सबसे आखिर में आज दैनिक भास्कर का रुख करें तो यहां नागरिकता बिल लीड है। खबर को काफी विस्तार से पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा, पेज पर दिल्ली में निर्माण कार्यों को मिली छूट और कर्नाटक उपचुनाव में भाजपा की कामयाबी की खबर भी है। ‘न्यूज ब्रीफ’ में सस्ता कर्ज, रूस पर बैन और पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफे सहित कुछ समाचारों को रखा गया है। दो बड़े विज्ञापनों के चलते इससे ज्यादा खबरों की गुंजाइश पेज पर नहीं थी।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में आज ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिन्दुस्तान’ और ‘राजस्थान पत्रिका’ अव्वल हैं। ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘हिन्दुस्तान’ ने सीमित जगह में भी अच्छा पेज तैयार किया है। जबकि ‘दैनिक जागरण’ हमेशा की तरह नीरस नजर आ रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति में ‘दैनिक भास्कर’ को सबसे आगे कहा जा सकता है, क्योंकि उसने लीड को सबसे अच्छी तरह से पाठकों के समक्ष परोसा है। 

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में बाजी ‘नवभारत टाइम्स’ के हाथ लगी है। लीड का शीर्षक ‘शरणार्थियों की शरण में राजनीति’ नागरिकता संशोधन बिल पर मचे विवाद को बखूबी बयां करता है। बाकी अखबारों ने शीर्षक में ज्यादा कुछ प्रयास नहीं किया है।

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मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर की ABCD से रूबरू कराएगी अमित खन्ना की ये किताब

किताब की लॉन्चिंग पर प्रणॉय रॉय, उदय शंकर, रजत शर्मा, प्रसून जोशी, स्मिता प्रकाश समेत मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहेंगी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 09 December, 2019
Last Modified:
Monday, 09 December, 2019
Book Launching

कला और मीडिया के क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए WORDS SOUNDS IMAGES- A History of Media and Entertainment in India के नाम से नई किताब बाजार में दस्तक देने को तैयार है। इस किताब की लॉन्चिंग 13 दिसंबर को दिल्ली के नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी में की जाएगी। किताब की लॉन्चिंग पर प्रणॉय रॉय, उदय शंकर, रजत शर्मा, प्रसून जोशी, स्मिता प्रकाश समेत मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहेंगी। इस मौके पर लोगों को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बारे में उनके विचार सुनने का मौका भी मिलेगा।   

इस किताब को अमित खन्ना ने लिखा है और इसे ‘हार्पर कोलिन्स’ (Harper Collins) पब्लिकेशन ने पब्लिश किया है। इसकी खासियत की बात करें तो यह अपनी तरह की ऐसी पहली किताब है, जिसमें सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर 21वीं शताब्दी तक की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के इतिहास को शब्दों में पिरोया गया है। इस किताब की शुरुआत में ही अमित खन्ना ने हड़प्पा और वैदिक सभ्यता का जिक्र किया है। इसके बाद वहां से होते हुए मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री आज जिस मुकाम पर पहुंची है, उसके बारे में काफी जानकारी देने का इस किताब में प्रयास किया गया है।

किताब के लेखक अमित खन्ना खुद एक फिल्म निर्माता, निर्देशक और गीतकार है, जिसकी वजह से वह इन गहरे विषयों को काफी बेहतर तरीके से किताब में शामिल कर पाए हैं। अमित खन्ना के करियर की बात करें तो उन्होंने वर्ष 1970 में अभिनेता और फिल्म निर्माता देव आनंद के प्रॉडक्शन हाउस ‘नवकेतन फिल्म्स’ के साथ बतौर एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर और राइटर के तौर पर की थी। वह अब तक 250 से ज्यादा फिल्मी-गैरफिल्मी गीत भी लिख चुके हैं। 80 के दशक में उन्होंने कई फीचर फिल्में, डॉक्यूमेंट्रीज, कॉमर्शियल और टीवी कार्यक्रम लिखे और उनका निर्माण व निर्देशन भी किया। 1989 में उन्होंने ‘प्लस चैनल’ के नाम से मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी शुरू की। इस प्लेटफॉर्म के तहत उन्होंने तमाम टीवी प्रोग्राम्स, विभिन्न भाषाओं और जॉनर में म्यूजिक एलबम और ऑडियो बुक्स भी तैयार कीं। इसके अलावा वह ‘द इकनॉमिक टाइम्स’ (The Economic Times) समेत कई पब्लिकेशंस में एडिटोरियल एडवाइजर भी रह चुके हैं।

वह ‘रिलायंस एंटरटेनमेंट’ के फाउंडर चेयरमैन भी रह चुके हैं। मीडिया, एंटरटेनमेंट और कल्चर पर उनके एक हजार से ज्यादा आर्टिकल पब्लिश हो चुके हैं। पूर्व में वह ‘फिक्की’ (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry) की एंटरटेनमेंट एंड कंवर्जेंस कमेटियों  के साथ ही ‘सीआईआई’ (Confederation of Indian Industry) की नेशनल कमेटी और मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के चेयरमैन भी रह चुके हैं। वर्ष 2007 से 2008 के दौरान वह प्रधानमंत्री की इंफॉर्मेशन, कम्युनिकेशन और एंटरटेनमेंट कमेटी के मेंबर भी रह चुके हैं। उन्हें अब तक कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें ‘नेशनल अवॉर्ड फॉर फिल्म्स’ भी शामिल है। इसके अलावा वह देश-विदेश के तमाम शिक्षण संस्थानों में लेक्चर भी दे चुके हैं। 

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आज कुछ ऐसा रहा अखबारों के फ्रंट पेज का हाल

दैनिक जागरण के पाठकों को आज दो फ्रंट पेज पढ़ने को मिले हैं, वहीं अमर उजाला और राजस्थान पत्रिका के फ्रंट पेज पर आज कोई विज्ञापन नहीं है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Monday, 09 December, 2019
Last Modified:
Monday, 09 December, 2019
Newspapers

गुजरता साल कई परिवारों को काफी गहरे जख्म दे गया। दिल्ली में 43 मजदूरों को लाचार व्यवस्था की बलि चढ़ना पड़ा। राजधानी से प्रकाशित होने वाले आज के अखबारों में यही सबसे बड़ी खबर है। सबसे पहले बात करते हैं नवभारत टाइम्स की। अखबार में लगभग आधा पेज तक दिल्ली की आग को बतौर लीड लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर उन्नाव की बेटी की विदाई है। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और हथियार के लाइसेंस का भरोसा दिलाया है।

पीएमओ पर आरबीआई के गवर्नर रहे रघुराम राजन के हमले को भी प्रमुखता से स्थान मिला है। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने नेताओं की वीवीआईपी सुरक्षा हटाने की बात कही है। इस खबर के साथ ही अमेरिका में कश्मीर पर प्रस्ताव को डेढ़-डेढ़ कॉलम में रखा गया है। एंकर में मोहन भागवत हैं, जिनका कहना है कि गाय की सेवा से जेल के कैदियों में सुधार नजर आ रहा है।

आज अमर उजाला के फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं है, इसलिए कई खबरों को जगह देने का प्रयास किया गया है। लीड मौत की फैक्ट्री है, जिसमें 43 जिंदगियां स्वाहा हो गईं। वहीं, चीफ जस्टिस के बयान ‘आप जल्दबाजी में न्याय नहीं दे सकते’ पर उपराष्ट्रपति वेकैंया नायडू ने प्रतिक्रिया दी है। नायडू का कहना है कि त्वरित न्याय नहीं दे सकते तो देरी भी नहीं कर सकते। इस समाचार को प्रमुखता के साथ पेज पर रखा गया है।

इसके अलावा, 250 रुपए के आंकड़े पर पहुंची प्याज, उन्नाव कांड में सात पुलिसकर्मी निलंबित और मोदी की शौरी से मुलाकात भी पेज पर है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी का पुणे के अस्पताल में इलाज चल रहा है, पीएम मोदी ने अस्पताल जाकर शौरी के हालचाल जाने। एंकर में मौसम का बदला मिजाज है। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। इसके पास ही दिल्ली की जहरीली हवा से जुड़ी खबर दो कॉलम में है।

अब राजस्थान पत्रिका की बात करें तो अखबार के फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं है। टॉप बॉक्स में देश और सियासी दलों की आर्थिक स्थिति के अंतर को दर्शाया गया है। जहां देश आर्थिक सुस्ती से गुजर रहा है, वहीं पार्टियों की आय 251% बढ़ी है। इसके पास ही दो कॉलम में कोरबा कांड में हुई मौत का समाचार है। महिला को जमानत पर छूटे आरोपित ने हंसिये से वार कर घायल कर दिया था। लीड दिल्ली की आग है, लेकिन इसे केवल दिल्ली पर केंद्रित नहीं रखा गया है। कुछ अन्य शहरों में फायर ब्रिगेड के हाल से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। प्रयास अच्छा है, लेकिन आज यदि मुख्य खबर को विस्तार से लगाया जाता और दूसरे दिन ‘हाल’ बयां किया जाता तो शायद ज्यादा बेहतर होता। क्योंकि इस प्रयास में मुख्य खबर कमजोर पड़ गई है।

फिल्म ‘पानीपत’ पर राजस्थान में बवाल और आर्थिक सुस्ती के लिए रघुराम राजन द्वारा पीएमओ को निशाना बनाये जाने को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है। राजन ने अपने लेख में लिखा है कि पीएमओ में सारी शक्तियां होना मंदी का कारण है। एंकर में 2020 ओलंपिक को लेकर बढ़ी चिंताएं हैं। दरअसल, ओलंपिक स्थल के पास परमाणु विकिरण के हॉट स्पॉट मिले हैं। इसके पास तीन कॉलम में जलवायु परिवर्तन के खतरे दर्शाती खबर है। खबर के अनुसार महज 11 महीनों में ही विक्टोरिया फॉल सूख गया। ‘राजस्थान पत्रिका’ ने प्याज की चढ़ती कीमतों को स्थान नहीं दिया है।

वहीं, दैनिक भास्कर ने दिल्ली की आग को सबसे ज्यादा जगह दी है। ‘अमर उजाला’ की तरह ‘दैनिक भास्कर’ ने भी मास्टहेड से लीड की शुरुआत की है। लीड के अलावा पेज पर केवल चार खबरें हैं। मसलन, पीएमओ पर रघुराम राजन का निशाना, महिला सुरक्षा पर पीएम की पुलिस को नसीहत, उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और निर्भया के दोषी को तिहाड़ किया गया शिफ्ट। मंडोली जेल में फांसी की व्यवस्था नहीं होने के चलते ऐसा किया गया है।

दैनिक जागरण ने आज दो फ्रंट पेज बनाये हैं। पहला पेज दिल्ली की आग के नाम है, जिसमें विनीत त्रिपाठी ने अपनी बाईलाइन स्टोरी में सरकारी लापरवाही को उजागर किया है। दूसरे पेज की लीड पीएम मोदी का पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों के सम्मेलन में दिया भाषण है। मोदी ने महिला सुरक्षा के लिए प्रभावी पुलिसिंग पर जोर दिया है। दूसरी और आखिरी बड़ी खबर नागरिकता संशोधन बिल को पास कराने को लेकर सरकारी की तैयारी है। इसके अलावा संक्षिप्त में कुछ समाचार हैं, लेकिन प्याज की कीमतों को जगह नहीं मिली है।

सबसे आखिर में आज हिन्दुस्तान का रुख करते हैं। अखबार ने आधा पेज से ज्यादा जगह दिल्ली की आग को दी है। दूसरी बड़ी खबर उन्नाव कांड में सात पुलिसकर्मियों का निलंबन है। पेज पर अरविन्द सिंह की बाईलाइन स्टोरी भी है, जिसमें उन्होंने बताया है कि केंद्र सरकार नेशनल हाईवे पर घायलों को मौके पर ही इमरजेंसी इलाज की सुविधा देने जा रही है। एंकर में भी अग्निकांड से जुड़ा समाचार है, जो दर्शाता है कि मौत की दहलीज पर खड़े मजदूरों के जहन में क्या चल रहा होगा।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट और खबरों की प्रस्तुति के मामले में आज ‘दैनिक जागरण’ और ‘राजस्थान पत्रिका’ को छोड़कर बाकी अखबार बेहतर नजर आ रहे हैं। खासकर ‘दैनिक भास्कर’ ने लीड की प्रस्तुति में काफी मेहनत की है।

2: बेहतर शीर्षक की बात करें तो ‘अमर उजाला’ और ‘नवभारत टाइम्स’ ने ‘अग्निकांड’ का शीर्षक लगभग एक जैसा लगाया है, लेकिन ‘दैनिक भास्कर’ का शीर्षक ‘अव्यवस्था ने दम घोंटा’ आज भी सब पर भारी है।

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