देखें, आज के प्रमुख अखबारों के फ्रंट पेज

आज दैनिक जागरण में जहां दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं, वहीं हिन्दुस्तान में जैकेट विज्ञापन की वजह से तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by
Published - Friday, 15 November, 2019
Last Modified:
Friday, 15 November, 2019
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भारतीय राजनीति में राफेल की अहमियत कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि, देश की सर्वोच्च अदालत दूसरी बार भी यह साफ कर चुकी है कि मोदी सरकार इस मामले में पाक-साफ है, लेकिन कांग्रेस अपने रुख पर कायम है। इस खबर को आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों ने प्रमुखता से उठाया है। आज सबसे पहले बात करते हैं अमर उजाला की। फ्रंट पेज की शुरुआत सात कॉलम टॉप बॉक्स से हुई है, जिसमें दिल्ली की जहरीली हवा पर बच्चों की पीएम से गुहार को लगाया गया है। इस खबर का शीर्षक ‘बच्चों ने पीएम मोदी से कही मन की बात, हमें साफ हवा चाहिए’ आकर्षक है। लीड, राफेल है। सुप्रीम कोर्ट ने लड़ाकू विमान सौदे की जांच वाली पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है। साथ ही ‘चौकीदार चोर है’ के लिए राहुल गांधी को फटकार भी लगाई है।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के संबंध में दायर याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय पीठ फैसला लेगी। इस खबर को भी प्रमुखता के साथ दो कॉलम में रखा गया है। कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के 16 बागी विधायक भाजपाई हो गए हैं। इस खबर को भी पेज पर जगह मिली है। वहीं, पेज पर सबसे नीचे दो कॉलम में किसी जमाने में आइंस्टीन को चुनौती देने वाले महान गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन का समाचार है। खबर में यह भी बताया गया है कि उनके शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई।

अब नवभारत टाइम्स का रुख करें तो फ्रंट पेज पर आज भी ज्यादा जगह नहीं है। लीड राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, जिसे लड़ाकू विमान और उदास मुद्रा में बैठे राहुल गांधी की फोटो के साथ लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर सबरीमाला मंदिर है। सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय पीठ मंदिर सहित मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर भी फैसला सुनाएगी। वहीं, जेएनयू विवाद और दिल्ली के प्रदूषण को डेढ़-डेढ़ कॉलम जगह मिली है। गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन सहित कुछ खबरों को सिंगल में लगाया गया है।

आज दैनिक जागरण ने दो फ्रंट पेज बनाये हैं। पहले पेज पर आधा पेज विज्ञापन है और लीड राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, जिसे पूरे आठ कॉलम लगाया गया है। लीड में ही सबरीमाला मंदिर विवाद और अनुच्छेद 370 को भी रखा गया है। जहां सबरीमाला मामला सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच के हवाले किया गया है, वहीं कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है।

दूसरे फ्रंट पेज को देखें तो यहां लीड जहरीली हवा है। दूसरी प्रमुख खबर ब्रिक्स सम्मलेन में पीएम मोदी का बयान है। इसके साथ ही संजय मिश्र की बाईलाइन खबर को भी पेज पर जगह मिली है। मिश्र बता रहे हैं कि कांग्रेस ने शिवसेना के सामने कौन सी शर्त रखी है। गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन का समाचार सबसे नीचे दो कॉलम में है।

दैनिक भास्कर की बात करें तो आज भी मास्टहेड में प्रयोग किया गया है। बाल दिवस पर प्रदूषण के चलते घरों में कैद रहे बच्चों की व्यथा को ‘बाल विवश’ शीर्षक के साथ बयां किया गया है। नि:संदेह यह अच्छा प्रयास है, लेकिन पेज कल जैसा ही नजर आ रहा है, क्योंकि कल भी इसी थीम पर मास्टहेड तैयार किया गया था। लीड राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है,  जिसे दो लाइन के शीर्षक के साथ विस्तार से समझाया गया है। सबरीमाला मंदिर से जुड़ी खबर को भी प्रमुखता मिली है।

वहीं, महाराष्ट्र के सियासी संकट को भी पेज पर रखा गया है। शिवसेना और राकांपा समझौते के करीब आ गए हैं। इसके अलावा, पेज पर वोडाफोन एवं एयरटेल को हुए घाटे और जमीयत उलेमा ए हिंद का बयान है। देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन का कहना है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन नहीं लेनी चाहिए। एंकर में गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन के समाचार को लगाया गया है।

आखिर में आज हिन्दुस्तान का रुख करते हैं। अखबार में जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरा पेज फ्रंट पेज है। लीड राफेल है, जिसे ‘राफेल पर फिर खिंची तलवारें’ शीर्षक के साथ लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर के रूप में पेज पर दिल्ली का प्रदूषण है। बादलों के चलते बढ़ी धुंध के आज से छंटने की उम्मीद है। वहीं, क्रिकेटर अश्विन की उपलब्धि को फोटो के साथ रखा गया है। बांग्लादेश के साथ मैच में अपने प्रदर्शन के साथ ही अश्विन ने घरेलू मैदान पर तेजी से विकेट लेने के मामले में कुंबले को पीछे छोड़ दिया है।

महाराष्ट्र की सियासत के साथ ही कर्नाटक के बागी विधायकों के भाजपा का दामन थामने की खबर को पेज पर जगह मिली है। इसके अलावा, सबरीमाला मंदिर और जेएनयू में विवेकानंद की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने के प्रयास से जुड़ी खबरों को दो-दो कॉलम में रखा गया है। एंकर में केके उपाध्याय की बाईलाइन स्टोरी है, जिसमें उन्होंने गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के जीवन से जुड़ी बातों पर प्रकाश डाला है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: ले-आउट की बात करें तो आज ‘अमर उजाला’ और ‘दैनिक भास्कर’ अव्वल नजर आ रहे हैं, जबकि ‘हिन्दुस्तान’ का फ्रंट पेज काफी भरा-भरा दिखाई दे रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति में ‘दैनिक भास्कर’, ‘अमर उजाला’ के साथ ‘नवभारत टाइम्स’ बेहतर है। ‘हिन्दुस्तान’ ने भी लीड को अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है, लेकिन बाकी खबरें उतनी आकर्षक दिखाई नहीं दे रहीं।     

3: कलात्मक शीर्षक ‘अमर उजाला’ और ‘नवभारत टाइम्स’ में हैं। ‘अमर उजाला’ ने जहां टॉप बॉक्स की हेडलाइन में प्रयोग किया है, वहीं ‘नवभारत टाइम्स’ ने लीड की।

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इस बड़ी खबर को फ्रंट पेज पर रखने से चूके ये अखबार

जैकेट विज्ञापन के कारण नवभारत टाइम्स में आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by
Published - Tuesday, 31 March, 2020
Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
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कोरोना के खौफ के बीच दिल्ली में धार्मिक जलसे में लोगों का जुटना और उनमें से कई का पॉजिटिव आना स्थिति को और भी भयावह बना सकता है। यह खबर दिल्ली के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी, लेकिन कुछ ही अख़बार इसके महत्व को समझ पाए हैं। सबसे पहले आज बात करते हैं दैनिक जागरण की। अखबार ने टॉप बॉक्स में उस खबर को लगाया है, जो लोगों को थोड़ी राहत देगी। यानी लॉकडाउन की अवधि नहीं बढ़ाई जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लॉकडाउन 21 दिनों का ही रहेगा।

लीड, दिल्ली का धार्मिक जलसा है, मगर इसका शीर्षक काफी कठिन हो गया है। एक ही नजर में पाठकों के लिए समझना मुश्किल है कि आखिर किस बारे में बात हो रही है। वहीं, कोरोना से मुकाबले की तैयारियों में खामियों को लेकर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के डीएम को पद से हटा दिया है। इस समाचार को पूरे घटनाक्रम के साथ पेज पर रखा गया है। एंकर में लॉकडाउन को सही साबित करती खबर है। इसके अलावा, कुछ सिंगल खबरों को पेज पर स्थान मिला है।

अब चलते हैं नवभारत टाइम्स पर। जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है, लेकिन यहां भी काफी विज्ञापन है। लीड धार्मिक जलसा है, जिसे बेहद सरल शीर्षक ‘निजामुद्दीन बना कोरोना का केंद्र’ के साथ लगाया गया है। इस जलसे में 1900 लोग आये थे, जिनमें से 24 में कोरोना वायरस मिला है और 6 की तेलंगाना में मौत हो गई है।

नोएडा के डीएम को योगी की फटकार भी लीड का हिस्सा है। इसके अलावा, पेज पर केवल दो सिंगल समाचार ही आ सके हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है, लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर सरकार की सफाई।

अमर उजाला ने धार्मिक जलसे की खबर को काफी विस्तार से लीड लगाया है। वहीं, नोएडा के डीएम को योगी द्वारा लगाई गई फटकार को भी बड़ी जगह मिली है। अखबार ने देश में बढ़ती कोरोना की चाल से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। संक्रमितों का आंकड़ा 1200 से ज्यादा हो गया है। इसी खबर में ओडिशा में महिला डॉक्टर से घर खाली कराने के लिए दी गई दुष्कर्म की धमकी का भी जिक्र है। एंकर में कोरोना को लेकर सरकार की चेतावनी और लॉकडाउन की अवधि को लेकर स्पष्टीकरण है।

आज हिन्दुस्तान को देखें तो विज्ञापनों को लेकर स्थिति लगभग कल जैसी ही है। लीड लॉकडाउन की समयावधि पर सरकार की सफाई है। स्कन्द विवेक धर की बाईलाइन भी लीड का हिस्सा है, जिन्होंने एक दिन में सामने आये कोरोना के 227 मामलों के बारे में बताया है। हालांकि, इसमें दिल्ली के धार्मिक जलसे का कहीं जिक्र नहीं है। कोताही पर नोएडा के डीएम को योगी की फटकार के साथ ही सरकारी स्कूलों में बच्चों को पदोन्नत करने का दिल्ली सरकार का फैसला भी पेज पर है। इसके अलावा, चार सिंगल समाचारों को ही पेज पर जगह मिल सकी है, लेकिन महिला डॉक्टर को दुष्कर्म की धमकी पेज पर नहीं है।

सबसे आखिरी में रुख करते हैं राजस्थान पत्रिका का। लीड ‘ना लॉकडाउन बढ़ेगा, ना इमरजेंसी लगेगी’ शीर्षक के साथ सरकार की सफाई को लगाया गया है। इसमें पलायन करने वाले मजदूरों का एक फोटो भी है, जो लॉकडाउन की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। हालांकि, दिल्ली के धार्मिक जलसे का कहीं जिक्र नहीं है। ओडिशा में डॉक्टर को मिली दुष्कर्म की धमकी को अखबार ने दो कॉलम जगह दी है। पीड़िता पर लगातार मकान खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है।

वहीं, लॉकडाउन के दूसरे पहलू को उजागर करती एक अन्य खबर भी पेज पर है, जिसके मुताबिक पैदल घर लौटने की कवायद में 29 मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं। एंकर में पुष्पेश शर्मा की बाईलाइन को लगाया गया है, जिन्होंने बताया है कि चीन किस तरह कोरोना संक्रमितों का पता लगा रहा है। 

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के लिहाज से आज सभी अखबार एक जैसे नजर आ रहे हैं। इसलिए किसी एक को अव्वल नहीं कहा जा सकता।

2: खबरों की प्रस्तुति में नवभारत टाइम्स और अमर उजाला को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया जा सकता है।

3: कलात्मक शीर्षक आज किसी भी अखबार में नजर नहीं आ रहा है।

4: खबरों का जहां तक सवाल है तो नवभारत टाइम्स, अमर उजाला और दैनिक जागरण सबसे आगे हैं, क्योंकि तीनों ने दिल्ली के धार्मिक जलसे की खबर को फ्रंट पेज पर प्रमुखता से जगह दी है।

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मीडिया की यह परेशानी दूर करने के लिए सरकार ने बढ़ाया कदम  

कोरोना वायरस को लेकर आम जनता के खौफ को बढ़ाने में सोशल मीडिया का अहम योगदान है। सरकार की सख्ती के बावजूद ऐसी खबरें वायरल होती रहती हैं, जिनका सच से कोई लेना देना नहीं।

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Monday, 30 March, 2020
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कोरोना वायरस को लेकर आम जनता के खौफ को बढ़ाने में सोशल मीडिया का अहम योगदान है। सरकार की सख्ती के बावजूद ऐसी खबरें वायरल होती रहती हैं, जिनका सच से कोई लेना देना नहीं। उदाहरण के तौर पर अखबारों से कोरोना फैलता है। इस अफवाह के चलते लोग अखबार लेना बंद कर रहे हैं। बड़े शहरों में तो कुछ सोसाइटीज ने हॉकर्स के अंदर आने पर ही पाबंदी लगा दी है। हालांकि, सरकार लगातार इस भ्रम को दूर करने में लगी है। मीडिया हाउस अपने स्तर पर भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

इस बीच, सरकार ने लॉकडाउन के चलते मीडिया को हो रही परेशानी दूर करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा कि अखबार की गाड़ियों को न रोका जाए। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने इस बारे में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि लोगों तक अखबारों की डिलिवरी की इजाजत दी गई है। लिहाजा घरों तक अखबार पहुंचाने सहित प्रिंट मीडिया के तहत आने वाली सप्लाई चेन की गाड़ियों को न रोका जाए। सीधे शब्दों में कहें तो अखबार प्रिंट होने से लेकर गाड़ियों के जरिए डिपो तक पहुंचने और फिर वहां से वितरकों द्वारा पाठकों तक पहुंचने की इजाजत है।

गौरतलब है कि लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि अखबारों की गाड़ियों को रोका जा रहा है। मीडिया संस्थानों ने इस संबंध में सरकार का ध्यान आकर्षित किया था, जिसके बाद गृह मंत्रालय की तरफ से सभी राज्यों को स्पष्ट किया गया है कि मीडिया के काम को सुचारू रूप से चलने दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अखबार लोगों के घरों तक पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संकट काल में मीडिया के काम की सराहना कर चुके हैं। वहीं, कई विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस वक्त लोगों को अखबार पढ़ना चाहिए, ताकि वह कोरोना के मुकाबले के लिए सरकारी तैयारियों से अवगत हो सकें और वायरस से अपना बचाव कर सकें।

नहीं मान रहे लोग

सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने लोगों के दिलोदिमाग को इस कदर जकड़ लिया है कि वो कुछ सुनने को ही तैयार नहीं हैं। अधिकांश लोग यह मान बैठे हैं कि यदि उन्होंने अखबार मंगवाया, तो कोरोना भी उनके घर बिन बुलाये मेहमान की तरह पहुंच जाएगा। ऐसा तब है जब समाचार पत्रों ने बाकायदा संदेश जारी कर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि अखबारों से कोरोना का कोई खतरा नहीं है। वह लगातार बता रहे हैं कि मॉडर्न प्रिंटिंग तकनीक पूरी तरह ऑटोमेटेड है। इसमें हाथों का इस्तेमाल नहीं होता। अखबार बांटने वाली सप्लाई चेन पूरी तरह सैनिटाइज्ड होती है। बावजूद इसके सर्कुलेशन में कमी दर्ज की जा रही है। 

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COVID-19 के खिलाफ जंग में शामिल हुआ भास्कर ग्रुप, मदद के लिए बढ़ाया हाथ

कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। इस बीच दैनिक भास्कर ग्रुप भी कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में शामिल हो गया है।

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Monday, 30 March, 2020
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कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। सोमवार को लॉकडाउन का छठा दिन है। इस दौरान न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर संकट खड़ा हो गया है, बल्कि दैनिक श्रमिकों के सामने परिवार का पेट भरने की समस्या भी उत्पन्न हो गयी है।

वहीं इस बीच दैनिक भास्कर ग्रुप भी COVID-19 महामारी के खिलाफ जंग में शामिल हो गया है। ग्रुप ने कोरोना वायरस से उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों को कम करने और ऐसे दैनिक श्रमिकों के लिए एक डोनेशन प्रक्रिया शुरू की है, जिसका नाम है ‘सेवा परमो धरमा’।

बता दें कि दैनिक भास्कर ग्रुप ने देश के 12 राज्यों के 40 शहरों में 1 लाख परिवारों को एक हफ्ते तक खाना पहुंचाने का संकल्प लिया है और इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए भास्कर ग्रुप 40 शहरों के लोकल एनजीओ की मदद ले रहा है।

वहीं, भास्कर ग्रुप और उसके सभी एम्प्लॉयीज ने 1 करोड़ रुपए डोनेट कर इस पहल की शुरुआत की है। इसके अतिरिक्त डोनेशन के लिए 7 करोड़ रुपए अन्य लोगों से जुटाने का लक्ष्य रखा है। वैसे आप सभी लोगों की मदद से तस्वीर बदल सकती है। लिहाजा दैनिक श्रमिकों की मदद के लिए आगे आकर दैनिक भास्कर की इस मुहिम का हिस्सा बन सकते हैं।

आप निम्न माध्यमों से दान कर सकते हैं:

• UPI Transfer through any UPI app (Google pay, Paytm, PhonePe, BHIM etc)

• UPI ID - Q47105727@ybl

• Bank Transfer (RTGS / NEFT)

• HDFC Bank

• Name - Bhaskar Foundation

• Account No. – 01441450000456

• IFSC Code - HDFC0000144

बता दें कि वे सभी जो कुछ न कुछ राशि दानकर भास्कर ग्रुप की इस पहल के साथ जुड़ेंगे, वे आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत कर लाभ का पात्र होंगे। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.dbdigital.in/donate पर क्लिक करें।

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कल से नहीं छपेगा 50 साल पुराना यह अखबार

यह अखबार अब अपना प्रिंट एडिशन बंद कर रहा है। सोमवार यानी आज इस प्रमुख अखबार का आखिरी बार छापा जाएगा।

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
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इंटरनेट युग के आगमन के बाद कई समाचार पत्रों को संघर्ष करना पड़ रहा है, जिसमें से एक अखबार ‘इंडिया एब्रॉड’ भी है, जो अमेरिका में पिछले 50 वर्षों से भारतीय समुदाय की आवाज उठा रहा है। खबर है कि यह अखबार अब अपना प्रिंट एडिशन बंद कर रहा है। सोमवार यानी आज इस प्रमुख अखबार का आखिरी बार छापा जाएगा।

बता दें कि इस भारतीय अखबार की प्रकाशक संस्था ने इंटरनेट के बढ़ते प्रचलन के कारण प्रिंट संस्करण को बंद करने की घोषणा की दी है। 1970 में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक गोपाल राजू ने ‘इंडिया एब्रॉड’ नाम के इस अखबार की स्थापना की थी।

भारत से जुड़ी खबरों पर केंद्रित होने के चलते इस अखबार को बेहद चर्चा मिली और बहुत बड़ा पाठक वर्ग इसके साथ जुड़ गया। 2001 में रेडिफ डॉट कॉम ने इस अखबार का मालिकाना हक राजू से खरीद लिया था, जिसके बाद 2016 में रेडिफ ने इसका मालिकाना हक 8के माइल्स मीडिया इंक को बेच दिया था, जिसके चेयरमैन सुरेश वेंकटाचारी हैं।

वेंकटाचारी ने अपने एक बयान में प्रिंट एडिशन को रोकने के अपने निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि प्रिय पाठकों, मुझे यह बताते हुए खेद है कि ‘इंडिया एब्रॉड’ का आखिरी प्रिंट एडिशन मार्च 2020 को जारी किया जाएगा।

 

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आज किस हिंदी अखबार का फ्रंट पेज है सबसे बेहतर, पढ़ें यहां

दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों में आज लॉकडाउन को लेकर सरकार की सख्ती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माफी सबसे प्रमुख खबरें हैं

नीरज नैयर by
Published - Monday, 30 March, 2020
Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
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दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों में आज लॉकडाउन को लेकर सरकार की सख्ती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माफी सबसे प्रमुख खबरें हैं। शुरुआत करते हैं हिन्दुस्तान से, जहां फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन है। ‘लॉकडाउन तोड़ा तो 14 दिन अलग रहना होगा’, शीर्षक के साथ सरकार की सख्ती को लीड लगाया गया है। सरकार चाहती है कि लोग बिल्कुल भी घरों से बाहर न निकलें। कोरोना से मुकाबले के लिए यह जरूरी भी है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूरन उन्हें बाहर आना ही पड़ता है।

लीड में कोरोना की बढ़ती चाल का भी जिक्र है, देश में संक्रमितों का आंकड़ा एक हजार के पार निकल गया है। अखबार ने वायरस से प्रभावित देशों के हाल को एक टेबल में प्रदर्शित किया है, ताकि एक ही नजर में पाठकों को सबकुछ समझ आ जाए। दूसरी बड़ी खबर ‘मोदी के मन’ की बात है, जिसमें उन्होंने लॉकडाउन से हुई परेशानियों पर माफी मांगते हुए लोगों से स्थिति की गंभीरता को समझने को कहा है। वहीं, महामारी के डर से खुदखुशी करने वाले जर्मनी के मंत्री से जुड़ा समाचार और दो सिंगल खबरें भी पेज पर हैं। मसलन, ‘दिल्ली सरकार देगी मकान का किराया’ और ‘ईरान में फंसे 272 भारतीय वतन लौटे’। 

वहीं, नवभारत टाइम्स की बात करें तो लीड सरकार की सख्ती और मौजूदा हालातों को बनाया गया है। इसमें लॉकडाउन में लापरवाही बरतने वाले 4 अफसरों पर करवाई और पलायन कर रहे 5 मजदूरों की सड़क हादसे में मौत को भी रखा गया है। पीएम मोदी द्वारा मांगी गई माफी अलग से डेढ़ कॉलम में है और इसी के नीचे केजरीवाल के पलायन रोकने की अपील है।

देश में कोरोना वायरस की बढ़ती चाल के बारे में भी पाठकों को बताया गया है। एंकर में एक राहत पहुंचाने वाली खबर है। ऑनलाइन शॉपिंग संग होम डिलीवरी की शुरुआत हो गई है। हालांकि, कंपनियों को तमाम तरह की परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है, जिसमें पुलिस की रोकटोक भी शामिल है। इसके अलावा, जर्मनी के मंत्री की खुदकुशी के साथ ही कोरोना से जुड़ी कुछ अन्य खबरें भी पेज पर हैं।

अब रुख करते हैं अमर उजाला का। फ्रंट पेज की शुरुआत टॉपबॉक्स से हुई है, जिसमें सरकार की सख्ती और पीएम मोदी की माफी को जगह मिली है। लीड कोरोना की बढ़ती रफ्तार है। यूपी में वायरस के फैलाव को अलग से दो कॉलम रखा गया है। अमृतपाल सिंह बाली की बाईलाइन को प्रमुखता से पेज पर स्थान मिला है, जिन्होंने आतंकवाद के बाद कोरोना से जूझ रही घाटी के बारे में बताया है।

एंकर में ‘मन की बात’ में पीएम मोदी से आपबीती साझा करने वाले आगरा के अशोक कपूर हैं। कपूर परिवार के पांच सदस्य संक्रमित हो गए थे, लेकिन डॉक्टर उन्हें मौत के मुंह से बाहर खींच लाये। इसके अलावा, जर्मनी के मंत्री की खुदकुशी सहित कुछ अन्य समाचार भी पेज पर हैं।

राजस्थान पत्रिका ने आज भी अपने मास्टहेड में प्रयोग किया है। लीड मोदी की माफी और सरकार की सख्ती है। कोरोना की बढ़ती चाल को अलग से तीन कॉलम जगह मिली है। लॉकडाउन तोड़ने वालों के खिलाफ पुलिस बर्बरता को लेकर केरल हाई कोर्ट के न्यायाधीश के पत्र से भी अखबार ने पाठकों को रूबरू कराया है। जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा है कि बल प्रयोग न किया जाए।

एंकर में कोरोना से मुकाबले के लिए आईआईटी और एम्स के पूर्व छात्रों द्वारा तैयार किया गया रोबोट है। यह रोबोट शहरों को सैनेटाइज करेगा। इसके अलावा, पेज पर कुछ अन्य समाचार हैं, लेकिन आत्महत्या करने वाले जर्मनी के मंत्री का जिक्र नहीं है।

सबसे आखिरी में आज रुख करते हैं दैनिक जागरण का। फ्रंट पेज की शुरुआत मोदी की माफ़ी वाले टॉप बॉक्स से हुई है। लीड सरकार की सख्ती और निर्देश हैं। सरकार ने सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के साथ ही मकान मालिकों से एक महीने का किराया न लेने को कहा है।

वहीं, कोरोना की बढ़ती चाल के साथ ही लॉकडाउन से आगे की तैयारी भी पेज पर है। केंद्र ने सबकुछ पहले जैसा करने के लिए 11 समूहों का गठन किया है। एंकर की बात करें तो यहां मजदूरों के पलायन और उससे जुड़े संकट पर प्रकाश डाला गया है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के लिहाज से आज अमर उजाला सबसे बेहतर दिखाई दे रहा है। नवभारत टाइम्स के पास भी पूरा पेज था, लेकिन लेआउट में आज वह कुछ कमाल नहीं दिखा सका है। हिन्दुस्तान का फ्रंट पेज जरूर सीमित जगह में भी आकर्षक नजर आ रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति में भी अमर उजाला का बेहतर है, जबकि दूसरे स्थान पर हिन्दुस्तान को रखा जा सकता है।

3: शीर्षक को कलात्मक बनाने का प्रयास आज किसी भी अखबार ने नहीं किया है।

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नवभारत टाइम्स का यह शीर्षक दर्शाता है, बेवजह ‘हीरो’ न बनें और बचाव करें

कोरोना से मुकाबले के लिए वित्त मंत्रालय के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक भी आगे आया है।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 28 March, 2020
Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
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कोरोना से मुकाबले के लिए वित्त मंत्रालय के बाद अब रिजर्व बैंक भी आगे आया है। हालांकि, रिजर्व बैंक की ‘राहत’ उसी सूरत में जनता तक पहुंचेगी, जब बैंक चाहेंगे। इस राहत के साथ ही कोरोना से जुड़ी अन्य खबरें आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों में हैं। शुरुआत करते हैं नवभारत टाइम्स से, जहां फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं है। लीड रिजर्व बैंक का फैसला है, जिसने रेपो दरों में कमी करने के साथ ही बैंकों से ईएमआई तीन महीनों के लिए टालने को कहा है। यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि ‘ईएमआई’ सिर्फ टाली जाएंगी, यानी आपको उन्हें आगे देना होगा, वो माफ नहीं होंगी।

लॉकडाउन के दौरान नजर आई बेबसी की तस्वीर को भी प्रमुखता से पेज पर रखा गया है। इस तरह की खबरों को उठाना बेहद आवश्यक है, ताकि सरकार और प्रशासन ज्यादा संवेदनशील बन सकें। वहीं, केंद्र के निर्देश और दिल्ली सरकार की तैयारी को भी जगह मिली है। केंद्र ने राज्यों से उन लोगों को खोज निकालने को कहा है, जो विदेश से आये हैं। सरकार के मुताबिक पिछले 2 महीनों में तकरीबन 15 लाख लोग विदेश से आये हैं, लेकिन जांच केवल कुछ की ही हो सकी है। उधर, केजरीवाल सरकार रोजाना 4 लाख लोगों को खाना खिलाने जा रही है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, यह खबर भी पेज पर है। एंकर में लॉकडाउन की एक अलग तस्वीर से पाठकों को रूबरू कराया गया है।

अब चलते हैं हिन्दुस्तान पर, यहां फ्रंट पेज पर केवल एक विज्ञापन है। लीड रिजर्व बैंक का फैसला है, जिसे काफी सुलझे हुए ढंग से पाठकों के समक्ष पेश किया गया है। केजरीवाल सरकार के दावे और तैयारी को सेकंड लीड का दर्जा मिला है। वहीं, कोरोना पीड़ित ब्रिटिश प्रधानमंत्री और वायरस से निपटने के लिए सेना के ऑपरेशन ‘नमस्ते’ को भी पेज पर रखा गया है।

इसके अलावा, सरकार के एक महत्वपूर्ण आदेश से भी पाठकों को अवगत कराया गया है। जिसके तहत सभी जिलाधिकारी गांवों में जाकर संक्रमित खोजेंगे। एंकर में अरविंद मिश्र की बाईलाइन को जगह मिली है। उन्होंने एक आईएएस दंपति की मनमानी और कोरोना से निपटने में आम आदमी के सहयोग के बारे में बताया है।

वहीं, अमर उजाला के फ्रंट पेज पर नवभारत टाइम्स की तरह कोई विज्ञापन नहीं है। पेज की शुरुआत लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की स्थिति बयां करती तस्वीर से हुई है। लीड दूसरी बड़ी राहत है, जिसे सरल तरह से पाठकों को समझाने का प्रयास किया गया है। इसके पास ही देश में बढ़ती कोरोना की चाल है, संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 724 पहुंच गया है।

केजरीवाल सरकार की तैयारी, ब्रिटिश प्रधानमंत्री, केरल में होम क्वारनटाइन से भागे आईएएस के निलंबन के साथ ही खौफ पैदा करती एक और खबर पेज पर है। एंकर में ललित ओझा की बाईलाइन है, जिन्होंने राजस्थान में 24 हजार लोगों की स्क्रीनिंग के बारे में बताया है।

आज भी राजस्थान पत्रिका ने अपने फ्रंट पेज के मास्टहेड में प्रयोग किया है। लीड दूसरी बड़ी राहत है, जिसमें सरकार की तैयारियों का भी जिक्र है। वहीं, पीएम का रेडियो जॉकी से संवाद, सेना की तैयारी और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश भी पेज पर है।

संक्रमण के फैलाव से बचने के लिए सरकार ने राज्यों से मजदूरों के पलायन को रोकने को कहा है, इस खबर को भी जगह मिली है। एंकर में सीबीएसई सचिव के पत्र का जिक्र है. जिन्होंने छात्रों और शिक्षकों से सीखने एवं अपग्रेड होने को कहा है।

सबसे आखिरी में बात करते हैं दैनिक जागरण की। लीड ‘कर्ज सस्ता, ईएमआई में मोहलत’ शीर्षक के साथ दूसरी बड़ी राहत को लगाया गया है। सेकंड लीड मजदूरों के पलायन पर मोदी सरकार का निर्देश है।

अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि दुनिया मंदी में प्रवेश कर चुकी है, इस खबर के साथ ही भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद का बयान भी पेज पर है। परिषद का कहना है कि अभी बड़े पैमाने पर कोरोना का टेस्ट करने की जरूरत नहीं है, जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, दूरदर्शन पर आज से शुरू होने वाली ‘रामायण’ के बारे में भी पाठकों को सूचित किया गया है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में हिन्दुस्तान आज भी सबसे आगे है, जबकि दूसरे नंबर पर नवभारत टाइम्स को रखा जा सकता है।

2: खबरों की प्रस्तुति में भी हिन्दुस्तान अव्वल है और दूसरा स्थान अमर उजाला को दिया जा सकता है।

3: शीर्षक को कलात्मक बनाने का प्रयास आज केवल नवभारत टाइम्स और राजस्थान पत्रिका ने किया है। राजस्थान पत्रिका ने जहां लीड का शीर्षक लगाया है ‘ईएमआई की चिंता छोड़ें, कोरोना से लड़ें’। वहीं, नवभारत टाइम्स ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री से जुड़ी हेडलाइन में कलात्मकता का प्रदर्शन किया है। खबर का शीर्षक है, ‘कहते थे मैं हाथ मिलाऊंगा, ब्रिटिश पीएम को हुआ कोरोना’। यह शीर्षक उन लोगों के लिए एक सबक की तरह है, जो कहते हैं कि उन्हें कुछ नहीं होगा।

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सरकार की आर्थिक राहत को लेकर कैसी रही हिंदी अखबारों की कवरेज, पढ़ें यहां

हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण में आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by
Published - Friday, 27 March, 2020
Last Modified:
Friday, 27 March, 2020
Newspapers

कोरोना से जंग में सबसे ज्यादा मार झेल रहे तबके को राहत पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने आर्थिक पैकेज पैकेज का ऐलान किया है। इसी पैकेज की बारीकियों को आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों ने पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

सबसे पहले बात करते हैं अमर उजाला की, जहां फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं होने के चलते खबरों को अच्छी तरह से पेश किया जा सका है। ‘सबसे बड़ी राहत’ शीर्षक के साथ आर्थिक पैकेज को लीड लगाया गया है। खबर में हर घोषणा को विस्तार से समझाया गया है। साथ ही बाजार का हाल और विपक्ष की प्रतिक्रिया को भी जगह मिली है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकार की चुनौती को अलग से रखा है। कोरोना देश के 26 राज्यों तक पहुंच गया है। इसके अलावा, पेज पर विडियो कांफ्रेंसिंग से हुई जी-20 देशों की बैठक है और एंकर में कोरोना से जूझते इटलीवासियों पर लगी पाबंदी है।

अब रुख करते हैं दैनिक जागरण का। सरकार के आर्थिक पैकेज को फ्रंट पेज की लीड लगाया गया है, जिसका शीर्षक कोरोना को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

वहीं, नीलू रंजन की बाईलाइन और दिल्ली सरकार के अहम फैसले को पर्याप्त जगह मिली है। नीलू ने बताया है कि कोरोना संक्रमण के एक दिन में सबसे अधिक 88 मामले गुरुवार को दर्ज किये गए। दिल्ली में जरूरी वस्तुओं की दुकानें अब 24 घंटे खुली रहेंगी। एंकर में जयप्रकाश रंजन की बाईलाइन है, जिन्होंने जी-20 के वर्चुअल सम्मलेन के बारे में विस्तार से पाठकों को बताया है।

हिन्दुस्तान में भी आज पाठकों को काफी खबरें मिली हैं। फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं होने की वजह से सभी जरुरी खबरों को पर्याप्त स्थान मिला है। लीड आर्थिक पैकेज है, जबकि दिल्ली सरकार की तैयारी और कोरोना के प्रभाव से जुड़ी दो अन्य खबरों को दो-दो कॉलम में रखा गया है।

सेकंड लीड का दर्जा वर्चुअल जी-20 सम्मलेन को मिला है। वहीं, मौसम का बदलता मिजाज और महामारी से निपटने के लिए केंद्र की रणनीति भी पेज पर है। अखबार ने कोरोना से जूझ रहे अमेरिका के हाल को भी पाठकों तक पहुंचाया है, साथ ही मेट्रो बंदी की खबर भी पेज पर है। एंकर की बात करें तो यहां वायरस से जंग में मदद के लिए आगे आये उद्योगपति हैं।

वहीं नवभारत टाइम्स की बात करें तो फ्रंट पेज की शुरुआत पाठकों को समझाइश वाली टॉप बॉक्स से हुई है, जिसमें बताया गया है कि न्यूजपेपर से कोरोना नहीं फैलता। लीड आर्थिक पैकेज है, जिसे ‘बूस्टर डोज’ शीर्षक के साथ पाठकों के समक्ष पेश किया गया है। अखबार ने लॉकडाउन के दौरान पुलिस की बर्बरता को प्रमुखता से उठाया है, जो बेहद जरूरी है। पुलिसकर्मियों को पर्याप्त निर्देश दिए जाने की आवश्यकता है कि पब्लिक के साथ किस तरह से पेश आना है। साथ ही मजदूरों की मजबूरी को भी पेज पर रखा गया है।

दिल्ली सरकार के 24 घंटे जरूरी वस्तुओं की दुकानें खोलने के फैसले के साथ ही कोरोना से देश और विदेश के हाल के बारे में भी बताया गया है। एंकर में भी लोगों को अखबारों के बारे में जागरूक करता समाचार है। हालांकि, पूरी खबर में यह बताने का प्रयास नहीं किया गया है कि RWA का मतलब क्या है। यह जरूरी नहीं कि हर पाठक को वह जानकारी हो, जो अखबार तैयार करने वाले पत्रकारों को होती है, लिहाजा इस तरह के मामलों में फुलफॉर्म का भी जिक्र किया जाना चाहिए।

आखिरी में रुख करते हैं राजस्थान पत्रिका का। अखबार ने सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर अपने मास्टहेड में प्रयोग किया है। लीड आर्थिक पैकेज है, जिसे काफी विस्तार से पाठकों के सामने प्रस्तुत किया गया है। साथ ही कोरोना की बढ़ती चाल का भी लीड में जिक्र है।

वर्चुअल जी-20 सम्मलेन, कोरोना से मुकाबले के लिए मोदी सरकार की रणनीति और सेना की तैयारी को भी प्रमुखता से पेज पर रखा गया है। एंकर में मुकेश केजरीवाल की बाईलाइन है, जिन्होंने नीति आयोग के उपाध्यक्ष से बातचीत की है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट की बात करें, तो आज हिन्दुस्तान अव्वल है। अखबार का फ्रंट पेज काफी संतुलित एवं आकर्षक नजर आ रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति का जहां तक सवाल है, तो आज राजस्थान पत्रिका और अमर उजाला ने सबको पीछे छोड़ दिया है। दोनों अखबारों ने आर्थिक पैकेज वाली खबर को काफी विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा है।

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में आज सभी अखबारों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी है, लेकिन विजेता का ताज राजस्थान पत्रिका के सिर ही सजेगा। ‘अन्न-धन का ईंधन’ पैकेज के पीछे सरकार की सोच और तैयारी को ज्यादा स्पष्ट करता है। 

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अखबारों ने दोहराई फेक न्यूज से लड़ाई के प्रति प्रतिबद्धता, पाठकों को यूं दिलाया भरोसा

ऐसे समय में जब कोरोनावायरस जैसी महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है, फेक न्यूज की आशंका भी बढ़ गई है।

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
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ऐसे समय में जब कोरोनावायरस जैसी महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है, फेक न्यूज की आशंका भी बढ़ गई है। इन सबके बीच ‘इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी’ (INS) केरल ने एक विज्ञापन के जरिये पाठकों के समक्ष फेक न्यूज से लड़ने और फर्जी सूचनाओं का प्रसार रोकने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।  

इस बारे में केरल के सभी अखबारों में 25 मार्च के एडिशन में फ्रंट पेज पर एक विज्ञापन पब्लिश किया गया है। इसमें बताया गया है कि ऐसे समय में फेक न्यूज काफी घातक साबित हो सकती है और लोगों के मन में भय पैदा कर सकती है। ऐसे में हम अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह समझते हैं और रोजाना अपने पाठकों को संपूर्ण तथ्यों की जांच करने के बाद ही विश्वसनीय सूचनाएं उपलब्ध कराते हैं।

 

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आज इस अखबार का फ्रंट पेज है सबसे बेहतर

कोरोना के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर जनता का साथ मांगा है।

नीरज नैयर by
Published - Thursday, 26 March, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
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कोरोना के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर जनता का साथ मांगा है। वहीं, केंद्रीय कैबिनेट ने वायरस के खौफ को देखते हुए आमजन को राहत पहुंचाने वाले कुछ फैसले लिए हैं। इन दो खबरों के साथ ही लॉकडाउन के पहले दिन का हाल दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सुर्खियां हैं। सबसे पहले बात हिन्दुस्तान की। फ्रंट पेज के टॉप बॉक्स में ‘घरों में राशन नहीं, बाजार में भी आपूर्ति घटी’ शीर्षक के साथ लोगों की परेशानी को रखा गया है। लीड कैबिनेट के फैसले है, जिनके तहत 80 करोड़ लोगों को सस्ता अनाज दिया जाएगा।

पीएम के जनता से संवाद को अलग से दो कॉलम में रखा गया है। मोदी ने कोरोना के खिलाफ जंग की तुलना महाभारत से की, साथ ही उन्होंने लोगों से इस संकट की घड़ी में बेजुबानों का ख्याल रखने को भी कहा। प्रिंट चार्ल्स के कोरोना की चपेट में आने के साथ ही मुख्यमंत्री केजरीवाल की सख्ती को भी पेज पर जगह मिली है। केजरीवाल ने साफ किया है कि डॉक्टरों से घर खाली करवाने वालों पर कार्रवाई होगी। वहीं, काबुल में गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले और अयोध्या में अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला को भी पर्याप्त स्थान मिला है। एंकर में झारखंड की घटना का जिक्र है, जो दर्शाती है कि कोरोना का खौफ किस कदर लोगों के दिमाग पर असर कर रहा है। इसके अलावा, पेज पर कुछ अन्य समाचार भी हैं।

अब चलते हैं राजस्थान पत्रिका पर। ‘न पेट भरने का जुगाड़, न रहने का ठिकाना’ शीर्षक के साथ लॉकडाउन में लोगों की पीड़ा को लीड लगाया गया है। पीएम का जनता से संवाद, मध्यप्रदेश में कोरोना से पहली मौत भी लीड का हिस्सा है। साथ ही कैबिनेट के फैसलों को हाईलाइट करके दिखाया गया है, ताकि पाठकों को एक ही झटके में सब समझ आ जाए। हालांकि, ‘कैबिनेट के फैसले’ वाले इस बॉक्स में चार नंबर पर भोपाल में संक्रमित पत्रकार के बारे में बताया गया है। अब क्या पाठक इसे भी कैबिनेट का फैसला माने? यहां निश्चित रूप से फ्रंट पेज की टीम से गलती हुई है।

कैबिनेट की बैठक के फोटो को अलग से रखा गया है, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग साफ़ नजर आ रही है। इसके अलावा, काबुल में गुरुद्वारे पर हमला और अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला की खबर को भी स्थान मिला है। एंकर में लोगों की हाथ धोने की आदत से जुड़ा समाचार है।

वहीं, नवभारत टाइम्स का रुख करें तो यहां पीएम के संवाद को लीड लगाया गया है। इसी में केंद्रीय कैबिनेट के फैसले और केजरीवाल सरकार की तैयारी का भी जिक्र है। लॉकडाउन से परेशानी और पुलिस की सख्ती अलग-अलग लगाया गया है। जहां एक व्यक्ति ने नौकरी जाने के चलते अपनी जान दे दी, वहीं दिल्ली पुलिस ने बाहर निकले 5100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, कोरोना के बढ़ते मामले और काबुल में गुरुद्वारे पर हुए हमले को भी प्रमुखता के साथ जगह दी गई है। इसके अलावा, अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला के साथ कुछ अन्य समाचार भी पेज पर हैं।

आज अमर उजाला पर नजर डालें तो कोरोना के खौफ के बीच कैबिनेट के फैसलों को लीड लगाया गया है। पीएम का जनता से संवाद और अपील अलग से दो कॉलम में है। लीड में संक्रमित प्रिंस चार्ल्स सहित कोरोना से जुड़ी कई खबरों का जिक्र है। काबुल में गुरुद्वारे पर हुए हमले को अखबार ने प्रमुखता के साथ पाठकों तक पहुंचाया है।

इसके अलावा नए घर में विराजे रामलला और एंकर में सामाजिक दूरी न बनाने पर होने वाले दुष्परिणामों का जिक्र है। साथ ही इसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री का बयान भी शामिल है, जिनका कहना है कि यदि लोगों ने लॉकडाउन नहीं माना तो गोली मारने के आदेश जारी किये जायेंगे।

आखिरी में बात कर लेते हैं दैनिक जागरण की। फ्रंट पेज पर पीएम मोदी के संवाद को लीड लगाया गया है। वहीं, कैबिनेट की बैठक में नजर आई सोशल डिस्टेंसिंग और प्रकाश जावड़ेकर के बयान को अलग से चार कॉलम जगह मिली है, लेकिन केंद्रीय कैबिनेट के फैसलों को प्रमुखता से दर्शाने का प्रयास नहीं किया गया है। महत्वपूर्ण फैसलों को इस तरह से प्रदर्शित किया जाना चाहिए कि पाठकों को उन्हें खबर में खोजना न पड़े। कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या और आर्थिक पैकेज की तैयारी को प्रमुखता के साथ पेज पर रखा गया है। एंकर में अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला हैं।

आज का किंग कौन?

1: लेआउट के मामले में नवभारत टाइम्स सबसे आगे है, जबकि राजस्थान पत्रिका और अमर उजाला को दूसरे नंबर पर रखा जा सकता है।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो सभी ने अच्छा किया है, फिर भी अमर उजाला को पहले स्थान पर रखा जाना चाहिए। अखबार ने लीड को काफी समृद्ध बनाया है।

3: शीर्षक को कलात्मक बनाने के प्रयास में नवभारत टाइम्स और राजस्थान पत्रिका ही आज सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं।

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The Hindu समूह ने अपनी मैगजीन को लेकर लिया ये बड़ा निर्णय

ग्रुप की ओर से एक ट्वीट कर पाठकों को इस बारे में दी गई है जानकारी

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
The Hindu

महामारी बन चुके कोरोना वायरस (कोविड-19) के खतरे को देखते हुए ‘द हिंदू’ (THE HINDU) ग्रुप की स्पोर्ट्स मैगजीन ‘स्पोर्टस्टार’ (SPORTSTAR) ने अपने 43 साल के इतिहास में पहली बार अपना प्रिंट इश्यू 15 अप्रैल तक बंद करने की घोषणा की है। ग्रुप की ओर से जारी एक ट्वीट में कहा गया है, ‘प्रिय पाठको, करीब 43 साल में पहली बार हम 15 अप्रैल तक अपना प्रिंट एडिशन बंद कर रहे हैं। हालांकि, हमारी वेबसाइट #StayIndoors पर हम अपने वर्तमान और आने वाले इश्यू आपको उपलब्ध कराएंगे, जिन्हें आप वेबसाइट से फ्री में डाउनलोड कर सकते  हैं।’

इस ट्वीट में एक क्रिएटिव भी शामिल किया गया, जिसमें ओलंपिक के पांचों छल्लों (नीला, पीला, काला, हरा और लाल) को दिखाया गया है, लेकिन इन्हें दूर-दूर कर सोशल डिस्टेंसिंग का मैसेज दिया गया है।

बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में 21 दिनों (चार अप्रैल तक) के लॉकडाउन की घोषणा की है। ग्रुप की ओर से यह कदम इसी दिशा में उठाया गया है।

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