आज इन खबरों को मिली अखबारों के फ्रंट पेज पर प्रमुखता

नवभारत टाइम्स के फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन है, जबकि हिन्दुस्तान के फ्रंट पेज पर एक छोटा विज्ञापन है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Tuesday, 05 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 05 November, 2019
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दिल्ली की जहरीली हवा पर सरकार से लेकर कोर्ट तक हर कोई मंथन करने में लगा है। सभी की यही कोशिश है कि हालात सामान्य हो जाएं। हालांकि, जब तक ये जद्दोजहद चलेगी, अखबारों के फ्रंट पेज की टीम को लीड की समस्या नहीं होगी। लीड की तलाश आसान काम नहीं होता, कभी-कभी खबरों का इतना ‘सूखा’ पड़ जाता है कि समझ ही नहीं आता कि लीड किसे लगाएं।

बहरहाल, आज के अखबारों के फ्रंट पेज की बात करें तो नवभारत टाइम्स के पाठकों को आधा पेज खबरों के साथ आधा पेज विज्ञापन भी मिले हैं। लीड जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी है। खबर को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, लेकिन तीन लाइन की हेडिंग कुछ अटपटी नजर आ रही है। वकील-पुलिस भिड़ंत को प्रमुखता के साथ तीन कॉलम में रखा गया है। वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेड डील से भारत हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पीछे हट गया है। इसके अलावा, पेज पर दो सिंगल कॉलम खबरें हैं। पहली कश्मीर में आतंकी हमले की है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई है और 35 जख्मी हैं। दूसरी खबर है, इंडिगो का सर्वर फेल होने की। एयरलाइंस के सर्वर ने बीच में ही धोखा दे दिया, जिसके चलते यात्री परेशान होते रहे।

आज हिन्दुस्तान में भी लीड जहरीली हवा पर कोर्ट की टिप्पणी है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि हालात इमरजेंसी से भी बदतर हैं। इसी के साथ मदन जैड़ा की बाईलाइन स्टोरी भी है, जो बता रहे हैं कि राजधानी की सड़कों पर लगे एयर प्यूरीफायर भी फेल हो रहे हैं। सबसे बड़ी ट्रेड डील से भारत के हटने को दूसरी बड़ी खबर के रूप में पेज पर रखा गया है। महाराष्ट्र का सियासी संग्राम और वकील-पुलिस भिड़ंत को हिन्दुस्तान ने प्रमुखता के साथ जगह दी है। इंडिगो की सर्वर समस्या के साथ ही कश्मीर में आतंकी हमले को दो-दो कॉलम में लगाया गया है।

एंकर में अरविंद सिंह की बाईलाइन स्टोरी है। इस स्टोरी के मुताबिक फ़ास्ट टैग से टोल भरा जाए तो प्रदूषण 28 फीसदी कम हो जाएगा। इसके अलावा, पेज पर सिंगल कॉलम खबरें भी हैं। पहली सिद्धू को पाकिस्तान का निमंत्रण और दूसरी विकास यादव को पैरोल से इनकार। इमरान खान चाहते हैं कि सिद्धू करतारपुर गलियारे के उद्घाटन के मौके पर उनके साथ मौजूद रहें। वैसे लगता नहीं है कि वे इस निमंत्रण को स्वीकार करेंगे, क्योंकि अपने क्रिकेटर दोस्त इमरान के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर को लेकर वो पहले ही ‘हिट विकेट’ हो चुके हैं। उधर, अदालत ने नीतीश कटारा हत्याकांड के मुख्य आरोपित विकास यादव को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि पैरोल भूल जाये।

वहीं, अमर उजाला ने केबीसी के ‘फ्लिप द क्वेश्चन’ की तरह फ्रंट पेज के लेआउट को फ्लिप कर दिया है। कल पेज की शुरुआत लीड से हुई थी और उसके पास तीन कॉलम था। आज दो कॉलम से पेज शुरू हुआ है और उसके पास लीड है। फर्क बस कॉलम का है। खैर, सबसे बड़ी ट्रेड डील से भारत के पीछे हटने को प्रमुखता से पेज पर जगह मिली है। लीड जहरीली हवा पर कोर्ट की टिप्पणी है, जिसके साथ ही दिल्ली और एनसीआर में धूप, तेज हवाओं से राहत को भी रखा गया है।

नीतीश कटारा हत्याकांड के मुख्य आरोपित विकास यादव की खबर को अमर उजाला ने अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है। इसकी हेडिंग कोर्ट की टिप्पणी से बनाई गई है, जिससे साफ पता चलता है यादव की अर्जी पर कोर्ट का क्या रुख रहा। घाटी में हमला और इंडिगो के खराब सर्वर की खबर भी पेज पर है। एंकर में वकीलों की आक्रामकता को लगाया गया है।

अब यदि दैनिक जागरण की बात करें तो अखबार में लीड जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी है, जिसे डीप चार कॉलम में बिना किसी फोटो या ग्राफिक्स के उतारा गया है और वो भी सिंगल लाइन शीर्षक के साथ। वहीं, सबसे बड़ी ट्रेड डील से भारत के हटने को भी दैनिक जागरण ने सिंगल लाइन हेडिंग में तीन कॉलम में आधे पेज तक उतारा है। गनीमत बस इतनी है कि इस खबर में फोटो है। न्यूनतम 9 घंटे करना होगा काम, इस समाचार को दैनिक जागरण ने आज जगह दी है, जबकि कल ही कुछ अखबार इसे प्रकाशित कर चुके हैं। एंकर में सौरव गांगुली हैं, जो आईपीएल में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहे हैं। अब बदलाव क्या होंगे, इसके लिए आपको खबर पढ़नी होगी। लगता है वकीलों की आक्रामकता को दैनिक जागरण ने बेहद कम आंका है, इसलिए खबर संक्षिप्त में लगाई गई है।

आखिर में दैनिक भास्कर का रुख करते हैं। अखबार के फ्रंट पेज पर लीड जहरीली हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की किसानों पर तीखी टिप्पणी है और इसके ऊपर विज्ञापन के रूप में हरियाणा के मुख्यमंत्री किसानों से पराली न जलाने की अपील कर रहे हैं। वैसे, सोचने वाली बात ये है कि किसान पराली सालों से जलाते आ रहे हैं, पहले तो कभी ऐसी समस्या नहीं हुई। आज यदि एकदम से हवा में जहर घुल गया है तो इसके लिए क्या सिर्फ किसानों को कुसूरवार ठहराना जायज है? दैनिक भास्कर ने वकील-पुलिस भिड़ंत की खबर को फोटो के साथ लगाया है।

उधर, निर्भया कांड में मृत्युदंड का सामना कर रहे दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया है। इस खबर को भी अखबार ने पेज पर रखा है। हालांकि, तेलंगाना में महिला तहसीलदार को दफ्तर में जिंदा जलाने के समाचार को दैनिक भास्कर ने महज सिंगल में लगाकर उसके साथ न्याय नहीं किया है, जबकि महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को आज भी बड़ी जगह मिली है। इसके अलावा, पेज पर श्रीनगर में आतंकी हमला और रेल टिकट का भुगतान यूपीआई से करने पर सर्विस चार्ज में 50% की छूट से जुड़ा समाचार भी है। एंकर में अखबार ने एक ऐसी खबर को सजाया है, जिसे न केवल सबसे ज्यादा पढ़ा जाएगा, बल्कि भारत में इसके अमल के ख्वाब भी बुने जाएंगे। माइक्रोसॉफ्ट ने जापान में चार दिन काम कराने का फंडा अपनाया और कर्मचारियों की उत्पादकता 40 फीसदी बढ़ गई। अपने देश में तीन छुट्टियां मिलने के बाद भी उत्पादकता बढ़ेगी या नहीं, ये यक्ष प्रश्न है।

आज का 'किंग' कौन?

1: दैनिक जागरण को छोड़कर बाकी अखबारों का लेआउट अच्छा है, लेकिन फिर भी बेहतरीन नहीं कहा जा सकता।

2: खबरों की प्रस्तुति, खासकर लीड में हिन्दुस्तान ने सबसे अच्छा किया है। नवभारत टाइम्स के पास सीमित जगह थी, मगर लीड की प्रेजेंटेशन में कमाल दिखाया जा सकता था।

3: कलात्मक शीर्षक पर आज किसी समाचारपत्र ने जोर नहीं दिया है।

4: खबरों की बात करें तो इन अखबारों के फ्रंट पेज लगभग एक समान हैं, लेकिन दैनिक भास्कर ने तेलंगाना में महिला तहसीलदार को जिंदा जलाने के समाचार को पेज पर रखकर बेहतरीन काम किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि दूसरे अखबारों ने इस महत्वपूर्ण खबर को संक्षिप्त में भी जगह नहीं दी है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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किस अखबार का कैसा रहा आज का फ्रंट पेज, देखें यहां...

दैनिक जागरण में आज दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं, जबकि दैनिक भास्कर में फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन है। हिन्दुस्तान के फ्रंट पेज पर दो और अमर उजाला व नवभारत टाइम्स के फ्रंट पेज पर एक बड़ा विज्ञापन है।

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
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यदि आप सोच रहे हैं कि अयोध्या विवाद आखिरकार निपट गया तो आप गलत हैं। इस विवाद का ‘नया अध्याय’ शुरू होने जा रहा है। दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों ने आज इसी बात को प्रमुखता से उठाया है। शुरुआत दैनिक भास्कर से करते हैं। फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन है। इसके बावजूद पाठकों के समक्ष ज्यादा से ज्यादा खबरें प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। लीड अयोध्या है और दूसरी बड़ी खबर के रूप में प्रताप क्षेत्री की बाईलाइन स्टोरी है। उन्होंने बताया है कि मिजोरम के सैनिक स्कूल में पहली बार 12 लड़कियों को दाखिला मिला है।

भाजपा-शिवसेना में बढ़ती दूरियों के साथ ही सबरीमाला मंदिर की खबर को भी पेज पर रखा गया है। आज से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र को अखबार ने सिंगल में लगाया है। इसी के साथ दो अन्य महत्वपूर्ण सिंगल खबरें भी फ्रंट पेज पर हैं। पहली, गौतम गंभीर के ‘लापता’ होने की। दरअसल, सांसद महोदय को लेकर दिल्ली में पोस्टर लगाये गए हैं, जिन पर लिखा है ‘लापता...क्या आपने इन्हें देखा है? आखिरी बार इंदौर में जलेबी खाते देखा गया था’। दूसरी, निर्भया केस फिर से एक अन्य अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया है।

आज हिन्दुस्तान के फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं। इसके बावजूद पाठकों के पढ़ने के लिए पेज पर काफी कुछ है। लीड अयोध्या है, जिसे ‘अयोध्या पर आदेश को चुनौती देगा बोर्ड’ शीर्षक तले तीन कॉलम में रखा गया है। पेज पर स्कन्द विवेक धर की बाईलाइन को प्रमुखता से स्थान मिला है, जो बता रहे हैं कि आयुष्मान योजना का लाभ उठाने में यूपी और बिहार फिसड्डी साबित हुए हैं। दिल्ली को प्रदूषण से मिली मामूली राहत के साथ ही शीतसत्र से पहले पीएम मोदी के बयान को भी पेज पर रखा गया है। मोदी का कहना है कि हम सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।

फर्जीवाड़े से जुड़ी एक खबर को चार कॉलम में लगाया गया है। दिल्ली पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर पर कार्रवाई करते हुए 35 लोगों को गिरफ्तार किया है, ये लोग अब तक कनाडा के 500 से ज्यादा लोगों को करोड़ों का चूना लगा चुके हैं। इसके अलावा, पेज पर पांच सिंगल समाचार भी हैं। इनमें ‘जस्टिस बोबडे आज लेंगे शपथ’, ‘जेएनयू में तोड़फोड़ के खिलाफ केस दर्ज’, राजपक्षे ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज की’ और ‘आगरा का नाम बदलने की तैयारी’ शामिल हैं।

वहीं, अमर उजाला के फ्रंट पेज पर भी बड़ा विज्ञापन है। लीड अयोध्या है और इसके पास ही संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाले मुद्दों के बारे में बताया गया है। फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी सहित जस्टिस बोबडे और राजपक्षे की खबर को भी फ्रंट पेज पर रखा गया है। जस्टिस बोबडे आज चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का पदभार संभालेंगे। वहीं, राजपक्षे एक बार फिर से श्रीलंका के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं।

दिल्ली की हवा में आये सुधार को एंकर में जगह मिली है। घाटी में हुए आईईडी ब्लास्ट को दो कॉलम में रखा गया है। इस धमाके में एक जवान शहीद हो गया, जबकि दो घायल हैं। इसके अलावा, कश्मीर के राजनीतिक बंदियों और नक्सलवादियों से जुड़ी खबर डेढ़-डेढ़ कॉलम में है। घाटी में अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद से नजरबंद किए गए नेताओं पर चार करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। उधर, नक्सलियों ने ड्रोन से सीआरपीएफ शिविर की निगरानी करके सबको चौंका दिया है।

अब बात नवभारत टाइम्स की करते हैं। फ्रंट पेज पर बड़े विज्ञापन के चलते ज्यादा जगह नहीं है। पेज की शुरुआत रंगीन बॉक्स से हुई है, जिसमें दिल्ली की साफ होती हवा को फोटो के साथ रखा गया है। लीड अयोध्या है। दरअसल, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने का फैसला लिया है। अखबार ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए ‘अयोध्या पर एक और अध्याय खोलने को तैयार मुस्लिम बोर्ड’ शीर्षक लगाया है।

इसके अलावा पेज पर आज से शुरू हो रहे संसद के शीतसत्र से जुड़ी खबर है और एंकर में भाजपा एवं शिवसेना के बीच बढ़ती दूरियों को दर्शाता समाचार है। बाल ठाकरे की पुण्यतिथि के मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री फडनवीस पर शिवसैनिकों ने कटाक्ष किये।

आखिरी में  दैनिक जागरण का रुख करते हैं। अखबार में आज दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं। पहला पेज अयोध्या के नाम है जबकि दूसरे पेज पर संसद सत्र से पहले पीएम मोदी के बयान को लीड लगाया गया है। वहीं, दूसरी बड़ी खबर महाराष्ट्र से है। ओम प्रकाश तिवारी ने अपनी बाईलाइन में बताया है कि राकांपा प्रमुख शरद पवार सरकार गठन को लेकर आज दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे।

श्रीलंका में राजपक्षे की जीत को सबसे बड़ी जगह इसी अखबार ने दी है, इस खबर को तीन कॉलम में रखा गया है। साथ ही सबरीमाला मंदिर विवाद पर केरल के कानूनमंत्री के बयान को भी प्रमुखता मिली है। मंत्री महोदय का कहना है कि मंदिर को अखाड़ा नहीं बनने देंगे। एंकर में अनिल मिश्रा की बाईलाइन है। अनिल ने नक्सलियों द्वारा इस्तेमाल किये गए ड्रोन के बारे में विस्तार से बताया है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में आज ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिन्दुस्तान’ और ‘दैनिक भास्कर’ सबसे आगे हैं। ‘अमर उजाला’ का फ्रंट पेज कुछ अटपटा दिखाई दे रहा है और ‘दैनिक जागरण’ का फ्रंट पेज नीरस है।

2: खबरों की प्रस्तुति में ‘हिन्दुस्तान’ और ‘नवभारत टाइम्स’ अव्वल हैं।     

3: कलात्मक शीर्षक आज केवल ‘नवभारत टाइम्स’ में देखने को मिला है। जिस तरह से अयोध्या विवाद की नई शुरुआत को शीर्षक ‘अयोध्या पर एक और अध्याय खोलने को तैयार मुस्लिम बोर्ड’ में दर्शाया गया है, वो काबिले तारीफ है। जबकि बाकी अखबारों ने लीड के शीर्षक में कोई प्रयोग नहीं किया है।

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फ्रंट पेज पर अखबारों में आज किन खबरों को मिली प्रमुखता, पढ़ें यहां

हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला में आज तीसरा जबकि नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर में पांचवा पेज फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
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दिल्ली की हवा बद से बदतर होती जा रही है। आम जनता से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इसे लेकर चिंतित है, लेकिन हमारे सांसदों के लिए शायद यह गंभीर मुद्दा नहीं। शायद यही वजह है कि इस विषय पर होने वाली अहम बैठक से गौतम गंभीर और हेमा मालिनी नदारद रहे। दिल्ली के हेल्थ इमरजेंसी से जूझने के बीच क्रिकेट की पिच से सियासत की गलियों में कदम रखने वाले गंभीर की इंदौरी पोहा-जलेबी का लुत्फ उठाते तस्वीर कल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। आज अधिकांश अखबारों ने इसे प्रमुखता से जगह दी है।

आज शुरुआत हिन्दुस्तान से करते हैं। अखबार ने भारी विज्ञापनों के चलते तीसरे पेज को फ्रंट का दर्जा दिया गया है। हालांकि, यहां भी पांच बड़ी खबरें ही आ सकी हैं। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है, जिसे काफी अच्छे से नेताओं और अफसरों पर कटाक्ष करते हुए लगाया गया है। इसके साथ ही गौतम की जलेबी का लुत्फ उठाते हुए फोटो भी चस्पा की गई है। महाराष्ट्र की सियासत को भी पेज पर रखा गया है है। नए फार्मूले के तहत मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा और कांग्रेस एवं राकांपा भी सरकार में अहम भूमिका निभाएंगे।

वहीं, उपभोक्ता व्यय में गिरावट और सरकार का आंकड़े जारी करने से इनकार भी फ्रंट पेज पर है। इसके अलावा क्रिकेटर मयंक अग्रवाल की उपलब्धि और नागरिकता बिल को भी तवज्जो दी गई है। मोदी सरकार सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता बिल पेश कर सकती है। वहीं, एंकर में श्याम सुमन की बाईलाइन स्टोरी है, जिन्होंने चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई के आखिरी कार्यदिवस के बारे में बताया है। 

अमर उजाला में भी आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है, जिसमें सांसद गौतम गंभीर की पोहा-जलेबी का लुत्फ उठाती तस्वीर भी है। इसके पास ही मयंक अग्रवाल की उपलब्धि को फोटो के रूप में लगाया गया है। इंदौर में बांग्लादेश के खिलाफ खेले जा रहे टेस्ट मैच में दोहरा शतक लगाने के साथ ही मयंक ने इस मामले में डॉन ब्रैडमैन को पीछे छोड़ दिया है। सबरीमाला मंदिर विवाद पर जस्टिस नरीमन द्वारा केंद्र को लगाई गई फटकार को भी अखबार ने प्रमुखता से जगह दी है।

इसके अलावा, दिल्ली नगर निगम का बजट, पुलिस-वकील भिड़ंत सहित वित्तमंत्री का बयान भी पेज पर है। दिल्ली नगर निगम के बजट में संपत्ति कर की दरों में इजाफा किये जाने के आसार हैं। वहीं, हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आक्रामक हुए वकीलों ने हड़ताल समाप्त कर ली है। वहीं, वित्तमंत्री ने सरकार की तैयारियों के बारे में बताते हुए कहा है कि बैंकों में जमा राशि पर एक लाख से ज्यादा बीमा मिल सकता है। एंकर में रक्षामंत्री के अरुणाचल दौरे से चीन को लगी ‘मिर्ची’ से जुड़ा समाचार है। राजधानी, शताब्दी और दुरंतों में महंगे हुए खान-पान को अखबार ने संक्षिप्त में जगह दी है। चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई की विदाई की खबर फ्रंट पेज पर नहीं है।

अब रुख करते हैं नवभारत टाइम्स का। अखबार में आज विज्ञापनों की बहार है। इस वजह से पांचवें पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है, जिसे गौतम गंभीर की फोटो के साथ आकर्षक अंदाज में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को भी अखबार ने तवज्जो दी है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की विदाई को फोटो और रंगीन बैकग्राउंड के साथ पेज पर रखा गया है। एंकर में रेलवे के महंगे हुए खानपान को जगह मिली है। तीन अन्य खबर एक-एक कॉलम में हैं। मसलन, सेप्टिक टैंक की फ्री सफाई, काम पर लौटे वकील और राहुल गांधी के खिलाफ 100 करोड़ के टैक्स का मामला फिर खोला जाएगा। यानी कांग्रेस के युवराज की भी मुश्किलें बढ़ना तय है।

वहीं, दैनिक जागरण को देखें तो यहां भी तीसरा पेज फ्रंट पेज है। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है, लेकिन इसमें गौतम गंभीर की फोटो को जगह नहीं दी गई है। ‘सोनिया एवं राहुल गांधी के खिलाफ 100 करोड़ रुपए टैक्स का मामला’ इस खबर को अखबार ने प्रमुखता के साथ लीड के पास ही लगाया है। महाराष्ट्र के सियासी संकट को अपेक्षाकृत काफी बड़ी जगह दी गई है, यदि इसे छोटा लगाया जाता तो कई दूसरी महत्वपूर्ण खबरों को भी फ्रंट पेज पर स्थान मिल सकता था। चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई की विदाई को सबसे नीचे दो कॉलम में रखा गया है। ट्रेनों में महंगे खान-पान को अखबार ने संक्षिप्त में लगाया है।

सबसे आखिर में आज दैनिक भास्कर का रुख करते हैं। चार फुल पेज विज्ञापनों के चलते पांचवें पेज को फ्रंट पेज का दर्जा दिया गया है। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि दिल्ली में चीन जैसे एयर प्यूरीफायर लगाये जाएं। लीड में ही गौतम गंभीर की प्रदूषण पर ‘गंभीरता’ दर्शाती तस्वीर भी है। पेज पर दूसरी प्रमुख खबर के रूप में एक रिपोर्ट को लगाया गया है। इसमें दावा किया गया है कि उपभोक्ता खर्च में चार दशक बाद गिरावट आई है। हालांकि सरकार आंकड़े जारी करने को तैयार नहीं है। पेज पर जनता की जेब को प्रभावित करने वाला एक समाचार भी है। रेलवे ने राजधानी, शताब्दी और दुरंतों ट्रेनों के खान-पान को काफी महंगा कर दिया है।

महाराष्ट्र की सियासत और दिल्ली विधानसभा चुनाव से जुड़ी अखिलेश कुमार की बाईलाइन स्टोरी को भी पेज पर जगह मिली है। शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस में सरकार बनाने पर सहमति हो गई है, सभी दलों ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। वहीं, अखिलेश बता रहे हैं कि जिन ईवीएम को लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल किया गया था, उनसे ही दिल्ली विधानसभा चुनाव कराये जाएंगे। एंकर में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की विदाई से जुड़ी पवन कुमार की बाईलाइन खबर है। अखबार ने फ्रंट पेज पर क्रिकेटर मयंक अग्रवाल की उपलब्धि को फोटो के रूप में स्थान दिया है। दोहरा शतक जड़ने के मामले में मयंक अब ब्रैडमैन से आगे निकल गए हैं।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: ले-आउट की नजर से देखें तो आज ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘हिन्दुस्तान’ ने सीमित जगह में भी काफी अच्छा फ्रंट पेज तैयार किया है।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर सभी अखबारों ने अच्छा काम किया है। खासकर लीड के मामले में ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिन्दुस्तान’ और ‘दैनिक भास्कर’ अव्वल हैं।     

3: कलात्मक शीर्षक का टोटा आज भी अखबारों में दिखाई दे रहा है।

4: खबरों के लिहाज से फ्रंट पेज देखें तो ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘दैनिक जागरण’ ने जहां क्रिकेटर मयंक की उपलब्धि को जगह नहीं दी है, वहीं राहुल और सोनिया गांधी की खबर को पेज पर लगाकर सबसे आगे निकल गए हैं। वहीं ‘अमर उजाला’ से चीफ जस्टिस की खबर के मामले में चूक हुई है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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देखें, आज के प्रमुख अखबारों के फ्रंट पेज

आज दैनिक जागरण में जहां दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं, वहीं हिन्दुस्तान में जैकेट विज्ञापन की वजह से तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Friday, 15 November, 2019
Last Modified:
Friday, 15 November, 2019
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भारतीय राजनीति में राफेल की अहमियत कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि, देश की सर्वोच्च अदालत दूसरी बार भी यह साफ कर चुकी है कि मोदी सरकार इस मामले में पाक-साफ है, लेकिन कांग्रेस अपने रुख पर कायम है। इस खबर को आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों ने प्रमुखता से उठाया है। आज सबसे पहले बात करते हैं अमर उजाला की। फ्रंट पेज की शुरुआत सात कॉलम टॉप बॉक्स से हुई है, जिसमें दिल्ली की जहरीली हवा पर बच्चों की पीएम से गुहार को लगाया गया है। इस खबर का शीर्षक ‘बच्चों ने पीएम मोदी से कही मन की बात, हमें साफ हवा चाहिए’ आकर्षक है। लीड, राफेल है। सुप्रीम कोर्ट ने लड़ाकू विमान सौदे की जांच वाली पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है। साथ ही ‘चौकीदार चोर है’ के लिए राहुल गांधी को फटकार भी लगाई है।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के संबंध में दायर याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय पीठ फैसला लेगी। इस खबर को भी प्रमुखता के साथ दो कॉलम में रखा गया है। कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के 16 बागी विधायक भाजपाई हो गए हैं। इस खबर को भी पेज पर जगह मिली है। वहीं, पेज पर सबसे नीचे दो कॉलम में किसी जमाने में आइंस्टीन को चुनौती देने वाले महान गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन का समाचार है। खबर में यह भी बताया गया है कि उनके शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई।

अब नवभारत टाइम्स का रुख करें तो फ्रंट पेज पर आज भी ज्यादा जगह नहीं है। लीड राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, जिसे लड़ाकू विमान और उदास मुद्रा में बैठे राहुल गांधी की फोटो के साथ लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर सबरीमाला मंदिर है। सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय पीठ मंदिर सहित मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर भी फैसला सुनाएगी। वहीं, जेएनयू विवाद और दिल्ली के प्रदूषण को डेढ़-डेढ़ कॉलम जगह मिली है। गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन सहित कुछ खबरों को सिंगल में लगाया गया है।

आज दैनिक जागरण ने दो फ्रंट पेज बनाये हैं। पहले पेज पर आधा पेज विज्ञापन है और लीड राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, जिसे पूरे आठ कॉलम लगाया गया है। लीड में ही सबरीमाला मंदिर विवाद और अनुच्छेद 370 को भी रखा गया है। जहां सबरीमाला मामला सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच के हवाले किया गया है, वहीं कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है।

दूसरे फ्रंट पेज को देखें तो यहां लीड जहरीली हवा है। दूसरी प्रमुख खबर ब्रिक्स सम्मलेन में पीएम मोदी का बयान है। इसके साथ ही संजय मिश्र की बाईलाइन खबर को भी पेज पर जगह मिली है। मिश्र बता रहे हैं कि कांग्रेस ने शिवसेना के सामने कौन सी शर्त रखी है। गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन का समाचार सबसे नीचे दो कॉलम में है।

दैनिक भास्कर की बात करें तो आज भी मास्टहेड में प्रयोग किया गया है। बाल दिवस पर प्रदूषण के चलते घरों में कैद रहे बच्चों की व्यथा को ‘बाल विवश’ शीर्षक के साथ बयां किया गया है। नि:संदेह यह अच्छा प्रयास है, लेकिन पेज कल जैसा ही नजर आ रहा है, क्योंकि कल भी इसी थीम पर मास्टहेड तैयार किया गया था। लीड राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है,  जिसे दो लाइन के शीर्षक के साथ विस्तार से समझाया गया है। सबरीमाला मंदिर से जुड़ी खबर को भी प्रमुखता मिली है।

वहीं, महाराष्ट्र के सियासी संकट को भी पेज पर रखा गया है। शिवसेना और राकांपा समझौते के करीब आ गए हैं। इसके अलावा, पेज पर वोडाफोन एवं एयरटेल को हुए घाटे और जमीयत उलेमा ए हिंद का बयान है। देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन का कहना है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन नहीं लेनी चाहिए। एंकर में गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन के समाचार को लगाया गया है।

आखिर में आज हिन्दुस्तान का रुख करते हैं। अखबार में जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरा पेज फ्रंट पेज है। लीड राफेल है, जिसे ‘राफेल पर फिर खिंची तलवारें’ शीर्षक के साथ लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर के रूप में पेज पर दिल्ली का प्रदूषण है। बादलों के चलते बढ़ी धुंध के आज से छंटने की उम्मीद है। वहीं, क्रिकेटर अश्विन की उपलब्धि को फोटो के साथ रखा गया है। बांग्लादेश के साथ मैच में अपने प्रदर्शन के साथ ही अश्विन ने घरेलू मैदान पर तेजी से विकेट लेने के मामले में कुंबले को पीछे छोड़ दिया है।

महाराष्ट्र की सियासत के साथ ही कर्नाटक के बागी विधायकों के भाजपा का दामन थामने की खबर को पेज पर जगह मिली है। इसके अलावा, सबरीमाला मंदिर और जेएनयू में विवेकानंद की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने के प्रयास से जुड़ी खबरों को दो-दो कॉलम में रखा गया है। एंकर में केके उपाध्याय की बाईलाइन स्टोरी है, जिसमें उन्होंने गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के जीवन से जुड़ी बातों पर प्रकाश डाला है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: ले-आउट की बात करें तो आज ‘अमर उजाला’ और ‘दैनिक भास्कर’ अव्वल नजर आ रहे हैं, जबकि ‘हिन्दुस्तान’ का फ्रंट पेज काफी भरा-भरा दिखाई दे रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति में ‘दैनिक भास्कर’, ‘अमर उजाला’ के साथ ‘नवभारत टाइम्स’ बेहतर है। ‘हिन्दुस्तान’ ने भी लीड को अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है, लेकिन बाकी खबरें उतनी आकर्षक दिखाई नहीं दे रहीं।     

3: कलात्मक शीर्षक ‘अमर उजाला’ और ‘नवभारत टाइम्स’ में हैं। ‘अमर उजाला’ ने जहां टॉप बॉक्स की हेडलाइन में प्रयोग किया है, वहीं ‘नवभारत टाइम्स’ ने लीड की।

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आज क्रिएटिव है दैनिक भास्कर का फ्रंट पेज, अमर उजाला का भी अच्छा प्रयास

जैकेट विज्ञापन के चलते आज हिन्दुस्तान में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Thursday, 14 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 14 November, 2019
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दिल्ली का प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस नकारात्मक खबर के साथ सकारात्मक खबर यह है कि चीफ जस्टिस के कार्यालय से भी ‘सूचना के अधिकार’ (RTI) के तहत अब जानकारी मांगी जा सकेगी। इन दोनों खबरों को दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अधिकांश अखबारों ने प्रमुखता से उठाया है। आज शुरुआत नवभारत टाइम्स से करते हैं। फ्रंट पेज पर एक बड़ा विज्ञापन है, लेकिन हमेशा की तरह ज्यादा से ज्यादा समाचारों को पेज पर रखने का सराहनीय प्रयास किया गया है। लीड सूचना का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि चीफ जस्टिस का दफ्तर भी आरटीआई के दायरे में आएगा।

दूसरी बड़ी खबर जहरीली हवा है। दिल्ली में प्रदूषण के चलते इमरजेंसी जैसी स्थिति बन गई है। स्कूल-कॉलेजों को दो दिनों के लिए बंद किया गया है। उधर, महाराष्ट्र के सियासी संकट को लेकर अमित शाह के बयान को भी तवज्जो मिली है। शाह का कहना है कि जब चुनाव पूर्व ही यह साफ कर दिया गया था कि देवेन्द्र फडनवीस ही सीएम होंगे, तब शिवसेना ने विरोध क्यों नहीं किया? इसके अलावा, पेज पर पांच सिंगल खबरें हैं। इनमें जेएनयू में फीस वृद्धि का फैसला वापस, वोडाफोन नहीं छोड़ेगी भारत और दिल्ली में कैब ड्राइवर बनकर लूटपाट प्रमुख हैं।

अब दैनिक जागरण का रुख करें तो फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं। लीड सूचना का अधिकार है, जिसे ‘कुछ शर्तों के साथ अब सीजेआई का दफ्तर भी आरटीआई के दायरे में’ शीर्षक तले विस्तार से लगाया गया है। दिल्ली की जहरीली हवा पेज पर दूसरी बड़ी खबर के रूप में मौजूद है। कर्नाटक के बागी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट से कुछ राहत मिली है और इस राहत को ‘दैनिक जागरण’ ने प्रमुखता के साथ जगह दी है। तत्कालीन स्पीकर ने 17 विधायकों को अयोग्य करार दिया था। कोर्ट ने इस फैसले को तो सही माना, लेकिन विधायकों को उपचुनाव लड़ने की इजाजत दे दी। इसके अलावा, कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान की पैंतरेबाजी भी पेज पर है। वहीं,जेएनयू में फीस वृद्धि वापस सहित कुछ समाचारों को संक्षिप्त में रखा गया है।

आज दैनिक भास्कर का फ्रंट पेज कुछ अलग ही नजर आ रहा है। सबसे पहली बात जो पाठकों को आकर्षित करती है, वो है बाल दिवस और दिल्ली के प्रदूषण को एक साथ मास्ट हेड में दर्शाने की कला। ‘दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में दो दिन की छुट्टी, बच्चे पहली बार बाल दिवस घर पर मनाएंगे’ शीर्षक के साथ मास्टहेड में लगी यह खबर सरकारी व्यवस्थाओं पर करारी चोट करती है। बाल दिवस पर मास्टहेड तो अधिकांश अखबारों ने लगाया है, लेकिन ‘दैनिक भास्कर’ दो कदम आगे है।

लीड सूचना का अधिकार है, जिसे काफी विस्तार से समझाया गया है। इसी में कर्नाटक के 17 बागी विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी रखा गया है। महाराष्ट्र के सियासी संकट के बीच उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेताओं की मुलाकात को पेज पर प्रमुखता मिली है। लता मंगेशकर से जुड़े समाचार को भी पेज पर रखा गया है। उनकी तबीयत नाजुक बनी हुई है। इसके अलावा, अयोध्या के कायाकल्प को लेकर योगी सरकार द्वारा तैयार किये गए ब्लूप्रिंट के बारे में बताती खबर दो कॉलम में हैं। साथ ही कुछ अन्य समाचारों को संक्षिप्त में जगह मिली है।

उधर, हिन्दुस्तान में विज्ञापनों की भरमार है। जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है और यहां भी आधा पेज विज्ञापन है। लीड चीफ जस्टिस दफ्तर का आरटीआई के दायरे में आना है, जिसे काफी विस्तार से पाठकों के समक्ष पेश किया गया है। दिल्ली का प्रदूषण दूसरी प्रमुख खबर है। अयोग्य विधायकों को सिंगल कॉलम में जगह मिली है, वहीं जेएनयू में फीस वृद्धि वापस और अमित शाह की दो टूक को दो-दो कॉलम में रखा गया है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने की सभी संभावनाएं समाप्त होने के बाद अब शाह ने शिवसेना पर निशाना साधा है। शाह का कहना है कि हमने पहले ही सीएम को लेकर स्थिति साफ कर दी थी, लिहाजा शिवसेना कि नई मांगें नहीं मानी जाएंगी।

सबसे आखिर में आज अमर उजाला की बात करते हैं। अखबार ने बाल दिवस के मौके पर टॉप में पूरे आठ कॉलम में एक प्रेरक स्टोरी लगाई है। इस स्टोरी में सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने बताया है कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो समझ बढ़ाए और दिल से अमीर बनाए। अखबार ने लीड में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को लगाया है। जिसमें चीफ जस्टिस दफ्तर का आरटीआई के दायरे में आना, कर्नाटक के बागी 17 विधायकों को उप चुनाव लड़ने की इजाजत देना और वित्त अधिनियम 2017 में बनाए गए नियम रद्द करने का फैसला शामिल है। दिल्ली के प्रदूषण को फोटो के साथ लीड के बगल में जगह मिली है। 29 से नर्सरी दाखिले की दौड़, कश्मीर में आतंकियों की गोलीबारी से कारोबारी की मौत और राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के लिए बिल से जुड़ी खबर भी पेज पर है। इसके अलावा एंकर में कुलभूषण जाधव को जगह मिली है। खबर के अनुसार, जाधव मामले के बाद पाकिस्तान अब सैन्य कानून में बदलाव कर सकता है।        

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के लिहाज से आज ‘नवभारत टाइम्स’ का फ्रंट पेज काफी आकर्षक नजर आ रहा है। हालांकि, आधे पेज पर ही खबर लग सकी हैं, लेकिन पेज को बेहद खूबसूरती से डिजायन किया गया है।

2: खबरों की प्रस्तुति में नि:संदेह आज की बाजी ‘दैनिक भास्कर’ के नाम रही है। ‘नवभारत टाइम्स’ ने लीड को भले ही ज्यादा आकर्षक अंदाज में सजाया है, लेकिन दिल्ली के प्रदूषण को बाल दिवस से जोड़ते हुए खबर को जिस तरह से ‘दैनिक भास्कर’ ने पेश किया है, वो काबिल-ए-तारीफ है।     

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में आज भी सभी अखबार एक जैसे हैं, यानी किसी ने हेडलाइन को लेकर प्रयोग नहीं किया है।

4: खबरों की बात करें तो ‘नवभारत टाइम्स’ को छोड़कर सभी अखबार लगभग एक समान हैं। ‘नवभारत टाइम्स’ से 17 बागी विधायकों की खबर के मामले में चूक हो गई है। वैसे, ‘दैनिक जागरण’ और ‘दैनिक भास्कर’ सबसे आगे कहे जा सकते हैं। ‘दैनिक भास्कर’ में जहां लता मंगेशकर की खबर फ्रंट पेज पर है, वहीं ‘दैनिक जागरण’ में कुलभूषण जाधव की।

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जानिए, किन मायनों में खास है अमित राजपूत की ये किताब

दिल्ली में 10, राजाजी मार्ग स्थित पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को उनके आवास पर सौंपी किताब की पहली प्रति

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 13 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
Amit Rajpoot

पत्रकार अमित राजपूत की किताब ‘अंतर्वेद प्रवरः गणेश शंकर विद्यार्थी’ का लोकार्पण शुक्रवार को किया गया। दिल्ली में 10, राजाजी मार्ग स्थित पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को उनके आवास पर अमित राजपूत ने अपनी किताब की पहली प्रति भेंट सौंपी।

इस मौके पर अमित राजपूत ने बताया कि इस किताब में गणेश शंकर विद्यार्थी से जुड़ी उन बातों को शामिल किया गया है, जो अब तक लोगों के सामने नहीं आई हैं। यही नहीं, आजादी के बाद गणेशजी के प्रभावों से जुड़ी कई राजनीतिक घटनाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

किताब के लोकार्पण के मौके पर अमित राजपूत के साथ शैलेन्द्र भदौरिया, वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी शंकर बाजपेयी और भारतीय जनसंचार के पूर्व महानिदेशक व वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश, राजीव तिवारी, राजश्री त्रिवेदी और हर्ष कुमार मिश्र सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी और विद्वान शामिल रहे।

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तिरंगे का अपमान कर बैठा अखबार, अब उठ रहे सवाल

‘स्वदेशी जागरण मंच’ के राष्ट्रीय संयोजक अश्वनी महाजन ने उठाया यह मुद्दा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 13 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
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‘स्वदेशी जागरण मंच’ के राष्ट्रीय संयोजक हैं अश्वनी महाजन। अश्वनी महाजन ने दो-तीन दिन पहले एक अखबार की खबर के लिंक के साथ ट्वीट किया। उन्होंने ट्विटर को टैग करते हुए शिकायत की कि यह ट्विटर हैंडल हमारे देश के झंडे का अपमान कर रहा है। उसके बाद से वह ट्वीट वायरल होता चला गया। ‌ दरअसल वह अखबार था ‘फाइनेंसियल टाइम्स’ (Financial Times) और खबर थी पीएम नरेंद्र मोदी की नीतियों पर एक आलोचनात्मक कॉलम। इसमें फोटो की जगह लगा हुआ था तिरंगा, जिसमें चक्र को कई टुकड़ों में दिखाया गया था।

‘फाइनेंसियल टाइम्स’ के चीफ फॉरेन कॉलमिस्ट गिडियोन‌ रैचमैन (GIDEON RACHMAN)  हर हफ्ते दुनिया भर की हस्तियों से जुड़ा अपना एक कॉलम ' द रैचमैन रिव्यू' लिखते हैं। इस बार उनके निशाने पर थे पीएम मोदी। कॉलम की हेडिंग थी-'India's Narendra Modi has had a free pass from the West for too long।'

इस कॉलम में उन्होंने नरेंद्र मोदी की दुनिया भर के नेताओं से मुलाकातों के बाद जो छवि बनी है, उस पर तो चर्चा की ही, नरेंद्र मोदी का दूसरा चेहरा भी दिखाने की कोशिश की कि कैसे उनकी अल्पसंख्यक विरोधी नीतियों की वजह से, अनुच्छेद 370 हटाने की वजह से देश-दुनिया में आलोचना होती है।

यहां तक तो शायद कोई बड़ी बात नहीं थी, लेकिन उस कॉलम के साथ एक ग्राफिकल फोटो लगाई गई, जिसमें तिरंगा बना हुआ था और तिरंगे के बीच के चक्र को तोड़कर कई भागों में बांट दिया गया था। हालांकि, चित्र सांकेतिक था और खबर के मिजाज को बता रहा था, लेकिन कानून के मुताबिक अब नेशनल फ्लैग के साथ कोई भी तोड़-मरोड़ नहीं कर सकते हैं और इसी को लेकर अश्विनी महाजन ने मुद्दा बना दिया।

‘फाइनेंसियल टाइम्स’ को भी शायद अपनी गलती महसूस हुई और उस तस्वीर की जगह मोदी का एक फोटो लगा दिया लेकिन लोगों ने तिरंगे की वो तस्वीर सेव कर ली थी। अब उन्हें ऐतराज है कि क्यों अखबार ने माफी नहीं मांगी और न ही खेद जताया। केवल तस्वीर बदलकर इतिश्री कर दी। ऐसे में लोग सोशल मीडिया पर 1971 के ऑनर एक्ट के मुताबिक अखबार पर एक्शन लेने की मांग कर रहे हैं।

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अयोध्या मामले पर नेशनल हेराल्ड ने लिख दिया कुछ ऐसा, अब मांगनी पड़ी माफी

भारतीय जनता पार्टी के विरोध जताने पर अखबार के एडिटर-इन-चीफ ने ट्वीट कर कहा, लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
National Herald Newspaper

अयोध्या मामले में शनिवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपने एक आर्टिकल को लेकर कांग्रेस के स्वामित्व वाले अंग्रेजी अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ (National Herald) ने माफी मांग ली है। इस बारे में अखबार के एडिटर-इन-चीफ की ओर से कहा गया है, ‘Why a devout Hindu will never pray at the Ram Temple in Ayodhya शीर्षक से पब्लिश आर्टिकल से यदि किसी व्यक्ति अथवा समूह की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो इसके लिए हम माफी मांगते हैं। लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं था।’

इसके साथ ही माफीनामे में यह भी कहा गया है, ‘अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का हम पूरा सम्मान करते हैं। इस आर्टिकल में जो विचार रखे गए हैं, वो लेखक के निजी विचार हैं और उनका 'नेशनल हेराल्ड' के विचारों से कोई नाता नहीं है।’

बता दें कि ‘नेशनल हेराल्ड’ के इस आर्टिकल में सुप्रीम कोर्ट की तुलना पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट से की गई थी। आर्टिकल में दावा किया गया था कि यह फैसला पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की याद दिलाता है, जिसने वहां के तत्कालीन गवर्नर जनरल गुलाम मुहम्मद को कथित तौर पर अवैध कार्य की अनुमति दे दी थी। आर्टिकल में यह भी कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने वही फैसला दिया है, जो  विश्व हिंदू परिषद् और भारतीय जनता पार्टी चाह रहे थे। हालांकि, अब अखबार ने माफी मांगने के साथ ही वेबसाइट से इस आर्टिकल को हटा दिया है।

'नेशनल हेराल्ड' में छपे आर्टिकल की हेडिंग का स्क्रीन शॉट आप यहां देख सकते हैं-

 

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इस अखबार की नजर में मक्खन जैसी हैं गाजियाबाद की सड़कें, आप क्या कहते हैं?

सोशल मीडिया पर सीएम साहब को हकीकत और छलावे के बीच का अंतर समझा रहे हैं लोग

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
Press

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर आपकी गाड़ी भले ही हिचकोले खाती चल रही हो, लेकिन सरकार की नजर में सबकुछ ठीक है। वैसे बदहाल सड़कों को ‘खुशहाल’ बताने में मीडिया भी पीछे नहीं है। उसे भी लगता है कि सपा का ‘उत्तम प्रदेश’ योगीराज में ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ बन गया है। हालांकि, पूरा का पूरा मीडिया आंख बंद करके एक दिशा में दौड़ा जा रहा है, ऐसा भी नहीं है। कुछ को सड़कों के गड्ढे भी दिखते हैं, लेकिन सरकार उन्हें देखना नहीं चाहती।

फिलहाल सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय द्वारा किए गए एक ट्वीट को लेकर चर्चा चल रही है। वैसे इसे चर्चा से ज्यादा कटाक्ष कहना बेहतर होगा, क्योंकि लोग सीएम साहब को हकीकत और छलावे के बीच का अंतर समझा रहे हैं। अब आपको भी यह सवाल बेचैन कर रहा होगा कि आखिर हमारे सीएम साहब ने ऐसा क्या लिख दिया। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार सड़कों को गड्ढों से शत प्रतिशत मुक्त करने के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है, झटका लगा क्या? कुछ ऐसा ही झटका सोशल मीडिया यूजर्स को लगा, जब उन्होंने सीएम ऑफिस का वह ट्वीट पढ़ा, जिसमें लिखा था, ‘सूबे की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के अभियान में मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी शत प्रतिशत सफल रहे हैं। एक तरह से सूबे के विकास का यह एक ऐसा फेस है, जिससे लगता है कि उत्तर प्रदेश की बराबरी में और कौन होगा’।

इस झटके की तीव्रता तब और बढ़ गई, जब ट्वीट के साथ पोस्ट किये गए एक अखबार की कटिंग पर नजर गई। अखबार का नाम है दैनिक ‘हिंट’, जो सरकार को पसंद आने वाले शब्दों में यह बयां कर रहा है कि सूबे खासकर गाजियाबाद की सड़कें मक्खन जैसी हो गई हैं। ये संपादकीय अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने लिखा है।

दैनिक ‘हिंट’ में छपे इस संपादकीय को आप यहां पढ़ सकते हैं-

संभव है अखबार ने जमीनी हकीकत जानी हो। उसके पत्रकारों ने गड्ढों वाली सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाई हों, तब इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया हो कि ‘सबकुछ ठीक’ है, लेकिन जनता को सबकुछ ठीक नहीं लग रहा। यही वजह है कि ट्विटर यूजर्स खबर लिखने वाले और सरकार के बाशिंदों को प्रदेश की सड़कों की असल स्थिति जानने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। क्या दोनों में से कोई यह चैलेंज लेगा? यह देखने वाली बात होगी।

अब जरा पढ़ लेते हैं कि लोगों को नाराज करने वाली खबर का मजमून आखिर है क्या। तो शंभूनाथ शुक्ल का पहले पेज पर प्रकाशित संपादकीय कहता है, ‘योगीजी ने जो कहा, किया...गाजियाबाद शहर में गलियों की वे सड़कें, जो वर्षों से टूटी-फूटी पड़ी थीं, और जिन पर इतने खड्डे थे कि दिन में भी लोग गिरते-पड़ते चल पाते थे, वे सब अपने योगीजी कि कृपा से ऐसी हो गई हैं कि अब लोग उन पर फर्राटा भरते हुए निकलते हैं।’ वैसे, सरकार की तारीफ यहीं खत्म नहीं होती और भी बहुत कुछ कहा गया है, लेकिन सार समझने के लिए इतना काफी है।

गाजियाबाद से प्रकाशित होने वाले दैनिक ‘हिंट’ का यह तारीफी संदेश बदहाल सड़कों की मार झेल रहे लोगों को कुछ ऐसा लगा, जैसे-अपने फिसल जाने पर खिलखिलाकर हंसते दूसरों को देखकर लगता है। लिहाजा, उन्होंने भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने केवल शब्दबाण ही नहीं दागे, बल्कि साक्ष्य स्वरूप तस्वीरें भी चस्पा कीं, ताकि खबर लिखने वाले को भी समझ आ जाए कि जिन सड़कों की बातें कही गई हैं, वो न सपा के ‘उत्तम प्रदेश’ में थीं और न ही योगी के ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ में हैं।

अनगपाल सिंह नामक यूजर ने सीएम को टैग करते हुए लिखा है, ‘आपको झूठी जानकारी दी जा रही है। यदि हकीकत देखनी है तो एक बार गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के De-Notified709b हाईवे पर आएं। यहां आठ किलोमीटर टुकडे की हालत भयंकर बनी हुई है। हर तरफ गंदगी, अतिक्रमण, गड्डे, धूल-मिट्टी, ट्रैफिक जाम है।’

वहीं दिनेश यादव ने लिखा है, ‘आओ भाजपाइयों रायबरेली घुमाएं, शरीर के सारे बल निकल जाएंगे, इतने गड्ढे हैं, यही पता नही चलता कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।’ जिस पर कटाक्ष करते हुए ओंकार नाथ यादव ने ट्वीट दागा है, ‘भाई-जब गड्ढ़े का विकास हुआ तो तालाब बन गया' गड्ढा कहां रह गया? उसका तो तालाब नाम हो गया. योगी जी की बात मे सच्चाई हैँ! गड्ढा मुक्त सड़क’।

ये महज कुछ उदाहरण हैं कि किस तरह लोगों को दैनिक ‘हिंट’ का यह संपादकीय पसंद नहीं आया, जिसे अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने लिखा है। आम जनता के अलावा, राजनेताओं ने भी इस संपादकीय पर तीखे बाण चलाये। इस दौड़ में सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह सबसे आगे रहे। आईपी सिंह ने सीएम कार्यालय के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘कैसा ‘ओछा’ अखबार चुना है @myogiadityanath जी को खुश करने के लिए। इस अखबार का संपादक भी इसे नहीं पढ़ता होगा। व्यक्ति नहीं तो सीएम पद की ही इज्जत रखते। मुख्यमंत्री का मजाक उनका ही आधिकारिक अकाउंट बना रहा है। बाकियों ने झूठ छापने से मना कर दिया?’

हालांकि, विरोध में अव्वल आने की जद्दोजहद में आईपी सिंह जिन शब्दों का प्रयोग कर बैठे, वो भी ट्विटर यूजर्स को नागवार गुजरे हैं। कई लोगों ने उन्हें भाषा पर संयम रखने की नसीहत दी है। 

 

 

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कैसे रहे प्रमुख हिंदी अखबारों के फ्रंट पेज, पढ़ें यहां

अमर उजाला के फ्रंट पेज पर आज कोई विज्ञापन नहीं है। हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है, जबकि दैनिक भास्कर में फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन है।

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
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राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब सरकार आगे की प्रक्रिया तय करने में जुट गई है। इसी तैयारी को दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों ने प्रमुखता से लगाया है। शुरुआत आज ‘दैनिक भास्कर’ से करते हैं। अखबार के फ्रंट पेज पर नजर डालें तो लीड अयोध्या है। जिसे ‘राम मंदिर की नींव हिंदू नववर्ष या रामनवमी पर’ शीर्षक के साथ टॉप के छह कॉलम में सजाया गया है। इसके पास ही बांग्लादेश पर टीम इंडिया की जीत को फोटो के साथ रखा गया है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन के समाचार को दैनिक भास्कर ने दो कॉलम में लगाया है।

इसके अलावा, महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को भी प्रमुखता मिली है। वहीं, नवजोत सिंह सिद्धू की नई परेशानी भी पेज पर है। हालांकि, इस परेशानी को खुद सिद्धू ने ही आमंत्रित किया है। सिद्धू साहब ने फिर से अपने क्रिकेटर मित्र और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं और उनके इस पाक प्रेम पर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया है। साथ ही देश की पहली प्राइवेट ट्रेन ‘तेजस’ की कमाई भी सिंगल के रूप में पेज पर है। ‘तेजस’ ने एक महीने में 70 लाख रुपए कमाए हैं।

आज ‘हिन्दुस्तान’ में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। इस फ्रंट पेज पर भी दो बड़े विज्ञापन हैं, लेकिन फिर भी अच्छी-खासी खबरों की गुंजाइश बन गई है। लीड अयोध्या है, जिसके मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट का गठन इसी महीने किया जाएगा। पेज पर अयोध्या फैसले के बाद देश में कायम सद्भावना को दर्शाती एक फोटो भी है। जुलूस-ए-मोहम्मदी के मौके पर कानपुर में हिंदुओं ने फूल बरसाकर मुस्लिमों का स्वागत किया। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन की खबर के साथ ही महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को भी प्रमुखता से जगह दी गई है। इसके अलावा, वकीलों का हड़ताली हठ और महिला क्रिकेटर शैफाली की उपलब्धि को भी ‘हिन्दुस्तान’ ने फ्रंट पेज पर रखा है।

वहीं, अमर उजाला में फ्रंट पेज पर एक भी विज्ञापन नहीं होने की वजह से अखबार की टीम को मनमुताबिक ढंग से पेज सजाने का पूरा मौका मिला। टॉप बॉक्स में ‘भाईचारे का संदेश देगा राम मंदिर पर बनने वाला ट्रस्ट’ शीर्षक के साथ अयोध्या को रखा गया है। अपनी बाईलाइन में हिमांशु मिश्र ने बताया है कि ट्रस्ट में मुस्लिम प्रतिनिधित्व भी संभव है। इसके पास ही पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन का समाचार है। चुनाव आयोग की असल ताकत का अहसास शेषन ने ही कराया था। लीड महाराष्ट्र का सियासी संग्राम है। भाजपा और शिवसेना के औपचारिक रिश्ते का आखिरकार अंत होता नजर आ रहा है। शिवसेना अपने पुराने सहयोगी को 'तलाक' देकर नया साथी तलाश रही है। 

बांग्लादेश से सीरीज जीतने वाली टीम इंडिया को भी फ्रंट पेज पर जगह मिली है। इसके साथ ही महिला क्रिकेटर शैफाली की उपलब्धि को भी लगाया गया है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ते हुए टी-20 में 49 गेंदों में 73 रन बनाये हैं। स्विस बैंक में 1955 से अब तक 3500 खाते निष्क्रिय पड़े हैं, जिनमें से 10 से ज्यादा भारतीयों के भी हैं। इस खबर को प्रमुखता के साथ लगाया गया है। वहीं, वकील-पुलिस विवाद फिर सुर्खियों में है। निचली अदालतों में वकील आज से फिर कामकाज ठप करेंगे। एंकर में दिल्ली की बिगड़ती हवा है। खबर बताती है कि ऑड-ईवन से छूट मिलते ही राजधानी की हवा फिर से खराब हो गई। इसके अलावा, पेज पर अयोध्या फैसले को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट डालने वाले 90 लोगों की गिरफ्तारी का समाचार भी है।

अब ‘नवभारत टाइम्स’ की बात करें तो फ्रंट पेज पर काफी विज्ञापन है। लीड अयोध्या है, जिसे 'राम नवमी से पहले मंदिर का शिलान्यास' शीर्षक से पूरे सात कॉलम में लगाया गया है। इसमें ट्रस्ट की रूपरेखा तैयार करने के पीएम के निर्देश के साथ ही कार्यशाला में शुरू होने वाले काम को रखा गया है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन की खबर को भी फ्रंट पेज पर जगह दी गई है। बांग्लादेश पर भारत की जीत से जुड़े क्रिकेट के समाचार को भी फोटो के साथ पेज पर रखा गया है। अखबार ने महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को दो कॉलम में लगाया है, वहीं पेज पर करतारपुर से जुड़ी खबर भी है। कुछ समाचार संक्षिप्त में भी हैं।

आखिर में अब ‘दैनिक जागरण’ का रुख करते हैं। अखबार में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। इस फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं। खास बात यह है कि आज इस अखबार ने महज दो-तीन खबरों में फ्रंट पेज समाप्त करने का प्रयास नहीं किया है। पेज पर चार बड़ी और दो सिंगल खबरें लगाई हैं। लीड अयोध्या है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की धर्मगुरुओं के साथ हुई बैठक की फोटो के साथ लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर महाराष्ट्र का सियासी संग्राम है। भाजपा के पीछे हटने के बाद अब राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार बनाने का न्यौता दिया है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे पर छह लोगों की मौत, एच1 वीजा धारक भारतीयों को अमेरिका द्वारा मिली छूट, टीएन शेषन का निधन और बांग्लादेश पर टीम इंडिया की जीत का समाचार भी पेज पर है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: सबसे पहले बात लेआउट की। ‘अमर उजाला’ को छोड़कर बाकी सभी अखबारों में लगभग आधा पेज विज्ञापन है, इसलिए ले-आउट पर ज्यादा कुछ कहना संभव नहीं। फिर भी ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर सभी के फ्रंट पेज आकर्षक दिखाई दे रहे हैं।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘दैनिक भास्कर’ बेहतर हैं। हालांकि, ‘अमर उजाला’ का फ्रंट पेज भी अच्छा लग रहा है, लेकिन पहले जैसा नहीं है।

3: कलात्मक शीर्षक पर आज किसी भी अखबार ने जोर नहीं दिया है।

4: खबरों की बात करें तो ‘सभी अखबार लगभग एक समान हैं। 

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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अयोध्या पर 'सुप्रीम' फैसले को लेकर आज अखबारों में कुछ यूं रही कवरेज

आज अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान ने फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं लिया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Sunday, 10 November, 2019
Last Modified:
Sunday, 10 November, 2019
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अयोध्या विवाद आखिरकार सुलझ गया है। लंबे समय से अदालती कार्यवाही में उलझी विवादित जमीन के ‘असली मालिक’ की पहचान सुप्रीम कोर्ट ने कर दी है। खास बात यह है कि इस ऐतिहासिक फैसले को सभी पक्षों द्वारा स्वीकार किया गया है। फैसला सामने आने के बाद जिस तरह का सौहार्दपूर्ण माहौल देश में देखने को मिला, वह अपने आप में अहम है। इस अहम दिन की मीडिया ने भी खास तैयारी की थी, जिसके परिणाम आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों में नजर आ रहे हैं। आमतौर पर महत्वपूर्ण अवसरों पर अखबारों के फ्रंट पेज विज्ञापनों से पटे रहते हैं। कंपनियों को भी ऐसे ही मौकों की तलाश रहती है, लेकिन अयोध्या के ऐतिहासिक फैसले को विस्तार से पाठकों तक पहुंचाने के लिए अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान ने फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं लिया है, जो काबिल-ए-तारीफ है। हालांकि, शेष अहम खबरों के लिए बनाये गए दूसरे फ्रंट पेज पर जरूर कुछ अखबारों में विज्ञापन हैं। 

शुरुआत करते हैं हिन्दुस्तान से। लीड को एक तरह से मास्टहेड से ही शुरू कर दिया गया है। यानी अखबार के ‘लोगो’ के बैकग्राउंड में अयोध्या की बड़ी फोटो है, जिसके नीचे ‘राम मंदिर का रास्ता साफ’ शीर्षक तले खबर को लगाया गया है। फैसले से जुड़ी चार प्रमुख बातों को अलग से रेखांकित किया गया है, ताकि एक ही नजर में पाठकों को फैसला समझ आ जाए। हिंदू-मुस्लिम पक्षों की प्रतिक्रिया, पीएम मोदी सहित प्रमुख हस्तियों के बयान के साथ फैसले पर टिकी यूपी सरकार की निगाहों को भी पेज पर रखा गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कंट्रोल रूम में बैठकर सुरक्षा संबंधी तैयारियों की समीक्षा करते रहे। एंकर में हेमंत श्रीवास्तव और आदर्श शुक्ल की बाईलाइन है, जिन्होंने फैसले के बाद अयोध्या के हालातों पर अपनी कलम चलाई है। इसके अलावा, पांचवें पेज को भी फ्रंट पेज बनाया गया है, जिसकी लीड भी अयोध्या है। ‘मस्जिद के लिए मुनासिब भूमि मिले’ शीर्षक के साथ लीड में मुस्लिम पक्ष से जुड़े फैसले को विस्तार से समझाया गया है। श्रद्धालुओं का पहला जत्था करतारपुर रवाना, इस समाचार को भी पेज पर जगह दी गई है।

अब रुख करते हैं अमर उजाला का। फ्रंट पेज की शुरुआत 30 साल पुराने फोटो से की गई है। हालांकि, इसे मास्टहेड से लगाने के बजाय मास्टहेड को छोटा कर दिया गया है। इस फोटो ने पेज को इसलिए भी खास बना दिया है, क्योंकि 30 वर्ष पूर्व 9 नवंबर को ही रामजन्मभूमि का शिलान्यास हुआ था और 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। लीड का शीर्षक है ‘रामलला विराजमान’ और इसमें सभी महत्वपूर्ण बातों को अलग से रेखांकित किया गया है।

'अमर उजाला' ने ‘हिन्दुस्तान’ से इतर लीड में फैसला सुनाने वाले जजों की फोटो को भी जगह दी है। इसके साथ ही दोनों पक्षों सहित प्रमुख हस्तियों की प्रतिक्रियाओं को भी रखा गया है। पांचवें पेज पर बने दूसरे फ्रंट पेज के टॉप बॉक्स पर अयोध्या के फैसले पर पीएम मोदी के बयान को सजाया गया है। जिसका शीर्षक है ‘आज ही बर्लिन की दीवार गिरी थी, यह तारीख साथ बढ़ने की सीख’। इसके साथ ही अयोध्या पर पाकिस्तान की बौखलाहट भी पेज पर है। पाक के विदेशमंत्री कुरैशी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मोदी सरकार की कट्टरता को झलकाता है। हालांकि, भारत ने भी कुरैशी को करार जवाब दिया है। लीड करतारपुर रवाना हुआ श्रद्धालुओं का पहला जत्था है। इसके अलावा, पेज पर महाराष्ट्र का सियासी संग्राम, फरीदाबाद में परिवार की हत्या और एंकर में दिल्ली के प्रदूषण को लगाया गया है।

नवभारत टाइम्स ने ‘मंदिर वहीं, मस्जिद नई’ शीर्षक के साथ लीड अयोध्या फैसले को लगाया है। लीड में सद्भावना की मिसाल दर्शाती दो तस्वीरें हैं, साथ ही सोशल मीडिया पर फैसले से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को भी जगह मिली है। इसके अलावा, फैसले के सियासी और सामाजिक असर को भी समझाने का खूबसूरत प्रयास किया गया है। सबसे नीचे अहम सवालों पर कोर्ट के जवाब हैं।

दूसरे फ्रंट पेज की लीड भी अयोध्या है, जिसे आकर्षक शीर्षक ‘मंदिर निर्माण के वास्ते, कोर्ट ने तय किए रास्ते’ के साथ फोटो सहित रखा गया है। करतारपुर गलियारे के उद्घाटन और अयोध्या पर पाकिस्तानी बौखलाहट को पेज पर बड़ी जगह मिली है। साथ ही फैसले पर मुस्लिम पक्ष की अलग-अलग राय से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जहां फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने के संकेत दिए हैं, वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने फैसले को चुनौती देने से इनकार किया है।

वहीं, दैनिक जागरण की बात करें तो खूबसूरत इलस्ट्रेशन के साथ लीड को सजाया गया है। इसमें भगवान राम और प्रस्तावित मंदिर नजर आ रहे हैं। शीर्षक ‘श्रीराम’ तले खबर को विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा गया है, लेकिन अच्छी बात यह है कि बड़े-बड़े पैरा के बजाय पॉइंटर को तवज्जो दी गई है। इसी में प्रमुख हस्तियों की प्रतिक्रिया भी शामिल है।

दूसरे फ्रंट पेज पर भी अयोध्या ही लीड है। खबर का शीर्षक ‘मंदिर वहीं बनेगा’ है, जो हिंदू पक्ष की सालों पुरानी इच्छा को दर्शाता है। फैसले पर मुस्लिम पक्ष में मतभेद और वरिष्ठ वकील परासरन की दलीलों को भी पेज पर रखा गया है। परासरन ने अदालत के समक्ष जो दलीलें रखी थीं, उन्हीं के आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है। एंकर में करतारपुर गलियारे का उद्घाटन है, जिसे आकर्षक हेडलाइन ’72 साल की अरदास पूरी, करतारपुर साहिब के हुए दर्शन’ के साथ मोदी-मनमोहन की फोटो सहित सजाया गया है।

आखिर में दैनिक भास्कर को देखें तो अखबार ने आज ‘रामलला ही विराजमान’ शीर्षक के साथ लीड को सजाया है। यह शीर्षक ‘अमर उजाला’ से काफी मिलता जुलता है। फैसले की 4 बड़ी बातों को अलग से रेखांकित किया गया है। इसके अलावा, फैसला सुनाने वाले जजों की प्रतिक्रिया को फोटो के साथ रखा गया है।

दैनिक भास्कर ने थोड़ा आगे बढ़ते हुए यह भी बताने का प्रयास किया है कि कितने कारीगर लगाने से कितने वर्षों में मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। लीड में फोटो के बजाय प्रस्तावित राम मंदिर का इलस्ट्रेशन लगाया गया है। इसके साथ ही एएसआई की उस रिपोर्ट को भी पाठकों के समक्ष रखा गया है, जिसने फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: आज सबसे पहले बात कलात्मक शीर्षक की। प्रयोग सभी अखबारों ने किये हैं, लेकिन ताज ‘नवभारत टाइम्स’ को पहनाया जा सकता है। पहले पेज की हेडलाइन है ‘मंदिर वहीं, मस्जिद नई’ जो दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व करती है। कम शब्दों में पूरी बात कहने का इससे अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता। दूसरे पेज की हेडिंग ‘मंदिर निर्माण के वास्ते, कोर्ट ने तय किये रास्ते’ तुकबंदी दर्शाती है।   

2: लेआउट के लिहाज से ‘दैनिक भास्कर’ बेहतर नजर आ रहा है। अखबार का फ्रंट पेज काफी खुला-खुला है।

3: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो सभी अखबारों ने बेहतरीन काम किया है, लेकिन ‘अमर उजाला’ थोड़ा आगे है। लीड की प्रस्तुति काफी आकर्षक दिखाई दे रही है।

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