अयोध्या मामले पर नेशनल हेराल्ड ने लिख दिया कुछ ऐसा, अब मांगनी पड़ी माफी

भारतीय जनता पार्टी के विरोध जताने पर अखबार के एडिटर-इन-चीफ ने ट्वीट कर कहा, लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
National Herald Newspaper

अयोध्या मामले में शनिवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपने एक आर्टिकल को लेकर कांग्रेस के स्वामित्व वाले अंग्रेजी अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ (National Herald) ने माफी मांग ली है। इस बारे में अखबार के एडिटर-इन-चीफ की ओर से कहा गया है, ‘Why a devout Hindu will never pray at the Ram Temple in Ayodhya शीर्षक से पब्लिश आर्टिकल से यदि किसी व्यक्ति अथवा समूह की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो इसके लिए हम माफी मांगते हैं। लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं था।’

इसके साथ ही माफीनामे में यह भी कहा गया है, ‘अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का हम पूरा सम्मान करते हैं। इस आर्टिकल में जो विचार रखे गए हैं, वो लेखक के निजी विचार हैं और उनका 'नेशनल हेराल्ड' के विचारों से कोई नाता नहीं है।’

बता दें कि ‘नेशनल हेराल्ड’ के इस आर्टिकल में सुप्रीम कोर्ट की तुलना पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट से की गई थी। आर्टिकल में दावा किया गया था कि यह फैसला पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की याद दिलाता है, जिसने वहां के तत्कालीन गवर्नर जनरल गुलाम मुहम्मद को कथित तौर पर अवैध कार्य की अनुमति दे दी थी। आर्टिकल में यह भी कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने वही फैसला दिया है, जो  विश्व हिंदू परिषद् और भारतीय जनता पार्टी चाह रहे थे। हालांकि, अब अखबार ने माफी मांगने के साथ ही वेबसाइट से इस आर्टिकल को हटा दिया है।

'नेशनल हेराल्ड' में छपे आर्टिकल की हेडिंग का स्क्रीन शॉट आप यहां देख सकते हैं-

 

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वरिष्ठ पत्रकार कुमार निशांत ने किया नए सफर का आगाज

कुमार निशांत को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब 25 साल का अनुभव है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
Kumar Nishant

वरिष्ठ पत्रकार कुमार निशांत ने ‘अमर उजाला’ अखबार के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने इस अखबार के पटना ब्यूरो में जॉइन किया है। समाचार4मीडिया से बातचीत में कुमार निशांत ने बताया कि ‘अमर उजाला’ में नई भूमिका संभालने से पहले वह ‘स्वतंत्र वार्ता’ अखबार में बतौर फ्रीलॉन्सर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

मूल रूप से बक्सर के रहने वाले कुमार निशांत को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब 25 साल का अनुभव है। मगध यूनिवर्सिटी के छात्र रहे कुमार निशांत ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत दैनिक आर्यावर्त अखबार के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने दैनिक ‘आज’ व ‘स्वतंत्र वार्ता’ समेत कई अखबारों में अपनी जिम्मेदारी संभाली और अब नया सफर शुरू किया है।  

समाचार4मीडिया की ओर से कुमार निशांत को उनकी नई पारी के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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युवा पत्रकार मनीष मिश्रा ने इस अखबार के साथ शुरू किया नया सफर

युवा पत्रकार मनीष मिश्रा ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ समूह को बाय बोलकर अपनी नई पारी की शुरुआत की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2020
Manish Mishra

युवा पत्रकार मनीष मिश्रा ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ समूह को बाय बोलकर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। वह पटना से प्रकाशित ‘हिन्दुस्तान स्मार्ट’ में करीब एक साल से कार्यरत थे और बतौर सेकेंड इंचार्ज अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। समाचार4मीडिया के साथ एक बातचीत में मनीष मिश्रा ने बताया कि उन्होंने अब पटना में ही ‘दैनिक भास्कर’ जॉइन कर लिया है।

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर के मूल निवासी मनीष मिश्रा को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब 14 साल का अनुभव है। उन्होंने ‘अमर उजाला’ के साथ अपने पत्रकारीय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने यहां से अपनी पारी को विराम देकर ‘हिन्दुस्तान’ गोरखपुर में अपनी जिम्मेदारी संभाली।

वर्ष 2015 में वह पटना आ गए और जागरण प्रकाशन लिमिटेड के नेतृत्व में प्रकाशित होने वाले अखबार ‘आईनेक्स्ट’ (inext) के साथ अपनी नई पारी शुरू कर दी। करीब चार साल काम करने के बाद यहां से उन्होंने बाय बोल दिया था और करीब एक साल से ‘हिन्दुस्तान स्मार्ट’ में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जहां से अब उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ का रुख किया है।

बता दें कि ‘आईनेक्स्ट’ में रहते हुए उन्होंने खुलासा किया था कि कैसे ‘सुपर30’ के नाम पर गोलमाल होता है, जिस पर फिल्म भी बन चुकी है। इसके अलावा ‘हिन्दुस्तान स्मार्ट’ में अपनी पारी के दौरान उन्होंने भिखारी के वेश में चार दिन सड़कों की खाक छानते हुए भिखारियों पर एक्सक्लूसिव स्टोरी की थी। इस स्टोरी में उन्होंने बताया था कि कैसे तमाम भिखारी एक संगठित गिरोह की तरह काम करते हैं।

समाचार4मीडिया की ओर से मनीष मिश्रा को नई पारी के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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कश्मीर में फिर शुरू हुआ अखबारों का सर्कुलेशन, विक्रेताओं के सामने आ रही ये समस्या

कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुआ अखबारों का सर्कुलेशन अब वापस पुरानी स्थिति में लौटना शुरू हो गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2020
Last Modified:
Friday, 18 September, 2020
Newspaper Circulation

‘कोरोनावायरस’ (कोविड-19) का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए देशभर में लगाए गए लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुआ अखबारों का सर्कुलेशन अब वापस अपनी पुरानी स्थिति में लौटना शुरू हो गया है। कश्मीर में भी करीब छह माह बाद राष्ट्रीय अखबारों का सर्कुलेशन फिर शुरू हो गया है। हालांकि, न्यूजपेपर एजेंट्स का कहना है कि अखबारों की हार्ड कॉपी यानी फिजिकल कॉपी की मांग मुश्किल से ही आ रही है।   

‘डेक्कन हेराल्ड’ (deccanherald) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर के लोगों का कहना है कि पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद से यहां राष्ट्रीय अखबारों का सर्कुलेशन प्रभावित हुआ था। नवंबर में सर्कुलेशन थोड़ा सही हुआ, लेकिन कोविड-19 के कारण मार्च में लगाए लॉकडाउन की वजह से एक बार फिर अखबारों का सर्कुलेशन रुक गया था। हालांकि, अब सर्कुलेशन फिर शुरू हुआ है, लेकिन शायद ही कोई पाठक अखबार खरीदना चाहता है।

रिपोर्ट के अनुसार, न सिर्फ राष्ट्रीय अखबारों बल्कि स्थानीय अखबारों का सर्कुलेशन भी बाधित हुआ है। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि आजकर लगभग सभी अखबार इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। ऐसे में अधिकांश लोगों की अखबार खरीदकर पढ़ने की आदत खत्म होती जा रही है। वे इंटरनेट पर ही इसे पढ़ लेते हैं।

स्थानीय अखबार विक्रेताओं के हवाले से इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पहले वे राष्ट्रीय अखबारों की 1500 से 1600 कॉपियां खरीदते थे, लेकिन अब रोजाना 100-150 से ज्यादा कॉपियां नहीं बिक पा रही हैं और कोविड-19 के संक्रमण की आशंका की वजह से तमाम लोग अखबार खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

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दैनिक भास्कर ग्रुप ने निकाला अब तक का सबसे ज्यादा पेजों का अखबार

दैनिक भास्कर ग्रुप ने इंदौर में 128 पेज का अखबार निकाला है। ग्रुप का कहना है कि आत्मनिर्भर इंदौर का यह अंक ऐतिहासिक बन गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2020
Dainik Bhaskar

दैनिक भास्कर ग्रुप ने इंदौर में 128 पेज का अखबार निकाला है। ग्रुप का कहना है कि आत्मनिर्भर इंदौर का यह अंक ऐतिहासिक बन गया है। यह सफलता इस बात पर भी मोहर है कि देश व प्रदेश के अधिकतम शहर अपनी सामान्य स्थिति में लौटने लगे हैं। 128 पेज का आत्मनिर्भर इंदौर अंक संभवत: बीते कई वर्षों में भारत के किसी भी अखबार में अब तक का सबसे बड़ा अंक है।

भारतरत्न गायिका लता मंगेशकर, नीति आयोग उपाध्यक्ष राजीव कुमार, पेटीएम संस्थापक विजय शेखर शर्मा, नेस्ले इंडिया के सुरेश नारायणन, आदित्य बिड़ला ग्रुप की नीरजा बिड़ला के अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व कमलनाथ सहित कई हस्तियों ने भी इस विशेष अंक में आलेख लिखकर अपना योगदान दिया है।

दैनिक भास्कर ग्रुप का कहना है कि यह उपलब्धि न सिर्फ उसके लिए खास है, बल्कि इस सच्चाई को भी बताती है कि विज्ञापनदाता फिर से प्रिंट मीडिया की ओर विश्वास के साथ लौट आए हैं। इससे ये भी जाहिर हो रहा है कि विभिन्न कारोबार पटरी पर लौटने लगे हैं।

128 पेज के इस संस्करण में पूरी तरह से आत्मनिर्भर भारत की थीम समायी हुई है। रियल एस्टेट, टू व्हीलर, फॉर व्हीलर ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, लाइफस्टाइल, सरकार और सोशल एडवरटाइजर्स अपने-अपने सेक्टर्स की ऐड कैटेगरीज में आत्मनिर्भर इंदौर का लाभ उठाने के लिए आगे आए हैं। 

ग्रुप का कहना है कि यह संस्करण पाठकों के नजरिये से शानदार है, इसमें बेहतरीन पठनीय सामग्री है, जो पाठकों के लिए तोहफा जैसा है। दैनिक भास्कर में हम हर रोज खबरों और जानकारियों को इस तरह से प्रस्तुत करते हैं, जिसे पाठक अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल कर सकें। दैनिक भास्कर ग्रुप ने यह भरोसा जताया है कि यह संस्करण विज्ञापनदातों और ग्राहकों के बीच सकारात्मक सोच को बढ़ाएगा और इससे बाजार में सेल बढ़ेगी।

भारत में न्यूजपेपर इंडस्ट्री अपने भाषाई प्रकाशनों के साथ फिर से कोरोना से पहले वाली स्थिति में लौट आई है। सर्कुलेशन लगभग कोराना से पहले वाले स्तर तक पहुंच गया है। इसके पीछे भारत के नॉन-मेट्रो शहरों की ताकत है।

हाल ही में प्रकाशित EY की रिपोर्ट में बताया गया है कि नॉन मेट्रो बाजार ही भारत की रिकवरी को बढ़ावा देंगे।  उम्मीद की जा रही है कि ग्राहक ज्यादातर उन कैटेगरीज में खर्च करेंगे जो नॉन मेट्रो में आती हैं। इन बाजारों में टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, वाहन और लाइफस्टाइल जैसी वस्तुओं पर खर्च करने की ओर ज्यादा झुकाव है।

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ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) के चेयरमैन बने देवेंद्र दर्डा

‘आईटीसी लिमिटेड’ (ITC Ltd) के करुणेश बजाज को सर्वसम्मति से ‘ABC’ का डिप्टी चेयरमैन चुना गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 11 September, 2020
Last Modified:
Friday, 11 September, 2020
Devendra Darda

‘लोकमत मीडिया समूह’ (Lokmat Media Group) के मैनेजिंग डायरेक्टर देवेंद्र वी दर्डा को ‘ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन’ (ABC) का चेयरमैन चुना गया है। उनका चुनाव वर्ष 2020-21 के लिए किया गया है। वहीं, ‘आईटीसी लिमिटेड’ (ITC Ltd) के करुणेश बजाज को सर्वसम्मति से ‘ABC’ का डिप्टी चेयरमैन चुना गया है।

बता दें कि लोकमत मीडिया समूह देश के सबसे बड़े क्षेत्रीय मीडिया समूहों में से एक है और प्रिंट, डिजिटल, टीवी व इवेंट्स में इसने अपनी मौजूदगी दर्ज करा रखी है। दर्डा पूर्व में मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी तमाम इकाइयों जैसे ‘इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी’ (INS) और ‘IFRA’  में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वह महाराष्ट्र के यवतमाल में कई शैक्षणिक संस्थानों के अध्यक्ष हैं और पश्चिमी भारत फुटबॉल एसोसिएशन (Western India Football Association) की मैनेजिंग कमेटी में भी शामिल हैं।

वर्ष 2020-20 के लिए एबीसी काउंसिल में जिन सदस्यों को शामिल किया गया है, उनकी लिस्ट आप नीचे देख सकते हैं।

Publishers Representatives 

1. Mr. Devendra V. Darda - Lokmat Media Pvt. Ltd. - Chairman 
2. Mr. Riyad Mathew - Malayala Manorama Co. Ltd. - Hony. Secretary 
3. Mr. Hormusji N. Cama – The Bombay Samachar Pvt. Ltd. 
4. Mr. Shailesh Gupta - Jagran Prakashan Ltd
5. Mr. Pratap G. Pawar - Sakal Papers Pvt. Ltd 
6. Mr. Praveen Someshwar – HT Media Ltd. 
7. Mr. Mohit Jain – Bennett, Coleman & Co. Ltd. 
8. Mr. Dhruba Mukherjee – ABP Pvt. Ltd. 

Advertisers Representatives

1. Mr. Karunesh Bajaj - ITC Ltd. – Deputy Chairman 
2. Mr. Debabrata Mukherjee - United Breweries Ltd. 
3. Mr. Aniruddha Haldar - TVS Motor Company Ltd.

Advertising Agencies Representatives 

1. Mr. Vikram Sakhuja, Madison Communications Pvt. Ltd. – Hony. Treasurer
2. Mr. Shashidhar Sinha, Media Brands Pvt. Ltd. 
3. Mr. Srinivasan K Swamy, RK Swamy BBDO Pvt. Ltd. 
4. Mr. Ashish Bhasin, Dentsu Aegis Network Communications India Pvt. Ltd Secretariat
5.Mr. Hormuzd Masani – Secretary General
6.H.B. Masani- Secretary General

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HC ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला, संपादक-रिपोर्टर को ठहराया मानहानि का दोषी

एक अन्य मामले में अदालत ने सांध्य अखबार के संपादक की ओर से दायर आपराधिक संशोधन याचिका को खारिज कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2020
Karnataka HC

मानहानि के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने भटकल में एक स्थानीय मैगजीन के संपादक और रिपोर्टर को दोषी ठहराया है। इसके अलावा एक अन्य मामले में मेंगलुरु स्थित एक सांध्य अखबार के एडिटर की ओर से दायर आपराधिक संशोधन याचिका को खारिज कर दिया।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले मामले में हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हुए भटकल से निकलने वाली साप्ताहिक मैगजीन ‘Kadala Koogu’ के एडिटर और पब्लिशर गणेश पी और इसके रिपोर्टर राघवेंद्र आर भट को दोषी ठहराया।  

भटकल की एक शिक्षिका ने इन दोनों पत्रकारों के खिलाफ उनके चरित्र को बदनाम करने वाला लेख लिखने की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने यह माना था कि आर्टिकल आपत्तिजनक था, लेकिन वर्ष 2011 में दोनों आरोपितों को बरी कर दिया था।

वहीं, कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस एन.जी उमा ने इस मामले में दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराया है। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इसके साथ ही दोनों आरोपितों को 30-30 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता के पक्ष में मुआवजे के रूप में जुर्माने की 50,000 रुपये की राशि जमा करने का भी आदेश दिया।

वहीं, दूसरे मामले में जस्टिस एचबी प्रभाकर शास्त्री ने मेंगलुरु से निकलने वाले अखबार ‘Karavali Ale’ और ‘Canara Times’ के प्रिंटर, पब्लिशर और एक्टिंग एडिटर (acting editor) बीएस शिवप्रसाद की आपराधिक संशोधन याचिका को खारिज कर दिया। इस मामले में शिकायतकर्ता, मेंगलुरु कैथोलिक कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने वर्ष 2000 में प्रकाशित दो आर्टिकल्स के लिए अदालत का रुख किया था। शिकायतकर्ता का कहना था कि आर्टिकल्स में लगाए गए आरोप बेबुनियाद थे। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2005 में शिवप्रसाद को दोषी ठहराया था और सेशन कोर्ट ने वर्ष 2010 में इस की पुष्टि की थी।

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ब्रिटिश पत्रिका ने भारत के इस राज्य की स्वास्थ्य मंत्री को दिया नंबर-1 का सम्मान

ब्रिटिश पत्रिका ‘प्रोस्पेक्ट’ ने पूरी दुनिया में केके शैलजा को 'टॉप थिंकर 2020' के रूप में नामित किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 05 September, 2020
kkshailja

कोरोना वायरस से लड़ने में केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने जो तत्परता और कुशलता दिखाई है, उसकी तारीफ अब हर जगह हो रही है। यही वजह है कि ब्रिटिश पत्रिका ‘प्रोस्पेक्ट’ ने पूरी दुनिया में केके शैलजा को 'टॉप थिंकर 2020' के रूप में नामित किया है। इस मैगजीन ने World’s Top 50 Thinkers of COVID-19 Age नाम से लिस्ट निकाली, जिसमें केके शैलजा टॉप पर आई हैं। न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न दूसरे नंबर पर हैं।

इस मैगजीन में दार्शनिकों, बुद्धिजीवियों, कलाकारों, वैज्ञानिकों और लेखकों को पाठकों द्वारा मतदान के आधार पर और विशेषज्ञों व संपादकों की पैनल की राय के आधार पर चुना गया है।

पत्रिका के अनुसार, इस लिस्ट को अंतिम रूप देने के लिए 20,000 से अधिक वोट डाले गए। केके शैलजा इस लिस्ट में एकमात्र भारतीय महिला हैं। इस मैगजीन ने शैलजा की प्रशंसा करते हुए लिखा, ‘साल 2018 में भी शैलजा ने केरल में फैले निपाह वायरस का डटकर सामना किया था।’

शैलजा राजनीति में आने से पहले एक शिक्षक थीं। उन्हें लोग 'शैलजा टीचर' भी कहते हैं। इससे पहले भी शैलजा द्वारा कोरोना को रोकने की दिशा में किए गए प्रयासों को तारीफ मिली है। ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार 'द गार्जियन' ने भी कोरोना काल में शैलजा द्वारा किए गए कामों की प्रशंसा की थी।

संयुक्त राष्ट्र ने COVID-19 महामारी की सीमाओं पर काम कर रहे लोक सेवकों को सम्मानित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी बात रखने के लिए शैलजा को आमंत्रित किया था।

जेसिंडा के बाद प्रोस्पेक्ट की लिस्ट में फ्रेंच इकोनॉमिस्ट और नोबल प्राइज वीनर एस्थर डूफलो, लेखक और कई बार बुकर प्राइज से सम्मानित किए गए हिलेरी मेंटल व पर्यावरणविद डेविड एटेनबोरो का नाम भी शामिल है। इस लिस्ट में पुरुषों के बजाय महिलाओं के नाम अधिक हैं। इसमें 26 महिलाओं के नाम शामिल हैं।

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इस अखबार के पब्लिशर का निधन, CM ने जताया दु:ख

झारखंड की राजधानी रांची से छपने वाले अखबार ‘खबर मंत्र’ के प्रकाशक (पब्लिशर) व सह प्रधान संपादक अभय सिंह शुक्रवार को सुबह शहर के गुरुनानक अस्पताल में निधन हो गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 05 September, 2020
AbhaySingh

झारखंड की राजधानी रांची से छपने वाले अखबार ‘खबर मंत्र’ के प्रकाशक (पब्लिशर) व सह प्रधान संपादक अभय सिंह शुक्रवार को सुबह शहर के गुरुनानक अस्पताल में निधन हो गया। वे रांची के जाने-पहचाने बिल्डर व कारोबारी भी थे।

जानकारी के अनुसार, 4 सितंबर दिन शुक्रवार को सुबह साढे छह बजे अस्पताल में उनका निधन हुआ। गुरुवार शाम उन्हें घबराहट व सांस लेने में दिक्कत के बाद अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। रात 12 बजे उनकी तबियत और ज्यादा बिगड़ गई, लेकिन डॉक्टर्स की टीम ने उस समय तो स्थिति को नियंत्रण में कर लिया, लेकिन सुबह होते ही उनकी तबियत एक बार बिगड़ गई और उनका निधन हो गया।

उनके परिवार में उनकी पत्नी, 11वीं में पढ़ने वाला उनका एक बेटा और एक बेटी है। उनका घर मोरहाबादी के कुसुम विहार इलाके में है। भर्ती कराने के समय कोरोना की जांच का सैम्पल लिया गया था, जिसके बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आयी थी। फिलहाल उनकी मौत कोरोना वायरस से बतायी जा रही है।  

बता दें कि कुछ साल पहले ही उन्होंने रांची से ‘खबर मंत्र’ अखबार का प्रकाशन शुरू किया था। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो बीते दिनों एक अपराधी गिरोह ने अभय सिंह को जान मारने की धमकी दी थी और फिरौती की मांग की थी, जिसके बाद मोरहाबादी के निकट स्थित उनके दफ्तर पर गोलीबारी भी की गई थी, हालांकि इस हमले में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था। बताया जाता है कि बाद में इस मामले में अपराधियों की गिरफ्तारी भी हुई थी।

अभय सिंह के निधन पर पत्रकारिता, कारोबार व राजनीति से जुड़े लोगों ने शोक व दुःख प्रकट किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अभय सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभय सिंह का निधन पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में उनकी संवेदनाएं परिवारजनों के साथ है। उन्होंने ईश्वर से उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने और उनके परिजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद ने भी अभय सिंह के निधन पर दुःख व्यक्त किया। प्रसाद ने कहा कि सिंह के निधन की सूचना से वह स्तब्ध हैं। भगवान दिवंगत की आत्मा को शांति एवं शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

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मैगजीन ने फिर छापे विवादित कार्टून्स, 5 साल पहले हुआ था आतंकी हमला

फ्रांस की व्यंग्य पत्रिका 'शार्ली हेब्दो' (Charlie Hebdo) ने मंगलवार यानी 1 सितंबर को पैगंबर मोहम्मद साहब और इस्लाम से जुड़े कुछ विवादास्पद कार्टून्स को फिर से प्रकाशित किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2020
charliehebdo

फ्रांस की व्यंग्य पत्रिका 'शार्ली हेब्दो' (Charlie Hebdo) ने मंगलवार यानी 1 सितंबर को पैगंबर मोहम्मद साहब और इस्लाम से जुड़े कुछ विवादास्पद कार्टून्स को फिर से प्रकाशित किया है। बता दें कि इसी कार्टून्स को छापने की वजह से ही पांच साल पहले मैगजीन के दफ्तर पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 12 लोग मारे गए थे।

दरअसल, मैगजीन की ओर से यह प्रकाशन ऐसे समय पर हुआ है, जब पांच साल पहले हुए इसी वारदात के साजिशकर्ताओं पर बुधवार को अदालत में मुकदमा शुरू हुआ।

मैगजीन के संपादक लौरेंट रिस सौरीस्यू ने अपने लेटेस्ट एडिशन में कार्टून को फिर से छापने को लेकर लिखा, 'हम कभी झुकेंगे नहीं, हम कभी हार नहीं मानेंगे।'

मैगजीन के हालिया संस्करण के कवर पेज पर दर्जनभर कार्टून छापे गए हैं। कवर पेज के बीच में पैगंबर मोहम्मद साहब का कार्टून है। जीन काबूट ने इसे बनाया था। उन्हें काबू नाम से भी जाना जाता था। 2015 में हुए हमले में उनकी जान चली गई थी। फ्रंट पेज की हेडलाइन है, 'यह सब, बस उसी के लिए।'

कार्टून के अलावा पत्रिका की संपादकीय टीम ने कहा है कि यह उन कार्टून्स को छापे जाने का सही समय है। उनका कहना है कि इस मामले में मुकदमा शुरू हो चुका है और इसलिए इन कार्टून्स को छापना जरूरी है। टीम ने कहा है कि जनवरी, 2015 के बाद उनसे बार-बार यही कहा जाता रहा है कि हम पैगंबर मोहम्मद साहब के दूसरे कैरिकेचर भी छापें।

बता दें कि इन्हीं कार्टून्स छापने को लेकर खूनी विवाद हुआ था। 7 जनवरी साल 2015 को पेरिस स्थित 'शार्ली हेब्दो' के कार्यालय में दो आतंकी भाइयों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं थीं। इस आतंकी हमले में पत्रिका के संपादक स्टीफन कार्बोनियर समेत 12 लोग मारे गए थे, जिनमें से कुछ मशहूर कार्टूनिस्ट थे। मारे गए लोगों में ज्यादातर पत्रकार थे।

पत्रिका ने हमले से करीब दस साल पहले पैगंबर मोहम्मद साहब का कार्टून प्रकाशित किया था। इसी से नाराज मुस्लिम हमलावरों ने पत्रिका के दफ्तर पर हमला किया था। जांच में माना गया कि तीनों हमलावर सीरिया से आए थे, जो बाद में अलग-अलग स्थानों पर हुई मुठभेड़ में मार गिराए गए।

'शार्ली हेब्दो' के ऑफिस पर जनवरी 2015 में हुए आतंकी हमले की सुनवाई भी बुधवार (2 सितंबर) से शुरू हुई। वारदात के साजिशकर्ता के तौर पर 14 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से बुधवार को 11 अदालत में मौजूद थे। अदालत अब इन्हीं पर मुकदमा चला रही है।

पहले दिन की सुनवाई के समय पत्रिका के वर्तमान संपादक लौरेंट रिस सौरीस्यू भी मौजूद थे। वह आंखें बंदकर सिर झुकाए हुए अदालत की कार्यवाही में कही जा रही बातों को सुनते रहे।

न्यायाधीश रेजिस डी जोर्ना ने हमलावर सैद और चेरिफ काउची नाम के भाइयों को पैगंबर और इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। इन दोनों का संबंध अल कायदा की यमनी शाखा से पाया गया है।

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इस अखबार ने लॉन्च किया भोपाल संस्करण, धर्मेंद्र पैगवार बने संपादक

इंदौर और उज्जैन से प्रकाशित हो रहे दैनिक ‘प्रजातंत्र’ का भोपाल संस्करण भी गणेश उत्सव में शुरू हो गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 02 September, 2020
Dharmendra Paigwar

इंदौर और उज्जैन से प्रकाशित हो रहे दैनिक ‘प्रजातंत्र’ का भोपाल संस्करण भी गणेश उत्सव में शुरू हो गया है। एकादशी के अवसर इसकी भोपाल में सॉफ्ट लांचिंग हुई। वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र पैगवार को स्थानीय संपादक की जिम्मेदारी दी गई है। वह अभी तक ब्यूरो चीफ की भूमिका में थे। पैगवार भास्करहिंदी डॉट कॉम को अलविदा कहकर पिछले साल सितंबर में ही ‘प्रजातंत्र’ से जुड़े थे। पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले पैगवार अपनी एक्सक्लूसिव स्टोरी के लिए पहचाने जाते हैं।

‘दैनिक भास्कर’ समूह के अंग्रेजी अखबार ‘डीबी पोस्ट’ की लॉन्चिंग स्टोरी के लिए पैगवार जेल में भी रहकर आये थे, ताकि कारागार के अंदर के हालातों का पता लगाया जा सके। ये मध्य प्रदेश में अपनी तरह की पहली स्टोरी थी और ‘डीबी पोस्ट’ ने इसे अखबार के फ्रंट पेज पर लगाया था।

धर्मेंद्र पैगवार ने अपने करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित ‘देशबंधु’ की थी। वह प्रिंट से लेकर डिजिटल मीडिया तक में सेवाएं दे चुके हैं। पैगवार ने सबसे लंबी पारी भोपाल भास्कर के साथ खेली, यहां वह करीब 8 साल रहे। इसके बाद उन्होंने भोपाल में दैनिक जागरण के नेशनल एडिशन का कामकाज देखा और फिर ‘पत्रिका’ से जुड़े।

लगभग सभी बड़े मीडिया हाउस में काम कर चुके पैगवार भोपाल में ‘हरिभूमि’ लॉन्च करने वाली टीम का भी हिस्सा थे। प्रिंट मीडिया में काफी समय गुजारने के बाद उन्होंने भास्करहिंदी डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में प्रवेश किया था, हालांकि जल्द ही वापस प्रिंट मीडिया में लौट आये।

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