लॉन्च हुआ नया अखबार, इन मायनों में है खास

32 पेज के इस साप्ताहिक अखबार का मूल्य 20 रुपए रखा गया है, 25 अक्टूबर से न्यूज स्टैंडों पर सुचारु रूप से मिलना शुरू हो जाएगा

Last Modified:
Friday, 11 October, 2019
Newspaper

मार्केट में एक नए अंग्रेजी अखबार ने दस्तक दी है। मीडिया स्टार्टअप ‘Admighty Infomedia Private Limited’ ने अहमदाबाद में ‘ द कैंबे पोस्ट’ (The Cambay Post) के नाम से इस साप्ताहिक अखबार को लॉन्च किया है। कॉम्पैक्ट साइज का यह अखबार प्रत्येक रविवार को पब्लिश होगा। यह अखबार 25 अक्टूबर से न्यूज स्टैंडों पर सुचारु रूप से मिलना शुरू हो जाएगा। इस अखबार का मूल्य 20 रुपए रखा गया है।

बताया जाता है कि अहमदाबाद से पब्लिश होने वाला यह अपनी तरह का पहला अंग्रेजी का रविवारीय साप्ताहिक अखबार होगा। 32 पेज के रंगीन पेजों वाले इस अखबार में स्थानीय खबरों के साथ ही नेशनल, इंटरनेशनल, एंटरटेनमेंट, लाइफ स्टाइल, हेल्थ, फैशन और बिजनेस से जुड़ी खबरें पाठकों को पढ़ने को मिलेंगी।

इस बारे में अखबार के संपादक दिनेश कुमार गौतम का कहना है, ‘कई रिपोर्ट्स व अन्य प्रमुख माध्यमों से पता चलता है कि विश्व के कई शहरों में कॉम्पैक्ट अखबार काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हम भी इस ट्रेंड को अपनाने को लेकर काफी उत्साहित हैं।’ इसके साथ ही ‘The Cambay Post’ ने एक मार्केटिंग प्लान भी तैयार किया है, जिसमें वेब मार्केटिंग, आउटडोर और ऑन ग्राउंड से जुड़ी गतिविधि भी शामिल हैं।

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फोटोगैलरी: दिग्गजों की मौजूदगी में सीनियर मीडिया प्रफेशनल अमित खन्ना की बुक लॉन्च

13 दिसंबर को दिल्ली के नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी में हुई किताब की लॉन्चिंग

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 16 December, 2019
Last Modified:
Monday, 16 December, 2019
Amit Khanna Book Launching

सीनियर मीडिया प्रफेशनल अमित खन्ना की नई किताब ‘WORDS SOUNDS IMAGES- A History of Media and Entertainment in India’ ने मार्केट में दस्तक दे दी है। 13 दिसंबर को दिल्ली के नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी में इस किताब की लॉन्चिंग की गई। किताब की लॉन्चिंग के दौरान फिल्म अभिनेत्री और राज्यसभा सांसद जया बच्चन, मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर, ‘एनडीटीवी’ के प्रमोटर्स डॉ. प्रणॉय रॉय, ‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ (The Walt Disney Company, Asia Pacific) के प्रेजिडेंट उदय शंकर, वरिष्ठ पत्रकार व ‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी, न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’ (ANI) की संपादक स्मिता प्रकाश, आईआईएमसी’ के पूर्व डीजी सुनील टंडन समेत मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की तमाम जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं। इस मौके पर लोगों को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बारे में उनके विचार सुनने का मौका भी मिला। इस मौके पर एक पैनल डिस्कशन का आयोजन भी किया गया।

इस मौके पर अमित खन्ना का कहना था, ‘मेरे लिए हमेशा से नई-नई चुनौतियों को सामने लाना महत्वपूर्ण रहा है। भारत में डांस और म्यूजिक की काफी पुरानी परंपरा रहा है। इसके बाद प्रिंट आया, फिर रेडियो, टेलिविजन और अब डिजिटल, ऐसे में किस किताब में इन सभी को कवर किया गया है। मुझे इस किताब को लिखने का आइडिया छात्रों और युवा प्रफेशनल्स से बातचीत करने के दौरान आया, क्योंकि उनसे बातचीत के दौरान मुझे इस तरह की किताब की कमी महसूस हुई जो उन्हें भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट के बारे में संपूर्ण जानकारी दे सके।’

इसके साथ ही अमित खन्ना का यह भी कहना था, ‘आजकल नेटवर्क सोसायटी का दौर है। मानव जीवन के इतिहास में यह पहला मौका है, जब चार-पांच मिलियन लोग एक-दूसरे से कनेक्टेड हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव के इस दौर में मैं मीडिया में आ रहे बदलावों को जानना और उनका विश्लेषण करना चाहता हूं।’ अमित खन्ना का कहना था कि सरकार को इस बारे में सिर्फ व्यापक नीतियां बनाने पर फोकस करना चाहिए। इसके अलावा इस बिजनेस में दूर रहना चाहिए। यह न केवल मीडिया और एंटरटेनमेंट बल्कि अन्य इंडस्ट्री के लिए भी सही है।

बता दें कि कला और मीडिया के क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए यह किताब काफी उपयोगी है। इस किताब को अमित खन्ना ने लिखा है और इसे ‘हार्पर कोलिन्स’ (Harper Collins) पब्लिकेशन ने पब्लिश किया है। इस किताब की कीमत 1499 रुपए रखी गई है। किताब की खासियत की बात करें तो यह अपनी तरह की ऐसी पहली किताब है, जिसमें सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर 21वीं शताब्दी तक की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के इतिहास को शब्दों में पिरोया गया है। इस किताब की शुरुआत में ही अमित खन्ना ने हड़प्पा और वैदिक सभ्यता का जिक्र किया है। इसके बाद वहां से होते हुए मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री आज जिस मुकाम पर पहुंची है, उसके बारे में काफी जानकारी देने का इस किताब में प्रयास किया गया है।

किताब के लेखक अमित खन्ना खुद एक फिल्म निर्माता, निर्देशक और गीतकार है, जिसकी वजह से वह इन गहरे विषयों को काफी बेहतर तरीके से किताब में शामिल कर पाए हैं। अमित खन्ना के करियर की बात करें तो उन्होंने वर्ष 1970 में अभिनेता और फिल्म निर्माता देव आनंद के प्रॉडक्शन हाउस ‘नवकेतन फिल्म्स’ के साथ बतौर एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर और राइटर के तौर पर की थी। वह अब तक 250 से ज्यादा फिल्मी-गैरफिल्मी गीत भी लिख चुके हैं। 80 के दशक में उन्होंने कई फीचर फिल्में, डॉक्यूमेंट्रीज, कॉमर्शियल और टीवी कार्यक्रम लिखे और उनका निर्माण व निर्देशन भी किया। 1989 में उन्होंने ‘प्लस चैनल’ के नाम से मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी शुरू की। इस प्लेटफॉर्म के तहत उन्होंने तमाम टीवी प्रोग्राम्स, विभिन्न भाषाओं और जॉनर में म्यूजिक एलबम और ऑडियो बुक्स भी तैयार कीं। इसके अलावा वह ‘द इकनॉमिक टाइम्स’ (The Economic Times) समेत कई पब्लिकेशंस में एडिटोरियल एडवाइजर भी रह चुके हैं।

वह ‘रिलायंस एंटरटेनमेंट’ के फाउंडर चेयरमैन भी रह चुके हैं। मीडिया, एंटरटेनमेंट और कल्चर पर उनके एक हजार से ज्यादा आर्टिकल पब्लिश हो चुके हैं। पूर्व में वह ‘फिक्की’ (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry) की एंटरटेनमेंट एंड कंवर्जेंस कमेटियों  के साथ ही ‘सीआईआई’ (Confederation of Indian Industry) की नेशनल कमेटी और मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के चेयरमैन भी रह चुके हैं। वर्ष 2007 से 2008 के दौरान वह प्रधानमंत्री की इंफॉर्मेशन, कम्युनिकेशन और एंटरटेनमेंट कमेटी के मेंबर भी रह चुके हैं। उन्हें अब तक कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें ‘नेशनल अवॉर्ड फॉर फिल्म्स’ भी शामिल है। वह जामिया मिलिया इस्लामिया मीडिया रिसर्च सेंटर के अलावा पुणे और कोलकाता के फिल्म संस्थानों के गवर्निंग काउंसिल भी रह चुके हैं। इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड देने वाली जूरी में वह पहले भारतीय रह चुके हैं। इसके अलावा वह देश-विदेश के तमाम शिक्षण संस्थानों में लेक्चर भी दे चुके हैं। इससे पहले वर्ष 2013 में उनकी एक किताब Anant Raag; Infinite Verse पब्लिश हो चुकी है।

देखें कार्यक्रम की कुछ और झलकियांः

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आज कैसा रहा अखबारों के फ्रंट पेज का हाल, पढ़ें यहां

नवभारत टाइम्स और दैनिक जागरण में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं, हिन्दुस्तान और दैनिक भास्कर के फ्रंट पेज पर आज काफी विज्ञापन है

नीरज नैयर by
Published - Monday, 16 December, 2019
Last Modified:
Monday, 16 December, 2019
Newspapers

नागरिकता संशोधन बिल पर मचा बवाल हर रोज नए रूप में सामने आ रहा है। असम, बंगाल के बाद अब दिल्ली भी हिंसा की लपटों में झुलस गया है। यही हिंसा आज के अखबारों की सबसे बड़ी खबर है। शुरुआत करते हैं अमर उजाला से। ‘दिल्ली पहुंची विरोध की आग, छह बसें फूंकीं’ शीर्षक के साथ लगी लीड को दो भागों में विभाजित किया गया है। एक तरफ दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल का हाल है और दूसरी तरफ अलीगढ़ में पुलिस-छात्र भिड़ंत। झारखंड की चुनावी रैली से पीएम मोदी द्वारा कांग्रेस पर साधे गए निशाने को दूसरी बड़ी खबर का दर्जा मिला है। मोदी का कहना है कि कल जो पाकिस्तान करता था, आज वही कांग्रेस कर रही है।

अभिनेत्री पायल रोहतगी की गिरफ्तारी की खबर को भी अखबार ने प्रमुखता से लगाया है। पायल को राजस्थान पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनके पिता के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार किया है। पायल इसे अभिव्यक्ति की आजादी का हनन बता रही हैं। पीएनबी की कारगुजारी और जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर हुए दुखद हादसे को दो-दो कॉलम जगह मिली है। रिजर्व बैंक ने खुलासा किया है कि पीएनबी ने 2617 करोड़ का एनपीए छिपाया था। वहीं घाटी में चलती गाड़ी पर चट्टान गिरने से सीआरपीएफ के डीआईजी और उनके ड्राइवर की मौत हो गई। एंकर में आईटीबीपी की अनोखी पहल है। सुरक्षा बल अपने जवानों को जीवनसाथी चुनने में मदद करेगा। इसके अलावा, पेज पर 126 करोड़ के घोटाले में पूर्व एसईओ की गिरफ्तारी से जुड़ा समाचार भी है।

आज नवभारत टाइम्स में दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं। पहले फ्रंट पेज पर फास्ट टैग से धीमा पड़ा ट्रैफिक लीड है। सरकार ने 15 दिसंबर से सभी गाड़ियों में फास्ट टैग अनिवार्य किया है। पहले दिन नेशनल हाईवे के टॉप प्लाजा से गाड़ियां तेजी के बजाय रेंगते हुए निकलीं। दूसरी बड़ी खबर निर्भया के दोषियों की फांसी से जुड़ी है। इसके अलावा, पेज पर चार सिंगल खबरें हैं। दूसरे फ्रंट पेज पर नजर डालें तो लीड बिल पर बवाल है।

‘नवभारत टाइम्स’ ने भी लीड को दो भागों में विभाजित किया है। पहले हिस्से में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में गोलीबारी और दूसरे में दिल्ली में हुई हिंसा है। वहीं, वीर सावरकर के पोते ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराने की बात कही है। इस समाचार को प्रमुखता के साथ पेज पर रखा गया है। अखबार के पहले फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन होने के कारण खबरों वाला भाग ही शो हो रहा है, इसलिए यहां पर खबरों वाले भाग को ही लगाया गया है जबकि दूसरा फ्रंट पेज पूरा शो हो रहा है। 

हिन्दुस्तान के फ्रंट पेज पर आज ज्यादा जगह नहीं है। लीड बिल की आग में झुलसी दिल्ली है, जबकि प्रभात कुमार की बाईलाइन को प्रमुखता से दो कॉलम में लगाया गया है। प्रभात कुमार के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीएसई से कहा है कि उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन विशेषज्ञों से कराया जाए। तीसरी खबर पैन को आधार से जोड़ने से जुड़ी है। सरकार ने इसके लिए 31 दिसंबर की डेडलाइन तय की है। चौथी और आखिरी बड़ी खबर के रूप में फतेहपुर रेप पीड़िता की बिगड़ती हालत है। 95 फीसदी जली पीड़िता को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाने की तैयारी चल रही है।

वहीं, ‘नवभारत टाइम्स’ की तरह दैनिक जागरण में भी आज दो फ्रंट पेज हैं। पहले फ्रंट पेज पर नागरिकता कानून को लेकर हुई हिंसा को लीड लगाया गया है, जबकि दूसरे फ्रंट पेज की सबसे बड़ी खबर पीएम मोदी का कांग्रेस पर साधा गया निशाना है। मोदी का मानना है कि कांग्रेस देश में अशांति भड़का रही है। न्याय के लिए निर्भया के परिजनों की लंबी लड़ाई को भी अखबार ने प्रमुखता से पेज पर रखा है। इसके अलावा, पेज पर दो बड़ी खबरें और हैं। पहली, उन्नाव कांड में कुलदीप सेंगर के खिलाफ फैसला आज और दूसरी डॉक्टरों की सुरक्षा वाला विधेयक ठंडे बस्ते में।

‘हिन्दुस्तान’ की तरह दैनिक भास्कर के फ्रंट पेज पर भी आज ज्यादा जगह नहीं है। नागरिकता संशोधन बिल पर दिल्ली में हुई हिंसा लीड है और हिंसा दर्शाती फोटो को मास्टहेड से लगाया गया है। इसके चलते सीमित जगह में भी लीड का प्रेजेंटेशन काफी बेहतर ढंग से हो सका है। पीएम मोदी के बयान को भी लीड में जगह मिली है। पेज पर इसके अलावा कोई दूसरी खबर नहीं है।

सबसे आखिरी में बात करते हैं राजस्थान पत्रिका की। फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं है, इस वजह से काफी खबरों को जगह मिल सकी है। लीड बिल पर बवाल है, जबकि दूसरी बड़ी खबर के रूप में एससी/एसटी एक्ट पर मद्रास हाई कोर्ट की व्यवस्था है। अदालत ने कहा है कि इस तरह के मामलों में उसे अग्रिम जमानत देने का अधिकार है। वहीं, शिर्डी से एक चौंकाने वाली खबर भी पेज पर है। अमोल वाघमारे ने अपनी स्टोरी में बताया है कि पिछले एक साल में शिर्डी से 88 भक्त लापता हो चुके हैं।

अभिनेत्री पायल रोहतगी की गिरफ्तारी सहित कुछ अन्य खबरें भी पेज पर हैं। एंकर में वैज्ञानिकों की खोज को स्थान मिला है। वैज्ञानिकों ने इस साल पौधे और जंतुओं की 71 प्रजातियां खोज निकाली हैं। अखबार के फ्रंट पेज का सेकंड हाफ टाइप्ड होता जा रहा है। अखबार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में आज ज्यादा कुछ कहने को नहीं है, लेकिन ‘अमर उजाला’ का फ्रंट पेज सबसे बेहतर नजर आ रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर सभी अखबार ठीक हैं, मगर लीड की प्रेजेंटेशन के मामले में पलड़ा ‘दैनिक भास्कर’ का भारी है। हिंसा दर्शाती फोटो को मास्टहेड से लगाने का अखबार का फैसला अच्छा है।

3: कलात्मक शीर्षक आज किसी भी अखबार में नजर नहीं आ रहा है।

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समीक्षा: मोदी की जीत को सही मायने में रेखांकित करती है अकु श्रीवास्तव की ये किताब

भारत की चुनाव केन्द्रित राजनीति लेखकों-समीक्षकों के लिए हमेशा से एक आकर्षण का विषय रही है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 14 December, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 December, 2019
Aaku Srivastava

मिहिर भोले, वरिष्ठ शिक्षाविद।।

भारत की चुनाव केन्द्रित राजनीति लेखकों-समीक्षकों के लिए हमेशा से एक आकर्षण का विषय रही है। वादों, प्रतिवादों और विवादों से घिरी भारतीय राजनीति और चुनाव प्रक्रिया इस कदर एक-दूसरे से जुड़ी हैं, मानो एक-दूसरे की पूरक हों। चुनाव-दर-चुनाव नेता और नारे बदलते रहे हैं। पर क्या इतने सालों में राजनीति के मुद्दों में भी कोई आधारभूत बदलाव आया है? मसलन-भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, प्रांतवाद, राष्ट्रवाद आदि। ऐसे ही राष्ट्रव्यापी मुद्दों की पृष्ठभूमि में नरेन्द्र मोदी ने किस प्रकार अपनी चुनावी रणनीति तैयार कर दूसरी बार अप्रत्याशित विजय प्राप्त की, यह सबके लिए एक कौतूहल का विषय है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विश्लेषक अकु श्रीवास्तव की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘चुनाव2019: कहानी मोदी 2.0 की’ इसकी गहरी पड़ताल करती है।

बहैसियत एक राजनैतिक पत्रकार अकु श्रीवास्तव को देश की राजनैतिक धारा और चुनावी प्रक्रिया में  होने वाले बदलाव को नजदीक से देखने-समझने और उस पर टिप्पणी करने का कई दशकों का अनुभव रहा है।  समाचारपत्रों में प्रकाशित राजनैतिक विश्लेषण और टीवी चैनलों पर चुनावी समीक्षाओं के माध्यम से वे लम्बे समय से पाठकों और दर्शकों से जुड़े रहे हैं। अब इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने भारतीय राजनीति के एक ऐसे कालखंड और उसके चुनावी मुद्दों और परिणामों का विश्लेषण किया है, जिसे आने वाली पीढ़ी मोदी युग के नाम से याद करेगी। ऐसे में लेखक का यह प्रयास जिसमें न कि सिर्फ नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को मिली अप्रत्याशित सफलता की राजनैतिक समीक्षा बल्कि क्षेत्रवार चुनाव परिणामों और आंकड़ों की फेहरिस्त भी है। यह पाठकों को भारत की राजनीति के मुद्दे और उनके चुनावी परिणाम के अंतर्संबंधों को समझने में मदद करेगी।

‘कहानी मोदी 2.0’में लेखक ने इस बात को रेखांकित करने का प्रयास किया है कि भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति की बात तो सभी नेता करते आये हैं, लेकिन क्या वजह है कि अब तक जनता ने किसी पर भी इतना विश्वास नहीं किया जितना कि नरेन्द्र मोदी पर। लेखक ने मोदी के ‘चौकीदार’ बनाम‘नामदार’, बालाकोट, काले धन जैसे अनेक चुनावी मुद्दों पर भी चर्चा की है, जिसको लेकर वो जनता के बीच में गए और उसका प्रचुर विश्वास प्राप्त किया। कांग्रेस और एक समय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा रहे अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा द्वारा विपक्ष के सुर में सुर मिला कर राफेल डील को मुद्दा बना मोदी को घेरने की नाकाम कोशिश का जिक्र भी अकु श्रीवास्तव करते हैं। पर उनका इशारा इस बात की ओर है कि महज आरोप से भ्रष्टाचार सिद्ध करना स्वयं अपनी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने जैसा होता है।

2019 के चुनावों में तमाम मोदी विरोधी अपने बनाये इसी चक्रव्यूह में फंसकर रह गए। दूसरे शब्दों में कहें तो जनता की अदालत में मोदी को भ्रष्टाचार के आरोपों से क्लीन चिट मिली हुई है। ‘चौकीदार चोर है’ से जितना असर न हो सका, उससे ज्यादा ‘मैं भी चौकीदार’ के प्रतिरोधी नारे ने असर पैदा कर दिया। कहते हैं कि सफल नेता वही है जो समय के साथ अपने-आप को इनोवेट कर सके, इस बात की तरफ इशारा करते हुए लेखक नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वयं को देश के जनमानस में एक आम ‘चायवाला’ से ‘चौकीदार’ के रूप स्थापित करने के इनोवेटिव तरीके की चर्चा करना भी नहीं भूलते। अपने राष्ट्रव्यापी चुनाव अभियानों में स्थानीय मुद्दों, स्थानीय भाषा के प्रयोग और प्रभावशाली भाषण शैली से मोदी ने पूरे देश में किस प्रकार अपने पक्ष में एक लहर पैदा कर दी, इस बात का उल्लेख भी अकु श्रीवास्तव ने अपनी पुस्तक में बखूबी किया है।

वाराणसी के चुनावी भाषण में मोदी का यह कथन ‘न मुझे किसी ने भेजा है, न मैं यहां खुद आया हूं। मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है’किस कदर एक धार्मिक नगरी के लोगों की आस्थाओं में प्रतिध्वनित हो उनका विजय-घोष बन गया, पुस्तक इस बात की ओर भी पाठकों का ध्यान आकर्षित करती है।

कुल मिलाकर यह पुस्तक रोचक और तथ्यात्मक दोनों है। साथ ही यह चुनावी मुद्दे, मोदी की रणनीति और उसके क्षेत्रवार परिणामों के आंकड़ों के बीच एक समन्वय बिठाने का प्रयास भी करती है। एक वरिष्ठ पत्रकार होने के नाते लेखक सिर्फ तथ्य आधारित चर्चा ही करते हैं, लेकिन इसके बावजूद यदि इस पुस्तक के माध्यम से नरेन्द्र मोदी की छवि एक ऐसे राजनेता के रूप में उभरती है, जिसके लिए राजनीति साध्य नहीं, बल्कि व्यापक जनकल्याण को हासिल करने का एक साधन मात्र हो तो इसे स्वीकार कर ही लेना चाहिए।

चुनाव2019: कहानी मोदी 2.0 की

लेखक: अकु श्रीवास्तव

प्रकाशक: प्रभात पेपरबैक्स, नयी दिल्ली

मूल्य:300/

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नए सफर पर निकले युवा पत्रकार अनुराग सिंह सेंगर

मूलरूप से उत्तर प्रदेश में कानपुर देहात के रहने वाले अनुराग सेंगर ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 14 December, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 December, 2019
Anurag Sengar

युवा पत्रकार अनुराग सिंह सेंगर ने ‘दैनिक जागरण’ को अलविदा कह दिया है। यहां वह नोएडा में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने अपना नया सफर अब ‘अमर उजाला’, नोएडा के साथ बतौर सब एडिटर शुरू किया है।

मूलरूप से उत्तर प्रदेश में झींझक कानपुर देहात के रहने वाले अनुराग सेंगर ने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी से ग्रेजुएशन करने के बाद माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से एमएमसी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की पढ़ाई की है।

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ‘न्यूज18 इंडिया’ (News18India) के आउटपुट डिपार्टमेंट के साथ ही ‘एपीपी न्यूज’ (ABP News) में कुछ समय तक काम किया। इसके बाद उन्होंने जुलाई 2018 में 'दैनिक जागरण' के साथ जूनियर सब एडिटर के तौर पर अपनी शुरुआत की थी।

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यौन उत्पीड़न के आरोप में घिरे इंडियन एक्सप्रेस के फोटो एडिटर ने उठाया ये कदम

एक महिला ने चंद रोज पहले फोटो जर्नलिस्ट के साथ बातचीत के स्क्रीनशॉट सार्वजनिक करते हुए उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
Indian Express

यौन उत्पीड़न का आरोप झेल रहे ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के नेशनल फोटो एडिटर नीरज प्रियदर्शी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गौरतलब है कि एक महिला ने चंद रोज पहले नीरज प्रियदर्शी के साथ बातचीत के स्क्रीनशॉट सार्वजनिक करते हुए उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। स्क्रीनशॉट में, नीरज उक्त महिला को ‘फ्रेडा बेबी’  के नाम से संबोधित करते हैं, जिसके जवाब में वह कहती है, ‘ओह मुझे इस नाम से मत बुलाओ।’

एक दूसरे स्क्रीनशॉट में यह बात सामने आई कि नीरज फोटोशूट के लिए पीड़िता पर दबाव डाल रहे थे, जिस पर उसने असहज होने की बात कही थी। आरोप लगाने वाली महिला ने प्रियदर्शी को चेतावनी भी दी थी कि यदि वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आये तो वह सबको इस बारे में बता देगी।

इस संबंध में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की लीगल डायरेक्टर वैदेही ठाकर ने ‘न्यूजलॉन्ड्री डॉटकॉम को बताया, ‘यौन शोषण के प्रति इंडियन एक्सप्रेस समूह में जीरो टॉलरेंस नीति है। हमें अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है, हालांकि हमने नेशनल फोटो एडिटर नीरज प्रियदर्शी पर लगे आरोपों का सज्ञान लिया है। मामले की जांच को देखते हुए प्रियदर्शी ने इस्तीफा दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।’

वहीं, आरोप लगाने वाली महिला का कहना है कि उन्होंने नीरज के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का फैसला कर लिया है। पीड़िता ने इंस्टाग्राम पर बताया है कि मामले को उजागर करने के बाद  ‘इंडियन एक्सप्रेस’ सहित कई राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के पत्रकारों ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन वह फिलहाल इस बारे में ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहतीं।

महिला ने अपना साथ देने के लिए सभी को धन्यवाद देते हुए उम्मीद जताई है कि और भी महिलाएं अब यौन उत्पीड़न के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगी। आरोपों को लेकर नीरज प्रियदर्शी की सफाई अब तक मीडिया में नहीं आई है। 

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जानें, आंकड़ों को लेकर आज भी कैसे अखबारों में दिखा विरोधाभास

हिन्दुस्तान में जैकेट विज्ञापन के कारण तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। दैनिक जागरण में भी तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। नवभारत टाइम्स में आज फ्रंट पेज पर एक बड़ा विज्ञापन है

नीरज नैयर by
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
Newspaper

दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों में आज भी नागरिकता संशोधन बिल को सबसे बड़ी खबर का दर्जा दिया गया है। शुरुआत हिन्दुस्तान से करते हैं। जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड बिल पर बवाल है, जिसे असम हिंसा दर्शाती फोटो के साथ लगाया गया है। अयोध्या विवाद पर दायर पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने को दो कॉलम जगह मिली है। हालांकि ‘संख्याओं’ को लेकर आज भी अखबारों में गफलत का माहौल है। ‘हिन्दुस्तान’ पुनर्विचार याचिकाओं की संख्या 18 बता रहा है, जबकि कई अखबारों में यह 19 है।

दिल्ली-एनसीआर में मौसम के बदले मिजाज के साथ ही महंगाई की बढ़ती रफ्तार भी पेज पर है। खुदरा महंगाई तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, निर्भया के दोषी अक्षय की याचिका पर कोर्ट 17 दिसंबर को सुनवाई करेगा। एंकर में नए देश के जन्म को जगह मिली है। जल्द ही बोगेनविल दुनिया का 196वां राष्ट्र होगा। इसके अलावा पेज पर सुनील पाण्डेय की बाईलाइन स्टोरी भी है, जो बता रहे हैं कि जेवर एयरपोर्ट को आईजीआई से जोड़ने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की जाएगी।

आज राजस्थान पत्रिका के फ्रंट पेज पर नजर डालें तो केवल लीड की प्रस्तुति ही अलग नजर आ रही है, बाकी पूरा पेज काफी हद तक पिछले दिनों जैसा है। खासकर सेकंड-हाफ में कुछ खास करने का प्रयास ही नहीं किया गया है। लीड बिल पर बवाल है और दूसरी बड़ी खबर के रूप में हैदराबाद एनकाउंटर की न्यायिक जांच के आदेश हैं।

अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करने के शीर्ष अदालत के फैसले को अखबार ने प्रमुखता से लगाया है। ‘राजस्थान पत्रिका’ याचिकाओं की संख्या के मामले में ‘हिन्दुस्तान’ के साथ है। यहां भी 18 याचिकाएं खारिज होने की बात कही गई है। रेप पीड़िता को धमकी सहित राजस्थान और महाराष्ट्र से जुड़ी कुछ अन्य खबरों को भी प्रमुखता के साथ पेज पर रखा गया है। एंकर में संदीप पाटिल की बाईलाइन स्टोरी है, जिन्होंने सूरत के व्यापारी की सराहनीय पहल पर प्रकाश डाला है। अश्विन सभाया ने 350 बाल मजदूरों की आजीवन पढ़ाई के खर्च का जिम्मा उठाया है।

अब दैनिक भास्कर की बात करें तो फ्रंट की शुरुआत मुकेश कौशिक और पवन कुमार की बाईलाइन से हुई है। वैसे, पिछले कुछ दिनों में फ्रंट पेज के फर्स्ट हाफ में खास बदलाव देखने को नहीं मिले हैं। कभी सात कॉलम बॉक्स लगा दिया जाता है और कभी उस जगह को थोड़ा बड़ा करके लीड सजा दी जाती है। फिलहाल, मुकेश और पवन ने निर्भया के दोषियों की फांसी को लेकर तिहाड़ की तैयारियों के बारे में पाठकों को बताया है।

लीड नागरिकता बिल पर बवाल है। अयोध्या पर पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने और हैदराबाद एनकाउंटर की न्यायिक जांच के आदेश को भी प्रमुखता के साथ लगाया गया है। सबसे नीचे खानपान को लेकर लंदन यूनिवर्सिटी के अध्ययन को जगह मिली है। इसमें बताया गया है कि क्या खाने पर कितना वर्कआउट करना चाहिए।

वहीं, दैनिक जागरण में फुल पेज विज्ञापन की वजह से आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। अखबार ने नागरिकता संशोधन पर असम में हुई हिंसा को दूसरी बड़ी खबर का दर्जा देते हुए लीड माला दीक्षित की स्टोरी को लगाया है। जिन्होंने अयोध्या पर दाखिल सभी पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने के बारे में बताया है। यहां भी पुनर्विचार याचिकाओं की संख्या 19 बताई गई है।

इसके अलावा, गौतम कुमार की बाईलाइन स्टोरी भी पेज पर है, जिसमें उन्होंने फांसी के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन की तैयारियों पर प्रकाश डाला है। हैदराबाद एनकाउंटर की न्यायिक जांच का आदेश तीन कॉलम में है, साथ ही पेज पर कुछ संक्षिप्त खबरें हैं।

सबसे आखिर में आज नवभारत टाइम्स का रुख करते हैं। अखबार के फ्रंट पेज की शुरुआत टॉप बॉक्स से हुई है। इसमें अयोध्या पर पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने का समाचार है। अखबार ने याचिकाओं की संख्या 19 बताई है। लीड बिल पर बवाल है, जिसे विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा गया है। वहीं, श्यामवीर की बाईलाइन स्टोरी को तवज्जो मिली है। इस स्टोरी के अनुसार, नोएडा में एक युवती के लिए पुलिस देवदूत बनकर आई।

इसके अलावा पेज पर शादाब रिजवी की बाईलाइन भी है। स्टोरी में बताया गया है कि किस तरह रेप की शिकार युवती को गवाही से रोकने के लिए धमकियां दी जा रही हैं। निर्भया के दोषी की याचिका पर 17 को होने वाली सुनवाई सिंगल कॉलम में है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट की बात करें तो ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘हिन्दुस्तान’ ने सीमित जगह में काफी अच्छा फ्रंट पेज तैयार किया है।

2: खबरों की प्रस्तुति में ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर सभी अखबार लगभग एक जैसे हैं। इसलिए किसी एक के सिर पर ताज सजाना मुश्किल है। 

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में सभी अखबारों के हाथ खाली दिखाई दे रहे हैं। हालांकि ‘नवभारत टाइम्स’ ने लीड के शीर्षक में प्रयोग किया है, लेकिन आम पाठक के लिए उसे समझना थोड़ा मुश्किल है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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राष्ट्रीय सहारा: अब ये वरिष्ठ पत्रकार बने रीजनल हेड

‘सहारा इंडिया मीडिया’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय की ओर से इस बारे में जारी किया गया है एक पत्र

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 12 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 December, 2019
Rashtriya Sahara

‘सहारा इंडिया मीडिया’ (Sahara India Media) से एक बड़ी खबर सामने आई है। खबर है कि प्रबंधन ने 'राष्ट्रीय सहारा', कानपुर के यूनिट हेड देवकी नंदन मिश्रा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अब उन्हें लखनऊ और कानपुर की यूनिटों (हिंदी और उर्दू) का रीजनल हेड बनाया गया है। देवकी नंदन मिश्रा लंबे समय से सहारा समूह के साथ जुड़े हुए हैं और अब तक विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं।

इस बारे में ‘सहारा इंडिया मीडिया’ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय की ओर से एक पत्र भी जारी किया गया है। इस पत्र में कहा गया है कि नए आदेश के तहत तत्काल प्रभाव से अब 'राष्ट्रीय सहारा' की इन दोनों यूनिटों के हेड के साथ ही रेजिडेंट एडिटर्स और प्रशासनिक हेड अपने रोजाना के कार्यों की रिपोर्ट देवकी नंदन मिश्रा को देंगे।

उपेंद्र राय की ओर से इस बारे में जारी किए गए आदेश की कॉपी आप यहां देख सकते हैं।  

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राज्यसभा में विपक्षी वोटों को लेकर अखबारों में 'कंफ्यूजन', हिन्दुस्तान ने मारी बाजी

दैनिक जागरण में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं, वहीं नवभारत टाइम्स में जैकेट विज्ञापन की वजह से तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by
Published - Thursday, 12 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 December, 2019
News Papers

नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा में भी पास हो गया है। हालांकि, इस पर बवाल जारी है और इसके जल्द थमने की कोई संभावना नहीं है। आज के अखबारों में यही सबसे बड़ी खबर है। शुरुआत आज दैनिक भास्कर से करते हैं। अखबार ने बिल पर बवाल को पूरे सात कॉलम में जगह दी है। इस अखबार की खबर के ‘प्लस पॉइंट’ हैं गुवाहाटी से रविशंकर रवि की ग्राउंड रिपोर्ट और बिल के विरोध में आईजी अब्दुर रहमान के इस्तीफे की जानकारी।

मोदी को मिली क्लीन चिट प्रमुखता के साथ पेज पर है, जबकि दिल्ली के अग्निकांड में जान गंवाने वालों के अंतिम संस्कार की फोटो को मार्मिक हेडलाइन के साथ रखा गया है। एंकर में पवन कुमार की बाईलाइन स्टोरी है, जिसमें उन्होंने फांसी से पहले निर्भया के दोषियों के तनाव और जेल की तैयारियों के बारे में बताया है। इसके अलावा पेज पर चार सिंगल समाचार भी हैं। मसलन, हैदराबाद एनकाउंटर की पूर्व जज से जांच संभव, भारतीय चौकियों पर पाक की गोलाबारी, अयोध्या विवाद पर दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई आज और अब दुष्कर्म केस में 21 दिन में सुनवाई और फैसला।

आज दैनिक जागरण में दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं। पहले फ्रंट पेज पर नागरिकता संशोधन बिल के राज्यसभा में पास होने संबंधी समाचार है और दूसरे फ्रंट पेज पर इससे जुड़े बवाल को टॉप बॉक्स में रखा गया है। इस पेज पर लीड गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी को मिली क्लीन चिट है। वहीं, उन्नाव कांड में पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट को काफी जगह मिली है। एंकर स्टोरी में आज संसदीय समिति के सुझाव को रखा गया है। समिति का कहना है कि दिल्लीवासियों को जाम से निजात दिलाने के लिए लुटियन जोन में वीवीआईपी के लिए अलग लेन बनाई जाये।

हिन्दुस्तान की बात करें तो फ्रंट पेज पर आज दो बड़े विज्ञापन हैं। लीड नागरिकता बिल पर बवाल है। अखबार के मुताबिक, बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े और विपक्ष में 99, जबकि बाकी अखबार विपक्ष के वोटों की संख्या 105 बता रहे हैं। बताया गया है कि पहले राज्यसभा में 125 और 105 का नंबर ही घोषित हुआ था, पर कुछ समय बाद संशोधन के तहत विपक्षी वोटों की संख्या 99 कंफर्म की गई। तो ऐसे में दूसरे अखबारों की तुलना में हिन्दुस्तान पाठकों के समक्ष सही संख्या रखने में सफल हुआ।

लीड के पास ही दो कॉलम में मोदी को मिली क्लीन चिट है। अयोध्या पर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई और दिल्ली में बारिश की संभावना को भी प्रमुखता के साथ जगह दी गई है। इसके अलावा, पेज पर तीन सिंगल खबरें हैं। हैदराबाद एनकाउंटर की जांच पूर्व जज से संभव, हाफिज सईद पर पाक में आरोप तय और न्यूजर्सी में गोलीबारी।

वहीं, नवभारत टाइम्स में जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड नागरिकता बिल पर बवाल है। ऊपर सुलगते असम की फोटो के साथ खबर के बीच में नवजात को गोद में लिए एक महिला की फोटो है। इस फोटो के ऊपर लिखा है दिल्ली में ‘नागरिकता’ का जन्म। इस फोटो का सीधे तौर पर खबर से क्या मतलब है, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है, क्योंकि कैप्शन नदारद है। कम से कम ई-पेपर में तो कैप्शन दिखाई नहीं दे रहा है।

केजरीवाल सरकार की तीर्थयात्रा योजना पर रेलवे ने ब्रेक लगा दिया है, इस खबर को प्रमुखता के साथ तीन कॉलम में रखा गया है। टी-20 सीरीज में वेस्टइंडीज पर टीम इंडिया की जीत बतौर फोटो पेज पर है। अखबार ने मोदी को मिली क्लीन चिट को ज्यादा तवज्जो न देते हुए महज सिंगल में लगाया है, इसके अलावा पेज पर छह सिंगल समाचार हैं। 

सबसे आखिरी में आज रुख करते हैं राजस्थान पत्रिका का। अखबार का फ्रंट पेज देखने में अच्छा लग रहा है, लेकिन लेआउट, खासकर फर्स्ट हाफ में ज्यादा बदलाव करने का प्रयास आज भी नहीं किया गया है। लीड बिल पर बवाल है, जिसकी हेडिंग ‘संशोधन के शाह फिर पास’ गृहमंत्री अमित शाह की काबिलियत को बखूबी बयां करती है। वहीं, गोधरा कांड में नरेंद्र मोदी को मिली क्लीन चिट दूसरी प्रमुख खबर के रूप में पेज पर है। जांच करने वाले नानावटी आयोग का कहना है कि मोदी सिर्फ घटनास्थल का मुआयना करने गए थे।

बिहार के चंपारण में नाबालिग को केरोसिन छिड़ककर आग के हवाले कर दिया, इससे जुड़ी खबर के साथ ही हैदराबाद एनकाउंटर की जांच को तीन कॉलम जगह मिली है। सामाजिक कार्यकर्ता मेघा पाटकर का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है, इसकी वजह उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले हैं। यह समाचार भी फ्रंट पेज पर है। इसके अलावा, नेशनल कांफ्रेंस की खबर को अखबार ने सिंगल कॉलम में रखा है। खबर के अनुसार, पार्टी ने अनुच्छेद 370 की बहाली तक किसी भी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा न लेने का फैसला लिया है। एंकर में दुनिया के पहले इलेक्ट्रिक कमर्शियल विमान को सजाया गया है। बिजली से चलने वाले इस विमान ने कनाडा से उड़ान भरी।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में आज ‘दैनिक भास्कर’ सबसे बेहतर है। बाकी अखबारों की तुलना में ‘दैनिक भास्कर’ का फ्रंट पेज काफी खुला-खुला नजर आ रहा है। ‘राजस्थान पत्रिका’ को लेआउट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। एंकर के साथ सिंगल और दो कॉलम खबर लगभग हर दूसरे दिन देखने को मिल जाती है। 

2: खबरों की प्रस्तुति में भी पलड़ा ‘दैनिक भास्कर’ का भारी है। हालांकि, ‘राजस्थान पत्रिका’ ने भी बिल पर बवाल और मोदी को मिली क्लीन चिट को काफी बेहतर ढंग से पाठकों के समक्ष रखा है। 

3: कलात्मक शीर्षक की बात करें तो ‘हिन्दुस्तान’ और ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर बाकी सभी अखबारों ने लीड की हेडलाइन में प्रयोग किया है, लेकिन बाजी ‘राजस्थान पत्रिका’ के नाम रही है।

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दैनिक जागरण को बाय बोल पत्रकार आशुतोष यादव ने तलाशी नई मंजिल

मूल रूप से उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ के रहने वाले आशुतोष यादव दैनिक जागरण, गाजियाबाद में लंबे समय से निभा रहे थे जिम्मेदारी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 12 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 December, 2019
Ashutosh Yadav

पत्रकार आशुतोष यादव ने ‘दैनिक जागरण’ में अपनी करीब नौ साल लंबी पारी को विराम दे दिया है। वह पिछले काफी समय से गाजियाबाद में बतौर रिपोर्टर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने हेल्थ, एडमिनिस्ट्रेशन और क्राइम समेत तमाम बीट पर अपनी जिम्मेदारी निभाई। इन दिनों वह गाजियाबाद में सीबीआई कोर्ट भी देख रहे थे। अब उन्होंने यहां से बाय बोलकर बतौर रिपोर्टर अपनी नई पारी ’अमर उजाला’, गाजियाबाद के साथ शुरू की है।

उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ के मूल निवासी आशुतोष यादव ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत ‘दैनिक जागरण’ से की थी। उन्होंने फैजाबाद स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। इसी यूनिवर्सिटी से उन्होंने बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन और योग की पढ़ाई भी की है। इसके अलावा उन्होंने इलाहाबाद की राजर्षि टंडन यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री भी ली है। 

दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2013 में उनका ट्रांसफर हरियाणा के नारनौल में हुआ था। इस दौरान उन्होंने भिवानी के प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र से प्राकृतिक चिकित्सक एवं योग प्रशिक्षक की तीन वर्षीय डिग्री भी हासिल की है।

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वरिष्ठ संपादक कमल नयन पाण्डेय को मिलेगा ये प्रतिष्ठित पुरस्कार

भोपाल के गांधी भवन में नौ फरवरी को होने वाले एक कार्यक्रम में किया जाएगा सम्मानित

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 11 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
Kamal Nayan Pandey

त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘युगतेवर’ (सुल्तानपुर,उत्तर प्रदेश) के संपादक कमल नयन पाण्डेय को इस वर्ष का पंडित बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान दिया जाएगा। भोपाल के गांधी भवन में नौ फरवरी को होने वाले एक कार्यक्रम में उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।  

कमल नयन पांडेय पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य व लेखन में भी सक्रिय हैं। वे करीब 38 वर्षों से ‘युगतेवर’ का संपादन कर रहे हैं। पूर्व में इस पत्रिका को ‘तेवर’ नाम से प्रकाशित किया जाता था, लेकिन वर्ष 2006 में इसका नाम बदलकर ‘युगतेवर’ कर दिया गया।

त्रैमासिक पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ के कार्यकारी संपादक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि यह पुरस्कार प्रतिवर्ष हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है। इस अवॉर्ड का यह 12वां वर्ष है। ‘मीडिया विमर्श’ द्वारा शुरू किए गए इस अवॉर्ड के तहत ग्यारह हजार रुपए, शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह और सम्मान पत्र दिया जाता है। पुरस्कार के निर्णायक मंडल में नवभारत टाइम्स, मुंबई के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, छत्तीसगढ़ ग्रंथ अकादमी, रायपुर के पूर्व निदेशक रमेश नैयर तथा इंदिरा गांधी कला केंद्र,दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी शामिल हैं।

इससे पूर्व यह सम्मान वीणा(इंदौर) के संपादक स्व. श्यामसुंदर व्यास, दस्तावेज (गोरखपुर) के संपादक डॉ.विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, कथादेश (दिल्ली) के संपादक हरिनारायण, अक्सर (जयपुर) के संपादक डॉ. हेतु भारद्वाज, सद्भावना दर्पण (रायपुर) के संपादक गिरीश पंकज, व्यंग्य यात्रा (दिल्ली) के संपादक डॉ. प्रेम जनमेजय, कला समय (भोपाल) के संपादक विनय उपाध्याय, संवेद (दिल्ली) के संपादक किशन कालजयी, अक्षरा (भोपाल) के संपादक कैलाशचंद्र पंत, अलाव (दिल्ली) के संपादक रामकुमार कृषक और प्रेरणा (भोपाल) के संपादक अरुण तिवारी को दिया जा चुका है।

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