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TOI का ये प्रयोग बना चर्चा का विषय, पाठकों ने की सराहना
अखबारी दुनिया में अच्छा और बुरा दोनों परिणामों को दिमाग में रखकर रूपरेखा तैयार की जाती है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
खास मौकों पर अखबारों के दफ्तर में कैसा माहौल होता है, ये केवल वहां काम करने वाला ही समझ सकता है। डेडलाइन के साथ-साथ दिमाग में हजार सवाल घूमते रहते हैं। यदि ‘खास मौके’ चंद्रयान-2 जैसे हों तो मुश्किलें और भी बढ़ जाती हैं, क्योंकि यहां सब कुछ मिनट-दर-मिनट होने वाले अपडेट पर निर्भर करता है। 6 और 7 सितंबर की दरम्यानी रात को सभी अखबारों के न्यूज रूम की लाइटें सामान्य से काफी देर तक जलती रहीं। सभी अपने पाठकों को चंद्रयान से जुड़ा हर अपडेट देना चाहते थे।
अखबारी दुनिया में अच्छा और बुरा दोनों परिणामों को दिमाग में रखकर रूपरेखा तैयार की जाती है। यानी अगर मिशन मंगल सफल हुआ तो अखबार ‘ऐसा’ होगा। यदि नहीं तो ‘वैसा’। दुर्भाग्यवश ‘ऐसे’ की उम्मीद लगाते-लगाते ‘वैसा’ हो गया। पाठकों तक जो अखबार पहुंचा, उसमें यथासंभव अपडेट था, लेकिन इसके पीछे की तैयारी से केवल वही परिचित थे, जो इससे जुड़े थे।
हालांकि, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने इस तैयारी से अपने पाठकों को रूबरू कराने का प्रयास किया, जिसे खूब सराहना मिल रही है। आठ सितंबर के अंक में अखबार ने उन दोनों ही शीर्षकों को प्रकाशित किया है, जो ‘सफलता’ और ‘विफलता’ दोनों स्थितियों के लिए तैयार किये गए थे। ‘ए टेल ऑफ टू हेडलाइन्स’ तले अलग-अलग बॉक्स में दोनों को लगाया गया है। जैसे यदि विक्रम सफलतापूर्वक चांद पर लैंड कर जाता तो टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक होता ‘स्वदेशी: हमने चांद मांगा और वह मिल गया’। लेकिन अभियान सफल नहीं हो सका, इसलिए अख़बार की हेडलाइन बनी ‘चांद पर उतरने से बस दो किलोमीटर पहले विक्रम से संपर्क टूट गया’।
ऐसे प्रयोग बहुत कम देखने को मिलते हैं, लेकिन जरूरी हैं। अमल में न आ सकी तैयारी को खुद तक ही सीमित करने से अच्छा है उसे पाठकों के साथ साझा करना। इसके तीन फायदे हैं। पहला, तैयारी में लगी टीम को कहीं न कहीं इस बात की संतुष्टि मिल जाती है कि उसकी मेहनत किसी न किसी रूप में लोगों तक पहुंची, दूसरा, पाठकों को भी पत्रकारों की मेहनत और न्यूज रूम में होने वाली दिमागी उठा-पठक का अहसास होता है और तीसरा, भावी पत्रकारों को कुछ रचनात्मक और नया देखने-समझने का मौका मिलता है।
आप टाइम्स ऑफ इंडिया की ये पेशकश नीचे हेडलाइन पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं...
वरिष्ठ पत्रकार जयदीप कर्णिक ने भी टाइम्स ऑफ इंडिया के इस प्रयास की सराहना की है। उन्होंने न्यूज क्लिपिंग के साथ अपनी फेसबुक पोस्ट पर इसे दिलचस्प पत्रकारिता करार देते हुए लिखा है कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों को इससे काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
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