वरिष्ठ पत्रकार विष्णु शर्मा की ‘हैट्रिक’, तीसरी किताब ने दी दस्तक

विष्णु शर्मा लगभग दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मीडिया के तीनों माध्यमों-प्रिंट, टीवी और वेब पत्रकारिता का उन्हें काफी अनुभव है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 18 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 18 December, 2019
Vishnu Sharma

‘आईटीवी नेटवर्क’ के हिंदी चैनल ‘इंडिया न्यूज’ के यूट्यूब प्लेटफॉर्म के चिर-परिचित चेहरे व वरिष्ठ पत्रकार विष्णु शर्मा ने किताब लेखन में ‘हैट्रिक’ की है। कहने का तात्पर्य है कि दो साल में उनकी तीसरी किताब अब ऑनलाइन बाजार में आ चुकी है। जनवरी में नेशनल बुक फेयर में यह बुक प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर उपलब्ध होगी।  

गौरतलब है कि 2018 में विष्णु शर्मा की किताब आई थी 'गुमनाम नायकों की गौरवशाली गाथाएं’, जिसमें इतिहास के ऐसे बड़े नायकों के बारे में बताया गया था, जिससे अमूमन लोग अपरिचित थे। उनकी किताब आने के बाद ऐसे कई नायकों के बारे में सोशल मीडिया पर खूब चर्चा भी हुई थी।

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पत्रकारिता के साथ-साथ लगातार लेखन से जुड़े विष्णु शर्मा अगले साल यानी 2019 में अपनी दूसरी किताब लेकर आए 'इतिहास के 50 वायरल सच'। इस किताब के चलते कई ऐसे एतिहासिक तथ्यों की सत्यता पर प्रकाश डाला गया, जो अमूमन भ्रम फैलाते थे और अब 2019 खत्म होते-होते उनकी तीसरी किताब भी ‘अमेजॉन’ पर उपलब्ध हो गई है। इस किताब का टाइटल है 'सुनो बच्चो, सर्जिकल स्ट्राइक की कहानी'। ये किताब पृष्ठों के हिसाब से छोटी है और केवल बच्चों के लिए लिखी गई है।

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उल्लेखनीय है कि विष्णु शर्मा लगभग दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मीडिया के तीनों माध्यमों- प्रिंट, टीवी और वेब पत्रकारिता का उन्हें काफी अनुभव है। आगरा में ‘दैनिक जागरण’ के साथ अपनी पत्रकारिता की पारी शुरू करने वाले विष्णु शर्मा ने लंबे समय तक ‘अमर उजाला’, दिल्ली में काम किया। इसके बाद उन्होंने प्रिंट मीडिया से टीवी मीडिया की ओर रुख किया और 'बीएजी फिल्म्स' के न्यूज चैनल ‘न्यूज24’ के साथ लंबी पारी खेली। इस दौरान वे दो साल के लिए ‘E24’ चैनल को एस्टैबलिश करने के लिए मुंबई भी गए।

2016 से वह ‘आईटीवी ग्रुप’ के ‘इंडिया न्यूज’ चैनल से जुड़े हुए हैं। यहां हिस्ट्री और राजनीतिक विषयों पर उनके कई विडियोज मिलियंस व्यूज ले चुके हैं। बालाकोट के समय अभिनंदन पर किया एक विडियो उस समय खूब चर्चा में रहा था। उस विडियो को कुछ ही दिनों में सवा करोड़ लोगों ने देखा था।

मीडिया की परंपरागत नौकरी के 15 साल बाद 2014 में उन्होंने हिस्ट्री विषय से नेट क्वालीफाई किया और उसके बाद हिस्ट्री पर ही उनकी दो किताबें आ चुकी हैं, जिनमें से एक किताब 'गुमनाम नायकों की गौरवशाली गाथाएं' हाल ही में मुंबई आईआईटी की लाइब्रेरी का हिस्सा बनी है, जबकि दूसरी किताब ‘इतिहास के वायरल सच’ अमेजॉन ने कई देशों में ऑनलाइन उपलब्ध करवाई है।

उनकी तीसरी किताब 'सुनो बच्चो सर्जिकल स्ट्राइक की कहानी' भी प्रभात प्रकाशन से छपी है और बच्चों के लिए लिखी गई है। बच्चों के लिए वह पहले भी एनिमेशन फिल्म '4th इडियट पप्पू चला चांद पर' के लिए डायलॉग्स और 2 गाने लिख चुके हैं। इस एनिमेशन मूवी में फिल्म '3 इडियट्स' के चतुर यानी ओमी वैद्य ने बतौर सूत्रधार अपनी आवाज दी थी और उनका किरदार भी इस मूवी में शामिल किया गया था।

विष्णु शर्मा ने अपनी ट्वीट में लिखा है कि वह डिफेंस स्टडीज के छात्र भी रहे हैं और डिफेंस पर यह उनकी पहली बुक है जो कि प्रकाशक के आग्रह पर लिखी गई है।

विष्णु शर्मा की यह बुक फिलहाल अमेजॉन पर उपलब्ध है। ई बुक के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं-

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इस अखबार मालिक पर कसा शिकंजा, CM ने दिए कड़ी कार्रवाई के आदेश

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आरोपी अखबार मालिक प्यारे मियां की अधिमान्यता खत्म कर सरकारी घर का एलॉटमेंट रद्द करने का निर्देश दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2020
pyaremiyan

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नाबालिग लड़कियों से रेप के मामले में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में अब कोहेफिजा थाने में 68 वर्षीय एक आरोपी पर एफआईआर हुई है, जो एक अखबार का मालिक है। प्यारे मियां नाम का यह आरोपी फिलहाल फरार है। फरार हो चुके प्यारे मियां का पता बताने वाले 10 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की गई है। 

वहीं, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आरोपी अखबार मालिक प्यारे मियां की अधिमान्यता खत्म कर सरकारी घर का एलॉटमेंट रद्द करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री के कड़े तेवर देखते हुए सोमवार को प्रशासन द्वारा आरोपी की अवैध संपत्ति को ढहा दिया गया, वहीं राज्य के जनसंपर्क विभाग ने प्यारे मियां की पत्रकार के रूप में मान्यता रद्द कर दी है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ढाई साल पहले आरोपी ने एक करीब 13 साल की मासूम के साथ परवरिश के नाम पर रेप किया था। आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी। यही कारण था कि उसने कभी पुलिस में शिकायत करने की हिम्मत नहीं दिखाई, लेकिन अब आरोपी प्यारे मियां की करतूत सामने आने के बाद लड़की के परिजन ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। प्यारे मियां के साथ इस लड़की से एक अन्य आरोपी उबेद ने भी रेप किया था। पुलिस ने इस मामले में प्यारे मियां और उबेद को आरोपी बनाया है। वहीं पुलिस को आष्टा से प्यारे मियां की पजेरो गाड़ी बरामद हुई है जो एक खेत में छुपाकर रखी गई थी। 

बताया जा रहा है कि अपने ऊपर कार्रवाई होती देख आरोपी प्यारे मियां इसी कार से आष्टा तक गया था कुछ लोगों ने उसकी मदद की थी। वहीं दूसरी तरफ, इस मामले में राष्ट्रीय बाल आयोग ने भी संज्ञान लिया है। राष्ट्रीय बाल आयोग ने पुलिस को मामले में कार्रवाई के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इसके अलावा आयोग राज्य बाल आयोग के संपर्क में है। आयोग का कहना है कि इस मामले में किसी को नहीं छोड़ा जाएगा।

कोहेफिजा थाना प्रभारी अनिल वाजपेयी ने बताया कि पुराने शहर में रहने वाली नाबालिग लड़की परिजनों के साथ थाने पहुंची। परिजन ने पुलिस को बताया कि आरोपी प्यारे मियां ढाई साल पहले उनके घर आया था। परवरिश करने के नाम पर वह उनकी साढ़े 13 साल की बेटी को अपने साथ कोहेफिजा स्थित घर ले गया था। जहां उसे नशीला पदार्थ पिलाकर रेप किया था। इसके बाद डरा-धमकाकर कई बार रेप किया। आरोपी ने लड़की के साथ इंदौर स्थित घर पर भी उसका शारीरिक शोषण किया था। इस शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रेप, अपहरण, पाक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।

पुलिस ने इस बात की भी जानकारी दी है कि प्यारे मियां नाम के इस शख्स के कई रसूखदार लोगों से संपर्क थे। वह 14 से 16 साल की बच्चियों को अपने जाल में फंसाता और उन्हें रईस लोगों की पार्टी में पेश करता था। इससे पहले वह खुद भी इन नाबालिग बच्चियों के साथ हैवानियत करता। पुलिस ने आधा दर्जन से ज्यादा नाबालिगों को इसके चंगुल से छुड़ाया है। बताया जाता है कि आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों को प्यारे मियां स्वीटी नामक महिला की मदद से लालच देकर अपने जाल में फंसाता था।

 

बता दें कि राज्य में बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर सीएम शिवराज सरकार एक्शन में है। खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रालय में गृह विभाग की बैठक ली और इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को साफ कह दिया कि बेटियों पर अपराध करने वालों को छोडूंगा नहीं। अपराधों में शामिल सफेदपोशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। भोपाल में नाबालिग बेटियों के साथ अपराध करने वाला जघन्य अपराधी है, ऐसा अपराधी जहां कहीं भी हो उसे ढूंढ कर उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

ऐसे खुला मामला: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चार लड़कियां शराब के नशे में आ रही थीं पता चला कि नाबालिग शनिवार रात 12:30 बजे तक प्यारे मियां के शाहपुरा स्थित ऐशगाह फ्लैट पर थीं। पार्टी में काफी शराब पीने के बाद उन्होंने खाना खाया और दो स्कूटर से ऐशगाह हिल्स जाने के लिए निकल गईं। मगर नशा ज्यादा होने से रास्ता भटक गईं। इस बीच पुलिस ने उन्हें संदेह के आधार पर रोका। तब रात डेढ़ बजे उन्होंने प्यारे मियां को फोन लगा दिया। काफी पूछताछ के बाद अगले दिन सुबह उन्होंने कबूला कि प्यारे मियां ने उनके साथ गलत किया है। जैसे ही घटना का खुलासा हुआ, प्यारे मियां फरार हो गया। 

 

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इन अखबारों की प्रकशक कंपनी करेगी 550 एम्प्लॉयीज की छंटनी  

प्रकाशक कंपनी के मुताबिक कंपनी लगभग 550 कर्मचारियों की छंटनी करेगा, जोकि इसके कर्मचारियों की संख्या का करीब 12 प्रतिशत है।

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2020
layoff

कोरोनावायरस (कोविड-19 ) के कारण जहां पाठकों पर ऑनलाइन पढ़ने का दबाव बना है और एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में कमी आई है, ऐसे में ब्रिटेन अखबार ‘डेली मिरर’ (Daily Mirror) और ‘डेली एक्सप्रेस’ (Daily Express) की प्रकाशक कंपनी ‘रीच’ (Reach) ने 550 एम्प्लॉयीज की छंटनी करने की योजना बनाई है।

प्रकाशक कंपनी ‘रीच’ (Reach)  के चीफ एग्जिक्यूटिव जिम मुलेन (Jim Mullen) ने एक बयान में कहा कि महामारी के दौरान मीडिया क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन में तेजी आई है और इससे हमारे डिजिटल उत्पादों को बढ़ावा मिला है। हालांकि, विज्ञापन ज्यादा न मिलने की वजह से  डिजिटल रेवेन्यू नहीं बढ़ा है।

प्रकाशक कंपनी के मुताबिक कंपनी लगभग 550 कर्मचारियों की छंटनी करेगा, जोकि इसके कर्मचारियों की संख्या का करीब 12 प्रतिशत है। ऐसा करने से कंपनी को 35 मिलियन पाउंड यानी करीब 43 मिलियन डॉलर की सालाना बचत होगी।

उन्होंने कहा कि इस कदम से हमारा एडिटोरियल प्रिंट व डिजिटल की नेशनल व रीजनल टीमों को एक साथ लेकर ज्यादा केंद्रीयकृत रूप में आगे बढ़ेगा। हमारे न्यूज ब्रैंड्स की मजबूत एडिटोरियल पहचान को बरकरार रखते हुए इसकी दक्षता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी और डुप्लीकेशन खत्म होगा।

ब्रिटेन में कई रीजनल न्यूजपेपर का प्रकाशन करने वाली इस कंपनी ने कहा कि पुनर्गठन से ग्रुप को करीब 20 मिलियन पाउंड का खर्च आएगा।

कंपनी ने कहा कि उसके पास अब कम स्पेस होगा और मैनेजमेंट स्ट्रक्चर भी बहुत ही सिम्पल होगा। कंपनी ने इस बात की भी जानकारी दी है कि सर्कुलेशन और ऐडवर्टाइजिंग की कमी चलते  कंपनी का राजस्व 27.5 प्रतिशत घट गया है।

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आउटलुक को बाय बोल वरिष्ठ संपादक हरवीर सिंह ने नई दिशा में बढ़ाए कदम

पूर्व में तमाम मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं हरवीर सिंह

Last Modified:
Friday, 10 July, 2020
Harvir Singh

हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘आउटलुक’ (outlook) से एक बड़ी खबर है। खबर ये है कि इस पत्रिका के संपादक हरवीर सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बात की जानकारी हरवीर सिंह ने खुद समाचार4मीडिया को दी है। उन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर भी इसका जिक्र किया है। इस पोस्ट में हरवीर सिंह ने बताया है कि उन्होंने अब ‘हिंद किसान’ (Hind Kisan) में बतौर एडिटर-इन-चीफ नई पारी की शुरुआत कर दी है।

हिंद किसान ‘स्वराज एक्सप्रेस’ (Swaraj Express) न्यूज चैनल का ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिस पर कृषि और ग्रामीण भारत पर फोकस किया जाता है। मूल रूप से मुजफ्फरनगर के रहने वाले हरवीर सिंह को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह ‘मनी भास्कर’ (Bhaskar) में एडिटर के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके अलावा वह ‘अमर उजाला’ (Amar Ujala) में सीनियर एडिटर भी रह चुके हैं।

इस बारे में ‘स्वराज एक्सप्रेस’ के सीईओ व एडिटर-इन-चीफ गुरदीप सिंह सप्पल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा है, 'हिंद किसान में बतौर एडिटर-इन-चीफ हरवीर सिंह की नियुक्ति को लेकर मैं काफी खुश हूं। हरवीर सिंह जाने-माने पत्रकार हैं और ग्रामीण व वित्तीय पत्रकारिता पर उनकी काफी गहरी पकड़ है। मैं स्वराज फैमिली में हरवीर सिंह का स्वागत करता हूं।'

बता दें कि पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने पर हरवीर सिंह को तमाम प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। मेरठ विश्वविद्यालय से इकनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट हरवीर सिंह उत्तर प्रदेश की सुगर इंडस्ट्री पर रिसर्च पेपर भी लिख चुके हैं, जो इकनॉमिक और पॉलिटिकल वीकली में पब्लिश हो चुका है। उन्होंने मार्केटिंग मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया है। समाचार4मीडिया की ओर से हरवीर सिंह को नई पारी के लिए शुभकामनाएं। 

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न्यूजपेपर इंडस्ट्री के फ्यूचर को लेकर क्या है दिग्गजों का आकलन, पढ़ें यहां

कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से देश में पिछले दिनों किए गए लॉकडाउन के कारण प्रिंट मीडिया भी प्रभावित हुआ है

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Newspaper Industry

कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से देश में किए गए लॉकडाउन के कारण प्रिंट मीडिया भी काफी प्रभावित हुआ है। हालांकि, अब अधिकांश स्थानों पर अनलॉक 1.0 की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अखबारों की पब्लिशिंग और सर्कुलेशन का काम भी अपने सामान्य रूप में वापस लौट रहा है। ‘एडवर्टाइजिंग क्लब बेंगलुरु’ (Advertising Club Bangalore) की ओर से ‘Re-imagining Print’ पर आयोजित लाइव चैट के दौरान इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों का कहना था कि देश में अखबारों का सर्कुलेशन करीब 70-75 प्रतिशत तक हो गया है। इस दौरान पैनल में ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन शिवकुमार सुंदरम और ‘दैनिक भास्कर ग्रुप’ के प्रमोटर और डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल बतौर स्पीकर शामिल थे और इसे ऐड क्लब की मैनेजिंग पार्टनर राधिका रमानी ने मॉडरेट किया।

इस मौके पर गिरीश अग्रवाल का कहना था, ‘लॉकडाउन के पहले हफ्ते में अखबारों का सर्कुलेशन काफी प्रभावित हुआ था। इसके दो कारण थे। पहला तो यह कि नेशनल लॉकडाउन के कारण लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि अखबार कैसे डिलीवर होंगे। दूसरा कारण यह था कि सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ने लगी थी कि अखबारों की वजह से कोरोनावायरस फैल सकता है। एक सप्ताह में यह दोनों चीजें स्पष्ट हो गईं। उस समय सर्कुलेशन 60-65 प्रतिशत गिर गया था और अप्रैल तक यह करीब 70-75 प्रतिशत पर वापस आ गया, जबकि मई-जून में अधिकांश अखबारों ने 80 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर लिया।’ अनुमान है कि बाकी का 20-25 प्रतिशत सर्कुलेशन भी अगले एक-दो महीने में पटरी पर वापस आ जाएगा। मलयाला मनोरमा (Malayala Manorama) पहले ही 97 प्रतिशत वापसी कर चुका है।  

वहीं, सुंदरम के अनुसार, कोविड-19 की शुरुआत एक शहरी घटना के रूप में हुई और इसलिए शुरुआती दौर में गैर शहरी केंद्रों की तुलना में प्रमुख शहरों में इसका सबसे ज्यादा असर देखा गया। सुंदरम ने कहा, ‘मैं इस मुद्दे को दो तरह से (एक तो घरों पर जाने वाली कॉपी और दूसरी होटल, एयरलाइंस अथवा एयरपोर्ट्स आदि में जाने वाली इंस्टीट्यूशनल कॉपी) रखना चाहता हूं। मुझे लगता है कि इंस्टीट्यूशनल कॉपियां इतनी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हैं और इन्हें पटरी पर आने में समय लगेगा, क्योंकि इन दिनों ज्यादातर घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) हो रहा है। ऐसे में हम हाउसहोल्ड कॉपियों यानी घरों पर डिलीवर की जाने वाली कॉपियों पर फोकस कर रहे हैं और इस दिशा में काफी काम किया जा चुका है। हम अपनी कॉपियों की संख्या दोगुनी कर रहे हैं और महामारी के दौरान हम 65 प्रतिशत सर्कुलेशन का आंकड़ा पार कर चुके हैं।’

कोविड-19 के बारे में शोर नवंबर 2019 में शुरू हुआ था। किसी भी अखबार समूह को इस बात की आशंका नहीं थी कि वायरस इस हद तक संकट पैदा करेगा। इनमें से अधिकांश यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनके पास न्यूजप्रिंट का पर्याप्त स्टॉक हो। सुंदरम ने कहा, ‘हमारे पास पर्याप्त संसाधन थे और स्टॉक को सही तरीके से डिस्ट्रीब्यूट किया गया।’ उन्होंने कहा, ‘पॉलिसी के तहत हम हमेशा 45 से 75 दिनों का स्टॉक रखते हैं। पिछले 18 महीनों में न्यूजप्रिंट की कीमतों में नरमी को देखते हुए हमने अच्छी इन्वेंट्री विकसित कर ली थी। अप्रैल की शुरुआत में हमारे पास करीब 70-80 प्रतिशत स्टॉक था।’ सुंदरम का कहना था कि जब लॉकडाउन शुरू हुआ तो उस समय अखबार का डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता थी।   

वहीं, अग्रवाल का कहना था, ‘हम मेक इन इंडिया में विश्वास रखते हैं। हम 50 प्रतिशत न्यूजप्रिंट इंडिया से लेते हैं, जबकि बाकी का 50 प्रतिशत बाहर से आयात करते हैं। हम 65 स्थानों से अखबार पब्लिश करते हैं। शुरुआत के दो हफ्तों में न्यूजप्रिंट को मार्केट में भेजना मुश्किल था, यह समस्या अब हल हो गई है। मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि लॉकडाउन के दौरान देश का कोई भी न्यूजपेपर ऑर्गनाइजेशन बंद नहीं हुआ।’

रेवेन्यू के मुद्दे पर अग्रवाल ने कहा, ‘अखबार का 75 प्रतिशत रेवेन्यू एडवर्टाइजिंग से और 25 प्रतिशत रेवेन्यू सर्कुलेशन से आता है। कोविड के दौरान एडवर्टाजिंग बिल्कुल नहीं थी और 75 प्रतिशत रेवेन्यू 10 से 30 प्रतिशत रह गया था। हमने पेजों की संख्या घटाई, जिससे पब्लिशिंग कॉस्ट कम हुई और सब्सिडी शून्य हो गई। इन वजहों से ही हम 10 से 30 प्रतिशत रेवेन्यू के साथ सर्वाइव कर सके।’

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इस आशंका को दूर करने में कामयाब रहे अखबार, यूं मिला फायदा

एक्सचेंज4मीडिया की ‘Go Dakshin’ सीरीज के तहत आयोजित वेबिनार में मीडिया दिग्गजों ने दक्षिण भारत में प्रिंट मीडिया पर कोविड-19 के प्रभाव को लेकर चर्चा की

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Newspaper

‘साक्षी ग्रुप’ (Sakshi Group) के डायरेक्टर (एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग) केआरपी रेड्डी का कहना है कि उत्तर और पश्चिम में जो हो रहा है, उससे दक्षिण का मार्केट पूरी तरह अलग है। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) की वेबिनार सीरिज ‘गो दक्षिण’ ('Go Dakshin) में ‘Print: Emerging Stronger Post Covid-19’ टॉपिक पर अपने विचार रखते हुए रेड्डी का कहना था, ‘हमारा सर्कुलेशन अन्य क्षेत्रों की तरह ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है। हां, शहरी क्षेत्रों में कुछ असर पड़ा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र इससे पूरी तरह अप्रभावित हैं।’

ऑनलाइन रूप से हुए इस पैनल डिस्कशन में रेड्डी के अलावा ‘एशियानेट न्यूज नेटवर्क’ (AsianetNews Network) के सीईओ अभिनव खरे, ‘कासाग्रांड’ (CASAGRAND) के सीएमओ ईश्वर एन, ‘द हिन्दू ग्रुप’ (The Hindu Group) के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर सुरेश बालकृष्णा और ‘मलयाला मनोरमा’ (Malayala Manorama) के वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग सेल्स) वर्गीस चांडी ने भी अपने विचार रखे। इस सेशन का नेतृत्व ‘वेवमेकर इंडिया’ (Wavemaker India) के वाइस प्रेजिडेंट किशन कुमार श्यामलन ने किया।  

इस मौके पर तेलुगू भाषी मार्केट के बारे में रेड्डी का कहना था, ‘हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में कुछ आशंकाएं थीं कि अखबार कोरोनावायरस के वाहक होते हैं, इसलिए इस आशंका को दूर करने की दिशा में अखबारों को कुछ काम करने की जरूरत थी। इस बात को समझाने में थोड़ा समय लगा, लेकिन अब हमने करीब 75-80 प्रतिशत वापसी कर ली है।’ रेड्डी के अनुसार, पहले की तुलना में अखबार अब अधिक सशक्त हो रहे हैं और महामारी से सबक लेते हुए पब्लिशर्स को इन चुनौतियों का और प्रभावी तरीके से सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि टियर-दो तीन और चार (tier two, three and four) शहर इस महामारी से ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं, इसलिए साक्षी न्यूज इन शहरों और यहां के युवा पाठकों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है। रेड्डी के अनुसार, ‘मुझे लगता है कि अब ये शहर अर्थव्यवस्था को चलाएंगे। इसके अलावा अब उल्टा पलायन (reverse migration) हो रहा है। यानी अब चीजें शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर लौट रही हैं, इसलिए हम इस पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।’   

रेड्डी की बात से सहमति जताते हुए बालकृष्ण ने कहा, ‘छोटे शहरों में इस महामारी का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है। मेट्रो आधारित अंग्रेजी अखबार होने के कारण डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर थोड़ा ज्यादा दबाव था।’ बालकृष्ण के अनुसार, बिजनेस के लिहाज से अप्रैल का महीना सबसे ज्यादा खराब था। बालकृष्ण ने कहा, ‘मई से चीजों ने फिर रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी, फिर चाहे वह डिस्ट्रीब्यूशन हो अथवा एडवर्टाइजिंग। सर्कुलेशन की बात करें तो यदि अप्रैल X था, मई 2 X और जून 80 प्रतिशत से भी ज्यादा था। तमिलनाडु में हमने 90-95 और केरल में 80 प्रतिशत तक वापसी कर ली है। आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में सर्कुलेशन 75 प्रतिशत तक वापस आ गया है। हालांकि, एडवर्टाइजिंग मनी की वापसी अभी थोड़ी दूर है, लेकिन जल्द ही यह वापस पुराने रूप में आ जाएगी।’

बालकृष्ण ने कहा कि महामारी के दौरान प्रासंगिक बने रहना प्रिंट मीडिया के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इसने ब्रैंड्स को फुर्ती का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के तुरंत बाद ‘द हिन्दू’ ने अपनी मैगजींस स्पोर्ट्स स्टार और फ्रंटलाइन को पूरी तरह डिजिटल मैगजींस में परिवर्तित कर दिया और अपने ऑडियंस की ओर से ग्रुप को सबस्क्रिप्शन में बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल के रूप में परिवर्तन की जो प्रक्रिया थी, इस दौरान इसमें तेजी आ गई। बालकृष्ण के अनुसार, ‘लोगों के अंदर जागरूकता लाने के लिए हमने मार्च के आखिर में कोविड बुक भी पब्लिश की। हम एडिटोरियल में बदलाव लाए और पाठकों का विश्वास हासिल करने के लिए उनकी दिनचर्या पर फोकस किया।’

मलयाला मनोरमा के होम मार्केट केरल के बारे में चांडी ने कहा कि आपदा प्रबंधन का हमें अच्छा अभ्यास है। उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों से हम आपदाओं का सामना कर रहे हैं। पहले निपा वायरस आया, फिर बाढ़ आईं। कोविड का पहला केस केरल में मिला था। कहने का मतलब है कि आपदाओं से निपटने में हम काफी अच्छे हो गए हैं। सरकार की मदद से अखबार मालिक लोगों को यह स्पष्ट करने में सफल रहे कि अखबारों के कारण वायरस नहीं फैलेगा। हम कंटेंटमेंट क्षेत्रों में भी अखबार सर्कुलेट करने में सफल रहे। हमारा 99 प्रतिशत डिस्ट्रीब्यूशन पहले की तरह बना हुआ है। हमारे सर्कुलेशन रेवेन्यू ने हमें इस महामारी के दौरान सर्वाइव करने में मदद की।’

खरे ने भी इनसे सहमति जताते हुए कहा, ‘हम सौभाग्यशाली हैं कि केरल के अलावा हमारे द्वारा संचालित सभी मार्केट अच्छी तरह व्यवस्थित थे। कर्नाटक की सफलता की अलग ही कहानी है।’ खरे ने कहा कि asianetnews.com मीडिया आउटलेट की मुख्य प्रॉपर्टी है और टीवी, रेडियो व प्रिंट इसके पीछे हैं। उन्होंने कहा, ‘जनवरी में हमने अधिक परंपरावादी दृष्टिकोण अपनाया। इस तिमाही में भी हम अपना टार्गेट पूरा कर चुके हैं। लॉकडाउन के बाद से इन 100 से ज्यादा दिनों में हमारा ट्रैफिक दोगुना से ज्यादा हो गया है। देश में टॉप 10 में हम एकमात्र साउथ इंडियन प्लेयर हैं।’  

इसके साथ ही खरे ने कहा कि जागरूकता के बावजूद प्रिंट पर इस महामारी का थोड़ा असर पड़ा, लेकिन चैनल का फोकस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहा। खरे के अनुसार, ‘रेवेन्यू की बात करें तो हमारा पारंपरिक क्लाइंट्स बिजनेस शून्य है। फरवरी और मार्च में ऑनलाइन एजुकेशन, ई-कॉमर्स और गेमिंग हमारे नए क्लाइंट्स थे।’

एडवर्टाइजर्स के परिप्रेक्ष्य में, ईश्वर ने कहा, ‘अप्रैल और मई में लॉकडाउन के दौरान हमने कुछ भी विज्ञापन नहीं किया। एक बार लॉकडाउन खुलने के बाद विज्ञापन देने वालों में हम सबसे पहले थे। हम वर्षों से लगातार विज्ञापनों पर सबसे अधिक खर्च करने वालों में से एक हैं। हम प्रिंट के साथ बहुत विज्ञापन करते हैं क्योंकि कैटेगरी इसकी मांग करती है। वीकेंड पर हम ज्यादा विज्ञापन देते हैं, क्योंकि उस दौरान लोग प्रॉपर्टी देखने के लिए ज्यादा निकलते हैं। हम सभी भाषाओं के अखबारों में विज्ञापन दे रहे हैं। हमें उम्मीद नहीं थी कि यह काम करेगा, लेकिन इसने उद्योग में विश्वास जगाया और इसने वास्तव में हमारे लिए काम किया।’

प्रिंट इंडस्ट्री के बारे में श्यामलन का कहना है कि टाइम के साथ फॉर्मेट बदल रहा है। उन्होंने पैनलिस्ट से जानना चाहा कि प्रिंट के लिए इस महामारी को कैसे अवसर के रूप में बदला जा सकता है। इस पर बालकृष्णन ने कहा, ‘डिजिटल और प्रिंट फॉर्मेट्स को मिलकर काम करना होगा। लॉकडाउन ने प्राइसिंग गेम को पूरा बदल दिया है। इस महामारी से पहले से ही हमारी सभी प्रॉपर्टीज पेवॉल (pay wall) के पीछे थीं। कवर प्राइस की बात करें तो हम देश के सबसे महंगे अंग्रेजी अखबार हैं। यही सब चीजें हैं, जो इस मुश्किल समय में हमें बनाए रखे हुई हैं। बिजनेस का अर्थशास्त्र बदल गया है, लेकिन हमने इसकी परिकल्पना की है।‘ 

इस दौरान रेड्डी ने कहा कि  भविष्य में प्रिंट पनपेगा, क्योंकि लोग इसे एक विश्वसनीय माध्यम के रूप में देखते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि मीडिया प्लेयर्स यों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में भी निवेश करना चाहिए। वहीं चांडी और खरे ने कहा कि मीडियम का अधिक महत्व नहीं होगा और फोकस कंटेंट पर शिफ्ट हो जाएगा।

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अखबार के एडिटर के खिलाफ केस दर्ज, दी थी मुख्यमंत्री से जुड़ी ये खबर

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में COVID-19 को लेकर कथित तौर पर फर्जी खबर प्रकाशित करने के आरोप में तेलुगू अखबार के एक एडिटर के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है

Last Modified:
Monday, 06 July, 2020
Editor

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में COVID-19 को लेकर कथित तौर पर फर्जी खबर प्रकाशित करने के आरोप में तेलुगू अखबार के एक एडिटर के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। दरअसल यह खबर तेलंगाना के मुख्‍यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के स्वास्थ्य से जुड़ी थी।

मामला हैदराबाद के जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया। आरोप में कहा गया कि तेलुगू अखबार ‘आदाब हैदराबाद’ ने मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को कोरोनोवायरस से प्रभावित होने की झूठी खबर दी थी।  

मामला जुबली हिल्स थाना क्षेत्र के रहमथनगर निवासी एक मोहम्मद इलियास द्वारा की गई शिकायत के बाद दर्ज किया गया था।

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जुबली हिल्स पुलिस ने आईपीसी की धारा 505 (2), 505 (बी) के तहत मामला दर्ज किया है और ‘आदाब हैदराबाद’ के एडिटर वेंकटेश्वर राव को गिरफ्तार किया है।

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अब इस समूह के हाथ में होगी ‘फॉर्च्यून इंडिया’ की कमान

इस बारे में समूह ने ‘फॉर्च्यून’ मैगजीन के पब्लिशर ‘फॉर्च्यून मीडिया ग्रुप’ के साथ एक समझौते की घोषणा की है

Last Modified:
Friday, 03 July, 2020
Magazine

आरपी संजीव गोयनका समूह (RP-Sanjiv Goenka Group) प्रतिष्ठित बिजनेस मैगजीन ‘फॉर्च्यून’ (Fortune) के इंडिया एडिशन को पब्लिश करेगा। इस बारे में ग्रुप ने ‘फॉर्च्यून’ मैगजीन के पब्लिशर ‘फॉर्च्यून मीडिया ग्रुप’ के साथ एक समझौते की घोषणा की है। इस बारे में आरपी संजीव गोयनका (RPSG) समूह के चेयरमैन संजीव गोयनका का कहना है कि वह इस पार्टनरशिप से बहुत खुश हैं।

संजीव गोयनका के अनुसार, ‘फॉर्च्यून विश्व के बड़े मीडिया ब्रैंड्स में शुमार है और ऐसे समय में जब सरकार देश की नई पीढ़ी और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है, फॉर्च्यून इंडिया इस ग्रुप में एक नई पहचान शामिल करेगी। हमारे पास फॉर्च्यून इंडिया के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं।’   

वहीं, ‘फॉर्च्यून मीडिया ग्रुप’ के सीईओ एलन मुरे (Alan Murray) का कहना है, ‘इस पार्टनरशिप के साथ दो बड़े संस्थान एक साथ आए हैं। हमारे लिए भारत प्रमुख मार्केट है और हमें विश्वास है कि आरपी संजीव गोयनका समूह के नेतृत्व में फॉर्च्यून इंडिया नई ऊंचाइयों को छुएगी।’ गौरतलब है कि भारत में पहले यह मैगजीन 'आनंद बाजार पत्रिका' (एबीपी) समूह द्वारा पब्लिश की गई थी। 

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अमर उजाला के ई-पेपर की PDF प्रसारित करने पर हुई शिकायत

अमर उजाला के ई-पेपर की पीडीएफ अनधिकृत रूप से प्रसारित करने पर हरियाणा पुलिस ने बुधवार को कुछ वॉट्सऐप ग्रुप के एडमिन से पूछताछ की है

Last Modified:
Friday, 03 July, 2020
PDF

अमर उजाला के ई-पेपर की पीडीएफ (PDF) अनधिकृत रूप से प्रसारित करने पर हरियाणा पुलिस ने बुधवार को कुछ वॉट्सऐप ग्रुप के एडमिन से पूछताछ की है और कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। अमर उजाला प्रबंधन की ओर से की गई शिकायत के आधार पर हरियाणा पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

बता दें कि हरियाणा के कई जिलों के कुछ वॉट्सऐप ग्रुप में अमर उजाला अखबार के ई-पेपर की पीडीएफ अनधिकृत रूप से नियमित तौर पर प्रसारित की जा रही थीं, जिसे देखते हुए अमर उजाला प्रबंधन की ओर से की गई शिकायत के आधार पर हरियाणा पुलिस ने कार्रवाई की तो कई ग्रुप एडमिन ने न सिर्फ ई-पेपर की पीडीएफ हटा ली, बल्कि भविष्य में ऐसा न करने का वादा भी किया। एडमिन ने अपने-अपने वॉट्सऐप ग्रुप में अखबारों की पीडीएफ शेयर न करने का निवेदन अपने सदस्यों से किया है।

आपको बता दें कि समाचार पत्र के ई-पेपर की पीडीएफ कॉपी डाउनलोड कर उसे वॉट्सऐप ग्रुप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रसारित करना किसी को भी भारी पड़ सकता है। ऐसा करना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि कॉपीराइट कानून और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन भी है। 

अदालती निर्देशों और अन्य एडवाइजरी में भी ये कहा जा चुका है कि किसी भी सोशल मीडिया ग्रुप में अखबार के ई-पेपर की पीडीएफ या अन्य माध्यम से कॉपी प्रसारित करना गैरकानूनी और अनैतिक है। इन निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया जा चुका है कि जिस भी सोशल मीडिया ग्रुप में ऐसा किया जा रहा है उसका एडमिन इस गैरकानूनी कृत्य के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।    

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अब नए तेवर व कलेवर के साथ पाठकों को पढ़ने को मिलेगा यह अखबार

राजनगर डिस्ट्रिक सेंटर (आरडीसी) में पिछले दिनों अखबार के नए कार्यालय का उद्घाटन किया गया।

Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2020
Newspaper

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद से पब्लिश होने वाला हिंदी दैनिक ‘अथाह’ (Athah) अब नए तेवर व कलेवर के साथ पाठकों को पढ़ने के लिए मिलेगा। राजनगर डिस्ट्रिक सेंटर (आरडीसी) में शुक्रवार को अखबार के नए कार्यालय का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही अखबार ने डिजिटल की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं और अपनी वेबसाइट https://dainikathah.com/ लॉन्च की है। इस अखबार का ई-पेपर भी पाठकों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

अखबार के प्रधान संपादक अशोक ओझा ने बताया कि हालांकि अखबार पिछले 33 सालों से प्रकाशित हो रहा है, लेकिन अब नए तेवर व कलेवर के साथ यह पाठकों के सामने पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि निष्पक्षता और पारदर्शिता अखबार की प्राथमिकता होगी।अखबार में सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक, खेलकूद, अध्यात्म और मनोरंजन से जुड़ी खबरों के साथ जनहित से जुड़ी सरकारी और गैरसरकारी योजनाओं को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अखबार में समाचारों के साथ विचार और विश्लेषण को भी महत्व दिया जाएगा और यही इसकी टैगलाइन भी रखी गई है। छह पेज के इस अखबार की कीमत दो रुपए रखी गई है। बता दें कि अशोक ओझा पूर्व में राष्ट्रीय सहारा, दैनिक भास्कर गाजियाबाद में काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह दैनिक जागरण, गाजियाबाद में लंबे समय तक ब्यूरो चीफ भी रहे हैं। वह दैनिक जागरण में जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर में चीफ रिपोर्टर भी रह चुके हैं।

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कुछ यूं छात्रों का करियर संवारने में मदद करेगा India Today का स्पेशल एडिशन

हर स्ट्रीम में बेस्ट कॉलेजों की लिस्ट तैयार की गई है, ताकि कॉलेज जाने की तैयारी में जुटे विद्यार्थी जान सकें कि किस विषय की पढ़ाई के लिए कौन से कॉलेज अच्छे हैं।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
IndiaToday487

'इंडिया टुडे' (India Today) मैगजीन ने देश के टॉप कॉलेजों के सर्वे पर अपना बहुप्रतीक्षित 24वां एडिशन निकाला है। वैश्विक महामारी के बीच कॉलेज सितंबर में खुलने की उम्मीद है और प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू हो चुकी है, ऐसे में छात्रों ने भी बेस्ट कॉलेज और उनमें उपलब्ध कोर्स व प्रवेश प्रक्रिया की तलाश करनी शुरू कर दी है।

मार्केट रिसर्च एजेंसी ‘मार्केटिंग एंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएट्स’ (MDRA) के इस सर्वे में देश के बेहतरीन कॉलेजों की एक लिस्ट बनाई गई है। इसमें 14 स्ट्रीम्स (आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स, मेडिकल, डेंटल, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, लॉ, मास कम्युनिकेशन, होटल मैनेजमेंट, बीबीए, बीसीए, सोशल वर्क और फैशन डिजाइन) को शामिल किया गया है। बताया जाता है कि हर स्ट्रीम में बेस्ट कॉलेजों की लिस्ट तैयार की गई है, ताकि कॉलेज जाने की तैयारी में जुटे विद्यार्थी और उनके अभिभावक जान सकें कि किस विषय की पढ़ाई के लिए कौन से कॉलेज अच्छे हैं।

इस महामारी को देखते हुए अगला शैक्षणिक सत्र डिजिटल इंफ्रॉस्ट्रक्चर पर ज्यादा केंद्रित होगा। मैगजीन के इस इश्यू में लोगों के दिमाग में उठने वाले तमाम सवालों को भी समाहित किया गया है जैसे- घर से दूर बड़े शहरों के कॉलेजों में प्रवेश लेने पर क्या हॉस्टल में रहना सेफ होगा अथवा पेइंग गेस्ट बनना ज्यादा ठीक रहेगा?, देश के छोटे शहरों के कॉलेज कितने अच्छे हैं? क्या इस साल ज्यादा गलाकाट प्रतियोगिता होगी? क्योंकि कोविड-19 के कारण विदेश जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट हो सकती है।  

हालांकि, सर्वे में 31 शहरों ने भाग लिया, लेकिन कला, विज्ञान और वाणिज्य में शीर्ष 25 कॉलेज केवल आठ शहरों तक ही सीमित हैं। ऐसे ही टॉप 25 इंजीनियरिंग और लॉ कॉलेज सिर्फ छह शहरों में हैं। मेडिकल की स्थिति थोड़ी बेहतर है और 25 टॉप मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो यह 11 शहरों में फैले हुए हैं।  

इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे विद्यार्थियों अथवा उनके अभिभावकों के लिए यह जानने में भी मदद करता है कि किन कॉलेजों में कोर्स फीस कम है और सबसे खास बात कि उनका प्लेसमेंट कैसा है। यही नहीं,पुराने कॉलेजों के साथ ही सर्वे में देश के उभरते कॉलेजों (वर्ष 2000 अथवा उसके बाद शुरू हुए) कॉलेजों को भी शामिल किया गया है। यह इश्यू 26 जून 2020 से स्टैंड्स पर उपलब्ध होगा।

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