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इस आशंका को दूर करने में कामयाब रहे अखबार, यूं मिला फायदा

एक्सचेंज4मीडिया की ‘Go Dakshin’ सीरीज के तहत आयोजित वेबिनार में मीडिया दिग्गजों ने दक्षिण भारत में प्रिंट मीडिया पर कोविड-19 के प्रभाव को लेकर चर्चा की

समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago

‘साक्षी ग्रुप’ (Sakshi Group) के डायरेक्टर (एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग) केआरपी रेड्डी का कहना है कि उत्तर और पश्चिम में जो हो रहा है, उससे दक्षिण का मार्केट पूरी तरह अलग है। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) की वेबिनार सीरिज ‘गो दक्षिण’ ('Go Dakshin) में ‘Print: Emerging Stronger Post Covid-19’ टॉपिक पर अपने विचार रखते हुए रेड्डी का कहना था, ‘हमारा सर्कुलेशन अन्य क्षेत्रों की तरह ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है। हां, शहरी क्षेत्रों में कुछ असर पड़ा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र इससे पूरी तरह अप्रभावित हैं।’

ऑनलाइन रूप से हुए इस पैनल डिस्कशन में रेड्डी के अलावा ‘एशियानेट न्यूज नेटवर्क’ (AsianetNews Network) के सीईओ अभिनव खरे, ‘कासाग्रांड’ (CASAGRAND) के सीएमओ ईश्वर एन, ‘द हिन्दू ग्रुप’ (The Hindu Group) के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर सुरेश बालकृष्णा और ‘मलयाला मनोरमा’ (Malayala Manorama) के वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग सेल्स) वर्गीस चांडी ने भी अपने विचार रखे। इस सेशन का नेतृत्व ‘वेवमेकर इंडिया’ (Wavemaker India) के वाइस प्रेजिडेंट किशन कुमार श्यामलन ने किया।  

इस मौके पर तेलुगू भाषी मार्केट के बारे में रेड्डी का कहना था, ‘हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में कुछ आशंकाएं थीं कि अखबार कोरोनावायरस के वाहक होते हैं, इसलिए इस आशंका को दूर करने की दिशा में अखबारों को कुछ काम करने की जरूरत थी। इस बात को समझाने में थोड़ा समय लगा, लेकिन अब हमने करीब 75-80 प्रतिशत वापसी कर ली है।’ रेड्डी के अनुसार, पहले की तुलना में अखबार अब अधिक सशक्त हो रहे हैं और महामारी से सबक लेते हुए पब्लिशर्स को इन चुनौतियों का और प्रभावी तरीके से सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि टियर-दो तीन और चार (tier two, three and four) शहर इस महामारी से ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं, इसलिए साक्षी न्यूज इन शहरों और यहां के युवा पाठकों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है। रेड्डी के अनुसार, ‘मुझे लगता है कि अब ये शहर अर्थव्यवस्था को चलाएंगे। इसके अलावा अब उल्टा पलायन (reverse migration) हो रहा है। यानी अब चीजें शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर लौट रही हैं, इसलिए हम इस पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।’   

रेड्डी की बात से सहमति जताते हुए बालकृष्ण ने कहा, ‘छोटे शहरों में इस महामारी का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है। मेट्रो आधारित अंग्रेजी अखबार होने के कारण डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर थोड़ा ज्यादा दबाव था।’ बालकृष्ण के अनुसार, बिजनेस के लिहाज से अप्रैल का महीना सबसे ज्यादा खराब था। बालकृष्ण ने कहा, ‘मई से चीजों ने फिर रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी, फिर चाहे वह डिस्ट्रीब्यूशन हो अथवा एडवर्टाइजिंग। सर्कुलेशन की बात करें तो यदि अप्रैल X था, मई 2 X और जून 80 प्रतिशत से भी ज्यादा था। तमिलनाडु में हमने 90-95 और केरल में 80 प्रतिशत तक वापसी कर ली है। आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में सर्कुलेशन 75 प्रतिशत तक वापस आ गया है। हालांकि, एडवर्टाइजिंग मनी की वापसी अभी थोड़ी दूर है, लेकिन जल्द ही यह वापस पुराने रूप में आ जाएगी।’

बालकृष्ण ने कहा कि महामारी के दौरान प्रासंगिक बने रहना प्रिंट मीडिया के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इसने ब्रैंड्स को फुर्ती का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के तुरंत बाद ‘द हिन्दू’ ने अपनी मैगजींस स्पोर्ट्स स्टार और फ्रंटलाइन को पूरी तरह डिजिटल मैगजींस में परिवर्तित कर दिया और अपने ऑडियंस की ओर से ग्रुप को सबस्क्रिप्शन में बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल के रूप में परिवर्तन की जो प्रक्रिया थी, इस दौरान इसमें तेजी आ गई। बालकृष्ण के अनुसार, ‘लोगों के अंदर जागरूकता लाने के लिए हमने मार्च के आखिर में कोविड बुक भी पब्लिश की। हम एडिटोरियल में बदलाव लाए और पाठकों का विश्वास हासिल करने के लिए उनकी दिनचर्या पर फोकस किया।’

मलयाला मनोरमा के होम मार्केट केरल के बारे में चांडी ने कहा कि आपदा प्रबंधन का हमें अच्छा अभ्यास है। उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों से हम आपदाओं का सामना कर रहे हैं। पहले निपा वायरस आया, फिर बाढ़ आईं। कोविड का पहला केस केरल में मिला था। कहने का मतलब है कि आपदाओं से निपटने में हम काफी अच्छे हो गए हैं। सरकार की मदद से अखबार मालिक लोगों को यह स्पष्ट करने में सफल रहे कि अखबारों के कारण वायरस नहीं फैलेगा। हम कंटेंटमेंट क्षेत्रों में भी अखबार सर्कुलेट करने में सफल रहे। हमारा 99 प्रतिशत डिस्ट्रीब्यूशन पहले की तरह बना हुआ है। हमारे सर्कुलेशन रेवेन्यू ने हमें इस महामारी के दौरान सर्वाइव करने में मदद की।’

खरे ने भी इनसे सहमति जताते हुए कहा, ‘हम सौभाग्यशाली हैं कि केरल के अलावा हमारे द्वारा संचालित सभी मार्केट अच्छी तरह व्यवस्थित थे। कर्नाटक की सफलता की अलग ही कहानी है।’ खरे ने कहा कि asianetnews.com मीडिया आउटलेट की मुख्य प्रॉपर्टी है और टीवी, रेडियो व प्रिंट इसके पीछे हैं। उन्होंने कहा, ‘जनवरी में हमने अधिक परंपरावादी दृष्टिकोण अपनाया। इस तिमाही में भी हम अपना टार्गेट पूरा कर चुके हैं। लॉकडाउन के बाद से इन 100 से ज्यादा दिनों में हमारा ट्रैफिक दोगुना से ज्यादा हो गया है। देश में टॉप 10 में हम एकमात्र साउथ इंडियन प्लेयर हैं।’  

इसके साथ ही खरे ने कहा कि जागरूकता के बावजूद प्रिंट पर इस महामारी का थोड़ा असर पड़ा, लेकिन चैनल का फोकस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहा। खरे के अनुसार, ‘रेवेन्यू की बात करें तो हमारा पारंपरिक क्लाइंट्स बिजनेस शून्य है। फरवरी और मार्च में ऑनलाइन एजुकेशन, ई-कॉमर्स और गेमिंग हमारे नए क्लाइंट्स थे।’

एडवर्टाइजर्स के परिप्रेक्ष्य में, ईश्वर ने कहा, ‘अप्रैल और मई में लॉकडाउन के दौरान हमने कुछ भी विज्ञापन नहीं किया। एक बार लॉकडाउन खुलने के बाद विज्ञापन देने वालों में हम सबसे पहले थे। हम वर्षों से लगातार विज्ञापनों पर सबसे अधिक खर्च करने वालों में से एक हैं। हम प्रिंट के साथ बहुत विज्ञापन करते हैं क्योंकि कैटेगरी इसकी मांग करती है। वीकेंड पर हम ज्यादा विज्ञापन देते हैं, क्योंकि उस दौरान लोग प्रॉपर्टी देखने के लिए ज्यादा निकलते हैं। हम सभी भाषाओं के अखबारों में विज्ञापन दे रहे हैं। हमें उम्मीद नहीं थी कि यह काम करेगा, लेकिन इसने उद्योग में विश्वास जगाया और इसने वास्तव में हमारे लिए काम किया।’

प्रिंट इंडस्ट्री के बारे में श्यामलन का कहना है कि टाइम के साथ फॉर्मेट बदल रहा है। उन्होंने पैनलिस्ट से जानना चाहा कि प्रिंट के लिए इस महामारी को कैसे अवसर के रूप में बदला जा सकता है। इस पर बालकृष्णन ने कहा, ‘डिजिटल और प्रिंट फॉर्मेट्स को मिलकर काम करना होगा। लॉकडाउन ने प्राइसिंग गेम को पूरा बदल दिया है। इस महामारी से पहले से ही हमारी सभी प्रॉपर्टीज पेवॉल (pay wall) के पीछे थीं। कवर प्राइस की बात करें तो हम देश के सबसे महंगे अंग्रेजी अखबार हैं। यही सब चीजें हैं, जो इस मुश्किल समय में हमें बनाए रखे हुई हैं। बिजनेस का अर्थशास्त्र बदल गया है, लेकिन हमने इसकी परिकल्पना की है।‘ 

इस दौरान रेड्डी ने कहा कि  भविष्य में प्रिंट पनपेगा, क्योंकि लोग इसे एक विश्वसनीय माध्यम के रूप में देखते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि मीडिया प्लेयर्स यों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में भी निवेश करना चाहिए। वहीं चांडी और खरे ने कहा कि मीडियम का अधिक महत्व नहीं होगा और फोकस कंटेंट पर शिफ्ट हो जाएगा।


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