इस किताब में हरीश भाटिया ने 38 साल से ज्यादा के अपने प्रोफेशनल करियर के दौरान कॉरपोरेट सेक्टर में आए उतार-चढ़ावों के बारे में लिखा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो