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IRS: इन बड़ी वजहों से लगातार सफलता की इबारत लिख रहा दैनिक जागरण
पिछले दिनों 'मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल' (MRUC) द्वारा ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019’ की चौथी तिमाही (IRS 2019 Q4) के डाटा जारी किए गए हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
पिछले दिनों 'मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल' (MRUC) द्वारा ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019’ की चौथी तिमाही (IRS 2019 Q4) के डाटा जारी किए गए हैं। यह रिपोर्ट इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पिछली तिमाही यानी पहली (Q1), दूसरी (Q2) और तीसरी तिमाही (Q3) के जारी किए गए डाटा पर आधारित है, जिसकी औसतन रिपोर्ट के बाद चौथी तिमाही के नतीजे तैयार किए गए हैं।
आइआरएस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देशभर के छह करोड़ 87 लाख पाठकों, जिनमें अकेले उत्तर प्रदेश के ही 3.9 करोड़ पाठक शामिल हैं, ने दैनिक जागरण को अपना पसंदीदा अखबार बताया है। सर्वे में दैनिक जागरण लगातार पूरे देश के समाचार पत्रों में शीर्ष पर बना हुआ है। देश में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबारों की लिस्ट में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से दैनिक जागरण की कुल रीडरशिप (total readership) 30 प्रतिशत ज्यादा बनी हुई है।
‘आईपीजी मीडियाब्रैंड्स इंडिया’ (IPG Mediabrands India) के सीईओ शशि सिन्हा के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में हिंदी मार्केट में दैनिक जागरण की काफी ग्रोथ हुई है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे मार्केट में जहां साक्षरता दर बढ़ी है और इसलिए वहां अखबार की रीडरशिप में भी इजाफा हुआ है।
सिन्हा का कहना है, ‘जागरण ने भी नए पाठकों पर काफी निवेश किया है। देश में अखबारों का कवर मूल्य इतना कम है कि कई बार अखबार सर्कुलेशन बंद हो जाता है, क्योंकि जब तक आपके पास स्थिर विज्ञापन रेवेन्यू नहीं होता है, तब आप जितनी बिक्री करते हैं, उतना ही आपको नुकसान होता है। दूसरों के विपरीत जागरण का सर्कुलेशन सिर्फ बढ़ा है,इसकी वजह से रीडरशिप भी बढ़ी है और उन्हें अपनी टॉप पोजीशन पर रहने में मदद मिली है।’
इस बारे में ‘जागरण प्रकाशन’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (स्ट्रैटेजी, ब्रैंड और बिजनेस डेवलपमेंट) बसंत राठौड़ का कहना है, ‘पाठकों के लिए क्वालिटी कंटेंट तैयार करने पर किए गए मजबूत फोकस ने रीडरशिप की लिस्ट में नंबर वन रहने में मदद की है।’ उनका कहना है, ‘दैनिक जागरण के सात सरोकार इसकी एडिटोरियल पॉलिसी का हिस्सा है। ये सात सरोकार गरीबी उन्मूलन, स्वस्थ समाज, सुशिक्षित समाज, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और जनसंख्या नियोजन हैं। इन सरोकारों पर काम करने से लोगों से भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है।’
आईआरएस की चौथी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, दैनिक जागरण न सिर्फ टोटल रीडरशिप (Total Readership) बल्कि एवरेज इश्यू रीडरशिप (average issue readership) में भी नंबर वन है। चौथी तिमाही में इस अखबार की एवरेज इश्यू रीडरशिप 16872000 पर पहुंच गई है। पिछले दो सर्वे (IRSs of 2017 और 2019) के दौरान अखबार की रीडरशिप लगातार 6.8 करोड़ और सात करोड़ रही है।
राठौड़ का कहना है, ‘दैनिक जागरण अपने सात सरकारों के साथ काफी बेहतर कंटेंट पाठकों को उपलब्ध कराता है। इसमें स्वास्थ्य से जुडे कॉलम के अलावा युवाओं पर केंद्रित सप्लीमेंट भी शामिल हैं, जिसमें रोजगार के अवसरों के बारे में भी बताया जाता है, इसके अलावा महिला पाठकों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए भी कंटेंट उपलब्ध कराया जाता है।’ विशेषज्ञों का कहना है कि अखबार की इतनी ज्यादा पाठक संख्या के कारण ही एडवर्टाइजर्स के लिए इसे नजरअंदाज करना काफी मुश्किल होता है। इसके अलावा कई अन्य कारक भी इसके पक्ष में काम करते हैं।
‘पीएचडी मुंबई’ (PHD Mumbai) के वाइस प्रेजिडेंट दिनेश व्यास के अनुसार, ‘दैनिक जागरण की रीडरशिप में लगातार वृद्धि इस तथ्य को दर्शती है कि लोकल कंटेंट ही किंग है, खासकर हिंदी भाषी मार्केट में। 11 राज्यों में 37 एडिशंस इसकी टोटल रीडरशिप में योगदान दे रहे हैं। इसके अलावा यह उचित मूल्य पर उलब्ध है, जिसका लाभ भी पाठकों को मिल रहा है। दैनिक जागरण डिस्ट्रीब्यूटर्स के द्वारा अपने ग्राहकों के आवास या कार्यालयों से पुराने अखबारों को रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए इकट्ठा करने का काम भी करता है, जिसमें मासिक सब्सक्रिप्शन पर छूट मिलती है।’
व्यास का कहना है, ‘यह अखबार कई सालों से चल रहा है और पाठकों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए यह सप्लीमेंट्स दे रहा है। पुरुष हो अथवा महिला, यह परिवार के सभी सदस्यों के लिए उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर कंटेंट उपलब्ध करा रहा है।’ विज्ञापन के मुद्दे पर व्यास ने कहा कि अखबार स्थानीय विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करता है, जिसमें छोटे एंटरप्रिन्योर्स से लेकर स्थानीय दुकानदार शामिल है, जो स्थानीय सप्लीमेंट्स में अपना विज्ञापन प्रकाशित करवाना चाहते हैं। इसके अलावा हिंदी भाषी मार्केट में इसकी ज्यादा रीडरशिप को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर के एडवर्टाइजर्स भी अपने विज्ञापन देते हैं।
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