जानें, क्यों भारतीय प्रिंट मीडिया के लिए काफी राहत भरी है ये खबर

द साउथ एशिया मीडिया फेस्टिवल 2019 में विशेषज्ञों ने भारत में प्रिंट इंडस्ट्री के बारे में फैल रहे मिथकों को दूर करने का प्रयास किया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 26 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 26 November, 2019
Media

‘इंटरनेशनल न्यूज मीडिया एसोसिएशन’ (INMA) द्वारा पिछले दिनों दिल्ली में ‘द साउथ एशिया मीडिया फेस्टिवल 2019’ (The South Asia Media Festival 2019) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने भारत में प्रिंट इंडस्ट्री के बारे में फैल रहे मिथकों को दूर करने का प्रयास किया।

इस मौके पर जहां विशेषज्ञों ने प्रिंट इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न मामलों और मिथकों पर बात की, वहीं ‘कंतार मीडिया’ (Kantar Media) के सीईओ और चेयरमैन एंडी ब्राउन ने प्रिंट मीडियम की ग्रोथ के बारे में बताया। अपनी प्रजेंटेशन के दौरान उन्होंने  ‘टीजीआई ग्लोबल क्विक व्यू’ (TGI Global Quick View) द्वारा जारी रिपोर्ट में शामिल डाटा का हवाला भी दिया।

‘टीजीआई ग्लोबल क्विक व्यू’ कि रिपोर्ट में 22 देशों में से भारत न्यूजपेपर पब्लिशर्स के लिए चौथा सबसे बड़ा मार्केट है। आज के डिजिटल युग में भी टीवी के बाद उपभोग के मामले में प्रिंट दूसरे नंबर पर बना हुआ है। अपने खास और एक्सक्लूसिव रीडर बेस के कारण यह युवा वर्ग में भी सबसे ज्यादा विश्वसनीय माध्यम बना हुआ है।

ब्राउन का कहना था, ‘लगभग बीस सालों से इंटरनेट लोगों के जीवन में अहम भूमिका निभा रहा है, ऐसे में दुनिया में अखबार पढ़ने वालों की संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन भारत इसका एक बड़ा अपवाद है। यहां स्थिति इसके विपरीत है।’

ब्राउन का कहना था कि दुनिया भर में तमाम जगह कई सालों से विभिन्न न्यूज ब्रैंड्स को अपने पारंपरिक प्रिंटेड फॉर्मेट के ऑडियंस में कमी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भारत में स्थिति बिल्कुल इसके विपरीत है। भारत में जनसंख्या बढ़ने और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में बढ़ोतरी के कारण हिंदी और अन्य प्रादेशिक भाषाओं के अखबारों की रीडरशिप में काफी उछाल आया है।

‘नील्सन’ (Nielsen) की मार्केटिंग प्रमुख (Effectiveness Practice) डॉली झा ने ब्राउन की बातों से सहमति जताई। उनका कहना था कि हालांकि लोग सोचते हैं कि प्रिंट मीडिया खत्म हो चुका है, लेकिन भारत में यह अभी भी सबसे ज्यादा प्रभावी माध्यम बना हुआ है। झा के अनुसार, ‘भारतीय अभी भी प्रिंट पर ज्यादा समय दे रहे हैं।’

 ‘कंतार मीडिया’ द्वारा पेश किए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि 48 प्रतिशत कंज्युमर्स आडियो बेस्ड मीडियम को प्राथमिकता देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि आज के दौर में ‘एलेक्सा’ (Alexa) और ‘अमेजॉन ईको’ (Amazon Echo) जैसी ऑडियो बेस्ड डिवाइसों की मांग बढ़ती जा रही है। ये डिवाइस निश्चित रूप से मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग का भविष्य हो सकते हैं, लेकिन न्यूज के उपभोग के लिए अधिकांश युवा पीढ़ी भी प्रिंट पर निर्भर है।

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फ्रंट पेज पर अखबारों ने किन खबरों को दी तवज्जो, जानिए यहां

कोरोना के बढ़ते खौफ के बीच प्रधानमंत्री मोदी की अपील आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की प्रमुख खबर है।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 04 April, 2020
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Saturday, 04 April, 2020
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कोरोना के बढ़ते खौफ के बीच प्रधानमंत्री मोदी की अपील आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की प्रमुख खबर है। सबसे पहले बात करते हैं दैनिक भास्कर की, जहां फ्रंट पेज की शुरुआत लॉकडाउन से पहले और बाद के आंकड़ों को दर्शाती खबर से हुई है। इसी में एयर इंडिया के 30 अप्रैल तक उड़ानें बंद रखने के फैसले का भी जिक्र है।

लीड मोदी की अपील है, प्रधानमंत्री ने लोगों से 5 अप्रैल को रात 9 बजे 9 मिनट तक मोमबत्ती, टॉर्च या दीया जलाने को कहा है। कोरोना को मात देने वाले केरल के सबसे उम्रदराज दंपती को भी पेज पर बड़ी जगह मिली है। इसके अलावा, अमेरिका का हाल और कोरोना से मुकाबले के लिए रेलवे की तैयारी से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। एंकर में अनिरुद्ध शर्मा की बाईलाइन को जगह मिली है। शर्मा ने लॉकडाउन के पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डाला है।

हिन्दुस्तान की बात करें तो यहां भी फ्रंट पेज की शुरुआत टॉप बॉक्स से हुई है। इस बॉक्स में पीएम मोदी की अपील को रखा गया है। लीड निजामुद्दीन के नकारात्मक परिणाम हैं। खबर के मुताबिक, देश के कुल मरीजों में मरकज के एक चौथाई हैं।

वहीं, दिल्ली में मेडिकल स्टाफ के संक्रमित होने की बढ़ते मामले, संक्रमित महिला की सफल डिलीवरी और कन्नौज एवं हुबली में पुलिस पर हुआ हमला प्रमुखता के साथ पेज पर है। इसी के साथ मजदूरों को वेतन देने की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र को भेजे गए नोटिस का जिक्र भी पेज पर है। एंकर में स्कन्द विवेक धर की बाईलाइन है, जिन्होंने कोरोना को लेकर हुए एक अध्ययन के बारे में बताया है।

अब रुख करते हैं नवभारत टाइम्स का। लीड पीएम मोदी की अपील है और इसी में कोरोना की बढ़ती चाल को भी रखा गया है। वहीं, कोरोना पीड़ित गर्भवती की सफल डिलीवरी, गाजियाबाद में नर्सों से बदसलूकी करने वालों पर कार्रवाई और मुंबई एयरपोर्ट पर तैनात 11 जवानों के संक्रमित होने का समाचार भी पेज पर है। CISF के 11 जवान कोरोना की चपेट में आ गए हैं। एंकर में एक ‘अनोखी’ खबर को जगह मिली है। अनोखी इस लिहाज से कि एक बेटे ने पिता के खिलाफ लॉकडाउन के उल्लंघन पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

वहीं, अमर उजाला की बात करें तो टॉप बॉक्स में यूपी के मुख्यमंत्री के सख्त रुख को जगह मिली है। योगी ने साफ कर दिया है कि स्वास्थ्यकर्मियों से अभद्रता करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। लीड हिन्दुस्तान की तरह निजामुद्दीन के नकारात्मक परिणामों को रखा गया है।

साथ ही इसमें कोरोना की बढ़ती चाल का भी उल्लेख है। वहीं, कन्नौज में सामूहिक नमाज रोकने गई पुलिस टीम पर हमला और कोरोना पीड़ित गर्भवती डॉक्टर की सफल डिलीवरी से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। इसके अलावा, मजदूरों के वेतन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर सरकार की प्रतिक्रिया को भी फ्रंट पेज पर जगह मिली है। पीएम मोदी की अपील को एंकर में लगाया गया है।

सबसे आखिरी में रुख करते हैं दैनिक जागरण का। पीएम मोदी की अपील को यहां फ्रंट पेज के टॉप बॉक्स में जगह दी गई है। लीड सबसे अलग बड़े पैमाने पर कोरोना जांच को मंजूरी है। संक्रमितों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी को देखते हुए सरकार ने व्यापक जांच की अनुमति दे दी है। दिल्ली में कोरोना की बढ़ती चाल और यूपी के मुख्यमंत्री के सख्त रुख को भी पेज पर पर्याप्त स्थान मिला है।

इसके अलावा, निजामुद्दीन के नकारात्मक परिणाम के साथ ही सियासी दवाब में कश्मीर डोमिसाइल कानून में हुए बदलावों के बारे में भी पाठकों को बताया गया है। एंकर में अखबारों के वितरण से जुड़ा समाचार है। जो बताता है कि वितरण में बाधा डालना सूचना के अधिकार का हनन है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में नवभारत टाइम्स का फ्रंट पेज आज सबसे संतुलित एवं खुला-खुला दिखाई दे रहा है। दूसरे नंबर पर हिन्दुस्तान को रखा जा सकता है। 

2: खबरों की प्रस्तुति के लिहाज से आज दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया जा सकता है, जबकि तीसरे नंबर पर अमर उजाला है।

3: शीर्षक को कलात्मक बनाने के प्रयास में दैनिक भास्कर अव्वल है। लीड का शीर्षक ‘आओ! फिर से दीया जलाएं’ सबसे आकर्षक है।

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आज किस हिंदी अखबार का फ्रंट पेज है सबसे 'दमदार', पढ़ें यहां

दिल्ली के निजामुद्दीन में बीते दिनों जो कुछ हुआ, उसके नकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं।

नीरज नैयर by
Published - Friday, 03 April, 2020
Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Newspapers

दिल्ली के निजामुद्दीन में बीते दिनों जो कुछ हुआ, उसके नकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। इस बीच सरकार तब्लीगी मरकज में शामिल होने वालों की तलाश में जुट गई है। इस खबर के साथ ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों से पीएम मोदी की चर्चा आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सुर्खियां हैं। सबसे पहले बात करते हैं अमर उजाला की, जिसने आज काफी आकर्षक फ्रंट पेज तैयार किया है।

लीड निजामुद्दीन के नकारात्मक नतीजे हैं। जमातियों और उनके संपर्क में आये करीब 9000 लोगों की पहचान कर ली गई है, इनमें से 1306 विदेशी बताये जा रहे हैं। लीड में केंद्र से राज्यों को मिले सख्ती के निर्देश का भी जिक्र है, जिसमें लॉकडाउन के उल्लंघन पर दो साल की सजा की बात कही गई है। निश्चित तौर पर इस खबर पर लोगों का सबसे ज्यादा ध्यान जाएगा। कोरोना की बढ़ती चाल को भी प्रमुखता से लगाया गया है। दिल्ली में एक डॉक्टर दंपती भी इसकी चपेट में आ गया है। इसके अलावा, विदेशों में फंसे भारतीयों को सरकार का संदेश और दारुल उलूम का घर पर नमाज अदा करने का फतवा भी पेज पर है। एंकर में पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों से चर्चा है।

अब रुख करते हैं दैनिक जागरण का। फ्रंट पेज की शुरुआत पीएम मोदी के टॉप बॉक्स से हुई है। मोदी का कहना है कि देश लॉकडाउन के दौर से धीरे-धीरे बाहर आएगा। लीड जमातियों पर कसता शिकंजा है। सरकार ने 960 विदेशी तब्लीगी को काली सूची में डाल दिया है। यानी अब वे कभी भारत का रुख नहीं कर पाएंगे।

वहीं, कोरोना की बढ़ती चाल के साथ ही इंदौर में स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए हमले को भी प्रमुखता के साथ जगह मिली है। एंकर में नीलू रंजन की बाईलाइन है, जिन्होंने बताया है कि कोरोना के तीसरे फेज में पहुंचने की आशंका गहरा गई है।

आज नवभारत टाइम्स के फ्रंट पेज को देखें तो लीड पीएम मोदी की धर्मगुरुओं से अपील को लगाया गया है और जमातियों की ‘कारगुजारियां’ एवं देवबंद का फतवा भी इसी का हिस्सा है। मोदी ने धर्मगुरुओं से अपील करते हुए कहा है कि कोरोना ने हमारी आस्था पर हमला बोला है, सभी पंथ के लोग एकजुट होकर इसे हराएं। दिल्ली में संक्रमण की चपेट में आये डॉक्टर दंपती सहित कोरोना से जुड़ी कुछ अन्य खबरें भी पेज पर हैं।

इसके अलावा, अखबार ने लॉकडाउन का नकारात्मक पक्ष उजागर करने का भी प्रयास किया है। पूनम पाण्डेय की बाईलाइन बताती है कि लॉकडाउन अवधि के दौरान महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में इजाफा हुआ है। एंकर की बात करें तो यहां कत्यानी की बाईलाइन को जगह मिली है। उन्होंने लॉकडाउन के बीच सोशल बायकाट के डर से बढ़ रहे खुदकुशी के मामलों के बारे में बताया है।

अब चलते हैं राजस्थान पत्रिका पर। फ्रंट पेज की लीड कोरोना से मुकाबले के लिए सरकार की तैयारी को लगाया गया है। इस ‘जंग’ को निर्णायक मोड़ पर ले जाने के लिए सेना के डॉक्टर और एनसीसी कैडेट तैनाती को तैयार हैं।

लीड में कोरोना की बढ़ती चाल का भी जिक्र है। वहीं, जमातियों पर कसता शिकंजा और सरकारी कदमों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया को भी बड़ी जगह मिली है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का कहना है कि कोरोना की जांच का दायरा बढ़ाए बिना लॉकडाउन का कोई मतलब नहीं। इसके अतिरिक्त, प्रिंस चार्ल्स का इलाज करने वाले भारतीय डॉक्टर से भी अखबार ने पाठकों को रूबरू कराया है। एंकर में लॉकडाउन के चलते महाराष्ट्र में फंसे प्रवासी मजदूरों की स्थिति बयां करती खबर है।

सबसे आखिरी में आज रुख करते हैं हिन्दुस्तान का। फ्रंट पेज की लीड निजामुद्दीन के नकारात्मक परिणाम हैं। मुख्यमंत्रियों के साथ मोदी की चर्चा को दो कॉलम जगह मिली है। दिल्ली में संक्रमण की चपेट में आने वाले डॉक्टर दंपती, कोरोना से निपटने की सरकार की तैयारी और उस पर विपक्ष के सवाल को भी प्रमुखता के साथ पाठकों के समक्ष पेश किया गया है।

एंकर में कोरोना से लड़ने के लिए कोरोना वायरस बना रहे भारतीय वैज्ञानिकों के बारे में बताया गया है। इसके अलावा देवबंद के फतवे सहित कुछ अन्य समाचार भी पेज पर हैं।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के लिहाज से आज नवभारत टाइम्स और हिन्दुस्तान सबसे आगे हैं। दोनों अखबारों का फ्रंट पेज खुला-खुला एवं संतुलित नजर आ रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो अमर उजाला ने सबको पीछे छोड़ दिया है। खासतौर पर लीड को अखबार ने काफी अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है।

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में आज भी सभी अखबारों के हाथ खाली हैं।

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मीडिया पर कोरोना की मार, यह कंपनी बंद करेगी अपने 60 अखबार!

दुनियाभर में कोहराम मचा रहे कोरोनावायरस (कोविड-19) की मार अब न्यूजपेपर इंडस्ट्री पर भी पड़नी शुरू हो गई है।

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
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दुनियाभर में कोहराम मचा रहे कोरोनावायरस (कोविड-19) की मार अब न्यूजपेपर इंडस्ट्री पर भी पड़नी शुरू हो गई है। इस बीच मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक के ऑस्ट्रेलियाई मीडिया समूह ‘न्यूज कॉर्प’ (News Corp) ने घोषणा की है कि कोविड-19 के कारण विज्ञापनों में काफी गिरावट आई है। ऐसे में वह करीब 60 प्रादेशिक अखबारों की प्रिंटिंग बंद कर देगी।

‘द ग्लोबल टाइम्स’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘न्यूज कॉर्प ने कहा है कि न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया, क्वींसलैंड और दक्षिण आस्ट्रेलिया में कंपनी के अखबारों की प्रिंटिंग बंद कर दी जाएगी, ये अखबार ऑनलाइन पढ़ने को मिलेंगे।’

इस बारे में न्यूज कॉर्प आस्ट्रेलिया के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन माइकल मिलर (Michael Miller) का कहना है,‘हमने इस फैसले को काफी सोच-समझकर लिया है। कोरोनावायरस संकट के कारण अप्रत्याशित रूप से काफी आर्थिक दबाव आ गया है और ज्यादा से ज्यादा नौकरियों को बनाए रखने के लिए हम हर संभव उपाय कर रहे हैं। ’  

‘द ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस महामारी की शुरुआत के पहले से ही तमाम आस्ट्रेलियाई मीडिया समूह ऑनलाइन कंटेंट की तरफ अपना ध्यान केंद्रित कर रहे थे। ‘द गार्डियन’ (The Guardian) की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोनावायरस की वजह से यूके में सरकार द्वारा किए गए लॉकडाउन के कारण अखबारों की बिक्री में 30 प्रतिशत तक की कमी हुई है। तमाम पाठक भी सेल्फ आइसोलेटिंग कर रहे हैं, ऐसे में ब्रिटिश न्यूज इंडस्ट्री के रेवेन्यू का एक प्रमुख स्रोत काफी प्रभावित हुआ है।

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‘Outlook’ मैगजीन को लेकर लिया गया ये बड़ा फैसला

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इसकी चपेट में अब तक कई लोग आ चुके हैं। तमाम संस्थानों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
Outlook Group

‘कोरोनावायरस’ (COVID-19) के कारण देश में चल रहे लॉकडाउन के बीच अंग्रेजी की साप्ताहिक मैगजीन ‘आउटलुक’ (Outlook ) ने अपने प्रिंट एडिशन को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है।  ‘आउटलुक’  के एडिटर-इन-चीफ रूबेन बनर्जी (Ruben Banerjee) ने इस बारे में एक पत्र लिखकर जानकारी दी है। इस पत्र में बनर्जी ने लिखा है, ‘मुझे यह बताते हुए बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है कि आपकी पसंदीदा मैगजीन 'आउटलुक' की प्रिंटिंग फिलहाल बंद कर दी गई है।’

इस पत्र में उन्होंने यह भी कहा है, ‘कोरोनावायरस के कारण देशभर में आजकल जो स्थिति है, उस वजह से ही मैगजीन की प्रिंटिंग को बंद करने का निर्णय लिया गया है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण के जरिये फैल रहा है। वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार द्वारा लॉकडाउन की घोषणा की गई है। ऐसे में हम इस मैगजीन को डिस्ट्रीब्यूट नहीं कर सकते हैं। ऐसे समय में इस मैगजीन को वितरित न करने का निर्णय इसलिए लिया गया है, ताकि आप लोग किसी ऐसी चीज के संपर्क में न आएं, जो कई हाथों से होकर गुजरी हो और आपको खतरे में डाल सकती हो।’

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मीडिया पर कोरोना का असर, 300 से अधिक अखबारों का प्रकाशन अस्थायी रूप से बंद!

कोरोना के चलते विश्व की महाशक्तियों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। भारत में भी इसका असर इंडस्ट्री पर दिखाई देने लगा है। मीडिया इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
newspaper

कोरोना वायरस पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस महामारी के चलते विश्व की महाशक्तियों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। भारत में भी कोरोना का असर इंडस्ट्री पर दिखाई देने लगा है। मीडिया इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। एक्सप्रेस ग्रुप से जहां एक दिन पहले खबर आयी कि वह अपने यहां काम कर रहे मीडियाकर्मियों की सैलरी में कटौती करेगा, तो वहीं अब एक और बुरी खबर सामने आयी है।

मध्य प्रदेश के 300 से अधिक छोटे और मझोले अखबार के मालिकों ने अपने-अपने अखबार अस्थायी रूप से छापने बंद कर दिये हैं।   

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने बताया, देशव्यापी लॉकडाउन के कारण यातायात की सुविधा के अभाव के साथ-साथ विज्ञापनों में आई भारी कमी ही इसकी मुख्य वजह है। लॉकडाउन से पहले इनमें से अधिकांश अखबार मध्य प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों से प्रकाशित हुआ करते थे।'

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, लोगों में यह डर है कि यदि वे समाचार पत्रों को इस महामारी के समय खरीदेंगे तो इसके जरिये वे भी इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। यह भी लोगों द्वारा समाचार पत्र न लेने के मुख्य कारणों में से एक है।

अधिकारी इस बात की भी जानकारी दी है कि मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग में करीब 670 समाचार पत्र पंजीकृत हैं, जिन्हें सरकारी विज्ञापन मिलते हैं। इनमें से करीब 287 अकेले भोपाल से ही प्रकाशित होते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन स्थिति अब ऐसी खराब हो गई है कि मध्य प्रदेश के 52 जिलों में से 95 फीसदी जिलों में इस तरह के अखबार नहीं छप रहे हैं।  

वहीं दूसरी तरफ, मझोले स्तर के समाचार पत्रों के कुछ मालिकों ने अपने अखबार को ई-पेपर्स के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है, ताकि समाचारों की दुनिया में अपना अस्तित्व बचाया जा सके।   

 

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कोरोना के आंकड़ों पर हिंदी अखबारों में यूं दिखा विरोधाभास

दिल्ली के निजामुद्दीन में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश की चिंता बढ़ा दी है। यही चिंता आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सबसे बड़ी खबर है।

नीरज नैयर by
Published - Thursday, 02 April, 2020
Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
Newspapers

दिल्ली के निजामुद्दीन में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश की चिंता बढ़ा दी है। यही चिंता आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सबसे बड़ी खबर है। सबसे पहले बात करते हैं नवभारत टाइम्स की, जहां कोरोना की चिंता और लगातार बढ़ते मामलों को पूरे आठ कॉलम लीड लगाया गया है। वहीं, गोरखपुर में 25 वर्षीय एक युवक की मौत से खलबली मच गई है। मृतक में कोरोना की पुष्टि हुई है, इसी के साथ यह कोरोना से देश में सबसे कम उम्र के व्यक्ति की मौत का मामला बन गया है।

इस खबर के साथ ही कोरोना की चपेट में आ रहे डॉक्टर और अमेरिका में बिगड़ते हालात भी पेज पर हैं। एंकर में लोगों को अखबार पढ़ने के लिए जागरूक करता समाचार है। कोरोना के खौफ के चलते बड़े पैमाने पर लोगों ने अखबार मंगाना बंद कर दिया है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए केंद्र द्वारा जारी नियम और दो सिंगल समाचार भी पेज पर हैं। अब जो लोग घाटी में 15 साल रह चुके हैं, उन्हें भी मूल निवासी माना जाएगा।

दूसरे नंबर पर रुख करते हैं हिन्दुस्तान का। फ्रंट पेज की शुरुआत रामनवमी के मौके पर जाने-माने लेखक अमीश त्रिपाठी द्वारा बताई गईं नौ अच्छी आदतों से हुई है, जिन्हें अपनाकर कोरोना के ‘असुर’ का अंत किया जा सकता है। यह निश्चित रूप से एक अच्छा प्रयोग है। लीड की बात करें तो ‘तबलीगी जमात के 189 लोग संक्रमित मिले’ शीर्षक के साथ देश में बढ़ी चिंता को लगाया गया है। वहीं, एक दिन में सामने आये 437 नए मामले और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए केजरीवाल सरकार का ऐलान को भी पर्याप्त जगह मिली है। केजरीवाल के कहा है कि यदि किसी स्वास्थ्य कर्मी की संक्रमण से मौत होती है तो उसके परिवार को एक करोड़ दिए जाएंगे।

भारतीय मूल की प्रख्यात वैज्ञानिक गीता रामजी की दक्षिण अफ्रीका में कोरोना से मौत हो गई है। इस खबर को भी अखबार ने प्रमुखता से लगाया है। एंकर में तबलीगी जमात के मामले में एजेंसियों की लापरवाही को रेखांकित करता समाचार है। अखबार ने जम्मू-कश्मीर से जुड़ी खबर को सिंगल कॉलम में रखा है। खबर मूल निवासी वाले नियम से उठाने के बजाय नौकरी की व्यवस्था से उठाई गई है।

अब बात करते हैं अमर उजाला की, जहां टॉप बॉक्स में कोरोना से जूझते उत्तर प्रदेश का हाल है। कोरोना पीड़ित 25 वर्षीय युवक के साथ ही राज्य में दो लोगों की मौत हो चुकी है। लीड निजामुद्दीन से उपजी चिंता है। हालांकि, अमर उजाला ने तबलीगी मरकज से जुड़े 304 लोगों को संक्रमित बताया है, जबकि हिन्दुस्तान में यह संख्या 189 है। पेज पर तीसरी बड़ी खबर सीबीएसई का फैसला है, जिसके मुताबिक 9वीं और 12वीं के छात्र मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा में जाएंगे।

हिन्दुस्तान ने भी इस खबर को प्रमुखता से उठाया है। वहीं, वायरस की चपेट में आते डॉक्टरों सहित कोरोना के खौफ से जुड़ी तीन खबरों को रंगीन बॉक्स में रखा गया है। एंकर में जम्मू-कश्मीर में केंद्र द्वारा लागू किया गया डोमिसाइल कानून है। इसके अलावा, पेज पर कुछ अन्य समाचार भी हैं।

दैनिक जागरण के फ्रंट पेज पर नजर डालें तो यहां निजामुद्दीन कांड के बाद हरकत में आई सरकार को लीड लगाया गया है। देश में तबलीगी जमात के लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है। सेकंड लीड राकेश कुमार की बाईलाइन है, जिन्होंने बताया है कि कैसे निजामुद्दीन के मरकज में पनप रहा था देश की तबाही का वायरस।

जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल कानून, केजरीवाल सरकार और सीबीएसई के फैसलों सहित कोरोना की बढ़ती चाल भी पेज पर है। एंकर की बात करें तो यहां मनु त्यागी की बाईलाइन को सजाया गया है। मनु ने लॉकडाउन के सुनहरे पक्ष से पाठकों को रूबरू कराया है।

सबसे आखिरी में चलते हैं राजस्थान पत्रिका पर। लीड निजामुद्दीन कांड से बढ़ी चिंता और सरकार की कार्रवाई को लगाया गया है। हालांकि, संक्रमितों की संख्या को लेकर यहां भी गफलत का माहौल है। अखबार संक्रमित जमातियों की संख्या 261 बता रहा है, जबकि हिन्दुस्तान और अमर उजाला में आंकड़ा कुछ और है।

वहीं, जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल कानून और सीबीएसई के फैसले को पर्याप्त जगह उपलब्ध कराई गई है। साथ ही कोरोना से मुकाबले के लिए रेलवे की तैयारी से भी पाठकों को अवगत कराया गया है। एंकर में महेंद्र प्रताप सिंह की बाईलाइन है, जिन्होंने बताया है कि कोरोना के खौफ के बीच रामनवमी कैसे मन रही है।

आज का किंग कौन?

1: लेआउट की बात करें तो आज हिन्दुस्तान अव्वल है और दूसरा नंबर अमर उजाला का आता है।

2: खबरों की प्रस्तुति में मामला थोड़ा उल्टा है, यानी अमर उजाला प्रथम है और हिन्दुस्तान दूसरे नंबर पर।

3: कलात्मक शीर्षक आज किसी भी अखबार में नजर नहीं आ रहा है।

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एक्सप्रेस समूह पर दिखा कोरोना का 'असर', एंप्लाईज को लेकर उठाया ये स्टेप

समूह की ओर से इस बारे में अपने एंप्लाईज को एक पत्र लिखकर जानकारी दी गई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
एक्सप्रेस ग्रुप

दुनियाभर में खौफ का पर्याय बने 'कोरोनावायरस' (कोविड-19) का 'प्रकोप' अब संस्थानों पर भी दिखना शुरू हो गया है। दरअसल, कोरोना के कारण बिजनेस पर पड़े असर के कारण ‘एक्सप्रेस समूह’ (Express Group) ने अपने एंप्लाईज की सैलरी में अस्थायी रूप से कटौती किए जाने की घोषणा की है। इस बारे में समूह की ओर से अपने एंप्लाईज को एक पत्र भी लिखा गया है।

इस पत्र में कहा गया है, कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण वेंडर्स, आरडब्ल्यूए सभी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। रेल, सड़क और हवाई यातायात बंद होने के कारण इसका असर अखबर के डिस्ट्रीब्यूशन पर पड़ रहा है। बिजनेस बंद पड़े हुए हैं। ऐसे में हम अपने सभी केंद्रों पर प्रिंट ऑर्डर कम करने के लिए मजबूर हो गए हैं। यह पूरी तरह से अभूतपूर्व स्थिति है।’

एंप्लाईज को लिखे पत्र में यह भी कहा गया है कि ‘कोरोना के कारण हमारे एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पर काफी विपरीत असर पड़ा है और इन स्थितियों को देखकर लगता है कि स्थिति और खराब होने वाली है। ऐसे में एंप्लाईज की सैलरी में अस्थायी रूप से कुछ कटौती किए जाने का निर्णय लिया गया है।’

 

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इस बड़ी खबर को फ्रंट पेज पर रखने से चूके ये अखबार

जैकेट विज्ञापन के कारण नवभारत टाइम्स में आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by
Published - Tuesday, 31 March, 2020
Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
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कोरोना के खौफ के बीच दिल्ली में धार्मिक जलसे में लोगों का जुटना और उनमें से कई का पॉजिटिव आना स्थिति को और भी भयावह बना सकता है। यह खबर दिल्ली के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी, लेकिन कुछ ही अख़बार इसके महत्व को समझ पाए हैं। सबसे पहले आज बात करते हैं दैनिक जागरण की। अखबार ने टॉप बॉक्स में उस खबर को लगाया है, जो लोगों को थोड़ी राहत देगी। यानी लॉकडाउन की अवधि नहीं बढ़ाई जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लॉकडाउन 21 दिनों का ही रहेगा।

लीड, दिल्ली का धार्मिक जलसा है, मगर इसका शीर्षक काफी कठिन हो गया है। एक ही नजर में पाठकों के लिए समझना मुश्किल है कि आखिर किस बारे में बात हो रही है। वहीं, कोरोना से मुकाबले की तैयारियों में खामियों को लेकर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के डीएम को पद से हटा दिया है। इस समाचार को पूरे घटनाक्रम के साथ पेज पर रखा गया है। एंकर में लॉकडाउन को सही साबित करती खबर है। इसके अलावा, कुछ सिंगल खबरों को पेज पर स्थान मिला है।

अब चलते हैं नवभारत टाइम्स पर। जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है, लेकिन यहां भी काफी विज्ञापन है। लीड धार्मिक जलसा है, जिसे बेहद सरल शीर्षक ‘निजामुद्दीन बना कोरोना का केंद्र’ के साथ लगाया गया है। इस जलसे में 1900 लोग आये थे, जिनमें से 24 में कोरोना वायरस मिला है और 6 की तेलंगाना में मौत हो गई है।

नोएडा के डीएम को योगी की फटकार भी लीड का हिस्सा है। इसके अलावा, पेज पर केवल दो सिंगल समाचार ही आ सके हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है, लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर सरकार की सफाई।

अमर उजाला ने धार्मिक जलसे की खबर को काफी विस्तार से लीड लगाया है। वहीं, नोएडा के डीएम को योगी द्वारा लगाई गई फटकार को भी बड़ी जगह मिली है। अखबार ने देश में बढ़ती कोरोना की चाल से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। संक्रमितों का आंकड़ा 1200 से ज्यादा हो गया है। इसी खबर में ओडिशा में महिला डॉक्टर से घर खाली कराने के लिए दी गई दुष्कर्म की धमकी का भी जिक्र है। एंकर में कोरोना को लेकर सरकार की चेतावनी और लॉकडाउन की अवधि को लेकर स्पष्टीकरण है।

आज हिन्दुस्तान को देखें तो विज्ञापनों को लेकर स्थिति लगभग कल जैसी ही है। लीड लॉकडाउन की समयावधि पर सरकार की सफाई है। स्कन्द विवेक धर की बाईलाइन भी लीड का हिस्सा है, जिन्होंने एक दिन में सामने आये कोरोना के 227 मामलों के बारे में बताया है। हालांकि, इसमें दिल्ली के धार्मिक जलसे का कहीं जिक्र नहीं है। कोताही पर नोएडा के डीएम को योगी की फटकार के साथ ही सरकारी स्कूलों में बच्चों को पदोन्नत करने का दिल्ली सरकार का फैसला भी पेज पर है। इसके अलावा, चार सिंगल समाचारों को ही पेज पर जगह मिल सकी है, लेकिन महिला डॉक्टर को दुष्कर्म की धमकी पेज पर नहीं है।

सबसे आखिरी में रुख करते हैं राजस्थान पत्रिका का। लीड ‘ना लॉकडाउन बढ़ेगा, ना इमरजेंसी लगेगी’ शीर्षक के साथ सरकार की सफाई को लगाया गया है। इसमें पलायन करने वाले मजदूरों का एक फोटो भी है, जो लॉकडाउन की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। हालांकि, दिल्ली के धार्मिक जलसे का कहीं जिक्र नहीं है। ओडिशा में डॉक्टर को मिली दुष्कर्म की धमकी को अखबार ने दो कॉलम जगह दी है। पीड़िता पर लगातार मकान खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है।

वहीं, लॉकडाउन के दूसरे पहलू को उजागर करती एक अन्य खबर भी पेज पर है, जिसके मुताबिक पैदल घर लौटने की कवायद में 29 मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं। एंकर में पुष्पेश शर्मा की बाईलाइन को लगाया गया है, जिन्होंने बताया है कि चीन किस तरह कोरोना संक्रमितों का पता लगा रहा है। 

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के लिहाज से आज सभी अखबार एक जैसे नजर आ रहे हैं। इसलिए किसी एक को अव्वल नहीं कहा जा सकता।

2: खबरों की प्रस्तुति में नवभारत टाइम्स और अमर उजाला को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया जा सकता है।

3: कलात्मक शीर्षक आज किसी भी अखबार में नजर नहीं आ रहा है।

4: खबरों का जहां तक सवाल है तो नवभारत टाइम्स, अमर उजाला और दैनिक जागरण सबसे आगे हैं, क्योंकि तीनों ने दिल्ली के धार्मिक जलसे की खबर को फ्रंट पेज पर प्रमुखता से जगह दी है।

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मीडिया की यह परेशानी दूर करने के लिए सरकार ने बढ़ाया कदम  

कोरोना वायरस को लेकर आम जनता के खौफ को बढ़ाने में सोशल मीडिया का अहम योगदान है। सरकार की सख्ती के बावजूद ऐसी खबरें वायरल होती रहती हैं, जिनका सच से कोई लेना देना नहीं।

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
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कोरोना वायरस को लेकर आम जनता के खौफ को बढ़ाने में सोशल मीडिया का अहम योगदान है। सरकार की सख्ती के बावजूद ऐसी खबरें वायरल होती रहती हैं, जिनका सच से कोई लेना देना नहीं। उदाहरण के तौर पर अखबारों से कोरोना फैलता है। इस अफवाह के चलते लोग अखबार लेना बंद कर रहे हैं। बड़े शहरों में तो कुछ सोसाइटीज ने हॉकर्स के अंदर आने पर ही पाबंदी लगा दी है। हालांकि, सरकार लगातार इस भ्रम को दूर करने में लगी है। मीडिया हाउस अपने स्तर पर भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

इस बीच, सरकार ने लॉकडाउन के चलते मीडिया को हो रही परेशानी दूर करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा कि अखबार की गाड़ियों को न रोका जाए। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने इस बारे में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि लोगों तक अखबारों की डिलिवरी की इजाजत दी गई है। लिहाजा घरों तक अखबार पहुंचाने सहित प्रिंट मीडिया के तहत आने वाली सप्लाई चेन की गाड़ियों को न रोका जाए। सीधे शब्दों में कहें तो अखबार प्रिंट होने से लेकर गाड़ियों के जरिए डिपो तक पहुंचने और फिर वहां से वितरकों द्वारा पाठकों तक पहुंचने की इजाजत है।

गौरतलब है कि लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि अखबारों की गाड़ियों को रोका जा रहा है। मीडिया संस्थानों ने इस संबंध में सरकार का ध्यान आकर्षित किया था, जिसके बाद गृह मंत्रालय की तरफ से सभी राज्यों को स्पष्ट किया गया है कि मीडिया के काम को सुचारू रूप से चलने दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अखबार लोगों के घरों तक पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संकट काल में मीडिया के काम की सराहना कर चुके हैं। वहीं, कई विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस वक्त लोगों को अखबार पढ़ना चाहिए, ताकि वह कोरोना के मुकाबले के लिए सरकारी तैयारियों से अवगत हो सकें और वायरस से अपना बचाव कर सकें।

नहीं मान रहे लोग

सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने लोगों के दिलोदिमाग को इस कदर जकड़ लिया है कि वो कुछ सुनने को ही तैयार नहीं हैं। अधिकांश लोग यह मान बैठे हैं कि यदि उन्होंने अखबार मंगवाया, तो कोरोना भी उनके घर बिन बुलाये मेहमान की तरह पहुंच जाएगा। ऐसा तब है जब समाचार पत्रों ने बाकायदा संदेश जारी कर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि अखबारों से कोरोना का कोई खतरा नहीं है। वह लगातार बता रहे हैं कि मॉडर्न प्रिंटिंग तकनीक पूरी तरह ऑटोमेटेड है। इसमें हाथों का इस्तेमाल नहीं होता। अखबार बांटने वाली सप्लाई चेन पूरी तरह सैनिटाइज्ड होती है। बावजूद इसके सर्कुलेशन में कमी दर्ज की जा रही है। 

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COVID-19 के खिलाफ जंग में शामिल हुआ भास्कर ग्रुप, मदद के लिए बढ़ाया हाथ

कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। इस बीच दैनिक भास्कर ग्रुप भी कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में शामिल हो गया है।

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
DBGroup

कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। सोमवार को लॉकडाउन का छठा दिन है। इस दौरान न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर संकट खड़ा हो गया है, बल्कि दैनिक श्रमिकों के सामने परिवार का पेट भरने की समस्या भी उत्पन्न हो गयी है।

वहीं इस बीच दैनिक भास्कर ग्रुप भी COVID-19 महामारी के खिलाफ जंग में शामिल हो गया है। ग्रुप ने कोरोना वायरस से उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों को कम करने और ऐसे दैनिक श्रमिकों के लिए एक डोनेशन प्रक्रिया शुरू की है, जिसका नाम है ‘सेवा परमो धरमा’।

बता दें कि दैनिक भास्कर ग्रुप ने देश के 12 राज्यों के 40 शहरों में 1 लाख परिवारों को एक हफ्ते तक खाना पहुंचाने का संकल्प लिया है और इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए भास्कर ग्रुप 40 शहरों के लोकल एनजीओ की मदद ले रहा है।

वहीं, भास्कर ग्रुप और उसके सभी एम्प्लॉयीज ने 1 करोड़ रुपए डोनेट कर इस पहल की शुरुआत की है। इसके अतिरिक्त डोनेशन के लिए 7 करोड़ रुपए अन्य लोगों से जुटाने का लक्ष्य रखा है। वैसे आप सभी लोगों की मदद से तस्वीर बदल सकती है। लिहाजा दैनिक श्रमिकों की मदद के लिए आगे आकर दैनिक भास्कर की इस मुहिम का हिस्सा बन सकते हैं।

आप निम्न माध्यमों से दान कर सकते हैं:

• UPI Transfer through any UPI app (Google pay, Paytm, PhonePe, BHIM etc)

• UPI ID - Q47105727@ybl

• Bank Transfer (RTGS / NEFT)

• HDFC Bank

• Name - Bhaskar Foundation

• Account No. – 01441450000456

• IFSC Code - HDFC0000144

बता दें कि वे सभी जो कुछ न कुछ राशि दानकर भास्कर ग्रुप की इस पहल के साथ जुड़ेंगे, वे आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत कर लाभ का पात्र होंगे। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.dbdigital.in/donate पर क्लिक करें।

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