अब इनके हाथों में होगी ‘Indian Newspaper Society’ की कमान

इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी की 80वीं वार्षिक आम बैठक में लिया गया निर्णय, गठित हुई कार्यकारिणी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 25 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 25 September, 2019
INS

‘जागरण प्रकाशन लिमिटेड’ और ‘मिड-डे’ के डायरेक्टर शैलेष गुप्त को ‘इंडियन न्‍यूजपेपर सोसायटी’ (INS) का प्रेजिडेंट चुना गया है। उनका यह चुनाव वर्ष 2019-20 के लिए किया गया है। आईएनएस की 80वीं वार्षिक आम बैठक में यह निर्णय लिया गया। शैलेष गुप्ता ‘मलयाला मनोरमा’ के जयंत मैनन मैथ्यू की जगह ये जिम्मेदारी संभालेंगे।

आईएनएस की कार्यकारिणी में एल आदिमूलन को डिप्टी प्रेजिडेंट, आनंद बाजार पत्रिका के डीडी पुरकायस्थ को वाइस प्रेजिडेंट और संडे स्टेट्समैन के नरेश मोहन को मानद कोषाध्यक्ष पद के लिए चुना गया है। वहीं, मैरी पॉल को सोसायटी के महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बता दें कि जनवरी 2018 में ‘इंडियन न्‍यूजपेपर सोसायटी’ ने शैलेष गुप्‍त को पेरिस के ‘द वर्ल्‍ड एसोसिएशन ऑफ न्‍यूजपेपर्स’ (WAN) के बोर्ड में नॉमिनी बनाया था। वर्ष 2004-05 में शैलेष गुप्त ‘ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन’ (ABC) की मैनेजिंग कमेटी में सबसे युवा सदस्य के रूप में चुने गए थे। वर्ष 2012-13 में वह ‘ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन’ के चेयरमैन रह चुके हैं।

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अयोध्या मामले पर नेशनल हेराल्ड ने लिख दिया कुछ ऐसा, अब मांगनी पड़ी माफी

भारतीय जनता पार्टी के विरोध जताने पर अखबार के एडिटर-इन-चीफ ने ट्वीट कर कहा, लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
National Herald Newspaper

अयोध्या मामले में शनिवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपने एक आर्टिकल को लेकर कांग्रेस के स्वामित्व वाले अंग्रेजी अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ (National Herald) ने माफी मांग ली है। इस बारे में अखबार के एडिटर-इन-चीफ की ओर से कहा गया है, ‘Why a devout Hindu will never pray at the Ram Temple in Ayodhya शीर्षक से पब्लिश आर्टिकल से यदि किसी व्यक्ति अथवा समूह की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो इसके लिए हम माफी मांगते हैं। लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं था।’

इसके साथ ही माफीनामे में यह भी कहा गया है, ‘अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का हम पूरा सम्मान करते हैं। इस आर्टिकल में जो विचार रखे गए हैं, वो लेखक के निजी विचार हैं और उनका 'नेशनल हेराल्ड' के विचारों से कोई नाता नहीं है।’

बता दें कि ‘नेशनल हेराल्ड’ के इस आर्टिकल में सुप्रीम कोर्ट की तुलना पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट से की गई थी। आर्टिकल में दावा किया गया था कि यह फैसला पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की याद दिलाता है, जिसने वहां के तत्कालीन गवर्नर जनरल गुलाम मुहम्मद को कथित तौर पर अवैध कार्य की अनुमति दे दी थी। आर्टिकल में यह भी कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने वही फैसला दिया है, जो  विश्व हिंदू परिषद् और भारतीय जनता पार्टी चाह रहे थे। हालांकि, अब अखबार ने माफी मांगने के साथ ही वेबसाइट से इस आर्टिकल को हटा दिया है।

'नेशनल हेराल्ड' में छपे आर्टिकल की हेडिंग का स्क्रीन शॉट आप यहां देख सकते हैं-

 

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इस अखबार की नजर में मक्खन जैसी हैं गाजियाबाद की सड़कें, आप क्या कहते हैं?

सोशल मीडिया पर सीएम साहब को हकीकत और छलावे के बीच का अंतर समझा रहे हैं लोग

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
Press

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर आपकी गाड़ी भले ही हिचकोले खाती चल रही हो, लेकिन सरकार की नजर में सबकुछ ठीक है। वैसे बदहाल सड़कों को ‘खुशहाल’ बताने में मीडिया भी पीछे नहीं है। उसे भी लगता है कि सपा का ‘उत्तम प्रदेश’ योगीराज में ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ बन गया है। हालांकि, पूरा का पूरा मीडिया आंख बंद करके एक दिशा में दौड़ा जा रहा है, ऐसा भी नहीं है। कुछ को सड़कों के गड्ढे भी दिखते हैं, लेकिन सरकार उन्हें देखना नहीं चाहती।

फिलहाल सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय द्वारा किए गए एक ट्वीट को लेकर चर्चा चल रही है। वैसे इसे चर्चा से ज्यादा कटाक्ष कहना बेहतर होगा, क्योंकि लोग सीएम साहब को हकीकत और छलावे के बीच का अंतर समझा रहे हैं। अब आपको भी यह सवाल बेचैन कर रहा होगा कि आखिर हमारे सीएम साहब ने ऐसा क्या लिख दिया। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार सड़कों को गड्ढों से शत प्रतिशत मुक्त करने के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है, झटका लगा क्या? कुछ ऐसा ही झटका सोशल मीडिया यूजर्स को लगा, जब उन्होंने सीएम ऑफिस का वह ट्वीट पढ़ा, जिसमें लिखा था, ‘सूबे की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के अभियान में मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी शत प्रतिशत सफल रहे हैं। एक तरह से सूबे के विकास का यह एक ऐसा फेस है, जिससे लगता है कि उत्तर प्रदेश की बराबरी में और कौन होगा’।

इस झटके की तीव्रता तब और बढ़ गई, जब ट्वीट के साथ पोस्ट किये गए एक अखबार की कटिंग पर नजर गई। अखबार का नाम है दैनिक ‘हिंट’, जो सरकार को पसंद आने वाले शब्दों में यह बयां कर रहा है कि सूबे खासकर गाजियाबाद की सड़कें मक्खन जैसी हो गई हैं। ये संपादकीय अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने लिखा है।

दैनिक ‘हिंट’ में छपे इस संपादकीय को आप यहां पढ़ सकते हैं-

संभव है अखबार ने जमीनी हकीकत जानी हो। उसके पत्रकारों ने गड्ढों वाली सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाई हों, तब इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया हो कि ‘सबकुछ ठीक’ है, लेकिन जनता को सबकुछ ठीक नहीं लग रहा। यही वजह है कि ट्विटर यूजर्स खबर लिखने वाले और सरकार के बाशिंदों को प्रदेश की सड़कों की असल स्थिति जानने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। क्या दोनों में से कोई यह चैलेंज लेगा? यह देखने वाली बात होगी।

अब जरा पढ़ लेते हैं कि लोगों को नाराज करने वाली खबर का मजमून आखिर है क्या। तो शंभूनाथ शुक्ल का पहले पेज पर प्रकाशित संपादकीय कहता है, ‘योगीजी ने जो कहा, किया...गाजियाबाद शहर में गलियों की वे सड़कें, जो वर्षों से टूटी-फूटी पड़ी थीं, और जिन पर इतने खड्डे थे कि दिन में भी लोग गिरते-पड़ते चल पाते थे, वे सब अपने योगीजी कि कृपा से ऐसी हो गई हैं कि अब लोग उन पर फर्राटा भरते हुए निकलते हैं।’ वैसे, सरकार की तारीफ यहीं खत्म नहीं होती और भी बहुत कुछ कहा गया है, लेकिन सार समझने के लिए इतना काफी है।

गाजियाबाद से प्रकाशित होने वाले दैनिक ‘हिंट’ का यह तारीफी संदेश बदहाल सड़कों की मार झेल रहे लोगों को कुछ ऐसा लगा, जैसे-अपने फिसल जाने पर खिलखिलाकर हंसते दूसरों को देखकर लगता है। लिहाजा, उन्होंने भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने केवल शब्दबाण ही नहीं दागे, बल्कि साक्ष्य स्वरूप तस्वीरें भी चस्पा कीं, ताकि खबर लिखने वाले को भी समझ आ जाए कि जिन सड़कों की बातें कही गई हैं, वो न सपा के ‘उत्तम प्रदेश’ में थीं और न ही योगी के ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ में हैं।

अनगपाल सिंह नामक यूजर ने सीएम को टैग करते हुए लिखा है, ‘आपको झूठी जानकारी दी जा रही है। यदि हकीकत देखनी है तो एक बार गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के De-Notified709b हाईवे पर आएं। यहां आठ किलोमीटर टुकडे की हालत भयंकर बनी हुई है। हर तरफ गंदगी, अतिक्रमण, गड्डे, धूल-मिट्टी, ट्रैफिक जाम है।’

वहीं दिनेश यादव ने लिखा है, ‘आओ भाजपाइयों रायबरेली घुमाएं, शरीर के सारे बल निकल जाएंगे, इतने गड्ढे हैं, यही पता नही चलता कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।’ जिस पर कटाक्ष करते हुए ओंकार नाथ यादव ने ट्वीट दागा है, ‘भाई-जब गड्ढ़े का विकास हुआ तो तालाब बन गया' गड्ढा कहां रह गया? उसका तो तालाब नाम हो गया. योगी जी की बात मे सच्चाई हैँ! गड्ढा मुक्त सड़क’।

ये महज कुछ उदाहरण हैं कि किस तरह लोगों को दैनिक ‘हिंट’ का यह संपादकीय पसंद नहीं आया, जिसे अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने लिखा है। आम जनता के अलावा, राजनेताओं ने भी इस संपादकीय पर तीखे बाण चलाये। इस दौड़ में सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह सबसे आगे रहे। आईपी सिंह ने सीएम कार्यालय के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘कैसा ‘ओछा’ अखबार चुना है @myogiadityanath जी को खुश करने के लिए। इस अखबार का संपादक भी इसे नहीं पढ़ता होगा। व्यक्ति नहीं तो सीएम पद की ही इज्जत रखते। मुख्यमंत्री का मजाक उनका ही आधिकारिक अकाउंट बना रहा है। बाकियों ने झूठ छापने से मना कर दिया?’

हालांकि, विरोध में अव्वल आने की जद्दोजहद में आईपी सिंह जिन शब्दों का प्रयोग कर बैठे, वो भी ट्विटर यूजर्स को नागवार गुजरे हैं। कई लोगों ने उन्हें भाषा पर संयम रखने की नसीहत दी है। 

 

 

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कैसे रहे प्रमुख हिंदी अखबारों के फ्रंट पेज, पढ़ें यहां

अमर उजाला के फ्रंट पेज पर आज कोई विज्ञापन नहीं है। हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है, जबकि दैनिक भास्कर में फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन है।

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
Newspaper

राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब सरकार आगे की प्रक्रिया तय करने में जुट गई है। इसी तैयारी को दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों ने प्रमुखता से लगाया है। शुरुआत आज ‘दैनिक भास्कर’ से करते हैं। अखबार के फ्रंट पेज पर नजर डालें तो लीड अयोध्या है। जिसे ‘राम मंदिर की नींव हिंदू नववर्ष या रामनवमी पर’ शीर्षक के साथ टॉप के छह कॉलम में सजाया गया है। इसके पास ही बांग्लादेश पर टीम इंडिया की जीत को फोटो के साथ रखा गया है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन के समाचार को दैनिक भास्कर ने दो कॉलम में लगाया है।

इसके अलावा, महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को भी प्रमुखता मिली है। वहीं, नवजोत सिंह सिद्धू की नई परेशानी भी पेज पर है। हालांकि, इस परेशानी को खुद सिद्धू ने ही आमंत्रित किया है। सिद्धू साहब ने फिर से अपने क्रिकेटर मित्र और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं और उनके इस पाक प्रेम पर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया है। साथ ही देश की पहली प्राइवेट ट्रेन ‘तेजस’ की कमाई भी सिंगल के रूप में पेज पर है। ‘तेजस’ ने एक महीने में 70 लाख रुपए कमाए हैं।

आज ‘हिन्दुस्तान’ में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। इस फ्रंट पेज पर भी दो बड़े विज्ञापन हैं, लेकिन फिर भी अच्छी-खासी खबरों की गुंजाइश बन गई है। लीड अयोध्या है, जिसके मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट का गठन इसी महीने किया जाएगा। पेज पर अयोध्या फैसले के बाद देश में कायम सद्भावना को दर्शाती एक फोटो भी है। जुलूस-ए-मोहम्मदी के मौके पर कानपुर में हिंदुओं ने फूल बरसाकर मुस्लिमों का स्वागत किया। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन की खबर के साथ ही महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को भी प्रमुखता से जगह दी गई है। इसके अलावा, वकीलों का हड़ताली हठ और महिला क्रिकेटर शैफाली की उपलब्धि को भी ‘हिन्दुस्तान’ ने फ्रंट पेज पर रखा है।

वहीं, अमर उजाला में फ्रंट पेज पर एक भी विज्ञापन नहीं होने की वजह से अखबार की टीम को मनमुताबिक ढंग से पेज सजाने का पूरा मौका मिला। टॉप बॉक्स में ‘भाईचारे का संदेश देगा राम मंदिर पर बनने वाला ट्रस्ट’ शीर्षक के साथ अयोध्या को रखा गया है। अपनी बाईलाइन में हिमांशु मिश्र ने बताया है कि ट्रस्ट में मुस्लिम प्रतिनिधित्व भी संभव है। इसके पास ही पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन का समाचार है। चुनाव आयोग की असल ताकत का अहसास शेषन ने ही कराया था। लीड महाराष्ट्र का सियासी संग्राम है। भाजपा और शिवसेना के औपचारिक रिश्ते का आखिरकार अंत होता नजर आ रहा है। शिवसेना अपने पुराने सहयोगी को 'तलाक' देकर नया साथी तलाश रही है। 

बांग्लादेश से सीरीज जीतने वाली टीम इंडिया को भी फ्रंट पेज पर जगह मिली है। इसके साथ ही महिला क्रिकेटर शैफाली की उपलब्धि को भी लगाया गया है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ते हुए टी-20 में 49 गेंदों में 73 रन बनाये हैं। स्विस बैंक में 1955 से अब तक 3500 खाते निष्क्रिय पड़े हैं, जिनमें से 10 से ज्यादा भारतीयों के भी हैं। इस खबर को प्रमुखता के साथ लगाया गया है। वहीं, वकील-पुलिस विवाद फिर सुर्खियों में है। निचली अदालतों में वकील आज से फिर कामकाज ठप करेंगे। एंकर में दिल्ली की बिगड़ती हवा है। खबर बताती है कि ऑड-ईवन से छूट मिलते ही राजधानी की हवा फिर से खराब हो गई। इसके अलावा, पेज पर अयोध्या फैसले को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट डालने वाले 90 लोगों की गिरफ्तारी का समाचार भी है।

अब ‘नवभारत टाइम्स’ की बात करें तो फ्रंट पेज पर काफी विज्ञापन है। लीड अयोध्या है, जिसे 'राम नवमी से पहले मंदिर का शिलान्यास' शीर्षक से पूरे सात कॉलम में लगाया गया है। इसमें ट्रस्ट की रूपरेखा तैयार करने के पीएम के निर्देश के साथ ही कार्यशाला में शुरू होने वाले काम को रखा गया है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन की खबर को भी फ्रंट पेज पर जगह दी गई है। बांग्लादेश पर भारत की जीत से जुड़े क्रिकेट के समाचार को भी फोटो के साथ पेज पर रखा गया है। अखबार ने महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को दो कॉलम में लगाया है, वहीं पेज पर करतारपुर से जुड़ी खबर भी है। कुछ समाचार संक्षिप्त में भी हैं।

आखिर में अब ‘दैनिक जागरण’ का रुख करते हैं। अखबार में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। इस फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं। खास बात यह है कि आज इस अखबार ने महज दो-तीन खबरों में फ्रंट पेज समाप्त करने का प्रयास नहीं किया है। पेज पर चार बड़ी और दो सिंगल खबरें लगाई हैं। लीड अयोध्या है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की धर्मगुरुओं के साथ हुई बैठक की फोटो के साथ लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर महाराष्ट्र का सियासी संग्राम है। भाजपा के पीछे हटने के बाद अब राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार बनाने का न्यौता दिया है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे पर छह लोगों की मौत, एच1 वीजा धारक भारतीयों को अमेरिका द्वारा मिली छूट, टीएन शेषन का निधन और बांग्लादेश पर टीम इंडिया की जीत का समाचार भी पेज पर है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: सबसे पहले बात लेआउट की। ‘अमर उजाला’ को छोड़कर बाकी सभी अखबारों में लगभग आधा पेज विज्ञापन है, इसलिए ले-आउट पर ज्यादा कुछ कहना संभव नहीं। फिर भी ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर सभी के फ्रंट पेज आकर्षक दिखाई दे रहे हैं।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘दैनिक भास्कर’ बेहतर हैं। हालांकि, ‘अमर उजाला’ का फ्रंट पेज भी अच्छा लग रहा है, लेकिन पहले जैसा नहीं है।

3: कलात्मक शीर्षक पर आज किसी भी अखबार ने जोर नहीं दिया है।

4: खबरों की बात करें तो ‘सभी अखबार लगभग एक समान हैं। 

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अयोध्या पर 'सुप्रीम' फैसले को लेकर आज अखबारों में कुछ यूं रही कवरेज

आज अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान ने फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं लिया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Sunday, 10 November, 2019
Last Modified:
Sunday, 10 November, 2019
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अयोध्या विवाद आखिरकार सुलझ गया है। लंबे समय से अदालती कार्यवाही में उलझी विवादित जमीन के ‘असली मालिक’ की पहचान सुप्रीम कोर्ट ने कर दी है। खास बात यह है कि इस ऐतिहासिक फैसले को सभी पक्षों द्वारा स्वीकार किया गया है। फैसला सामने आने के बाद जिस तरह का सौहार्दपूर्ण माहौल देश में देखने को मिला, वह अपने आप में अहम है। इस अहम दिन की मीडिया ने भी खास तैयारी की थी, जिसके परिणाम आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों में नजर आ रहे हैं। आमतौर पर महत्वपूर्ण अवसरों पर अखबारों के फ्रंट पेज विज्ञापनों से पटे रहते हैं। कंपनियों को भी ऐसे ही मौकों की तलाश रहती है, लेकिन अयोध्या के ऐतिहासिक फैसले को विस्तार से पाठकों तक पहुंचाने के लिए अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान ने फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं लिया है, जो काबिल-ए-तारीफ है। हालांकि, शेष अहम खबरों के लिए बनाये गए दूसरे फ्रंट पेज पर जरूर कुछ अखबारों में विज्ञापन हैं। 

शुरुआत करते हैं हिन्दुस्तान से। लीड को एक तरह से मास्टहेड से ही शुरू कर दिया गया है। यानी अखबार के ‘लोगो’ के बैकग्राउंड में अयोध्या की बड़ी फोटो है, जिसके नीचे ‘राम मंदिर का रास्ता साफ’ शीर्षक तले खबर को लगाया गया है। फैसले से जुड़ी चार प्रमुख बातों को अलग से रेखांकित किया गया है, ताकि एक ही नजर में पाठकों को फैसला समझ आ जाए। हिंदू-मुस्लिम पक्षों की प्रतिक्रिया, पीएम मोदी सहित प्रमुख हस्तियों के बयान के साथ फैसले पर टिकी यूपी सरकार की निगाहों को भी पेज पर रखा गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कंट्रोल रूम में बैठकर सुरक्षा संबंधी तैयारियों की समीक्षा करते रहे। एंकर में हेमंत श्रीवास्तव और आदर्श शुक्ल की बाईलाइन है, जिन्होंने फैसले के बाद अयोध्या के हालातों पर अपनी कलम चलाई है। इसके अलावा, पांचवें पेज को भी फ्रंट पेज बनाया गया है, जिसकी लीड भी अयोध्या है। ‘मस्जिद के लिए मुनासिब भूमि मिले’ शीर्षक के साथ लीड में मुस्लिम पक्ष से जुड़े फैसले को विस्तार से समझाया गया है। श्रद्धालुओं का पहला जत्था करतारपुर रवाना, इस समाचार को भी पेज पर जगह दी गई है।

अब रुख करते हैं अमर उजाला का। फ्रंट पेज की शुरुआत 30 साल पुराने फोटो से की गई है। हालांकि, इसे मास्टहेड से लगाने के बजाय मास्टहेड को छोटा कर दिया गया है। इस फोटो ने पेज को इसलिए भी खास बना दिया है, क्योंकि 30 वर्ष पूर्व 9 नवंबर को ही रामजन्मभूमि का शिलान्यास हुआ था और 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। लीड का शीर्षक है ‘रामलला विराजमान’ और इसमें सभी महत्वपूर्ण बातों को अलग से रेखांकित किया गया है।

'अमर उजाला' ने ‘हिन्दुस्तान’ से इतर लीड में फैसला सुनाने वाले जजों की फोटो को भी जगह दी है। इसके साथ ही दोनों पक्षों सहित प्रमुख हस्तियों की प्रतिक्रियाओं को भी रखा गया है। पांचवें पेज पर बने दूसरे फ्रंट पेज के टॉप बॉक्स पर अयोध्या के फैसले पर पीएम मोदी के बयान को सजाया गया है। जिसका शीर्षक है ‘आज ही बर्लिन की दीवार गिरी थी, यह तारीख साथ बढ़ने की सीख’। इसके साथ ही अयोध्या पर पाकिस्तान की बौखलाहट भी पेज पर है। पाक के विदेशमंत्री कुरैशी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मोदी सरकार की कट्टरता को झलकाता है। हालांकि, भारत ने भी कुरैशी को करार जवाब दिया है। लीड करतारपुर रवाना हुआ श्रद्धालुओं का पहला जत्था है। इसके अलावा, पेज पर महाराष्ट्र का सियासी संग्राम, फरीदाबाद में परिवार की हत्या और एंकर में दिल्ली के प्रदूषण को लगाया गया है।

नवभारत टाइम्स ने ‘मंदिर वहीं, मस्जिद नई’ शीर्षक के साथ लीड अयोध्या फैसले को लगाया है। लीड में सद्भावना की मिसाल दर्शाती दो तस्वीरें हैं, साथ ही सोशल मीडिया पर फैसले से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को भी जगह मिली है। इसके अलावा, फैसले के सियासी और सामाजिक असर को भी समझाने का खूबसूरत प्रयास किया गया है। सबसे नीचे अहम सवालों पर कोर्ट के जवाब हैं।

दूसरे फ्रंट पेज की लीड भी अयोध्या है, जिसे आकर्षक शीर्षक ‘मंदिर निर्माण के वास्ते, कोर्ट ने तय किए रास्ते’ के साथ फोटो सहित रखा गया है। करतारपुर गलियारे के उद्घाटन और अयोध्या पर पाकिस्तानी बौखलाहट को पेज पर बड़ी जगह मिली है। साथ ही फैसले पर मुस्लिम पक्ष की अलग-अलग राय से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जहां फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने के संकेत दिए हैं, वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने फैसले को चुनौती देने से इनकार किया है।

वहीं, दैनिक जागरण की बात करें तो खूबसूरत इलस्ट्रेशन के साथ लीड को सजाया गया है। इसमें भगवान राम और प्रस्तावित मंदिर नजर आ रहे हैं। शीर्षक ‘श्रीराम’ तले खबर को विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा गया है, लेकिन अच्छी बात यह है कि बड़े-बड़े पैरा के बजाय पॉइंटर को तवज्जो दी गई है। इसी में प्रमुख हस्तियों की प्रतिक्रिया भी शामिल है।

दूसरे फ्रंट पेज पर भी अयोध्या ही लीड है। खबर का शीर्षक ‘मंदिर वहीं बनेगा’ है, जो हिंदू पक्ष की सालों पुरानी इच्छा को दर्शाता है। फैसले पर मुस्लिम पक्ष में मतभेद और वरिष्ठ वकील परासरन की दलीलों को भी पेज पर रखा गया है। परासरन ने अदालत के समक्ष जो दलीलें रखी थीं, उन्हीं के आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है। एंकर में करतारपुर गलियारे का उद्घाटन है, जिसे आकर्षक हेडलाइन ’72 साल की अरदास पूरी, करतारपुर साहिब के हुए दर्शन’ के साथ मोदी-मनमोहन की फोटो सहित सजाया गया है।

आखिर में दैनिक भास्कर को देखें तो अखबार ने आज ‘रामलला ही विराजमान’ शीर्षक के साथ लीड को सजाया है। यह शीर्षक ‘अमर उजाला’ से काफी मिलता जुलता है। फैसले की 4 बड़ी बातों को अलग से रेखांकित किया गया है। इसके अलावा, फैसला सुनाने वाले जजों की प्रतिक्रिया को फोटो के साथ रखा गया है।

दैनिक भास्कर ने थोड़ा आगे बढ़ते हुए यह भी बताने का प्रयास किया है कि कितने कारीगर लगाने से कितने वर्षों में मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। लीड में फोटो के बजाय प्रस्तावित राम मंदिर का इलस्ट्रेशन लगाया गया है। इसके साथ ही एएसआई की उस रिपोर्ट को भी पाठकों के समक्ष रखा गया है, जिसने फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: आज सबसे पहले बात कलात्मक शीर्षक की। प्रयोग सभी अखबारों ने किये हैं, लेकिन ताज ‘नवभारत टाइम्स’ को पहनाया जा सकता है। पहले पेज की हेडलाइन है ‘मंदिर वहीं, मस्जिद नई’ जो दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व करती है। कम शब्दों में पूरी बात कहने का इससे अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता। दूसरे पेज की हेडिंग ‘मंदिर निर्माण के वास्ते, कोर्ट ने तय किये रास्ते’ तुकबंदी दर्शाती है।   

2: लेआउट के लिहाज से ‘दैनिक भास्कर’ बेहतर नजर आ रहा है। अखबार का फ्रंट पेज काफी खुला-खुला है।

3: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो सभी अखबारों ने बेहतरीन काम किया है, लेकिन ‘अमर उजाला’ थोड़ा आगे है। लीड की प्रस्तुति काफी आकर्षक दिखाई दे रही है।

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आज कुछ ऐसे नजर आ रहे हैं प्रमुख अखबारों के फ्रंट पेज

विज्ञापनों की अधिकता की वजह से नवभारत टाइम्स में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं जबकि हिन्दुस्तान में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Friday, 08 November, 2019
Last Modified:
Friday, 08 November, 2019
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दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों ने आज अयोध्या विवाद और पाकिस्तान की पैंतरेबाजी को प्रमुखता से लगाया है। अयोध्या विवाद में जहां कभी भी फैसला आ सकता है, वहीं पाकिस्तानी सेना ने करतारपुर जाने वाले भारतीयों के लिए पासपोर्ट अनिवार्य कर दिया है। आज सबसे पहले बात करते हैं अमर उजाला की। लीड पाकिस्तान है, जिसे चार कॉलम में सजाया गया है और इसी में मनमोहन सिंह की करतारपुर यात्रा को भी जगह मिली है। पाकिस्तान में सेना बड़ी है या सरकार, यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है। इमरान खान सरकार ने पासपोर्ट की अनिवार्यता से इनकार किया है, जबकि सेना चाहती है कि भारतीयों को पासपोर्ट के बिना एंट्री न मिले। अब इस लड़ाई में जीत किसकी होती है, ये तो वक्त ही बताएगा।

दूसरी बड़ी खबर के रूप में अयोध्या विवाद है, जिसका शीर्षक है ‘अयोध्या पर फैसले की घड़ी, गृहमंत्रालय ने राज्यों को किया अलर्ट’। वहीं, घाटी के मुद्दे को कोर्ट में ले जाना कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को बेहद भारी पड़ा है। अदालत ने उन्हें जमकर फटकार लगाते हुए पूछा है कि क्या दंगा भड़कने के बाद प्रतिबंध लगाए जाते? इस खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से लगाया है, जबकि कश्मीर में बर्फबारी को फोटो के रूप में जगह मिली है। दुःख की बात यह है कि बर्फबारी में दो जवानों सहित सात लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा, वकील-पुलिस कांड का एक और विडियो सामने आया है, जिससे जुड़ी खबर को दो कॉलम में रखा गया है। खबर के अनुसार, डीसीपी मोनिका भारद्वाज के साथ बदसलूकी की गई थी। वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे की मुश्किलों को भी पेज पर जगह मिली है। ईडी ने अपने आरोपपत्र में बताया है कि राहुल पुरी ने हेलीकाप्टर घोटाले के आरोपितों को धमकाया था। एंकर में नेपाली गुस्से को रखा गया है। दरअसल, नेपाल ने भारत के नए नक्शे पर एतराज जताते हुए उत्तराखंड के कुछ हिस्सों पर दावा किया है। इसके अलावा, भारत-बांग्लादेश टी-20 में रोहित शर्मा की धमाकेदार पारी की खबर को पहले कॉलम में लगाया गया है।

अब रुख करते हैं दैनिक जागरण का। लीड करतारपुर पर पाकिस्तानी पैंतरेबाजी है, जिसे छह कॉलम में करतारपुर गुरुद्वारे की फोटो के साथ लगाया गया है। अयोध्या पर गृह मंत्रालय की एडवाइजरी सिंगल कॉलम बॉक्स में है। महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को आज भी बड़ी जगह मिली है, साथ ही गुलाम नबी को मिली कोर्ट की फटकार को भी प्रमुखता से लगाया गया है। दैनिक जागरण ने क्रिकेट को संक्षिप्त में भी जगह नहीं दी है, हालांकि कमलनाथ के भांजे से जुड़ी खबर को जरूर पेज पर रखा गया है।

दैनिक भास्कर की बात करें तो पेज की शुरुआत टॉप बॉक्स से हुई है, जिसमें अयोध्या मामले को रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले सरकार ने नफरत फैलाने वाले 20 लाख वॉट्सऐप ग्रुप बंद कराये हैं। लीड महाराष्ट्र का सियासी संग्राम है। यदि राज्य में भाजपा-शिवसेना का झगड़ा नहीं सुलझा तो राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ सकता है, क्योंकि नई सरकार के गठन के लिए महज दो दिन ही शेष हैं। दैनिक भास्कर ने क्रिकेट को काफी तवज्जो दी है। हालांकि, इसमें सिर्फ पुरुष टीम ही नहीं महिला खिलाड़ी मंधाना की उपलब्धि को भी जगह मिली है। स्मृति मंधाना सबसे तेज रन बनाने वाली खिलाड़ी बन गई हैं। उन्होंने 21 पारियों में 2000 रन बनाकर विराट कोहली को भी पीछे छोड़ दिया है। वहीं, रोहित शर्मा ने बांग्लादेश के खिलाफ मैच में धमाकेदार पारी खेली और इस तरह वह टी-20 में 25 हजार से ज्यादा रन बनाने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं।

करतारपुर विवाद को पेज के सेकंड हाफ में रखा गया है। इसके अलावा, वकील-पुलिस विवाद, कश्मीर में बर्फ़बारी, पाकिस्तान में हिंदू छात्रा से दुष्कर्म और नीरव मोदी की धमकी को भी पेज पर जगह मिली है। पाक में 16 सितंबर को जिस हिंदू छात्रा की हत्या हॉस्टल में की गई थी, उसके साथ दुष्कर्म की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। वहीं, नीरव मोदी ने कहा है कि यदि उसे भारत भेजा जाता है तो वो खुदकुशी कर लेगा। एंकर में दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट है। इसमें बताया गया है कि किस तरह पाकिस्तानी एजेंसी सेवानिवृत्त सैनिकों के फर्जी प्रोफाइल बनाकर फैजियों को फंसा रही है।

आज नवभारत टाइम्स में विज्ञापनों की भरमार है, जिस वजह से दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं। पहले फ्रंट पेज की बात करें तो टॉप बॉक्स में वकील-पुलिस विवाद सुलझाने की नाकाम कोशिश को रखा गया है, जबकि लीड करतारपुर पर पाकिस्तान की पैंतरेबाजी है। हाई कोर्ट के आदेश पर वकील और पुलिस के बीच बातचीत से विवाद निपटाने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं बनी। दूसरे फ्रंट पेज पर टॉप बॉक्स में फोटो न्यूज हैं। पहली फोटो दिल्ली के प्रदूषण को दर्शाती है और दूसरी कश्मीर की बर्फबारी की है। लीड सबसे अलग रियल एस्टेट सेक्टर को मिली राहत में कटौती है। सरकार ने साफ किया है कि कोर्ट में जिन बिल्डरों पर केस चल रहा है, उन्हें राहत नहीं मिलेगी। यानी आम्रपाली, यूनिटेक और जेपी के प्रोजेक्ट के लिए पैसे नहीं मिलेंगे।

इसके नीचे तीन खबरों को एक-एक कॉलम में लगाया गया है। इनमें अयोध्या विवाद, महाराष्ट्र का सियासी संकट और दिल्ली हवाईअड्डे पर यात्रियों को मिली सुविधा शामिल है। अब यात्रियों को जांच के लिए अपने लैपटॉप को बैग से बाहर नहीं निकालना पड़ेगा। वहीं, एंकर में एक विवादस्पद विज्ञापन है। दरअसल आईआरसीटीसी से जुड़े एक निजी ठेकेदार ने रेलवे में नौकरियों के संबंध में एक विज्ञापन जारी किया, जिसमें कहा गया कि आवेदक अग्रवाल वैश्य समाज के होने चाहिए। अब जातिगत आधार पर इस तरह नौकरियां बांटी जाएंगी तो हंगामा लाजमी है। बात जब बढ़ी तो फटकार का दौर शुरू हुआ और ठेकेदार को माफी मांगनी पड़ी। वहीं, भारत-बांग्लादेश मैच को संक्षिप्त में जगह मिली है। नवभारत टाइम्स के पहले फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन होने के कारण खबरों वाला भाग ही शो हो रहा है, इसलिए यहां पर खबरों वाले भाग को ही लगाया गया है जबकि दूसरा फ्रंट पेज पूरा शो हो रहा है। 

आखिर में आज हिन्दुस्तान को देखें तो अखबार में विज्ञापनों के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड अयोध्या है, जबकि दिल्ली में मिली सस्ती प्याज को दूसरी बड़ी खबर की तरह पेश किया गया है। राजधानी में कल कई जगहों पर सस्ती प्याज उपलब्ध कराई गई, जिसे लेने के लिए लोगों की कतारें लगी रहीं। करतारपुर विवाद को भी अखबार ने प्रमुखता से रखा है, साथ ही महाराष्ट्र का सियासी संग्राम भी पेज पर है। महारष्ट्र में शिवसेना और भाजपा का रिश्ता 'तलाक' के मोड़ पर पहुंच चुका है और सबकी निगाहें अब राज्यपाल पर हैं। वैसे, ये कोई पहला मौका नहीं हैं। दोनों पार्टियां पहले भी आपस में लड़ती रही हैं। दिल्ली की जहरीली हवा को आज एंकर में रखा गया है। खबर के अनुसार, बारिश के बावजूद दिल्ली को प्रदूषण से राहत नहीं मिली है। इसके अलावा, पेज पर चार सिंगल समाचार हैं, लेकिन क्रिकेट और कमलनाथ के भांजे को जगह नहीं मिली है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के नजरिये से आज अमर उजाला अव्वल है, वहीं नवभारत टाइम्स ने भी सीमित जगह में अच्छा फ्रंट पेज तैयार किया है। दैनिक भास्कर की बात करें तो फ्रंट पेज बीते कुछ दिनों से टाइप्ड दिखाई दे रहा है। खासकर, बॉटम में कुछ नया करने का प्रयास नहीं किया जा रहा। कभी एंकर और दो कॉलम या उनके बीच में सिंगल बस यही रहता है।

2: खबरों की प्रस्तुति में जरूर दैनिक भास्कर का नंबर अमर उजाला के साथ आता है। दोनों ही अखबारों ने बेहद खूबसूरती से फ्रंट पेज पर खबरों को सजाया है।

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में आज सभी अखबार एक जैसे हैं, किसी ने भी हेडलाइन में कोई प्रयोग नहीं किया है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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फ्रंट पेज पर अखबारों ने आज इन खबरों को 'सजाया'

दैनिक जागरण व दैनिक भास्कर में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं। हिन्दुस्तान में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Thursday, 07 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 07 November, 2019
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मंदी से जूझ रहे रियल एस्टेट सेक्टर में जान फूंकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है, जिसका फायदा जनता को भी मिलेगा। इसके साथ ही प्रदूषण पर राज्य सरकारों की ‘क्लास’ जारी है। इन्हीं दोनों खबरों को आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों ने प्रमुखता से उठाया है। शुरुआत करते हैं दैनिक जागरण से। अखबार में आज दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं। पहले पेज की लीड प्रदूषण है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिवों को जमकर फटकार लगाई है। पेज पर दूसरी खबर के रूप में चिन्मयानन्द हैं, जिनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो गई है।

दूसरे फ्रंट पेज का रुख करें, तो यहां टॉप बॉक्स में रियल एस्टेट सेक्टर को मिली राहत है। अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए सरकार 25 हजार करोड़ रुपए का फंड बनाने जा रही है। इस पेज पर लीड वकील-पुलिस भिड़ंत पर हाई कोर्ट का रुख है। हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं होगी। पेज पर करतारपुर से संबंधित खबर को भी जगह मिली है। कॉरिडोर के उद्घाटन के मौके पर जो पोस्टर लगाये गए थे, उसमें भिंडरवाला सहित 3 आतंकियों की तस्वीर दिखाई दे रही थी। इसके अलावा, पेज पर कुछ संक्षिप्त समाचार भी हैं।

आज दैनिक भास्कर में भी दैनिक जागरण की तरह दो फ्रंट पेज हैं। पहले पेज पर रियल एस्टेट को मिली राहत को लीड रखा गया है और दूसरी बड़ी खबर के रूप में महाराष्ट्र के सियासी संग्राम पर शिवसेना नेता संजय राउत से संजय आप्टे की बातचीत है। वाराणसी के एक मंदिर की फोटो भी पेज पर है, जिसमें भगवान की मूर्ति को मास्क लगाये दिखाया गया है। इसके साथ ही निर्भया कांड में आए ताजा अपडेट को भी जगह मिली है। एक दोषी द्वारा राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी गई है।

दूसरे फ्रंट पेज को देखें तो दिल्ली के प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को लीड का दर्जा मिला है। वहीं वकील-पुलिस भिड़ंत को भी काफी बड़ी जगह दी गई है। इसके अलावा, चिन्मयानन्द के खिलाफ चार्जशीट, हनीप्रीत को मिली जमानत की खबरें भी पेज पर हैं। करतारपुर मुद्दे को दैनिक भास्कर ने सबसे अलग अंदाज में उठाया है। खबर के अनुसार, पाकिस्तान पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को बॉर्डर से करतारपुर तक खुली जीप में ले जाएगा। भारत जेड प्लस श्रेणी के बराबर सुरक्षा की मांग कर रहा है। इसी खबर में खालिस्तानी पोस्टरों को भी रखा गया है। प्याज की बढ़ती कीमतों से दैनिक भास्कर ने ज्यादा सरोकार नहीं रखते हुए इस खबर को संक्षिप्त में जगह दी है।

अब नवभारत टाइम्स की बात करें तो आज भी फ्रंट पेज पर ज्यादा जगह नहीं है। पेज की शुरुआत टॉप बॉक्स से हुई है, जिसमें रियल एस्टेट सेक्टर को मिली राहत को ‘घर अटका है? अब मिलने के बन रहे हैं चांस’ शीर्षक के साथ लगाया गया है। लीड प्रदूषण पर राज्य सरकारों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई फटकार है। इसके पास ही वकील-पुलिस भिड़ंत से जुड़ा समाचार है, जबकि करतारपुर में खालिस्तानी पोस्टर को टॉप में रखा गया है। इसके अलावा, ‘फास्ट न्यूज’ में तीन संक्षिप्त समाचार हैं।

हिन्दुस्तान का रुख करें तो तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। इस पेज पर आज भी दो बड़े विज्ञापन हैं, इसके बावजूद महत्वपूर्ण समाचारों को किसी न किसी रूप में पेज पर रखने का प्रयास किया गया है। लीड वकील-पुलिस भिड़ंत है। हाई कोर्ट ने विवाद न बढ़ाने की अपील करते हुए मामले को सुलझाने के लिए संयुक्त बैठक बुलाने को कहा है। रियल एस्टेट सेक्टर को मिली सरकारी राहत को ऊपर तीन कॉलम में रखा गया है। प्रदूषण पर अफसरों को मिली फटकार को भी प्रमुखता से जगह मिली है। गौरव त्यागी और ब्रिजेश सिंह की बाईलाइन स्टोरी भी पेज पर है, जिसके अनुसार अंगूठे की छाप से मेट्रो के किराये में रियायत मिलेगी। इसके अलावा, जेपी की दिवाला प्रक्रिया शुरू करने संबंधी आदेश सहित कुछ सिंगल समाचार भी हैं।

आज आखिर में अमर उजाला को देखें तो अखबार ने फ्रंट पेज की शुरुआत टॉप बॉक्स से की है, जिसमें प्रदूषण पर कोर्ट की फटकार को रखा गया है। रियल एस्टेट सेक्टर को मिली राहत लीड है और वकील-पुलिस भिड़ंत को दो कॉलम में लगाया गया है। दिल्ली-एनसीआर में आंसू निकालती प्याज को अमर उजाला ने प्रमुखता दी है। वहीं, मनमानी पर उतारू स्कूलों पर कसी नकेल को भी फ्रंट पेज पर रखा गया है। राजधानी के 12 स्कूलों को 9 फीसदी ब्याज के साथ बढ़ी हुई फीस लौटाने के आदेश दिए गए हैं। एंकर में करतारपुर पर पाकिस्तानी करतूत है, जबकि चिन्मयानन्द को संक्षिप्त में जगह दी गई है।         

आज का ‘किंग’ कौन?

1: सबसे पहले बात लेआउट की। सीमित जगह होने के बावजूद हिन्दुस्तान ने अच्छा फ्रंट पेज लगाया है। वहीं, दैनिक भास्कर और अमर उजाला के फ्रंट पेज का लेआउट भी संतुलित है। 

2: खबरों की प्रस्तुति में अमर उजाला सबसे आगे नजर आ रहा है।

3: कलात्मक शीर्षक की बात करें तो यह केवल नवभारत टाइम्स में ही दिखाई दे रहा है। टॉप बॉक्स की हेडलाइन ‘घर अटका है? अब मिलने के बन रहे हैं चांस’ आकर्षक है और सीधे तौर पर जनता से जुड़ाव रखती है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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किस अखबार के फ्रंट पेज पर आज क्या है खास, जानें यहां

दैनिक भास्कर और अमर उजाला के फ्रंट पेज पर आज कोई विज्ञापन नहीं है, वहीं हिन्दुस्तान में आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Wednesday, 06 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 06 November, 2019
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कानून की रक्षा करने वाली पुलिस ही जब इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर आये तो हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वकीलों की आक्रामकता से नाराज दिल्ली के पुलिसकर्मियों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। ये पहली बार है जब पुलिसकर्मी इस तरह न्याय की मांग के लिए एकजुट हुए। लिहाजा यह घटना आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की प्रमुख खबर है।

आज सबसे पहले बात करते हैं दैनिक भास्कर की। अखबार के फ्रंट पेज पर आज कोई विज्ञापन नहीं है। लीड मास्टहेड से शुरू की गई है, यानी ऊपर फोटो है और उसके नीचे आठ कॉलम खबर। ‘सुरक्षा ने दिखाया बल’ शीर्षक के साथ दिल्ली पुलिस के प्रदर्शन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात को इसमें शामिल किया गया है। जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती को आज भी प्रमुखता मिली है, जबकि बैंक धोखाधड़ी में सीबीआई के छापों को तीन कॉलम में रखा गया है। पेज पर रोहतांग में बर्फबारी का एक फोटो भी है। इसके अलावा, पीएमसी बैंक के ग्राहक अब 50 हजार रुपए निकाल सकेंगे, आप के 11 विधायकों को योग्य ठहराने संबंधी याचिका खारिज और गैस्ट्रिक दवाओं के रेपर पर लिखना होगा–खाने से किडनी पर असर का खतरा, ये समाचार सिंगल कॉलम में हैं। एंकर में भारतवंशी वैज्ञानिक पंकज की महत्वपूर्ण खोज को सजाया गया है। पंकज ने थ्रीडी प्रिंटिंग से सजीव त्वचा तैयार की है।

आज नवभारत टाइम्स के फ्रंट पेज पर काफी विज्ञापन है। इस वजह से मात्र चार समाचार ही पेज पर लग सके हैं। लीड दिल्ली पुलिस है, जिसे फोटो के साथ ‘वर्दी ने मांगा इंसाफ’ शीर्षक तले लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर के रूप में जहरीली हवा पर कोर्ट की नाराजगी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदूषण के चलते कोई राजधानी छोड़े, ये मंजूर नहीं। अब देखना यह है कि अदालत की फटकार कितना असर दिखा पाती है। आमतौर पर सरकारी एजेंसियां कुछ समय तक सक्रियता दिखाती हैं और फिर चादर तानकर स्थिति के बिगड़ने का इंतजार करती हैं। इसके अलावा, दिल्ली में चढ़ते प्याज के दाम और हिंडन हवाई अड्डे से हुबली के लिए सीधी उड़ान से जुड़ी खबर को सिंगल कॉलम में जगह मिली है।

वहीं, हिन्दुस्तान में आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड दिल्ली पुलिस का प्रदर्शन है, जिसे काफी विस्तार के साथ लगभग आधा पेज जगह दी गई है। बैंक धोखाधड़ी में सीबीआई ने 190 जगहों पर छापेमारी की, इस खबर को प्रमुखता के साथ लगाया गया है। दिल्ली में प्रदूषण फैलाने पर 10 लोगों की गिरफ्तारी से जुड़ी खबर दो कॉलम में है। एंकर में वकील-पुलिस विवाद पर जस्टिस एस.एन. धींगरा की त्वरित टिप्पणी है, जिसे पढ़ा जाना चाहिए। जस्टिस धींगरा ने ऐसे मामलों में अदालतों की मजबूरी को बयां किया है।

अमर उजाला के फ्रंट पेज पर भी कोई विज्ञापन नहीं है। लीड को पूरे सात कॉलम मिले हैं, जिसका शीर्षक ‘दिल्ली में खाकी की बगावत’ पूरी कहानी बयां कर रहा है। बैंक धोखाधड़ी में सीबीआई छापों के साथ ही आप विधायकों को मिली राहत को अमर उजाला ने प्रमुखता से लगाया है। आप के 11 सदस्यों की सदस्यता रद्द नहीं होगी। सबसे बड़ी ट्रेड डील से भारत के पीछे हटने के बाद चीन के रुख में नरमी आई है। चीन भारत से इस विषय में बातचीत करना चाहता है, इस खबर को दो कॉलम में रखा गया है। एंकर में दिल्ली का प्रदूषण है। एनजीटी का कहना है कि वायु प्रदूषण कानून की लगातार अनदेखी का नतीजा है। इसके अलावा, पेज पर श्रीनगर में पेट्रोल बम हमला और पीएफ घोटाले में पूर्व एमडी की गिरफ्तारी की खबर भी है। वहीं, पीएमसी बैंक के ग्राहकों को मिली राहत को संक्षिप्त में जगह मिली है।

अब दैनिक जागरण का रुख करें तो आज अखबार के फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं।  नतीजतन महज दो बड़ी खबरें ही लगाई जा सकी हैं। ‘इंसाफ मांगने के लिए सड़क पर उतरी दिल्ली पुलिस’ इस शीर्षक के साथ लीड को लगभग आधा पेज जगह दी गई है। दूसरी खबर के रूप में बैंक धोखाधड़ी में सीबीआई के छापे हैं, इसके अलावा संक्षिप्त में तीन खबरों को लगाया गया है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: अमर उजाला, दैनिक भास्कर के साथ-साथ हिन्दुस्तान का लेआउट भी आकर्षक नजर आ रहा है। नवभारत टाइम्स के पास विज्ञापनों के चलते ज्यादा कुछ करने की गुंजाइश नहीं थी।

2: खबरों की प्रस्तुति में अमर उजाला, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान के साथ ही आज दैनिक जागरण भी आगे है। लीड को सभी ने काफी अच्छी तरह से पेश किया है।   

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में अमर उजाला और दैनिक भास्कर को अव्वल कहा जा सकता है। दोनों ने लीड के शीर्षक में अच्छा प्रयोग किया है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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आज इन खबरों को मिली अखबारों के फ्रंट पेज पर प्रमुखता

नवभारत टाइम्स के फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन है, जबकि हिन्दुस्तान के फ्रंट पेज पर एक छोटा विज्ञापन है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Tuesday, 05 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 05 November, 2019
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दिल्ली की जहरीली हवा पर सरकार से लेकर कोर्ट तक हर कोई मंथन करने में लगा है। सभी की यही कोशिश है कि हालात सामान्य हो जाएं। हालांकि, जब तक ये जद्दोजहद चलेगी, अखबारों के फ्रंट पेज की टीम को लीड की समस्या नहीं होगी। लीड की तलाश आसान काम नहीं होता, कभी-कभी खबरों का इतना ‘सूखा’ पड़ जाता है कि समझ ही नहीं आता कि लीड किसे लगाएं।

बहरहाल, आज के अखबारों के फ्रंट पेज की बात करें तो नवभारत टाइम्स के पाठकों को आधा पेज खबरों के साथ आधा पेज विज्ञापन भी मिले हैं। लीड जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी है। खबर को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, लेकिन तीन लाइन की हेडिंग कुछ अटपटी नजर आ रही है। वकील-पुलिस भिड़ंत को प्रमुखता के साथ तीन कॉलम में रखा गया है। वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेड डील से भारत हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पीछे हट गया है। इसके अलावा, पेज पर दो सिंगल कॉलम खबरें हैं। पहली कश्मीर में आतंकी हमले की है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई है और 35 जख्मी हैं। दूसरी खबर है, इंडिगो का सर्वर फेल होने की। एयरलाइंस के सर्वर ने बीच में ही धोखा दे दिया, जिसके चलते यात्री परेशान होते रहे।

आज हिन्दुस्तान में भी लीड जहरीली हवा पर कोर्ट की टिप्पणी है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि हालात इमरजेंसी से भी बदतर हैं। इसी के साथ मदन जैड़ा की बाईलाइन स्टोरी भी है, जो बता रहे हैं कि राजधानी की सड़कों पर लगे एयर प्यूरीफायर भी फेल हो रहे हैं। सबसे बड़ी ट्रेड डील से भारत के हटने को दूसरी बड़ी खबर के रूप में पेज पर रखा गया है। महाराष्ट्र का सियासी संग्राम और वकील-पुलिस भिड़ंत को हिन्दुस्तान ने प्रमुखता के साथ जगह दी है। इंडिगो की सर्वर समस्या के साथ ही कश्मीर में आतंकी हमले को दो-दो कॉलम में लगाया गया है।

एंकर में अरविंद सिंह की बाईलाइन स्टोरी है। इस स्टोरी के मुताबिक फ़ास्ट टैग से टोल भरा जाए तो प्रदूषण 28 फीसदी कम हो जाएगा। इसके अलावा, पेज पर सिंगल कॉलम खबरें भी हैं। पहली सिद्धू को पाकिस्तान का निमंत्रण और दूसरी विकास यादव को पैरोल से इनकार। इमरान खान चाहते हैं कि सिद्धू करतारपुर गलियारे के उद्घाटन के मौके पर उनके साथ मौजूद रहें। वैसे लगता नहीं है कि वे इस निमंत्रण को स्वीकार करेंगे, क्योंकि अपने क्रिकेटर दोस्त इमरान के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर को लेकर वो पहले ही ‘हिट विकेट’ हो चुके हैं। उधर, अदालत ने नीतीश कटारा हत्याकांड के मुख्य आरोपित विकास यादव को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि पैरोल भूल जाये।

वहीं, अमर उजाला ने केबीसी के ‘फ्लिप द क्वेश्चन’ की तरह फ्रंट पेज के लेआउट को फ्लिप कर दिया है। कल पेज की शुरुआत लीड से हुई थी और उसके पास तीन कॉलम था। आज दो कॉलम से पेज शुरू हुआ है और उसके पास लीड है। फर्क बस कॉलम का है। खैर, सबसे बड़ी ट्रेड डील से भारत के पीछे हटने को प्रमुखता से पेज पर जगह मिली है। लीड जहरीली हवा पर कोर्ट की टिप्पणी है, जिसके साथ ही दिल्ली और एनसीआर में धूप, तेज हवाओं से राहत को भी रखा गया है।

नीतीश कटारा हत्याकांड के मुख्य आरोपित विकास यादव की खबर को अमर उजाला ने अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है। इसकी हेडिंग कोर्ट की टिप्पणी से बनाई गई है, जिससे साफ पता चलता है यादव की अर्जी पर कोर्ट का क्या रुख रहा। घाटी में हमला और इंडिगो के खराब सर्वर की खबर भी पेज पर है। एंकर में वकीलों की आक्रामकता को लगाया गया है।

अब यदि दैनिक जागरण की बात करें तो अखबार में लीड जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी है, जिसे डीप चार कॉलम में बिना किसी फोटो या ग्राफिक्स के उतारा गया है और वो भी सिंगल लाइन शीर्षक के साथ। वहीं, सबसे बड़ी ट्रेड डील से भारत के हटने को भी दैनिक जागरण ने सिंगल लाइन हेडिंग में तीन कॉलम में आधे पेज तक उतारा है। गनीमत बस इतनी है कि इस खबर में फोटो है। न्यूनतम 9 घंटे करना होगा काम, इस समाचार को दैनिक जागरण ने आज जगह दी है, जबकि कल ही कुछ अखबार इसे प्रकाशित कर चुके हैं। एंकर में सौरव गांगुली हैं, जो आईपीएल में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहे हैं। अब बदलाव क्या होंगे, इसके लिए आपको खबर पढ़नी होगी। लगता है वकीलों की आक्रामकता को दैनिक जागरण ने बेहद कम आंका है, इसलिए खबर संक्षिप्त में लगाई गई है।

आखिर में दैनिक भास्कर का रुख करते हैं। अखबार के फ्रंट पेज पर लीड जहरीली हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की किसानों पर तीखी टिप्पणी है और इसके ऊपर विज्ञापन के रूप में हरियाणा के मुख्यमंत्री किसानों से पराली न जलाने की अपील कर रहे हैं। वैसे, सोचने वाली बात ये है कि किसान पराली सालों से जलाते आ रहे हैं, पहले तो कभी ऐसी समस्या नहीं हुई। आज यदि एकदम से हवा में जहर घुल गया है तो इसके लिए क्या सिर्फ किसानों को कुसूरवार ठहराना जायज है? दैनिक भास्कर ने वकील-पुलिस भिड़ंत की खबर को फोटो के साथ लगाया है।

उधर, निर्भया कांड में मृत्युदंड का सामना कर रहे दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया है। इस खबर को भी अखबार ने पेज पर रखा है। हालांकि, तेलंगाना में महिला तहसीलदार को दफ्तर में जिंदा जलाने के समाचार को दैनिक भास्कर ने महज सिंगल में लगाकर उसके साथ न्याय नहीं किया है, जबकि महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को आज भी बड़ी जगह मिली है। इसके अलावा, पेज पर श्रीनगर में आतंकी हमला और रेल टिकट का भुगतान यूपीआई से करने पर सर्विस चार्ज में 50% की छूट से जुड़ा समाचार भी है। एंकर में अखबार ने एक ऐसी खबर को सजाया है, जिसे न केवल सबसे ज्यादा पढ़ा जाएगा, बल्कि भारत में इसके अमल के ख्वाब भी बुने जाएंगे। माइक्रोसॉफ्ट ने जापान में चार दिन काम कराने का फंडा अपनाया और कर्मचारियों की उत्पादकता 40 फीसदी बढ़ गई। अपने देश में तीन छुट्टियां मिलने के बाद भी उत्पादकता बढ़ेगी या नहीं, ये यक्ष प्रश्न है।

आज का 'किंग' कौन?

1: दैनिक जागरण को छोड़कर बाकी अखबारों का लेआउट अच्छा है, लेकिन फिर भी बेहतरीन नहीं कहा जा सकता।

2: खबरों की प्रस्तुति, खासकर लीड में हिन्दुस्तान ने सबसे अच्छा किया है। नवभारत टाइम्स के पास सीमित जगह थी, मगर लीड की प्रेजेंटेशन में कमाल दिखाया जा सकता था।

3: कलात्मक शीर्षक पर आज किसी समाचारपत्र ने जोर नहीं दिया है।

4: खबरों की बात करें तो इन अखबारों के फ्रंट पेज लगभग एक समान हैं, लेकिन दैनिक भास्कर ने तेलंगाना में महिला तहसीलदार को जिंदा जलाने के समाचार को पेज पर रखकर बेहतरीन काम किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि दूसरे अखबारों ने इस महत्वपूर्ण खबर को संक्षिप्त में भी जगह नहीं दी है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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TOI के पूर्व संपादक मनोज के दास ने थामा अब इस मीडिया ग्रुप का दामन

पूर्व में ‘एशियानेट न्यूज’, ‘डेक्कन क्रॉनिकल’ और ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ में अहम पदों पर कर चुके हैं काम

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 04 November, 2019
Last Modified:
Monday, 04 November, 2019
Manoj Das

वरिष्ठ पत्रकार मनोज के दास ने प्रमुख मीडिया और पब्लिकेशन समूह ‘मातृभूमि’ जॉइन कर लिया है। उन्हें ‘मातृभूमि’ के एडिटर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले मनोज के दास ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, केरल में रेजिडेंट एडिटर के तौर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

मनोज के दास ने वर्ष 1994 में ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ अखबार जॉइन किया था। इसके बाद उन्होंने वहां कोच्चि ब्यूरो चीफ, डिप्टी रेजिडेंट एडिटर और रेजिडेंट एडिटर जैसे वरिष्ठ पदों पर काम किया। इसके अलावा वह ‘एशियानेट न्यूज’, ‘डेक्कन क्रॉनिकल’ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ जैसे संस्थानों में भी अहम पदों पर काम कर चुके हैं।

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हेडलाइन के जरिए दैनिक भास्कर ने NCR को दिया ये नया नाम

अमर उजाला में जैकेट विज्ञापन की वजह से तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है, जबकि दैनिक जागरण में दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Monday, 04 November, 2019
Last Modified:
Monday, 04 November, 2019
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दिल्ली की हवा दिनोंदिन जहरीली होती जा रही है। यही वजह है कि इस खतरे को आज भी राजधानी दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों ने प्रमुखता से अपने फ्रंट पेज पर रखा है। शुरुआत करते हैं हिन्दुस्तान से। हिन्दुस्तान के फ्रंट पेज पर केवल एक छोटा विज्ञापन है, नतीजतन काफी खबरों को पेज पर जगह मिली है। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है, जिसे आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, आज से शुरू हो रहे ऑड-ईवन को लीड का हिस्सा न बनाते हुए अलग से तीन कॉलम में रखा गया है। यदि दोनों खबरों को एक साथ रखते तो एक अन्य समाचार को जगह मिल सकती थी।

महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को हिन्दुस्तान ने आज केवल सिंगल कॉलम जगह दी है। इसके अलावा, जासूसी पर कांग्रेस का वार, वकील-पुलिस कांड की न्यायिक जांच के आदेश और पीएम मोदी के विदेश दौरे को भी फ्रंट पेज पर रखा गया है। एंकर में भी दिल्ली की जहरीली हवा से जुड़ा समाचार है। सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे को लेकर सरकार पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही चार सिंगल समाचार भी हैं। मसलन, 9 घंटे निर्धारित होगी नौकरी, जहाज में प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक, अलगाववादियों के बैंक खाते होंगे फ्रीज और 50 युवाओं ने छोड़ी आतंक की राह।

आज अमर उजाला में जैकेट विज्ञापन है और इस वजह से तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड जहरीली हवा है, जिसे पांच कॉलम जगह मिली है। वकील-पुलिस कांड को तीन कॉलम में उतारा गया है। महाराष्ट्र के सियासी संग्राम और पीएम मोदी के विदेश दौरे को भी प्रमुखता के साथ जगह दी गई है। एनआरसी पर चीफ जस्टिस के बयान को सिंगल में लगाया है, वहीं कर्ज में डूबी हनुंज टॉयज के प्रमोटर पर कार्रवाई की खबर को दो कॉलम में रखा गया है। एंकर में जासूसी पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर वार है। इसके अलावा, पेज पर करतारपुर का एक खूबसूरत फोटो भी है। इमरान खान ने करतारपुर परिसर और गुरुद्वारा साहिब की कुछ फोटो ट्विटर पर शेयर की थीं, जिनमें से एक को अमर उजाला ने पेज पर सजाया है।

अब दैनिक जागरण की बात करें तो आज दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं। पहला फ्रंट पेज दिल्ली की जहरीली हवा के नाम है, जबकि दूसरे फ्रंट पेज पर माला दीक्षित की स्टोरी को लीड लगाया गया है। माला बता रही हैं कि अयोध्या विवाद पर नजूल की जमीन कहीं पेंच न फंसा दे। अब ऐसा क्यों है, इसके लिए आपको स्टोरी पढ़नी होगी। दूसरी प्रमुख खबर आसियान देशों के प्रमुखों के साथ पीएम मोदी की मुलाकात है, जिसे डीप तीन कॉलम में रखा गया है। हालांकि खबर का प्रेजेंटेशन बेहद सामान्य है और डीप तीन कॉलम की सिंगल लाइन हेडिंग देने से यह और भी अटपटा हो गया है।

इसके अलावा, वॉट्सऐप जासूसी कांड पर कांग्रेस का सरकार पर वार और वकील-पुलिस भिड़ंत पर कोर्ट के रुख को भी पेज पर जगह मिली है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रियंका गांधी का भी मोबाइल हैक किया गया था। वहीं, हाई कोर्ट ने दो अफसरों के तबादले सहित वकील-पुलिस भिड़ंत की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। एंकर में घाटी से जुड़ी खबर है। 50 युवाओं ने आतंक की राह छोड़कर घर वापसी की है।

वहीं, दैनिक भास्कर में लीड जहरीली हवा है, जिसे ‘नेशनल स्मॉग रीजन’ शीर्षक के साथ लगाया गया है। दैनिक भास्कर के मुताबिक, अब एनसीआर की स्थिति ये हो गई है कि उसे एनएसआर यानी नेशनल स्मॉग रीजन कहा जाना चाहिए। लीड में ही आज से शुरू हो रही ऑड-ईवन स्कीम को जगह दी गई है। पेज पर दूसरी बड़ी खबर है महाराष्ट्र का सियासी संग्राम। शिवसेना अपना मुख्यमंत्री बनाये जाने पर अड़ी है, जबकि भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है। दिल्ली में वकीलों और पुलिस की भिड़ंत से जुड़े समाचार को भी तवज्जो मिली है। अदालत ने पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

इसके अलावा, वॉट्सऐप जासूसी पर कांग्रेस का सरकार पर वार और एनआरसी पर चीफ जस्टिस के बयान को पेज पर लगाया गया है। एंकर में आईआईटी प्रोफेसर की कहानी है, जिनकी टीम ने 55 डिवाइस बनाकर पेटेंट लिए हैं। इसके साथ ही दैनिक भास्कर ने फ्रंट पेज एक ऐसी खबर को भी रखा है, जिसे सबसे ज्यादा पढ़ा जायेगा। वो है, कामकाजी घंटे बढ़ाए जाने की सिफारिश। केंद्र सरकार ने वेज कोड रूल्स का ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 9 करने की बात कही गई है। यानी आने वाले दिनों में आपको ऑफिस में ज्यादा समय गुजारना पड़ेगा और वो भी उतनी ही सैलरी में।

आखिर में आज नवभारत टाइम्स का रुख करते हैं। अखबार के फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन के चलते महज चार खबरों की गुंजाइश ही बन पाई है। लीड जहरीली हवा है, जिसके शीर्षक को कलात्मक बनाने का प्रयास किया गया है, लेकिन बात बन नहीं पाई है। हेडलाइन ‘धुआंधार जहर’ भले ही दिल्ली की स्थिति को बखूबी बयां करती हो, मगर यह आकर्षक नहीं है। हां, लीड का फोटो जरूर लोगों का ध्यान खींचने वाला है। प्रदूषण के झाग वाली यमुना में महिलाएं छठ की पूजा कर रही हैं। इसके अलावा, प्रियंका फोन हैक, वकील-पुलिस भिड़ंत में न्यायिक जांच के आदेश और टी-20 में भारत पर बांग्लादेश की जीत पेज पर है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में आज अमर उजाला और दैनिक भास्कर सबसे आगे कहे जा सकते हैं। दोनों अखबारों का फ्रंट पेज खुला-खुला और आकर्षक दिखाई दे रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति में हिन्दुस्तान, अमर उजाला और भास्कर तीनों ही अव्वल हैं। खासकर लीड को तीनों ने बेहतरीन अंदाज़ में सजाया है।   

3: कलात्मक शीर्षक आज सिर्फ दैनिक भास्कर में नजर आ रहा है। अखबार ने प्रदूषण के चलते एनसीआर को एनएसआर कहा है यानी नेशनल स्मॉग रीजन। वैसे, नवभारत टाइम्स ने भी प्रयास किया है, लेकिन उसे सफल नहीं कहा जा सकता।

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