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मेरी नजर में इन बड़ी वजहों से पत्रकारिता के लिए भुगतान करते हैं लोग: जेम्स ह्यूज
‘द एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस’ (AIM) के प्रमुख इवेंट ‘इंडियन मैगजीन कांग्रेस’ (IMC) के 12वें एडिशन में FIPP के प्रेजिडेंट ने मैगजीन बिजनेस को प्रभावित करने वाले ग्लोबल ट्रेंड्स पर अपनी बात रखी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
देश में पत्रिकाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘द एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस’ (AIM) के प्रमुख इवेंट ‘इंडियन मैगजीन कांग्रेस’ (IMC) में शुक्रवार को मैगजीन पब्लिशिंग इंडस्ट्री से जुड़े दुनियाभर के दिग्गजों ने शिरकत की। यह इस आयोजन का 12वां एडिशन था। इस बार चार साल के अंतराल के बाद ऐसे समय में इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जब मैगजीन पब्लिशिंग ने कोविड के बाद के दौर में अपने पाठकों के लिए और अधिक प्रासंगिक बने रहने के लिए तमाम नए तरीके अपनाए हैं।
कार्यक्रम के दौरान मैगजीन मीडिया इंडस्ट्री के ग्लोबल ट्रेड एसोसिएशन ‘FIPP’ के प्रेजिडेंट जेम्स ह्यूज (James Hewes) प्रमुख वक्ता के रूप में एक बार फिर भारत आकर काफी खुश दिखे। इस दौरान ह्यूज ने मैगजीन एसोसिएशंस के महत्व, ग्लोबल ट्रेंड्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती मौजूदगी के बारे में विस्तार से बात की।
ह्यूज का कहना था कि एक लंबे समय बाद एक बार फिर भारत आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा है। ह्यूज के अनुसार, ‘जब भी कोई इवेंट खत्म होता है, स्थगित होता है अथवा किसी कारण से रुक जाता है, तो हमेशा यह चिंता रहती है कि यह वापस होगा या नहीं। हमारे वैश्विक परिप्रेक्ष्य में इस तरह के इवेंट्स का होना काफी महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही यह भी काफी महत्वपूर्ण है कि स्थानीय इंडस्ट्री अपने पब्लिशिंग एसोसिएशंस को सपोर्ट करती है।’
ह्यूज ने यह भी कहा कि कभी-कभी इस तरह के इवेंट्स को केवल एक खर्च के रूप में देखा जाता है और लोग वास्तव में उस कम्युनिटी के मूल्यों को नहीं समझते हैं जो वे लाते हैं और जो काम करते हैं। ह्यूज का कहना था, ‘इस तरह के इवेंट्स काफी अच्छे होते हैं क्योंकि यह सभी लोगों को एक मंच प्रदान करते हैं और अपनी बात रखने का मौका देते हैं। इससे उन्हें एक-दूसरे के साथ मजबूती से जुड़कर काम करने का मौका मिलता है। वास्तव में, मीडिया परिदृश्य में इन एसोसिएशंस को संरक्षित करना और बढ़ावा देना और भी महत्वपूर्ण हो गया है, जो तमाम इंफ्लुएंसर्स और चैट जीपीटी (ChatGPT) जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स की मौजूदगी से कमजोर हो गए हैं।’
ह्यूज ने कहा, ‘मैंने गैरी स्मिथ की किताब ‘The AI Delusion‘ किताब पढ़ी। यह काफी अच्छी किताब है और इसमें बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है और यह कैसे काम करता है। यह न ब्रेन है और न ही कोई जादू है। इसमें सोचने की क्षमता नहीं है और न ही कभी होगी। न ही इसमें अपने आत्मजागरूकता है। यह सिर्फ एक कंप्यूटर प्रोग्राम है, जिसे बहुत अच्छी तरह से तैयार किया गया है। यह सूचना लेता है और बहुत ही ज्यादा तेजी व चतुराई से उसका विश्लेषण कर उसे वापस कर देता है, जो हमें एक नए रूप में प्राप्त होती है।‘
ह्यूज का कहना था कि हमें इस भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए कि यह इंसानों की जगह ले लेता है। ह्यूज के अनुसार, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अधिक दोहराव वाली चीजें कर सकता है, जैसे मार्केटिंग के लिए शॉर्ट कॉपी लिखना एक अच्छा उदाहरण होगा और इसके अलावा अन्य चीजें, जो आमतौर पर किसी को पसंद नहीं आतीं। चैट जीपीजी शायद मनुष्य की तरह ही ऐसा करता है और यह एक इंसान को एक उबाऊ काम से बचाएगा, ताकि वे कुछ और दिलचस्प कर सकें।’
इस कार्यक्रम के दौरान ह्यूज का यह भी कहना था, ‘मुझे लगता है कि लोग पत्रकारिता के लिए इस वजह से भुगतान करते हैं कि उनका मानना होता है कि वह भरोसे यानी ट्रस्ट और गुणवत्ता यानी क्वालिटी के लिए भुगतान कर रहे हैं। यह ऐसा कॉम्बिनेशन है जो अच्छी मानवीय पत्रकारिता को मशीनी पत्रकारिता या ऐसे लोगों द्वारा बनाए गए कंटेंट से अलग करता है, जो प्रोफेशनल्स नहीं हैं।’
ह्यूज के अनुसार, ‘यही कारण है कि हम अपनी बातचीत और अपने काम में इंफ्लुएंसर्स के बारे में ज्यादा बात नहीं करते हैं, क्योंकि वे लोग पत्रकार नहीं हैं। लेकिन एक इंफ्लुएंसर को लगता है कि पत्रकारिता ऐसी चीज है, जिसे कोई भी कर सकता है। यही कारण है कि तमाम पत्रकारिता स्कूल मौजूद हैं और यह भी एक कारण है कि पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त करने में बहुत समय और पैसा खर्च होता है, क्योंकि यह एक जॉब है और यह एक क्राफ्ट है। क्या हमारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उस क्राफ्ट के तत्वों को उठाएगा और उसे दोहराएगा? क्या तमाम पब्लिकेशंस द्वारा इसका व्यापक उपयोग होने जा रहा है? मुझे इसकी आशा नहीं है। मुझे ऐसा नहीं लगता। वास्तव में आप खुद चैट जीपीटी से पूछ सकते हैं। यह वास्तव में अपने बारे में काफी ईमानदार है। यह आपको बताएगा कि यह आत्म-जागरूक नहीं है, और आपको बताएगा कि यह राय रखने के लिए नहीं है। यह भविष्य की भविष्यवाणी करने के लिए नहीं है। जो पहले से हो चुका है उसे संश्लेषित करने के लिए यह है। इसलिए हमारा काम वहां छलांग लगाना है, जो यह नहीं कर सकता।‘
इसके साथ ही ह्यूज का यह भी कहना था, ‘कहा जा रहा है कि पेड पत्रकारों के बिना कोई पत्रकारिता नहीं है। कहने का मतलब है कि आपको पत्रकारिता का भुगतान करने का एक तरीका पता चल गया है, अन्यथा, यह अस्तित्व में नहीं है। पब्लिशर्स के लिए वास्तव में इसका मतलब केवल तीन चीजों में से एक है। या तो आपको इसके लिए भुगतान करने के लिए एक ऐडवर्टाइजर मिलता है (लेकिन उसकी एक सीमा होती है) या आप कंज्यूमर को इसके लिए सीधे पेवॉल या सबस्क्रिप्शन के रूप में भुगतान करने के लिए कहते हैं यानी आप कंज्यूमर से इसके लिए भुगतान करवाते हैं। अथवा आपको कंटेंट के लिए ऐसे कंज्यूमर मिलते हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांजेक्शन करते हैं, जिसमें से आपको इसका एक शेयर मिलता है, जैसे कई कंपनियां कंटेंट क्रिएटर्स को कुछ शेयर देती हैं। इस तरीके से पैसे कमाने के अलावा वास्तव में कोई दूसरा निश्चित तरीका नहीं है। बाकी सभी इसी थीम पर हैं।’
ह्यूज का यह भी कहना था कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन डिजिटल एडवर्टाइजिंग या पेवॉल या जो भी हो, पर निर्भरता के लिए प्रिंट एडवर्टाइजिंग पर निर्भरता की अदला-बदली के बारे में नहीं है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन रेवेन्यू की विविधता के बारे में है, जिसमें कमाई के चार या पांच तरीके हैं, ताकि हम उस तरह के संकटों से दूर रहें, जिसमें हम रहते हैं और हमें नहीं पता होता कि किस तरह का झटका लगने वाला है और रेवेन्यू का कौन सा रास्ता बंद होने वाला है। ऐसे में आपको खुद को इस तरह के जोखिम से दूर रखना होगा।
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