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‘स्टिंग ऑपरेशन' करने पर अखबार के चार पत्रकारों के खिलाफ FIR
राजकोट के एक पुलिस थाने में ‘स्टिंग ऑपरेशन' करने के लिए गए एक गुजराती अखबार के चार पत्रकारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
राजकोट के एक पुलिस थाने में ‘स्टिंग ऑपरेशन' करने के लिए गए एक गुजराती अखबार के चार पत्रकारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन चारों पत्रकारों ने राजकोट तालुका पुलिस स्टेशन में एक स्टिंग ऑपरेशन किया था और उसके आधार पर एक रिपोर्ट प्रकाशित कर दावा किया था कि राजकोट के एक निजी अस्पताल में आग लगने के संबंध में गिरफ्तार तीन लोगों को वीआईपी सुविधाएं मुहैया कराई गईं।
हेड कॉन्स्टेबल जिग्नेश गढ़वी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने राजकोट में पत्रकार- महेंद्र सिंह जडेजा, प्रदीप सिंह गोहिल, प्रकाश रवरानी और इमरान होथी के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की है। इनमें तीन रिपोर्टर और एक फोटोग्राफर है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत में कह गया है कि ये पत्रकार राजकोट तालुका पुलिस थाने में 1 दिसंबर की रात कथित तौर पर ‘स्टिंग ऑपरेशन' करने के लिए दाखिल हुए थे। यह कथित स्टिंग ऑपरेशन 27 नवंबर को राजकोट के कोविड-19 अस्पताल में आग लगने और वहां पांच मरीजों की मौत के संबंध में था।।
राजकोट तालुका पुलिस थाने के अधिकारी ने कहा कि चारों पत्रकार बिना अनुमति के प्रतिबंधित क्षेत्र में कथित रूप से घुस आए थे। उन्होंने कहा कि आग से संबंधित एक खबर दो दिसंबर को अखबार में तस्वीरों के साथ प्रकाशित हुई, जिसें कहा गया था कि अस्पताल में आग लगने के मामले के तीन आरोपियों के साथ VIP की तरह व्यवहार हो रहा है और उन्हें हवालात में रखने के बदले एक पुलिसकर्मी कक्ष में रखा गया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने पुलिस थाने के कुछ वीडियो भी बनाए थे और विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर इन्हें साझा किया गया।
अधिकारी ने कहा कि आग मामले के तीन आरोपियों को 30 नवंबर को राजकोट तालुका पुलिस थाने लाया गया था और उन्हें पूछताछ के लिए एक अलग कक्ष में ले जाया गया था तथा उनके साथ VIP की तरह व्यवहार नहीं किया जा रहा। अधिकारी ने बताया कि चारों पत्रकारों के खिलाफ शु्क्रवार को भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। इस संबंध में किसी की गिरफ्तार नहीं हुई है।
वहीं दूसरी तरफ अखबार के संपादक देवेंद्र भटनागर ने एक अखबार को बताया कि पत्रकार पत्रकारिता धर्म का पालन कर रहे थे। भटनागर ने कहा, ‘अगर सरकार या पुलिस उन आरोपियों को बचा रही है, उन्हें सुविधा दे रही है और हम उन्हें बेनकाब कर रहे हैं तो हम केवल पत्रकारिता के धर्म का पालन कर रहे हैं। प्राथमिकी में कहा गया है कि हमने जो समाचार रिपोर्ट प्रकाशित की है वह गलत है।’
संपादक के अनुसार, उन्होंने (पुलिस) एफआईआर में जो बताया है वह यह है कि पत्रकारों ने उनके काम, उनके गुप्त काम में बाधा डाली। कब से पुलिस स्टेशन एक गुप्त स्थान बन गया? हमारी कानूनी टीम इस पर गौर कर रही है और हम कानूनी तरीके से जवाब देंगे।
पत्रकारों के खिलाफ आईपीसी धारा 186 (लोकसेवक के कार्यों में बाधा डालना), 114 (अपराध किए जाते समय उकसाने वाले की मौजूदगी) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 72 ए (कानूनन अनुबंध के उल्लंघन में सूचना के प्रकटीकरण के लिए सजा), 84बी (अपराध के लिए उकसाना), 84सी (अपराध करने का प्रयास) व अन्य के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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