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कोरोना की दूसरी लहर के बीच न्यूजपेपर इंडस्ट्री को है ये उम्मीद
कारोबार में मंदी के बावजूद, अखबारों का सर्कुलेशन लगभग सामान्य है, जिससे प्रिंट इंडस्ट्री को यह उम्मीद बनी हुई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
इस समय देश कोरोनावायरस (कोविड-19) की दूसरी लहर का सामना कर रहा है, लेकिन देश की न्यूजपेपर इंडस्ट्री को भरोसा है कि जिस तरह से कोरोना की पहली लहर के समय तमाम अखबारों को कोरोना के डर और लॉकडाउन के चलते कुछ समय के लिए अपनी प्रिंटिंग बंद करनी पड़ी थी, वैसा इस बार नहीं होगा। कारोबार में मंदी के बावजूद, अखबारों का सर्कुलेशन लगभग सामान्य है, जिससे प्रिंट इंडस्ट्री को यह उम्मीद बनी हुई है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि पहले लॉकडाउन ने अखबारों के प्रति लोगों का लगाव और बढ़ा दिया था और क्रेडिबल न्यूज के लिए रीडर्स को इस माध्यम पर फिर वापस आना पड़ा। ‘एडवांस फील्ड एंड ब्रैंड सॉल्यूशंस एलएलपी’ (Advance Field And Brand Solutions LLP) ने एक स्टडी के अनुसार निष्कर्ष निकाला है कि पहले लॉकडाउन के दौरान 38 प्रतिशत पाठक एक घंटे से ज्यादा समय अपने पसंदीदा अखबार को दे रहे थे, जबकि कोविड से पहले यह संख्या 16 प्रतिशत थी।
‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ (D. B. Corp Ltd) के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है, ‘कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बाजार बंदी या अन्य पाबंदियां पहले की तरह सख्त नहीं हैं, बल्कि इस बार पहले के मुकाबले थोड़ी ज्यादा छूट है। कर्फ्यू, लॉकडाउन, खासकर कटेंटमेंट जोन तैयार करना, मार्केट को बंद करना और आवागमन के साधनों को रोकना एक अस्थायी मुद्दा था। हालांकि, इससे हमें डिस्ट्रीब्यूशन की वैकल्पिक व्यवस्था करने का मौका मिला और कंटेंटमेंट जोन में अखबारों के वितरण की अनुमति के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ भी संपर्क बढ़ा। गिरीश अग्रवाल के अनुसार, हमने देखा है कि कवरेज के मामले में विश्वसनीय और विस्तृत कवरेज के कारण समय के साथ वर्तमान के साथ तमाम नए पाठक भी इस मीडियम पर आ रहे हैं।
पिछली बार सर्कुलेशन कम होने और मार्केट में एडवर्टाइजर्स की गैरमौजूदगी ने न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए मार्केट में एक तरह से सूखा ला दिया था, हालांकि वर्ष 2020 में नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में तमाम अखबारों ने सरकार द्वारा समाचार पत्रों को आवश्यक सेवा के रूप में वर्गीकृत करने के साथ त्वरित रीबूट कार्यक्रम शुरू किया।
इस बार सरकार ने और ज्यादा सपोर्ट किया है, इसके तहत सभी मार्केट्स में कर्फ्यू के समय में अखबार वितरण का समय बढ़ाया गया है। इसके अलावा, कई राज्य सरकारों ने अखबार विक्रेताओं को ‘कोरोना वॉरियर्स’ का दर्जा दिया है और वैक्सीनेशन में उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है।
साउथ के मार्केट की बात करें तो वहां पर भी समान स्थिति है। इस बारे में ‘मातृभूमि ग्रुप’ (Mathrubhumi Group) के एमडी एमवी श्रेयम्स कुमार का कहना है, ‘मातृभूमि के सर्कुलेशन में कमी नहीं आई है। वास्तव में अखबार को पढ़ने में बिताए जाने वाले समय में लॉकडाउन के दौरान दोगुना बढ़ोतरी हुई है। देश-दुनिया के साथ स्थानीय खबरों के लिए पाठक अखबारों को सबसे ज्यादा विश्वसनीय स्रोत मानते हैं।’ मातृभूमि का 14 लाख कॉपियों से ज्यादा सर्कुलेशन है और इसके सर्कुलेशन में कोई कमी नहीं आई है।
श्रेयम्स कुमार का यह भी कहना है, ‘इस मामले में सरकार काफी सपोर्टिव है। कड़े लॉकडाउन के बावजूद कहीं पर भी अखबार के वितरण को रोके जाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। अखबारों के सुचारु वितरण में केरल बहुत कुशल और प्रभावी राज्य रहा है।’
बिजनेस की बात करें तो इस साल की शुरुआत इंडस्ट्री के लिए अच्छी रही थी। अखबारों के विज्ञापन (ad volumes) की बात करें तो जनवरी 2020 से मार्च 2020 की तुलना में जनवरी 2021 से मार्च 2021 के बीच प्रति अखबार/प्रतिदिन यह लगभग एकसमान रहा। ‘टैम एडेक्स’ (TAM AdEx) के नवीनतम डाटा के अनुसार, दोनों अवधियों में प्रिंट पर विज्ञापन देने वाली टॉप कैटेगरीज भी समान रही हैं। प्रिंट के साथ काम करने के लिए उत्सुक ब्रैंड्स के निरंतर समर्थन के कारण इंडस्ट्री को आगामी समय में विज्ञापन खर्च (AdEx) में बड़ी गिरावट दिखाई नहीं दे रही है।
इस बारे में ‘कॉर्निटोज’ (Cornitos) कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रम अग्रवाल का कहना है, ‘पिछली साल जब देश महामारी की चपेट में आया था, उस समय अखबार भी काफी बुरे दौर से गुजरे थे, लेकिन वर्तमान में ऐसा नहीं है। वे (अखबार) मजबूती के साथ वापसी करने की कोशिश कर रहे हैं और जल्द ही हम ऐसा होते हुए देखेंगे। हमें उम्मीद है कि हम भविष्य में भी उनके साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बनाने में सक्षम होंगे।’
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