सरकार के इस कदम से अखबार मालिकों के खिले चेहरे, जानिए क्यों

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को पेश बजट में प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री को बड़ी राहत दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 03 February, 2020
Last Modified:
Monday, 03 February, 2020
Budget

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा एक फरवरी को पेश किए गए बजट में न्यूज प्रिंट के आयात (import) पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को आधा करने से प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री ने थोड़ी राहत की सांस ली है। इससे अखबारी बिजनेस की प्रॉडक्शन कॉस्ट में कमी की उम्मीद जताई जा रही है।

दरअसल, न्यूज प्रिंट और लाइटवेट कोटेड पेपर (lightweight coated paper) के आयात पर पिछले साल जुलाई में लगाई गई दस प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी को अब घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। डिजिटल मीडिया की ग्रोथ के कारण पहले से ही दबाव से जूझ रही प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री को कस्टम ड्यूटी में पांच प्रतिशत की छूट बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है।

हालांकि, जुलाई 2019 से पहले इस पर किसी तरह की कस्टम ड्यूटी नहीं थी, लेकिन फिर भी न्यूजपेपर बिजनेस से जुड़े लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि इस निर्णय से उन्हें प्रति टन न्यूजप्रिंट पर 1500 से 1700 रुपए की बचत हो रही है।

पिछले वर्षों के दौरान न्यूज प्रिंट की कीमतों में काफी अस्थिरता देखी गई है। अगस्त 2017 में न्यूजप्रिंट की कीमतें जहां 36000 रुपए प्रति टन थीं, वह एक साल बाद बढ़कर करीब 55000 रुपए हो गईं। 2019 में न्यूज प्रिंट की कीमतों में थोड़ी कमी आने से इंडस्ट्री को आशा की किरण दिखाई दी थी। इस समय न्यूजप्रिंट की कीमत 48000 रुपए से 50000 रुपए की बीच है।   

हालांकि, न्यूज प्रिंट की कीमतों में आई थोड़ी स्थिरता को प्रिंट मीडिया बिजनेस के मालिकों ने कभी महसूस नहीं किया। इस बारे में अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर जाने-माने प्रादेशिक अखबार के मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा, ‘न्यूजप्रिंट की कीमतों में आई कमी का प्रभाव वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में दिखाई देना था, क्योंकि हम लोगों के पास वर्ष 2019 की पहली तिमाही तक के लिए पहले से स्टॉक था। इससे पहले कि हमें घटी हुई कीमतों का फायदा मिल पाता, सरकार ने 10 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी लगा दी। अब इसमें की गई पचास प्रतिशत कटौती से प्रॉडक्शन कॉस्ट कम होगी।’  

सालाना रूप से न्यूजप्रिंट की डिमांड 2.5 मिलियन टन है। ऐसे में बजट में न्यूजप्रिंट के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को घटाकर आधा किए जाने से प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री को काफी राहत मिली है। चूंकि अपने देश में सालाना रूप से न्यूजप्रिंट का उत्पादन करीब एक मिलियन हो पाता है, ऐसे में अखबार मालिकों को ज्यादा कीमत होने के बावजूद न्यूज प्रिंट को आयात कर इसका इस्तेमाल करना पड़ता है।

इसके अलावा स्थानीय न्यूजप्रिंट की क्वालिटी बढ़िया न होने की शिकायतें भी आती रहती है, जिससे प्रॉडक्शन के दौरान वेस्टेज जैसी तमाम समस्याएं आती हैं और इस कारण प्रॉडक्शन कॉस्ट बढ जाती है। यही कारण है कि न्यूजपेपर बिजनेस से जुड़े लोग बजट 2020 की तारीफ कर रहे हैं।

इस बारे में ‘लोकमत मीडिया ग्रुप’ (Lokmat Media Group) के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर करन दर्डा का कहना है, ‘न्यूज प्रिंट और लाइटवेट कोटेड पेपर (lightweight coated paper) के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी में की गई कटौती का हम स्वागत करते हैं। पिछले वर्षों के दौरान न्यूजपेपर इंडस्ट्री को तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल 10 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी लगाए जाने से यह इंडस्ट्री और दबाव में आ गई थी। ऐसे में कस्टम ड्यूटी में की गई पांच प्रतिशत कमी से यह दबाव कुछ कम होगा और इंडस्ट्री को इस मुश्किल दौर से निकलने में कुछ मदद मिलेगी।’

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

अमर उजाला को बाय बोलकर नए सफर पर निकले डॉ. अतुल मोहन सिंह

पत्रकार डॉ. अतुल मोहन सिंह ने ‘अमर उजाला’ में करीब साढ़े तीन साल पुरानी अपनी पारी को विराम दे दिया है।

Last Modified:
Monday, 25 January, 2021
Dr Atul Mohan

पत्रकार डॉ. अतुल मोहन सिंह ने ‘अमर उजाला’ में करीब साढ़े तीन साल पुरानी अपनी पारी को विराम दे दिया है। उन्होंने अपना नया सफर दैनिक ‘स्वदेश’ के साथ शुरू किया है। उन्होंने लखनऊ में बतौर रेजीडेंट एडिटर जॉइन किया है।

मूल रूप से हूंसेपुर (हरदोई) के रहने वाले डॉ. अतुल मोहन सिंह को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब 12 साल का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत लखनऊ से पब्लिश होने वाले अखबार ‘स्पष्ट आवाज’ से की थी। इसके बाद ‘वॉयस ऑफ मूवमेंट’ ‘जनसंदेश’, ‘जन एक्सप्रेस’, ‘जनमत न्यूज’ और ‘अमर उजाला’ समेत तमाम अखबारों में विभिन्न जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने अब नई शुरुआत की है।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो 12वीं तक स्थानीय स्तर पर शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ का रुख कर लिया था। खास बात यह है कि उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ जाने वाले वह अपने गांव के पहले छात्र रहे हैं।

डॉ. अतुल मोहन सिंह पत्रकारिता की पढ़ाई करा रहे तमाम शिक्षण संस्थानों में समय-समय पर अतिथि अध्यापक के रूप में अध्यापन कार्य भी कराते रहते हैं। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रकाशनों के लिए विगत चार वर्षों से कंटेंट राइटर/कॉपी राइटर के रूप में नियमित लेखन के अलावा वह देश के विभिन्न स्थानों से प्रकाशित होने वाली विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए नियमित लेखन भी करते रहते हैं।   

समाचार4मीडिया की ओर से डॉ. अतुल मोहन सिंह को उनकी नई पारी के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

3 महीने में 20% महंगा हुआ अखबारी कागज, न्यूज पब्लिशर्स ने वित्त मंत्री से की ये अपील

कोरोना महामारी के दौरान मांग-आपूर्ति का असंतुलन पैदा होने से पिछले तीन महीनों में अखबारी कागज की कीमतों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

Last Modified:
Monday, 18 January, 2021
Print Media

समाचार पत्र प्रकाशकों (News Print Publishers) ने सरकार से न्यूजप्रिंट पर लागू पांच प्रतिशत का आयात शुल्क हटाने की मांग की है। इस बाबत इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (INS) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक ज्ञापन सौंपा है। बजट से पहले सौंपे गए इस ज्ञापन में अखबारी कागज के आयात पर सीमा शुल्क कटौती, उद्योग को प्रोत्साहन पैकेज या कम से कम 50 प्रतिशत बढ़े शुल्क के साथ विज्ञापन जारी करने का आग्रह किया है।

समाचार पत्र उद्योग का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान मांग-आपूर्ति का असंतुलन पैदा होने से पिछले तीन महीनों में अखबारी कागज की कीमतों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10-15 फीसदी की बढ़ोतरी अगले महीने होने वाली है, जो प्रकाशकों को बुरी तरह प्रभावित करेगी। वहीं, घरेलू उत्पादकों ने पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति के लिए अपने कच्चे माल को स्टॉक कर लिया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट से पहले सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि यदि प्रिंट मीडिया के लिए इस समय प्रोत्साहन पैकेज दे पाना संभव नहीं है, तो विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) को अपने सभी विभागों के विज्ञापन 50 प्रतिशत बढ़े शुल्क के साथ जारी करने पर विचार करना चाहिए। इससे उद्योग को काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा आईएनएस ने भारत के समाचार पत्र पंजीयक (आरएनआई) की प्रसार प्रमाणपत्र वैधता का विस्तार 31 मार्च, 2022 तक करने की मांग की है जिससे डीएवीपी की दरें अगले साल तक समान रहेंगी।

आईएनएस ने कहा कि ऐसा अनुमान है कि प्रिंट मीडिया को मौजूदा स्थिति से उबरने में दो से तीन साल लगेंगे।

इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (आईएनएस) के अध्यक्ष एल आदिमूलम ने कहा कि कोविड-19 महामारी से उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि महामारी के प्रभाव से उबरने के लिए समाचार पत्रों ने लागत घटाने के लिए अपने कई संस्करण बंद किए हैं। साथ ही उन्होंने अखबारों के पृष्ठ भी कम किए हैं और कर्मचारियों को भी हटाना पड़ा है। वहीं, ऐसे समय पर तो ज्यादातर समाचार पत्रों ने उन ग्रामीण क्षेत्रों में अखबार भेजना ही बंद कर दिया है, जहां 50 से कम प्रतियां जाती हैं। वितरण की लागत घटाने के लिए समाचार पत्रों ने यह कदम उठाया है।

आदिमूलम ने कहा कि सरकार ने महामारी के दौरान कुछ उद्योगों की प्रोत्साहन पैकेज से मदद की है। ‘हम भी कुछ प्रोत्साहन की उम्मीद कर रहे हैं।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जम्मू-कश्मीर में नियमों का पालन न करने पर कई अखबारों पर यूं गिरी गाज

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 34 अखबारों को अपनी सूची से बाहर कर दिया है।

Last Modified:
Monday, 18 January, 2021
kasmirnewspaper545

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 34 अखबारों को अपनी सूची से बाहर कर दिया है। वहीं सर्कुलेशन व प्रकाशन संबंधी अन्य दिशानिर्देशों का पालन न करने के चलते 13 अन्य अखबारों का विज्ञापन रोक दिया है। इसके अलावा, ‘कथित साहित्यिक चोरी’ और ‘दोषपूर्ण सामग्री’ के प्रकाशन की वजह से 17 अन्य समाचार प्रकाशनों को नोटिस जारी किए गए हैं।

न्यूज पोर्टल ‘दिप्रिंट’ की एक खबर के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों ने बताया कि केंद्रशासित प्रदेश के दर्जनों समाचारपत्रों के कामकाज का पता लगाने और जांच करने के लिए चार महीने चली लंबी कवायद के बाद 7 दिसंबर को यह फैसला लिया गया था। प्रदेश प्रशासन ने कहा कि उन्हें इन संगठनों के खिलाफ कथित रूप से कदाचार और विज्ञापन नीति का उल्लंघन किए जाने की शिकायतें मीडिया बिरादरी के भीतर से ही मिल रही थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, यहां 17 अखबार प्रकाशनों को जारी नोटिस में समाचार संगठनों से जून 2020 में जारी नई मीडिया नीति के मानकों का पालन करने को कहा गया है, जिसके तहत सरकार ‘फेक न्यूज, साहित्यिक चोरी और अनैतिक और राष्ट्रविरोधी सामग्री’ के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और मीडिया के अन्य स्वरूपों की सामग्री की जांच करती है।

‘दिप्रिंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उसके पास आधिकारिक दस्तावेज मौजूद हैं, जो दिखाते हैं कि समिति ने इस बात को ध्यान में रखा कि कुछ अखबार मार्च 2020 से कोविड-19 महामारी के कारण अपने मुद्दों को नियमित रूप से प्रकाशित नहीं कर पाए हैं।

एक सरकारी अधिकारी ने ‘दिप्रिंट’ को बताया कि इसके बावजूद भी कई समाचार प्रकाशन कदाचार में लिप्त रहे हैं और अपनी प्रसार संख्या के बारे में गलत जानकारी देते रहे हैं। न्यूज पब्लिकेशन के खिलाफ कार्रवाई सरकार की तरफ से गठित समिति की तरफ से की गई व्यापक जांच और चार महीने लंबी कवायद के बाद की गई है।’

अधिकारी ने कहा, ‘2017-18 से ये पब्लिकेशन विज्ञापन नीति का स्पष्ट तौर पर उल्लंघन कर रहे हैं और इन्होंने अपने प्रसार, स्वामित्व और प्रकाशन की गुणवत्ता से संबंधित मामलों में अधिकारियों को धोखा देने की कोशिश की है।’

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन पब्लिकेशन पर कार्रवाई की गई है उनमें राइजिंग कश्मीर, गैलेक्सी न्यूज़, कश्मीर इमेजेज और अपना जम्मू शामिल हैं। यह फैसला 15 मई 2020 को गठित सरकार की इम्पैनलमेंट कमेटी ने लिया, जिसमें वित्त विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

वहीं, जम्मू संभाग में मान्यता प्राप्त की सूची से बाहर होने वाले अखबारों में हिल पीपुल, नावीद, दैनिक कश्मीर टाइम्स, स्वर्ण स्मारिका, नई रोशनी, हाइट ऑफ लाइफ, जमीर-ए-खल्क, गैलेक्सी न्यूज़, अपना जम्मू, द अर्थ न्यूज और लोक शक्ति जैसे थोड़े-बहुत नामी अखबार शामिल हैं।

प्रसार संबंधी आंकड़ों में हेराफेरी के कारण विगरस न्यूज, स्टेट मॉनीटर और ट्रेड एंड जॉब आदि को सरकार ने सूची से बाहर किया है। कश्मीर में वादी गुलपीश, सदाकत-ए-रहबर, हक नवाज और सद-रंग सेहर सहित आठ समाचार पत्रों के प्रेस पर रोक लगाई गई है।

वहीं, सूची से बाहर किए गए जाने-माने पब्लिकेशन में कश्मीर इमेजेज का जम्मू संस्करण भी शामिल है, जिसने जनवरी 2018 के बाद से एक भी संस्करण प्रकाशित नहीं किया है। इसी तरह दिसंबर 2019 से अखबार की प्रतियां संयुक्त निदेशक के कार्यालय न भेजने के कारण राइजिंग कश्मीर के जम्मू संस्करण के लिए विज्ञापन बंद कर दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर प्रशासन के एक अधिकारी ने ‘दिप्रिंट’ को बताया कि सरकार ने यह कार्रवाई अखबारों के आकार या नाम के आधार पर नहीं बल्कि कथित कदाचार के कारण की है।

एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि प्रसार पर गलत आंकड़े देना, वास्तविक स्वामित्व के बारे में जानकारी छिपाना और छपी सामग्री, कागज की गुणवत्ता (रंगीन अखबारों को अधिक सरकारी धन मिलता है), इंटरनेट या अन्य समाचार पत्रों से प्रकाशन सामग्री की चोरी जैसे कुछ ऐसे कथित उल्लंघन थे जो जांच के दौरान सामने आए।

जांच से जुड़े रहे एक अन्य सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘अखबारों की प्रसार संख्या की जांच के लिए हमारी टीमों ने कई जगहों जैसे अखबार के स्टैंड और वेंडर्स की दुकानों पर छापे मारे और हमने पाया कि कुछ समाचार पत्र केवल सरकारी रिकॉर्ड में ही मौजूद थे। कुछ ऐसे अखबार भी पाए गए जिनकी केवल एक प्रति छापकर सूचना विभाग को भेजी गई थी।’

रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर में 164 प्रतिष्ठित प्रकाशन सूचीबद्ध हैं, जिनमें अखबार, मैगजीन, साप्ताहिक और पाक्षिक पत्र-पत्रिकाएं शामिल हैं। इनमें 41 अंग्रेजी दैनिक, 59 उर्दू दैनिक और 56 अंग्रेजी और उर्दू सप्ताहिक हैं।

जम्मू में 84 अंग्रेजी दैनिक, 31 उर्दू और 24 हिंदी दैनिक, 14 बहुभाषी (हिंदी/डोगरी) सप्ताहिक, 37 उर्दू सप्ताहिक और 30 अंग्रेजी सप्ताहिक सहित 248 प्रकाशन सूचीबद्ध हैं।

अब तक, जम्मू में 24 न्यूज पब्लिकेशन को सूची से बाहर किया गया है, 17 को नई मीडिया नीति 2020 अपनाने के लिए नोटिस भेजा गया है और पांच का विज्ञापन निलंबित किया गया है। वहीं, कश्मीर में 10 अखबारों को सूची से बाहर किया गया है और आठ अन्य के विज्ञापन निलंबित कर दिए गए हैं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

सीनियर जर्नलिस्ट संजय श्रीवास्तव की नेताजी सुभाष चंद्र की यात्रा पर नई किताब

सीनियर जर्नलिस्ट संजय श्रीवास्तव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर गहन शोध के बाद एक किताब लिखी है, जिसका नाम ‘सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा’ है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 January, 2021
Subhash5454

सीनियर जर्नलिस्ट संजय श्रीवास्तव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर गहन शोध के बाद एक किताब लिखी है, जिसका नाम ‘सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा’ है। इसे संवाद प्रकाशन, मेरठ ने प्रकाशित किया है।

23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस की जन्मतिथि है। देश इस साल उनकी 125वीं जन्मशती मना रहा है। नरेंद्र मोदी सरकार ने इस साल नेताजी की याद में कई आयोजन लगातार करने की योजना की घोषणा भी की है।

पिछले 07 दशकों में सुभाष चंद्र बोस को लेकर न जाने कितने सवाल उठे हैं। 18 अगस्त 1945 को नेताजी का निधन तायहोकु में एक हवाई हादसे में बताया गया, लेकिन देश ने कभी इस पर विश्वास नहीं किया। नेताजी का निधन हमेशा रहस्य की परतों में लिपटा रहा। सुभाष चंद्र बोस के निधन से जुड़े रहस्य की जांच के लिए तीन आयोग बने। दो आयोगों यानि शाहनवाज खान और जस्टिस जीडी खोसला आयोग ने कहा कि नेताजी का निधन तायहोकु में हवाई हादसे में हो गया, लेकिन 90 के दशक के आखिर में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा गठित जस्टिस मनोज कुमार मुखर्जी आयोग ने कहा, उनका निधन हवाई हादसे में नहीं हुआ था।

50 के दशक में बने पहले जांच आयोग के सदस्य रहे सुभाष के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस ने बाद में खुद को आयोग की जांच रिपोर्ट से अलग कर अपनी असहमति रिपोर्ट तैयार की, जिसे उन्होंने अक्टूबर 1956 में जारी किया। इस रिपोर्ट में उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि सुभाष किसी हवाई हादसे के शिकार नहीं हुए बल्कि जिंदा बच गए। जापान के उच्च सैन्य अधिकारियों ने खुद उन्हें सुरक्षित जापान से निकालकर सोवियत संघ की सीमा तक पहुंचना सुनिश्चित किया।

अलग-अलग देशों की आला खुफिया एजेंसियों ने अपने तरीकों से इस तारीख से जुड़ी सच्चाई को खंगालने की कोशिश की। कुछ स्वतंत्र जांच भी हुई। कई देशों में हजारों पेजों की गोपनीय फाइलें बनीं। तमाम किताबें लिखीं गईं। रहस्य ऐसा जो सुलझा भी लगता है और अनसुलझा भी। हकीकत ये है कि 18 अगस्त 1945 के बाद सुभाष कभी सामने नहीं आए।

बहुत से लोग 80 के दशक तक दावा करते रहे कि उन्होंने नेताजी को देखा है। अयोध्या में रहने वाले गुमनामी बाबा को बेशक सुभाष मानने वालों की कमी नहीं। दो और बाबाओं के सुभाष होने की चर्चाएं खूब फैली, उसमें शॉलमारी आश्रम के स्वामी शारदानंद और मध्य प्रदेश में ग्वालियर के करीब नागदा के स्वामी ज्योर्तिमय को नेताजी माना गया।

जब देश आजाद हो रहा था, तब कांग्रेस के बड़े बड़े नेताओं को भी लगता था कि नेताजी जिंदा हैं। ये माना गया कि वो सोवियत संघ पहुंच गए हैं। महफूज हैं। बस एक शख्स था, जो कह रहा था कि नेताजी ने उसके सामने अस्पताल में आखिरी सांसें ली हैं, वो थे आजादी के बाद पाकिस्तान में जाकर बस गए कर्नल हबीब उर रहमान।

सुभाष की अज्ञात यात्रा बहुत रहस्यपूर्ण और कौतुहल लिए है। लेखक संजय श्रीवास्तव की नई किताब ‘सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा’ उसी ओर देखने की कोशिश है। सुभाष पर उपजने वाले तमाम सवालों का जवाब खोजने के साथ तीनों जांच आयोगों की रिपोर्ट, बडे़ भाई सुरेश चंद्र बोस की अहसमति रिपोर्ट को विस्तार से पहली बार दिया गया है।

ये काफी तथ्यपरक और शोधपूर्ण तरीके से लिखी किताब है, जो सुभाष ही नहीं बल्कि उनके जीवन से जुड़े लोगों और सवालों पर नजर दौड़ाती है। सुभाष की अज्ञात यात्रा आज भी अज्ञात है।

किताब - सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा

लेखक - संजय श्रीवास्तव

संवाद प्रकाशन, मेरठ

मूल्य 300 रुपए (पेपर बैक)

(अमेजन पर उपलब्ध)

पेज -288

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

वरिष्ठ पत्रकार व पायनियर हिंदी की रेजिडेंट एडिटर ऊषा श्रीवास्तव का निधन

वरिष्ठ पत्रकार व पायनियर हिंदी की रेजिडेंट एडिटर ऊषा श्रीवास्तव का शनिवार को निधन हो गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 January, 2021
Usha5454

वरिष्ठ पत्रकार व पायनियर हिंदी की रेजिडेंट एडिटर ऊषा श्रीवास्तव का शनिवार की सुबह निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं और उनका इलाज दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में चल रहा था।

उनके निधन की जानकारी ‘द पॉयनियर’ ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल के जरिए दी।

'द पायनियर' से पहले ऊषा श्रीवास्तव अमर उजाला के साथ नेशनल ब्यूरो में कार्यरत थीं।  

दुःख की इस घड़ी में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘पायनियर हिंदी की संपादक और वरिष्ठ पत्रकार उषा श्रीवास्तव जी को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और परिजनों को संबल दे। ॐ शांति।’

 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस ने वित्तमंत्री को लिखा लेटर, रखीं ये मांगें

‘द एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस’ के प्रेजिडेंट बी श्रीनिवासन का कहना है कि इन मांगों को माने जाने से ‘बीमार’ मैगजीन इंडस्ट्री को काफी मदद मिलेगी

Last Modified:
Friday, 15 January, 2021
AIM

‘द एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस’ (AIM) ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर अपनी मांगों से उन्हें अवगत कराया है। इसके साथ ही ‘AIM’ ने इंडस्ट्री के लिए केंद्रीय बजट 2021 में इन मांगों पर विचार करने का अनुरोध किया है।  

वित्तमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है, ‘कोविड-19 ने मैगजीन इंडस्ट्री को काफी प्रभावित किया है। महामारी ने इस इंडस्ट्री के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पर काफी विपरीत असर डाला है। इसके कारण एडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापन खर्चों में भी काफी कटौती की है। इसके अलावा अखबारों और मैगजींस के द्वारा  कोरोनावायरस के फैलने की फर्जी खबरें भी सोशल मीडिया पर काफी चलीं। इन फर्जी खबरों से भी इंडस्ट्री को काफी नुकसान हुआ।’

इस संकट की ओर केंद्र का ध्यान लाने और उद्योग को स्थिरता की राह पर वापस लाने के उद्देश्य से वित्तमंत्री को लिखे गए पत्र में ‘AIM’ के प्रेजिडेंट बी श्रीनिवासन ने जीएसटी में छूट देने, आयात किए जाने वाले कागज से कस्टम ड्यूटी हटाने और सरकारी विज्ञापनों में ज्यादा हिस्सेदारी देने की मांग की है।  

अपने पत्र में बी श्रीनिवासन का कहना है छपे हुए अखबार और मैगजींस की बिक्री पर कोई भी टैक्स लागू नहीं है। यह एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा है जो लगातार सरकारों द्वारा समाचार और सूचनाओं के प्रसार पर वित्तीय बोझ को दूर करने के लिए है। जबकि, अखबारों और मैगजींस की प्रिंटिंग पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगा हुआ है, जो छोटे और मध्यम पब्लिशर्स पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में एसोसिएशन ने सरकार से अखबारों/मैगजींस की प्रिंटिग और प्रॉडक्शन में जीएसटी से छूट देने की मांग की है।  

बी श्रीनिवासन का यह भी कहना है कि केंद्रीय बजट 2019 में न्यूज प्रिंट के आयात (import) पर दस प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगाने से इंडस्ट्री पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। बी श्रीनिवासन ने गुजारिश की है कि सरकार को न्यूज प्रिंट के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को समाप्त कर देना चाहिए।

बी. श्रीनिवासन के अनुसार, ‘स्टैंडर्ड न्यूज (SNP) का घरेलू उत्पादन मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है, जबकि ग्लैज्ड न्यूजप्रिंट (GNP) और लाइटवेट कोटेड पेपर (LWC) का प्रॉडक्शन घरेलू स्तर (Indigenously) पर नहीं किया जा रहा है। ऐसे में यह तर्क देना कि कस्मट ड्यूटी घरेलू इंडस्ट्री को बचाने के लिए लगाई गई है, गलत है।’

इंडस्ट्री के निरंतर संरक्षण के लिए सरकार को धन्यवाद देते हुए ‘AIM’ ने सरकारी विज्ञापन खर्च में मैगजींस को ज्यादा हिस्सेदारी देने की मांग की है। यह खर्च सीमा इस समय एक प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर कुल विज्ञापन बजट का कम से कम 10 प्रतिशत करने की मांग की गई है।

इसके साथ ही एसोसिएशन ने सरकार से मैगजीन इंडस्ट्री को तीन साल के लिए टैक्स से छूट देने पर विचार करने की मांग भी की है। इसके अलावा भी सरकार के समक्ष कुछ अन्य मांगें रखी गई हैं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

HT ने कुणाल प्रधान पर जताया और अधिक भरोसा, अब दी ये जिम्मेदारी

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के एडिटर-इन-चीफ सुकुमार रंगनाथन ने कुणाल प्रधान के प्रमोशन की घोषणा की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 January, 2021
Kunal Pradhan

‘हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स’ (Hindustan Times) प्रबंधन ने वरिष्ठ पत्रकार कुणाल प्रधान को अखबार के मैनेजिंग एडिटर के पद पर प्रमोट किया है। अपनी नई भूमिका में कुणाल ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के सभी एडिशंस की देखरेख करेंगे और दिल्ली व एनसीआर एडिशंस का प्रबंधन करना जारी रखेंगे।

फॉरेन अफेयर्स एडिटर्स और फॉरेन करेसपॉन्डेंट के साथ-साथ सभी रेजिडेंट्स एडिटर्स अब कुणाल प्रधान को रिपोर्ट करेंगे। इसके साथ ही डेस्क, रीराइट डेस्क, स्पेशल प्रोजेक्ट एडिटर्स, हेल्थ टीम, एचटी नेक्स्ट और लीगल व स्पोर्ट्स ब्यूरो उन्हें रिपोर्ट करना जारी रखेंगे।

इस बारे में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के एडिटर-इन-चीफ सुकुमार रंगनाथन का कहना है, ‘कुणाल प्रधान को अखबार के मैनेजिंग एडिटर के पद पर प्रमोट करने की घोषणा करते हुए मुझे काफी खुशी हो रही है। कुणाल हमारे साथ वर्ष 2016 से जुड़े हुए हैं और मेट्रो सेक्शन व दिल्ली एडिशन संभाल चुके हैं। गुरुग्राम एडिशन की लॉन्चिंग और एचटी री-डिजायन प्रोजेक्ट में प्रमुख भूमिका निभाने वाले लोगों में कुणाल प्रधान का नाम भी शामिल है। मैं कुणाल प्रधान को उनकी नई भूमिका के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

विराट-अनुष्का को लेकर अखबार की वायरल होती खबर कितनी सच-कितनी झूठ, जानें यहां

वायरल होती खबरों में कहा गया कि अखबार ने पहले पेज पर जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों की जगह इन दोनों की तस्वीर छाप दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 January, 2021
viralnews-virat665

खुद को ‘सबसे आगे’ करार देने की कोशिश में कई बार ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जो ताउम्र सालती रहती हैं। 12 जनवरी को एक अखबार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दरअसल, 11 जनवरी को अनुष्का शर्मा और विराट कोहली पेरेंट्स बने। अनुष्का ने मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में बेटी को जन्म दिया, जिसके बाद से फैंस और तमाम सितारें उन्हें बधाइयां दे रहे हैं। टीवी हो या फिर अखबार, हर कहीं अनुष्का शर्मा और विराट कोहली के पेरेंट्स बनने की खबर छाई हुई है। इस बीच प्रसिद्ध अंग्रेजी अखबार जमकर ट्रोल होने लगा। कहा जा रहा था कि इस अंग्रेजी अखबार ने फ्रंट पेज पर ही अनुष्का शर्मा और विराट कोहली को आतंकवादी बता दिया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस अखबार का नाम 'द हिटवाड' बताया गया।

वायरल होती खबरों में कहा गया कि अखबार ने पहले पेज पर जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों की जगह इन दोनों की तस्वीर छाप दी है। सोशल मीडिया पर तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसके बाद तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए जब हमने सर्च किया कि क्या यह अखबार का रियल पेज है या फिर किसी ने उसे एडिट कर दिया है, तो सर्च करने पर हमें अखबार का ई-पेपर का रियल पेज मिला, जो 12 जनवरी का है, जिसे देखने पर यह पता चलता है कि यह वायरल होती खबर सच नहीं है। दोनों ही खबर अलग-अलग प्रकाशित की गई है। हमारी पड़ताल में पता चला कि अखबार से गलती नहीं हुई है। ई-पेपर का लिंक आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं-

https://www.ehitavada.com/index.php?edition=RMpage&date=2021-01-12&page=4

सोशल मीडिया पर जैसे ही ये फोटो शेयर की गई तो लोगों ने तुरंत इस पर अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। लोग अखबार की इस गलती पर लगातार अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे घटिया मजाक कह रहे हैं। अगले दिन का पेपर सर्च करने पर भी हमें किसी तरह की कोई गलती जैसी खबर देखने को नहीं मिली, यानी अखबार से गलती नहीं हुई है और न ही इस वायरल होती खबर पर उसने अपनी कोई प्रतिक्रिया दी है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

यूपी सरकार के काम की तारीफ में विदेशी मैगजीन में छपा आर्टिकल, जानें सच

अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक पत्रिका में छपे आलेख को लेकर यह अफवाह फैल गई कि विदेशों में भी योगी सरकार के कोरोना नियंत्रण की तारीफ हो रही है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 07 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 07 January, 2021
CM-YOgi

अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक पत्रिका में छपे आलेख को लेकर यह अफवाह फैल गई कि विदेशों में भी योगी सरकार के कोरोना नियंत्रण की तारीफ हो रही है। इस खबर को कई मीडिया संस्थानों ने भी प्रकाशित किया। खबर थी कि अंतरराष्ट्रीय पत्रिका टाइम मैगजीन (Time Magazine) में कोरोना काल में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम की तारीफ में तीन पन्नों का लेख प्रकाशित हुआ है, लेकिन यह हकीकत नहीं है।

दरअसल, फैक्ट चेक में पता चला है कि टाइम मैगजीन ने ऐसा कोई लेख प्रकाशित नहीं किया है, बल्कि यह एक प्रायोजित आलेख (Sponsored Content) है, या यूं कहें कि पत्रिका में छपा यह आलेख यूपी सरकार द्वारा दिए गए विज्ञापन का एक प्रारूप था। इसकी पुष्टि www.boomlive.in ने अपने फैक्ट चेक में की है।

टाइम मैगजीन में तीन पन्नों में छपे इस लेख पर न तो किसी रिपोर्टर का नाम लिखा है और न ही मैगजीन की कंटेंट-लिस्ट में ही इस लेख के शीर्षक का जिक्र है। यही नहीं, मैगजीन में जिस पन्ने पर यह लेख प्रकाशित किया गया है, उसके ऊपर 'कंटेंट फ्रॉम उत्तर प्रदेश' (Content From Uttar Pradesh) लिखा हुआ है। यानी यह टाइम मैगजीन के संपादकीय विभाग द्वारा प्रकाशित लेख नहीं है। इसलिए इसमें मैगजीन के किसी रिपोर्टर का नाम भी नहीं है। इस लेख में कहा गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के बाद भी जिस तरह से कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए वह सभी के लिए अतुलनीय उदहारण है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

राजकमल प्रकाशन समूह ने नियुक्त किए दो कमीशनिंग एडिटर्स

मनोज कुमार पांडेय और धर्मेंद्र सुशांत की नियुक्ति क्रमश: लोकभारती और राधाकृष्ण के लिए की गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 06 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 06 January, 2021
Manoj Kumar Pandey Dharmendra Sushant

देश के प्रमुख प्रकाशन संस्थान ‘राजकमल प्रकाशन’ समूह ने दो कमीशनिंग एडिटर्स नियुक्त किए हैं। इसके तहत मनोज कुमार पांडेय और धर्मेंद्र सुशांत की नियुक्ति क्रमश: लोकभारती प्रकाशन और राधाकृष्ण प्रकाशन के लिए की गई है। बता दें कि ये दोनों प्रकाशन एक अरसे से राजकमल प्रकाशन समूह में शामिल हैं, लेकिन इनका अपना अस्तित्व और अपनी खासियत है। किसी भी पब्लिशिंग हाउस को आगे बढाने की जिम्मेदारी कमीशनिंग एडिटर्स के कंधों पर होती है।

जाने-माने लेखक मनोज कुमार पांडेय लंबे समय तक महात्मा गांधी इंटरनेशनल हिंदी यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट ‘हिंदी समय’ (Hindi Samay) की एडिटोरियल टीम का हिस्सा रहे हैं। वे हाल ही में प्रकाशित अपने नवीनतम कहानी संग्रह ‘बदलता हुआ देश’ से चर्चा में हैं। उनकी कई कहानियों के नाट्य-मंचन हुए हैं। कुछ पर फिल्में भी बनी हैं। कहानीकार होने के साथ-साथ मनोज कुमार कई उल्लेखनीय किताबों का संपादन भी कर चुके हैं।  

वहीं, धर्मेंद्र सुशांत लंबे समय से साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। वे कई प्रकाशनों में अंशकालिक संपादक तो रहे ही हैं, कुछ समय 'समकालीन जनमत' पत्रिका से भी जुड़े रहे हैं। 'प्रभात ख़बर' से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले सुशांत 'हिंदुस्तान' अखबार की संपादकीय टीम में लंबी पारी खेल चुके हैं। एक पुस्तक समीक्षक के रूप में भी उनकी खास पहचान है।

राजकमल प्रकाशन समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक माहेश्वरी ने कमीशनिंग एडिटर्स के तौर पर नई पारी शुरू करने को लेकर मनोज कुमार पांडेय और धर्मेंद्र सुशांत को बधाई दी है। अशोक माहेश्वरी का कहना है कि मनोज कुमार पांडेय और धर्मेंद्र सुशांत इन पब्लिकेशंस की विशिष्टता और महत्व के बारे में पाठकों को परिचित कराने में मदद करेंगे।

वहीं, राजकमल प्रकाशन समूह के एडिटोरियल डायरेक्टर सत्यानंद निरुपम का कहना है कि हिंदी पब्लिकेशंस को बदलते समय के साथ सामने आने वाली चुनौतियों को दूर करना होगा, नए पाठकों को हिंदी से जोड़े रखना होगा और संपादकीय टीम को पाठकों की विविधता को पहचानना होगा।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए