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हिंदी पत्रकारिता की दशा और दिशा को बयां करती मृणाल पांडे की इस किताब का हुआ विमोचन
दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ में हुए विमोचन कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडे की इस किताब और हिंदी पत्रकारिता से जुड़े तमाम पहलुओं पर हुई चर्चा।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
जानी-मानी पत्रकार और लेखक मृणाल पांडे की नई किताब ‘The Journey of Hindi Language Journalism in India: From Raj to Swaraj and Beyond’ का विमोचन 24 जनवरी को दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ (IIC) में किया गया।
कार्यक्रम में मंचासीन मृणाल पांडे, हिंदी कवि और समालोचक अशोक वाजपेयी, ‘द वायर’ (The Wire) की एडिटर सीमा चिश्ती और ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (The Indian Express) की नेशनल ओपिनियन एडिटर वंदिता मिश्रा ने इस किताब और हिंदी पत्रकारिता को लेकर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत अशोक वाजपेयी के संबोधन से हुई। इसमें उन्होंने कहा कि इस किताब में हिंदी के बारे में ऐसे ढेर सारे तथ्य व आंकड़े दिए गए हैं, जिनसे पता चलता है कि हिंदी पत्रकारिता में क्या हो रहा है। आज के दौर की बात करें तो हिंदी मीडिया की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। फिर चाहे बात उसकी नैतिकता से जुड़ी हो अथवा सत्ता के खिलाफ अपनी आवाज उठाने और सच को सामने रखने की। हिंदी अखबारों को लेकर मेरा मानना है कि अधिकांश में बड़े पैमाने पर फेक न्यूज है और वे किसी न किसी खास विचारधारा से चल रहे हैं, ऐसे में मैंने कुछ समय पहले हिंदी अखबार पढ़ना छोड़ दिया है। लेकिन, इस किताब की बात करें तो इसमें ऐसे ढेर सारी इंफॉर्मेशन हैं और तथ्यों के साथ आंकड़े दिए गए हैं, जो हमें हिंदी मीडिया के सफर के बारे में पर्याप्त जानकारी देते हैं। उन्होंने इस किताब के कुछ अंशों को पढ़कर भी सुनाया।
अशोक वाजपेयी के बाद वंदिता मिश्रा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस किताब के माध्यम से मुझे हिंदी पत्रकारिता के अब तक के सफर के बारे में काफी कुछ पढ़ने-समझने को मिला है। रिपोर्टिंग के सिलसिले में मैं देश के तमाम हिस्सों में जाती रहती हूं, वहां मैं देखती हूं कि तमाम स्तरों पर हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता/पत्रकारों में काफी अंतर है। मृणाल पांडे जी की किताब इस अंतर को समझने में काफी सहायक है, उन्होंने अपनी किताब में तमाम तथ्य दिए हैं और हिंदी पत्रकारिता के अब तक के सफर को काफी विश्लेषण व आंकड़ों से सामने रखा है।
बाद में सीमा चिश्ती ने माइक संभाला और कहा कि मृणाल जी ने हिंदी पत्रकारिता के उद्भव से लेकर, इसके विकास और वर्तमान में इसकी स्थिति समेत तमाम प्रमुख पक्षों को आंकड़ों के साथ सामने रखा है। मेरे लिए तीन प्रमुख बातों को लेकर यह किताब काफी महत्वपूर्ण है। पहली बात तो यह कि इसमें ऐसा क्या है जो मैं इसे अपनी टेबल पर रखूं तो मृणाल जी ने इसमें काफी बेहतर तरीके से इस भाषा के सफर को सामने रखा है और बताया है कि अन्य भाषाओं के मुकाबले हिंदी पत्रकारिता के साथ किस तरह का व्यवहार किया गया।
दूसरी बात ये एक प्रमुख मीडिया संस्थान में काम करने के दौरान व जीवन के अन्य क्षेत्रों में अहम पदों पर अपनी भूमिकाएं निभाने के दौरान मृणाल जी ने चीजों को काफी नजदीक से देखा है और पाठकों के लिए अपने अनुभवों और तथ्यों के साथ इस किताब को लिखा है। तीसरी बात यह कि इसमें हिंदी पत्रकारिता के इतिहास के साथ-साथ वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसकी वास्तविक स्थिति के बारे में भी अपनी बात सामने रखी है।
इसके बाद किताब की लेखिका और पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडे ने अपने विचार रखे। मृणाल पांडे ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र का कहना था कि भारत में 12 तरह की हिंदी बोली जाती है। उन्होंने इनके जो नाम दिए हैं, उनमें उर्दू मिश्रित हिंदी, बनारस की हिंदी और अवध की हिंदी आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी के बारे में हमारा जो रिकॉर्डेड इतिहास है, इसमें कई बातें झूठी हैं।
पं. युगल किशोर शुक्ल द्वारा निकाले गए हिंदी के पहले साप्ताहिक अखबार ‘उदंत मार्तंड’ का जिक्र करते हुए मृणाल पांडे का कहना था कि 20वीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों की बात करें तो हिंदी के जितने भी बड़े नाम थे, वे रॉयल हाउसेज द्वारा पब्लिश किए जाते थे। जितने भी राजा-महाराजा होते थे, वे अपनी स्थानीय भाषा अथवा अंग्रेजी में बोलते-लिखते थे। इसके बाद उनके कहने पर हिंदी भाषी योग्य व्यक्ति की तलाश होती थी, जो हिंदी में उनकी बात को रखते थे। इसके बाद हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में हुए विस्तार से जुड़ी तमाम घटनाओं का जिक्र करते हुए मृणाल पांडे ने कहा कि उन्होंने अपनी किताब में इन बदलावों को पूरे तथ्यों और आंकड़ों के साथ रखा है।
कार्यक्रम के समापन से पूर्व सवाल-जवाबों का दौर भी चला। इस दौरान बुक लॉन्चिंग में शामिल अतिथियों ने मृणाल पांडे से किताब और पत्रकारिता को लेकर सवाल पूछे और उनकी राय जानी। बता दें कि इस किताब को जाने-माने पब्लिशिंग हाउस ‘ओरिएंट ब्लैकस्वान’ (Orient Blackswan) ने प्रकाशित किया है।
हिंदी पत्रकारिता पर मृणाल पांडे द्वारा अंग्रेजी में लिखी गई यह किताब उन लोगों के लिए काफी उपयोगी है, जो हिंदी ज्यादा नहीं जानते, लेकिन हिंदी पत्रकारिता का इतिहास जानना-समझना चाहते हैं। इस किताब में बताया गया है कि हिंदी पत्रकारिता ने राज से स्वराज तक कितना लंबा सफर तय किया है और अभी किस मुकाम पर है। इसके साथ ही इस किताब में मृणाल पांडे ने मीडिया के डिजिटलीकरण, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव और विज्ञापनों पर भारी निर्भरता जैसे प्रमुख बिंदुओं को भी जगह दी है।
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