IRS: प्रिंट मीडिया के लिए वाकई राहत देने वाले हैं इस तरह के आंकड़े

कुछ रीजनल अखबारों की कुल रीडरशिप व कुछ की एवरेज इश्यू रीडरशिप बढ़ी है तो कई अखबारों ने इन दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की है।

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2020
Newspaper

प्रिंट मीडिया के लिए यह समय काफी मुश्किलों भरा चल रहा है। इन सबके बीच इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) के आंकड़े नॉन मेट्रो सिटीज से इंडस्ट्री के लिए थोड़ी राहत भरी खबर जरूर लाए हैं। वैसे तो अंत में आशा की किरण रीजनल एरिया से ही सामने आती दिखाई दे रही है, क्योंकि वे ही पब्लिशर्स की ग्रोथ लगातार जारी रखे हुए हैं।

बता दें कि पिछले दिनों 'मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल' (MRUC) द्वारा इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की चौथी तिमाही (IRS 2019 Q4) के डाटा जारी किए गए हैं। यह रिपोर्ट इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पिछली तिमाही यानी पहली (Q1), दूसरी (Q2) और तीसरी तिमाही (Q3) के जारी किए गए डेटा पर आधारित है, जिसकी औसतन रिपोर्ट के बाद चौथी तिमाही के नतीजे तैयार किए गए हैं। इन आकड़ों को देखने से पता चलता है कि विभिन्न केंद्रों पर प्रिंट मीडिया की रीडरशिप में कमी आई है, लेकिन मेट्रो शहरों से बाहर जरूर इसमें ग्रोथ दिखाई दे रही है।

एक तरफ कुछ रीजनल अखबारों की ‘कुल रीडरशिप’ (total readership) में बढ़ोतरी देखने को मिली है, जबकि कुछ रीजनल अखबारों की ‘एवरेज इश्यू रीडरशिप’ (average issue readership) बढ़ी है। संयोग से, देश के कुछ लोकप्रिय ब्रैंड्स जैसे- ‘अमर उजाला’ (Amar Ujala), ‘लोकमत’ (Lokmat),  ‘डेली थांथी’ (Daily Thanthi) और ‘बर्तमान’ (Bartaman) की टोटल रीडरशिप और एवरेज इश्यू रीडरशिप दोनों में इजाफा देखने को मिला है।

उत्तर प्रदेश में हिंदी अखबारों से शुरुआत करें तो ‘आज’ (Aj) अखबार की कुल रीडरशिप चौथी तिमाही (Q4) में 4095 हो गई है, जबकि तीसरी तिमाही (Q3) में यह 4053 थी। ‘नवभारत टाइम्स’ (Navbharat Times) की एवरेज इश्यू रीडरशिप का पिछली चार तिमाहियों का आंकड़ा देखें तो यह 488 से 521 और फिर 490 होकर 550 के आंकड़े पर पहुंच गई है।

बिहार में, ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar)  ने भी पिछली चार तिमाहियों में लगातार कुल रीडरशिप में बढ़ोतरी दर्ज की है और यह क्रमश: 4970, 5877 और 6263 से बढ़कर चौथी तिमाही में 6706 तक पहुंच गई है। दैनिक भास्कर को हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिला है। वहीं, पंजाब में ‘दैनिक सवेरा’ और ‘अमर उजाला’ की भी कुल रीडरशिप लगातार बढ़ी है।

हरियाणा में वर्ष 2019 की चारों तिमाहियों में दो अखबारों की कुल रीडरशिप और एवरेज इश्यू रीडरशिप दोनों में ग्रोथ देखने को मिली है। इनमें ‘अमर उजाला’ भी शामिल है। पहली तिमाही में अखबार की कुल रीडरशिप 1925 थी जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 1952 हो गई थी, लेकिन तीसरी तिमाही में इसमें गिरावट दर्ज की गई थी और यह 1872 रह गई थी, लेकिन चौथी तिमाही में तेजी से आगे बढ़ते हुए यह 2027 हो गई है। चारों तिमाहियों में अखबार की एवरेज रीडरशिप इश्यू में लगातार इजाफा हुआ है और यह 391 से 401 और फिर 411 होकर चौथी तिमाही में 474 हो गई है।    

माना जा रहा है कि ब्रैंड द्वारा स्ट्रैटेजी में किया गया बदलाव ही इस ग्रोथ का राज है। इस बारे में ‘अमर उजाला लिमिटेड’ के डायरेक्टर प्रोबल घोषाल का कहना है, ‘हरियाणा में, शुरू में रोहतक से सिर्फ एक संस्करण छपता था। हालांकि, हमने हाल ही में दो और संस्करण एक करनाल और दूसरा हिसार शुरू किया, इन दोनों केंद्रों में प्रिंट की सुविधा है। चूंकि सेंटर पर ही अखबार छपता है, ऐसे में यह सुबह बिना किसी परेशानी के पाठकों तक जल्दी पहुंच जाता है। इन दो एडिशन के और शामिल हो जाने से हम ज्यादा से ज्यादा लोकल खबरें और देर रात तक की खबरें भी शामिल करने लगे हैं। ज्यादा से ज्यादा स्थानीय खबरें शामिल करने से स्थानीय लोगों से जुड़ने में मदद मिल रही है।’

हरियाणा की तरह, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भी दैनिक भास्कर और अमर उजाला जैसे लोकप्रिय अखबारों की रीडरशिप में वृद्धि देखी गई है। हालांकि, इंडस्ट्री के लिए पिछला समय ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। न्यूज प्रिंट की कीमतों में बढ़ोतरी और विज्ञापन की कमी के कारण इंडस्ट्री के सामने तमाम आर्थिक कठिनाई आई। न्यूजप्रिंट की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के कारण वर्ष 2017 से 2019 के आखिर तक अखबारों की प्रॉडक्शन कॉस्ट काफी बढ़ गई। न्यूजप्रिंट की कीमतें 60 प्रतिशत तक बढ़ गईं। कई अखबारों ने अपने एडिशन कम कर दिए। हालांकि कुछ अखबारों ने हार नहीं मानी और बहादुरी के साथ डटे रहे। कुछ ने अपने कंटेंट की मजबूती पर काम किया तो कुछ ने सोशल मीडिया के जरिये पाठकों तक पहुंच बनाने पर जोर दिया। इन्हीं अखबारों की रीडरशिप में यह बढ़ोतरी देखने को मिली।

इस बारे में ‘एबीपी प्राइवेट लिमिटेड’ (ABP PVT LTD) के एमडी और सीईओ डीडी पुरकायस्थ का कहना है, ‘पिछले साल लगभग प्रत्येक ब्रैंड को तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, हमने हमेशा अपने पाठकों को क्वालिटी कंटेंट और क्रेडिबल न्यूज के द्वारा अपने साथ जोड़े रखने का भरसक प्रयास किया। सोशल मार्केटिंग पर भी हमने काफी जोर दिया और तमाम कैंपेन व पहल शुरू कीं। इसके पीछे हमारी सोच हमेशा लोगों को ज्यादा सशक्त और जागरूक बनाने की है।’

वास्तव में कुछ राज्यों में रीजनल अखबारों की ग्रोथ काफी बेहतर रही है। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में सभी प्रमुख रीजनल अखबारों की ग्रोथ देखने को मिली है। यहां ‘लोकमत’ की कुल रीडरशिप पहली से चौथी तिमाही तक क्रमश: 19469, 20169, 21457 और 22012 हो गई है। वहीं ‘डेली सकाल’ (Daily Sakal) की कुल रीडरशिप एक से चौथी तिमाही तक क्रमश: 11668, 12771, 13960 और 14661 रही है। ‘पुधारी’ (Pudhari) और ‘पुण्य नगरी’ (Punya Nagari) की कुल रीडरशिप में भी वर्ष 2019 की चारों तिमाहियों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

केरल की बात करें तो ‘देशाभिमानी’ (Deshabhimani) और ‘केरल कौमुदी’ (Kerala Kaumudi), कर्नाटक में ‘विजय कर्नाटक’ (Vijay Karnataka), ‘विजयवाणी’ (Vijayavani), ‘प्रजावाणी’ (Prajavani) और  ‘उदयवाणी’ (Udayavani), तमिलनाडु में ‘डेली थांथी’ (Daily Thanthi), ‘दिनामलार’ (Dinamalar) और गुजरात में ‘दिव्य भास्कर’ (Divya Bhaskar) की कुल रीडरशिप में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

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दैनिक जागरण में कई संपादकों का कार्यक्षेत्र बदला

हिंदी अखबार ‘दैनिक जागरण’ में कई संपादकों का कार्यक्षेत्र बदले जाने की खबर सामने आई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 12 August, 2020
Last Modified:
Wednesday, 12 August, 2020
Dainik Jagran

हिंदी अखबार ‘दैनिक जागरण’ में कई संपादकों का कार्यक्षेत्र बदले जाने की खबर सामने आई है। इस बदलाव के तहत दैनिक जागरण, लखनऊ के स्थानीय संपादक शद्गुरु शरण अवस्थी को ‘नई दुनिया’ (मध्यप्रदेश) का स्टेट एडिटर बनाया गया है। इसके अलावा यह भी खबर है कि अवधेश माहेश्वरी को दैनिक जागरण, बरेली यूनिट का एडिटर नियुक्त किया गया है। वह अलीगढ़ यूनिट का कार्यभार संभाल रहे थे और फिलहाल प्रतीक्षारत थे।  

वहीं, बरेली में कार्यरत संपादकीय प्रभारी जितेन्द्र शुक्ला को कानपुर यूनिट में इसी पद का दायित्व सौंपा गया है। उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले के मूल निवासी जितेंद्र शुक्ला दैनिक जागरण में लंबे समय से कार्यरत हैं। वह इस संस्थान में बिहार, झारखंड और कानपुर में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वह जल्द ही अपना नया पदभार संभालेंगे।   

कानपुर के संपादक नवीन पटेल को फिलहाल प्रतीक्षारत किए जाने की सूचना है। लखनऊ में अभी किसे तैनात किया गया है, फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है। बता दें कि शद्गुरु शरण लखनऊ में करीब दो साल से कार्यरत थे। सदगुरु शरण ने अपनी फेसबुक वॉल पर भी एक पोस्ट के जरिये यह जानकारी दी है।

इस फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा है, ‘करियर के शुरू में करीब 20 साल लखनऊ, फिर तीन साल इलाहाबाद (अब प्रयागराज), दो साल बरेली, चार साल पटना, और फिर जुलाई 2018 में लखनऊ वापसी। अपने शहर में दो बेहतरीन साल गुजरकर अब नई दुनिया का सफर शुरू। कल अपरान्ह इंदौर में जागरण समूह के अखबार नई दुनिया के राज्य संपादक का कार्यभार संभालूंगा।’

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प्रिंट मीडिया पर अभी भी छाए हैं इस तरह के ‘खतरे के बादल’

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू किए लॉकडाउन की वजह से देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।

Last Modified:
Monday, 10 August, 2020
Newspaper

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू किए लॉकडाउन की वजह से देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। इसका प्रभाव मीडिया संस्थानों पर भी पड़ा है। कोरोना काल में कई मीडिया कंपनियों की आर्थिक स्थिति तो इस कदर बिगड़ गई कि उन्हें वित्तीय बोझ को कम करने के लिए अपने स्टाफ को छंटनी का नोटिस देना पड़ा, तमाम स्टाफ को अवैतनिक अवकाश (Leave without pay) पर भेजा गया अथवा उनकी सैलरी में कटौती की गई। अब एक बार फिर तमाम मीडिया कंपनियों ने इस तरह का कदम उठाया है। इस बार इस लिस्ट में ज्यादातर प्रिंट मीडिया संस्थान शामिल हैं।  

लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में अपने करीब 40 एम्प्लॉयीज को बाहर करने और अपने वीकेंड एडिशन ‘बिजनेस न्यूज डेली’ को बंद करने के बाद ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ (Business Standard) ने एक बार फिर इस तरह का कड़ा कदम उठाया है। इसके तहत 25 पत्रकारों को पिंक स्लिप थमा दी गई है। जिन एम्प्लॉयीज को संस्थान छोड़ने के लिए कहा गया है, उनमें कुछ जाने-माने पत्रकार भी शामिल हैं। बताया जाता है कि अन्य तमाम न्यूज बिजनेस की तरह ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ प्रबंधन अब मुख्य रूप से डिजिटल पर अपना फोकस करेगा।    

इस बारे में ‘Simply HR Solutions’ नाम से अपनी एचआर फर्म चलाने वाले रजनीश सिंह का कहना है, ‘बड़े पैमाने डिजिटाइजेशन का असर एम्प्लॉयीज की नौकरी पर भी पड़ा है। लॉकडाउन के दौरान अधिकांश पाठकों ने अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन पर न्यूज पढ़ने को तवज्जो दी है। ऐसे में न्यूज बिजनेस को प्रिंट से डिजिटल पर अपना फोकस करने को मजबूर होना पड़ा है।’ पूर्व में ‘टीवी18 इंडिया लिमिटेड’ में ग्रुप हेड (एचआर) के तौर पर काम कर चुके रजनीश सिंह का कहना है, ‘हालांकि प्रिंट की ‘विदाई’ के लिए अभी उपयुक्त समय नहीं था और यह सब कम से कम पांच साल बाद होता, जो अब हो रहा है। महामारी ने इस प्रक्रिया को सिर्फ तेज कर दिया है।’

बता दें कि ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ ही एकमात्र उदाहरण नहीं है। ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप ने भी अंग्रेजी भाषा के अपने टैबलॉयड ‘मेल टुडे’ (Mail Today) को बंद करने का फैसला लिया है। इस फैसले से करीब 40 एम्प्लॉयीज को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने एक इंटरमेल के जरिये एम्प्लॉयीज को इस फैसले की जानकारी दी है। कोरोनावायरस और लॉकडाउन के बीच ‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ ने सबसे पहले सैलरी में कटौती की घोषणा की थी। इसके बाद अन्य अखबारों जैसे-‘हिन्दुस्तान टाइम्स’,  ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘द इकनॉमिक टाइम्स’ आदि ने भी इस तरह के कदम उठाए थे।

वहीं, विशेषज्ञों का कहना है मीडिया में कुछ समय तक इसी तरह की स्थिति बनी रहेगी। इस बारे में दैनिक जागरण के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर और पूर्व रेजिडेंट एडिटर निशिकांत ठाकुर का कहना है, ‘ऐसा लग सकता है कि एम्प्लॉयीज को नौकरी से हटाने में प्रिंट मीडिया संस्थान क्रूर हो रहे हैं, लेकिन कोई दूसरा रास्ता नहीं है। इस साल कई महीनों में रेवेन्यू शून्य रहा है। कुछ लोकप्रिय अखबार जो विज्ञापनों की वजह से पहले काफी पेज छापते थे, अब उनकी संख्या आधे से भी कम रह गई है। इसका कारण यही है कि अब तमाम अखबारों में पर्याप्त विज्ञापन ही नहीं आ रहा है और विज्ञापन ही अखबारों के रेवेन्यू का प्रमुख स्रोत है। विज्ञापनों के बिना अखबारों को या तो बंद होना पड़ेगा अथवा अपनी टीम के सदस्यों में कटौती करनी पड़ेगी। मैं कहना चाहूंगा कि देश में अभी प्रिंट मीडिया का ‘अंतिम दौर’ नहीं आया है। एडवर्टाइजर्स कुछ समय लेंगे, लेकिन धीरे-धीरे वापस आएंगे। अगले वित्तीय वर्ष में चीजें बेहतर होंगी और नए अवसरों के द्वार खुलेंगे, हालांकि प्रतियोगिता काफी कड़ी होगी।’

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अपने अंग्रेजी अखबार Mail Today को लेकर इंडिया टुडे समूह ने लिया ये बड़ा फैसला

मेल टुडे के एडिटर द्वैपायन बोस अब Indiatoday.in की कमान संभालेंगे और इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी को रिपोर्ट करेंगे

Last Modified:
Friday, 07 August, 2020
Mail Today

‘इंडिया टुडे’ (India Today) समूह ने घोषणा की है कि वह अंग्रेजी भाषा के अपने टैबलॉयड अखबार ‘मेल टुडे’ (Mail Today) के प्रिंट एडिशन को बंद करने जा रहा है। ‘मेल टुडे’ के एडिटर द्वैपायन बोस अब Indiatoday.in की कमान संभालेंगे। अपनी नई भूमिका में वह इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी को रिपोर्ट करेंगे।

इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने एक इंटरमेल के जरिये एम्प्लॉयीज को इस फैसले की जानकारी दी है। अपने मेल में उन्होंने लिखा है, ‘जैसा कि आप जानते हैं कि न्यूजपेपर की दुनिया में करीब 13 साल पहले तमाम उम्मीदों के साथ ग्रुप की एंट्री हुई थी। हमने यूके के न्यूजपेपर पब्लिशर ‘the Daily Mail’ ग्रुप के साथ हाथ मिलाया था। हमारा विचार एक ऐसे अखबार को निकालना था जो मार्केट में मौजूद ब्रॉडशीट से अलग हो। हमने इस अखबार को काफी बेहतर निकाला। हमारी कई स्टोरीज को तमाम अखबारों ने फॉलो किया। हमारी स्टोरीज के आधार पर कई मामलों की जांच के लिए सबूत के तौर पर इस अखबार की कॉपियों को पार्लियामेंट में लहराया गया और टीवी न्यूज पर भी अक्सर इसका जिक्र किया गया।’

अपने मेल में अरुण पुरी का यह भी कहना है, ‘मुझे यह कहते हुए काफी खुशी है कि इतने वर्षों में हमें अपने विजन का अहसास हुआ। यह आसान नहीं था। अपनी कड़ी मेहनत के बल पर इस अखबार ने पाठकों खासकर युवाओं के दिलो दिमाग पर अपनी खास जगह बनाई। इतने वर्षों में हमने आर्थिक मंदी और नोटबंदी भी देखी है। दुर्भाग्य से कोविड-19 महामारी ने पाठकों की प्राथमिकताओं को बदल दिया है। लॉकडाउन के दौरान डिजिटल रूप में न्यूज का उपभोग बढ़ने से यह स्पष्ट है कि अखबारों का प्रिंट मीडियम पुनर्जीवित नहीं होगा। ऐसे में मैं बहुत अफसोस के साथ मेल टुडे के प्रिंट एडिशन बंद होने की घोषणा कर रहा हूं। अपने वर्तमान स्वरूप में इस अखबार का आखिरी प्रिंट एडिशन रविवार, नौ अगस्त को पब्लिश होगा। मैं रोजाना सुबह इस अखबार को मिस करूंगा और मुझे पूरा भरोसा है कि तमाम पाठक भी इसे मिस करेंगे।’

इसके साथ ही इस मेल में अरुण पुरी ने यह भी कहा है, ‘भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हम मेल टुडे को डिजिटल अवतार में पेश करेंगे। अखबार की एडिटोरियल टीम के तमाम एम्प्लायीज को ग्रुप के विभिन्न डिजिटल, सोशल मीडिया और टीवी वर्टिकल्स में समायोजित करने के लिए उनका मूल्यांकन किया जा रहा है। जो सहयोगी बाहर अवसर तलाशेंगे, इंडिया टुडे समूह और मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। मैं जानता हूं कि उनके टैलेंट की काफी मांग होगी। हमारा एचआर डिपार्टमेंट अगले चरण में उनसे संपर्क करेगा।’

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छंटने लगे प्रिंट इंडस्ट्री पर छाये 'काले बादल', सामने आई ये रिपोर्ट

तमाम सेक्टर्स की तरह पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रिंट मीडिया को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब स्थिति में धीरे-धीरे मगर लगातार सुधार देखा जा रहा है

Last Modified:
Thursday, 30 July, 2020
Newspapers

तमाम सेक्टर्स की तरह पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रिंट मीडिया को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब स्थिति में धीरे-धीरे मगर लगातार सुधार देखा जा रहा है और एडवर्टाइजर्स वापस लौटने लगे हैं। कोविड-19 ने मीडिया में प्रिंट की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित किया है। अपनी विश्वसनीयता के कारण पिछले एक महीने में प्रिंट पर धीरे-धीरे ही सही, विज्ञापनदाताओं की वापसी होने लगी है।

‘टैम एडेक्स’ (Tam AdEx) के डाटा के अनुसार, प्रिंट पर जो एडवर्टाइजर्स वापस लौट रहे हैं, उनमें 75 प्रतिशत हिंदी और अंग्रेजी भाषा के हैं। खास बात यह है कि कुछ बड़े प्लेयर्स के लिए नॉन मेट्रो शहरों से ज्यादा डिमांड आ रही है।  

एडवर्टाइजर्स की वापसी

इस बारे में ‘डीबी कॉर्प’ (DB Corp) के चीफ कॉरपोरेट सेल्स और मार्केटिंग ऑफिसर सत्यजीत सेन गुप्ता का कहना है, ‘मार्केट में रिकवरी के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। जैसी कि उम्मीद थी, मेट्रो सिटीज के मुकाबले टियर-दो और तीन शहरों में रिकवरी की रफ्तार अधिक है। ऑटोमोबाइल कैटेगरी हमारी सबसे बड़ी कैटेगरी है, जिसमें सबसे पहले रिकवरी देखी जा रही है। अधिकांश वाहनों की सेल्स में मजबूती देखी जा रही है। उन्होंने सबसे पहले मई के अंत में विज्ञापन देना शुरू कर दिया था। अन्य कैटेगरीज जैसे-एफएमसीजी, हेल्थकेयर, एजुकेशन और होम अप्लाइंसेज आदि ने जून से विज्ञापनों की फिर शुरुआत कर दी थी और अब उनके विज्ञापनों में तेजी आ गई है। लाइफस्टाइल, पर्सनल एसेसरीज और ज्वेलरी आदि कैटेगरीज ने भी जुलाई में विज्ञापन देने शुरू कर दिए हैं और अपना एड वॉल्यूम बढ़ा रहे हैं।’

एड वॉल्यूम में स्टेटवाइज शेयर की बात करें तो इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश 17 प्रतिशत शेयर के साथ टॉप पर है। दूसरे नंबर पर 10 प्रतिशत शेयर के साथ महाराष्ट्र है। इसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु का नंबर है। इस बारे में ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन शिवकुमार सुंदरम का कहना है कि तमाम रिसर्च से पता चला है कि यह समय ब्रैंड्स के लिए चुप रहने का नहीं है। टैम डाटा के अनुसार, अप्रैल से जून के दौरान 189 कैटेगरीज में 28000 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स और 31300 से ज्यादा ब्रैंड्स ने  खासतौर पर प्रिंट में विज्ञापन दिया है।

सुंदरम के अनुसार, ‘इन्वेंट्री में भी महीना दर महीना काफी इजाफा हो रहा है। आज यदि आप हमारे अखबार देखें तो विज्ञापन वापस आ रहे हैं। जैकेट विज्ञापनों की भी वापसी हुई है और हमने कई स्पेशल फीचर्स और सप्लीमेंट्स पब्लिश किए हैं। यानी रिकवरी का रास्ता पूरी तरह तैयार है। अखबारों के पेजों की बढ़ती संख्या भी सुधरती अर्थव्यवस्था का प्रतीक है और उसका उपभोक्ता की मानसिकता पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।’

पब्लिशर्स को भी जगी आस

त्योहारी मौसम को देखते हुए पब्लिशर्स को भी बेहतरी की उम्मीद है। इस बारे में ‘मलयाला मनोरमा’ (Malayala Manorama) के वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग, एडवर्टाइजिंग सेल्स) वर्गीस चांडी का कहना है, ‘कोविड के बाद महीना दर महीना बिजनेस बढ़ रहा है। हालांकि अभी यह उतना नहीं है, जितना कोविड से पहले था। ब्रैंड्स एक्टिव हैं और यदि हम खासतौर पर केरल को देखें तो ओणम निकट होने से यह क्लाइंट्स को एक्टिव होने के लिए प्रेरित करता है।’

दक्षिण के मार्केट में एडवर्टाइजर कैटेगरी में नई एंट्रीज भी हुई हैं, जिसकी इंडस्ट्री को बहुत जरूरत है। इस बारे में ‘मातृभूमि’ (Mathrubhumi) के मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार का कहना है, ‘क्लीनिंग/वॉशिंग और हाईजीन ब्रैंड्स जो पहले प्रिंट में सक्रिय नहीं थे, वे भी अब रेगुलर एडवर्टाइजर्स बन गए हैं।’  

ब्रैंड्स को क्या चाहिए

सुंदरम का मानना है कि एडवर्टाइजर्स शुरुआती तौर पर दो चीजें देख रहे हैं। सुंदरम के अनुसार, ‘सबसे पहले तो वह एक विश्वसनीय वातावरण देख रहे हैं, जहां पर उनके ब्रैंड्स को सही परिप्रेक्ष्य में और सकारात्मकता की भावना के साथ प्रदर्शित किया जा सकता है, जो अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता का विश्वास बढ़ाता है।’

इसके अलावा एडवर्टाइजर्स डिस्काउंट की ओर भी देख रहे हैं। सूत्रों के अनुसार एडवर्टाइजर्स ने लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में 50-60 प्रतिशत डिस्काउंट की मांग की है। हालांकि, अखबार अब क्लाइंट्स के लिए रियायती विज्ञापन दरों को प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं। हालांकि अधिकांश ने डिस्काउंट की संख्या में कमी की है, लेकिन कुछ इसे पूरी तरह समाप्त करने की ओर हैं। इस बारे में सेन गुप्ता का कहना है, ‘एडवर्टाइजर्स को उनके कंज्यूमर्स तक फिर से पहुंचाने और बिक्री बढ़ाने में मदद के लिए हमने जुलाई तक कुछ स्कीम भी पेश की हैं। हालांकि, अगस्त से हम इन स्कीम को खत्म कर रहे हैं।’

सुंदरम का कहना है, ‘वर्तमान समय में अधिकांश समाचार पत्रों का प्राथमिक ध्यान पाठक की रुचि और आपसी संबंध को बढ़ाना है। कोविड ने लोगों की अखबार से अपेक्षाओं को बदल दिया है। यह तथ्यों का सबसे भरोसेमंद स्रोत बन गया है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हम उपयोगिता और पढ़ने के आनंद का संतुलन बनाए रखें।’

वहीं, सेन गुप्ता का कहना है, ‘हमारे सभी प्रयास एडवर्टाइजर्स को अपने कंज्यूमर्स तक पहुंचने में मदद के लिए हैं।’ हालांकि, एडवर्टाइजर्स की प्रिंट पर वापसी हो रही है, विशेषज्ञों को इस बात में संदेह है कि क्या यह सीजन पिछले साल के बिजनेस से मेल खा पाएगा।

इस बारे में पब्लिशेस ग्रुप के स्वामित्व वाली मीडिया एजेंसी ‘जेनिथ’ (Zenith) के सीओओ जय लाला का कहना है, ‘लॉकडाउन के दौरान, प्रिंट को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा । हालांकि उनका ई-पेपर दर्शकों का ध्यान खींच रहा था, लेकिन उनके कुल राजस्व में भारी गिरावट देखी गई। अब चीजें धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं, जिससे लगता है कि त्योहारी सीजन से प्रिंट उद्योग में थोड़ी वृद्धि देखने में मदद मिल सकती है। लेकिन अभी तक हम यह अनुमान नहीं लगा सकते हैं कि जुलाई 2020 के दौरान बिजनेस पिछले साल यानी जुलाई 2019 के बराबर पहुंच पाएगा अथवा नहीं, क्योंकि इस उद्योग पर कोविड-19 का प्रभाव पिछले कुछ महीनों में सबसे ज्यादा रहा है।

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HT Media के लिए कैसी रही इस साल की पहली तिमाही, जानें नतीजे

‘एचटी मीडिया लिमिटेड’ (HT Media Ltd) ने इस साल जून में समाप्त हुई पहली तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं।

Last Modified:
Wednesday, 29 July, 2020
HT Media

‘एचटी मीडिया लिमिटेड’ (HT Media Ltd) ने इस साल जून में समाप्त हुई पहली तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। इन नतीजों के अनुसार इस मीडिया कंपनी ने इस साल जून में समाप्त हुई तिमाही में 51.95 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 142.48 करोड़ रुपये था।

साल दर साल (YoY) इसके कुल रेवेन्यू में 59 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले साल जून में समाप्त हुई तिमाही में इसका कुल रेवेन्यू 588.27 करोड़ रुपये था, जो इस साल इसी अवधि में 239.84 करोड़ रुपये रह गया है। इस मीडिया कंपनी का कहना है कि कारोबार में गिरावट मुख्य रूप से इसके वॉल्यूम में कमी (volume drops) के कारण देखी गई है।

‘एचटी मीडिया’ का कहना है कि जून 2020 में समाप्त हुई तिमाही में पिछले वर्ष की तिमाही की तुलना में प्रिंट बिजनेस के ऐड रेवेन्यू (ad revenues) में 77 प्रतिशत और सर्कुलेशन रेवेन्यू (circulation revenues) में 37 प्रतिशत की कमी हुई है।  

इन वित्तीय नतीजों के अनुसार, कॉमर्शियल और सरकारी विज्ञापनों के रेवेन्यू दोनों में कमी आई है और अखबार के डिस्ट्रीब्यूशन पर प्रभाव पड़ने से इसका सर्कुलेशन रेवेन्यू प्रभावित हुआ है। हालांकि मई-जून के बाद यह धीरे-धीरे बेहतर हुआ है।   

‘एचटी मीडिया लिमिटेड’ और ‘हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स’ की चेयरपर्सन और एडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भरतिया का इस बारे में कहना है, ‘कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए किए देशव्यापी लॉकडाउन के बीच इस तिमाही की शुरुआत हुई थी, जिसने विभिन्न सेक्टर्स के बिजनेस को प्रभावित किया है। इसके कारण विज्ञापन खर्च में काफी कमी देखी गई, जिसका नतीजा हमारे प्रिंट और रेडियो बिजनेस के रेवेन्यू पर पड़ा। इस तिमाही के शुरुआती दौर में यह प्रभाव ज्यादा था, इसके बाद मई और जून में धीरे-धीरे रिकवरी हुई।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘हालांकि, हमने तुरंत ऐहतियाती कदम उठाए, लेकिन ये रेवेन्यू में तेजी से आई गिरावट का पूरी तरह सामना नहीं कर सके। फिलहाल यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कब तक इसकी भरपाई होगी, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि कोविड-19 का अर्थव्यवस्था पर किस तरह का प्रभाव रहेगा। हालांकि, कंपनी के पास अभी भी पर्याप्त तरलता है जो परिचालन के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने में सक्षम है। हमारा पहला उद्देश्य अपने कस्टमर्स और कंज्यूमर्स को क्वलिटी प्रॉडक्ट उपलब्ध कराना है। हमें उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में वित्तीय नतीजों में सुधार आएगा।’

कंपनी के अंग्रेजी के प्रिंट वर्टिकल (हिन्दुस्तान टाइम्स और मिंट आदि)  के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में 82 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (Q1’21) में एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू 36 करोड़ रुपये रहा जो पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (Q1’20) में 198 करोड़ रुपये था। वहीं, सर्कुलेन रेवेन्यू जो पिछले साल की पहली तिमाही में 15 करोड़ रुपये था, इस तिमाही में 85 प्रतिशत घटकर करीब दो करोड़ रुपये रह गया। मीडिया कंपनी का कहना है कि ऐड रेवेन्यू की ग्रोथ में यह कमी कोविड-19 के कारण कम वॉल्यूम की वजह से आई। सभी श्रेणियों के विज्ञापन जैसे-एजुकेशन, ऑटोमोबाइल्स, रियल एस्टेट, एंटरटेनमेंट और रिटेल में नरमी देखी गई।

हालांकि, अंग्रेजी प्रिंट वर्टिकल के मुकाबले हिंदी प्रिंट वर्टिकल पर इसका प्रभाव कम पड़ा। इस तिमाही में इन वर्टिकल के ऐड रेवेन्यू में पिछले साल की इसी तिमाही में 164 करोड़ रुपये के मुकाबले 70 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जो 49 करोड़ रुपये थी। सर्कुलेशन रेवेन्यू में 23 प्रतिशत की कमी आई। पिछले साल पहली तिमाही (Q1’20) की तुलना में इस साल की पहली तिमाही (Q1’21) में इसका रेवेन्यू 50 करोड़ रुपये से घटकर 39 करोड़ रुपये रह गया।  ‘एचटी मीडिया’ के रेडियो बिजनेस के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में भी कमी देखी गई है। वित्तीय वर्ष 2021 की पहली तिमाही (Q1’21) में यह आठ करोड़ रहा, जबकि वित्तीय वर्ष 2020 की पहली तिमाही (Q1’20) में यह 64 करोड़ रुपए था। यानी इसमें करीब 88 प्रतिशत की कमी देखने को मिली।

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प्रिंट मीडिया में सरकारी विज्ञापनों के लिए MIB ने जारी कीं ये गाइडलाइंस

सूचना प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) ने प्रिंट मीडिया एडवर्टाइजमेंट पॉलिसी पेश की है। ये एक अगस्त से प्रभावी होगी।

Last Modified:
Tuesday, 28 July, 2020
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सूचना प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) ने प्रिंट मीडिया एडवर्टाइजमेंट पॉलिसी पेश की है। ये एक अगस्त से प्रभावी होगी। इस बारे में जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि सरकार के सभी मंत्रालय या विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्वायत्त निकाय और सोसायटीज, केंद्रीय विश्वविद्यालय और भारत सरकार के सभी शैक्षणिक संस्थान अपने डिस्पले विज्ञापनों को  ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ के माध्यम से देंगे।

हालांकि, वे क्लासीफाइड विज्ञापन जैसे(टेंडर नोटिस, नीलामी सूचना, भर्ती विज्ञापन आदि) बीओसी से सूचीबद्ध (empanelled) पब्लिकेशंस को बीओसी की दरों पर जारी कर सकते हैं और भर्ती संबंधी अपने विज्ञापन सीधे रोजगार समाचार (Employment News) में बीओसी की दरों पर पब्लिश करा सकते हैं।  

इसमें आगे कहा गया है कि सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के इच्छुक पब्लिकेशंस के आवेदनों पर विचार करने के लिए एक पैनल सलाहकार समिति (PAC) होगी। इन गाइडलाइंस में पब्लिकेशंस के लिए सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के लिए कुछ मापदंड भी तय किए गए हैं।

इनके अनुसार, पब्लिकेशन को कम से कम 36  महीने तक बिना रुकावट के नियमित रूप से पब्लिश होना चाहिए। हालांकि, 36 महीनों के अनिवार्य निर्बाध और नियमित प्रकाशन की अवधि के मामले में कुछ श्रेणियों के लिए 6 महीने तक छूट दी जा सकती है।

यही नहीं, पब्लिकेशन को यथोचित मानक का पालन करने की भी जरूरत है। बीओसी में संबद्धता के लिए नए आवेदन साल में दो बार (फरवरी और अगस्त) किए जा सकते हैं। इन आवेदनों पर पैनल सलाहकार समिति (PAC) द्वारा विचार किया जाएगा, जिनकी बैठक वर्ष में दो बार होगी। बीओसी द्वारा जारी किए जाने वाले विज्ञापनों की दरें रेट स्ट्रक्चर कमेटी (Rate Structure Committee) की सिफारिशों के आधार पर तय की जाएंगी। ये दरें पब्लिकेशन के प्रमाणिक सर्कुलेशन से संबंधित होंगी।

महारत्न और नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSUs) के लिए विज्ञापन की दरें बीओसी की सामान्य दरों से डेढ़ गुना होंगी। दरों में संशोधन के बाद से यह तीन साल के लिए वैध होंगी।  

गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि जिन समाचार पत्रों का सर्कुलेशन ABC (ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन)/ RNI (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) से सत्यापित होता है और जो जारी विज्ञापनों में पारदर्शिता व जवाबदेही लाते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए बीओसी कुछ तय मानदंडों के आधार पर एक मार्किंग सिस्टम का सहारा लेगी। इसके बाद अखबार द्वारा प्राप्त किए गए मार्क्स के आधार पर मध्यम और बड़ी कैटेगरी के लिए विज्ञापन जारी करेगी।

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प्रिंट मीडिया के लिए काफी राहत भरी है TAM AdEx की ये रिपोर्ट

आठ प्रतिशत शेयर के साथ कार कैटेगरी इस लिस्ट में टॉप पर है, जबकि इसके बाद कोचिंग और एग्जाम सेंटर्स का नंबर है।

Last Modified:
Monday, 27 July, 2020
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कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लगाए गए लॉकडाउन के कारण तमाम उद्योग धंधों के साथ मीडिया इंडस्ट्री पर काफी प्रभाव पड़ा। इस दौरान अखबारों को दिए जाने वाले विज्ञापनों में भी काफी कमी आई। हालांकि, अब अखबार के विज्ञापनों के लिए लंबे समय से चला आ रहा यह ‘सूखा’ खत्म होना शुरू हो गया है। ‘टैम एडेक्स’ (TAM AdEx) के नए आंकड़ों के अनुसार, लॉकडाउन की वजह से मार्च और अप्रैल में स्थिति ज्यादा खराब रही, लेकिन मई में औसत विज्ञापन की मात्रा (average ad volume) में प्रतिदिन 0.47 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ और जून में यह 3.2 गुना हो गया है।

इस रिपोर्ट को देखने से पता चलता है कि अप्रैल से जून के बीच 75 प्रतिशत विज्ञापन हिंदी और अंग्रेजी भाषा के थे, जबकि अन्य 11 भाषाओं के विज्ञापनों की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत थी।  इस अवधि के दौरान भाषाई रूप से विज्ञापनों के शेयर के मामले में लगभग सभी का शेयर पांच प्रतिशत रहा है और कन्नड़, मराठी व तमिल तीसरे, चौथे और पांचवे नंबर पर रहे हैं। यदि टॉप10 कैटेगरीज को देखें तो इनका ऐड वॉल्यूम शेयर जनवरी-मार्च और अप्रैल-जून में लगभग एक जैसा रहा है। विज्ञापन श्रेणी की बात करें तो आठ प्रतिशत शेयर के साथ कारों की कैटेगरी इस लिस्ट में टॉप पर है जबकि कोचिंग और एग्जाम सेंटर्स का नंबर इसके बाद है। 10 कैटेगरीज में चार एजुकेशन सेक्टर से थीं और इनका कुल शेयर 16 प्रतिशत था। मल्टीपल कोर्सेज की कैटेगरी पांच प्रतिशत शेयर के साथ तीसरे नंबर पर जबकि हॉस्पिटल्स/क्लिनिक्स चार प्रतिशत शेयर के साथ चौथे स्थान पर रही। इस लिस्ट में पांचवे नंबर पर ओटीसी प्रॉडक्ट्स थे।

अप्रैल-जून के बीच टॉप 10 एडवर्टाइजर्स का ऐड वॉल्यूम 22 प्रतिशत रहा है, जबकि जनवरी-मार्च के बीच यह 16 प्रतिशत था। टॉप 10 एडवर्टाइजर्स में से प्रत्येक तीन ऑटो और एजुकेशन सेक्टर से थे और इनका प्रतिशत क्रमश: छह और पांच प्रतिशत था। टॉप-10 एडवर्टाइजर्स की बात करें तो अप्रैल से जून के बीच प्रिंट एडवर्टाइजिंग की लिस्ट में छह प्रतिशत शेयर के साथ ‘एसबीएस बायोटेक लिमिटेड’ (SBS Biotech) शीर्ष पर है। इस लिस्ट में ‘मारुति सुजुकी इंडिया’ (Maruti Suzuki India) दूसरे नंबर पर जबकि ‘फिट्जी’ (Fiitjee) तीसरे नंबर पर है।  टॉप-10 एडवर्टाइजर्स की लिस्ट में जनवरी-मार्च की तुलना में अप्रैल-जून के बीच सात नए एडवर्टाइजर्स ने अपनी जगह बनाई है।  

‘मारुति सुजुकी इंडिया’ जनवरी से मार्च के बीच चौथे स्थान पर थी, जो अप्रैल से जून के बीच दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। ‘फिट्जी’ ने भी जनवरी से मार्च की तुलना में 95 स्थान की छलांग लगाते हुए अप्रैल से जून के बीच तीसरा स्थान हासिल किया है। ‘प्रॉक्टर एंड गैंबल’ (Procter & Gamble) होम प्रॉडक्ट्स जनवरी से मार्च की तुलना में 1350 स्थान की छलांग लगाते हुए अप्रैल से जून के बीच पांचवे स्थान पर पहुंच गया। वहीं, ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज’ (Reliance Industries) 108 स्थान ऊपर खिसककर सातवें नंबर पर पहुंच गया है।  

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34 साल बाद इस मैगजीन का प्रकाशन होगा बंद, 28 जुलाई को आएगा आखिरी अंक

कभी ब्रिटिश म्यूजिक प्रेस की आधारशिला रखने वाली मैगजीन ‘क्यू’ (Q) का प्रकाशन 34 साल बाद अब बंद होने जा रहा है

Last Modified:
Monday, 27 July, 2020
magazine

कभी ब्रिटिश म्यूजिक प्रेस की आधारशिला रखने वाली मैगजीन ‘क्यू’ (Q) का प्रकाशन 34 साल बाद अब बंद होने जा रहा है। इस मैगजीन का 28 जुलाई को प्रकाशित होने वाला अंक अंतिम अंक होगा।

मैगजीन के एडिटर टेड केसलर ने एक ट्वीट में कहा, ‘Q मैगजीन के बारे में कुछ बुरी खबर है। 28 जुलाई को आने वाला अंक आखिरी होगा। 'महामारी ने हमारे साथ जो बुरा किया, इससे ज्यादा उसके पास कुछ और करने के लिए नहीं था। मैंने हमारा फाइनल कवर और कॉन्टेक्स्ट के लिए संपादक के पत्र को संलग्न किया है।

अपने अंतिम अंक में संपादक के पत्र में उन्होंने लिखा, कोविड-19 ने इन पर पानी फेर दिया। मैं अपनी विफलता के लिए माफी मांगता हूं, कृपया आप लोग आगे बढ़ना जारी रखें। वहीं इस मैगजीन के बंद होने से कई लोग दुखी हैैं।

बता दें कि मैगजीन का सर्कुलेशन, जोकि 2001 में 200,000 प्रति माह था। यह अपने पीक से घटकर 28,000 प्रति माह रह गया था। ‘स्मैश हिट्स’ (Smash Hits) के लेखक मार्क एलेन और डेविड हेपवर्थ ने 1986 में इस मैगजीन को शुरू किया था।

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मैगजीन के प्रेजिडेंट को भारी पड़ गया अखबार में छपा इस तरह का लेख, देना पड़ा इस्तीफा

अमेरिका की ‘हर्स्ट मैगजीन’ से बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है कि मैगजीन के प्रेजिडेंट ट्रॉय यंग ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया

Last Modified:
Friday, 24 July, 2020
Troy-Young

अमेरिका की ‘हर्स्ट मैगजीन’ से बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है कि मैगजीन के प्रेजिडेंट ट्रॉय यंग ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दरअसल, मैगजीन में काम कर रहीं कई एम्प्लॉयीज ने उन पर भद्दी और अश्लील टिप्पणी करने का आरोप लगाया है।

दरअसल, यहां के अंग्रेजी दैनिक ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में छपे एक लेख के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है। लेख में ‘हर्स्ट मैगजीन’ की ही महिलाकर्मियों ने उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने काम का एक जहरीले माहौल तैयार किया है, उन्होंने कर्मचारियों को धमकाया और कामुक टिप्पणी की हैं। साथ ही उन पर  नस्लीय भेदभाव का माहौल तैयार करने का भी आरोप लगा है।

यंग 2013 में ‘हर्स्ट’ के साथ जुड़े थे। तब उन्हें कंपनी के डिजिटल मीडिया का हेड नियुक्त किया गया था। कंपनी का कॉरपोरेट स्ट्रक्चर बदलने के बाद 2018 में उन्हें प्रेजिडेंट के पद पर प्रमोट कर दिया गया।

‘हर्स्ट’ के एम्प्लॉयीज ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि यंग को तब भी प्रमोट किया गया था जब करीब चार कर्मचारियों ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें मानव संसाधन विभाग (HR डिपार्टमेंट) द्वारा परेशान किया जा रहा है।

गुरुवार को सभी एम्प्लॉयीज को लिखे एक ईमेल में हर्स्ट के सीईओ स्टीवन स्वार्ट्ज ने कहा कि वह और यंग सहमत थे कि उन्हें तुरंत ही इस्तीफा दे देना चाहिए, जोकि हम सभी के हित में है।

वहीं यंग ने बुधवार को एक बयान में कहा कि उनके ऊपर लगाए गए इस तरह के आरोप गलत और बहुत ही अतिशयोक्तिपूर्ण बताया है।

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कोरोना: जागरूकता बढ़ाने के लिए अखबार ने की यह अनूठी पहल

महामारी के संक्रमण की चपेट में आने से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और मास्क का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2020
Newspaper

देश-दुनिया में कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप जारी है। इस महामारी के संक्रमण की चपेट में आने से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और मास्क का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। लोगों को मास्क का इस्तेमाल करने के प्रति जागरूक करने के लिए जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से निकलने वाले स्थानीय उर्दू अखबार ‘रोशनी’ (Roshni) ने एक नई पहल की है। इसके तहत अखबार ने अपने फ्रंट पेज पर पाठकों के लिए एक मास्क अटैच किया है और उसे पहनने की अपील की है।  

पेज पर दायीं तरफ उर्दू में लिखा गया है, 'मास्क का इस्तेमाल जरूरी है।' इस संदेश के साथ एक ऐरो (Arrow) बनाया गया है, जो बायीं तरफ पेज पर प्लास्टिक के अंदर लगाए गए मास्क की ओर इशारा कर रहा है। इस बारे में रोशनी की एडिटर जहूर शोरा (Zahoor Shora) का कहना है, ‘हमने सोचा कि इस समय लोगों को यह संदेश देना महत्वपूर्ण है और उन्हें मास्क पहनने का महत्व समझाने का यह एक अच्छा तरीका था।’ अखबार की इस पहल की सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने सराहना की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अखबार की कीमत करीब दो रुपए है और अगर पब्लिशर इसके साथ मुफ्त मास्क दे रहा है तो सिर्फ इसलिए कि वह चाहते हैं कि लोग इसके महत्व के बारे में जागरूक हों। हमें इसकी सराहना करनी चाहिए। भले ही कुछ लोग घर पर इस अखबार को पढ़ते हैं, लेकिन अखबार का यह कदम एक बड़ा संदेश देता है।

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