POCSO एक्ट के उल्लंघन में फंसे ये 7 अखबार, संपादकों-कर्मियों पर FIR

महाराष्ट्र के भोईवाड़ा थाने में सात अखबारों के संपादकों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ पॉक्सो कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 January, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 January, 2020
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महाराष्ट्र के भोईवाड़ा थाने में सात अखबारों के संपादकों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ पॉक्सो कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि इन सभी ने अखबारों में दुष्कर्म और हत्या की शिकार एक नाबालिग लड़की की तस्वीर और अन्य विवरण प्रकाशित किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठाणे पुलिस की जनसंपर्क अधिकारी सुखदा नरकर ने बताया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून की संबंधित धाराओं के तहत मंगलवार को भोईवाड़ा थाने में अखबार के संपादकों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए।

रिपोर्ट की मानें तो जिन अखबारों में पीड़िता की खबर छापी गई थीं, उनमें ‘पुढारी’, ‘दोपहर का सामना’, ‘पुण्य नगरी’, ‘हिंदी समाचार’, ‘नवभारत’, ‘राजस्थान पत्रिका’ और ‘प्रवासी संदेश’ शामिल हैं।

जनसंपर्क अधिकारी के मुताबिक, 22 दिसंबर को पुलिस ने महाराष्ट्र  के ठाणे जिले के भिवंडी शहर में सात वर्षीय लड़की से दुष्कर्म और हत्या के लिए एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इन अखबारों ने नाबालिग पीड़िता की तस्वीर और अन्य विवरण के साथ घटना के बारे में खबर का प्रकाशन किया था। इस तरह पॉक्सो कानून का उल्लंघन किया गया। 

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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नवभारत टाइम्स का यह शीर्षक दर्शाता है, बेवजह ‘हीरो’ न बनें और बचाव करें

कोरोना से मुकाबले के लिए वित्त मंत्रालय के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक भी आगे आया है।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 28 March, 2020
Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
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कोरोना से मुकाबले के लिए वित्त मंत्रालय के बाद अब रिजर्व बैंक भी आगे आया है। हालांकि, रिजर्व बैंक की ‘राहत’ उसी सूरत में जनता तक पहुंचेगी, जब बैंक चाहेंगे। इस राहत के साथ ही कोरोना से जुड़ी अन्य खबरें आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों में हैं। शुरुआत करते हैं नवभारत टाइम्स से, जहां फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं है। लीड रिजर्व बैंक का फैसला है, जिसने रेपो दरों में कमी करने के साथ ही बैंकों से ईएमआई तीन महीनों के लिए टालने को कहा है। यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि ‘ईएमआई’ सिर्फ टाली जाएंगी, यानी आपको उन्हें आगे देना होगा, वो माफ नहीं होंगी।

लॉकडाउन के दौरान नजर आई बेबसी की तस्वीर को भी प्रमुखता से पेज पर रखा गया है। इस तरह की खबरों को उठाना बेहद आवश्यक है, ताकि सरकार और प्रशासन ज्यादा संवेदनशील बन सकें। वहीं, केंद्र के निर्देश और दिल्ली सरकार की तैयारी को भी जगह मिली है। केंद्र ने राज्यों से उन लोगों को खोज निकालने को कहा है, जो विदेश से आये हैं। सरकार के मुताबिक पिछले 2 महीनों में तकरीबन 15 लाख लोग विदेश से आये हैं, लेकिन जांच केवल कुछ की ही हो सकी है। उधर, केजरीवाल सरकार रोजाना 4 लाख लोगों को खाना खिलाने जा रही है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, यह खबर भी पेज पर है। एंकर में लॉकडाउन की एक अलग तस्वीर से पाठकों को रूबरू कराया गया है।

अब चलते हैं हिन्दुस्तान पर, यहां फ्रंट पेज पर केवल एक विज्ञापन है। लीड रिजर्व बैंक का फैसला है, जिसे काफी सुलझे हुए ढंग से पाठकों के समक्ष पेश किया गया है। केजरीवाल सरकार के दावे और तैयारी को सेकंड लीड का दर्जा मिला है। वहीं, कोरोना पीड़ित ब्रिटिश प्रधानमंत्री और वायरस से निपटने के लिए सेना के ऑपरेशन ‘नमस्ते’ को भी पेज पर रखा गया है।

इसके अलावा, सरकार के एक महत्वपूर्ण आदेश से भी पाठकों को अवगत कराया गया है। जिसके तहत सभी जिलाधिकारी गांवों में जाकर संक्रमित खोजेंगे। एंकर में अरविंद मिश्र की बाईलाइन को जगह मिली है। उन्होंने एक आईएएस दंपति की मनमानी और कोरोना से निपटने में आम आदमी के सहयोग के बारे में बताया है।

वहीं, अमर उजाला के फ्रंट पेज पर नवभारत टाइम्स की तरह कोई विज्ञापन नहीं है। पेज की शुरुआत लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की स्थिति बयां करती तस्वीर से हुई है। लीड दूसरी बड़ी राहत है, जिसे सरल तरह से पाठकों को समझाने का प्रयास किया गया है। इसके पास ही देश में बढ़ती कोरोना की चाल है, संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 724 पहुंच गया है।

केजरीवाल सरकार की तैयारी, ब्रिटिश प्रधानमंत्री, केरल में होम क्वारनटाइन से भागे आईएएस के निलंबन के साथ ही खौफ पैदा करती एक और खबर पेज पर है। एंकर में ललित ओझा की बाईलाइन है, जिन्होंने राजस्थान में 24 हजार लोगों की स्क्रीनिंग के बारे में बताया है।

आज भी राजस्थान पत्रिका ने अपने फ्रंट पेज के मास्टहेड में प्रयोग किया है। लीड दूसरी बड़ी राहत है, जिसमें सरकार की तैयारियों का भी जिक्र है। वहीं, पीएम का रेडियो जॉकी से संवाद, सेना की तैयारी और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश भी पेज पर है।

संक्रमण के फैलाव से बचने के लिए सरकार ने राज्यों से मजदूरों के पलायन को रोकने को कहा है, इस खबर को भी जगह मिली है। एंकर में सीबीएसई सचिव के पत्र का जिक्र है. जिन्होंने छात्रों और शिक्षकों से सीखने एवं अपग्रेड होने को कहा है।

सबसे आखिरी में बात करते हैं दैनिक जागरण की। लीड ‘कर्ज सस्ता, ईएमआई में मोहलत’ शीर्षक के साथ दूसरी बड़ी राहत को लगाया गया है। सेकंड लीड मजदूरों के पलायन पर मोदी सरकार का निर्देश है।

अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि दुनिया मंदी में प्रवेश कर चुकी है, इस खबर के साथ ही भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद का बयान भी पेज पर है। परिषद का कहना है कि अभी बड़े पैमाने पर कोरोना का टेस्ट करने की जरूरत नहीं है, जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, दूरदर्शन पर आज से शुरू होने वाली ‘रामायण’ के बारे में भी पाठकों को सूचित किया गया है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में हिन्दुस्तान आज भी सबसे आगे है, जबकि दूसरे नंबर पर नवभारत टाइम्स को रखा जा सकता है।

2: खबरों की प्रस्तुति में भी हिन्दुस्तान अव्वल है और दूसरा स्थान अमर उजाला को दिया जा सकता है।

3: शीर्षक को कलात्मक बनाने का प्रयास आज केवल नवभारत टाइम्स और राजस्थान पत्रिका ने किया है। राजस्थान पत्रिका ने जहां लीड का शीर्षक लगाया है ‘ईएमआई की चिंता छोड़ें, कोरोना से लड़ें’। वहीं, नवभारत टाइम्स ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री से जुड़ी हेडलाइन में कलात्मकता का प्रदर्शन किया है। खबर का शीर्षक है, ‘कहते थे मैं हाथ मिलाऊंगा, ब्रिटिश पीएम को हुआ कोरोना’। यह शीर्षक उन लोगों के लिए एक सबक की तरह है, जो कहते हैं कि उन्हें कुछ नहीं होगा।

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सरकार की आर्थिक राहत को लेकर कैसी रही हिंदी अखबारों की कवरेज, पढ़ें यहां

हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण में आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by
Published - Friday, 27 March, 2020
Last Modified:
Friday, 27 March, 2020
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कोरोना से जंग में सबसे ज्यादा मार झेल रहे तबके को राहत पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने आर्थिक पैकेज पैकेज का ऐलान किया है। इसी पैकेज की बारीकियों को आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों ने पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

सबसे पहले बात करते हैं अमर उजाला की, जहां फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं होने के चलते खबरों को अच्छी तरह से पेश किया जा सका है। ‘सबसे बड़ी राहत’ शीर्षक के साथ आर्थिक पैकेज को लीड लगाया गया है। खबर में हर घोषणा को विस्तार से समझाया गया है। साथ ही बाजार का हाल और विपक्ष की प्रतिक्रिया को भी जगह मिली है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकार की चुनौती को अलग से रखा है। कोरोना देश के 26 राज्यों तक पहुंच गया है। इसके अलावा, पेज पर विडियो कांफ्रेंसिंग से हुई जी-20 देशों की बैठक है और एंकर में कोरोना से जूझते इटलीवासियों पर लगी पाबंदी है।

अब रुख करते हैं दैनिक जागरण का। सरकार के आर्थिक पैकेज को फ्रंट पेज की लीड लगाया गया है, जिसका शीर्षक कोरोना को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

वहीं, नीलू रंजन की बाईलाइन और दिल्ली सरकार के अहम फैसले को पर्याप्त जगह मिली है। नीलू ने बताया है कि कोरोना संक्रमण के एक दिन में सबसे अधिक 88 मामले गुरुवार को दर्ज किये गए। दिल्ली में जरूरी वस्तुओं की दुकानें अब 24 घंटे खुली रहेंगी। एंकर में जयप्रकाश रंजन की बाईलाइन है, जिन्होंने जी-20 के वर्चुअल सम्मलेन के बारे में विस्तार से पाठकों को बताया है।

हिन्दुस्तान में भी आज पाठकों को काफी खबरें मिली हैं। फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं होने की वजह से सभी जरुरी खबरों को पर्याप्त स्थान मिला है। लीड आर्थिक पैकेज है, जबकि दिल्ली सरकार की तैयारी और कोरोना के प्रभाव से जुड़ी दो अन्य खबरों को दो-दो कॉलम में रखा गया है।

सेकंड लीड का दर्जा वर्चुअल जी-20 सम्मलेन को मिला है। वहीं, मौसम का बदलता मिजाज और महामारी से निपटने के लिए केंद्र की रणनीति भी पेज पर है। अखबार ने कोरोना से जूझ रहे अमेरिका के हाल को भी पाठकों तक पहुंचाया है, साथ ही मेट्रो बंदी की खबर भी पेज पर है। एंकर की बात करें तो यहां वायरस से जंग में मदद के लिए आगे आये उद्योगपति हैं।

वहीं नवभारत टाइम्स की बात करें तो फ्रंट पेज की शुरुआत पाठकों को समझाइश वाली टॉप बॉक्स से हुई है, जिसमें बताया गया है कि न्यूजपेपर से कोरोना नहीं फैलता। लीड आर्थिक पैकेज है, जिसे ‘बूस्टर डोज’ शीर्षक के साथ पाठकों के समक्ष पेश किया गया है। अखबार ने लॉकडाउन के दौरान पुलिस की बर्बरता को प्रमुखता से उठाया है, जो बेहद जरूरी है। पुलिसकर्मियों को पर्याप्त निर्देश दिए जाने की आवश्यकता है कि पब्लिक के साथ किस तरह से पेश आना है। साथ ही मजदूरों की मजबूरी को भी पेज पर रखा गया है।

दिल्ली सरकार के 24 घंटे जरूरी वस्तुओं की दुकानें खोलने के फैसले के साथ ही कोरोना से देश और विदेश के हाल के बारे में भी बताया गया है। एंकर में भी लोगों को अखबारों के बारे में जागरूक करता समाचार है। हालांकि, पूरी खबर में यह बताने का प्रयास नहीं किया गया है कि RWA का मतलब क्या है। यह जरूरी नहीं कि हर पाठक को वह जानकारी हो, जो अखबार तैयार करने वाले पत्रकारों को होती है, लिहाजा इस तरह के मामलों में फुलफॉर्म का भी जिक्र किया जाना चाहिए।

आखिरी में रुख करते हैं राजस्थान पत्रिका का। अखबार ने सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर अपने मास्टहेड में प्रयोग किया है। लीड आर्थिक पैकेज है, जिसे काफी विस्तार से पाठकों के सामने प्रस्तुत किया गया है। साथ ही कोरोना की बढ़ती चाल का भी लीड में जिक्र है।

वर्चुअल जी-20 सम्मलेन, कोरोना से मुकाबले के लिए मोदी सरकार की रणनीति और सेना की तैयारी को भी प्रमुखता से पेज पर रखा गया है। एंकर में मुकेश केजरीवाल की बाईलाइन है, जिन्होंने नीति आयोग के उपाध्यक्ष से बातचीत की है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट की बात करें, तो आज हिन्दुस्तान अव्वल है। अखबार का फ्रंट पेज काफी संतुलित एवं आकर्षक नजर आ रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति का जहां तक सवाल है, तो आज राजस्थान पत्रिका और अमर उजाला ने सबको पीछे छोड़ दिया है। दोनों अखबारों ने आर्थिक पैकेज वाली खबर को काफी विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा है।

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में आज सभी अखबारों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी है, लेकिन विजेता का ताज राजस्थान पत्रिका के सिर ही सजेगा। ‘अन्न-धन का ईंधन’ पैकेज के पीछे सरकार की सोच और तैयारी को ज्यादा स्पष्ट करता है। 

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अखबारों ने दोहराई फेक न्यूज से लड़ाई के प्रति प्रतिबद्धता, पाठकों को यूं दिलाया भरोसा

ऐसे समय में जब कोरोनावायरस जैसी महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है, फेक न्यूज की आशंका भी बढ़ गई है।

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
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ऐसे समय में जब कोरोनावायरस जैसी महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है, फेक न्यूज की आशंका भी बढ़ गई है। इन सबके बीच ‘इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी’ (INS) केरल ने एक विज्ञापन के जरिये पाठकों के समक्ष फेक न्यूज से लड़ने और फर्जी सूचनाओं का प्रसार रोकने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।  

इस बारे में केरल के सभी अखबारों में 25 मार्च के एडिशन में फ्रंट पेज पर एक विज्ञापन पब्लिश किया गया है। इसमें बताया गया है कि ऐसे समय में फेक न्यूज काफी घातक साबित हो सकती है और लोगों के मन में भय पैदा कर सकती है। ऐसे में हम अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह समझते हैं और रोजाना अपने पाठकों को संपूर्ण तथ्यों की जांच करने के बाद ही विश्वसनीय सूचनाएं उपलब्ध कराते हैं।

 

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आज इस अखबार का फ्रंट पेज है सबसे बेहतर

कोरोना के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर जनता का साथ मांगा है।

नीरज नैयर by
Published - Thursday, 26 March, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
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कोरोना के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर जनता का साथ मांगा है। वहीं, केंद्रीय कैबिनेट ने वायरस के खौफ को देखते हुए आमजन को राहत पहुंचाने वाले कुछ फैसले लिए हैं। इन दो खबरों के साथ ही लॉकडाउन के पहले दिन का हाल दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सुर्खियां हैं। सबसे पहले बात हिन्दुस्तान की। फ्रंट पेज के टॉप बॉक्स में ‘घरों में राशन नहीं, बाजार में भी आपूर्ति घटी’ शीर्षक के साथ लोगों की परेशानी को रखा गया है। लीड कैबिनेट के फैसले है, जिनके तहत 80 करोड़ लोगों को सस्ता अनाज दिया जाएगा।

पीएम के जनता से संवाद को अलग से दो कॉलम में रखा गया है। मोदी ने कोरोना के खिलाफ जंग की तुलना महाभारत से की, साथ ही उन्होंने लोगों से इस संकट की घड़ी में बेजुबानों का ख्याल रखने को भी कहा। प्रिंट चार्ल्स के कोरोना की चपेट में आने के साथ ही मुख्यमंत्री केजरीवाल की सख्ती को भी पेज पर जगह मिली है। केजरीवाल ने साफ किया है कि डॉक्टरों से घर खाली करवाने वालों पर कार्रवाई होगी। वहीं, काबुल में गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले और अयोध्या में अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला को भी पर्याप्त स्थान मिला है। एंकर में झारखंड की घटना का जिक्र है, जो दर्शाती है कि कोरोना का खौफ किस कदर लोगों के दिमाग पर असर कर रहा है। इसके अलावा, पेज पर कुछ अन्य समाचार भी हैं।

अब चलते हैं राजस्थान पत्रिका पर। ‘न पेट भरने का जुगाड़, न रहने का ठिकाना’ शीर्षक के साथ लॉकडाउन में लोगों की पीड़ा को लीड लगाया गया है। पीएम का जनता से संवाद, मध्यप्रदेश में कोरोना से पहली मौत भी लीड का हिस्सा है। साथ ही कैबिनेट के फैसलों को हाईलाइट करके दिखाया गया है, ताकि पाठकों को एक ही झटके में सब समझ आ जाए। हालांकि, ‘कैबिनेट के फैसले’ वाले इस बॉक्स में चार नंबर पर भोपाल में संक्रमित पत्रकार के बारे में बताया गया है। अब क्या पाठक इसे भी कैबिनेट का फैसला माने? यहां निश्चित रूप से फ्रंट पेज की टीम से गलती हुई है।

कैबिनेट की बैठक के फोटो को अलग से रखा गया है, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग साफ़ नजर आ रही है। इसके अलावा, काबुल में गुरुद्वारे पर हमला और अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला की खबर को भी स्थान मिला है। एंकर में लोगों की हाथ धोने की आदत से जुड़ा समाचार है।

वहीं, नवभारत टाइम्स का रुख करें तो यहां पीएम के संवाद को लीड लगाया गया है। इसी में केंद्रीय कैबिनेट के फैसले और केजरीवाल सरकार की तैयारी का भी जिक्र है। लॉकडाउन से परेशानी और पुलिस की सख्ती अलग-अलग लगाया गया है। जहां एक व्यक्ति ने नौकरी जाने के चलते अपनी जान दे दी, वहीं दिल्ली पुलिस ने बाहर निकले 5100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, कोरोना के बढ़ते मामले और काबुल में गुरुद्वारे पर हुए हमले को भी प्रमुखता के साथ जगह दी गई है। इसके अलावा, अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला के साथ कुछ अन्य समाचार भी पेज पर हैं।

आज अमर उजाला पर नजर डालें तो कोरोना के खौफ के बीच कैबिनेट के फैसलों को लीड लगाया गया है। पीएम का जनता से संवाद और अपील अलग से दो कॉलम में है। लीड में संक्रमित प्रिंस चार्ल्स सहित कोरोना से जुड़ी कई खबरों का जिक्र है। काबुल में गुरुद्वारे पर हुए हमले को अखबार ने प्रमुखता के साथ पाठकों तक पहुंचाया है।

इसके अलावा नए घर में विराजे रामलला और एंकर में सामाजिक दूरी न बनाने पर होने वाले दुष्परिणामों का जिक्र है। साथ ही इसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री का बयान भी शामिल है, जिनका कहना है कि यदि लोगों ने लॉकडाउन नहीं माना तो गोली मारने के आदेश जारी किये जायेंगे।

आखिरी में बात कर लेते हैं दैनिक जागरण की। फ्रंट पेज पर पीएम मोदी के संवाद को लीड लगाया गया है। वहीं, कैबिनेट की बैठक में नजर आई सोशल डिस्टेंसिंग और प्रकाश जावड़ेकर के बयान को अलग से चार कॉलम जगह मिली है, लेकिन केंद्रीय कैबिनेट के फैसलों को प्रमुखता से दर्शाने का प्रयास नहीं किया गया है। महत्वपूर्ण फैसलों को इस तरह से प्रदर्शित किया जाना चाहिए कि पाठकों को उन्हें खबर में खोजना न पड़े। कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या और आर्थिक पैकेज की तैयारी को प्रमुखता के साथ पेज पर रखा गया है। एंकर में अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला हैं।

आज का किंग कौन?

1: लेआउट के मामले में नवभारत टाइम्स सबसे आगे है, जबकि राजस्थान पत्रिका और अमर उजाला को दूसरे नंबर पर रखा जा सकता है।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो सभी ने अच्छा किया है, फिर भी अमर उजाला को पहले स्थान पर रखा जाना चाहिए। अखबार ने लीड को काफी समृद्ध बनाया है।

3: शीर्षक को कलात्मक बनाने के प्रयास में नवभारत टाइम्स और राजस्थान पत्रिका ही आज सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं।

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The Hindu समूह ने अपनी मैगजीन को लेकर लिया ये बड़ा निर्णय

ग्रुप की ओर से एक ट्वीट कर पाठकों को इस बारे में दी गई है जानकारी

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
The Hindu

महामारी बन चुके कोरोना वायरस (कोविड-19) के खतरे को देखते हुए ‘द हिंदू’ (THE HINDU) ग्रुप की स्पोर्ट्स मैगजीन ‘स्पोर्टस्टार’ (SPORTSTAR) ने अपने 43 साल के इतिहास में पहली बार अपना प्रिंट इश्यू 15 अप्रैल तक बंद करने की घोषणा की है। ग्रुप की ओर से जारी एक ट्वीट में कहा गया है, ‘प्रिय पाठको, करीब 43 साल में पहली बार हम 15 अप्रैल तक अपना प्रिंट एडिशन बंद कर रहे हैं। हालांकि, हमारी वेबसाइट #StayIndoors पर हम अपने वर्तमान और आने वाले इश्यू आपको उपलब्ध कराएंगे, जिन्हें आप वेबसाइट से फ्री में डाउनलोड कर सकते  हैं।’

इस ट्वीट में एक क्रिएटिव भी शामिल किया गया, जिसमें ओलंपिक के पांचों छल्लों (नीला, पीला, काला, हरा और लाल) को दिखाया गया है, लेकिन इन्हें दूर-दूर कर सोशल डिस्टेंसिंग का मैसेज दिया गया है।

बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में 21 दिनों (चार अप्रैल तक) के लॉकडाउन की घोषणा की है। ग्रुप की ओर से यह कदम इसी दिशा में उठाया गया है।

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इस वजह से मुंबईवासियों को अभी नहीं मिलेगा अखबार

महाराष्ट्र के उद्योगमंत्री के साथ बैठक में कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षा पर चर्चा हुई और यह तय हुआ कि अब 1 अप्रैल 2020 से अखबारों का प्रकाशन व डिस्ट्रीब्यूशन किया जाएगा।   

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 March, 2020
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मुंबई में अब 31 मार्च तक कोई भी न्यूजपेपर प्रकाशित नहीं होगा। यह फैसला पब्लिशर्स, समाचार पत्र विक्रेताओं के संगठन बृहनमुंबई वृतपत्र विक्रेता संघ और घरों में न्यूजपेपर पहुंचाने वाले हॉकर्स ने महाराष्ट्र के उद्योगमंत्री सुभाष देसाई से मुलाकात के बाद लिया है। इस बैठक में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और फैलते संक्रमण से सुरक्षा पर चर्चा हुई। साथ ही यह तय हुआ कि अब एक अप्रैल 2020 से अखबारों का प्रकाशन और डिस्ट्रीब्यूशन किया जाएगा।         

मुंबई में कोरोना वायरस की वजह से फिलहाल अखबारों का प्रकाशन और इसका डिस्ट्रीब्यूशन रुका हुआ है।

गौरतलब है कि बीते रविवार को मुंबई में अखबारों की प्रिंटिंग पहले की तरह हुई, लेकिन ‘जनता कर्फ्यू’ की वजह से समाचार पत्र विक्रेताओं ने अखबारों को नहीं खरीदा और हॉकर्स ने भी कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए घरों में अखबार पहुंचाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सभी प्रिंट किए हुए अखबार वापस मंगा लिए गए। इसके अगले दिन लोकल ट्रेनों के बंद हो जाने करने के कारण कुछ अखबारों का प्रकाशन नहीं हुआ।

फिलहाल महाराष्ट्र में कर्फ्यू लगा हुआ है, जिसके चलते मुंबई में सभी लोकल ट्रेन्स बंद हैं। लिहाजा इसी वजह से ज्यादातर प्रिंट मीडिया कर्मी घर पर ही हैं और प्रिंटिंग से जुड़े लोगों को भी काफी दिक्कतों का सामना करते हुए प्रिंटिंग प्लांट तक जाना पड़ रहा है। ऐसे में एसोसिएशन ने अखबार की छपाई को बंद करने का निर्णय लिया है। हालांकि, अखबारों के ऑनलाइन एडिशन चलते रहेंगे।

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हिंदी अखबारों में आज कैसी रही कोरोना की कवरेज, पढ़ें यहां

कोरोना से मुकाबले के लिए पूरा देश 21 दिनों के लिए लॉकडाउन हो गया है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों के नाम अपने संबोधन में कल इसकी घोषणा की।

नीरज नैयर by
Published - Wednesday, 25 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 March, 2020
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कोरोना से मुकाबले के लिए पूरा देश 21 दिनों के लिए लॉकडाउन हो गया है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों के नाम अपने संबोधन में कल इसकी घोषणा की। 21 दिनों के लॉकडाउन से घबराहट और भय का माहौल जरूर है, लेकिन यह मौजूदा वक्त में बेहद आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी की यही घोषणा आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की प्रमुख खबर है। आज सबसे पहले बात करते हैं नवभारत टाइम्स की। ’21 दिनों तक लॉक रहेगा देश’ शीर्षक के साथ पीएम के ऐलान को फ्रंट पेज की लीड लगाया गया है। साथ ही वित्त मंत्रालय की तरफ से देशवासियों को मिली राहत का भी जिक्र है। हालांकि, अखबार ने खबर में मोदी द्वारा अखबारों की तारीफ पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित किया है, जिसे पढ़ने में शायद लोग अधिक दिलचस्पी न दिखाएं। वहीं खाली कराये गए शाहीन बाग को फोटो के साथ पेज पर रखा गया है। इसके अलावा, कोरोना के चलते देश-विदेश के हाल से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। एंकर में दिल दुखाने वाली खबर है। दिल्ली में किराये पर रहने वाले डॉक्टरों को मकान मालिकों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्हें घर खाली करने की धमकी मिल रही है।

हिन्दुस्तान का रुख करें तो यहां फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं। लीड 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा है, जिसमें वित्त मंत्रालय से मिली राहत और लॉकडाउन से जुड़े दिशा-निर्देशों को विस्तार से समझाया गया है। दिल्ली में रहने वाले डॉक्टरों की पीड़ा को हिन्दुस्तान ने भी प्रमुखता से पेज पर रखा है। इसके अलावा, पेज पर कई सिंगल समाचार हैं। इनमें चीन में अब हंता वायरस का खौफ, एक साल के लिए टले ओलंपिक और राज्यसभा चुनाव अगले आदेश तक स्थगित प्रमुख हैं।

अब नजर डालते हैं दैनिक भास्कर पर। ‘21 दिन पूरा देश लॉक’ शीर्षक के साथ पीएम के ऐलान को फ्रंट पेज की लीड लगाया गया है। आइब्रो में अखबार ने यह भी बताया है कि ‘लॉकडाउन सबसे बड़ी महामारी के खिलाफ भारत का दुनिया में सबसे बड़ा फैसला’ है। पीएम की घोषणा के बाद देशवासियों में फैली घबराहट को दर्शाता फोटो भी पेज पर है। इसके अलावा देश-दुनिया का हाल, लॉकडाउन के दिशा निर्देश, स्थगित ओलंपिक और वित्त मंत्रालय से मिली राहत के बारे में भी पाठकों को बताया गया है।

आज दैनिक जागरण को देखें तो यहां भी पीएम की घोषणा लीड है, लेकिन उसे प्रस्तुत थोड़े अलग अंदाज में किया गया है। पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में जिस पोस्टर का जिक्र किया था, अखबार ने उसी से खबर का शीर्षक बनाया है। यानी ‘कोरोना का मतलब– कोई रोड पर ना निकले’। खाली कराये गए शाहीन बाग को भी पर्याप्त जगह मिली है। वित्त मंत्रालय से मिली राहत को एंकर में रखा गया है।

वहीं, अमर उजाला ने आज से शुरू हुए नवरात्र की शुभकामनाओं के साथ ही पाठकों से घर पर रहने का संकल्प लेने की अपील करते हुए ‘लॉकडाउन’ को लीड लगाया है। इसमें लॉकडाउन के दिशा-निर्देश, देश-विदेश के हालात सहित सभी महत्वपूर्ण जानकारी है। खाली कराये गए शाहीन बाग को अमर उजाला ने भी बड़ी जगह दी है। 101 दिनों से यहां नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन चल रहा था। एंकर में वित्त मंत्रालय से देशवासियों को मिली राहत है।

सबसे आखिरी में रुख करते हैं राजस्थान पत्रिका का। लीड 21 दिनों के लॉकडाउन को लगाया गया है। इसमें लॉकडाउन के दिशा-निर्देश, देश-दुनिया का हाल, खाली शाहीन बाग और वित्त मंत्रालय से मिली राहत का भी जिक्र है। लेकिन पेज पर जितनी जगह कोरोना से जुड़ी खबरों को मिली है, लगभग उतनी ही समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र को भी मिली है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट की बात करें तो दैनिक जागरण को छोड़कर सभी अखबारों के फ्रंट पेज अच्छे दिखाई दे रहे हैं। लिहाजा किसी एक को विजेता घोषित करना सही नहीं होगा।

2: खबरों की प्रस्तुति का जहां तक सवाल है, तो आज दैनिक भास्कर ने सबको पीछे छोड़ दिया है। लॉकडाउन की खबर को दैनिक भास्कर ने इस तरह से प्रस्तुत किया है कि पाठकों को एक ही नजर में सबकुछ समझ आ जाये। हिन्दुस्तान और अमर उजाला को इसके बाद रखा जा सकता है।

3: कलात्मक शीर्षक के लिहाज से देखें तो नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर और अमर उजाला के साथ-साथ दैनिक जागरण ने भी कुछ अलग करने का प्रयास किया है।

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TOI ने विडियो जारी कर बताया, आपका अखबार कैसे है सुरक्षित

अंग्रेजी दैनिक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने एक विडियो जारी किया है, जिसमें यह बताया गया है कि कैसे अखबार की प्रिंटिंग पूरी तरह से एक स्वचालित प्रक्रिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 March, 2020
TOI

अंग्रेजी दैनिक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने एक विडियो जारी किया है, जिसमें यह बताया गया है कि कैसे अखबार की प्रिंटिंग पूरी तरह से एक स्वचालित प्रक्रिया है और बिना किसी मानवीय संपर्क के चलती है। दरअसल, इस विडियो के जारी करने का मकसद उन झूठी अफवाहों को फैलने से रोकना है, जिसमें कहा जा रहा है कि अखबार छूने से कोरोना फैलता है।

विडियो में बताया गया है कि कैसे न्यूजप्रिंट और प्रिंटिंग में प्रयोग होने वाले अन्य कच्चे माल, उसकी तह, पैकेजिंग और अखबार को बाहर निकालने तक पूरी प्रक्रिया  एक रोबोटिक प्रक्रिया है।

इसके अलावा यह भी बताया गया है कि आपके शहरों तक पहुंचाने वाले वाहनों   में अखबारों के बंडलों को दस्ताने और चेहरे पर मास्क पहनकर लोड किया जाता है। इतना ही नहीं टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा जारी इस इस विडियो में यह भी बताया गया है कि अखबार को डिपो से पाठकों के घरों तक पहुंचाने वाले हॉकर्स भी स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं।

वहीं, सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक निर्देश जारी किया है कि वे कोरोनावायरस महामारी के कारण चल रहे लॉकडाउन के दौरान प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को सुचारू रूप से काम करने दें।

देखें विडियो-

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कोरोना के कोहराम ने प्रिंट मीडिया के लिए यूं बजाई 'खतरे की घंटी'

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कई राज्यों में सरकार ने लॉकडाउन कर दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 24 March, 2020
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कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कई राज्यों में सरकार ने लॉकडाउन कर दिया है। यही नहीं, लॉकडाउन का पालन न करने पर कर्फ्यू तक की घोषणा की गई है। ऐसे में सोमवार को देश के कई अखबारों ने सोमवार को अपने एडिशन नहीं छापे।

इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस स्थिति का सीधा असर विज्ञापन बिलों पर पड़ेगा और इस सेक्टर को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। माना जा रहा है कि कुछ दिनों में सर्कुलेशन फिर शुरू हो जाएगा, लेकिन यह ट्रेंड यदि लगातार जारी रहा तो इस तिमाही में अखबारों को काफी नुकसान होगा।  

इस स्थिति के बारे में एक मीडिया विश्लेषक का कहना है, ‘अखबारों की बात करें तो उनका रेवेन्यू सर्कुलेशन, एडवर्टाइजिंग, सबस्क्रिप्शन और इंटरनेट व मोबाइल एप्स से आता है। इनमें से सबसे ज्यादा रेवेन्यू (75 प्रतिशत से अधिक) एडवर्टाइमेंट से आता है। एक दिन का नुकसान विज्ञापन बिलों को काफी प्रभावित कर सकता है, जब तक कि बाद के एडिशंस से इसे पूरा नहीं किया जाता। लॉकडाउन और मार्केट में मंदी के कारण अखबार पहले से ही नुकसान झेल रहे हैं।’

मीडिया संस्थान जैसे-टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स, मिड-डे और इंडियन एक्सप्रेस ने घोषणा की कि वे सोमवार को मुंबई में अपना अखबार नहीं बांटेंगे। सूत्रों का कहना है कि कई अन्य केंद्रों भी इसे फॉलो कर सकते हैं।

ऐसे समय में अखबार ऑनलाइन एडिशन निकाल रहे हैं, लेकिन उसमें विज्ञापन नहीं आ रहा है। इस बारे में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के रेजिडेंट एडिटर रह चुके वरिष्ठ पत्रकार सुदीप मुखिया का कहना है, ‘इस समय मार्केट की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। यदि हम विज्ञापनों की बात करें तो ये ज्यादातर सरकारों द्वारा अथवा ब्रैंड्स द्वारा जारी किए जाते हैं जो कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सैनिटाइजर्स, फ्लोर क्लीनर्स आदि को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में विज्ञापन पर्याप्त संख्या में नहीं मिल रहे हैं, वहीं अखबार न छपना विज्ञापन के बिलों के लिए बड़ा झटका है।’

अखबार में विज्ञापन की स्थिति के बारे में बतौर एक विश्लेषक ‘दैनिक जागरण’ के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक निशिकांत ठाकुर का कहना है कि जब कोई कैंपेन चल रहा होता है अथवा कोई पहले से तय विज्ञापन होता है तो आमतौर पर उस विज्ञापन की बुकिंग अखबार में एक हफ्ते पहले ही हो जाती है। कई बार विज्ञापन अखबार छपने से कुछ समय पूर्व ही मिलता है। इस स्थिति में विज्ञापन के रेट ज्यादा होते हैं। सामान्य स्थिति में यदि अखबार में उस समय विज्ञापन नहीं लग पता है तो उसे अगले एडिशन में लगा लिया जाता है, लेकिन इस समय की स्थिति बिल्कुल अलग है। हाल के समय में कभी ऐसा नहीं हुआ कि इस तरह के कारणों से अखबार न छपे हों। ऐसे में विज्ञापन बिलों में नुकसान अप्रत्याशित है और इस तरह के नुकसान से तभी बचा जा सकता है कि अखबारों की प्रिंटिंग तुरंत प्रभाव से शुरू कर दी जाए। एक हफ्ते अखबार न छपने का मतलब है कि उसे काफी ज्यादा नुकसान हो सकता है।

‘इंडियन रीडरशिप सर्वे की तीसरी तिमाही’ (Q3 2019) के आंकड़ों पर नजर डालें तो दैनिक जागरण ने वित्तीय वर्ष 2018-19 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि न्यूजप्रिंट की कीमतों में बढ़ोतरी और विज्ञापन में कमी इंडस्ट्री के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है और वित्तीय नतीजों में इसका असर दिख रहा है। इस दौरान इस ग्रुप का एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू 1382.70 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है। इनमें से 78 प्रतिशत रेवेन्यू प्रिंट से आता है, यह स्पष्ट रूप से एक अखबार के लिए विज्ञापनों के महत्व को दर्शाता है।

हालांकि, निराशा के इस दौर में सुदीप मुखिया ने कुछ उम्मीद जताते हुए कहा, ’यह एक असामान्य स्थिति है और एडवर्टाइजर्स अपने कदम वापस नहीं खींचेंगे। अखबारों के पास निष्ठावान कस्टमर्स हैं जो अपने ब्रैंड की कम्युनिकेशन वैल्यू के लिए फिर इस माध्यम में वापस आएंगे।’

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‘सोशल डिस्टेंस’ पर कुछ ऐसा है दैनिक भास्कर का प्रयोग

नवभारत टाइम्स में आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है जबकि दैनिक जागरण के पाठकों को दो फ्रंट पेज पढ़ने को मिले हैं

नीरज नैयर by
Published - Tuesday, 24 March, 2020
Last Modified:
Tuesday, 24 March, 2020
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कोरोना के खिलाफ ‘लड़ाई’ सरकार अकेले नहीं जीत सकती, उसमें हम सभी की भागीदारी आवश्यक है, लेकिन अफसोस की बात है कि सबकुछ जानते हुए भी कई लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं उठाना चाहते। ‘लॉक डाउन’ का खुलकर उल्लंघन इसका सबूत है और इसीलिए सरकारों को सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं। यही ‘सख्ती’ आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सबसे बड़ी खबर है। सबसे पहले बात करते हैं दैनिक भास्कर की। फ्रंट पेज पर आज कोई विज्ञापन नहीं है, इस वजह से खबरों को बेहतर तरह से पाठकों के समक्ष रखा गया है।

अखबार का मास्टहेड आम दिनों की अपेक्षा में फैला हुआ है। यानी शब्दों के बीच ज्यादा अंतर है, इसके ठीक नीचे इसका मतलब भी समझाया गया है। मास्टहेड के नीचे नीले रंग में लिखा है ‘...इन दिनों दूरी है जरूरी’। सरकार यही बात तो लोगों को समझाने की कोशिश कर रही है कि कोरोना को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंस बेहद जरूरी है। लीड में दिल्ली सहित कई राज्यों की स्थितियों को बयां किया गया है, साथ ही यह भी बताया गया है कि बेवजह घूमने वालों को अब कीमत चुकानी होगी। इसके अलावा पेज पर मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह की वापसी, दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र, रामलला के अस्थायी मंदिर के लिए जयपुर में बने सिंहासन से जुड़ा समाचार भी है। एंकर में उन लोगों की आपबीती को रखा गया है, जिन्होंने कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ जीती है।

अब बात करते हैं अमर उजाला की। लीड कोरोना से मुकाबले के लिए सरकार की सख्ती है, जिसे आधे पेज तक उतारा गया है। इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के बयान को भी जगह मिली है, जो बेहद जरूरी था। लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि कोरोना वायरस हवा से फैलता है, लेकिन डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कुछ नहीं है। इस तरह का कोई मामला अब तक दर्ज नहीं किया गया है। इसके अलावा, पेज पर दिल्ली का बजट है। केजरीवाल सरकार ने आयुष्मान योजना को दिल्ली में भी लागू कर दिया है।

हिन्दुस्तान का रुख करें, तो यहां फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं। इस वजह से ज्यादा खबरों की गुंजाइश नहीं बन सकी है। लीड कोरोना से मुकाबले के लिए सरकार की सख्ती है, इसमें पीएम मोदी की उद्योग जगत से अपील और बाजार के हाल का भी जिक्र है। इसके अलावा, तीन सिंगल समाचारों को भी पेज पर जगह मिली है। जिसमें मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह की वापसी भी शामिल है।

आज राजस्थान पत्रिका के फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं है। ‘लॉकडाउन फेल, दिल्ली समेत 5 प्रदेशों में कर्फ्यू’ शीर्षक के साथ लीड को आधा पेज तक लगाया गया है। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह की ताजपोशी भी प्रमुखता के साथ पेज पर है। लोकसभा और राज्य सभा से जुड़े समाचारों के साथ ही कोरोना के प्रभाव की कुछ अन्य खबरों को भी स्थान मिला है।

इसके अलावा, एक बेहद महत्वपूर्ण खबर को भी अखबार ने पाठकों के समक्ष रखा है। एलआईसी ने प्रीमियम भरने की तारीख को 15 अप्रैल तक बढ़ा दिया है।

अब चलते हैं नवभारत टाइम्स पर, जहां जैकेट विज्ञापन की वजह से तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। पूरा पेज एक तरह से कोरोना के नाम समर्पित है। लीड खबर सरकार की सख्ती से उठाई गई है, इसमें दिल्ली सहित पूरे देश के हाल को भी बयां किया गया है।

इसमें 25 मार्च से देश में हवाई सफर पर रोक और पूर्वोत्तर की छात्रा से अभद्रता का भी जिक्र है। दिल्ली में नार्थ ईस्ट की छात्रा को चीनी समझकर एक 50 वर्षीय व्यक्ति ने उसे पहले कोरोना कहा फिर उसके मुंह पर थूक दिया। इसके अलावा, पेज पर दिल्ली का बजट और शिवराज सिंह की ताजपोशी का समाचार है। अखबार ने संक्षिप्त में भी एक बहुत महत्वपूर्ण खबर को जगह दी है, जिसके मुताबिक पेट्रोल-डीजल के दामों में जल्द बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।

सबसे आखिरी में रुख करते हैं दैनिक जागरण का। अखबार ने आज दो फ्रंट पेज बनाये हैं, पहला पेज कोरोना के नाम है। लीड खबर की शुरुआत ‘पूरा देश लॉकडाउन, नहीं माने तो जेल’ शीर्षक के साथ हुई है। साथ ही इसमें उद्योग जगत की मांग को भी रखा गया है, जो चाहता है कि उसे छह महीने तक ब्याज रहित कर्ज मिले।

दूसरे फ्रंट पेज की बात करें तो यहां केवल दिल्ली के बजट का जिक्र है। कोरोना के खौफ के बीच अखबार ने दिल्लीवासियों को बजट के बारे में अच्छी तरह से समझाया है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के नजरिये से देखें तो नवभारत टाइम्स पहले नंबर पर है, जबकि दूसरा स्थान दैनिक भास्कर को दिया जा सकता है।

2: खबरों की प्रस्तुति में आज दैनिक भास्कर सबसे आगे है। अखबार ने लीड खबर को काफी विस्तार और आकर्षक अंदाज में पाठकों के समक्ष रखा है। इसके बाद नवभारत टाइम्स और राजस्थान पत्रिका का नंबर आता है।

3: कलात्मक शीर्षक की बात करें तो आज किसी अखबार ने ज्यादा कुछ करने का प्रयास नहीं किया है, फिर भी दैनिक जागरण और अमर उजाला को सबसे बेहतर कहा जा सकता है। दोनों अखबारों ने सामान्य से अलग हटकर लीड का शीर्षक लगाया है।

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