‘उनको क्या पता कि कैसे जी रहे हैं ये बच्चे-बच्चियां’

कई बार इन बच्चों को कोई पैसा दे देता है तो इनकी आंखों में एकदम से चमक आ जाती है तो कई बार इन्हें निराश होना पड़ता है

Last Modified:
Friday, 30 August, 2019
Arjun Nirala


अर्जुन निराला, पत्रकार और कवि।। आपने देखा होगा कि बड़े शहरों में लाल बत्ती पर वाहनों के रुकते ही बच्चे-बच्चियों का झुंड अचानक से सड़क पर इन वाहनों...
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