कविता के माध्यम से वरिष्ठ पत्रकार डॉ. विनोद पुरोहित ने कांच के टूटने का उदाहरण देते हुए उसके टुकड़ों में दिखते जिंदगी के हर अक्स के बारे में बताया है
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समाचार4मीडिया ब्यूरो