'अटल सत्ता' का मंत्र दे समाप्त हुआ 'अटल युग'

भारतीय सियासत के शलाका पुरुष, अजातशत्रु, महाकवि, महामानव अटल बिहारी वाजपेयी का महाप्रयाण...

Last Modified:
Friday, 17 August, 2018
Samachar4media

सुधांशु त्रिपाठी
वरिष्‍ठ पत्रकार

भारतीय सियासत के शलाका पुरुष, अजातशत्रु, महाकवि, महामानव अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार शाम महाप्रयाण हो गया। काल के कपाल पर लिखने और मिटाने वाले महापुरुष को इस मानव जीवन से मुक्ति मिल गई। अटलजी की एम्स में गंभीर हालत को सुनकर बुधवार शाम से ही जाने क्यूं मन व्यथित था। जहां एक ओर उनके करोड़ों प्रशंसक उनके जीवन के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर मैं घर के बड़े-बुजुर्ग की असहनीय मृत्यु पीड़ा को समझते हुए परमपिता से उनकी मुक्ति की कामना कर रहा था। इसे आप सब मेरी समझदानी का छोटापन भी कह सकते हैं। मगर जिस तरह से पिछले एक दशक से अटलजी अपनी बीमारियों और बुढ़ापे से लड़ रहे थे। उनकी हालिया तस्वीरों को देखकर मन द्रवित हो उठता था। ऐसे में संपूर्ण यश, कीर्ति, परम वैभव, पद-प्रतिष्ठा, सम्मान, पुरस्कार और उपलब्धियां हासिल कर चुके अटलजी के महाप्रयाण पर हम प्रशंसकों आंसू बहाना ठीक नहीं है।

मृत्यु मानव जीवन का 'अटल सत्य' है। जिसे हम सबको सहर्ष स्वीकारना चाहिए। वह भी तब जब व्यक्ति अपना लगभग पूरा जीवन उत्साह के साथ जी चुका हो। साथ ही अंतिम समय में मृत्यु शैय्या पर लंबे समय से महाकाल के दूतों के साथ जीवन-मृत्यु का खेल, खेल रहा हो।

अटलजी के ही शब्दों में कहूं तो-

'जीवन की ढलने लगी सांझ

उमर घट गई, डगर कट गई

जीवन की ढलने लगी सांझ।

बदले हैं अर्थ, शब्द हुए व्यर्थ

शांति बिना खुशियाँ हैं बांझ।'

बचपन में अटलजी, उनकी कविताएं और उनके ओजस्वी भाषणों की चर्चा घर के बड़े-बुजुर्ग करते रहते थे। पढ़ाई के दौरान सरस्वती शिशु मंदिर से लेकर भटवली बाजार इंटर और डिग्री कालेज तक। फिर गोरखपुर यूनिवर्सिटी से लेकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय तक कई सांस्कृतिक आयोजनों में अटलजी की रचनाओं को सुनाकर हमने वाहवाही भी लूटी। उसमें से एक कविता यह भी थी-:

'एक नहीं दो नहीं करो बीसों समझौते, पर स्वतंत्रता भारत का मस्तक नहीं झुकेगा।

अगणित बलिदानो से अर्जित यह स्वतंत्रता, अश्रु स्वेद शोणित से सिंचित यह स्वतन्त्रता। त्याग तेज तपबल से रक्षित यह स्वतंत्रता, दु:खी मनुजता के हित अर्पित यह स्वतन्त्रता।'

गौरतलब है कि नब्बे के दशक में रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान अटलजी के भाषणों ने भारतीय जनमानस को काफी उद्वेलित किया। दावे के साथ कह सकता हूं कि उस दौरान गोरखपुर मंडल की धरती पूरी तरह उनके रंग में रंगी थी, तो हम सब भी कहां तक इससे अछूते रहते। वर्ष 2004 के आम चुनावों के दौरान एमपी इंटर कालेज में लाखों लोगों की भीड़ के बीच उनको दूर से ही देखने और सुनने का मौका मिला था। उनकी वाणी में एक सम्मोहन था, जो विरोधियों को भी उनका मुरीद बना देता था।

गोरक्षपीठ में अटूट आस्था और विश्वास ने हमारी आस्तिकता को और भी धार दी। लेकिन सच कहूं तो उसके केंद्र बिंदु अटलजी और बड़े महाराज अवैद्यनाथ जी थे। जो आज के भाजपा केंद्रीय और प्रदेशीय नेतृत्व से कहीं ज्यादा प्रगतिशील और लोकतांत्रिक नजर आते थे। अपनी आलोचनाओं को सुनने, जानने और समझने का माद्दा भी रखते थे। तब इतनी धार्मिक कट्टरता नहीं थी, जितनी की आज नजर आती है।

हम सबने छात्र जीवन में जाने कितनी बार 'वोट अटल को, वोट कमल को' और 'बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का' जयघोष किया होगा। मगर समय की मार ने हमारे जननायक अटलजी को बीमार कर दिया। इसके साथ ही हमारे सपने और तमाम उम्मीदों के पहाड़ जमींदोज हो गए। या फिर यूं कहें कि नए मसीहाओं ने अपनी सुविधा के हिसाब से नए सपने, नए नारे और नए समीकरण गढे़। जिनसे हम सब दो-चार हो रहे हैं।

आज 'अटल युग' समाप्त हो गया। मगर वह 'अटल सत्ता' का मंत्र अपने समर्थकों को देकर जा चुके हैं। जिसमें जनसेवा, प्रगतिशीलता, इंसानियत और आपसी भाईचारे का भाव जरूरी है। अब देखना होगा कि हम सब इसे कितना आत्मसात कर पाते हैं।

फिलहाल, भाजपा शीर्ष नेतृत्व आज स्वर्णयुग में अपने संस्थापक, पुरनिया-पुरोधा, मार्गदर्शक अटलजी के देहावसान पर शोकाकुल है। हम सब भी बेहद शोक संतप्त हैं। लगता है कि जैसे घर के ही किसी बुजुर्ग ने अंतिम सांसें ली हो। नम आंखों के साथ अलविदा अटलजी। आपकी अनंत यात्रा आनंदमय हो।अंतःकरण से आत्मस्नेह।

और अंत में आपके ही अनमोल शब्दों में-

'मौत की उमर है क्या?

दो पल भी नहीं,

जिंदगी का सिलसिला।

आज कल की नहीं,

मैं जी भर जिया,

मैं मन से क्यूं मरूं,

लौटकर आऊंगा,

कूच से क्यों डरूं?'



अटलजी अनंत यात्रा पर

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महात्मा गांधी की 151वीं जयंती को कुछ इस तरह मनाएगा IIMC

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 151वीं जयंती के मौके पर ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) में गांधी पर्व का आयोजन किया जाएगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2020
IIMC

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 151वीं जयंती के मौके पर ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) में गांधी पर्व का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर एक अक्टूबर को सायं 4 बजे विशेष व्याख्यान कार्यक्रम से होगी।  

इस कार्यक्रम में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल मुख्य अतिथि होंगे। पुनरुत्थान विद्यापीठ, अहमदाबाद की कुलपति इंदुमती काटदरे मुख्य वक्ता होंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी करेंगे। इस मौके पर प्रो. द्विवेदी द्वारा स्वच्छता अभियान तथा पर्यावरण रक्षा से जुड़े संस्थान के सहयोगियों का सम्मान भी किया जाएगा।

वहीं, दो अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे आईआईएमसी परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद संस्थान में पौधारोपण कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा।

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मां से मिलने गए पत्रकार पर चाकू से कर दिया हमला

पत्रकारों पर हमले की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। आए दिन पत्रकारों को बदमाशों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2020
Attack

पत्रकारों पर हमले की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। आए दिन पत्रकारों को बदमाशों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। इसी तरह का मामला बांग्लादेश के जशोर जिले से सामने आया है, जहां पर अपनी मां से मिलने गए पत्रकार को एक शख्स ने चाकू मारकर बुरी तरह घायल कर दिया। संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को शरसा अपज़िला के नवरन सतखीरा इलाके में पीड़ित पत्रकार नाजरुल इस्लाम (35) अपनी मां से मिलने गया था। 'सम्पतो देशकाल' और 'बार्टा कंठो' के दैनिक समाचार पत्र में कार्य करने वाले नाजरुल इस्लाम को इसी बीच एक शख्स ने चाकू मारकर बुरी तरह घायल कर दिया। बताया जाता है कि हमलावर ने पुरानी रंजिश के चलते इस घटना को अंजाम दिया है।

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नहीं रहे The Hindu के पूर्व समाचार संपादक जी. द्वारकानाथ

चार दशक से ज्यादा समय तक द हिन्दू ग्रुप से जुड़े रहे थे द्वारकानाथ

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2020
G Dwarakanath

‘द हिन्दू’ (The Hindu) अखबार के पूर्व न्यूज एडिटर गोमतम द्वारकानाथ (Gomatam Dwarakanath) का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को बेंगलुरु में निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। गोमतम द्वारकानाथ चार दशक से ज्यादा समय तक ‘द हिन्दू’ ग्रुप से जुड़े रहे थे।

मैसूर यूनिवर्सिटी से विज्ञान और कानून में ग्रेजुएट गोमतम ने 'द हिन्दू' के साथ एक अगस्त 1958 को अपना सफर शुरू किया था। वह वर्ष 2001 में ‘इस अखबार से सेवानिवृत्त हुए थे।

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जांच में घिरे CM के खिलाफ स्टिंग करने वाले चैनल के अधिकारी

बेंगलुरू पुलिस ने सोमवार को उस न्यूज चैनल के अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है, जिसने बीते दिनों सीएम बीएस येदियुरप्पा के परिवार का एक स्टिंग दिखाया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2020
News Channel

बेंगलुरू पुलिस ने सोमवार को उस न्यूज चैनल के अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है, जिसने बीते दिनों सीएम बीएस येदियुरप्पा के परिवार का एक स्टिंग दिखाया था। इस स्टिंग में सीएम के परिवार के लोग कथित भ्रष्टाचार में शामिल दिखाए गए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने सोमवार को टीवी चैनल ‘पावर टीवी’ (Power TV) के ऑफिस की तलाशी ली। इसके अलावा बेंगलुरू पुलिस ने चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर राकेश शेट्टी के घर पर भी छापेमारी की और साथ ही चैनल के एक एंकर से भी पूछताछ की है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘पावर टीवी’ ने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक से कथित तौर पर मिली जानकारी के आधार पर कथित भ्रष्टाचार की खबर प्रसारित की थी, उसी कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक की शिकायत पर ही पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि चैनल ने बीते माह इस मामले पर कार्यक्रमों की एक पूरी सीरीज चलाई थी, जिसमें एक स्टिंग ऑडियो भी प्रसारित की गई थी।

कथित तौर पर यह स्टिंग ऑडियो चैनल के एमडी और एडिटर राकेश शेट्टी और बीएस येदियुरप्पा परिवार के एक अहम सदस्य के बीच का बताया गया था। इसके अलावा चैनल ने अपनी खबर में येदियुरप्पा परिवार के एक अन्य सदस्य और कंस्ट्रक्शन फर्म के निदेशक के बीच की वॉट्सऐप चैट को भी दिखाया था। इसके अतिरिक्त न्यूज चैनल ने अपनी खबर में कुछ दस्तावेज भी दिखाए थे, जिसमें यह बताया गया है कि येदियुरप्पा परिवार के एक सदस्य के बैंक खाते में बड़ी संख्या में रकम जमा की गई है।

वहीं स्टिंग के खुलासे के बाद विपक्षी पार्टियों ने सीएम बीएस येदियुरप्पा से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है। विपक्षी पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज द्वारा या फिर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाकर मामले की जांच कराने की भी मांग की है, जिसे कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मॉनीटर करें।

वहीं सीएम येदियुरप्पा ने विपक्ष को उन पर लगे आरोपों को सिद्ध करने की चुनौती दी है। हालांकि चैनल के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।

'इंडियन एक्सप्रेस' की पूरी खबर आप नीचे दी हेडिंग पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं-

Police search channel that aired sting on ‘corruption’ by BSY family

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‘आज समाज’ के संपादक अमित गुप्ता के पिताजी अनंत में लीन

हिंदी दैनिक ‘आज समाज’ के संपादक अमित गुप्ता के पिताजी रत्न प्रकाश का सोमवार को निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2020
ratnaprakash

हिंदी दैनिक ‘आज समाज’ के संपादक अमित गुप्ता के पिताजी रत्न प्रकाश का सोमवार को निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार थे। वे वायुसेना के के वारंट ऑफिसर से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने 1965 और 1971 की लड़ाई भी लड़ी थी। सोमवार की सुबह अंबाला कैंट स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली।

आईटीवी नेटवर्क के प्रधान संपादक अजय शुक्ल ने दुख की इस घड़ी में अमित गुप्ता व उनके परिवार के साथ गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आईटीवी नेटवर्क परिवार इस दुख की घड़ी में अमित गुप्ता के साथ है।

वहीं दूसरी तरफ, सोमवार को ‘आज समाज’ के परिवार के सदस्यों ने अमित गुप्ता के पिता रत्न प्रकाश के निधन पर कार्यालय में दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया। साथ ही दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

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नई शिक्षा नीति को दिग्गजों ने यूं बताया देश में ज्ञान विज्ञान की क्रांति का 'जनक'

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री का कहना है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
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Monday, 28 September, 2020
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हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री का कहना है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं, इसलिए किसी भाषा को क्षेत्रीय भाषा और किसी को राष्ट्रीय भाषा कहना ठीक नहीं होगा। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा सोमवार को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय भाषाएं’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए प्रो. अग्निहोत्री का कहना था, ‘जिस दिन हमारे शिक्षकों ने भारतीय भाषाओं में पढ़ाना शुरू कर दिया, उस दिन हिन्दुस्तान अन्य देशों से बहुत आगे निकल जाएगा।'

प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य भारतीय भाषाओं को सम्मान दिलाना है। इस दिशा में सभी लोगों को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है। भाषा, ज्ञान नहीं है, बल्कि ज्ञान तक पहुंचने की कुंजी है। इसलिए अगर विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में ज्ञान लेंगे, तो उनका संपूर्ण विकास संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह मां का दूध बच्चे के लिए सुपाच्य यानी आसानी से पचने वाला और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है, उसी तरह मातृभाषा में लिया गया ज्ञान भी बच्चे के जीवन के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि इस नई शिक्षा नीति से भारत में ज्ञान विज्ञान की क्रांति होगी, जिसमें शिक्षकों को महत्वपूर्ण निभानी होगी।

अंग्रेजी के चक्रव्यूह से निकलेंगे आधुनिक अभिमन्यु: प्रो. संजीव शर्मा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि अंग्रेजी का जो चक्रव्यूह हमारे चारों तरफ है, उससे बाहर आने में आधुनिक अभिमन्यु पूरी तरह से सक्षम हैं। प्रो. शर्मा ने कहा कि ये भारत के शैक्षिक पुर्नजागरण का काल है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकों के निर्माण की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय का भाव आवश्यक है। भारतीय भाषाओं में कोई विभेद नहीं है, कोई संघर्ष नहीं है। अगर हमें भाषाओं को सींचना है, तो सभी को मिलजुलकर प्रयास करने होंगे, जिसमें महत्वपूर्ण भूमिका हिंदी भाषी लोगों को निभानी होगी।

बहती नदी है हिंदी: रंगनाथन

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रसिद्ध लेखिका एवं दैनिक हिन्दुस्तान की कार्यकारी संपादक जयंती रंगनाथन ने कहा, ‘हिंदी एक बहती नदी है। आप देखिए कि हिंदी के अखबार 30 वर्ष पहले सिर्फ 3 लाख प्रतियां छापते थे, लेकिन आज ये आंकड़ा 3 करोड़ के पार पहुंच चुका है। यही हिंदी की ताकत है।’

रंगनाथन का कहना था, ‘तमिल मेरी मातृभाषा है, पर हिंदी मेरी कर्म भाषा है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का जोर होता है कि बच्चे स्कूल में हिंदी में न बात करें, पर अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हुए बच्चों को हमने ये सिखाया ही नहीं कि जीवन में चुनौतियों का सामना किस तरह करना है। आज हम यह भूल गए हैं कि शिक्षा का मकसद क्या है।’ 

जिंदगी और शिक्षा पर उन्होंने कहा कि शिक्षा हमें ये सिखाती है कि जिंदगी भागने का नाम नहीं, बल्कि रुकने और संभलकर चलने का नाम है। एक अच्छा नागरिक बनना और आशावादी जिंदगी जीना, यही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है। रंगनाथन ने कहा कि आने वाले दिनों में ये नई शिक्षा नीति हमारे बच्चों को ज्ञान की दृष्टि से ताकतवर बनाएगी।

जोड़ती है मातृभाषा: सचदेव

नवभारत टाइम्स, मुंबई के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव ने कहा कि अंग्रेजी के माध्यम से हम दुनिया से तो जुड़ सकते हैं, लेकिन अपने आप से नहीं जुड़ सकते। अगर हमें स्वयं से जुड़ना है, तो हमें मातृभाषा का इस्तेमाल करना ही होगा। उन्होंने कहा कि किसी विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षित होकर आप अपने आप को पूर्ण शिक्षित नहीं मान सकते। शिक्षा के माध्यम से हम मनुष्य बन सकें, यही शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य होना चाहिए। सचदेव ने कहा कि जब तुर्की एक रात में अपनी भाषा को राष्ट्रभाषा घोषित कर सकता है, तो ये काम हमारे यहां क्यों नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि हमारा संकट ये नहीं है कि हमारी भाषा क्या होनी चाहिए, बल्कि हमारा संकट ये है कि किसी भी भाषा को सीखने का हमारा उद्देश्य क्या होना चाहिए। किसी भी शिक्षा नीति का उद्देश्य व्यक्ति को एक अच्छा इंसान बनाना होता है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि क्या पढ़ाया जाए और कैसे पढ़ाया जाए। सचदेव ने कहा कि नई शिक्षा नीति ये अहसास कराती है कि मातृभाषा में भी बच्चों को शिक्षित किया जा सकता है।

हिंदी और भारतीय भाषाओं को मिलकर चलना होगा: अनंत विजय

भारतीय भाषाओं पर अपनी बात रखते हुए दैनिक जागरण, नई दिल्ली के सह-संपादक अनंत विजय ने कहा कि हिंदी और भारतीय भाषाएं एक दूसरे के साथ मिलकर चलेंगी, तो दोनों मजबूत होंगी। उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा नीति के बाद अगर आप देखें, तो पहली बार एक संपूर्ण और नई शिक्षा नीति आई है। इससे पहले जितनी भी नीतियां आई हैं, उन्हें नई न कहकर संशोधित नीतियां कहना ज्यादा बेहतर होगा। 

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की ज्ञान परंपरा को केंद्र में रखते हुए काम करने पर जोर देती है। भाषा वो ही जीवित रहती है, जिससे आप जीविकोपार्जन कर पाएं और भारत में एक सोची समझी साजिश के तहत अंग्रेजी को जीविकोपार्जन की भाषा बनाया जा रहा है।

भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तक निर्माण की चुनौतियों पर अनंत विजय का कहना था कि भारत में लगभग 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं और करीब 850 राज्य विश्वविद्यालय हैं। अगर हम इसमें निजी विश्वविद्यालयों को भी शामिल कर लें, तो कुल मिलाकर लगभग 1,000 से अधिक विश्वविद्यालय होते हैं। अगर एक विश्वविद्यालय एक वर्ष में सिर्फ 2 पुस्तकों का भी निर्माण करे, तो एक वर्ष में लगभग 2,000 किताबें छात्रों के लिए तैयार होंगी।

उन्होंने कहा,’जैसे ही आप भारत कें​द्रित पाठ्यक्रम की बात करेंगे, तो लोग विरोध में खड़े हो जाएंगे। ऐसा कहा जाएगा कि भारतीय भाषाओं में ज्ञान की बात नहीं हो सकती, अगर आपको ज्ञान की बात करनी है, तो सिर्फ अंग्रेजी में ही हो सकती है। जबकि आप देखिए कि जर्मनी में लोग संस्कृत भाषा की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय किसी भी शिक्षा नीति को सफल बनाने का सबसे महत्वपूर्ण उपक्रम है।’

भारतीय भाषाओं के व्यावहारिक प्रयोग की आवश्यकता: डॉ. बाबु

पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी जयशंकर बाबु ने कहा कि भारतीय भाषाओं के व्यावहारिक प्रयोग पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया की कुल भाषाओं में से एक तिहाई भाषाएं हमारे पास हैं, लेकिन हमने अब तक मुठ्ठीभर भाषाओं को शिक्षण में अपनाया है।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में भाषा को लेकर शिक्षा नीति में अभी उतनी स्पष्टता नहीं है, जितनी प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर है, लेकिन हमें इससे प्रेरणा लेते हुए उच्च शिक्षा में भी भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए। डॉ. बाबु ने तमिलनाडु का जिक्र करते हुए कहा कि वहां राज्य की नौकरियों में मातृभाषा में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है, क्या ऐसी पहल अन्य राज्यों में नहीं होनी चाहिए।

डॉ. बाबु ने कहा कि तमिलनाडु में इंजीनियरिंग और चिकित्सा शिक्षा के पाठ्यक्रम तमिल भाषा में पढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। ये पहल सराहनीय है और ऐसे ही प्रयासों से भारतीय भाषाएं ताकतवर होंगी। कार्यक्रम का संचालन भारतीय जनसंचार संस्थान की छात्र संपर्क अधिकारी विष्णुप्रिया पांडे ने किया। वेबिनार के अंत में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने सभी वक्ताओं का धन्यवाद दिया।

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सिर्फ इतनी सी बात पर पत्रकार की कर दी जमकर पिटाई

पंजाब के लुधियान में किसानों के प्रदर्शन की कवरेज कर रहा था एक वेब चैनल का पत्रकार

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
Attack

प्रदर्शन की कवरेज के दौरान एक महिला कॉन्स्टेबल को वहां से गुजरने के लिए थोड़ा रास्ता दिए जाने की मांग करने पर प्रदर्शनकारियों में शामिल कुछ लोगों द्वारा एक पत्रकार को पीटे जाने का मामला सामने आया है। मामला पंजाब के लुधियाना का है।

पुलिस ने पत्रकार को पीटे जाने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पकड़े गए आरोपितों की पहचान जस्सी, सन्नी, सोनी और लवली के रूप में हुई है।

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में छपी रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एक वेब चैनल में कार्यरत निर्मल सिंह नामक पत्रकार ने पुलिस को शिकायत दी थी। अपनी शिकायत में निर्मल सिंह ने बताया कि वह हदिया मालवा गांव के पास किसानों के प्रदर्शन को कवर कर रहा था। शाम को प्रदर्ऩशकारी लौटने की तैयारी कर रहे थे। इस बीच एक महिला कॉन्स्टेबल ने क्षेत्र को पार करने की कोशिश करते हुए उनसे माछीवाड़ा जाने के लिए रास्ता खोजने में मदद करने का अनुरोध किया।

निर्मल सिंह ने जब प्रदर्शनकारियों से महिला कॉन्स्टेबल को निकलने के लिए रास्ता देने की गुजारिश तो उनमें से कुछ लोगों ने न सिर्फ निर्मल के साथ गाली-गलौज, बल्कि मारपीट भी कर दी और फरार हो गए। बताया जाता है कि पुलिस ने इस मामले में (Koom Kalan) थाने में एफआईआर दर्ज कर आरोपितों की धरपकड़ के प्रयास शुरू कर दिए हैं।  

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कोविड-19 से जूझ रहे वरिष्ठ पत्रकार गोलप सैकिया का निधन

कोविड-19 की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कुछ दिनों से गुवाहाटी स्थित अस्पताल में चल रहा था गोलप का इलाज

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
Golap Saikia

असम के जाने-माने न्यूज रीडर और वरिष्ठ पत्रकार गोलप सैकिया का शनिवार को निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 52 वर्षीय गोलप ने कुछ दिन पूर्व तबीयत बिगड़ने पर कोविड-19 की जांच कराई थी, जो पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उन्हें गुवाहाटी के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन कुछ दिनों से उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी और शनिवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।

असम के रहने वाले गोलप ने शुरू में ऑल इंडिया रेडियो में बतौर उद्घोषक काम किया था। वह गुवाहाटी दूरदर्शन समेत कई निजी सैटेलाइट चैनल्स जैसे- DY365, NewsLive, PrimeNews आदि में भी न्यूज बुलेटिन्स पढ़ते थे। उनके परिवार में पत्नी व एक बेटी है।

गोलप के निधन पर Journalists’ Forum Assam (JFA) समेत तमाम पत्रकारों ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है तथा ईश्वर से गोलप की आत्मा को शांति प्रदान करने और उनके परिजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

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NUJ(I) में इन वरिष्ठ पत्रकारों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

कोरोना संक्रमित होकर जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए अभियान चलाने का लिया गया निर्णय

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
NUJI

‘झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ के अध्यक्ष और ‘राष्ट्रीय खबर’ के मुख्य संपादक रजत कुमार गुप्ता तथा ‘वीर अर्जुन’ की फीचर संपादक सीमा किरण को ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ (इंडिया) का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। वहीं, ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ में एनयूजे के सदस्य और ‘दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन’ के पूर्व महासचिव आनंद राणा को संगठन सचिव मनोनीत किया गया है। महाराष्ट्र की शीतल करदेकर, पश्चिम बंगाल के दीपक राय और हिमाचल प्रदेश की सीमा मोहन को सचिव नियुक्त किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ से संबद्ध एनयूजेआई के महासचिव प्रसन्ना मोहंती ने बताया कि 11 सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी की अध्यक्षता हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में संगठन के संविधान संशोधन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया। ऑनलाइन अधिवेशन में देशभर में लगभग दो हजार सदस्यों ने हिस्सा लिया। अधिवेशन में पत्रकारों के हित और कल्याण से जुड़े कई प्रस्ताव पारित किए गए।

वहीं, एनयूजे अध्यक्ष रास बिहारी का कहना है कि देशभर में संगठन का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। अब देश के ज्यादातर राज्यों में एनयूजे से संबद्ध इकाइयां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित होकर जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए अभियान चलाया जाएगा।

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प्रो. संजय द्विवेदी ने मीडिया के लोगों के लिए मजबूत इच्छाशक्ति पर कुछ इस तरह दिया जोर

मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति की ओर से आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में IIMC के डीजी प्रो. संजय द्विवेदी का हुआ सम्मान, भविष्य की कार्ययोजनाओं पर भी हुई चर्चा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
Sanjay Dwivedi

मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति के अध्यक्ष प्रो. संजय द्विवेदी को देश के प्रमुख मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) का महानिदेशक नियुक्त किए जाने पर समिति की ओर से सम्मानित किया गया। इस मौके पर आयोजित ऑनलाइन सम्मान समारोह की अध्यक्षता भी प्रो.संजय द्विवेदी ने की। कार्यक्रम में मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति की संचालन परिषद व कोर कमेटी के पदाधिकारियों सहित देशभर से अनेक वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए। इस समारोह में मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति की भविष्य की कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा की गई। बता दें कि दिसंबर 2019 में मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए समिति के चुनाव में प्रो. संजय द्विवेदी को अध्यक्ष चुना गया था।

समारोह की शुरूआत में समिति सचिव बी.के व डॉ रीना ने प्रो. संजय द्विवेदी का सम्मान किया। समिति के संस्थापक व वरिष्ठ पत्रकार प्रो.कमल दीक्षित ने प्रो.द्विवेदी का सम्मान करने के साथ समिति की कार्यवाही से सभी सदस्यों को अवगत कराया।

वहीं, प्रो. द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में मीडिया के लोगों को मूल्यों के लिए प्रेरित व प्रभावित करना आसान नहीं है। लेकिन यदि फिर भी हम सभी अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के अनुसार तय कर लें तो ऐसा जरूर कर पाएंगे। उन्होंने संदेशवाहक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और मीडिया को भारतीय संस्कृति की दृष्टि से जोड़ने को लेकर बल दिया।

प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की इंदौर जोनल प्रमुख बीके हेमलता दीदी ने वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार मीडिया में अध्यात्म को जरूरी बताया। जयपुर से वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद प्रो. संजीव भानावत ने कोरोना काल मीडिया के समक्ष उपजी चुनौतियों के बारे में बताया और समिति के विस्तार पर चर्चा की।

भोपाल से वरिष्ठ पत्रकार विनोद नागर ने संस्था की गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने के कुछ नए प्रस्ताव रखे। प्रस्तावों को बैठक में मौजूद सदस्यों की सहमति से पारित भी किया गया। दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार वैभव वर्धन ने कहा कि मूल्यानुगत मीडिया के उद्देश्यों को अब एक मिशन के रूप में चलाया जाना चाहिए, ताकि इस अच्छे विचार से अन्य लोग भी लाभान्वित हों।

समिति के पूर्व अध्यक्ष संदीप कुलश्रेष्ठ, वरिष्ठ पत्रकार कल्याण कोठारी, समिति के कोषाध्यक्ष प्रभाकर कोहेकर, उपाध्यक्ष राजेश राजोरे, प्रियंका कौशल, श्रीगोपाल नरशन, दिलीप बोरसे, मुकेश नेमा आदि ने भी अपने विचार रखे। समारोह का तकनीकी समन्वय डॉ सोमनाथ वडनेरे ने व संचालन युवा पत्रकार सोहन दीक्षित ने किया। आयोजन के अंत में नारायण जोशी ने सभी का आभार जताया।

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