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हर साहित्य-कला प्रेमी में मन में होती है ऐसे कार्यक्रम का गवाह बनने की हसरत...
समाज में साहित्य की धुंधली पड़ी चमक को फिर से उजला बनाने की दिशा में...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
समाज में साहित्य की धुंधली पड़ी चमक को फिर से उजला बनाने की दिशा में ‘इंडिया टुडे’ के प्रयासों को हमेशा सराहा जाएगा। ‘इंडिया टुडे’ समूह पिछले कई सालों से साहित्य को अपनी-अपनी तरह से जीवित रखने वालों को एक मंच पर लाकर उनकी रचनाओं, उनके भावों को एक रूप में समाज के सामने पेश करता चला आ रहा है।
इसी क्रम में दिल्ली में ‘साहित्य आजतक 2018’ का आयोजन किया गया। तीन दिनों तक चले ‘साहित्य आजतक 2018’ में विभिन्न कार्यक्रमों के बीच ‘इंडिया टुडे’ के एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने कला और साहित्य को समर्पित 'साहित्य वार्षिकी' का नौवां अंक लॉन्च किया। रचना का जनतंत्र' शीर्षक वाले इस अंक में देश और दुनिया की तमाम भाषाओं जैसे कि हिंदी, उर्दू, पंजाबी, बंगाली, असमी, कश्मीरी, राजस्थानी, फारसी, मराठी, उड़िया और अंग्रेजी की रचनाओं को शामिल किया गया है। इतना ही नहीं, इस अंक में छत्तीसगढ़ की कुदुख, अरुणांचल प्रदेश की नीशी, त्रिपुरी की मोघ और ओडिशा की सांथाली भाषा में लिखी गईं रचनाओं को भी स्थान मिला है।
‘साहित्य आजतक 2018’ के मंच पर साहित्य और कलाप्रेमियों ने शब्द, कला, कविता, संगीत, नाटक, सियासत और संस्कृति से जुड़ी बातों को अनुभव किया। साहित्य-कला क्षेत्र की जानी मानी हस्तियों ने यहां शिरकत की। इनमें कवि और अभिनेता पीयूष मिश्रा भी शामिल रहे। ‘साहित्य आजतक 2018’ के तीसरे अहम सत्र में पहुंचे पीयूष मिश्रा ने अपनी किताब 'कुछ इश्क किया कुछ काम किया' की कुछ पंक्तियां भी सुनाईं। इस दौरान पत्रकार श्वेता सिंह के सवालों के दिलचस्प जवाब दिए और 'मोहब्बत' के बारे में भी बात की। पीयूष की लाइनों पर लोगों ने भी जमकर तालियां बजाईं। इसके अलावा नूरां सिस्टर्स, चिन्मयी त्रिपाठी, गिन्नी माही और हरप्रीत सिंह समेत कई चमकदार चेहरे भी नज़र आए। ज्योति नूरां और सुल्तान नूरां की जोड़ी ने एक से बढ़ कर एक गीत पेश किए। शनिवार को ‘सत्ता और साहित्य का लोकतंत्र’ विषय पर चर्चा हुई, जिसमें, अजीत कुमार झा, पियूष बबले, संदीप देव और वर्तिका नंदा उपस्थित थे। 'साहित्य के महाकुंभ' के नाम से खुद को स्थापित कर चुके 'साहित्य आजतक' ने तीन दिनों तक एक ऐसा माहौल निर्मित किया, जिसका गवाह बनने की हसरत हर साहित्य एवं कला प्रेमी में मन में होती है। हालांकि, इस भाव को ‘रचना का जनतंत्र’ के माध्यम से हमेशा के लिए संजो के ज़रूर रखा जा सकता है।
पिछले अंक को मिली सफलता को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष के 'साहित्य वार्षिकी' का दायरा विस्तृत किया गया है। ‘इंडिया टुडे’ हिंदी के संपादक अंशुमान तिवारी के अनुसार, 'रचना का जनतंत्र' शीर्षक वाले इस अंक में देशी-विदेशी कई भाषाओं की रचनाओं को स्थान दिया गया है। जैसे कि हिंदी, उर्दू, पंजाबी के साथ ही आपको यहां फारसी और अंग्रेजी आदि में लिखित रचनाएं भी पढ़ने को मिलेंगी। इसके अलावा इस अंक में डेनमार्क और ब्रिटेन की दो एनआरआई महिला लेखकों की रचनाओं को भी शामिल किया गया है। इस अंक के इंटरव्यू सेक्शन 'रू-ब-रू' में साहित्य जगत की बड़ी हस्तियां जैसे कि अशोक वाजपेयी, पुरुषोत्तम अग्रवाल, आलोक धन्वा, पद्मा सचदेव, चित्रकार अंजली इला मेनन, डॉ कर्ण सिंह, नृत्यांगना अदिति मंगलदास और संगीत से से जुड़ीं नूरन बहनें और गोकुलोत्सव महाजार का साक्षात्कार है।
'साहित्य वार्षिकी' के इस अंक में और भी काफी कुछ है जो इसे ख़ास बनाता है। मसलन, संस्मरण के सेक्शन में 'देश के बंटवारे’ को अपनी निगाहों से देखने और उसके दर्द को महसूस करने वाले प्रत्यक्षदर्शी का लेख है। साथ ही एक अफगानी चित्रकार की तालिबान के आतंक के दौर की कहानी को भी शामिल किया गया है। देश की प्रमुख नदियों में से एक नर्मदा की यात्रा को छायाकार की निगाहों से दर्शाने का प्रयास भी 'साहित्य वार्षिकी' का हिस्सा है। बात यहीं ख़त्म नहीं होती। विचार सेक्शन में जयप्रकाश नारायण (जेपी) और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के टकराव का दिलचस्प विश्लेषण है, तो वहीं सिनेमा सेक्शन में जाने-माने डायरेक्टंर, लेखक और गीतकार गुलजार, अभिनेत्री कामिनी कौशल, निर्देशक अनुभव सिन्हा और अभिनेता पंकज त्रिपाठी से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत शामिल है। साहित्य वार्षिकी अंक के 225 पृष्ठों को 11 खंडों में बांटा गया है।
साहित्य वार्षिकी के साथ ही ‘इंडिया टुडे’ समूह की वेबसाइट 'लल्लनटॉप' से जुड़ी कुछ रचनाओं को भी लॉन्च किया गया है। यह 'लल्लनटॉप की कहानियां' का दूसरा भाग है। आपको बता दें कि लल्लनटॉप की कहानियां में कई उभरते कहानिकारों की कहानियों की एक प्रतियोगिता होती है, जिसमें 16 कहानियां चुनी जाती हैं और जिन्हें पुरस्कृत किया जाता है, जो अंत में एक किताब की शक्ल लेती है।
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