हिंदी का जलवा: पाक पढ़ा रहा है चीन को...

क्या आप ये मानेंगे कि पाकिस्तान से हिंदी सीख रहे हैं चीनी और खाड़ी देशों के बहुत से राजनयिक और रक्षा विशेषज्ञ? पर ये सच है...

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Published - Friday, 14 September, 2018
Last Modified:
Friday, 14 September, 2018
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विवेक शुक्ला ।।

क्या आप ये मानेंगे कि पाकिस्तान से हिंदी सीख रहे हैं चीनी और खाड़ी देशों के बहुत से राजनयिक और रक्षा विशेषज्ञ? पर ये सच है और खुद पाकिस्तान के भीतर भी हिंदी को जानने-समझने-सीखने की प्यास तेजी से बढ़ रही है।

दरअसल देश के बंटवारे से पहले समूचे पाकिस्तान के पंजाब से लेकर सिंध में हिंदी पढ़ाई जाती थी। लाहौर हिंदी का गढ़ होता था। वहां पर हिंदी के कई बड़े प्रकाशन भी थे। इनमें राजपाल एंड संस खास है। पर बाद में हिंदी को भी बंटवारे का खामियाजा भुगतना पड़ा। हिंदी को शत्रुओं की भाषा माना गया। बहरहाल, चीनियों और अरब देशों के रक्षा और कूटनीति के जानकारों को हिंदी का कामचलाऊ ज्ञान मिल रहा है पाकिस्तान की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मॉडर्न लैंगवेज (एनयूएमएल) में। ये इस्लामाबाद में है। इसके अलावा पंजाब यूनिवर्सिटी, लाहौर, में भी हिंदी विभाग सक्रिय है 1983 से।

एनयूएमएल के हिंदी विभाग में पांच टीचर हैं। इधर हिंदी में डिप्लोमा कोर्स से लेकर पीएचडी तक करने की सुविधा है। एनयूएमएल में हिंदी के साथ-साथ पाकिस्तान में बोली जानी बहुत सी अन्य भाषाओं के अध्यापन की व्यवस्था है। उधर, पंजाब यूनिर्सिर्टी की हिंदी फैकल्टी में दो टीचर हैं। विगत जून माह में सिंगापुर में जाने का मौका मिला। वहां के लिटिल इंडिया क्षेत्र के एक रेस्तरां में लंच के दौरान एक दिन एक चीनी मूल की महिला हमारे से हिंदी में पूछने लगी, ‘क्या आप भारत से हैं?’ उसका ये सवाल सुनकर बड़ा सुखद अहसास हुआ। हमने जवाब दिया। ‘जी, हम भारतीय हैं।’ उसके बाद गपशप चालू हो गई। बातचीत में उस भद्र चीनी महिला ने बताया कि उसने हिंदी बीजिंग में सीखी। उसके कई मित्र इस्लसामबाद स्थित एनयूएमएल से हिंदी का अध्ययन कर रहे हैं। एनयूएमयू में साल 1973 से हिंदी विभाग चल रहा है।

तो माना जा सकता है कि इसके अब तक के सफर में सैकड़ों हिंदी प्रेमियों ने हिंदी को और करीब से जाना होगा। कुछ साल पहले तक दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीश्नर रहे रियाज खोखर ने बताया था कि चूंकि हिंदी पाकिस्तान के पड़ोसी मुल्क भारत की अहम भाषा है, इसलिए हम इसकी अनदेखी नहीं कर सकते। हालांकि वे इस सवाल का उत्तर नहीं दे पाए थे कि कराची यूनिवर्सिटी का हिंदी विभाग क्यों बंद हो गया। हालांकि कराची में भारत से जाकर बसे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार वगैरह के लोगों की भारी तादाद है। इसलिए  वहां की यूनिवर्सिटी  से हिंदी विभाग को बंद करना जायज नहीं माना जा सकता है। कराची और सिंध क्षेत्र में ही पाकिस्तान के हिन्दुओं की ठीक-ठाक आबादी भी है। इनमें हिन्दू धर्म ग्रंथों को हिंदी में पढ़ने की लालसा रहती है। जाहिर है, समूचे सिंध और कराची में हिंदी अध्यापन की व्यवस्था न होने से तमाम लोगों को कठिनाई होती होगी।

एनयूएमएल की हिंदी विभाग की प्रमुख डॉ. नसीमा खातून हैं। उन्होंने नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में पीएचडी की है। उनके प्रोफाइल से साफ है कि वह आगरा से संबंध रखती हैं। वह आगरा यूनिवर्सिटी में भी पढ़ी हैं। उनके अलावा इस विभाग में शाहिना जफर भी हैं। वह मेरठ यूनिवर्सिटी की छात्रा रही हैं। वह कॉन्ट्रैक्ट पर इधर पढ़ाती हैं। इसी क्रम में शमीम रियाज भी हैं। वह पटना यूनिवर्सिटी से एमए हैं। जुबैदा हसन भी इधर कॉट्रैक्ट पर पढ़ा रही हैं। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की छात्रा रही हैं। एक बात समझ आ रही है कि पाकिस्तान में हिंदी को वहां पर निकाह के बाद गई भारत की महिलाएं ही पढ़ा रही हैं।

पंजाब यूनिवर्सिटी, लाहौर में भी हिंदी के अध्ययन की व्यवस्था है। यहां पर समूचे पंजाब के हिंदी प्रेमी आते हैं। इधर हिंदी विभाग सन 1983 में स्थापित हुए। यहां पर दो अध्यापक है फैकल्टी में।

पाकिस्तान के इतिहास के पन्नों को खंगालने पर समझ आ जाएगा कि वहां पर भाषा को लेकर सरकारी नीति शुरुआत से ही बेहद तर्कहीन रही। पाकिस्तान में उर्दू को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिला। एक उस भाषा को जो पाकिस्तान की मिट्टी की जुबान नहीं थी। उसे तो सिर्फ भारत से गए मुहाजिर जानते थे। उर्दू को देश की राष्ट्रभाषा थोपने के चलते पाकिस्तान को आगे चलतकर बड़ा नुकसान हुआ। भाषा के सवाल पर पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) की अनदेखी पाकिस्तान की आगे चलकर दो-फाड़ होने की बड़ी वजह रही।

बहरहाल भारत और पाकिस्तान में भाषीय और संस्कृतिक समानताओं के कारण पाकिस्तान में हिंदी का हाल के बरसों में प्रभाव देखने को मिल रहा है। हिंदी फिल्मों और भारतीय टीवी सीरियलों के कारण पाकिस्तान में हिंदी का बहुत प्रभाव बढ़ रहा है। दर्जनों हिंदी के शब्द आम पाकिस्तानी की आम बोल-चाल में शामिल हो गए हैं। अब पाकस्तानियों की जुबान में आप विवाद, अटूट, विश्वास, आशीर्वाद, चर्चा, पत्नी, शांति जैसे शब्द सुन सकते हैं। इसकी एक वजह ये भी समझ आ रही कि खाड़ी के देशों में लाखों भारतीय-पाकिस्तानी एक साथ काम कर रहे हैं। दोनों के आपसी रिश्तों के चलते दोनों एक-दूसरे की जुबान सीख रहे हैं। दुबई या अबू धाबी जैसे शहरों में हजारों पाकिस्तानी भारतीय कारोबारियों की कंपनियों, होटलों, रेस्तरां वगैरह में काम कर रहे हैं। इसके चलते वे हिंदी सीख लेते हैं।

एक पाकिस्तानी विद्वान बता रहे थे कि भारतीय़ समाज और संस्कृति को और गहनता से जानने वाले भी पाकिस्तानी हिंदी सीखना चाह रहे हैं।

 उधर, पाकिस्तान के हिन्दू नौजवानों में अपने धर्म ग्रंथों को हिंदी में पढ़ने की लालसा हिंदी की तरफ खींच रही है।  है। ये अपने बड़े-बुजुर्गों से हिंदी सीख रहे हैं। चंदर कुमार पाकिस्तान के सिंध से संबंध रखते हैं। अब दुबई में रहते हैं। एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ में काम करते हैं। वे बता रहे थे कि हमें हिंदी अपने बुजुर्गों से सीखने को मिल रही हैं। अब हम हिंदी अपनी अगली पीढ़ी को पढ़ाने की स्थिति में हैं। सिंध और कराची मे रहने वाले हिन्दू सिंधी के माध्यम से हिंदी का अध्ययन कर रहे हैं। पाकिस्तान में कम से कम मिडिल क्लास से संबंध रखने वाले हिन्दू तो हिंदी सीखते ही हैं। हालांकि पाकिस्तान के हिन्दुओं की मातृभाषा हिंदी नहीं है, पर वे हिंदी से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं।

पाकिस्तान में हिंदी फले-फूले इससे बेहतर कोई बात नहीं हो सकती। आखिर भाषा का संबंध किसी धर्म या जाति से तो नहीं होता।

(लेखक यूएई दूतावास के पूर्व सूचना अधिकारी और हिंदी दैनिक 'हिन्दुस्तान' के विशेष संवाददाता रह चुके हैं)

  

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वरिष्ठ पत्रकार रमेश ठाकुर को मिला ये सम्मान

हिन्दुस्तान समेत एशिया के सभी देशों की मीडिया की जॉइंट मॉनेटरिंग वेंचर संस्था ने दिल्ली के पांच सितारा होटल ‘द लीला‘ में ‘एशियन एक्सीलेंस अवॉर्ड‘ वितरण समारोह का आयोजन किया।

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Published - Tuesday, 25 February, 2020
Last Modified:
Tuesday, 25 February, 2020
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हिन्दुस्तान समेत एशिया के सभी देशों की मीडिया की जॉइंट मॉनेटरिंग वेंचर संस्था ने दिल्ली के पांच सितारा होटल ‘द लीला‘ में ‘एशियन एक्सीलेंस अवॉर्ड‘ वितरण समारोह का आयोजन किया। संस्था ने विभिन्न क्षेत्रों से एशिया के टॉप-30 विभूतियों को चुना। पत्रकारों में दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार रमेश ठाकुर को भी शामिल किया गया। ठाकुर के नाम की संतुति ‘लाइव-24 न्यूज’ की ओर से उनकी हालिया कुछ रिसर्च खोजी रिपोर्ट्स के लिए किया गया। मलेशिया के प्रेष परिषद पत्रकार एम. मानीमरन, ‘लाइव-24’ न्यूज चैनल के मुख्य संपादक प्रमोद सिंह व नेपाल-बंग्लादेश और श्रीलंका के प्रतिनिधियों के हाथों रमेश को सम्मानित किया गया।

सम्मान ग्रहण के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पत्रकारिता मौजूदा समय में बेशक चुनौतीपूर्ण है लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति से किया गया कोई भी काम आपको बुलंदियों तक पहुंचने से नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा देश-विदेश का संयुक्त मिश्रण एशियन अवॉर्ड उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराता रहेगा। साथ ही काम करने के तरीके में और बेहतरी की ललक पैदा करेगा। अवॉर्ड के लिए उन्होंने एशियन संस्थान का धन्यवाद दिया।

बता दें, रमेश ठाकुर बीते पंद्रह वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं। इससे पहले भी उनको उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए कई नेशनल-इंटरनेशन अवॉर्ड मिल चुके हैं। अभी कुछ दिनों पहले ही उन्हें सीडीएस प्रमुख बिपिन रावत ने ‘जर्नलिज्म ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड से नवाजा था।

रमेश ठाकुर के आलेख अग्रणी पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप प्रकाशित होते रहते हैं। इसके अतिरिक्त वे  न्यूज चैनलों की डिबेट्स में भी रोजाना राजनीतिक, सामाजिक और मार्मिक मुद्दों पर अपनी बात प्रमुखता से रखते हैं। हाल ही में उन्हें दक्षिण अफ्रीका में जांबिया (Zambia) की लुसाका स्थिति ‘एसबुड यूनिवर्सिटी ‘ (YESBUD UNIVERSITY)  ने डॅाक्टरेट की मानद उपाधि भी दी गई थी।  

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चुनाव आयोग ने इस गायक पर जताया भरोसा, बनाया नेशनल आइकॉन

चुनाव आयोग ने सोमवार 24 फरवरी को पंजाबी गायक और अभिनेता जसबीर सिंह बैंस उर्फ जसबीर जस्सी को नेशनल आइकॉन नियुक्त किया है।

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Published - Tuesday, 25 February, 2020
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Tuesday, 25 February, 2020
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चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने सोमवार 24 फरवरी को पंजाबी गायक और अभिनेता जसबीर सिंह बैंस उर्फ जसबीर जस्सी को नेशनल आइकॉन नियुक्त किया है। आयोग ने माना कि उनकी संगीत की प्रतिभा विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को विशेषकर युवाओं को मतदान के लिए ज्यादा प्रेरित कर सकती है। इस तरह से वे अपने प्रेरक गीतों और संदेशों से आयोग की निश्चित रूप से मदद करेंगे।

आयोग ने जस्सी पर भरोसा जताते हुए कहा कि जस्सी का योगदान देश के आगामी चुनावों में मतदाताओं को जागरूक करने और नैतिक भागीदारी में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करेगा।

जसबीर एक गायक होने के साथ-साथ गीतकार, कलाकार और अभिनेता भी हैं। उनके गानों की करीब 13 एलबम रिलीज हो चुके हैं। उनके कई गाने जैसे 'दिल ले गई कुड़ी गुजरात दी', 'कोका तेरा कुछ- कुछ केंदा नी कोका' अपने समय के सुपरहिट गानों में से एक थे।

जसबीर का जन्म 1970 में पंजाब के गुरदासपुर में हुआ था। 1980 के दशक में उन्होंने अपने गानों की रिकॉर्डिंग शुरू कर दी थी। उनकी पहली विडियो एल्बम 1993 में 'चन्ना वे तेरी चन्नी' रिलीज हुई थी। उसके बाद 1998 में 'दिल ले गई', 1999 में 'कुड़ी कुड़ी', 2001 में ‘निशानी प्यार दी’, 2002 में 'जस्ट जस्सी', 2004 में ‘मुखड़ा चन्न वर्गा’ और 2007 में ‘अख मस्तानी’ जैसे कई एलबम रिलीज हो चुके हैं।

शायद ही ये किसी को पता हो कि जसबीर की पहली कमाई 125 रुपए की थी, जो उन्हें जालंधर के रेडियो में तीन गीत गाकर मिली थी। इन पैसों की उम्मीद तो जस्सी को नहीं थी पर जब पैसे मिले तो उन्हें लगा कि ऐसे ही गाकर पैसे कमाता रहूंगा तो मुझे पुलिस में भर्ती नहीं होना पड़ेगा। वैसे डाक से आया यह 125 रुपए का चेक जस्सी ने अभी भी फ्रेम करा कर रखा है।   

 

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TV पत्रकार के साथ हुआ ये भीषण हादसा, चली गई जान

अपने दोस्तों के साथ कार से जा रहे थे टीवी पत्रकार, एक दोस्त की भी हो गई मौत, दूसरा घायल

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 19 February, 2020
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भीषण सड़क हादसे में टीवी पत्रकार समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। यह हादसा तमिलनाडु के किनाठुकदावु (Kinathukadavu) इलाके में मंगलवार को हुआ। बताया जाता है कि पोल्लाची इलाके में ‘कैप्टन टीवी’ (Captain TV) में कार्यरता बी चंद्रशेखर (36) अपने दोस्त आर किशोर (19) और टी सेंथिलकुमार (36) के साथ जा रहे थे।

इसी दौरान उनकी कार एक डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में बी चंद्रशेखर और आर किशोर की मौत हो गई, जबकि टी सेंथिलकुमार कुमार घायल हो गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। 

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इंडिया न्यूज कम्युनिकेशंस से जुड़े रोहित कुमार, मिली बड़ी जिम्मेदारी

रोहित कुमार पूर्व में जी मीडिया, आजतक और न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं अहम भूमिका

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 17 February, 2020
Last Modified:
Monday, 17 February, 2020
Rohit Kumar

इमेज मैनेजमेंट और कॉरपोरेट कम्युनिकेशन कंसल्टेंसी कंपनी ‘इंडिया न्यूज कम्युनिकेशंस लिमिटेड’ (India News Communications Limited) में रोहित कुमार ने बतौर सीओओ जॉइन किया है। संस्थान की संपूर्ण ग्रोथ की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होगी।

रोहित कुमार पूर्व में ‘पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ (PHD Chamber of Commerce and Industry) के साथ बतौर डायरेक्टर (Media, Special Projects/Mega Programs, Bidding/Tendering, States and Young Business Leadership Forum) काम कर चुके हैं।

रोहित कुमार को मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करने का 18 साल से ज्यादा का अनुभव है।  पूर्व में वह प्रमुख मीडिया संस्थानों जैसे-‘जी मीडिया’, ‘आजतक’ और ‘न्यूज वर्ल्ड इंडिया’ में बतौर मार्केटिंग हेड अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

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राष्ट्रवाद और मीडिया के संबंधों को बखूबी दर्शाती है ये किताब

भोपाल स्थित गांधी भवन में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. सौरभ मालवीय और लोकेंद्र सिंह की इस किताब का किया गया विमोचन

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Published - Wednesday, 12 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 12 February, 2020
Book Launching

मीडिया विमर्श की ओर से आयोजित पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक सम्मान समारोह में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर पीएचडी करने वाले डॉ. सौरभ मालवीय और लोकेन्द्र सिंह की किताब ‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ का विमोचन किया गया। भोपाल स्थित गांधी भवन में आयोजित कार्यक्रम में समाजवादी विचारक एवं लेखक रघु ठाकुर ने कहा, ‘एक सच्चा राष्ट्रवाद वही होगा जो सच्चा विश्ववादी होगा। अगर सभी देश अपनी सीमाओं को छोड़ने के लिए तैयार हो जाएं, तभी असली राष्ट्रवाद की नींव रखी जा सकती है।’ उन्होंने कहा कि मीडिया और राष्ट्रवाद के बीच किसी भी तरह के संघर्ष की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

प्रख्यात साहित्यकार एवं व्यंग्यकार गिरीश पंकज का कहना था, ‘आज के दौर में जब सभी तरफ राष्ट्रवाद की चर्चा है और कुछ मीडिया घरानों पर भी राष्ट्रवादी होने के ठप्पे लगाये जा रहे हैं, तब इस पुस्तक का आना काफी प्रासंगिक हो जाता है। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उमेश कुमार सिंह का कहना था कि कोई एक वाद इस राष्ट्र का पर्याय नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि लेखकों ने पुस्तक में भारतीय राष्ट्रवाद को सही अर्थों में परिभाषित करने का प्रयास किया है। उन्होंने राष्ट्रवाद की जगह ‘राष्ट्रत्व’ या ‘राष्ट्रीय विचार’ शब्द का उपयोग करने पर जोर दिया।

यश प्रकाशन, नई दिल्ली की ओर से प्रकाशित इस किताब में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रवाद, राष्ट्रवाद एवं मीडिया के संबंध, मीडिया की भूमिका जैसे विषयों पर मीडिया विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ स्तम्भकारों के महत्वपूर्ण आलेख शामिल किये गए हैं। इस किताब में प्रो. संजय द्विवेदी, संतोष कुमार पाण्डेय, डॉ. मयंक चतुर्वेदी, डॉ. शशि प्रकाश राय, डॉ.साधना श्रीवास्तव, डॉ. मंजरी शुक्ला, डॉ. मनोज कुमार तिवारी, डॉ. मीता उज्जैन, डॉ. सीमा वर्मा, उमेश चतुर्वेदी, अमरेंद्र आर्य, अनिल पांडेय आदि के लेख शामिल हैं।

किताब विमोचन के लिए मंच पर प्रख्यात समाजवादी चिन्तक रघु ठाकुर, वरिष्ठ संपादक प्रो. कमल दीक्षित, सप्रे संग्रहालय के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. उमेश कुमार सिंह, व्यंग्यकार गिरीश पंकज, संपादक कमलनयन पाण्डेय, मीडिया आचार्य प्रो. संजय द्विवेदी, डॉ. बीके रीना और साहित्यकार पूनम माटिया आदि उपस्थित रहे।

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जानें, दिल्ली के बारे में क्या कहता है ABP News-CVoter का एग्जिट पोल

दिल्ली में आठ फरवरी को डाले गए हैं वोट, 11 फरवरी को मतों की गिनती का काम होगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 10 February, 2020
Last Modified:
Monday, 10 February, 2020
ABP News

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आठ फरवरी को हुई वोटिंग के बाद अब सभी की नजरें 11 फरवरी को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। सभी इस बात को लेकर काफी उत्सुक हैं कि आखिर दिल्ली में किसकी सरकार बनेगी। तमाम मीडिया संस्थान भी एग्जिट पोल के जरिये अनुमान लगा रहे हैं कि दिल्ली का ताज किसके सिर सजने वाला है।

इन सबके बीच एग्जिट पोल के हवाले से ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) ने खबर दी है कि दिल्ली में एक बार फिर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बन सकती है। एबीपी न्यूज-सी वोटर (ABP News-Centre for Voting Opinion & Trends in Election Research) के एग्जिट पोल के मुताबिक, आप को 50.4 प्रतिशत, बीजेपी को 36 प्रतिशत, कांग्रेस को नौ प्रतिशत और अन्य पॉलिटिकल पार्टियों को 4.7 वोट प्रतिशत मिलने की संभावना है।

इस एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली में आम आदमी पार्टी को 49 से 63 सीट मिल सकती हैं। बीजेपी को पांच से 19 सीटों पर जीत मिल सकती है और यह दूसरे स्थान पर रह सकती है, वहीं कांग्रेस को शून्य से चार सीट मिलने की संभावना जताई गई है।

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नहीं रहे जाने-माने क्रिकेट पत्रकार राजू भारतान

साप्ताहिक मैगजीन ‘the Illustrated Weekly of India’ से करीब 42 साल तक जुड़े रहे थे राजू भारतान

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 07 February, 2020
Last Modified:
Friday, 07 February, 2020
Raju Bharatan

जाने-माने फिल्म इतिहासकार और क्रिकेट पत्रकार राजू भारतान (Raju Bharatan) का लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार को निधन हो गया। वह 86 साल के थे। राजू भारतान साप्ताहिक मैगजीन ‘the Illustrated Weekly of India’ से करीब 42 साल तक जुड़े रहे थे। खुशवंत सिंह, एमवी कामत, प्रीतिश नंदी और अनिल धारकर जैसे दिग्गज पत्रकारों के साथ काम कर चुके राजू भारतान असिस्टेंट एडिटर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

इस मैगजीन में अपनी काफी लंबी पारी के दौरान उन्होंने दो क्रिकेट स्पेशल इश्यू भी निकाले थे, जिन्होंने 4.05 लाख और 3.8 लाख सर्कुलेशन का आंकड़ा भी छुआ था। इसके अलावा वह क्रिकेट पर कॉलम भी लिखते थे। उन्होंने वर्ष 1974 में क्रिकेट पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘The Victory Story’ का निर्देशन भी किया था।

‘पीटीआई’ के पहले जनरल मैनेजर ए.एस भारतान के बेटे राजू भारतान ने ‘Rivals in the Sun’(1952) और ‘Indian Cricket-The Vital Phase’ (1977) समेत छह किताबें भी लिखी थीं।

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वरिष्ठ पत्रकार रवि सुबैय्या ने दुनिया को कहा अलविदा

पोलियो से ग्रस्त रवि सुबैय्या कर्मठता व जीवटता की साक्षात मिसाल थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 06 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 06 February, 2020
Ravi Subbaiah

स्वतंत्र पत्रकार रवि सुबैय्या का निधन हो गया है। नवी मुंबई के रहने वाले 51 वर्षीय सुबैय्या ने यहां वाशी इलाके में स्थित अपने आवास पर रविवार को अंतिम सांस ली।

पोलियो से ग्रस्त होने के बावजूद रवि ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और ‘एनएमटीवी’ (NMTV) नाम से केबल टीवी इंफॉर्मेशन सर्विस शुरू की। वह कई एनजीओ से जुड़े हुए थे और प्रेरणादायक भाषण देने के लिए जाने जाते थे। रवि के परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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पत्रकार ने कुछ यूं पेश की ईमानदारी की मिसाल  

वे लोग जो कहते हैं कि अब दुनिया में बेईमानों का राज है। हर तरफ धोखेबाज हैं, लुटेरे बैठें हैं। तो बता दें कि ऐसे लोगों की सोच को बदल देने वाला काम आगरा के रहने वाले पत्रकार समीर क़ुरैशी ने किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 February, 2020
Last Modified:
Wednesday, 05 February, 2020
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वे लोग जो कहते हैं कि अब दुनिया में बेईमानों का राज है। हर तरफ धोखेबाज हैं, लुटेरे बैठें हैं। तो बता दें कि ऐसे लोगों की सोच को बदल देने वाला काम आगरा के रहने वाले पत्रकार समीर क़ुरैशी ने किया है। इस पत्रकार ने ईमानदारी की वो मिसाल पेश की है, जिसे सुनकर हर कोई उसकी प्रशंसा कर रहा है। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को थाना न्यू आगरा के अंतर्गत बल्केश्वर कालोनी निवासी धर्मेंद्र कुमार पुत्र देवकी नंदन जूते बनाने का कारखाना चलाते हैं। मंगलवार की दोपहर को धर्मेंद्र कारखाने के लिए दस हजार रुपए का सामान लेने सदर भट्टी गए थे। तभी उन पैसों में से 2500 रुपए रास्ते मे गिर गए, जिसकी वजह से युवक काफी परेशान था।

उसी दौरान रास्ते से गुजर रहे पत्रकार समीर क़ुरैशी की नजर सड़क पर पड़े हुए 2500 रुपयों पर पड़ी, तो वह रुपयों को लेकर थाना मंटोला की डिवीजन चौकी पर पहुंच गए। चौकी में मौजूद प्रभारी वीर सिंह को वह पैसे दे दिए। वहीं कुछ देर बाद युवक भी पैसे गिरने की जानकारी देने के लिए पुलिस चौकी पहुंचा। जहां मौजूद पत्रकार समीर क़ुरैशी और चौकी प्रभारी वीर सिंह ने वह पैसे युवक के सुपुर्द कर दिए।

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वीजा नियमों के उल्लंघन में फंसा पत्रकार, अधिकारियों ने यूं दी बड़ी राहत

बता दें कि आव्रजन कानूनों के उल्लंघन के आरोप में पत्रकार को पांच साल की कैद के साथ ही 36,500 डॉलर जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 03 February, 2020
Last Modified:
Monday, 03 February, 2020
Philip Jacobson

छह हफ्ते तक हिरासत में रखने के बाद एक अमेरिकी पत्रकार को इंडोनेशियाई अधिकारियों ने वापस उसके देश भेज दिया है। इस बात की जानकारी देते हुए पत्रकार के वकील ने कहा कि बोर्नियो द्वीप पर देश के अधिकार कार्यकर्ताओं से मिलने के बाद उन्हें रिहा किया गया है। दरअसल, पत्रकार फिलिप माइरर जैकबसन के पास वीजा नही था, जिसके चलते उन पर आव्रजन कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगा था।

उनके वकील अर्यो नुग्रोहो ने बताया कि आव्रजन कार्यालय की तरफ से आरोपों को वापस ले लेने के बाद पत्रकार जैकबसन को जकार्ता अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से वापस अमेरिका भेज दिया गया।

बता दें कि आव्रजन कानूनों के उल्लंघन के आरोप में उन्हें पांच साल की कैद के साथ ही 36,500 डॉलर जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता था।

कैलिफोर्निया के फिलिप माइरर जैकबसन को 21 जनवरी को पलंगकराया शहर में हिरासत में लिया गया था। जैकबसन पर्यावरणीय विज्ञान समाचार वेबसाइट मोंगाबेय के संपादक हैं। यह वेबसाइट उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की सूचना उपलब्ध कराती है।

 

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