हिंदी का जलवा: पाक पढ़ा रहा है चीन को...

क्या आप ये मानेंगे कि पाकिस्तान से हिंदी सीख रहे हैं चीनी और खाड़ी देशों के बहुत से राजनयिक और रक्षा विशेषज्ञ? पर ये सच है...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 14 September, 2018
Last Modified:
Friday, 14 September, 2018
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विवेक शुक्ला ।।

क्या आप ये मानेंगे कि पाकिस्तान से हिंदी सीख रहे हैं चीनी और खाड़ी देशों के बहुत से राजनयिक और रक्षा विशेषज्ञ? पर ये सच है और खुद पाकिस्तान के भीतर भी हिंदी को जानने-समझने-सीखने की प्यास तेजी से बढ़ रही है।

दरअसल देश के बंटवारे से पहले समूचे पाकिस्तान के पंजाब से लेकर सिंध में हिंदी पढ़ाई जाती थी। लाहौर हिंदी का गढ़ होता था। वहां पर हिंदी के कई बड़े प्रकाशन भी थे। इनमें राजपाल एंड संस खास है। पर बाद में हिंदी को भी बंटवारे का खामियाजा भुगतना पड़ा। हिंदी को शत्रुओं की भाषा माना गया। बहरहाल, चीनियों और अरब देशों के रक्षा और कूटनीति के जानकारों को हिंदी का कामचलाऊ ज्ञान मिल रहा है पाकिस्तान की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मॉडर्न लैंगवेज (एनयूएमएल) में। ये इस्लामाबाद में है। इसके अलावा पंजाब यूनिवर्सिटी, लाहौर, में भी हिंदी विभाग सक्रिय है 1983 से।

एनयूएमएल के हिंदी विभाग में पांच टीचर हैं। इधर हिंदी में डिप्लोमा कोर्स से लेकर पीएचडी तक करने की सुविधा है। एनयूएमएल में हिंदी के साथ-साथ पाकिस्तान में बोली जानी बहुत सी अन्य भाषाओं के अध्यापन की व्यवस्था है। उधर, पंजाब यूनिर्सिर्टी की हिंदी फैकल्टी में दो टीचर हैं। विगत जून माह में सिंगापुर में जाने का मौका मिला। वहां के लिटिल इंडिया क्षेत्र के एक रेस्तरां में लंच के दौरान एक दिन एक चीनी मूल की महिला हमारे से हिंदी में पूछने लगी, ‘क्या आप भारत से हैं?’ उसका ये सवाल सुनकर बड़ा सुखद अहसास हुआ। हमने जवाब दिया। ‘जी, हम भारतीय हैं।’ उसके बाद गपशप चालू हो गई। बातचीत में उस भद्र चीनी महिला ने बताया कि उसने हिंदी बीजिंग में सीखी। उसके कई मित्र इस्लसामबाद स्थित एनयूएमएल से हिंदी का अध्ययन कर रहे हैं। एनयूएमयू में साल 1973 से हिंदी विभाग चल रहा है।

तो माना जा सकता है कि इसके अब तक के सफर में सैकड़ों हिंदी प्रेमियों ने हिंदी को और करीब से जाना होगा। कुछ साल पहले तक दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीश्नर रहे रियाज खोखर ने बताया था कि चूंकि हिंदी पाकिस्तान के पड़ोसी मुल्क भारत की अहम भाषा है, इसलिए हम इसकी अनदेखी नहीं कर सकते। हालांकि वे इस सवाल का उत्तर नहीं दे पाए थे कि कराची यूनिवर्सिटी का हिंदी विभाग क्यों बंद हो गया। हालांकि कराची में भारत से जाकर बसे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार वगैरह के लोगों की भारी तादाद है। इसलिए  वहां की यूनिवर्सिटी  से हिंदी विभाग को बंद करना जायज नहीं माना जा सकता है। कराची और सिंध क्षेत्र में ही पाकिस्तान के हिन्दुओं की ठीक-ठाक आबादी भी है। इनमें हिन्दू धर्म ग्रंथों को हिंदी में पढ़ने की लालसा रहती है। जाहिर है, समूचे सिंध और कराची में हिंदी अध्यापन की व्यवस्था न होने से तमाम लोगों को कठिनाई होती होगी।

एनयूएमएल की हिंदी विभाग की प्रमुख डॉ. नसीमा खातून हैं। उन्होंने नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में पीएचडी की है। उनके प्रोफाइल से साफ है कि वह आगरा से संबंध रखती हैं। वह आगरा यूनिवर्सिटी में भी पढ़ी हैं। उनके अलावा इस विभाग में शाहिना जफर भी हैं। वह मेरठ यूनिवर्सिटी की छात्रा रही हैं। वह कॉन्ट्रैक्ट पर इधर पढ़ाती हैं। इसी क्रम में शमीम रियाज भी हैं। वह पटना यूनिवर्सिटी से एमए हैं। जुबैदा हसन भी इधर कॉट्रैक्ट पर पढ़ा रही हैं। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की छात्रा रही हैं। एक बात समझ आ रही है कि पाकिस्तान में हिंदी को वहां पर निकाह के बाद गई भारत की महिलाएं ही पढ़ा रही हैं।

पंजाब यूनिवर्सिटी, लाहौर में भी हिंदी के अध्ययन की व्यवस्था है। यहां पर समूचे पंजाब के हिंदी प्रेमी आते हैं। इधर हिंदी विभाग सन 1983 में स्थापित हुए। यहां पर दो अध्यापक है फैकल्टी में।

पाकिस्तान के इतिहास के पन्नों को खंगालने पर समझ आ जाएगा कि वहां पर भाषा को लेकर सरकारी नीति शुरुआत से ही बेहद तर्कहीन रही। पाकिस्तान में उर्दू को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिला। एक उस भाषा को जो पाकिस्तान की मिट्टी की जुबान नहीं थी। उसे तो सिर्फ भारत से गए मुहाजिर जानते थे। उर्दू को देश की राष्ट्रभाषा थोपने के चलते पाकिस्तान को आगे चलतकर बड़ा नुकसान हुआ। भाषा के सवाल पर पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) की अनदेखी पाकिस्तान की आगे चलकर दो-फाड़ होने की बड़ी वजह रही।

बहरहाल भारत और पाकिस्तान में भाषीय और संस्कृतिक समानताओं के कारण पाकिस्तान में हिंदी का हाल के बरसों में प्रभाव देखने को मिल रहा है। हिंदी फिल्मों और भारतीय टीवी सीरियलों के कारण पाकिस्तान में हिंदी का बहुत प्रभाव बढ़ रहा है। दर्जनों हिंदी के शब्द आम पाकिस्तानी की आम बोल-चाल में शामिल हो गए हैं। अब पाकस्तानियों की जुबान में आप विवाद, अटूट, विश्वास, आशीर्वाद, चर्चा, पत्नी, शांति जैसे शब्द सुन सकते हैं। इसकी एक वजह ये भी समझ आ रही कि खाड़ी के देशों में लाखों भारतीय-पाकिस्तानी एक साथ काम कर रहे हैं। दोनों के आपसी रिश्तों के चलते दोनों एक-दूसरे की जुबान सीख रहे हैं। दुबई या अबू धाबी जैसे शहरों में हजारों पाकिस्तानी भारतीय कारोबारियों की कंपनियों, होटलों, रेस्तरां वगैरह में काम कर रहे हैं। इसके चलते वे हिंदी सीख लेते हैं।

एक पाकिस्तानी विद्वान बता रहे थे कि भारतीय़ समाज और संस्कृति को और गहनता से जानने वाले भी पाकिस्तानी हिंदी सीखना चाह रहे हैं।

 उधर, पाकिस्तान के हिन्दू नौजवानों में अपने धर्म ग्रंथों को हिंदी में पढ़ने की लालसा हिंदी की तरफ खींच रही है।  है। ये अपने बड़े-बुजुर्गों से हिंदी सीख रहे हैं। चंदर कुमार पाकिस्तान के सिंध से संबंध रखते हैं। अब दुबई में रहते हैं। एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ में काम करते हैं। वे बता रहे थे कि हमें हिंदी अपने बुजुर्गों से सीखने को मिल रही हैं। अब हम हिंदी अपनी अगली पीढ़ी को पढ़ाने की स्थिति में हैं। सिंध और कराची मे रहने वाले हिन्दू सिंधी के माध्यम से हिंदी का अध्ययन कर रहे हैं। पाकिस्तान में कम से कम मिडिल क्लास से संबंध रखने वाले हिन्दू तो हिंदी सीखते ही हैं। हालांकि पाकिस्तान के हिन्दुओं की मातृभाषा हिंदी नहीं है, पर वे हिंदी से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं।

पाकिस्तान में हिंदी फले-फूले इससे बेहतर कोई बात नहीं हो सकती। आखिर भाषा का संबंध किसी धर्म या जाति से तो नहीं होता।

(लेखक यूएई दूतावास के पूर्व सूचना अधिकारी और हिंदी दैनिक 'हिन्दुस्तान' के विशेष संवाददाता रह चुके हैं)

  

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निजी चैनल के वाहन पर हमला, दो एम्प्लॉयीज की गई जान, 6 घायल

एक निजी टीवी चैनल के वाहन पर विस्फोट से हमला किया गया, जिसमें चैनल के दो कर्मचारियों की मौत हो गई। इनमें एक पत्रकार और एक ड्राइवर बताया जा रहा है

Last Modified:
Monday, 01 June, 2020
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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक निजी टीवी चैनल के वाहन पर विस्फोट से हमला किया गया, जिसमें चैनल के दो कर्मचारियों की मौत हो गई। इनमें एक पत्रकार और एक ड्राइवर बताया जा रहा है। आंतरिक मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है।  

बता दें कि अफगानिस्तान के इस टेलिविजन चैनल का नाम ‘खुर्शीद टीवी’ है, जिसके वाहन पर निशाना साधते हुए शनिवार को आइइडी ब्लास्ट किया गया। इस विस्फोट में एक पत्रकार और ड्राइवर की मौत हो गई। खुर्शीद टीवी के संपादक सिद्दकी के मुताबिक, इस विस्फोट में चैनल के 6 स्टाफ विस्फोट में जख्मी है और दो की हालत गंभीर है।

अफगानिस्तान के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर अब्दुल्ला ने ट्वीट में कहा कि खुर्शीद टीवी के स्टाफ पर हमले से वे काफी दुखी हैं और मामले में जांच के लिए उन्होंने कानून प्रवर्तन प्राधिकारियों को निर्देश दिया है। अफगानिस्तान राष्ट्रपति के प्रवक्ता सिदिक सिद्दकी ने भी हमले की निंदा की है।

फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ग्रुप ने ली है।   

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इस कार्यक्रम के जरिये याद किए गए वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर नेशनल मीडिया क्लब की ओर से पंकज कुलश्रेष्ठ की पत्नी को सौंपा गया एक लाख रुपए का चेक

Last Modified:
Sunday, 31 May, 2020
Journalism Day

हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर शनिवार को नेशनल मीडिया क्लब (एनएमसी) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ को श्रद्धांजलि दी गई। पंकज कुलश्रेठ की श्रद्धाजंलि सभा में ऑनलाइन रूप से (जूम एप के माध्यम से) शिरकत करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित ने कहा कि  पत्रकारिता दिवस के मौके पर नेशनल मीडिया क्लब के द्वारा जो कार्य किया गया है, वह सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि नेशनल मीडिया क्लब पत्रकारों की रक्षा को लेकर समय-समय पर जो कार्य करता है, वह काबिले तारीफ हैं। इस क्लब के माध्यम से पत्रकारों को नया मुकाम मिला है। उन्होंने कहा कि पंकज कुलश्रेठ की मृत्यु पत्रकार जगत की लिए बहुत बड़ी क्षति है।

कर्यक्रम के दौरान नेशनल मीडिया क्लब के अध्यक्ष सचिन अवस्थी ने पंकज कुलश्रेष्ठ की पत्नी को एक लाख रुपए का चेक प्रदान किया। श्रद्धांजलि सभा में ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायन दीक्षित व नेशनल मीडिया क्लब के संस्थापक रमेश अवस्थी समेत तमाम पत्रकारों ने पंकज कुलश्रेष्ठ को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके साथ ही वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।

इस दौरान नेशनल मीडिया क्लब के संस्थापक रमेश अवस्थी ने आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार से बात कर जल्द ही पंकज कुलश्रेष्ठ के परिवार के एक सदस्य की सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस महामारी के खत्म होने के बाद नेशनल मीडिया क्लब के द्वारा एक बड़ा आयोजन किया जाएगा, जिसमें कोरोना वॉरियर्स पत्रकारों के साथ ही उन सभी पत्रकारों का सम्मान किया जाएगा, जिन्होंने इस समय में अपने कार्य को लगातार अंजाम दिया। वहीं, सचिन अवस्थी ने कहा कि नेशनल मीडिया क्लब पंकज कुलश्रेठ के परिवार के सदस्यों के साथ हमेशा खड़ा है। सरकार से बात करके जल्द परिवार को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। इस दौरान शहर के वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र पटेल, समीर कुरेशी, अनिल शर्मा, पंकज राठोर, अनिल राणा, कमिर कुरेशी आदि मौजूद रहे।

गौरतलब है कि दैनिक जागरण, आगरा के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का पिछले दिनों निधन हो गया था। कोरोनावायरस (कोविड-19) पॉजिटिव होने के बाद उन्हें आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली थी।

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार केके शर्मा

पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार केके शर्मा का निधन हो गया है। वह कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।

Last Modified:
Saturday, 30 May, 2020
KK Sharma

पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार केके शर्मा का निधन हो गया है। वह कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। राजधानी दिल्ली के संजय गांधी अस्पताल में शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

बता दें कि केके शर्मा के पुत्र अश्विनी कुमार भी पत्रकार हैं और इन दिनों समाचार एजेंसी ‘हिन्दुस्थान’ में कार्यरत हैं। केके शर्मा के निधन पर ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट’ (इंडिया) से संबद्ध ‘दिल्ली पत्रकार संघ’ (DELHI JOURNALISTS ASSOCIATION) और तमाम पत्रकारों समेत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शोक जताते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

 

 

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इस बीमारी ने छीन ली वरिष्ठ पत्रकार पीयूष कांति दास की जिंदगी

असम के वरिष्ठ पत्रकार पीयूष कांति दास का बुधवार की देर रात निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे।

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
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असम के वरिष्ठ पत्रकार पीयूष कांति दास का बुधवार की देर रात निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे और किडनी की बीमारी से ग्रसित थे। तबीयत ज्यादा खराब होने चलते उन्हें गुवाहाटी के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां बीते बुधवार रात करीब 11 बजे अंतिम सांस ली।

पत्रकार की फैमिली में उनकी पत्नी और एक बेटी शिंजिनी सौहार्दियो हैं। पत्रकार के निधन पर विभिन्न दल एवं संगठनों के अलावा सरकार की ओर से भी गहरा शोक व्यक्त किया गया है।

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कोरोना की चपेट में आए दूरदर्शन के कैमरामैन की मौत

देश में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
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देश में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। बुधवार को कोरोना की चपेट में आकर पब्लिक ब्रॉडकास्टर दूरदर्शन (डीडी) के कैमरामैन योगेश कुमार (53) की मौत हो गई। कोरोना से अपने एक एम्प्लॉयी की मौत के बाद दूरदर्शन ने अपने कुछ एम्प्लॉयीज को आइसोलेशन में जाने के लिए कहा है। वहीं, बिल्डिंग में सैनिटाइजेशन का काम किया जा रहा है।    

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, योगेश कुमार की मौत बुधवार को हुई हालांकि उनकी कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट गुरुवार को आई। अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह कैसे संक्रमित हुए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ‘योगेश ने बेचैनी की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें शालीमार बाग एरिया में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से हमें पता चला कि कार्डियक अरेस्ट के कारण उनकी मौत हुई है, हालांकि, गुरुवार को उनकी कोविड-19 की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हम दूरदर्शन के ऑपरेशन के परिचालन को दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर रहे हैं और सभी जरूरी प्रोटकॉल का पालन किया जाएगा।’

बताया यह भी जाता है कि योगेश कुमार ने पिछले दिनों कम से कम दो वरिष्ठ अधिकारियों के इंटरव्यू में अपनी सहभागिता निभाई थी। इनमें एक रेलवे के और दूसरा केंद्रीय मंत्रालय के अधिकारी थे। यही नहीं, करीब 12 दिन पहले वह ‘एम्स’ (AIIMS) एरिया में भी गए थे। इस घटना के बाद प्रसार भारती ने डीडी न्यूज के ट्रांसमिशन का कार्य कुछ दिन तक खेलगांव स्थित ऑफिस में शिफ्ट कर दिया है।

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नहीं रहे मातृभूमि ग्रुप के प्रबंध निदेशक एमपी वीरेंद्र कुमार

समाचार एजेंसी ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’(PTI) के तीन बार चेयरमैन रह चुके थे वीरेंद्र कुमार, वह पीटीआई के निदेशक मंडल में भी शामिल थे

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
Veerendra Kumar

मलयालम लेखक-पत्रकार और केरल से राज्यसभा सदस्य एमपी वीरेंद्र कुमार का गुरुवार को कोझिकोड में निधन हो गया। वह 84 साल के थे। वीरेंद्र कुमार मलयालम दैनिक समाचार पत्र मातृभूमि समूह के प्रबंध निदेशक थे। वीरेंद्र कुमार समाचार एजेंसी ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’(PTI) के  तीन बार चेयरमैन रह चुके थे। वह समाचार एजेंसी के निदेशक मंडल में भी शामिल थे। वीरेंद्र कुमार का अंतिम संस्कार आज वायनाड में किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वीरेंद्र कुमार को गुरुवार रात करीब 8.30 बजे कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने देर रात करीब साढ़े 11 बजे कोझिकोड के निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

वीरेंद्र कुमार का जन्म 22 जुलाई को केरल के वायनाड में एम के पाथमप्रभा के घर हुआ था। वीरेंद्र कुमार कई किताब लिख चुके हैं। वह वर्ष 1987 में केरल विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। वह दो बार लोकसभा के लिए भी चुने गए। मार्च 2018 में वह केरल से राज्यसभा के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए थे।

उनके परिवार में पत्नी, तीन पुत्रियां और एक पुत्र हैं। वर्ष 2016 में हिमालय पर यात्रा वृत्तांत (हैमवाता भूमिइल) के लिए उन्हें मूर्तिदेवी पुरस्कार दिया गया था। एमपी वीरेंद्र कुमार के निधन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

 

 

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राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार एडिटर को मिली जमानत

गुजरात की एक अदालत ने बुधवार को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार 'फेस ऑफ नेशन' न्यूज पोर्टल के एडिटर धवल पटेल को जमानत दे दी

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2020
Court

गुजरात की एक अदालत ने बुधवार को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार 'फेस ऑफ नेशन' न्यूज पोर्टल के एडिटर धवल पटेल को जमानत दे दी।  एडिटर धवल पटेल ने राज्य में कोरोना वायरस के बढ़ते मामले पर रिपोर्ट करते हुए गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना जताई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

सत्र अदालत के न्यायाधीश पीसी चौहान ने एडिटर को नियमित जमानत देते हुए कहा कि वह अब प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करेंगे। यह प्राथमिकी अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124(ए) और आपदा प्रबंधन कानून के तहत दर्ज की गई थी।

प्राथमिकी के मुताबिक, धवल पटेल ने 7 मई को अपने पोर्टल पर एक खबर लिखी थी, जिसका शीर्षक था, 'मनसुख मंडाविया को हाईकमान ने बुलाया, गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना'। वहीं खबर में कहा गया था कि कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के कोरोना वायरस संकट से निपटने के तरीके से आलाकमान खुश नहीं है, लिहाजा रूपाणी के स्थान पर केंद्रीय मंत्री मंसुख मंडाविया को मुख्यमंत्री बना सकता है।

बता दें कि मंडाविया केंद्रीय मंत्री और गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं।

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जानिए, क्यों कार्यक्रम छोड़ जान बचाने के लिए स्टूडियो से बाहर भागी महिला एंकर

टीवी चैनल पर लाइव चले इस दृश्य को जिसने भी देखा वह हैरान रह गया, जिसके बाद कई यूजर्स ने महिला एंकर और चैनल के प्रबंधन की मूर्खता की आलोचना भी की

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
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कई बार ऐसा सुनने या पढ़ने को मिला होगा कि किसी टीवी कार्यक्रम में अचानक कुछ हादसा हो जाए और दर्शक उसे लाइव देख रहे हों। हो सकता है कि शायद इस तरह के दृश्य को आपने टीवी पर लाइव देखा भी हो। दरअसल कुछ इसी तरह का मामला मिस्र (Egypt) से सामने आया है।

यहां की एक महिला एंकर लुबना असल (Lubna Asal) को अपने टीवी शो में एक मेहमान के साथ बंदर बुलाना महंगा पड़ गया। 'अरब मीडिया' की रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीवी कार्यक्रम (अल-हयात अल-यूएम) 'जिंदगी आज' की मेजबान लुबना असल ने एक व्यक्ति को इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया था, जिसमें वह अपने साथ एक बंदर भी लाया था। कार्यक्रम में बातचीत के दौरान बंदर अचानक महिला एंकर की ओर देखने लगा। महिला भी घबरा गई। फिर अचानक बंदर उस पर कूद पड़ा, जिसके बाद स्टूडियो में भगदड़ मच गई।

जब टीवी कार्यक्रम चल रहा था, महिला एंकर ने स्टूडियो में अपनी कुर्सी के पास बंदर को बैठाया और मेहमान से सवाल पूछने में व्यस्त रहीं। महिला समय-समय पर बंदर को देखती रही, ताकि वह उनके पास न जाए और आराम से बैठ जाए, लेकिन बंदर अचानक महिला की तरफ कूद पड़ा, जिसके बाद स्टूडियो में भगदड़ मच गई। स्‍टूडियो में मौजूद लोग इधर-उधर दौड़ने लगे। लुबना असल ने बचाव करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सकीं और फिर महिला घबराहट में चिल्लाने लगीं। उन्‍होंने अपनी जान बचाने के लिए कार्यक्रम छोड़ दिया और स्टूडियो से बाहर भाग गईं।

टीवी चैनल पर लाइव चले इस दृश्य को जिसने भी देखा वह हैरान रह गया, जिसके बाद कई यूजर्स ने महिला एंकर और चैनल के प्रबंधन की मूर्खता की आलोचना भी की और कहा कि वे भविष्य में किसी भी जानवर को अपने कार्यक्रम में आमंत्रित न करें, अन्यथा एक बड़ा हादसा हो सकता है।  

यहां देखें वीडियो-

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महिला आयोग ने न्यूज चैनल के इस रवैये को बताया असंवेदनशील, लिया ये स्टेप

मामला असम स्थित ‘प्राग’ न्यूज चैनल से जुड़ा हुआ है। आयोग ने मंगलवार को चैनल के असंवेदनशील रवैये की निंदा करते हुए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
NCW

न्यूज चैनल द्वारा गर्भावस्था के कारण अपनी महिला पत्रकार को कथित रूप से इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने के मामले की राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कड़ी निंदा की है। मामला असम स्थित ‘प्राग’ न्यूज चैनल से जुड़ा हुआ है। आयोग ने मंगलवार को चैनल के असंवेदनशील रवैये की निंदा करते हुए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। बताया जाता है कि रंजीता राभा नामक यह महिला पत्रकार इस चैनल से करीब 14 साल से जुड़ी हुई थी। आरोप है कि गर्भवती होने के कारण उसे इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया है।     

इस बारे में जारी एक बयान में राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है, ‘महिलाओं के सभी अधिकारों में से एक मातृत्व का अधिकार भी है। हालांकि, असम की एक हालिया घटना ने विभिन्न संस्थानों द्वारा अपनी गर्भवती एंप्लाईज के प्रति दोहरे मापदंड को उजागर किया है।’

‘NCW’ का कहना है कि 22 मई को एक मीडिया रिपोर्ट सामने आई थी। ‘Indian Journalists Union criticises Prag News for sacking pregnant journalist’ शीर्षक से प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया था कि संस्थान ने गर्भवती महिला पत्रकार को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया है।

इसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने चैनल द्वारा अपनी गर्भवती एंप्लाईज के प्रति अपनाए गए इस रवैये की निंदा की है। आयोग ने चैनल से इस मामले में जल्द से जल्द अपना पक्ष भेजने के लिए कहा है। बता दें कि इससे पहले ‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ (IJU) ने रंजीता राभा को चैनल प्रबंधन द्वारा हटाए जाने पर गहरी चिंता जताई थी।

‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ का कहना था, ‘राभा के अनुसार वह इस मामले को सीएमडी संजीव नारायण के पास ले गई थी, जिन्होंने कहा कि चैनल में मैटरनिटी लीव की कोई व्यवस्था नहीं है और इस अवधि की सैलरी नहीं दी जाएगी। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने के आदेश भी दिए।’

‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ का यह भी कहना था कि राभा को नौकरी से हटाया जाना अस्वीकार्य है और यह सीधे-सीधे लैंगिक भेदभाव का मामला है।

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इस खबर को लेकर मीडिया से नाराज हुए राष्ट्रपति, कही ये बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया से नाराजगी जगजाहिर है। मीडिया के प्रति एक बार फिर उनकी नाराजगी सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2020
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया से नाराजगी जगजाहिर है। मीडिया के प्रति एक बार फिर उनकी नाराजगी सामने आई है। दरअसल, मीडिया में कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित देश की स्थिति के बीच ट्रंप के गोल्फ खेलने की खबर सामने आई थी। लिहाजा इसी खबर को लेकर ट्रंप ने मीडिया पर निशाना साधा है। ट्रंप ने मीडिया पर हमला बोलते हुए कहा कि मुझे पता था कि यह होगा।

राष्ट्रपति ने इस मामले पर सफाई देते हुए ट्वीट में लिखा, ‘बाहर निकलने के लिए या थोड़ा व्यायाम करने के लिए मैं हर वीकेंड पर गोल्फ खेलता हूं। फर्जी और भ्रष्टाचारी न्यूज ने इसको ऐसे दिखाया जिससे यह पाप की तरह लगने लगा।’

ट्रंप ने आगे लिखा, 'मीडिया ने यह क्यों नहीं कहा कि मैंने तीन महीने बाद पहली बार गोल्फ खेला है और अगर मैं तीन वर्ष बाद भी गोल्फ खेलता तब भी वे इसी तरह से ही कहते। वे नफरत और बेईमानी के आदि हो चुके है तथा वे वास्तव में विक्षिप्त हैं।'

अमेरिका के प्रमुख प्रकाशनों ने दरअसल देश में कोरोना वायरस से एक लाख लोगों की मौत के बीच ट्रम्प के वर्जीनिया में गोल्फ खेले जाने को लेकर उनकी कड़ी आलोचना की थी जिसको लेकर उन्होंने यह ट्विट किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका (Coronavirus in America) में अबतक कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 17 लाख पहुंच गई है, जबकि मौत का आंकड़ा 99,459 हो गया है। कोविड-19 (COVID-19) से 3 लाख 53 हजार लोग ठीक भी हुए हैं।

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