इस उपन्यास ने किया साबित, कंटेंट में दम हो तो मायने नहीं रखतीं इस तरह की बातें

जाने-माने साहित्यकार, पत्रकार और स्तंभकार कमलाकांत त्रिपाठी ने महाकाव्यात्मक शैली का उपन्यास लिखा है

Last Modified:
Tuesday, 30 April, 2019
kamlakant

जिस दौर में उपन्यासों का आकार सिकुड़ता रहा है और माना जा रहा है कि पाठकों को आकर्षित करने के लिए उपन्यासों को छोटा होना चाहिए, उस दौर में जाने-माने साहित्यकार, पत्रकार और स्तंभकार कमलाकांत त्रिपाठी ने महाकाव्यात्मक शैली का उपन्यास 'सरयू से गंगा' लिखा है। खास बात यह है कि करीब 600 पृष्ठों में समाया यह उपन्यास पाठकों को पसंद भी आ रहा है। दिल्ली के साहित्य अकादमी भवन में किताबघर से प्रकाशित इस उपन्यास पर जब वरिष्ठ साहित्यकारों ने चर्चा की तो सामने यही आया कि कंटेंट में दम हो तो न तो उपन्यास की दुरुह भाषा मायने रखती है और न उसका आकार-प्रकार। साहित्य अकादमी भवन में कमलाकांत त्रिपाठी के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक उपन्यास  'सरयू से गंगा' पर मुरली मनोहर प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया था। परिचर्चा में प्रो. नित्यानंद तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा प्रसिद्ध कथाकार संजीव ने विषय-प्रवर्तन किया। कर्ण सिंह चौहान, असगर वजाहत, कैलाश नारायण तिवारी, बली सिंह, संजीव कुमार, राकेश तिवारी एवं अमित धर्मसिंह ने परिचर्चा में वक्ता के रूप में शामिल रहे।

इस अवसर पर कथाकार संजीव ने सरयू से गंगा को इतिहास एवं सामाजिक जीवन के विस्तृत फलक पर लिखा गया एक वृहद् औपन्यासिक कृति बताया। पानीपत, प्लासी, बक्सर, मुगल साम्राज्य का ह्रास, ईस्ट इंडिया कंपनी के वर्चस्व में सतत विस्तार और नेपाल के एकीकरण की प्रक्रिया की पृष्ठभूमि में उन्होंने मालगुजारी, तालुकेदारी, किसानी और खेती को उपन्यास के केन्द्र में बताया। दूसरे वक्ता अमित धर्मसिहं ने उपन्यास को इतिहास, समाज और जीवन के तीन विभिन्न सन्दर्भों में बांटकर देखा। अठारहवीं सदी के उत्तरार्ध में कम्पनी के प्रभुत्व में विस्तार के साथ किसान रिआया की तकलीफों, लगान की मार से उसके शोषण तथा स्त्री जीवन की विडम्बना को उन्होंने वर्तमान परिदृष्य के लिए प्रासंगिक बताया। जीवन पक्ष पर बात करते हुए उन्होंने धर्म का अतिक्रमण करते हुए मानव मन की सत्ता और मन के मिलने से ही सार्थक हिंदू-मुस्लिम एकता को उपन्यास में साकार होते देखा।

तीसरे वक्ता पत्रकार एवं लेखक राकेश तिवारी ने उपन्यास में धार्मिक आडम्बर के रूप में महामत्युंजय जप के प्रसंग का जिक्र करते हुए, लेखक को ऐसे आडम्बरों के खिलाफ खड़े देखा। उन्होंने अठारहवीं सदी के सामाजिक-राजनीतिक संक्रमण तथा लेखीपति, जमील और रज्जाक जैसे पात्रों के माध्यम से सांस्कृतिक विकास के महत्व को लक्षित किया। राकेश जी ने सरयू से गंगा को मूलतः ग्रामीण किसान और मजदूर वर्ग का उपन्यास बताया। अगले वक्ता के रूप में कवि और आलोचक बली सिंह ने उपन्यास के विस्तृत फलक पर तत्कालीन गाँव, किसान, खेत, फसल, जंगल, नदी आदि के भौगोलिक और प्राकृतिक परिदृश्य को मूर्तिमान होते हुए देखा। इस संदर्भ में उन्होंने लेखक की पैनी एवं प्रामाणिक दृष्टि के सामने गूगल को अक्षम पाया। उन्होंने कहा, ‘उपन्यास एक नाटकीय शैली में लिखा गया है, जिसमें इतिहास नामक पात्र सूत्रधार की  भूमिका निभाता है। नवाबों और कम्पनी के बीच की संधि से किसान को कुछ लेना-देना नहीं है किन्तु वह उसके आधार पर होने वाले शोषण का सबसे बड़ा शिकार बनता है। आज के भूमण्डलीकरण के दौर में ऐसी ही संधि सरकार और पूँजीपति के बीच होती है, जिसका खामियाजा किसान व जनता को बेराजगारी,  भुखमरी और आत्महत्या के रूप में भुगतना पड़ता हैं। उपन्यास का मुख्य पात्र लेखीपति मिलीभगत की इस जकड़ से निकलने के लिए संघर्ष करता दिखाई पड़ता है। उपन्यास में लोकतांत्रिक एकीकरण की चेतना और राष्ट्र राज्य का संदेष अर्न्तनिहित है जो धार्मिक, सांस्कृतिक मिथकों तक सीमित था, किन्तु जिसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं था।

अगले वक्ता व आलोचना पत्रिका के संपादक ने उपन्यास कथा के दो उज्जवल पक्षों-धर्मनिरपेक्षता एवं जनपक्षधरता का नोटिस लिया। लेखीपति, जमील और रज्जाक जैसे पात्र धर्म का अतिक्रमण कर एकजुट होते हैं और कम्पनी के ऊपर नवाब की निर्भरता से समाज में जो भयानक, अराजक और शोषक स्थिति पैदा होती है, उसके खिलाफ संघर्ष करते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राघ्यापक और लेखक कैलाश नारायण तिवारी ने लेखकीय स्वायत्तता और स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कमलाकांत ने अपने इस उपन्यास में इतिहास के वृहत्तर फलक के दायरे में लेखीपति, जमील, रज्जाक, सावित्री जैसे पात्रों की परिस्थितियों के अनुरूप उनके मनोभावों और सूक्ष्म संवेदना का जो उन्मुक्त खाका खींचा है, उससे प्रेमचन्द के गोदान मेंगुंथी दो समान्तर कथाओं की याद आती है। उपन्यास में हिन्दू-मुस्लिम संबंध को धर्म से इतर विशुद्ध मानवीय धरातल पर दिखाया गया है जो सूक्ष्म संवेदना से ओतप्रोत है।

कर्ण सिंह चौहान ने कहा कि कोई भी कृति हमारे सामने संवाद के लिए होती है और यह उपन्यास हमारे सामने सजीव संवाद प्रस्तुत करता है। देश में स्वतंत्र ग्रामीण इकाई की जो स्वस्थ और सम्यक व्यवस्था हजारों साल से चली आ रही थी, अंग्रेजों ने उसे एक ही झटके में तोड़ दिया और उसी के साथ समाज, संस्कृति, और उत्पादन के उत्कृष्ट उपादान ध्वस्त कर दिए। अन्त में उन्होंने निष्कर्ष दिया कि ऐसे उत्तम कोटि के उपन्यास बहुत कम और बहुत समय बाद आते हैं। प्रसिद्ध नाटककार-कथाकर असगर वजाहत ने बताया कि उपन्यास भूत, वर्तमान और भविष्य में विचरण करते हुए अवध प्रदेश की सामंती व्यवस्था के उपनिवेशवादी व्यवस्था में अंतरण की कथा कहता है। उपन्यास में तत्कालीन समाज में धर्म उस अर्थ से भिन्न अर्थ में दिखाई पड़ता है, जो आज के समाज में हावी होता जा रहा है। मुख्य अतिथि प्रोफेसर नित्यानंद तिवारी ने कहा कि उपन्यास इतिहास की धारा को सही तरह से उभारता है। उसकी अन्तःगतिशीलता और क्राइसिस की धार को कुंठित नहीं करता। तत्कालीन समाज में जो डर व्याप्त है, उपन्यास का हर पात्र उसकी गिरफ्त में है। उस डर और उसके पीछे की अमानवीयता से सतत लड़ता हुआ दिखाई पड़ता है जो आज के परिदृश्य के लिए बेहद प्रासंगिक है। उपन्यास हिन्दू-मुस्लिम समाज का वह रूप पेश करता है, जो जायसी के पद्मावत में मिलता है।

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में मुरली मनोहर प्रसाद सिंह ने उपन्यास को इतिहास की प्रक्रिया से उपजे उस संकट के मर्म को खोलने वाला बताया, जिसमें व्यापारी बनकर आये अंग्रेज राज सत्ता पर काबिज होते हैं। इतिहासकार राय चौधरी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस उपन्यास में उन्नीसवीं शताब्दी के उपन्यासों की तरह कहीं भी मुस्लिम पुरुष और महिला पात्रों को मानव चरित्र की बुराई के प्रतीक के रूप में नहीं दिखाया गया है। यह कृति धर्म का अतिक्रमण करती हुई मनुष्य के उज्जवल पक्ष को उजागर करने के कारण इस शताब्दी की महत्वपूर्ण औपन्यासिक कृति के रूप में जानी जाएगी। परिचर्चा के समापन के पूर्व अनुपम भट्ट ने प्रतिष्ठित दक्षिण भारतीय लेखक और कर्नाटक विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. टीआर भटट् द्वारा भेजा गया संदेश पढ़कर सुनाया, जिसमें उन्होंने कमलाकांत त्रिपाठी को बधाई देते हुए उन्हें दक्षिण भारत के एस.एल. भैरप्पा के समकक्ष बताया। अंत में अनुपम भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी उपस्थित वक्ताओं और श्रोताओं के प्रति आभार प्रकट किया।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार CMR

‘द हिन्दू’ में करीब 40 साल तक काम किया था, उनकी लिखी कई किताबें हो चुकी हैं प्रकाशित

Last Modified:
Saturday, 13 July, 2019
CMR

वरिष्ठ पत्रकार सीएम रामचंद्र का शुक्रवार को निधन हो गया। 94 वर्षीय रामचंद्र इन दिनों उम्र संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने ‘द हिन्दू’ (The Hindu) में करीब 40 साल तक काम किया था। 24 अप्रैल 1925 को जन्मे रामचंद्र ने अंग्रेजी अखबार ‘डेक्कन हेराल्ड’ (Deccan Herald) में चार साल काम करने के बाद एक जुलाई 1952 को ‘द हिन्दू’ जॉइन किया था। वह यहां से 1992 में सेवानिवृत्त हो गए थे, लेकिन इसकी मासिक पत्रिका ‘फ्रंटलाइन’ (Frontline) के लिए लगातार लिखते रहते थे।

सीएमआर के नाम से फेमस रामचंद्र को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिसंबर 1985 में राज्योत्सव अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। सीएमआर ने कई किताबें भी लिखी थीं। कर्नाटक की राजनीति को लेकर उनकी आखिरी किताब ‘Cockpit of India’s Political Battles - Karnataka’ इस साल मार्च में लॉन्च हुई थी। सीएमआर के निधन पर मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी समेत कई लोगों ने दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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IIMC की कोर्स को-ऑर्डिनेटर को 'ठगों' ने यूं लगाई चपत

वसंत कुंज के शॉपर्स स्टॉप से करने गई थीं खरीददारी, अब कराई एफआईआर

Last Modified:
Friday, 12 July, 2019
Fraud

प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में रेडियो और टीवी पत्रिका की पाठ्यक्रम संयोजक विष्णुप्रिया पांडे ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गई हैं। अपने साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इस बारे में एफआईआर भी कराई है। इस एफआईआर में विष्णुप्रिया पांडे का आरोप है कि वह वसंत कुंज के शॉपर्स स्टॉप में कपड़े खरीदने आईं थीं। यहां उन्हें ऑनलाइन शॉपिंग की राय देकर सेल्समैन ने घर का पता, फोन नंबर आदि जानकारियां हासिल कर ली और पेमेंट भी ले लिया। पांच दिन बाद विष्णुप्रिया पांडे के घर जब कपड़े का पैकेट पहुंचा, तब वह अधूरा था। परेशान विष्णुप्रिया पांडे ने जब लिफाफे पर दिए गए कॉल सेंटर नंबर 1-800-419-6684 पर कॉल किया तो एक बार फिर से उनसे एक लिंक भेज कर सारी जानकारियां ली गयी और उन्हें लगातार आश्वासन दिया गया कि उनका पैसा रिफंड किया जायेगा। इसी बीच कॉल सेंटर की लाइन डिस्कनेक्ट हो गयी और विष्णुप्रिया पांडे को 9330199375 से कॉल आया जिसमें पहले से बात कर रहे कॉल सेंटर एग्जिक्यूटिव ने मैसेज बॉक्स में भेजे गए उस लिंक को भरने का आग्रह किया।

9330238949 नंबर से आये उस लिंक को विष्णुप्रिया पांडे ने जैसे ही भरा, उसके चंद सेकेंड के भीतर उनके बैंक खाते से 49,000 रुपए दो-दो बार करके और एक-एक हजार रुपए दो बार निकाल लिए गए। यानी उन्हें चंद सेकेंड में ही पूरे एक लाख रुपए की चपत पड़ चुकी थी। पीड़िता को जब मालूम चला कि शॉपर्स स्टॉप के इस गिरोह ने उसे लाखों रुपए की साइबर लूट का निशाना बनाया है तो उसके होश उड़ गए। मामले की शिकायत साइबर अपराध थाने में कराई गई है और पुलिस अनुसंधान जारी है, पर जरूरत इस बात कि है कि हम एक ग्राहक के तौर पर सजग रहें और किसी भी परिस्थिति में बैंक सम्बंधी जानकारी किसी से भी साझा नहीं करें।

विष्णुप्रिया पांडे ने अपने साथ हुई ठगी को लेकर जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसे आप यहां देख सकते हैं। 

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श्रम मंत्री से मुलाकात में पत्रकारों ने उठाए कई मुद्दे, मिला ये आश्वासन

आईआईएमसी के पूर्व डीजी केजी सुरेश के नेतृत्व में श्रम मंत्री से मिला था प्रतिनिधिमंडल

Last Modified:
Friday, 12 July, 2019
Journalist-Delegation

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश  के नेतृत्व में वरिष्ठ पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने श्रम मंत्री संतोष गंगवार से मुलाकात की। वर्तमान में मध्य प्रदेश की जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी स्थित जागरण स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की फैकल्टी में बतौर एमरेटस प्रोफेसर (Emeritus Professor) कार्यरत केजी सुरेश ने इस दौरान श्रम मंत्री से मांग की कि मीडिया की स्वतंत्रता और संरक्षण के लिए नए श्रम प्रावधानों में पत्रकारों के लिए नौकरी की सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी मुद्दे शामिल किए जाएं।

बातचीत के दौरान गंगवार ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि न्ए श्रम कानूनों में पत्रकारों के अधिकारों और हितों की पूरी रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 में दिए गए प्रावधानों की रक्षा करने के अलावा नए श्रम कानूनों में पत्रकारों के लिए अन्य कई बेनिफिट भी शामिल किए जाएंगे। यही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेब पोर्ट्ल्स में काम कर रहे पत्रकारों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।’

श्रम मंत्री से मिलने वालों में केजी सुरेश के साथ ही हेमंत बिश्नोई और सर्जना शर्मा (NUJ-I), अनूप चौधरी, संजय उपाध्याय और नरेंद्र भंडारी (Working Journalists of India), डॉ. प्रमोद कुमार और उमेश चतुर्वेदी (DJA) और भारतीय मजदूर संघ के नॉर्थ जोन के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी पवन कुमार शामिल थे।

श्रम मंत्री के साथ बैठक में पत्रकारों से जुड़े कई मुद्दों के साथ ही यह मामला भी उठाया गया कि सबसे आखिर में गठित हुए प्रेस आयोग के बाद मीडिया के क्षेत्र में काफी बदलाव आए हैं। ऐसे में मीडिया के लिए कानूनी फ्रेमवर्क पर फिर से ध्यान देने की आवश्यकता है। दूसरे प्रेस आयोग की रिपोर्ट प्राइवेट टीवी और रेडियो चैनल्स के आने से पहले उस समय आई थी, जब न तो इंटरनेट था, न ऑनलाइन मीडिया था और न ही सोशल मीडिया था। ऐसे में नए जमाने की मीडिया को देखते हुए सरकार से मीडिया आयोग गठित करने की मांग की गई। बताया जाता है कि श्रम मंत्री ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को पत्रकारों के हितों से जुड़ी मांगों पर सहानुभूतिपूर्ण विचार करने का आश्वासन दिया है।

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'दिल को कचोटने वाला है पत्रकार चंदा बारगल का यूं दुनिया से चले जाना'

बेहद आत्मीय, विनम्र और हमेशा मुस्कुराने वाले थे चंदा बारगल

Last Modified:
Thursday, 11 July, 2019
Chanda Bargal

यकीन नहीं आता। चंदा बारगल ने इस जहां से विदाई ले ली। मध्य प्रदेश में साल भर के भीतर यह दूसरी ‘विदाई’ कचोटने वाली है। दिल में दर्द का समंदर लिए पहले बेहद विनम्र पुष्पेंद्र सोलंकी का जाना और अब वैसे ही नरमदिल,पत्रकारिता के प्रपंचों से दूर चंदा बारगल का करियर की तड़प और कसक को पीते हुए, जीते हुए चले जाना ।

मुझे याद है। नई दुनिया इंदौर में उप संपादक के तौर पर जॉइन किया था। अस्सी का साल था। नई दुनिया की परंपरा के मुताबिक़ प्रत्येक पत्रकार की शुरुआत प्रूफ रीडिंग डेस्क से ही होती थी। चंदा उन दिनों प्रूफ रीडिंग विभाग में थे। उमर में लगभग साल भर छोटे थे, इसलिए परिचय दोस्ती में बदल गया। इसी डेस्क पर नवीन जैन, पवन गंगवाल, मीना राणा, मीना त्रिवेदी, जयंत कोपरगांवकर भी होते थे। हम लोगों का समूह दफ्तर में चर्चाओं का केंद्र रहता था।

चंदा बेहद आत्मीय, विनम्र, हमेशा मुस्कुराने वाला, अच्छी पढ़ाई-लिखाई वाला था। इसलिए घंटों बहस भी होतीं। अक्सर रात दो बजे अखबार निकालने के बाद साइकिलों से राजबाड़ा जाते,पोहे खाते,चाय पीते और सुबह होते-होते घर लौटते। चंदा ने हमेशा मुझे भाई साब ही संबोधित किया। कभी-कभी मैं या नवीन जैन भड़क जाते कि हम लोग बराबरी के ही हैं, सीधे नाम लो, मगर चंदा पर कोई असर नहीं पड़ा।

एक तो उन दिनों नई दुनिया की भाषा का प्रशिक्षण जबरदस्त होता था। कॉमा, फुलस्टॉप से लेकर नुक्ता और चंद्र बिंदु लगाने के मामले में शुद्धता की पूरी गारंटी याना चंदा बारगल। अखबार की स्टाइलशीट से कोई भी विचलित हुआ तो चंदा भाई सीधे भिड़ने के लिए भी तैयार रहते थे। चाहे राहुल बारपुते याने बाबा का लिखा हुआ हो या राजेन्द्र माथुर जी का, अपने चंदा भाई को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था।

चंदा के गोलाई लिए शब्द और हैंडराइटिंग आज भी चित्र की तरह चल रही है। जब राजेन्द्र माथुर जी ने मुझे परिवेश स्तंभ का प्रभारी बनाया तो चंदा के अनेक आलेख मैंने प्रकाशित किए। उसके लिखे पर कलम चलाने का कम ही अवसर आता था। हां, शीर्षक वो कभी नहीं देता था। हमेशा कहता था, 'शीर्षक तो आप ही दें'। उसके लेखन से प्रूफरीडिंग विभाग के प्रभारी किशोर शर्मा नाराज़ रहते थे। उन्हें लगता था कि आलेख लिखने से चंदा काम पर ध्यान नहीं दे पाता। पर यह सच नहीं था।

चंदा के करीब 30-40 आलेख मैंने छापे। उससे पहले वह संपादक के नाम पत्र भी लिखता था। उन दिनों एक-एक पत्र पर भी पाठकों में बहस होती थी। यह बहस कभी-कभी बड़ा मुद्दा बनकर उभरती थी। आजकल अखबार इस तरह का मानसिक व्यायाम अपने पाठकों का नहीं कराते। ऐसे कई पाठक चंदा के नाम से उसे लड़की समझते थे और सीधे पत्र लिखते थे। हम लोग ऐसे पाठकों का बड़ा मजा लेते। कुछ पाठकों को तो चंदा ने उत्तर भी दिए। बाद में भेद खुला तो पाठक शर्मिंदा हो गए।

शाहिद मिर्ज़ा पहले यह स्तंभ देखते थे, फिर प्रकाश हिंदुस्तानी जी ने जिम्मेदारी संभाली। प्रकाश हिंदुस्तानी धर्मयुग चले गए तो मुझ पर इस स्तंभ का भार आन पड़ा। चंदा खुश रहता था कि मैं उसके लिखे पत्रों में अधिक काट-छांट नहीं करता। पर मैं उसे यह कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं दे रहा था। वह लिखता ही ऐसा था। अक्सर हम लोग चोरल चले जाते। चोरल नदी में नहाते और घने जंगलों में ऐश करते। ऐसे न जाने कितने किस्से आज वेदना के साथ याद आ रहे हैं। कल ही तो करियर शुरू किया था और आज इस लोक से विदाई का सिलसिला भी शुरू हो गया।

इधर चंदा भोपालवासी हुए और कुछ समय बाद मैं दिल्ली जा बसा। बीच-बीच में कभी फोन पर तो कभी मिलने पर हम लोग उन दिनों की याद करते। फिर उसका वह लंबा खिंचने वाला ठहाका । उफ्फ....। इस कमबख्त ज़िंदगी ने काल के पहिए में ऐसा फंसाया है कि दोस्तों और अपनों से मिलना भी दुर्लभ होता जा रहा है। जब वे अचानक इस तरह विदा हो जाते हैं तो कलेजे में एक फांस की तरह कुछ अटका रह जाता है।

सच...बहुत याद आओगे चंदा।

(वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल की फेसबुक वॉल से)

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ABP की टीम पर हमले के आरोपित ने उठाया गलत कदम, हो गई मौत

दिल्ली पुलिस की टीम ने दो बदमाशों को किया था गिरफ्तार

Last Modified:
Wednesday, 10 July, 2019
Death

दिल्ली में बारापुला फ्लाईओवर पर पिछले दिनों ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) चैनल की टीम पर हुई गोलीबारी की घटना के मामले में गिरफ्तार तैय्यब नामक एक बदमाश ने मंगलवार को साकेत कोर्ट परिसर की पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना के दौरान पुलिसकर्मी उसे अदालत में पेश करने ले जा रहे थे, इसी दौरान शाम करीब पांच बजे उसने फरार होने के लिए पुलिसकर्मियों से हाथ छुड़ाकर छलांग लगा दी। गंभीर हालत में तैय्यब को ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’(एम्स) में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि आठ जून की रात ‘एबीपी न्यूज’ के रिपोर्टर सिद्धार्थ पुरोहित और कैमरामैन अरविंद कुमार पर यह हमला उस समय हुआ था, जब दोनों प्रसाद नगर थाना क्षेत्र में हुए एक हत्याकांड को कवर करने के लिए ड्राइवर चंदर सेन के साथ ऑफिस की कैब से जा रहे थे। दक्षिण दिल्ली में बारापुला फ्लाईओवर पर रात करीब डेढ़ बजे बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें रुकने का इशारा किया। शक होने पर उन्होंने ड्राइवर से कार की स्पीड बढ़ाने को कहा। इसके बाद बदमाशों ने कार पर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। इनमें से एक गोली कार के दरवाजे पर लगी, दूसरी ने ड्राइवर की तरफ की खिड़की को नुकसान पहुंचाया, जबकि तीसरी किसी तरह निशाने से चूक गई।

बताया जाता है कि बदमाशों ने चैनल की टीम का करीब आधा किलोमीटर तक पीछा भी किया। लेकिन करीब एक किलोमीटर दूर जाकर चैनल की टीम ने पीछे मुड़कर देखा तो आरोपित वहां से गायब हो चुके थे। आरोप है कि पत्रकारों ने आईएनए मेट्रो स्टेशन पर मौजूद पुलिसकर्मियों को इस घटना के बारे में बताते हुए मदद मांगी, लेकिन आसपास के थानों को सतर्क करने के बजाय पुलिसकर्मी मौके से चले गए। इस मामले में पुलिस की लापरवाही का मामला सामने आने पर दिल्ली पुलिस एएसआई जितेंद्र सिंह की सेवा समाप्त कर चुकी है।

बाद में पुलिस ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पकड़े गए बदमाशों की पहचान शाहदरा निवासी तैय्यब (23) और कबीर नगर निवासी शाहिद (20) के रूप में हुई थी। मंगलवार को हुए हादसे के दौरान तैय्यब को एक दिन की पुलिस रिमांड पर लेने के लिए प्रोडक्शन वारंट पर कोर्ट में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था।

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ताइक्वांडो चैंपियनशिप में सौरव पाठक ने जीता गोल्ड, जल्द जाएंगे कोरिया

कोरियन कल्चरल सेंटर इंडिया की ताइक्वांडो एकेडमी के स्टूडेंट रह चुके हैं सौरव पाठक

Last Modified:
Monday, 08 July, 2019
Saurav Pathak

ताइक्वांडो की ‘ओशिनिया पैरा चैंपियनशिप’ (Oceania Para Championship) 2019 में सौरव पाठक ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर अपना कब्जा जमाया है। यह प्रतियोगिता 28 जून 2019 को हुई थी। सौरव पाठक पूर्व में ‘कोरियन कल्चरल सेंटर इंडिया’ (KCCI) की ताइक्वांडो एकेडमी के स्टूडेंट रह चुके हैं। प्रतियोगिता जीतने के बाद वह KCCI भी गए। जल्द ही सौरव पाठक कोरिया में होने वाली इंटरनेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे।

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दुनिया को अलविदा कह गए पत्रकार घनश्याम सती

पिछले दिनों लगभग याददाश्त खो चुके थे और लोगों को पहचान पाने में असमर्थ थे

Last Modified:
Friday, 05 July, 2019
Ghanshyam Sati

रामनगर के वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम सती का असमय चले जाना पत्रकारिता और अभिनय क्षेत्र की बड़ी क्षति के साथ हमारे लिए व्यक्तिगत भी क्षति भी है। हमारे बाल सखा, उम्र में डेढ़-दो साल छोटे और रिश्ते में चाचा घनश्याम सती दबंग और मानवीय गुणों से भरपूर थे।

मनोहर कहानियां और सत्यकथा से लेखन की शुरुआत करने वाले घनश्याम सती गंभीर विषय पर लिखते रहे थे। रीजनल रिपोर्टर के वे रामनगर प्रतिनिधि रहे और उत्तराखंड की जल समस्या पर रीजनल रिपोर्टर में प्रकाशित उनका आलेख प्रतिनिधि आलेख था। रामनगर में पत्रकार संगठनों के वे आवश्यक अंग थे।

हम दोनों एक ही गांव-घर की उपज, चाहे उस भूमि के लिए कुछ न कर पाए हों, लेकिन हैं अल्मोड़ा जिला के रानीखेत प्रखण्ड फयाटनोला गांव की ही पैदावार। रामनगर और गैरसैंण की दूरी अधिक न होने और पत्रकारिता के कारण भी उनसे निकटता शायद अधिक रही होगी।

25 जून को जब उनसे अंतिम मुलाकात हुई वे लगभग याददाश्त खो चुके थे और पहचान पाने में असमर्थ थे। ठीक 10 दिन बाद आज प्रात: चाचा जी ख्याली दत्त असनोड़ा से घनश्याम सती जी के निधन की सूचना मिली। नश्वर शरीर को एक बार विदा होना है, लेकिन जो अच्छाई आप छोड़ गये, वहीं पुण्य संतत्ति के काम आयेंगे और आपकी याद को अक्षुण्ण रखेंगे।

विनम्र श्रद्धांजलि

(पत्रकार पुरुषोत्तम असनोड़ा की फेसबुक वॉल से)

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पत्रकारोें की आम की दावत में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में तीसरे मिथिला आम महोत्सव का आयोजन किया गया

Last Modified:
Thursday, 04 July, 2019
Mango Festival

मैथिल पत्रकार ग्रुप की ओर से दो जुलाई को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में तीसरे मिथिला आम महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्वनी चौबे ने कहा कि मिथिला के आम को दुनिया के बाजार में जगह दिलाने की कवायद की जाएगी। वाणिज्य मंत्रालय और अन्य व्यावसायिक संगठनों से इसके लिए चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां के मालदा, जर्दालु, बंबई किस्म के आम दुनिया के किसी भी अन्य आम की तुलना में किसी तरह कम नहीं हैं, जरूरत सिर्फ उन्हें बाजार तक पहुंच देने की है। अपनी क्वालिटी से ये आम अपनी जगह स्वयं बना लेंगे।

अश्वनी चौबे ने कहा, ‘केंद्र की नरेंद मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हर कदम उठा रही है। ऐसे में फलों के बड़े बाजार को भी हम इसके लिए उपयोग करना चाहते हैं। बिहार के मिथिलांचल में आम की कई किस्म ऐसी हैं कि वे दुनिया के श्रेष्ठतम आम का मुकाबला कर सकती हैं। उन्हें बाजार कैसे मिलेगा। उनकी पैदावर में किस तरह के सुधार या बेहतरी की जरूरत है, इसके लिए कैसे एक विस्तृत बाजार प्रवेश का अभियान चलाया जा सकता है, इस पर कार्य करने की जरूरत है। हम इसके लिए समुचित कदम उठाएंगे। मैथिल पत्रकार ग्रुप ने मिथिला के आम को दिल्ली में लोगों के बीच रखा है, इसके लिए हम उनका धन्यवाद भी करते हैं।‘  

मैथिल पत्रकार ग्रुप के संतोष ठाकुर और दीपक झा ने कहा, ‘हमारा प्रयास होगा कि हम अगले वर्ष से मिथिला के आम उत्पादकों को भी यहां पर लाएं। उनके आम को बिक्री के लिए यहां पर रखें। अब तक हम केवल आम खाने के लिए लोगों को आमंत्रित करते रहे हैं। लेकिन अगले वर्ष से आम की बिक्री का विकल्प भी दिया जाएगा, क्योंकि मिथिला के आम की काफी मांग यहां पर है। हमें उम्मीद है कि इसके माध्यम से हम मिथिलांचल बिहार के आम को एक बाजार देने में सफल रहेंगे।’ कार्यक्रम के सह आयोजक प्रेस एसोसिएशन, द वूमेंस प्रेस कॉपर्स एवं प्रेस क्लब ऑफ इंडिया थे। इस मौके पर जयशंकर गुप्त, गीता श्री, हर्षवर्धन त्रिपाठी, संजीव सिन्हा समेत कई वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए।

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India SME Conclave में जुटे कई दिग्गज, मिला अवॉर्ड

टेफ्लास की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी-बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया

Last Modified:
Tuesday, 02 July, 2019
Awards

मुंबई के रेनेसांस होटल में 26 व 27 जून 2019 को इंडिया एसएमई कॉन्क्लेव और अवॉर्ड्स (India SME Conclave and Awards 2019) का रंगारंग आयोजन हुआ। टेफ्लास की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी-बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुंबई के मेयर विश्वनाथ महदेश्वर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की एडवाइजर श्वेता शालिनी, राज्य प्लानिंग कमीशन के राजेश क्षीरसागर, कृषि मंत्री डॉक्टर अनिल बोंदे, मोहित भारतीय, अमित वाधवानी, अजय ठाकुर, पवन अग्रवाल और अभिनेत्री पेरिजाद जोराबियन जैसी हस्तियां भी शामिल हुईं।

दो दिनों तक चले इस कार्यक्रम में अवॉर्ड्स देने के साथ ही म्यूजिक और फैशन शो का आयोजन भी हुआ। ऋचा सिंह और सीमा कलावड़िया के स्पर्श के फैशन शो में टीवी स्टार धीरज धूपर शो छाये रहे। सिंगर पारुल मिश्रा ने कई गीत गाये और लोगों ने संगीत का भरपूर आनंद उठाया।

कार्यक्रम की झलकियां आप यहां देख सकते हैं-

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कंटेंट निर्माण में जुटी इस बड़ी एजेंसी से जुड़े नरेंद्र त्रिपाठी, निभाएंगे अहम भूमिका

पूर्व में कई मीडिया समूहों के साथ काम कर चुके हैं नरेंद्र त्रिपाठी

Last Modified:
Tuesday, 02 July, 2019
Narendra Tripathi

‘स्मॉल स्क्रीन फिल्म एंड टेलिविजन प्राइवेट लिमिटेड’ (Small Screen Film & Television Pvt Ltd) ने नरेंद्र त्रिपाठी को डायरेक्टर (बिजनेस डेवलपमेंट) के पद पर नियुक्त किया है। नरेंद्र त्रिपाठी को सेल्स, मार्केटिंग और कंटेंट आयडिया के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। वह पूर्व में एनडीटीवी, चैनल7 (अब न्यूज18 इंडिया) औऱ चैनल वी के साथ ही Indya.com और रेडियो मिर्ची व रेडियो मंत्रा के साथ भी काम कर चुके हैं। भारतीय टीवी इंडस्ट्री के पहले लाइफ स्टाइल चैनल ‘एनडीटीवी गुड टाइम्स’ की लॉन्चिंग में उन्होंने काफी अहम भूमिका निभाई थी।  

अपनी नियुक्ति के बारे में नरेंद्र त्रिपाठी का कहना है, ‘4G के आने के साथ ही आज के समय में लगभग सभी के पास स्मार्टफोन है, ऐसे में कंटेंट के इस्तेमाल के तरीकों में काफी बदलाव आ रहा है। इस दौरान कंटेंट क्रिएशन एजेंसी ‘स्मॉल स्क्रीन’ ने भी खुद को एक बेहतर खिलाड़ी साबित किया है औऱ बड़े पैमाने पर क्वालिटी कंटेंट उपलब्ध कराने में कामयाब रही है, फिर चाहे हम टीवी की बात करें अथवा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की। आने वाले समय में ‘स्मॉल स्क्रीन’ जैसी बहुआयामी कंपनियां कंटेंट उत्पादन के क्षेत्र में सबसे आगे होंगी। मैं भी इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए तैयार हूं।‘

बता दें कि इस एजेंसी ने लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में कई बेहतरीन शो का कंटेंट तैयार किया है। एजेंसी टेलिविज़न और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के लिए ब्रैंडेड कंटेंट का भी निर्माण करती है। इस बारे में स्मॉल स्क्रीन के पार्टनर प्रशांत सरीन का कहना है, ‘हमने अपनी शुरुआत वर्ष 2000 में ‘Highway On My Plate with Rocky & Mayur’ के साथ की थी। इस दौरान डिजिटल टेक्नोलॉजी ने मीडिया फॉर्मेटेंस को काफी प्रभावित किया है।'

वहीं, स्मॉल स्क्रीन के पार्टनर रूपक कपूर का कहना है, ‘जिस तरह से फॉर्मेट और प्लेटफॉर्म्स बदलते हैं, कंटेंट तैयार करने का काम भी उसी हिसाब से होता है। हम इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। हम ब्रैंडेड कंटेंट और डिजिटल एड कैंपेन के लिए सीधे बैंड्स के साथ मिलकार काम कर रहे हैं। टीवी चैनल्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और ब्रैंड्स के साथ ‘स्मॉल स्क्रीन’ की नई साझेदारी बनाने में हमें नरेंद्र त्रिपाठी की काफी मदद मिलेगी।’

 

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