इस उपन्यास ने किया साबित, कंटेंट में दम हो तो मायने नहीं रखतीं इस तरह की बातें

जाने-माने साहित्यकार, पत्रकार और स्तंभकार कमलाकांत त्रिपाठी ने महाकाव्यात्मक शैली का उपन्यास लिखा है

Last Modified:
Tuesday, 30 April, 2019
kamlakant

जिस दौर में उपन्यासों का आकार सिकुड़ता रहा है और माना जा रहा है कि पाठकों को आकर्षित करने के लिए उपन्यासों को छोटा होना चाहिए, उस दौर में जाने-माने साहित्यकार, पत्रकार और स्तंभकार कमलाकांत त्रिपाठी ने महाकाव्यात्मक शैली का उपन्यास 'सरयू से गंगा' लिखा है। खास बात यह है कि करीब 600 पृष्ठों में समाया यह उपन्यास पाठकों को पसंद भी आ रहा है। दिल्ली के साहित्य अकादमी भवन में किताबघर से प्रकाशित इस उपन्यास पर जब वरिष्ठ साहित्यकारों ने चर्चा की तो सामने यही आया कि कंटेंट में दम हो तो न तो उपन्यास की दुरुह भाषा मायने रखती है और न उसका आकार-प्रकार। साहित्य अकादमी भवन में कमलाकांत त्रिपाठी के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक उपन्यास  'सरयू से गंगा' पर मुरली मनोहर प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया था। परिचर्चा में प्रो. नित्यानंद तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा प्रसिद्ध कथाकार संजीव ने विषय-प्रवर्तन किया। कर्ण सिंह चौहान, असगर वजाहत, कैलाश नारायण तिवारी, बली सिंह, संजीव कुमार, राकेश तिवारी एवं अमित धर्मसिंह ने परिचर्चा में वक्ता के रूप में शामिल रहे।

इस अवसर पर कथाकार संजीव ने सरयू से गंगा को इतिहास एवं सामाजिक जीवन के विस्तृत फलक पर लिखा गया एक वृहद् औपन्यासिक कृति बताया। पानीपत, प्लासी, बक्सर, मुगल साम्राज्य का ह्रास, ईस्ट इंडिया कंपनी के वर्चस्व में सतत विस्तार और नेपाल के एकीकरण की प्रक्रिया की पृष्ठभूमि में उन्होंने मालगुजारी, तालुकेदारी, किसानी और खेती को उपन्यास के केन्द्र में बताया। दूसरे वक्ता अमित धर्मसिहं ने उपन्यास को इतिहास, समाज और जीवन के तीन विभिन्न सन्दर्भों में बांटकर देखा। अठारहवीं सदी के उत्तरार्ध में कम्पनी के प्रभुत्व में विस्तार के साथ किसान रिआया की तकलीफों, लगान की मार से उसके शोषण तथा स्त्री जीवन की विडम्बना को उन्होंने वर्तमान परिदृष्य के लिए प्रासंगिक बताया। जीवन पक्ष पर बात करते हुए उन्होंने धर्म का अतिक्रमण करते हुए मानव मन की सत्ता और मन के मिलने से ही सार्थक हिंदू-मुस्लिम एकता को उपन्यास में साकार होते देखा।

तीसरे वक्ता पत्रकार एवं लेखक राकेश तिवारी ने उपन्यास में धार्मिक आडम्बर के रूप में महामत्युंजय जप के प्रसंग का जिक्र करते हुए, लेखक को ऐसे आडम्बरों के खिलाफ खड़े देखा। उन्होंने अठारहवीं सदी के सामाजिक-राजनीतिक संक्रमण तथा लेखीपति, जमील और रज्जाक जैसे पात्रों के माध्यम से सांस्कृतिक विकास के महत्व को लक्षित किया। राकेश जी ने सरयू से गंगा को मूलतः ग्रामीण किसान और मजदूर वर्ग का उपन्यास बताया। अगले वक्ता के रूप में कवि और आलोचक बली सिंह ने उपन्यास के विस्तृत फलक पर तत्कालीन गाँव, किसान, खेत, फसल, जंगल, नदी आदि के भौगोलिक और प्राकृतिक परिदृश्य को मूर्तिमान होते हुए देखा। इस संदर्भ में उन्होंने लेखक की पैनी एवं प्रामाणिक दृष्टि के सामने गूगल को अक्षम पाया। उन्होंने कहा, ‘उपन्यास एक नाटकीय शैली में लिखा गया है, जिसमें इतिहास नामक पात्र सूत्रधार की  भूमिका निभाता है। नवाबों और कम्पनी के बीच की संधि से किसान को कुछ लेना-देना नहीं है किन्तु वह उसके आधार पर होने वाले शोषण का सबसे बड़ा शिकार बनता है। आज के भूमण्डलीकरण के दौर में ऐसी ही संधि सरकार और पूँजीपति के बीच होती है, जिसका खामियाजा किसान व जनता को बेराजगारी,  भुखमरी और आत्महत्या के रूप में भुगतना पड़ता हैं। उपन्यास का मुख्य पात्र लेखीपति मिलीभगत की इस जकड़ से निकलने के लिए संघर्ष करता दिखाई पड़ता है। उपन्यास में लोकतांत्रिक एकीकरण की चेतना और राष्ट्र राज्य का संदेष अर्न्तनिहित है जो धार्मिक, सांस्कृतिक मिथकों तक सीमित था, किन्तु जिसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं था।

अगले वक्ता व आलोचना पत्रिका के संपादक ने उपन्यास कथा के दो उज्जवल पक्षों-धर्मनिरपेक्षता एवं जनपक्षधरता का नोटिस लिया। लेखीपति, जमील और रज्जाक जैसे पात्र धर्म का अतिक्रमण कर एकजुट होते हैं और कम्पनी के ऊपर नवाब की निर्भरता से समाज में जो भयानक, अराजक और शोषक स्थिति पैदा होती है, उसके खिलाफ संघर्ष करते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राघ्यापक और लेखक कैलाश नारायण तिवारी ने लेखकीय स्वायत्तता और स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कमलाकांत ने अपने इस उपन्यास में इतिहास के वृहत्तर फलक के दायरे में लेखीपति, जमील, रज्जाक, सावित्री जैसे पात्रों की परिस्थितियों के अनुरूप उनके मनोभावों और सूक्ष्म संवेदना का जो उन्मुक्त खाका खींचा है, उससे प्रेमचन्द के गोदान मेंगुंथी दो समान्तर कथाओं की याद आती है। उपन्यास में हिन्दू-मुस्लिम संबंध को धर्म से इतर विशुद्ध मानवीय धरातल पर दिखाया गया है जो सूक्ष्म संवेदना से ओतप्रोत है।

कर्ण सिंह चौहान ने कहा कि कोई भी कृति हमारे सामने संवाद के लिए होती है और यह उपन्यास हमारे सामने सजीव संवाद प्रस्तुत करता है। देश में स्वतंत्र ग्रामीण इकाई की जो स्वस्थ और सम्यक व्यवस्था हजारों साल से चली आ रही थी, अंग्रेजों ने उसे एक ही झटके में तोड़ दिया और उसी के साथ समाज, संस्कृति, और उत्पादन के उत्कृष्ट उपादान ध्वस्त कर दिए। अन्त में उन्होंने निष्कर्ष दिया कि ऐसे उत्तम कोटि के उपन्यास बहुत कम और बहुत समय बाद आते हैं। प्रसिद्ध नाटककार-कथाकर असगर वजाहत ने बताया कि उपन्यास भूत, वर्तमान और भविष्य में विचरण करते हुए अवध प्रदेश की सामंती व्यवस्था के उपनिवेशवादी व्यवस्था में अंतरण की कथा कहता है। उपन्यास में तत्कालीन समाज में धर्म उस अर्थ से भिन्न अर्थ में दिखाई पड़ता है, जो आज के समाज में हावी होता जा रहा है। मुख्य अतिथि प्रोफेसर नित्यानंद तिवारी ने कहा कि उपन्यास इतिहास की धारा को सही तरह से उभारता है। उसकी अन्तःगतिशीलता और क्राइसिस की धार को कुंठित नहीं करता। तत्कालीन समाज में जो डर व्याप्त है, उपन्यास का हर पात्र उसकी गिरफ्त में है। उस डर और उसके पीछे की अमानवीयता से सतत लड़ता हुआ दिखाई पड़ता है जो आज के परिदृश्य के लिए बेहद प्रासंगिक है। उपन्यास हिन्दू-मुस्लिम समाज का वह रूप पेश करता है, जो जायसी के पद्मावत में मिलता है।

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में मुरली मनोहर प्रसाद सिंह ने उपन्यास को इतिहास की प्रक्रिया से उपजे उस संकट के मर्म को खोलने वाला बताया, जिसमें व्यापारी बनकर आये अंग्रेज राज सत्ता पर काबिज होते हैं। इतिहासकार राय चौधरी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस उपन्यास में उन्नीसवीं शताब्दी के उपन्यासों की तरह कहीं भी मुस्लिम पुरुष और महिला पात्रों को मानव चरित्र की बुराई के प्रतीक के रूप में नहीं दिखाया गया है। यह कृति धर्म का अतिक्रमण करती हुई मनुष्य के उज्जवल पक्ष को उजागर करने के कारण इस शताब्दी की महत्वपूर्ण औपन्यासिक कृति के रूप में जानी जाएगी। परिचर्चा के समापन के पूर्व अनुपम भट्ट ने प्रतिष्ठित दक्षिण भारतीय लेखक और कर्नाटक विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. टीआर भटट् द्वारा भेजा गया संदेश पढ़कर सुनाया, जिसमें उन्होंने कमलाकांत त्रिपाठी को बधाई देते हुए उन्हें दक्षिण भारत के एस.एल. भैरप्पा के समकक्ष बताया। अंत में अनुपम भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी उपस्थित वक्ताओं और श्रोताओं के प्रति आभार प्रकट किया।

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कोरोना ने छीन ली वरिष्ठ पत्रकार और ‘आधारशिला’ के संपादक दिवाकर भट्ट की जिंदगी

18 अप्रैल को वह कोविड-19 के संक्रमण की चपेट में आ गए थे और इन दिनों निजी अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली

Last Modified:
Tuesday, 18 May, 2021
Diwakar Bhatt

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यिक पत्रिका ‘आधारशिला’ के संपादक दिवाकर भट्ट का निधन हो गया है। 18 अप्रैल को वह कोविड-19 के संक्रमण की चपेट में आ गए थे और इन दिनों हलद्वानी के निजी अस्पताल में भर्ती थे, जहां सोमवार की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा व एक बेटी है।

करीब 59 वर्षीय दिवाकर भट्ट ने लंबे समय तक तमाम अखबारों में काम किया था। सक्रिय पत्रकारिता के साथ ही वह साहित्य के क्षेत्र में जुड़े हुए थे और साहित्य, कला व संस्कृति पर आधारित पत्रिका ‘आधारशिला’ का करीब 36 वर्षों से संपादन कर रहे थे।

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ZEE 24 Ghanta के एडिटर व सीनियर टीवी जर्नलिस्ट अंजन बंदोपाध्याय का कोरोना से निधन

करीब एक महीने पूर्व कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आ गए थे अंजन बंदोपाध्याय, कोलकाता के अस्पताल में ली आखिरी सांस

Last Modified:
Monday, 17 May, 2021
anjan-bandyopadhyay

वरिष्ठ टीवी पत्रकार अंजन बंदोपाध्याय का रविवार रात को कोलकाता के निजी अस्पाल में निधन हो गया। वह करीब एक महीने पहले कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आ गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें घर ले आया गया था, लेकिन उनकी हालत फिर बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें दोबारा से अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वेंटीलेटर पर रखा गया था, जहां रविवार की रात करीब साढ़े नौ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

करीब 56 वर्षीय अंजन जी मीडिया ग्रुप के रीजनल चैनल ‘जी 24 घंटा’ (ZEE 24 Ghanta) में संपादक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। उन पर डिजिटल के अलावा चैनल के इनपुट और आउटपुट में सभी तरह के कंटेंट की जिम्मेदारी थी।

बता दें कि अंजन बंदोपाध्याय पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय के भाई थे। बंदोपाध्याय के निधन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और ‘जी न्यूज’ (Zee News) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी समेत तमाम हस्तियों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

 

 

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फाइनेंसियल एक्सप्रेस के मैनेजिंग एडिटर सुनील जैन का कोरोना से निधन

एम्स में शनिवार को ली आखिरी सांस, प्रधानमंत्री नरेंदं मोदी समेत तमाम हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

Last Modified:
Saturday, 15 May, 2021
Sunil Jain

‘फाइनेंसियल एक्सप्रेस' (Financial Express) के मैनेजिंग एडिटर सुनील जैन का निधन हो गया है। सुनील जैन कुछ दिनों से कोविड-19 के संक्रमण से जूझ रहे थे और दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती थे, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। सुनील जैन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम हस्तियों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, ‘आप हमें बहुत जल्दी छोड़कर चले गए सुनील जी। मुझे आपके कॉलम पढ़ने और विविध मामलों पर आपके स्पष्ट और व्यावहारिक विचारों को सुनने की कमी खलेगी। आपके दुखद निधन से आज पत्रकारिता कमजोर पड़ गई है। परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना। शांति।’

वहीं, सीएनबीसी-टीवी18 की मैनेजिंग एडिटर शीरीन भान ने ट्वीट कर कहा है, ‘बुरी खबरें लगातार आ रही हैं। कोविड संबंधी जटिलताओं के कारण आज शाम वरिष्ठ पत्रकार सुनील जैन का निधन हो गया है। उनसे कुछ हफ्ते पहले ही बात हुई थी। विश्वास नहीं हो रहा कि सुनील जैन नहीं रहे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें और परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।’

बता दें कि फाइनेंसियल एक्सप्रेस को जॉइन करने से पूर्व सुनील जैन ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ (Business Standard) अखबार में सीनियर एसोसिएट एडिटर थे। सुनील जैन ने वर्ष 1986 में दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद बतौर कंसल्टेंट अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह फिक्की (FICCI) में चले गए थे, जहां पर वह करीब एक साल तक एक्सपोर्ट पॉलिसी डेस्क के प्रभारी रहे थे। इसके बाद सुनील जैन ने पत्रकारिता का रुख कर लिया था, जहां उन्होंने करीब दो दशक तक काम किया।

सुनील जैन ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1991 में ‘इंडिया टुडे’ (India Today) मैगजीन में बतौर रिपोर्टर की थी। वह मैगजीन में बिजनेस एडिटर भी रहे और इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस में चले गए, जहां पर वह बिजनेस और इकनॉमी कवरेज की कमान संभालते थे। इंडियन एक्सप्रेस में करीब छह साल काम करने के बाद उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड में करीब आठ साल तक अपनी जिम्मेदारी निभाई और फिर फाइनेंसियल एक्सप्रेस में आ गए थे।

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कोविड से जिंदगी की जंग हार गईं युवा पत्रकार पंखुड़ी सिंह

कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आकर जान गंवाने वाले पत्रकारों में युवा पत्रकार पंखुड़ी सिंह का नाम भी शामिल हो गया है।

Last Modified:
Saturday, 15 May, 2021
Pankhudi445

कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आकर जान गंवाने वाले पत्रकारों में युवा पत्रकार पंखुड़ी सिंह का नाम भी शामिल हो गया है। बताया जाता है कि पंखुड़ी सिंह कुछ दिनों पूर्व कोरोनावायरस की चपेट में आ गई थीं और करीब दस दिनों से हजारीबाग मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था।

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने स्वयं एचएमसीएच के डायरेक्टर को पंखुड़ी सिंह के समुचित इलाज का निर्देश दिया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका और शनिवार की सुबह करीब साढ़े चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, झारखंड में हजारीबाग की रहने वाली पंखुड़ी सिंह इन दिनों दिल्ली में पत्रकारिता कर रही थीं और लॉकडाउन से कुछ दिनों पूर्व ही अपने घर हजारीबाग लौटी थीं, जहां पर वह कोविड-19 की चपेट में आ गई थीं।

पंखुड़ी ने हजारीबाग के मार्खम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (Markham college of commerce) से पत्रकारिता में स्नातक किया था। कुछ वर्षों तक हजारीबाग में पत्रकारिता करने के बाद वह कुछ दिनों पूर्व दिल्ली आ गई थीं।

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सीएम बी.एस. येदियुरप्पा के पूर्व मीडिया सलाहकार व वरिष्ठ पत्रकार महादेव प्रकाश का निधन

राजनीतिक विश्लेषक व वरिष्ठ पत्रकार महादेव प्रकाश का शुक्रवार को कोरोना की वजह से निधन हो गया।

Last Modified:
Saturday, 15 May, 2021
MahadevaPrakash78

राजनीतिक विश्लेषक व वरिष्ठ पत्रकार महादेव प्रकाश का शुक्रवार को कोरोना की वजह से निधन हो गया। 65 वर्षीय प्रकाश बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के पूर्व मीडिया सलाहकार थे।

वरिष्ठ पत्रकार महादेव प्रकाश ‘ऐ भानुवारा’ के संपादक थे और सूचना एवं प्रचार विभाग में काम कर चुके थे। विभिन्न चैनलों पर वह पैनल चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेते थे और सियासी परिवर्तनों पर स्पष्ट राय रखते थे।

प्रकाश को अगस्त 2019 में मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार नियुक्त किया गया था। निजी कारणों का हवाला देकर नवंबर 2020 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

येदियुरप्पा ने प्रकाश के निधन पर शोक जताया और कहा कि उनका निधन मीडिया क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा नुकसान है।

येदियुरप्पा के कई कैबिनेट सहयोगियों और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने भी प्रकाश के निधन पर शोक जताया।

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कोरोना ने निगल ली ईनाडु के सुशील कुमार त्यागी की जिंदगी

सुशील कुमार त्यागी दो दशक से ज्यादा समय से ईनाडु से जुड़े हुए थे।

Last Modified:
Saturday, 15 May, 2021
Sushil Kumar Tyagi

उशोदया एंटरप्राइजेज में ईनाडु, ईटीवी नेटवर्क और ईनाडु डिजिटल के जनरल मैनेजर (मार्केटिंग) सुशील कुमार त्यागी का शनिवार को निधन हो गया है। वह कोविड-19 संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे थे।

सुशील कुमार त्यागी दो दशक से ज्यादा समय से ईनाडु से जुड़े हुए थे। उन्होंने नवंबर 2000 में यहां जॉइन किया था। वह ईनाडु के नॉर्थ इंडिया हेड थे। बता दें कि त्यागी ने अमर उजाला पब्लिकेशन लिमिटेड (Amara Ujala Publication Ltd) के साथ बतौर बिजनेस डेवलपमेंट एग्जिक्यूटिव अपने करियर की शुरुआत की थी।

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टाइम्स समूह के एमडी विनीत जैन ने मां की इन बातों को किया याद, दी श्रद्धांजलि

‘टाइम्स समूह’ की चेयरपर्सन और देश की जानी-मानी मीडिया शख्सियत इंदु जैन का निधन हो गया है

Last Modified:
Friday, 14 May, 2021
Indu Jain Vineet Jain

देश में कोरोना का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। तमाम लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। कोरोना के संक्रमण की चपेट में आकर गुरुवार की देर शाम ‘टाइम्स समूह’ (The Times Group) की चेयरपर्सन और देश की जानी-मानी मीडिया शख्सियत इंदु जैन का निधन हो गया है। 84 वर्षीय इंदु जैन कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं।

इंदु जैन के निधन पर उनके बेटे और ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (बीसीसीएल) के एमडी विनीत जैन ने श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें आजीवन आध्यात्मिक साधक, अग्रणी परोपकारी, कला की प्रतिष्ठित संरक्षक और महिला अधिकारों का जबदस्त समर्थक बताया है।

अपने ट्वीट में विनीत जैन का कहना है, ‘मेरी मां इंदु जैन का मानना था कि मृत्यु एक नई यात्रा शुरू करने के लिए आत्मा के कपड़े बदलने जैसा है। उन्होंने मुझे अपनी शर्तों पर और निरंतर आनंद की स्थिति में रहना सिखाया। मां के निर्वाण प्राप्त करने पर मैं उनकी इन भावनाओं की कद्र करता हूं।’

इंदु जैन ‘द टाइम्स फाउंडेशन’ की अध्यक्ष थीं, जिसे उन्होंने स्थापित किया था। टाइम्स फाउंडेशन बाढ़, चक्रवात, भूकंप और महामारी जैसी आपदा राहत के लिए सामुदायिक सेवा, अनुसंधान फाउंडेशन और टाइम्स रिलीफ फंड चलाता है। वह भारतीय ज्ञानपीठ ट्रस्ट की अध्यक्ष भी थीं, जो प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान करती है। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी आवाज उठाई। जनवरी 2016 में इंदु जैन को भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

कई बार फोर्ब्स के सबसे अमीर शख्सियतों की लिस्ट में आ चुकीं इंदु जैन FICCI की महिला विंग (FLO) की फाउंडर प्रेजिडेंट भी थीं। अपनी मानवता और देश भर में कई चैरिटी के लिए पहचानी जाने वाली इंदु जैन ने मीडिया के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंदु जैन के निधन पर टाइम्स ग्रुप ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है।

विनीत जैन द्वारा किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं। 

 

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गंभीर आरोपों में घिरे न्यूज एंकर को हाई कोर्ट से मिली राहत

युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपित मुंबई के न्यूज एंकर वरुण हिरेमथ (28) को दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को अग्रिम जमानत दे दी।

Last Modified:
Thursday, 13 May, 2021
Court

युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपित मुंबई के न्यूज एंकर वरुण हिरेमथ (28) को दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को अग्रिम जमानत दे दी। 22 वर्षीय एक युवती ने पत्रकार के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया है।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने पत्रकार वरुण हिरेमथ को राहत दी और अग्रिम जमानत के लिए उनकी याचिका का निस्तारण कर दिया।

पत्रकार ने 12 मार्च को यहां एक निचली अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पुलिस ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LoC) भी जारी कर दिया था, जिसके तहत उन्हें देश छोड़ने से रोक दिया गया था। 

बता दें कि दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में दर्ज एफआईआर में एक युवती ने आरोप लगाया था कि 20 फरवरी को एक अंग्रेजी न्यूज चैनल में कार्यरत वरुण हिरेमथ ने उसे दोस्ती के नाम पर दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित एक पांच सितारा होटल में उसके साथ रेप किया।

वहीं, आरोपी के वकील ने निचली अदालत में दावा किया था कि शिकायतकर्ता और पत्रकार के बीच शारीरिक संबंध थे।

बता दें कि निचली अदलत ने पत्रकार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि जरूरी नहीं है कि आरोपी के साथ शिकायतकर्ता के पिछले अनुभवों का मतलब सहमति होता है और अगर कोई महिला अदालत में कहती है कि उसकी सहमति नहीं थी तो अदालत मान लेगी कि उसकी सहमति नहीं थी।

आरोपी के वकील ने निचली अदालत में शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम पर हुए संवाद दिखाए जिससे ‘उनके बीच प्यार दिखाई देता है।’

महिला की शिकायत के आधार पर यहां चाणक्यपुरी पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 342 और 509 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

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नहीं रहे दैनिक भास्कर में फीचर एडिटर चंडीदत्त शुक्ल

वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक भास्कर, मुंबई में फीचर एडिटर चंडीदत्त शुक्ल का मंगलवार को निधन हो गया है।

Last Modified:
Tuesday, 11 May, 2021
Chandi Dutt Shukla

वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक भास्कर, मुंबई में फीचर एडिटर चंडीदत्त शुक्ल का मंगलवार को निधन हो गया है। बताया जाता है कि लंबे समय से वह मधुमेह से पीड़ित थे। कुछ दिनों पूर्व ही उन्हें लखनऊ पीजीआई में भर्ती कराया गया था, लेकिन फिलहाल वह अपने गृह जनपद गोंडा में घर पर रहकर ही स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे।

चंडीदत्त शुक्ल लखनऊ और जालंधर में पंच परमेश्वर और अमर उजाला में नौकरी करने के साथ ही दैनिक जागरण, नोएडा में लंबे समय तक चीफ सब एडिटर रहे थे। इसके बाद उन्होंने फोकस टीवी में हिंदी आउटपुट पर प्रड्यूसर/एडिटर स्क्रिप्ट की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने दूरदर्शन-नेशनल के साप्ताहिक कार्यक्रम कला परिक्रमा के लिए लंबे अरसे तक लिखा। इसके साथ ही वह कई सीरियल्स के लिए स्क्रिप्ट भी लिख चुके थे। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उनकी अच्छी पकड़ थी। उन्होंने कई सेलिब्रिटीज का इंटरव्यू भी किया था। उनके परिवार में पत्नी, बेटी और बेटा है।

चंडीदत्त शुक्ल के निधन पर तमाम पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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टीवी पत्रकार विपिन चंद का कोरोना से निधन, पत्रकारों के लिए फिर उठी ये मांग

टीवी पत्रकार और केरल में ‘मातृभूमि न्यूज’ के मुख्य संवाददाता विपिन चंद (42) का कोविड-19 संबंधित जटिलताओं के कारण शनिवार की देर रात निधन हो गया है।

Last Modified:
Monday, 10 May, 2021
Vipin Chand

टीवी पत्रकार विपिन चंद (42) का कोविड-19 संबंधित जटिलताओं के कारण शनिवार की देर रात निधन हो गया है। वह केरल में ‘मातृभूमि न्यूज’ के मुख्य संवाददाता के तौर पर कार्यरत थे और महामारी की दूसरी लहर के दौरान भी रिपोर्टिंग में खूब सक्रिय रहे थे। इसी दौरान वह कोरोना की चपेट में आ गए थे।  

करीब दो हफ्ते पहले जांच के दौरान कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद से वह होम क्वारंटाइन थे। बाद में उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। निमोनिया के बाद हालत बिगड़ने पर विपिन को कोच्चि के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार की देर रात करीब दो बजे उनका निधन हो गया।

विपिन के परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे हैं। विपिन के निधन पर एर्नाकुलम जिले के अलंगाड़ के रहने वाले चंद ने 2005 में पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की थी। वह 2012 में मातृभूमि न्यूज के साथ जुड़े। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री पिनारई विजयन समेत तमाम नेताओं और पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

विपिन चंद की मौत के बाद राज्य में पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित किए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड समेत कई राज्यों ने पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित कर उन्हें कोरोना वैक्सीनेशन में प्राथमिकता देने का फैसला किया है। वहीं, केरल में यह मांग लंबे समय से की जा रही है।

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