दैनिक इंकलाब के संपादक शकील हसन शम्सी को मिला ये प्रतिष्ठित अवॉर्ड

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकार और उर्दू साहित्यकारों को किया सम्मानित

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 August, 2019
Last Modified:
Wednesday, 21 August, 2019
Shakeel Hasan

उर्दू के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कई शायरों, साहित्यकारों, पत्रकारों व समालोचकों को दिल्ली सरकार की उर्दू अकादमी की ओर से सम्मानित किया गया। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम में इन्हें सम्मानित किया। पंडित बज मोहन कैफी अवॉर्ड से प्रोफेसर अतिकुल्लाह को नवाजा गया। इसके तहत उन्हें 2,51,000 रुपए की सम्मान राशि दी गई।

कार्यक्रम में दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन दैनिक इंकलाब के संपादक शकील हसन शम्सी को उर्दू में उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनके अलावा शोध और समालोचना के लिए प्रोफेसर वजाहुद्दीन अल्वी, क्रिएटिव राइटिंग के लिए इजहार उस्मानी, शायरी के लिए जी आर कनवल,  उर्दू ट्रांसलेशन के लिए अनीस-उर्र-रहमान, गजल गायकी के लिए राधिका चोपड़ा और उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार के ऑल इंडिया अवॉर्ड उस्ताद अहमद हुसैन मोहम्मद हुसैन को दिया गया। इन सभी को 1,01,000 रुपए की सम्मान राशि दी गई।

इस मौके पर सिसोदिया ने उर्दू लेखकों से पाठकों को और ज्यादा उर्दू साहित्य देने के साथ ही सांप्रदायिकता और देशभक्ति का संदेश भी देने की अपील की। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा लैंग्वेज अकादमी के प्रस्ताव को मंजूरी भी दी जा चुकी है।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार-स्तंभकार नगीनदास सांघवी, 100 साल की उम्र में निधन

वयोवृद्ध गुजराती पत्रकार, स्तंभकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नगिनदास सांघवी का रविवार को सूरत में निधन हो गया

Last Modified:
Monday, 13 July, 2020
nagindas

वयोवृद्ध गुजराती पत्रकार, स्तंभकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नगिनदास सांघवी का रविवार को सूरत में निधन हो गया। वह 100 वर्ष के थे और अस्थमा से पीड़ित थे। उन्हें पिछले कुछ दिनों से खांसी और सांस लेने की समस्या में दिक्कत हो रही थी। 

न केवल गुजरात, बल्कि देश के जाने-माने नाम वरिष्ठ पत्रकार नागिनदास सांघवी को वर्ष 2019 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पद्मश्री नगिनदास सांघवी जितने ज्ञानी थे, उतने ही सरल स्वाभाव के थे। लोग उन्हें नागिन बापा के उपनाम से संबोधित करते थे। उन्होंने ‘चित्रलेखा’, ‘गुजरात मित्र’, ‘दिव्यभास्कर’ जैसे अखबारों में भी नियमित रूप से लिखा।

10 मार्च, 1920 को भावनगर में जन्म नगिनदास संघवी की शिक्षा दीक्षा वही हुई थी। उन्होंने राजनीति विज्ञान का अध्ययन किया था और मुंबई के मीठीबाई कॉलेज में राजनीति विज्ञान के प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए। राजनीतिक आलोचना के विषय पर वे जिस स्पष्टता के साथ बोल सकते हैं वह गुण शायद ही आज के लेखकों में पाया जाता है। उन्होंने 1962 में कॉलम लिखना शुरू किया और यह पिछले हफ्ते तक जारी रहा। उन्होंने मोरारी बापू के साथ भी काम किया है और गीता, राजनीति, नरेंद्र मोदी सहित कई जटिल विषयों पर किताबें लिखी हैं, जो पाठकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। उन्होंने महात्मा गांधी, गुजरात और अन्य विषयों पर कई किताबें लिखी थीं।

देश के प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट करके नगीनदास सांघवी को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने गुजराती में ट्विट करके लिखा, ‘श्री नगिनदास संघवी एक प्रबुद्ध लेखक-विचारक थे। उनके लेख और किताबें इतिहास और दर्शन की समझ और राजनीतिक घटनाओं का विश्लेषण करने की असाधारण क्षमता का परिचय देती हैं। उनकी मृत्यु से दुखी हूं। शोक संतप्त परिवार और उनके बड़े पाठकों को सांत्वना … ओम शांति !!’

उनकी बहुचर्चित किताबों में ‘रामायण’, ‘महात्मा गांधी’, ‘सरदार पटेल’ और ‘नरेंद्र मोदी’ शामिल हैं। विशेष अध्ययन के आधार पर उन्होंने ‘योग का इतिहास’ और ‘गीता विमर्श’ और ‘महामानव कृष्ण’ सहित कुल 18 किताबें लिखी और 29 परिचय पुस्तिकाएं लिखी।

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नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़े प्रोफेसर अरुण कुमार भगत, निभाएंगे यह भूमिका

तीन वर्षों के लिए गठित यह बोर्ड ऑफ ट्रस्टी राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली के लिए नीति निर्धारण करने वाली सर्वोच्च समिति है|

Last Modified:
Monday, 13 July, 2020
Arun Kumar Bhagat

मोतिहारी (बिहार) स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग में डीन के रूप में कार्यरत प्रोफेसर अरुण कुमार भगत को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली (नेशनल बुक ट्रस्ट) का न्यासी सदस्य नामित किया गया है| मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत काम करने वाले उच्च शिक्षा विभाग की ओर से उन्हें नामित किया गया है। विभाग की ओर से कुल 14 साहित्यकारों, पत्रकारों और शिक्षाविदों को बोर्ड ऑफ ट्रस्टी में शामिल किया गया है| तीन वर्षों के लिए गठित यह बोर्ड ऑफ ट्रस्टी राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली के लिए नीति निर्धारण करने वाली सर्वोच्च समिति है|

बता दें कि भारत की सर्वोच्च एवं स्वायत्तशासी साहित्यिक संस्था ‘साहित्य अकादमी, दिल्ली’ के लिए भी उन्हें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा पांच वर्षों की सदस्यता के लिए नामित किया जा चुका है| इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ की कार्यकारिणी और साधारण सभा के लिए भी नामित किया गया था| इसके अलावा उन्हें गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य के रूप में भी नामित किया गया है|

प्रोफेसर भगत करीब दो दर्जन किताबों का लेखन व संपादक कर चुके हैं। गाजियाबाद स्थित इंदिरापुरम में रहने वाले प्रोफेसर भगत के अखबार व पत्रिकाओं में लगातर आलेख प्रकाशित होते रहते हैं।

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पत्रकारों को निशाना बनाए जाने पर PCI खफा, लिया ये स्टेप

‘भारतीय प्रेस परिषद’ (पीसीआई) ने पिछले दिनों विभिन्न राज्यों में पत्रकारों को ‘निशाना’ बनाए जाने की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया है।

Last Modified:
Friday, 10 July, 2020
PCI

‘भारतीय प्रेस परिषद’ (पीसीआई) ने पिछले दिनों विभिन्न राज्यों में पत्रकारों को ‘निशाना’ बनाए जाने की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया है। पीसीआई ने सबसे पहले हिमाचल प्रदेश में पंजाब केसरी के रिपोर्टर सोमदेव शर्मा का मामला उठाया है। इस मामले में सोमदेव शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सोमदेव शर्मा ने राज्य में एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले लोगों को लेकर कथित रूप से प्रशासनिक ढिलाई के बारे में रिपोर्टिंग की थी। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रेस काउंसिल ने हिमाचल प्रदेश की सरकार से अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।

इसी तरह, छत्तीसगढ़ में ‘बस्तर की आवाज’ (Bastar Ki Awaaz) के रिपोर्टर नीरज शिवहरे को कथित रूप से निशाना बनाया गया और उन्हें प्रशासन की ओर से नोटिस दिया गया। बताया जाता है कि नीरज शिवहरे ने अपनी रिपोर्ट में एक महिला की दुर्दशा को बयां किया था, जिसे कोविड-19 के दौरान भोजन की व्यवस्था के लिए अपने घर का सामान बेचना पड़ा था।

इस बारे में अधिकारियों का कहना था कि इससे प्रशासन की छवि धूमिल हुई है। वहीं, उत्तर प्रदेश में ‘जनसंदेश टाइम्स’ (Jansandesh Times) के रिपोर्टर विजय विनीत और एडिटर-इन-चीफ सुभाष राय को लॉकडाउन के दौरान लोगों की समस्याओं से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

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पत्रकारों पर हमले की बढ़ती घटनाओं का मीडिया संगठनों ने किया कड़ा विरोध, रखी ये मांग

पत्रकारों पर हो रहे हमलों की ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ और ‘जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Attack

रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों पर हो रहे हमले की ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (Journalist Association of India) और ‘जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (Journalists Federation of India) ने कड़े शब्दों में निंदा की है। ताजा मामला अरुणाचल प्रदेश का है, जहां कुछ लोगों ने रिपोर्टिंग के लिए गए एक पत्रकार पर हमला कर दिया था। 

बताया जाता है कि न्यूज वेबसाइट ‘ज्योलू न्यूज’ (Gyoloo News) में कार्यरत पत्रकार होफे दादा (Hofe Dada) पिछले दिनों लेखी गांव में ‘एसएमएस स्मेलटर्स लिमिटेड’ (SMS Smelters Ltd) कंपनी पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से चार लोगों ने उन्हें टोका और उनमें से एक व्यक्ति ने दादा को थप्पड़ मार दिया। आरोप यह भी है कि उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि दादा को वरिष्ठ पत्रकार तोंगम रीना की तरह अंजाम भुगतना पड़ेगा, जिन्हें वर्ष 2012 में गोली मारी गई थी। इस मामले में दादा ने निर्जुली पुलिस स्टेशन में विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने होफे दादा पर हमले के मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपित का नाम नांगराम टापू है और वह ‘एसएमएस स्मेलटर्स लिमिटेड’ कंपनी का सिक्योरिटी ऑफिसर है।

‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (JAI) के सेक्रेट्री जनरल एच.के. सेठी का कहना है, ‘इन दिनों मीडिया पर हमले के साथ-साथ उसे डराने-धमकाने के प्रयास के मामले बढ़ रहे हैं और सरकार को सभी मीडियाकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।’ उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को जांच में तेजी लानी चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए कि दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई हो सके।

वहीं, ‘जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (Journalists Federation of India) ने भी इस घटना का विरोध किया है। फेडरेशन का कहना है, ‘होफे दादा पर हमले ने साबित कर दिया है कि देश में पत्रकारों को तुरंत बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने और आपराधिक न्याय प्रणाली को ज्यादा जवादेब बनाए जाने की जरूरत है। फेडरेशन विभिन्न निकायों और सरकारों से मांग करता है कि यह सुनिश्चित करने के लिए आपराधिक न्याय प्रक्रिया को और मजबूत किया जाए कि पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान किसी तरह का भय न रहे।’

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पत्रकार की मौत पर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने जताया गहरा दुख, दिया ये बयान

दिल्ली में सोमवार को हुई युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत पर ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ ने गहरा दुख जताया है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
JAI

दिल्ली में सोमवार को हुई युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत पर ‘जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (Journalist Association of India) ने गहरा दुख जताया है। ‘दिल्ली जनर्लिस्ट एसोसिएशन’ (JAI) की ओर से किए गए ट्वीट में संस्था के सेक्रेट्री जनरल एच.के. सेठी का कहना है, ‘युवा पत्रकार तरुण सिसोदिया की मौत से मैं काफी दुखी व स्तब्ध हूं। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मेरी संवेदनाएं तरुण सिसोदिया के परिवार के साथ हैं। भगवान उनके परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।’

बता दें कि दिल्ली स्थित ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (एम्स) की चौथी मंजिल से कूदकर सोमवार को तरुण सिसोदिया (34) ने आत्महत्या कर ली थी। तरुण दिल्ली में दैनिक भास्कर अखबार में बतौर रिपोर्टर कार्यरत थे और भजनपुरा इलाके में रहते थे।

यह भी पढ़ें: दिल्ली में कोरोना से मौत के आंकड़ों का 'खुलासा' करने वाले पत्रकार ने मौत को लगाया गले

तरुण पिछले दिनों कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आ गए थे। इस कारण इलाज के लिए उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले तरुण के परिवार में पत्नी और दो छोटी बेटियां हैं।

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शराब पीकर हंगामा करने से रोका तो पत्रकार का कर दिया ये हाल

रॉड से किए गए हमले में पत्रकार के हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2020
Dhananjay Pratap

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार की रात शराब पीने और उपद्रव करने से रोकने पर पत्रकार पर हमला करने के मामले में तीन आरोपितों को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मोहित, अनमोल और चिराग के रूप में हुई है। बताया जाता है कि मोहित सक्सेना प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है, जबकि अनमोल और चिराग इंजीनियरिंग के छात्र हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भोपाल में अयोध्या नगर निवासी धनंजय प्रताप सिंह एक अखबार में कार्यरत हैं। शनिवार की रात इलाके में कुछ लोग शराब पीकर हंगामा कर रहे थे। इस बात का विरोध करने पर उन लोगों ने रॉड से धनंजय प्रताप सिंह पर हमला कर दिया। इस हमले में धनंजय घायल हो गए। उनके हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। अस्पताल में भर्ती धनंजय की हालत स्थिर बनी हुई है।  

बता दें कि कुछ दिनों पूर्व ही शराब के लिए रुपये न देने पर कुछ बदमाशों ने दो छात्रों की हत्या कर दी थी। राज्य में खराब कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए विपक्ष ने सरकार पर तमाम आरोप लगाए थे। अब धनंजय प्रताप सिंह के हमलावरों की गिरफ्तारी होने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है।

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दिल्ली में कोरोना से मौत के आंकड़ों का 'खुलासा' करने वाले पत्रकार ने मौत को लगाया गले

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की चौथी मंजिल से कूदकर सोमवार को एक पत्रकार ने आत्महत्या कर ली।

Last Modified:
Monday, 06 July, 2020
Suicide

दिल्ली स्थित ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (एम्स) की चौथी मंजिल से कूदकर सोमवार को एक पत्रकार ने आत्महत्या कर ली। पत्रकार की पहचान तरुण सिसोदिया के रूप में हुई है। करीब 34 वर्षीय तरुण दिल्ली में दैनिक भास्कर अखबार में बतौर रिपोर्टर कार्यरत थे। तरुण पिछले दिनों कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आ गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के भजनपुरा निवासी तरुण को 24 जून को एम्स के ट्रॉमा सेंटर की चौथी मंजिल पर स्थित कोविड-19 वार्ड में भर्ती कराया गया था। सोमवार की दोपहर करीब दो बजे तरुण एम्स की चौथी मंजिल से कूद गए। इस घटना में वह बुरी तरह घायल हो गए। गंभीर हालत में तरुण को आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

बताया जाता है कि मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले तरुण पिछले दिनों कोरोना की चपेट में आ गए थे, जिस कारण वह काफी तनाव में चल रहे थे। करीब तीन साल पहले ही तरुण की शादी हुई थी। उनके दो बेटियां हैं, जिनमें से एक की उम्र 2 साल है और दूसरे की उम्र मात्र कुछ ही महीने है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह काफी दिनों से अपने घर पर ही थे। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों को लेकर ही रिपोर्टिंग की थी। अपनी खबर में तरुण ने बताया था कि दिल्ली सरकार कह रही है कि अब तक 982 मौत कोरोना से हुई है, जबकि 1500 से ज्यादा डेडबॉडी का अंतिम संस्कार श्मशान और कब्रिस्तानों में हो चुका है। तरुण द्वारा पिछले दिनों किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

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दुनिया को अलविदा कह गए सीनियर फोटो जर्नलिस्ट संजय त्रिपाठी

हिन्दुस्तान, कानपुर में कार्यरत संजय त्रिपाठी आनन्देश्वर मंदिर में दर्शन करने के लिए गए थे, वहीं दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन

Last Modified:
Friday, 03 July, 2020
Sanjay Tripathi

हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ में कानपुर में कार्यरत वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट संजय त्रिपाठी का शुक्रवार को निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार कानपुर के भैरव घाट पर किया गया।

संजय त्रिपाठी शुक्रवार की सुबह आनन्देश्वर मंदिर में दर्शन करने के लिए गए थे। जैसे ही उन्होंने भगवान के आगे मत्था टेका, उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और वह गिर पड़े। आनन-फानन में संजय को हैलट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जाता है कि कानपुर के चौबेपुर में गुरुवार की देर रात हुई घटना की कवरेज संजय ने ही की थी। इस घटना में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। 

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कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन से जुड़े पूर्व बाल मजदूर को मिला ब्रिटेन का ये प्रतिष्ठित अवॉर्ड

सामाजिक सरोकार के लिए गिरिडीह जिले के दुलिया करमबाल गांव के आदिवासी युवा नीरज मुर्मू को ग्रेट ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2020
neeraj45454

सामाजिक सरोकार के लिए गिरिडीह जिले के दुलिया करमबाल गांव के आदिवासी युवा नीरज मुर्मू को ग्रेट ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। 21 वर्षीय मुर्मू को यह सम्मान गरीब और हाशिए के बच्‍चों को शिक्षित करने के लिए दिया गया है।

बता दें कि नीरज मुर्मू कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन (KSCF) द्वारा संचालित गिरिडीह जिले के दुलिया करमबाल मित्र ग्राम के पूर्व बाल मजदूर थे।

इस अवॉर्ड से हर साल 09 से 25 उम्र की उम्र के उन बच्‍चों और युवाओं को सम्‍मानित किया जाता है, जिन्‍होंने अपनी नेतृत्‍व क्षमता का परिचय देते हुए सामाजिक बदलाव में असाधारण योगदान दिया हो।

नीरज दुनिया के उन 25 बच्‍चों में शामिल हैं जिन्‍हें इस गौरवशाली अवॉर्ड से सम्‍मानित किया गया। नीरज के प्रमाणपत्र में इस बात का विशेष रूप से उल्‍लेख है कि दुनिया बदलने की दिशा में उन्होंने नई पीढ़़ी को प्रेरित और गोलबंद करने का महत्वपूर्ण काम किया है। कोरोना महामारी सकंट की वजह से उन्हें यह अवॉर्ड डिजिडल माध्यम द्वारा आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया।  

गरीब आदिवासी परिवार का नीरज 10 साल की उम्र में ही परिवार का पेट पालने के लिए अभ्रक खदानों में बाल मजदूरी करने लगा। लेकिन, बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के कार्यकर्ताओं ने जब उसे बाल मजदूरी से मुक्‍त कराया, तब उनकी दुनिया ही बदल गई। गुलामी से मुक्त होकर नीरज सत्यार्थी आंदोलन के साथ मिलकर बाल मजदूरी के खिलाफ अलख जगाने लगे। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझा और लोगों को समझा-बुझा कर उनके बच्चों को बाल मजदूरी से छुड़ाकर स्कूलों में दाखिला कराया। ग्रेजुएशन की पढ़ाई जारी रखते हुए नीरज ने गरीब बच्चों के लिए अपने गांव में एक स्‍कूल की स्‍थापना की है, जिसके माध्यम से वह तकरीबन 200 बच्‍चों को समुदाय के साथ मिलकर शिक्षित करने में जुटे हुए हैं। नीरज ने 20 बाल मजदूरों को भी अभ्रक खदानों से मुक्‍त कराया है।

डायना अवॉर्ड मिलने पर नीरज कहते हैं, ‘इस अवॉर्ड ने मेरी जिम्‍मेदारी को और बढ़ा दिया है। मैं उन बच्‍चों को स्‍कूल में दाखिला दिलाने के काम में और तेजी लाऊंगा, जिनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गई है। साथ ही अब मैं बाल मित्र ग्राम के बच्‍चों को भी शिक्षित करने पर अपना ध्‍यान केंद्रित करूंगा।’

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह कहते हैं, ‘नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्‍यार्थी मेरे आदर्श हैं और उन्‍हीं के विचारों की रोशनी में मैं बच्चों को शिक्षित और अधिकार संपन्‍न बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा हूं।’

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अमेरिकी मीडिया कंपनियों को लेकर चीन ने चली ये जवाबी चाल

अमेरिका ने पहले चीन के चार शीर्ष सरकारी मीडिया संस्थानों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र करार दिया और ‘विदेशी मिशन’ की श्रेणी में डाल दिया था। अब चीन ने इसका जवाब दिया है।

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2020
china

अमेरिका ने हाल ही में चीन के चार शीर्ष सरकारी मीडिया संस्थानों पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उसे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र करार दिया और ‘विदेशी मिशन’ की श्रेणी में डाल दिया था। लिहाजा इसे देखते हुए अब चीन ने एसोसिएट प्रेस सहित चार अमेरिकी मीडिया कंपनियों से उनके कर्मचारियों और कारोबार की जानकारी मांगी है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उसने यह कदम अमेरिका द्वारा चीन के मीडिया संस्थानों पर की गई कार्रवाई के विरोध में उठाया है।

ये भी पढ़ें: निशाने पर आया चीनी मीडिया, 'विदेशी मिशन' पर हैं ये संगठन

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने बुधवार को घोषणा की कि ‘एसोसिएट प्रेस’ (एपी), ‘यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल’, ‘सीबीएस’ और ‘नेशनल पब्लिक रेडियो’ के पास अपने कर्मचारियों, वित्तीय परिचालन, अचल संपत्ति  व कुछ अन्य मामलों की जानकारी देने के लिए सात दिन का समय है।

झाओ ने अपनी नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘यह रेखांकित करना जरूरी है कि चीन द्वारा उठाया गया उपरोक्त कदम पूरी तरह से वैध रक्षात्मक कार्रवाई है। अमेरिका ने चीनी मीडिया एजेंसियों पर अपने देश में बिना कारण दमनात्मक कार्रवाई कर उसे इसके लिए मजबूर किया है।’

झाओ ने कहा, 'हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह अपनी गलती को सुधारे और चीनी मीडिया संस्थानों का राजनीतिक दमन रोक और उन पर लगाए गए अनुचित प्रतिबंधों को हटाए।'

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से चीन और अमेरिका एक-दूसरे के मीडिया संस्थानों और उनके कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले अमेरिका ने चीन के चार मीडिया संस्थानों को ‘विदेशी मिशन’ का दर्जा दे दिया था। इससे पहले वह फरवरी में भी पांच चीनी मीडिया संस्थानों को ‘विदेश मिशन’ का दर्जा दे चुका था। उधर, मार्च में चीन ने अमेरिका के दो दर्जन पत्रकारों को निष्कासित कर दिया था, जिन पत्रकारों को देश छो़ड़ने के लिए कहा गया था, उनमें ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’, ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के रिपोर्टर थे। इतना ही नहीं ‘वाइस ऑफ अमेरिका’ और ‘टाइम’ मैगजीन को चीन में अपने कार्यों के बारे में विवरण देने को कहा गया था। चीन की इस कार्रवाई के बाद वॉशिंगटन ने चीन के चार मीडिया संस्थानों को अपने कर्मचारियों को कम करने का आदेश दिया था।

वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों में आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर भी पहले से तनातनी चल रही है। माना जा रहा है कि अब इस कदम से यह तनातनी और बढ़ेगी।  

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