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हाथरस मामला: पत्रकार सिद्दीकी कप्पन समेत 8 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
हाथरस मामले में यूपी एसटीएफ की एक टीम दंगों की साजिश की जांच कर रही थी, जिसको लेकर अब यूपी एसटीएफ ने मथुरा कोर्ट को 5 हजार पेज की चार्जशीट सौंपी है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
यूपी के हाथरस में दलित लड़की के साथ हुई रेप और हत्या के मामले में दंगों की साजिश रचने के आरोप में उत्तर प्रदेश पुलिस ने केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन पर UAPA के तहत चार्जशीट दायर किया है। हाथरस में हुए रेप और हत्या के मामले में यूपी एसटीएफ की एक टीम दंगों की साजिश की जांच कर रही थी, जिसको लेकर अब यूपी एसटीएफ ने मथुरा कोर्ट को 5 हजार पेज की चार्जशीट सौंपी है। इस चार्जशीट में पत्रकार सिद्दीकी कप्पन के अलावा छह और लोगों का नाम शामिल है।
दायर की गई इस चार्जशीट में PFI और उससे जुड़े संगठन के 8 आरोपितों के नाम हैं, जिनमें सिद्दीकी कप्पन, अतीकुर्रहमान, मसूद अहमद, रउफ शरीफ, असद बदरुद्दीन, फिरोज, दानिश का नाम शामिल है। मामले की अगली 1 मई 2021 को निर्धारित की गई है।
इस चार्जशट में यूपी पुलिस की ओर से कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी हाथरस में दंगा भड़काना चाहते थे और उसकी साजिश रच रहे थे। चार्जशीट के अनुसार सिद्दीकी कप्पन ने ही दंगों की साजिश रची थी और पीएफआई मेंबर रउफ शरीफ इन दंगों की फंडिंग के लिए काम कर रहा था।
5000 पन्नों की चार्जशीट में पीएफआई के सदस्यों पर मस्कट और दोहा में वित्तीय संस्थानों से 80 लाख रुपए की धनराशि प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है।
चार्जशीट दायर होने के बाद आरोपियों के वकील मधुवन चतुर्वेदी ने कहा कि हमें अभी तक चार्जशीट की कॉपी नहीं मिली है। जैसे ही हमें कॉपी मिलती है तो हम उसको देखेंगे और फिर आगे की कार्रवाई करेंगे।
दिल्ली में रहने वाले सिद्दीकी कप्पन मलयालम पोर्टल अजीमुखम के लिए काम करते थे। कप्पन केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के सचिव भी थे। पुलिस ने कप्पन पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया था और राजद्रोह के आरोप भी लगाए थे।
मूल रूप से केरल के रहने वाले पत्रकार सिद्दीकी कप्पन पिछले साल दलित लड़की के साथ हुई रेप की वारदात के बाद घटना को रिपोर्ट करने के लिए हाथरस जा रहे थे। तभी मथुरा में ही यूपी पुलिस ने सिद्दीकी कप्पन और उनके साथियों को आतंकवाद निरोधी कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने कहा था कि ये लोग हाथरस में दंगा फैलाने की कोशिश कर रहे थे। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा था कि गिरफ्तार किए गए आरोपी प्रतिबंधित संगठन पीएफआई के सदस्य हैं।
बता दें कि हाथरस में दलित लड़की के साथ हुई रेप की घटना के बाद यूपी सरकार की काफी आलोचना हुई थी। प्रशासन ने हाथरस मामले में बेहद ही असंवेदनशील तरीके से कार्रवाई की थी। जब हाथरस पीड़िता की मौत दिल्ली के अस्पताल में हो गई थी तो पुलिस ने परिवारवालों को बिना बताए ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। इतना ही नहीं जब विपक्षी दलों के कई नेता पीड़िता के परिवार वालों से मिलने जा रहे थे तो उनके साथ भी मारपीट की गई थी।
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