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इस बार दो पत्रकारों ने जीता नोबेल पुरस्कार
दुनिया का सबसे बड़ा प्रतिष्ठित सम्मान नोबेल पुरस्कार इस बार पत्रकारिता के क्षेत्र में दिया गया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
शांति के क्षेत्र में काम करने के लिए दिया जाने वाला दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। नोबेल कमेटी ने इस बार इस सम्मान के लिए दो पत्रकारों को चुना है। इनमें एक पत्रकार रैप्लर मीडिया ग्रुप की संस्थापक अमेरिकी पत्रकार मारिया रेसा हैं और दूसरे रूस के पत्रकार दिमित्री मुरातोव हैं।
इन पत्रकारों को यह पुरस्कार उन देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के वास्ते संघर्ष करने के लिए दिया गया है, जहां पत्रकारों को लगातार हमले और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है जिसमें उनकी हत्या तक कर दी जाती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्वे स्थित नोबेल समिति के अध्यक्ष बेरिट रीस-एंडर्सन ने कहा, ‘स्वतंत्र और तथ्य-आधारित पत्रकारिता सत्ता के दुरुपयोग, झूठ और युद्ध के दुष्प्रचार से बचाने का काम करती है।’
उन्होंने कहा, ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता के बिना, राष्ट्रों के बीच भाईचारे को सफलतापूर्वक बढ़ावा देना, निरस्त्रीकरण और सफल होने के लिए एक बेहतर विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना मुश्किल होगा।’
बता दें कि फिलीपींस से नाता रखने वाली अमेरिकी पत्रकार मारिया रेसा न्यूज साइट रैप्लर (Rappler) की सह-संस्थापक हैं। उन्हें फिलीपींस में सत्ता की ताकत के गलत इस्तेमाल, हिंसा और तानाशाही के बढ़ते खतरे पर खुलासों के लिए पहले भी सम्मानित किया जा चुका है। नोबेल कमेटी ने अभिव्यक्ति की आजादी में उनकी भूमिका की प्रशंसा करते हुए उन्हें इस सम्मान का हकदार बताया।
नोबेल समिति ने कहा कि 2012 में रेसा द्वारा सह-संस्थापित समाचार वेबसाइट ‘रैपलर’ ने (राष्ट्रपति रोड्रिगो) दुतेर्ते शासन के विवादास्पद, जानलेवा नशीली दवाओं के विरुद्ध अभियान पर आलोचनात्मक दृष्टि से ध्यान केंद्रित किया है।’
उन्होंने और रैपर ने ‘यह भी साबित किया है कि कैसे फर्जी समाचारों के प्रचार, विरोधियों को परेशान करने और सार्वजनिक संवादों में हेरफेर करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया जा रहा है।’
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोबेल पुरस्कार मिलने की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए रेसा ने नॉर्वे टीवी2 चैनल से कहा कि, ‘सरकार (फिलीपीन की) निश्चित तौर पर खुश नहीं होगी।’
उन्होंने कहा, ‘मैं थोड़ी हैरान हूं। यह वास्तव में भावुक करने वाला है। लेकिन मैं अपनी टीम की ओर से खुश हूं और हम जो कुछ कर रहे हैं उसे मान्यता देने के लिए नोबेल समिति को धन्यवाद देना चाहती हूं।’
रेसा शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली फिलीपीन की पहली नागरिक और इस साल सम्मानित की जाने वाली पहली महिला हैं।
इसके अलावा रूस के दिमित्री मुरातोव को भी नोबेल शांति पुरस्कार देने का ऐलान किया गया। वे रूस के स्वतंत्र अखबार नोवाजा गजेटा के सह-संस्थापक हैं और पिछले 24 साल से पेपर के मुख्य संपादक रहे हैं। रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के तानाशाही राज के बावजूद मुरातोव को अपने अखबार के जरिए सरकार की योजनाओं की आलोचना के लिए जाना जाता रहा है। नोबेल कमेटी ने कहा कि मुरातोव कई दशकों से रूस में अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा कर रहे हैं।
नोबेल समिति ने कहा, ‘सत्ता के प्रति मौलिक रूप से आलोचनात्मक रवैये के साथ, नोवाया गजेटा आज रूस में सबसे स्वतंत्र समाचार पत्र है।’ समिति ने कहा, ‘समाचार पत्र की तथ्य-आधारित पत्रकारिता और पेशेवर सत्यनिष्ठा ने इसे रूसी समाज के निंदात्मक पहलुओं पर जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना दिया है जिसका उल्लेख शायद ही कभी अन्य मीडिया द्वारा किया जाता है।’
क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेसकोव ने मुरातोव को पुरस्कार जीतने पर बधाई दी और ‘प्रतिभाशाली और बहादुर’ व्यक्ति के रूप में उनकी सराहना की।
मुरातोव ने कहा कि वह अपने पुरस्कार का इस्तेमाल उन स्वतंत्र पत्रकारों की मदद के लिए करेंगे जिन्होंने अधिकारियों की ओर से अत्यंत दबाव का सामना किया है।
रीस-एंडर्सन ने बताया कि शांति पुरस्कार अतीत में भी पत्रकारों को दिया गया है, जिसमें इटली के अर्नेस्टो तेओडोरो मोनेटा भी शामिल हैं, जिन्हें 1907 में "प्रेस और शांति बैठकों में उनके काम के लिए" यह पुरस्कार दिया गया था।
वर्ष 1935 में, कार्ल वॉन ओस्सिएट्ज़की को "विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति उनके ज्वलंत प्रेम के लिए" नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने खुलासा किया था कि जर्मनी प्रथम विश्व युद्ध के बाद गुप्त रूप से फिर से सशस्त्र हो रहा है।
रीस-एंडर्सन ने फर्जी समाचारों के प्रसार के कारण आज की दुनिया में स्वतंत्र अभिव्यक्ति के जोखिमों पर भी ध्यान दिया और कहा कि सार्वजनिक बहस में हेरफेर करने में फेसबुक की भूमिका के लिए रसा का रुख आलोचनात्मक रहा है।
प्रतिष्ठित पुरस्कार के साथ एक स्वर्ण पदक और एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर (11.4 लाख डॉलर से अधिक) प्रदान किए जाते हैं। पुरस्कार राशि, पुरस्कार के संस्थापक, स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल द्वारा छोड़ी गई वसीयत से आती है, जिनकी मृत्यु 1895 में हुई थी।
मीडिया अधिकार समूह ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ ने पत्रकारों को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।
सोमवार को, नोबेल समिति ने अमेरिकियों-डेविड जूलियस और आर्डम पातापूशियन को उनकी इन खोजों कि मानव शरीर तापमान और स्पर्श को कैसे समझता है, शरीर विज्ञान या चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की थी।
मंगलवार को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की गई, जिनके काम ने प्रकृति की जटिल शक्तियों को समझाने और भविष्यवाणी करने में मदद की, जिसमें जलवायु परिवर्तन की समझ का विस्तार करना शामिल है।
बेंजामिन लिस्ट और डेविड डब्ल्यू.सी. मैकमिलन को बुधवार को रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार के विजेताओं के रूप में नामित किया गया था जिन्होंने अणुओं के निर्माण के लिए एक आसान और पर्यावरण की दृष्टि से स्वच्छ तरीका खोजने की दिशा में काम किया, जिसका उपयोग दवाओं और कीटनाशकों सहित यौगिकों को बनाने के लिए किया जा सकता है।
साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार बृहस्पतिवार को ब्रिटेन में रह रहे तंजानियाई लेखक अब्दुल रजाक गुरनाह को देने की घोषणा की गई थी, जिन्हें "उपनिवेशवाद के प्रभावों और शरणार्थियों की स्थिति" संबंधी रचना कार्य के लिए इस पुरस्कार के वास्ते नामित किया गया।
अगले सोमवार को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार की घोषणा किए जाने की संभावना है।
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