टीवी पत्रकार विपिन चंद का कोरोना से निधन, पत्रकारों के लिए फिर उठी ये मांग

टीवी पत्रकार और केरल में ‘मातृभूमि न्यूज’ के मुख्य संवाददाता विपिन चंद (42) का कोविड-19 संबंधित जटिलताओं के कारण शनिवार की देर रात निधन हो गया है।

Last Modified:
Monday, 10 May, 2021
Vipin Chand

टीवी पत्रकार विपिन चंद (42) का कोविड-19 संबंधित जटिलताओं के कारण शनिवार की देर रात निधन हो गया है। वह केरल में ‘मातृभूमि न्यूज’ के मुख्य संवाददाता के तौर पर कार्यरत थे और महामारी की दूसरी लहर के दौरान भी रिपोर्टिंग में खूब सक्रिय रहे थे। इसी दौरान वह कोरोना की चपेट में आ गए थे।  

करीब दो हफ्ते पहले जांच के दौरान कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद से वह होम क्वारंटाइन थे। बाद में उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। निमोनिया के बाद हालत बिगड़ने पर विपिन को कोच्चि के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार की देर रात करीब दो बजे उनका निधन हो गया।

विपिन के परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे हैं। विपिन के निधन पर एर्नाकुलम जिले के अलंगाड़ के रहने वाले चंद ने 2005 में पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की थी। वह 2012 में मातृभूमि न्यूज के साथ जुड़े। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री पिनारई विजयन समेत तमाम नेताओं और पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

विपिन चंद की मौत के बाद राज्य में पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित किए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड समेत कई राज्यों ने पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित कर उन्हें कोरोना वैक्सीनेशन में प्राथमिकता देने का फैसला किया है। वहीं, केरल में यह मांग लंबे समय से की जा रही है।

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वरिष्ठ पत्रकार के. एम. रॉय का निधन, राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

वरिष्ठ पत्रकार के. एम. रॉय का शनिवार को कोच्चि स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे और उम्र से संबंधित बीमारियों से ग्रसित थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 20 September, 2021
Last Modified:
Monday, 20 September, 2021
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वरिष्ठ पत्रकार के. एम. रॉय का शनिवार को कोच्चि स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे और उम्र से संबंधित बीमारियों से ग्रसित थे। रविवार को उनका पार्थिव शरीर सेंट थॉमस चर्च में रखा गया, जिसके बाद राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।   

रॉय के परिवार में बेटा मनु रॉय और बेटी स्वप्ना हैं। जनता के अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को रविवार को सुबह 9.15 बजे से 10 मिनट के लिए एर्नाकुलम प्रेस क्लब में रखा गया था।  

वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार रॉय ने 1961 में अपने करियर की शुरुआत ‘केरल प्रकाशम’ के सह-संपादक के रूप में की। उन्होंने ‘इकनॉमिक टाइम्स’, ‘द हिंदू’ और न्यूज एजेंसी ‘यूएनआई’ में भी काम किया। दैनिक समाचार पत्र ‘मंगलम’ के संपादक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सक्रिय पत्रकारिता छोड़ दी थी, लेकिन उनके लेख विभिन्न समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते थे।

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री पी. विजयन, विपक्ष के नेता वी डी सतीशन, केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पत्रकार प्रख्यात पत्रकार के एम रॉय के निधन पर शोक प्रकट किया और कहा कि पत्रकारों के अधिकारों को सुनिश्चित करने में उनके योगदान को याद किया जाएगा।

राज्यपाल ने ट्वीट कर कहा, ‘मलयालम और अंग्रेजी मीडिया में सेवा देने वाले दिग्गज पत्रकार के निधन की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ। पत्रकारिता क्षेत्र और पत्रकारों के अधिकार को सुनिश्चित करने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।’

वहीं, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने निधन पर शोक जताते हुए कहा कि रॉय के निधन से केरल ने एक प्रख्यात पत्रकार खो दिया है, जिन्होंने कई दशकों तक अंग्रेजी और मलयालम पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सतीशन ने कहा कि रॉय के निधन से भारतीय मीडिया को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा है।

मुरलीधरन ने रॉय को निष्पक्ष मीडिया हस्ती बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा नैतिक मूल्यों को बरकरार रखा।

रॉय स्वदेशभिमानी-केसरी पुरस्कार से सम्मानित थे, जो राज्य सरकार द्वारा स्थापित मीडियाकर्मियों के लिए सर्वोच्च सम्मान है। वह केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष और इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के महासचिव थे। रॉय कोट्टायम प्रेस क्लब के फाउंडर सेक्रेट्री थे। उन्होंने 'इरुलुम वेलिचावम' (Irulum Velichavum)  और 'कालाथिनु मुन्पे नदन्ना मंजूरां' (Kaalathinu Munpe Nadanna Manjooraan) सहित कई किताबें लिखी हैं।

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कांग्रेस के हाथ से 'उड़ते पंजाब' पर वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी ने कही ये बात

पंजाब की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ आ गया है। दरअसल शनिवार शाम पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर ने सीएम पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 18 September, 2021
Last Modified:
Saturday, 18 September, 2021
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पंजाब की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ आ गया है। दरअसल शनिवार शाम पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर ने सीएम पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि 3 बार विधायक दल की बैठक बुलाए जाने से वो अपमानित महसूस कर रहे है। दरअसल सिंह सिद्धू के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से ही अटकलों का बाजार गर्म था।

शुक्रवार देर रात हरीश रावत के एक ट्वीट से सभी ने यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया था कि कहीं शनिवार का दिन पंजाब के सीएम के लिए भारी तो नहीं है और हुआ भी यही। दरअसल देर रात किए गए अपने ट्वीट में हरीश रावत ने विधायक दल की बैठक बुलाने का ऐलान किया था।

कैप्टन के इस इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस के इस कदम की आलोचना हो रही है। साल 2017 में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर के दम पर सत्ता हासिल की और उनकी विदाई इतनी कड़वी होगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।

इसी बीच वरिष्ठ पत्रकार और जी न्यूज के एडिटर-इन-चीफ सुधीर ने भी एक ट्वीट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने अंग्रेजी भाषा में किए गए ट्वीट में लिखा, ‘बेहद दुःखद तस्वीर, एक सिपाही और देशभक्त की ऐसी विदाई उचित नहीं है। उन्होंने यह भी लिखा कि गांधी परिवार के द्वारा किया गया उनका यह अपमान उन पंजाब के लोगों का भी अपमान है जिनकी उन्होंने सेवा की है।’

आपको बता दें कि कैप्टन अमरिंदर सेना में थे और 80 के दशक में अपने मित्र स्वर्गीय राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में आए थे। 52 साल के राजनीतिक अनुभव और साढ़े नौ साल सीएम रहे नेता की ऐसी अपमानजनक विदाई की कल्पना किसी ने नहीं की थी।

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वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने अपने सभी परिचितों को किया अलर्ट, कहा- न करें ऐसा

फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों से पैसे मांगने का सिलसिला थम नहीं रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 18 September, 2021
Last Modified:
Saturday, 18 September, 2021
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फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों से पैसे मांगने का सिलसिला थम नहीं रहा है। आम लोगों को ठगने के लिए इन दिनों बदमाशों द्वारा कई तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। इनमें से एक है फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर रुपए ऐंठने का तरीका। ये बदमाश किसी की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर परिचितों से रुपए मांगते हैं। कुछ लोग भरोसा करके रुपए भी दे देते हैं। बाद में जानकारी होने पर पता चलता है कि वह तो ठग था। गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद से ऐसे कई केस सामने आए।

बता दें कि ऐसा ही कुछ हुआ है वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल के साथ, जिनके नाम से फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर उनके दोस्तों, करीबियों और परिचतों से पैसे की मांगे जा रहे हैं। हालांकि इस मामले वरिष्ठ पत्रकार ने साइबर क्राइम का सहारा लेने की बात कही है।

इसे लेकर वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने कहा, ‘कृपया सावधान रहें। मेरे नाम से कतिपय तत्वों ने फर्जी फेसबुक पेज बनाया है और पैसे की मांग की जा रही है। मैं इनकी जांच करा रहा हूं और साइबर सेल में मामला भी दर्ज करा रहा हूं।’

बता दें ये ठग कई बार हॉस्पिटल में परिवार का सदस्य भर्ती है या कोई और मजबूरी बताकर रुपए मांगते हैं। इतनी मिन्नतें करते हैं कि सामने वाला मना भी नहीं कर पाता, लिहाजा ऐसे गिरोह से सावधान रहने की जरूरत है।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार ईशमधु तलवार

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार ईशमधु तलवार अब हमारे बीच नहीं रहे। बीती रात अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 September, 2021
Last Modified:
Friday, 17 September, 2021
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वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार ईशमधु तलवार अब हमारे बीच नहीं रहे। बीती रात अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया।

बताया जा रहा है कि ईशमधु पूरी तरह से स्वस्थ्य थे, लेकिन अचानक से रात में उनकी तबीयत बिगड़ी जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

दो दिन पहले ही वरिष्ठ पत्रकार ईशमधु ने अलवर में प्रगतिशील लेखक संघ एवं जनवादी लेखक संघ के कार्यक्रम में शिरकत की थी। उनके साथ वरिष्ठ साहित्यकार उदय प्रकाश भी मंच पर थे। कार्यक्रम की तस्वीरें उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर भी शेयर की थीं।

उनके निधन से साहित्य और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत समेत कई राजनेताओं, साहित्यकारों और पत्रकारों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने शोक संदेश में लिखा है, ‘प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार, पिंक सिटी प्रेस क्लब व राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष रहे श्री ईश मधु तलवार के आकस्मिक निधन की जानकारी दुखद है। ईश्वर शोकाकुल परिजनों एवं स्व। श्री तलवार के मित्रों को यह आघात सहने की शक्ति दें एवं दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।’

राजस्थान ही नहीं बल्कि देश की हिंदी पत्रकारिता में ईशमधु तलवार एक चर्चित नाम थे। ‘राजस्थान पत्रिका’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘दैनिक भास्कर’, ‘ईटीवी’ सहित कई प्रमुख समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर उन्होंने लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं। ईशमधु कई राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित हो चुके।

यूको बैंक, राजस्थान ने हिंदी दिवस के मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार विजयदान देथा की स्मृति में ‘विजयदान देथा भाषा सेतु सम्मान’ शुरू किया है। यह पहला सम्मान ईशमधु तलवार को दिया गया था।

ईशमधु तलवार पिंक सिटी प्रेस क्लब के तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके साथ ही राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के भी वह दो बार अध्यक्ष रहे हैं।

पत्रकारिता के साथ-साथ ईश मधु तलवार साहित्य जगत में भी चर्चित नाम हैं। उनकी पुस्तक ‘लाल बजरी की सड़क’, ‘वो तेरे प्यार का ग़म’ और ‘रिनाला खुर्द’ काफी चर्चित रही हैं।

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देश को 'सर्विस कंज्यूमर' से 'सर्विस प्रोवाइडर' में बदल सकती हैं भाषाएं: प्रो. द्विवेदी

केट्स वी.जी. वझे महाविद्यालय के आयोजन में बोले आईआईएमसी के महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 16 September, 2021
Last Modified:
Thursday, 16 September, 2021
Professor Sanjay Dwivedi

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी का कहना है कि अगर हम भारतीय भाषाओं के संख्या बल को सेवा प्राप्तकर्ता ('सर्विस कंज्यूमर') से सेवा प्रदाता ('सर्विस प्रोवाइडर') में तब्दील कर दें, तो भारत जितनी बड़ी तकनीकी शक्ति आज है, उससे कई गुना बड़ी शक्ति बन सकता है।

केट्स वी.जी. वझे महाविद्यालय, हिंदी साहित्य परिषद एवं हिंदी विभाग द्वारा आयोजित 'हिंदी दिवस समारोह' के अवसर पर हिंदी की तकनीकी शक्ति पर चर्चा करते हुए प्रो. द्विवेदी ने कहा कि संख्या बल हमारी सबसे बड़ी ताकत है, इसलिए तकनीकें बनती रहेंगी और हिंदी समृद्ध होती रहेगी। लेकिन खुद को महज बाजार मानकर बैठे रहना और विकास का काम दूसरों पर छोड़ देना आदर्श स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सभी भाषाओं की बात करें, तो वर्ष 2030 तक भारत में लगभग एक अरब लोग इंटरनेट से जुड़े होंगे। ये यूजर्स मुख्य रूप से अंग्रेजी न बोलने वाले, मोबाइल फोन यूजर्स और विकसित ग्रामीण क्षेत्रों से होंगे, जो ऑनलाइन कंटेंट के लिए भुगतान करने को भी तैयार होंगे।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि हमें भारत को सिर्फ बीपीओ और आउटसोर्सिंग के जरिये तकनीकी विश्व शक्ति नहीं बनाना है, बल्कि उसे एक ज्ञान समाज में बदलना है। तकनीक, भारत में सामाजिक परिवर्तनों तथा आर्थिक विकास का निरंतर चलने वाला जरिया बन सकती है और भाषाओं की इसमें बड़ी भूमिका होने वाली है। प्रो. द्विवेदी के अनुसार आने वाला समय हिंदी का है। आज के समय में न तो हिंदी की सामग्री की कमी है और न ही पाठकों की। हिंदी का एक मजबूत पक्ष यह है कि यह अर्थव्यवस्था की भाषा बन चुकी है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी उपयोगिता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।

कार्यक्रम में हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना दुबे, महाविद्याल के प्राचार्य डॉ. बी.बी. शर्मा, डॉ. प्रीता नीलेश, सी.ए. विद्याधर जोशी, श्रीमती माधुरी बाजपेयी, जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम चौटानी, अजित राऊत, भरत भेरे एवं गोपीनाथ जाधव के साथ महाविद्यालय के अन्य शिक्षक भी शामिल हुए।

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गलत उपचार से युवा पत्रकार को हुआ कैंसर, आर्थिक मदद की जरूरत

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में मिड डे मील के नाम पर नमक रोटी खिलाने वालों का भंडाफोड़ करने वाले पत्रकार पवन जायसवाल इन दिनों कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 16 September, 2021
Last Modified:
Thursday, 16 September, 2021
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उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में मिड डे मील के नाम पर नमक रोटी खिलाने वालों का भंडाफोड़ करने वाले पत्रकार पवन जायसवाल इन दिनों कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं। इलाज पर होने वाला खर्च वहन न कर पाने के चलते कई पत्रकारों ने मदद की अपील की है। 

जायसवाल के सहयोगी रहे वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत ने समाचार4मीडिया को बताया कि करीब तीन महीने पहले उन्होंने अपने दांत में दर्द की शिकायत की थी, जिसका इलाज उन्होंने इलाके के ही एक डेंटिस्ट को कराया। डॉक्टर ने उनका एक दांत गलत ढंग से उखाड़ दिया और उपचार में घोर लापरवाही बरती, जिसकी वजह से उनकी हालत धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई। इसके बाद जायसवाल को बनारस के कई विशेषज्ञ चिकित्सकों को दिखाया गया, जहां सिटी स्कैन, वायप्सी से लेकर तमाम जांचें हुई, जिसके बाद अंत में जानलेवा कैंसर की पुष्टि हुई।

विजय विनीत ने बताया कि पवन जायसवाल की आर्थिक स्थिति पहले से ही ठीक नहीं है। महंगे इलाज का खर्च जुटा पाना भी संभव नहीं है। जन-सरोकारों के लिए पत्रकारिता करने वाले इस पत्रकार के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। इन्हीं के कंधे पर बूढ़ी मां की जिम्मेदारी भी है। तंगी से जूझ रहे इस कलमकार का परिवार बेहद परेशान है। चिकित्सकीय परीक्षण और दीर्घकालिक इलाज के लिए पवन जायसवाल ने अपनी पत्नी और मां के आभूषण बेचना शुरू दिए हैं।

विजय विनीत जैसे तमाम पत्रकारों ने पवन जायसवाल का जीवन बचाने के लिए लोगो ले आगे आकर मदद करने की अपील की है और उनके बैंक खाते की भी जानकारी साझा की है, जिसे आप नीचे देख सकते हैं-

State Bank of India

A/c No- 31021075697

IFSC Code- SBIN0012729

Branch- Ahraura (Mirzapur)

 Contact No &  Phone pay no.-  7600997711

  

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पत्रकार विकास रंजन हत्याकांड में 13 साल बाद आया फैसला, LJP नेता समेत 14 दोषी करार

बिहार के समस्तीपुर जिला के चर्चित पत्रकार विकास रंजन हत्याकांड मामले में 13 साल बाद सभी आरोपियों को दोषी करार दिया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 16 September, 2021
Last Modified:
Thursday, 16 September, 2021
VikasRanjan54784

बिहार के समस्तीपुर जिला के चर्चित पत्रकार विकास रंजन हत्याकांड मामले में 13 साल बाद सभी आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। दोषियों में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के प्रखंड अध्यक्ष और महुली पंचायत के मुखिया स्वयंवर यादव समेत राजनीति के चर्चित चेहरे शामिल हैं।

रोसड़ा कांड संख्या 173/2008 मामले में सुनवाई करते हुए रोसड़ा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राजीव रंजन सहाय की अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी करार दिया है, जिनमें से केवल 13 लोग ही कोर्ट में पेश हुए। सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

दोषियों के ऊपर सजा की बिंदु क्या हो, इस पर 22 सितंबर को न्यायालय में सुनवाई होगी।

न्यायालय द्वारा सभी आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद बचाव पक्ष के वकील अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि 22 सितंबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई होने के बाद वो इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे।

वहीं, इस मामले में दिवंगत विकास रंजन के पिता फूलकांत चौधरी ने कहां कि 13 साल बाद न्यायालय के द्वारा आरोपियों को दोषी करार दिया गया है, यह कानून की जीत है। इससे उनके बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। उनके वकील हीरा कुमारी ने बताया कि न्यायालय का फैसला सही है। अदालत पर सभी को विश्वास था और वैसा ही न्याय हुआ है।

बता दें कि 25 नवंबर, 2008 को एक दैनिक अखबार के पत्रकार विकास रंजन की हत्या हथियारबंद अपराधियों के द्वारा उस वक्त कर दी गई थी जब वो अपने दफ्तर से घर के लिए निकल रहे थे। पहले से घात लगाए अपराधियों ने कार्यालय के नीचे ही ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए विकास रंजन को मौत की नींद सुला दी थी। पत्रकार की मौत के बाद पिता फूलकांत चौधरी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की और 14 लोगों को आरोपी बनाया था।

अदालत ने जिन्हें दोषी ठहराया है, उनमें लोजपा के प्रखंड अध्यक्ष स्वयंवर यादव, रोसड़ा में मुखिया का प्रतिनिधि बब्लू सिंह, शूटर कृष्ण कुमार यादव उर्फ बरकू यादव शामिल हैं। बरकू एक अन्य मामले में फिलहाल जेल में ही सजा काट रहा है। मोहन यादव के कोर्ट में उपस्थित नहीं होने के कारण उसके खिलाफ वारंट जारी किया गया है।

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‘टाइम्स नाउ नवभारत’ के इस मंच पर जुटीं राजनीतिक हस्तियां, रखी अपनी बात

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में बुधवार को सुबह से शाम तक टाइम्स नाउ नवभारत का 'नवभारत नवनिर्माण' मंच सजा रहा। सुबह से एक के बाद एक राजनीतिक दिग्गज इस मंच पर आए।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 16 September, 2021
Last Modified:
Thursday, 16 September, 2021
Times Now Navbharat

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में बुधवार को सुबह से शाम तक टाइम्स नाउ नवभारत का 'नवभारत नवनिर्माण' मंच सजा रहा। सुबह से एक के बाद एक राजनीतिक दिग्गज इस मंच पर आए। राज्‍य के वर्तमाल मामलों को संबोधित करते हुए और उत्तर प्रदेश के लिए प्रगति के लिए एक रोडमैप तैयार करते हुए इस कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व सीएम अखिलेश यादव, ​​केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य, एआईएमआईएम के अध्यक्ष और सांसद लोकसभा (हैदराबाद निर्वाचन क्षेत्र) असदुद्दीन ओवैसी, बाबा रामदेव और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद रावण सहित अन्य प्रमुख नेताओं के साथ सहयोगात्मक चर्चा हुई।

स्वागत भाषण देते हुए ‘टाइम्स नेटवर्क’ के एमडी और सीईओ एमके आनंद ने कहा, ‘भारत के सबसे प्रभावशाली समाचार प्रसारण नेटवर्क के रूप में हमने देश के विकास में योगदान देने वाली पहलों का लगातार समर्थन किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में हमारा मानना है कि बड़े बदलाव का समय आ गया है। भारत एक लंबी छलांग के लिए तैयार है। हमारा मानना ​​है कि समाचार एक बेहतर समाज के लिए बदलाव ला सकते हैं। एक नया भारत तभी उभरेगा जब महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए जाएंगे और लोगों और उनकी सरकार के बीच संचार का एक भरोसेमंद चैनल स्थापित होगा। नवभारत नवनिर्माण मंच इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। सम्मेलनों की एक श्रृंखला के माध्यम से, यह मंच विभिन्न राज्यों के लिए पुनरुत्थान के एजेंडे को आकार देने में उत्प्रेरक होगा। हम इस मेगा कॉन्क्लेव की शुरुआत उत्तर प्रदेश चैप्‍टर के साथ कर रहे हैं, एक ऐसा राज्य जिसने हाल के वर्षों में अपनी आर्थिक उत्पादकता को उन्‍नत बनाने के प्रयासकिये हैं और मुझे विश्वास है कि यह मंच राज्य की प्रगति के लिए स्‍थायी समाधान लाने और एक निर्णायक कार्ययोजना को तैयार करने में मदद करेगा।‘

टाइम्स नाउ नवभारत के नवभारत नवनिर्माण मंच से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘2022 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएंगे। दोबारा चुनकर आउंगा। नोट कर लीजिए। 350 से कम सीटें नहीं आएंगी। अखिलेश 400 सीटों पर पीछे हैं। इसलिए उन्होंने 400 सीट बोल दिया।‘ इस बार के चुनावी मुद्दों पर योगी ने कहा कि विकास और राष्ट्रवाद दोनों मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में जाएंगे। किसानों के मुद्दों पर योगी ने कहा कि 2022 में जब चुनाव में जाएंगे तो यूपी में किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। विकास के दावों पर उठे विपक्ष के सवालों के बीच मुख्यमंत्री योगी ने कहा, ‘2017 तक सिर्फ दो एक्सप्रेस-वे बने थे। समाजवादी पार्टी का चेहरा विकास का नहीं था। बहनजी अब सफाई दे रही हैं कि अवसर मिलेगा तो मूर्ति नहीं लगाउंगी। विकास इनके एजेंडे का पार्ट नहीं था। अभी यूपी में पांच एक्सप्रेस-वे पर काम चल रहा है। काम अब बोल रहा है तो विपक्ष को पच नहीं रहा है। पहले के सीएम 11 बजे सो कर उठते थे। हफ्ते में दस मिनट सीएम ऑफिस जाते थे। जनता पर ध्यान नहीं देते थे।‘

मनमाने तरीके से काम करने के अखिलेश के आरोप पर योगी ने कहा, ‘अनैतिक कमाई पर सरकार का बुलडोजर चल रहा है। ताज्जुब होता है कि समाजवादी पार्टी की हमदर्दी जनता के प्रति नहीं है, गुंडे और माफियाओं के प्रति हैं। इसलिए इलेक्शन का एजेंडा उन्होंने सेट कर दिया है। हमारी सहानभूति जनता के प्रति है।‘ अब्बाजान वाले बयानों को लेकर विपक्ष के हमलों पर योगी ने कहा, ‘मुस्लिम वोट चाहिए, लेकिन अब्बाजान से परहेज है। अब्बाजान शब्द असंसदीय नहीं है। किसी को इससे परेशानी नहीं होनी चाहिए। मेरा मैसेज साफ है। जनता समझ रही है। मुझे सिर्फ जनता को समझाना है।‘

यूपी चुनाव में ओवैसी की एंट्री पर सीएम योगी ने कहा, ‘ओवैसी भाग्यनगर से आए हैं तो अपना भाग्य आजमा लें। ओवैसी जैसे लोगों के बोलने से कुछ नहीं होने वाला है। जो तय हो चुका है वही होने वाला है।‘

पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘जनता ने मन बनाया है कि जो पार्टी किसानों का सम्मान करेगी, रोजगार देगी, पिछड़ों दलितों का सम्मान करेगी, सभी को साथ लेकर चलेगी, ऐसे दल को जनता इस बार मौका देने जा रही है। हो सकता है कि जनता 400 सीटें समाजवादी पार्टी को दे दे। समाजवादी पार्टी ने यूपी में नई दिशा दिखाई है। नया यूपी बनाना चाहता हूं। नौजवानों के हाथ में लैपटॉप देना चाहता हूं। अभी नहीं बताएंगे कि क्या करेंगे, घोषणापत्र में लिखेंगे।‘

चुनावी गठबंधन पर अखिलेश यादव ने कहा, ‘मुझे अनुभव मिला है कि बड़े दलों से गठबंधन नहीं करना है, छोटे दलों को साथ लाने की कोशिश होगी। यूपी में अब्बाजान वाले विवाद पर अखिलेश ने कहा कि ये योगी जी के संस्कार हैं। लेकिन उन्हें अलग संस्कार मिले हैं। इसलिए ऐसी भाषा का प्रयोग वो नहीं करते।‘

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, ‘दो सालों में अमेठी में 500 करोड़ रुपये की लागत से सड़कें बनाई गईं। जनता विपक्ष से सवाल पूछेगी कि अगर योगी सरकार विकास कर सकती है तो विपक्षी पार्टियों ने सत्ता में रहते इसे क्यों नहीं किया।‘ स्मृति ईरानी ने यूपी में विकास के दावों को खोखला बता रहे विपक्ष को जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘यूपी में योगी सरकार ने दो करोड़ परिवारों को टॉयलेट दिए। टोटी और टॉयलेट में फंसकर अखिलेश राजनीति कर रहे हैं। हाथ और साइकिल की जोड़ी ने क्या कहर ढाए थे। इसका उदाहरण अमेठी में है।‘ योगी आदित्यनाथ पर राहुल गांधी के हमले का भी स्मृति ईरानी ने जवाब दिया और कहा कि जो देश को तोड़ने की बात कहे। भारत मां के टुकड़े-टुकड़े का ऐलान करे। वो देश के योगियों को निर्देश न ही दे तो अच्छा है।

‘एआईएमआईएम‘ के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘दूसरी पार्टियां मुस्लिमों के वोट लेती थीं। लेकिन मुस्लिमों को फेल कर देती थीं। लेकिन अब मुस्लिम फेल नहीं होंगे, मेरिट में पास भी होंगे।‘ मुस्लिम वोटों की दावेदारी कर रहे ओवैसी ने कहा कि यूपी में अगर किसी समाज के वोट की वैल्यू नहीं है, वो मुसलमान है। यूपी में 19 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। 9 प्रतिशत यादव आबादी है। लेकिन यादवों का सीएम बन जाता है। मुस्लिम वोट बांटने वाले आरोप पर ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम वोट किसी का बंधक नहीं है। ओवैसी ने कहा कि वो यूपी में गठबंधन करने पर चर्चा कर रहे हैं। पार्टी 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। ओवैसी ने यूपी में अपने दो चुनावी टारगेट बताए। पहला टारगेट ज़्यादा से ज़्यादा पार्टी के कैंडिडेट को जिताना और दूसरा टारगेट दोबारा बीजेपी की सरकार ना बने और योगी आदित्यनाथ दोबारा सीएम ना बनें।

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, ‘2014 को 2017 में दोहराया था। एसपी-बीएसपी के गठबंधन के बावजूद 2019 में जीते। 2022 में भी 300 से ज़्यादा सीटें जीतेंगे। सारे विरोधी एक साथ हो जाएंगे तब भी 300 के आंकड़े को पार करेंगे।‘ किसान आंदोलन पर मौर्य ने कहा कि ये किसान आंदोलन नहीं, विपक्ष का आंदोलन है। विपक्ष के आंदोलन का सामना साढ़े चार साल किया और चुनाव में भी कर लेंगे। जिन्हें लगता है कि हम किसान विरोधी हैं तो न घोड़ा दूर है, न मैदान दूर है। सीएम पद की दावेदारी पर मौर्य ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जी मुख्यमंत्री हैं और आगे पार्टी तय करेगी तो योगी आदित्यनाथ ही मुख्यमंत्री होंगे। किसी नाराजगी का कोई सवाल नहीं है।

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सोशल मीडिया पर कुछ यूं चल रहा महज 10 साल की नव्या का ‘जादू’

सोशल मीडिया के इस दौर में फेमस होने के लिए जरूरत है तो सिर्फ टैलेंट की, फिर चाहे आपकी उम्र कुछ भी हो।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 15 September, 2021
Last Modified:
Wednesday, 15 September, 2021
Navya Baijal

सोशल मीडिया के इस दौर में फेमस होने के लिए जरूरत है तो सिर्फ टैलेंट की, फिर चाहे आपकी उम्र कुछ भी हो। तमाम बच्चे विभिन्न प्लेटफार्म्स पर अपनी प्रतिभा दिखाने की क्षमता रखते हैं और दिखा भी रहे हैं। ऐसे ही बच्चों में शामिल हैं दिल्ली की नव्या बैजल। महज 10 साल की नव्या ने अपनी उत्कृष्ट और रचनात्मक प्रतिभा दिखाई है। 

अपनी खुशमिजाजी, जिंदादिली और अदाकारी से बड़े ही कम समय में नव्या ने सोशल मीडिया पर अपनी एक अलग पहचान बना ली है। उनकी कुछ रील्स और पोस्टों को काफी बार देखा जा चुका है। नव्या बैजल इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए अपने जीवन की एक झलक पेश करती हैं।

जहां तक आंकड़ों का सवाल है तो नव्या बैजल के सोशल मीडिया पर एक लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। भारत में सोशल मीडिया पर सेलेब्रिटीज और प्रभावित करने वालों का चलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। नव्या बैजल जैसे प्रतिभाशाली बच्चे यहां अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार हैं और उनके पास इसे हासिल करने का सुनहरा मौका है।

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हिंदी को संपर्क की भाषा के रूप में स्थापित करना समय की आवश्यकता: प्रो. केजी सुरेश

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में हिंदी पत्रकारिता, साहित्य एवं भाषा पर हुआ विचार विमर्श

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 15 September, 2021
Last Modified:
Wednesday, 15 September, 2021
MCU Hindi Diwas

‘माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय’ (MCU) में स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत राष्ट्रभाषा दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी 'हिंदी हम सबकी' का आयोजन किया गया। ‘भाषा और हिंदी’ विषय पर उच्च शिक्षा विभाग की स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के निदेशक प्रो. उमेश सिंह ने कहा कि दो प्रकार की सत्ता हैं- राष्ट्रसत्ता और राजसत्ता। भाषा को लेकर सारा विवाद राजसत्ता में है। हमारे यहां राष्ट्रसत्ता में भाषा को लेकर कोई विवाद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पारलौकिक और लौकिक सत्ता के साथ जुड़कर भाषा हमारे साथ चलती है।

प्रो. उमेश सिंह ने कहा कि आज का दिन राजभाषा दिवस के नाते मनाया जाना चाहिए, क्योंकि 14 सितंबर 1949 को संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने उनकी इस बात को सहमति प्रदान की और कहा कि हिंदी का कोई एक दिन नहीं, सभी दिन हिंदी के हैं। आज के दिन को राजभाषा दिवस के रूप में मनाया जाना ही ठीक है।

‘पत्रकारिता और हिंदी’ विषय पर वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय ने कहा कि हमें हिंदी को दैनिक जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है क्योंकि यही वह भाषा है जो संचार में आत्मीयता और माधुर्य लाती है। पत्रकारिता में सर्वाधिक प्रचलित यदि कोई भाषा है तो वह हिंदी ही है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के मूर्धन्य पत्रकारों के योगदान का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि हिंदी हमें राष्ट्र संपर्क भाषा के तौर पर अपनाना चाहिए। हिंदी को हम राष्ट्रभाषा के तौर पर अपनाएंगे तो सभी भारतीय भाषाएं ज्ञान का एक संसार रचेंगी। उन्होंने कहा कि हिंदी का आज बहुत विस्तार हो गया है। उसने खुली बाहों से अन्य भाषाओँ के शब्दों को स्वीकार किया है। लेकिन किसी भी भाषा में शब्द को उस भाषा की प्रकृति एवं स्वाभाव के अनुरूप शामिल करना चाहिए।

‘साहित्य और हिंदी’ विषय पर दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय की निदेशक एवं साहित्यकार प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि सरस्वती पत्रिका हिंदी की पाठशाला थी। निराला जैसे कवि को पहले हिंदी नहीं आती थी। जब उनकी पत्नी ने कहा कि आपको हिंदी तो आती ही नहीं। तब सरस्वती के माध्यम से उन्होंने हिंदी सीखी और हिंदी के बहुत बड़े कवि बन गए। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता के बाद की कविता में भी राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रबोध का भाव बना रहा है। स्वतंत्र के बाद के 75 वर्ष का साहित्य अगर हम देखें तो हमें उसमें राष्ट्रीय स्वर स्पष्ट रूप से सुनाई देते हैं।

प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि हमें हर वह संभव प्रयास करना चाहिए, जिससे हमारी भाषा और भी उन्नत हो सके। भाषाओं के नाम पर अनावश्यक विवाद नहीं होना चाहिए। यह समय की आवश्यकता है कि आज हम हिंदी को संपर्क की भाषा के रूप में स्थापित करें। इस संगोष्ठी का समन्वय एवं संचालन जनसंपर्क अधिकारी लोकेन्द्र सिंह ने किया। इस अवसर पर सभी विभागों के अध्यक्ष, शिक्षा एवं अधिकारी उपस्थित रहे। संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय की ‘प्रेमचंद साहित्य परिषद्’ द्वारा किया गया।

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