बदलती शिफ्ट्स में काम कर रहे पत्रकारों के लिए है ये खबर

लगातार बदलती शिफ्ट में नौकरी करने वालों के लिए यह खबर काफी चिंताजनक

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 23 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 23 November, 2019
Research

लगातार बदलती शिफ्ट में नौकरी करने वालों के लिए यह खबर काफी चिंताजनक है। दरअसल, आजकल कई निजी कंपनियों में चौबीसों घंटे काम होता है। मीडिया भी इससे अछूता नहीं हैं। तमाम मीडिया संस्थान चौबीसों घंटे खुले रहते हैं और उनमें लगातार काम होता रहता है। जाहिर है, ऐसे में यहां काम करने वालों की शिफ्ट भी बदलती रहती है। कभी उन्हें सुबह की शिफ्ट में तो कुछ दिनों बाद रात की शिफ्ट में ड्यूटी करनी पड़ती है। इस तरह की शिफ्ट में काम करने वालों को मोटापे और डायबिटीज का रिस्क ज्यादा बना रहता है। यही नहीं, उन्हें कई तरह की दिमागी बीमारियां भी घेर सकती हैं।    

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं ने इस बारे में रिसर्च की तो कई चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आए। इस रिसर्च में पता चला कि जो लोग लगातार बदलती शिफ्ट में काम करते हैं, उनमें रात की शिफ्ट में काम न करने वालों अथवा सुबह नौ से पांच बजे वाली शिफ्ट में काम करने वालों की तुलना में अवसाद और चिंता की आशंका 33 प्रतिशत ज्यादा थी।

28 हजार 438 प्रतिभागियों की जांच के बाद रिसर्च में यह भी पता चला कि शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित होने की आशंका भी 28 प्रतिशत ज्यादा होती है।

इस रिसर्च में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि जब काम के दौरान बार-बार शिफ्ट बदलती है तो सोने-जागने की आदत पर इसका काफी असर पड़ता है और शरीर इस बदलाव को झेल नहीं पाता। इससे व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है। इसके अलावा उसके मूड में भी बदलाव आने लगता है और सामाजिक रूप से भी वह खुद को अलग-थलग पाने लगता है। 

इस रिसर्च में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार शिफ्ट में बदलाव होने से हमारे सोने और जागने की आदत पर असर पड़ता है। हमारा शरीर सोने-जागने की आदत में बार-बार हो रहे इस बदलाव को नहीं झेल पाता, जिससे व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ जाता है। इसके अलावा यह मूड में बदलाव और सामाजिक अलगाव का कारण भी बनता है।

वहीं, जापान में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि बदलती शिफ्ट में काम करने वाले लोगों को दिन में काम करने वालों की तुलना में डायबिटीज होने का खतरा 50 प्रतिशत ज्यादा था। इसके अलावा अन्य तरह की समस्याएं जैसे- हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और कोलेस्ट्राल बढ़ने की समस्याएं भी उनमें ज्यादा पाई गईं।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार सर्वदमन पाठक, CM समेत तमाम लोगों ने दी श्रद्धांजलि

बताया जाता है कि बुधवार की रात करीब नौ बजे भोपाल में त्रिलंगा स्थित अपने घर में उन्हें दिल का दौर पड़ गया।

Last Modified:
Thursday, 23 June, 2022
Sarvadaman Pathak

मध्यप्रदेश के जाने-माने पत्रकार सर्वदमन पाठक का निधन हो गया है। वह करीब 72 साल के थे। बताया जाता है कि बुधवार की रात करीब नौ बजे भोपाल में त्रिलंगा स्थित अपने घर में उन्हें दिल का दौर पड़ गया। आनन-फानन में परिजन सर्वदमन पाठक को अस्पताल ले गए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सर्वदमन पाठक करीब बीस बरसों से दैनिक जागरण, भोपाल में न्यूज़ एडिटर थे। उन्हें मल्टी टास्किंग जर्नलिस्ट माना जाता था। सेंट्रल डेस्क के अलावा उनके पास संडे मैगजीन का काम भी था। समसामयिक मुद्दों पर वह काफी बेहतरीन आर्टिकल लिखते थे। ‘दैनिक जागरण’ के अलावा उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ और ‘नई दुनिया’ में भी काम किया था। सर्वदमन के परिवार में पत्नी, बेटा और बेटी हैं। उनके बेटा-बहू दूसरे शहर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि बेटी-दामाद जयपुर में डॉक्टर हैं।

सर्वदमन पाठक के निधन पर तमाम जाने-माने लोगों ने परमपिता परमात्मा से दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान देने व शोकाकुल परिजनों को यह गहन दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सर्वदमन पाठक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना की है। इस बारे में अपने ट्वीट में शिवराज सिंह चौहान ने लिखा है, ‘भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार सर्वदमन पाठक जी के निधन की खबर दुखद है। यह अपूरणीय क्षति है। आपका जीवन जनहितैषी, विकासपरक एवं कमजोर के उत्थान के प्रति समर्पित पत्रकारिता का अध्याय रहा। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। ॐ शांति।।’

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने भी ट्वीट कर सर्वदमन पाठक के निधन पर दुख व्यक्त किया है। अपने ट्वीट में कमलनाथ ने लिखा है, ‘मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार सर्वदमन पाठक जी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना करता हूं। ओम शांति’।

वहीं, सर्वदमन पाठक के निधन पर ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC), नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक संदेश में प्रो. द्विवेदी ने कहा है, ‘सर्वदमन पाठक ऐसे पत्रकार थे, जिनकी पारंपरिक मूल्यों में गहरी आस्था थी और उन्होंने पत्रकारिता में शुचिता का प्रतिमान स्थापित किया। उन्होंने अपने निरंतर लेखन से समाज को राह दिखाई और अपनी गहरी जनपक्षधरता से लोगों के दिलों में जगह बनाई।’ प्रो.द्विवेदी ने कहा कि पाठक जी ने बिना शोर मचाए विचार की पत्रकारिता की और जनमत के निर्माण के पत्रकारीय लक्ष्य को हमेशा सामने रखा। उनके समूचे लेखन में मूल्यनिष्ठा और गहरे भारतप्रेम के दर्शन होते हैं।

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मीडिया घरानों को सूचनाएं लीक कर पार्टी नेताओं की छवि खराब कर रहा ED: कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने ईडी पर आरोप लगाया कि वह पार्टी नेताओं की छवि खराब करने के लिए कुछ मीडिया घरानों को चुनिंदा सूचनाएं लीक कर रहा है।

Last Modified:
Tuesday, 21 June, 2022
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नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 21 जून को भी पूछताछ के लिए  बुलाया। राहुल गांधी से ED की पूछताछ का मंगलवार को पांचवां दिन है। नेशनल हेराल्ड केस में अब तक राहुल गांधी से 4 दिनों में 40 घंटे से ज्यादा की पूछताछ हो चुकी है।

राहुल गांधी से लगातार हो रही ईडी की पूछताछ को लेकर कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन ने बड़ा प्रवर्तन निदेशालय और केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। अजय माकन ने कहा कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों के जरिए विपक्ष की आवाज को दबाने का काम कर रही है।

इतना ही नहीं, उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर आरोप लगाया कि वह पार्टी नेताओं की छवि खराब करने के लिए कुछ मीडिया घरानों को चुनिंदा सूचनाएं लीक कर रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने सोमवार को नई दिल्ली के पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ जांच को प्रभावित करने के लिए मोदी सरकार द्वारा कहानी गढ़ी जा रही है। नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी के चौथी बार ईडी के सामने पेश होने के बाद माकन की यह टिप्पणी आयी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हमारे नेताओं की छवि खराब करने के लिए झूठी और चुनिंदा खबरें-सूचनाएं लीक कर रही है। माकन ने कहा, ‘नेशनल हेराल्ड मामला ऐसा मुद्दा है, जिसमें किसी को एक पैसे का लाभ नहीं हुआ है, लेकिन फिर भी लगातार चौथे दिन हमारे नेता को बुलाया गया है, जो पार्टी की छवि खराब करने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केंद्रीय जांच ब्यूरो और ईडी का इस्तेमाल कर विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।

अजय माकन ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों को निर्देश दिए जाते हैं कि या तो मोदी सरकार और भाजपा के खिलाफ बोलना बंद करें, वरना उन पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि कई नेता ऐसे हैं जिन्हें पहले ईडी और सीबीआई के जरिए परेशान किया गया और बाद में जब वह भाजपा में शामिल हो गए तो उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रवर्तन निदेशालय में कुल 5422 केस चल रहे हैं, जिनमें से अकेले पर 5310 केस अकेले मोदी सरकार के 8 साल के कार्यकाल में दर्ज हुए, जिससे पता चलता है कि किस कदर विपक्ष के नेताओं को ईडी के जरिए डराया और धमकाया जा रहा है। उन्होंने प्रतिप्रश्न करते हुए कहा, इससे क्या यह ऐसा नहीं लगता कि ईडी अब चुनाव प्रबंधन विभाग बन गया है?

उन्होंने कहा कि हेमंत बिस्वा को शारदा घोटाले में ईडी ने बुलाया था, उनसे पूछताछ हुई लेकिन जब वो बीजेपी में शामिल हो गए तो उन पर कार्रवाई रोक दी गई। येदुरप्पा पर पर भी केस दर्ज हुआ था उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। नारायण राणे जब तक कांग्रेस में रहे जब तक उन्हें रोज ईडी और इनकम टैक्स के नोटिस भेजे जाते थे, लेकिन जैसे ही भाजपा में चले गए तो वह पाक साफ हो गए। मुकुल रॉय और सोमेन मित्रा जब तक तृणमूल कांग्रेस में रहे उन्हें एक भी ईडी और सीबीआई के जरिए परेशान किया जाता रहा। उन्होंने कहा कि यह सब चीजें इस बात को साबित करती है कि अन्य दलों के नेताओं को भाजपा में शामिल कराने के लिए भी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जाता है।

वहीं, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि 'शायद ईडी को कुछ काम नहीं है इसलिए राहुल जी को बुला लेते है, चार दिन की पूछताछ से कुछ निकलता है? लेकिन लगातार बुला रहे है।'

गौरतलब है कि 19 जून को राहुल गांधी का 52वां जन्मदिन था। पिछले सप्ताह सोमवार, मंगलवार और बुधवार को लगातार तीन दिन और सोमवार को फिर से ईडी के अधिकारियों ने पूछताछ की। 52 वर्षीय राहुल गांधी से अब तक 40 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की जा चुकी है। इल दौरान धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनके बयान दर्ज किये गए।

ईडी ने इसी मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को 23 जून को तलब किया है। सोनिया गांधी कोविड-19 से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं।    

गौरतलब है कि नेशनल हेराल्ड का मामला 2012 में चर्चा में आया था। तब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कुछ कांग्रेसी नेताओं ने गलत तरीके से यंग इंडियन लिमिटेड (वाईआईएल) के जरिए एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण किया है। स्वामी ने आरोप लगाया था कि यह सब कुछ दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपए की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया। साजिश के तहत यंग इंडियन लिमिटेड को टीजेएल की संपत्ति का अधिकार दिया गया है।

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फिल्म अभिनेता चिरंजीवी ने यूं की वरिष्ठ फोटो पत्रकार की मदद, हो रही तारीफ

तेलुगू फिल्म अभिनेता चिरंजीवी का उदार चेहरा एक बार फिर लोगों के सामने आया है, जब उन्होंने एक बीमार पत्रकार की मदद के लिए हाथ बढ़ाया।

Last Modified:
Tuesday, 21 June, 2022
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तेलुगू फिल्म अभिनेता चिरंजीवी ने कई मौकों पर लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है, फिर चाहे वह टीवी इंडस्ट्री में हो या फिर इसके बाहर। महामारी के दौरान भी, चिरंजीवी ने आवश्यक राशन सामग्री प्रदान कर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े श्रमिकों की मदद की थी। उनका उदार चेहरा एक बार फिर लोगों के सामने आया है, जब उन्होंने एक बीमार पत्रकार की मदद के लिए हाथ बढ़ाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार उन्होंने एक प्रमुख अखबार के वरिष्ठ फोटो पत्रकार की मदद की है। कथित तौर पर, ये फोटो पत्रकार अचानक से बीमार पड़ गए और उन्हें तत्काल मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत आ पड़ी। आर्थिक तंगी होने की वजह से वे ठीक से अपना उपचार नहीं करा सकते थे, लिहाजा उन्हें मदद की जरूरत थी। लेकिन जब इसकी जानकारी फिल्म अभिनेता चिरंजीवी को लगी, तो उन्होंने मदद का हाथ बढ़ाया।

सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए चिरंजीवी ने न केवल व्यक्तिगत रूप से डॉक्टर से बात की, बल्कि उनके इलाज की व्यवस्था भी की। बताया जा रहा है कि इलाज के बाद फोटो पत्रकार की तबीयत फिलहाल ठीक है और अब वह खतरे से बाहर है।

बता दें कि वरिष्ठ फोटो पत्रकार के माता और पिता दोनों का COVID की लहर के दौरान निधन हो गया था।

सुपर स्टार चिरंजीवी की इस दरियादिली की सोशल मीडिया पर कोई तारीफ कर रहा है और फैन्स उन्हें रियल का ‘सुपर हीरो’ बता रहे है।

 

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पत्रकार ने बेचा अपना नोबेल पुरस्कार, जानें क्यों उठाया ये कदम

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित रूसी पत्रकार दिमित्री मुरातोव ने अपना पदक सोमवार रात नीलाम कर दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 21 June, 2022
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नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित रूसी पत्रकार दिमित्री मुरातोव ने अपना पदक सोमवार रात नीलाम कर दिया है। मुरातोव ने पुरस्कार की नीलामी से मिली 5,00,000 डॉलर की नकद राशि सीधे संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ को दान करने की घोषणा की है। यह प्रतिष्ठित संस्था धनराशि को यूक्रेनी बच्चों के कल्याण के लिए खर्च करेगी। उन्होंने कहा कि इस दान का उद्देश्य शरणार्थी बच्चों को भविष्य के लिए एक मौका देना है।

नीलाम होने वाला नोबेल पदक 23 कैरेट सोने से निर्मित और 175 ग्राम वजन का है। उस पर महान वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की मुखाकृति बनी हुई है। 

मुरातोव ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह खासतौर पर उन बच्चों के लिए चिंतित हैं, जो यूक्रेन में संघर्ष के कारण अनाथ हो गए हैं। उन्होंने कहा, ‘हम उनका भविष्य लौटाना चाहते हैं।’

मुरातोव ने हेरीटेज ऑक्शंस द्वारा जारी वीडियो में कहा कि यह अहम है कि रूस के खिलाफ लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल दवाएं और अस्थि मज्जा प्रतिरोपण जैसी मानवीय सहायता जरूरतमंदों तक पहुंचने से न रुके। नीलामी प्रक्रिया का संचालन करने वाली हेरीटेज ऑक्शंस इससे मिलने वाली धनराशि में कोई हिस्सा नहीं ले रही है।

दिमित्रि मुरातोव को अक्टूबर 2021 में फ्री स्पीच पर उनकी पत्रकारिता के लिए शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। वह रूसी अखबार 'नोवाया गजट' के एडिटर-इन-चीफ थे, लेकिन पुतिन सरकार की कार्रवाई की वजह से इसी साल मार्च में उनके अखबार पर ताला लग चुका है। यूक्रेन पर रूस के हमले के मद्देनजर सार्वजनिक असंतोष को दबाने और पत्रकारों पर रूसी कार्रवाई के चलते यह अखबार बंद कर दिया गया था। स्वर्ण पदक से सम्मानित मुरातोव ने स्वतंत्र रूसी अखबार ‘नोवाया गजट’ की स्थापना की थी।  

मुरातोव 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्जा जमाने और यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बड़े आलोचक रहे हैं।

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राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा के रोड शो में उमड़ा जनसैलाब

नवनियुक्त राज्यसभा सदस्य व ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) के फाउंडर व मैनेजिंग डायरेक्टर कार्तिकेय शर्मा ने रविवार को अंबाला में एक रोड शो किया।

Last Modified:
Monday, 20 June, 2022
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नवनियुक्त राज्यसभा सदस्य व ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) के फाउंडर व मैनेजिंग डायरेक्टर कार्तिकेय शर्मा ने रविवार को अंबाला में एक रोड शो किया। इस दौरान रोड शो में भारी जनसैलाब उमड़ा। इस शो का आगाज हरियाणा के अंबाला शहर के माडल टाउन से हुआ। इस कड़ी में पहले उन्होंने अपने पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा और अंबाला शहर की मेयर व माता शक्तिरानी शर्मा का आशीर्वाद लिया और उसके बाद कार्तिकेय शर्मा पर काफिला अग्रसेन चौक से होता हुआ पॉलिटेक्निक चौक तक पहुंचा। इस दौरान वे जिन रास्तों से होकर गुजरे, समर्थकों ने फूलों से उनका स्वागत किया।

इसके बाद काफिला मानव चौक से कचहरी रोड की तरफ बढ़ा। राज्यसभा सदस्य के काफिले के साथ हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। उनके रोड शो में हजारों की संख्या में समर्थक मौजूद थे। मानव चौक और उसके बाद सेक्टर 8-9-10 गुरुद्वारा साहिब पर भी हरियाणा राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा का स्वागत किया गया। इस दौरान गुरुद्वारा कमेटी की तरफ से उन्हें सिरोपा और कृपाण भेंट की गई, साथ ही उन्हें श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी की तस्वीर उपहार स्वरूप दी गई। 

बता दें कि कार्तिकेय शर्मा इन दिनों निरंतर सुर्खियों में बने हुए हैं। वे अपनी जीत में सहयोग के लिए सभी नेताओं का धन्यवाद कर रहे हैं। इसी कड़ी में 18 जून को उन्होंने हरियाणा कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई से शिष्टाचार मुलाकात की। वे शनिवार को कुलदीप बिश्नोई से उनके आवास पर मिले, जहां प्रदेश की राजनीति के अलावा कई ज्वलंतशील मुद्दों पर गहन चर्चा की। राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद कार्तिकेय शर्मा निरंतर सक्रिय हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। इस दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी उनके साथ मौजूद थे।

 

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महान नृत्य वीरांगनाओं की कहानियों का हुआ अद्भुत मंचन, दर्शक हुए आनंद से सराबोर

कामाख्या कलापीठ (सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांसर्स) के तत्वावधान में आजादी के अमृत महोत्सव पर रविवार को दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ कार्यक्रम।

Last Modified:
Monday, 20 June, 2022
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कामाख्या कलापीठ (सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांसर्स) के तत्वावधान में आजादी के अमृत महोत्सव पर रविवार को दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में दर्शकों को भारत की महान शास्त्रीय नृत्य की विभूतियों की कहानियां देखने-सुनने का अवसर मिला।

कामाख्या कलापीठ संचालिका पद्मविभूषण सांसद डॉ. सोनल मानसिंह द्वारा परिकल्पित, निर्देशित व संचालित कार्यक्रम में प्रस्तुत ‘कहानी नृत्य-वीरांगनाओं की’ ने दर्शकों को आनंद से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत तंजौर की मुत्थूपर्णी की कहानी से हुई, जिसमें कुचीपुड़ी शास्त्रीय संगीतमय नृत्य से दर्शाया गया कि कैसे श्रीकृष्ण उनके नृत्य के प्रेरणा और सहभागी बने।

दूसरी कहानी केरला की तात्री की थी, जिसमें दिखाया गया कि पितृसत्तात्मक समाज के बंधनों को तोड़कर किस तरह संघर्ष करके उन्होंने नृत्य साधना शुरू की और बाद में सभी धारणाओं को तोड़ते हुए अपना स्थान बनाया। मोहिनी अट्टम की प्रस्तुति को दर्शकों ने बहुत सराहा।

तीसरी कहानी थी मैडम मेनका की। मैडम मेनका वास्तव में उपाधि थी उनका वास्तविक नाम लीलावती राय था, रशियन कलाकार अन्ना पाउलोआ के कहने पर उन्होंने भारतीय नृत्य की शुरुआत की और फिर उन्होंने देश-विदेश में अपने नृत्य से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अंतिम प्रस्तुति रुक्मिणी देवी के नाम रही। तमिलनाडु की रुक्मिणी देवी ने बैले सीखा, अन्ना पाउलोआ ने उन्हें प्रेरणा दी कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य साधना में अद्वितीय संभावनाएं हैं, उनकी खोज करो। रुक्मिणी देवी ने तत्कालीन मंदिरों की देवदासियों को अपने नृत्य का विषय बनाया। रुक्मिणी देवी की कहानी व देवदासी विषय को भरतनाट्यम के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम की प्रस्तुतियों के बीच-बीच में डॉ. सोनल मानसिंह के निर्देशन व सूत्रधार की भूमिका ने सबको बांध रखा। इस कार्यक्रम के लिए कोरियोग्राफर रुप में वनश्री राव, नीना प्रसाद, वावस्ती मिश्रा व पीटी नरेंद्रन द्वारा उनका सहयोग किया गया। पूरे कार्यक्रम में युवा कलाकारों की भाव भंगिमा, नृत्य मुद्राओं, पार्श्व संगीत,वेशभूषा और रंग-बिरंगी प्रकाश सज्जा ने कार्यक्रम के साक्षी बने कलाप्रेमियों को भाव विभोर होने पर बाध्य कर दिया।

कार्यक्रम में राज्य सभा के उपसभापति डॉ. हरिवंश नारायण सिंह, केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के प्रेजिडेंट सांसद डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे व श्रीमती सहस्रबुद्धे, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की धर्मपत्नी मल्लिका नड्डा, दिल्ली के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना व उनकी पत्नी तथा पद्मभूषण सरोज वैद्यनाथन समेत तमाम हस्तियां मौजूद रहीं। वहीं विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न देशों के राजदूत भी उपस्थित रहे। इस दौरान श्रीमती नड्डा ने कहा, ‘यह कार्यक्रम बड़ा ही जानकारी भरा था, हमारी संस्कृति का परफेक्ट मिश्रण था। देश में विभिन्न क्षेत्रों के परिवर्तन की गाथा हमने देखी, डॉ. सोनल मानसिंह एक और वीरांगना हैं, जिन्हें पांचवीं वीरांगना कहना चाहिए।‘

डॉ. हरिवंश ने कहा, ‘डॉ. सोनल मानसिंह ने जिस तरह महान नृत्यांगनाओं की गाथा, उनकी इच्छाशक्ति दिखाई, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। जब हम डॉ. सोनल मानसिंह की प्रस्तुति देखते हैं तो बाहर की दुनिया भूल जाते हैं। मस्तिष्क की दुनिया भूलकर भाव की दुनिया में खो जाते हैं।‘

केंद्रीय राज्यमंत्री एसपीएस बघेल ने कहा, ‘फिराक कहते थे कि आने वाली नस्लें फख्र करेंगी कि तुमने फिराक को देखा है। हम कहते हैं कि आने वाली नस्लें फख्र करेंगी कि हमने सोनल जी को देखा है।‘ उन्होंने कहा, प्रस्तुति देखते समय यह इंद्रप्रस्थ है या इंद्रलोक है, मुझे पता ही नहीं चला,  इंद्रलोक जैसा आनंद था, हमें अपनी विधा का सम्मान करना चाहिए।‘ 12वीं सदी के बाद के मुगल काल को याद करते हुए कहा उन्होंने कहा कि उस समय कला थोड़ी कमजोर पड़ी। उस समय के सभी गुरुओं को धन्यवाद देते हुए उन्होंने भारत की कला को अक्षुण्ण बनाने के लिए अपनी कृतज्ञता प्रकट की। साथ ही कहा कि यह लोक कला लोकभाषा लोक-संस्कृति के पुर्नजागरण का काल है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ हरिवंश, एसपीएस बघेल व दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा कलाकारों वह कोरियोग्राफर्स का सम्मान किया गया। सभी ने डॉ सोनल मानसिंह का अभिनंदन भी किया।

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फोटो पत्रकार कमल शर्मा को सम्मान, फ्रांस के इस विश्वविद्यालय ने दी डॉक्टरेट की उपाधि

जाने-माने फोटो पत्रकार कमल शर्मा को फ्रांस के एक विश्वविद्यालय ने सम्मानित किया है।

Last Modified:
Monday, 20 June, 2022
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जाने-माने फोटो पत्रकार कमल शर्मा को फ्रांस के एक विश्वविद्यालय ने सम्मानित किया है। फ्रांस स्थित इकोले सुपीरियर रॉबर्ट डी सोरबोन विश्वविद्यालय ने उनकी अपने क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धि को मान्यता देते हुए उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा है।

हालांकि, शर्मा की ख्याति खेल फोटो पत्रकारिता में है लेकिन उनके द्वारा न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर 9/11 के हुए आतंकी हमले की ली गई तस्वीरें पिछलें कई सालों से विभिन्न प्रदर्शनियों का हिस्सा बन चुकी हैं। शर्मा आतंकवादी हमले के दिन न्यूयॉर्क में ही थे और यूएस ओपन को कवर करने गए थे।

सुपीरियर रॉबर्ट डी सोरबोन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जॉन थामस प्रेडे और उपाध्यक्ष विवेक चौधरी ने 15 जून को पुनारंवा वेलनेस रिजार्ट में आयोजित 11वें अंतरराष्ट्रीय सोरबोन दीक्षांत समारोह में शर्मा को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की।

इस मौके पर शर्मा ने कहा, ‘मैं फ्रांसीसी विश्वविद्यालय से मिले सम्मान से प्रसन्न हूं। लेकिन अब मैं 60 साल का हूं और जो मुझे अधिक संतोष देता है, वह है किसी सम्मान के मिलने पर मेरे परिवार और दोस्तों को होने वाली खुशी क्योंकि उनके समर्थन के बिना मैं कोई उपलब्धि नहीं हासिल कर सकता।’

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मेधावी विद्यार्थियों का कुछ यूं हौसला बढ़ाएगा ‘भारत समाचार’

‘उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद’ (यूपी बोर्ड) की दसवीं और 12वीं कक्षाओं के लाखों विद्यार्थियों का इंतजार खत्म हो गया है।

Last Modified:
Saturday, 18 June, 2022
Bharat Samachar

‘उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद’ (यूपी बोर्ड) की दसवीं और 12वीं कक्षाओं के लाखों विद्यार्थियों का इंतजार खत्म हो गया है। दोनों कक्षाओं का परीक्षा परिणाम शनिवार को जारी हो गया है। इस परीक्षा परिणाम के जारी होने के बाद प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के लिए वरिष्ठ पत्रकार और हिंदी न्यूज चैनल ‘भारत समाचार’ के एडिटर-इन-चीफ ब्रजेश मिश्रा ने एक सराहनीय कदम उठाया है।

दरअसल, ‘भारत समाचार’ ने यूपी बोर्ड में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के स्टेट टॉपर्स को अपनी तरफ से उपहार स्वरूप टैब प्रदान करने का फैसला लिया है। प्रथम, द्वितीय और तृतीय वरीयता वाले टॉपर्स को ये टैब देने का निर्णय लिया गया है।

इस बात की घोषणा ब्रजेश मिश्रा ने अपने ट्विटर हैंडल पर की है। अपने ट्वीट में ब्रजेश मिश्रा का यह भी कहना है कि अपनी लगन, कठोर परिश्रम और साधना के साथ इन विद्यार्थियों ने छोटी उम्र में महान उपलब्धि हासिल की है।

ब्रजेश मिश्रा द्वारा इस बारे में किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

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दुश्मन देश के समर्थन में उतरा यह पत्रकार, नोबेल पदक बेचने का किया ऐलान

रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच रूस के एक बड़े पत्रकार यूक्रेन के समर्थन में उतर आए हैं।

Last Modified:
Saturday, 18 June, 2022
DmitryMuratov256

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का 100 दिनों से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन दोनों के बीच युद्ध शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच रूस के एक बड़े पत्रकार यूक्रेन के समर्थन में उतर आए हैं। इन रूसी पत्रकार का नाम है दिमित्री मुराटोव, जोकि एक नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं और मुराटोव समाचार पत्र ‘बीयर’ (Bear) के सह-संस्थापक और लंबे समय तक इसके एडिटर-इन-चीफ रहे हैं।

दिमित्री मुराटोव (Dmitry Muratov) ने अपना नोबेल शांति पदक बेचने का ऐलान किया है। अपने देश में स्वतंत्र मीडिया के उन्मूलन और युद्ध से त्रस्त यूक्रेनी शरणार्थियों के समर्थन में वे अब नोबेल पदक की नीलामी कर रहे हैं। उनका कहना है कि बहुत ही कम लोग हैं जो रूसी सैन्य अभियान का समर्थन करते हैं।

रूसी पत्रकार ने न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर’ को दिए इंटरव्यू में बताया कि मेरे देश ने एक और देश यूक्रेन पर हमला किया है। इस हमले में अब तक 15.5 मिलियन शरणार्थी हो गए हैं। हमने लंबे समय तक सोचा कि आखिर हम उनके (शरणार्थियों) लिए क्या कर सकते हैं। हमने सोचा कि हर किसी शरणार्थी को हमारी तरफ से कुछ खास देना चाहिए। साथ ही पत्रकार ने कहा कि अपने पदक की नीलामी का मतलब होगा कि उन्होंने किसी तरह उन शरणार्थियों के भाग्य के लिए कुछ किया है, जिन्होंने इस युद्ध के दौरान अपने स्मृति चिह्न और पूरा अपना अतीत खो दिया।

पत्रकार मुराटोव ने आगे कहा कि अब वे (रूस) उनका (शरणार्थियों) भविष्य छीनना चाहते हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका भविष्य सुरक्षित रहे। सबसे महत्वपूर्ण बात जो हम इस युद्ध के दौरान कहना और दिखाना चाहते हैं, वह यह है कि मानवीय एकजुटता बहुत ज्यादा आवश्यक है।

बता दें कि पुरस्कार समिति के सहयोग से मुराटोव विश्व शरणार्थी दिवस यानी 20 जून को अपना यह पदक नीलाम करेंगे। मुराटोव ने अपना यह पुरस्कार छह नोवाया गजेटा पत्रकारों (Novaya Gazeta journalists) को समर्पित किया था, जिनकी रिपोर्टिंग के दौरान हत्या कर दी गई थी। इनमें से कुछ राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे हाई-प्रोफाइल आलोचक में से एक थे।

गौरतलब है कि रूस के राष्ट्रपति कार्यालय 'क्रेमलिन' की खुलकर आलोचना करने वाला ‘बीयर’ (Bear) समाचार पत्र 1993 में पूर्व सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव के नोबेल शांति पुरस्कार के पैसे से स्थापित किया गया था। सालों तक इस समाचार पत्र ने असहमतिपूर्ण मीडिया पर कड़े प्रतिबंधों का उल्लंघन किया। अंततः मार्च में इसने अपनी ऑनलाइन और प्रिंट की सेवाओं को बंद किया है। 

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महिला सहकर्मी ने पत्रकार पर लगाए गंभीर आरोप, पहुंचा हवालात

केरल के कोच्चि में शुक्रवार को एक पत्रकार की गिरफ्तारी का मामला सामने आया है।

Last Modified:
Saturday, 18 June, 2022
Journalist Arrest

केरल के कोच्चि में शुक्रवार को एक पत्रकार की गिरफ्तारी का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने पत्रकार की महिला सहकर्मी की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार किया है।  शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पत्रकार ने राज्य की एक महिला मंत्री से संबद्ध एक फर्जी अश्लील वीडियो बनाने के लिए उस पर दबाव डाला था।

दरअसल, 27 मई को कोच्चि शहर पुलिस आयुक्त के पास दर्ज कराई गई अपनी शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि 'क्राइम नंदकुमार' के नाम से भी पहचाने जाने वाले पत्रकार टी.पी नंदकुमार नामक पत्रकार ने राज्य की एक महिला मंत्री से संबद्ध एक फर्जी अश्लील वीडियो बनाने के लिए उस पर दबाव डाला था। महिला का आरोप है कि नंदकुमार ने बात मानने से इनकार करने पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और परेशान करते हुए धमकी भी दी। महिला सहकर्मी की शिकायत के आधार पर केरल के कोच्चि में पत्रकार को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

वहीं, पुलिस ने कहा कि पत्रकार के खिलाफ अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 509 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द, भाव-भंगिमा का इस्तेमाल करना या हरकत करना), 294 बी (अश्लील हरकत करना) और 506 (आपराधिक भयादोहन के लिए दंड) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि पत्रकार पर लगाए गए आरोपों के संबंध में साक्ष्य एकत्र करने के लिए उसके कार्यालय की तलाशी ली गई।

कोच्चि साइबर अपराध शाखा ने महिला मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में छह महीने पहले उसे गिरफ्तार किया था।

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