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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार-स्तंभकार नगीनदास सांघवी, 100 साल की उम्र में निधन
वयोवृद्ध गुजराती पत्रकार, स्तंभकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नगिनदास सांघवी का रविवार को सूरत में निधन हो गया
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
वयोवृद्ध गुजराती पत्रकार, स्तंभकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नगिनदास सांघवी का रविवार को सूरत में निधन हो गया। वह 100 वर्ष के थे और अस्थमा से पीड़ित थे। उन्हें पिछले कुछ दिनों से खांसी और सांस लेने की समस्या में दिक्कत हो रही थी।
न केवल गुजरात, बल्कि देश के जाने-माने नाम वरिष्ठ पत्रकार नागिनदास सांघवी को वर्ष 2019 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पद्मश्री नगिनदास सांघवी जितने ज्ञानी थे, उतने ही सरल स्वाभाव के थे। लोग उन्हें नागिन बापा के उपनाम से संबोधित करते थे। उन्होंने ‘चित्रलेखा’, ‘गुजरात मित्र’, ‘दिव्यभास्कर’ जैसे अखबारों में भी नियमित रूप से लिखा।
10 मार्च, 1920 को भावनगर में जन्म नगिनदास संघवी की शिक्षा दीक्षा वही हुई थी। उन्होंने राजनीति विज्ञान का अध्ययन किया था और मुंबई के मीठीबाई कॉलेज में राजनीति विज्ञान के प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए। राजनीतिक आलोचना के विषय पर वे जिस स्पष्टता के साथ बोल सकते हैं वह गुण शायद ही आज के लेखकों में पाया जाता है। उन्होंने 1962 में कॉलम लिखना शुरू किया और यह पिछले हफ्ते तक जारी रहा। उन्होंने मोरारी बापू के साथ भी काम किया है और गीता, राजनीति, नरेंद्र मोदी सहित कई जटिल विषयों पर किताबें लिखी हैं, जो पाठकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। उन्होंने महात्मा गांधी, गुजरात और अन्य विषयों पर कई किताबें लिखी थीं।
देश के प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट करके नगीनदास सांघवी को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने गुजराती में ट्विट करके लिखा, ‘श्री नगिनदास संघवी एक प्रबुद्ध लेखक-विचारक थे। उनके लेख और किताबें इतिहास और दर्शन की समझ और राजनीतिक घटनाओं का विश्लेषण करने की असाधारण क्षमता का परिचय देती हैं। उनकी मृत्यु से दुखी हूं। शोक संतप्त परिवार और उनके बड़े पाठकों को सांत्वना … ओम शांति !!’
उनकी बहुचर्चित किताबों में ‘रामायण’, ‘महात्मा गांधी’, ‘सरदार पटेल’ और ‘नरेंद्र मोदी’ शामिल हैं। विशेष अध्ययन के आधार पर उन्होंने ‘योग का इतिहास’ और ‘गीता विमर्श’ और ‘महामानव कृष्ण’ सहित कुल 18 किताबें लिखी और 29 परिचय पुस्तिकाएं लिखी।
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