कैलाश सत्यार्थी की इस पुस्तक से नई सभ्‍यता का शास्‍त्र रचा जा सकता है: रामबहादुर राय

इंदिरा गांधी राष्ट्री य कला केंद्र की ओर से नोबेल शांति पुरस्कारर से सम्माानित कैलाश सत्यार्थी की पुस्तिक ‘कोविड-19 सभ्याता का संकट और समाधान’ पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 13 February, 2021
Last Modified:
Saturday, 13 February, 2021
Seminar

इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय कला केंद्र की ओर से नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी की पुस्‍तक ‘कोविड-19 सभ्‍यता का संकट और समाधान’ पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। 12 फरवरी को ऑनलाइन रूप से हुई इस परिचर्चा की अध्‍यक्षता इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय कला केंद्र के अध्‍यक्ष एवं जाने-माने पत्रकार पद्मश्री रामबहादुर राय ने की। परिचर्चा में स्‍वागत वक्‍तव्‍य लेखक, कलाविद एवं इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय कला केंद्र के सदस्‍य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी का रहा।

डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘कोविड-19 सभ्‍यता का संकट और समाधान’ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ‘कैलाश सत्‍यार्थी ने पूरे विश्‍व में बाल मजदूरों के अधिकारों के प्रति चेतना जगाने का काम किया है। कैलाश जी एक सिद्धहस्‍त लेखक भी हैं जो जीवन के विभिन्‍न पक्षों पर प्रकाश डालने का काम करते रहते हैं। उनकी कविताएं आपको रोमांच से भर देती हैं। आपके रोएं खड़े कर देती हैं। उनकी इस पुस्‍तक को पढ़ते हुए ऐसा बार-बार अहसास होता रहा कि हम किसी रिपोर्ताज से गुजर रहे हैं। कैलाश जी बिल्‍कुल सही कहते हैं कि लम्‍बे समय तक चलने वाला कोरोना संकट किसी जंतु या वायरस के द्वारा फैलाया संकट नहीं है, बल्कि यह सभ्‍यता का संकट है।’

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने कहा, ‘इस पुस्‍तक से नई सभ्‍यता का शास्‍त्र रचा जा सकता है। यह पुस्‍तक अपने आप में मौलिक है। मौलिक इस अर्थ में है कि कोरोना को लेकर जो षड्यंत्रकथाएं रची जा रही हैं, उनसे दूर जाकर यह बात करती है। यह पुस्‍तक भारत की नेतृत्‍वकारी भूमिका का भी प्रमाण है। कैलाश सत्‍यार्थी की पहचान है कि वे सत्‍य के खोजी हैं जो इस पुस्‍तक में भी दिखती है। इस पुस्‍तक में विचार की अमीरी के सूत्र छिपे हैं, जिसे लोगों को यदि समझाया जाए तो पुस्‍तक की सार्थकता बढे़गी।’ कोरोना महामारी और उससे उपजे संकट के संदर्भ में रामबहादुर राय ने कहा कि अभी अमावस की रात जरूर है, लेकिन यह पुस्‍तक हमें पूर्णिमा के चांद का भी आश्‍वासन देती है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि व राज्‍यसभा सदस्य सोनल मानसिंह का कहना था, ‘कैलाश जी की पुस्‍तक को छापकर प्रभात प्रकाशन ने अपने प्रकाशन में एक रत्‍नमणि जोड़ने का काम किया है। यह पुस्‍तक गागर में सागर है। कोरोना काल के दौरान अपने घरों के अंदर घुट-घुटकर रहने को मजबूर लोगों में जो एक मानसिक विकृति आ गई है, उसके प्रभाव की कैलाश जी अपनी पुस्‍तक में सम्‍यक व्‍याख्‍या करते हैं और साथ ही समाधान भी पेश करते हैं।’

इस मौके पर कैलाश सत्‍यार्थी ने कहा, ‘करुणा सकारात्‍मक, रचनात्‍मक सभ्‍यता के निर्माण का आधार है। करुणा में एक गतिशीलता है। एक साहस है और उसमें एक नेतृत्‍वकारी क्षमता भी है। करुणा एक ऐसी अग्नि है जो हमें बेहतर बनाती है। जब हम दूसरे को देखते हैं और उसके प्रति हमारे मन में एक जुड़ाव का भाव पैदा होता है, तो वह सहानुभूति है। जब हम महसूस करते हैं‍ कि दूसरे का दुख, दर्द हमारी परेशानी है, तब वह संवेदनशीलता हो जाती है। लेकिन बिल्‍कुल अंदर का जो तत्‍व है वह है करुणा। यानी दूसरे के दुख-दर्द को अपना दुख-दर्द महसूस करके उसका निराकरण ठीक वैसे ही करें, जैसे हम अपने दुख-दर्द का करते हैं। महामारी से पीड़ित वर्तमान में दुनिया की जो स्थिति हो गई है, उससे निजात करुणा ही दिला सकती है। इसलिए करुणा का वैश्‍वीकरण समय की जरूरत है।  

सुप्रसिद्ध गीतकार एवं सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्‍म सर्टिफिकेशन के अध्‍यक्ष प्रसून जोशी ने कैलाश सत्यार्थी के दार्शनिक पक्ष को इंगित करते हुए कहा, ‘इस पुस्‍तक को पढ़ते हुए मेरा विश्‍वास पुख्‍ता हो गया कि उन्‍होंने उसी विषय को उठाया है, जिस पर मैं सोच रहा था कि उन्हें उठाना चाहिए। कैलाश जी कोविड काल को व्‍यापक दृष्टिकोण से देखते हैं। उन्‍होंने सारे विषयों को करुणा केंद्रित कर दिया है। करुणा हमारे समय का मर्म है। कैलाश जी किताब के जरिये जिन सवालों को उठाते हैं, वे मनुष्‍य की ऐसी मूल समस्‍याएं हैं, जो कल भी थीं, आज भी हैं और कल भी रहेंगी।’ प्रसून जोशी ने इस मौके पर इस पुस्तक से एक कविता का भी पाठ किया।

वहीं, सुप्रसिद्ध लेखक एवं पूर्व राजनयिक डॉ. पवन के वर्मा का कहना था, ‘महामारी के दौर में गहन चिंतन को दर्शाती यह पुस्‍तक बहुत ही प्रासंगिक है। इस महामारी ने मध्‍यवर्ग को आत्‍मचिंतन करने का एक अवसर उपलब्‍ध कराया है। कैलाश जी जिस करुणा, कृतज्ञता, सहिष्‍णुता और उत्‍तरदायित्‍व की बात करते हैं, लोग अगर उसका पालन करने लगें तो उन्‍हें पूर्ण सुख (टोटल हैप्‍पीनेस) की प्राप्ति होगी। हमारे जैसे मध्‍यवर्गीय लोगों को करुणा, कृतज्ञता और उत्‍तरदायित्‍व जैसे मूल्‍यों को अपने जीवन में ज्‍यादा उतारने की जरूरत है, क्‍योंकि ये कमी हमसे ज्‍यादा किसी में नहीं है। इसको हमने कोरोना काल के दौरान घर लौटते दिहाड़ी मजदूरों के प्रति संवेदनहीन होकर दर्शा दिया है। पुस्‍तक की महत्‍ता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि कैलाश जी को इसका दूसरा खंड भी लिखना चाहिए।’

मशहूर लेखक एवं नेहरू सेंटर, लंदन के निदेशक अमीश त्रिपाठी ने कहा, ‘कैलाश जी ने बहुत महत्‍वपूर्ण विषय उठाया है। कोरोना के संदर्भ में ज्‍यादा चर्चा स्‍वास्‍थ्‍य और आर्थिक संकट को लेकर होती है। लेकिन लोगों के दिल और दिमाग पर उसका जो मानसिक प्रभाव पड़ा है वह सालों नहीं बल्कि दशकों तक नहीं मिटने वाला। कैलाश जी जैसे महान बुद्धिजीवी ने उसके मानसिक और आध्‍यात्मिक पक्ष को पकड़ा है जो दिल को छू जाता है। पुस्‍तक की यही सार्थकता है।’ 

सुप्रसिद्ध राजनीतिज्ञ एवं राज्‍यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कैलाश जी ने पुस्‍तक में सभ्‍यता की चुनौतियां और समाधान दोनों पर बहुत बढि़या विचार किया है। सुधांशु त्रिवेदी ने कुछ नया करने का उपदेश देने वालों को आड़े हाथों लिया और कहा कि वे नया क्‍या कर लेंगे? जबकि हमारे पास पहले से ही कुछ ऐसी अनमोल चीजें हैं जो हमेशा नई, सदाबहार, कालजयी और प्रासंगिक रहेंगी।

परिचर्चा का संचालन इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय कला केंद्र के डीन एवं कलानिधि के विभागाध्‍यक्ष प्रो. रमेशचंद्र गौड़ ने किया, जबकि धन्‍यवाद ज्ञापन प्रभात प्रकाशन के प्रभात ने किया। इस पूरी परिचर्चा को आप यहां देख सकते हैं-

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कोरोना को नहीं हरा सके वरिष्ठ पत्रकार बी रामकृष्ण, ली आखिरी सांस

वरिष्ठ पत्रकार बी रामकृष्ण का बुधवार को हैदराबाद के गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे कोरोना वायरस से संक्रमित थे। 

Last Modified:
Thursday, 06 May, 2021
B Ramakrishna 57

वरिष्ठ पत्रकार बी रामकृष्ण का बुधवार को हैदराबाद के गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे कोरोना वायरस से संक्रमित थे। 

वरिष्ठ पत्रकार कोटा नीलिमा के मुताबिक, हैदराबाद के चार अस्पतालों ने उन्हें एडमिट करने से इनकार दिया, जिसके चलते समय पर उन्हें अस्पताल में बेड नहीं मिला सका और इस वजह से उनका निधन हो गया। 

बी रामकृष्ण आध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के बोब्बिली नगर के रहने वाले थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटी हैं।

उन्होंने ईनाडु, आंध्र ज्योति, ईटीवी, एनटीवी और डेक्कन क्रॉनिकल में काम किया था। 

पत्रकार बिरादरी और हैदराबाद प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने रामकृष्ण की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया और इस दुख की घड़ी में उनके परिजनों को शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

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कोरोना को मात देने के बाद भी वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडेय नहीं जीत सके मौत से जंग

सहारा न्यूज नेटवर्क में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडेय का मंगलवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया।

Last Modified:
Wednesday, 05 May, 2021
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सहारा न्यूज नेटवर्क में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडेय का मंगलवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे कोरोना से संक्रमित थे और करीब 20 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। पांच दिन पहले ही उन्हें वेंटिलेटर से हटाया गया था और इस बीच उन्होंने कोरोना को भी मात दे दी थी, जिसकी वजह से उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गयी थी। लेकिन इसके बाद भी वे मौत से जिंदगी की जंग हार गए।

उन्होंने अपने अंतिम ट्वीट के जरिए, बीमार होने की जानकारी भी साझा की थी-

 

उनके निधन की खबर सुनकर मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कई वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने अनुभव साझा किए-

वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडेय ने सहारा न्यूज नेटवर्क के साथ बीते वर्ष जनवरी में दूसरी बार अपनी पारी की शुरुआत की थी। वे हिंदी में 'सहारा रिसर्च फाउंडेशन' के हेड के रूप में काम कर रहे थे। उत्तर प्रदेश में बलिया जिले के मूल निवासी अरुण पांडेय को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का 30 वर्षों से भी ज्यादा का अनुभव था। इस दौरान वह कई मीडिया संस्थानों में अहम जिम्मेदारी निभा चुके थे।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट अरुण पांडेय ने अपने पत्रकारिता सफर की शुरुआत वर्ष 1991 में ‘सहारा मीडिया’ के अखबार ‘हस्तक्षेप’ से की थी। यहां उन्होंने लंबी पारी खेली थी। वर्ष 2003 में उन्होंने सहारा के टीवी चैनल का रुख कर लिया था और करीब चार साल यहां रहे थे।

इसके बाद वर्ष 2007 में अरुण पांडेय ने ‘सहारा’ को अलविदा कह दिया था और ‘न्यूज 24’ के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी थी। यहां एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर और असाइमेंट हेड के तौर पर लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद वर्ष 2015 में बतौर एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर (असाइनमेंट) वह ‘इंडिया टीवी’ के साथ जुड़ गए थे।  

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कोरोना ने छीन ली युवा पत्रकार संजीव कुमार गुप्ता की जिंदगी

कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आकर युवा पत्रकार संजीव कुमार गुप्ता का निधन हो गया है।

Last Modified:
Wednesday, 05 May, 2021
Sanjeev Kumar Gupta

कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आकर युवा पत्रकार संजीव कुमार गुप्ता का निधन हो गया है। करीब 39 वर्षीय संजीव कुमार गुप्ता लोकमत, दिल्ली के राष्ट्रीय ब्यूरो में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर कार्यरत थे।

कुछ दिनों पूर्व संजीव कुमार गुप्ता कोविड-19 की चपेट में आ गए थे और करीब पांच दिनों से दिल्ली स्थित आइटीबीपी कोविड अस्पताल में भर्ती थे, जहां पर उन्होंने आखिरी सांस ली। संजीव कुमार गुप्ता के परिवार में पत्नी, दो बेटियां और बुजुर्ग माता-पिता है। उनकी बेटियां कक्षा प्रथम में पढ़ती हैं।

संजीव कुमार गुप्ता के निधन पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, पीआईबी मान्यता प्राप्त पत्रकारों की संस्था प्रेस एसोसिएशन के अलावा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया,  मैथिल पत्रकार ग्रुप, दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन, एनयूजे, दिल्ली सरकार प्रेस एक्रीडिटेशन कमेटी सहित कई संस्थाओं ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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समाज को उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराना भी मीडिया का ही दायित्व है: प्रो. के.जी सुरेश

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर ‘कोविड-19 महामारी में पत्रकारों की भूमिका’ पर एमसीयू में हुआ विशेष व्याख्यान का आयोजन

Last Modified:
Tuesday, 04 May, 2021
MCU

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर सोमवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश दुबे का कहना था कि पत्रकारों को फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स मानकर प्राथमिकता के साथ टीका लगवाना चाहिए। एडिटर्स गिल्ड भी यह मांग कर रहा है। अजरबेजान जैसे छोटे देश ने अपने यहां 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी पत्रकारों को अनिवार्य रूप से नि:शुल्क टीका लगाने का निर्णय लिया है।

 ‘कोविड-19 महामारी में पत्रकारों की भूमिका’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में प्रकाश दुबे का यह भी कहना था, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पत्रकारों के उपचार की पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं की गईं। पत्रकार लगातार फील्ड रिपोर्टिंग कर रहे हैं, ऐसे में उनके लिए कोविड जांच की सुविधा नि:शुल्क या न्यूनतम दरों पर होनी चाहिए।’ दुबे ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के अनुसार 76 देशों में 1184 पत्रकार कोरोना के शिकार हुए हैं, जबकि भारत में अब तक 56 पत्रकार अपना काम करते हुए कोरोना से संक्रमित होकर अपनी जान दे चुके हैं। दुबे ने कहा कि पत्रकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। जब उन्हें लगे कि सरकारों से कहीं चूक हो रही है, तब पत्रकारों का दायित्व बन जाता है कि वे सरकारों को आईना दिखाएं।

वहीं, पत्रकार कोटा नीलिमा की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एक अप्रैल 2020 से 28 अप्रैल 2021 के बीच 101 से अधिक पत्रकारों की मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जानबूझकर भ्रम फैलाया गया कि समाचारपत्रों से वायरस फैलता है, जबकि सच यह है कि समाचारपत्र के माध्यम से कोविड का वायरस नहीं फैलता है। दुनिया में ऐसा कोई मामला नहीं है, जिससे यह पता चलता हो कि कोई व्यक्ति समाचारपत्र पढऩे से संक्रमित हुआ हो।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि हम (पत्रकार) जितनी आत्मालोचन करते हैं, उतना अपना मूल्यांकन किसी दूसरे पेशे के लोग नहीं कर पाते हैं। अन्य क्षेत्र के लोग भी अपना मूल्यांकन करें, तब देश की तस्वीर बदल सकती है। नई पीढ़ी को यह कतई नहीं सोचना चाहिए कि समूची पत्रकारिता बिक गई है। हमें अपने पेशे की प्रतिष्ठा स्वयं ही बनानी होगी। अपने पेशे के प्रति नकारात्मक सोच रखना ठीक नहीं है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की आलोचना करने के साथ ही समाज को आत्मावलोकन के लिए मजबूर करना भी मीडिया का काम है। समाज को उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराना भी हमारा दायित्व है। लॉकडाउन सिर्फ सरकार ही क्यों करे, हमें आत्मानुशासन का पालन क्यों नहीं करना चाहिए? उन्होंने बताया कि सरकार के साथ संवाद करते हुए उन्होंने भी पत्रकारों को प्राथमिकता के साथ वैक्सीन लगाने की मांग की थी।

इससे पूर्व विषय प्रवर्तन करते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अध्यक्ष डॉ. श्रीकांत सिंह ने कहा कि कोरोना संक्रमण के विरुद्ध रणभूमि में भारतीय पत्रकारों ने फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स की भूमिका निभाते हुए अपना बलिदान तक दिया है। पत्रकारों ने अपने जीवन की चिंता न करते हुए आम लोगों तक जरूरी और आवश्यक सूचनाएं पहुंचाई हैं। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. राखी तिवारी ने किया और आभार ज्ञापन प्रभारी कुलसचिव प्रो. पवित्र श्रीवास्तव ने किया।

यूनिसेफ के सहयोग के युवाओं के लिए ऑनलाइन कार्यक्रम आज:

एमसीयू में 4 मई को सुबह 11:00 बजे से युवाओं में कोविड-19 के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में यूनिसेफ मध्यप्रदेश की प्रमुख और एम्स भोपाल के निदेशक सहित अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल होंगे।

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पत्रकार की मौत के बाद जब किसी ने नहीं ली सुध, पुलिस ने निभाया अपना फर्ज

कोरोनावायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों में इस बीमारी को लेकर काफी खौफ है।

Last Modified:
Saturday, 01 May, 2021
Chandan54

कोरोनावायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों में इस बीमारी को लेकर काफी खौफ है। आलम यह है कि कई स्थानों पर कोरोना से परिवार के किसी सदस्य की मौत होने पर परिजनों द्वारा शव को लावारिस छोड़े जाने की खबरें भी पढ़ने को मिल रही हैं।

 कुछ ऐसा ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उस समय देखने को मिला, जब पत्रकार चंदन प्रताप सिंह के निधन के बाद उन्हें अंतिम विदाई देने न घर का कोई सदस्य पहुंच पाया और न ही किसी पत्रकार संगठन ने सुध ली। ऐसे में चंदन प्रताप सिंह का शव करीब तीन दिनों तक पड़ा रहा।

इसके बाद मकान मालिक की सूचना पर पुलिस आगे आई और अपना फर्ज निभाते हुए चंदन सिंह का अंतिम संस्कार कराया। यही नहीं, गोमतीनगर थाने के स्टाफ एसआई दयाराम साहनी, अरुण यादव, राजेंद्र बाबू और प्रशांत सिंह ने पार्थिव देह को कंधा देकर बैकुंठ धाम, लखनऊ पहुंचाया। सोशल मीडिया पर पुलिस के इस कदम की लोगों ने सराहना की है और तमाम पत्रकार संगठनों को आड़े हाथ लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चंदन कोरोना से संक्रमित थे। उन्हें लखनऊ के गोमतीनगर में अपने कमरे में मृत पाया गया, जहां वह किराए पर अकेले रहते थे। बताया गया कि चंदन सिंह के फोन से उनके परिजन से संपर्क करने की कोशिश की गई। उनके किसी रिश्तेदार से बात भी हुई, लेकिन उन्होंने लखनऊ पहुंचने में असमर्थता जताई।

चंदन प्रताप सिंह पुत्र एनपी सिंह, वरिष्ठ टीवी पत्रकार (दिवंगत) एसपी सिंह के भतीजे थे। चंदन प्रताप सिंह ने न्यूज एक्सप्रेस, टोटल टीवी और न्यूज 17 जैसे संस्थानों में काम किया था। फिलहाल, वह लखनऊ के गोमतीनगर में एक वेब पोर्टल में काम करते थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चंदन माता-पिता की मौत पर भी अपने घर नहीं गए थे। इसके अलावा कई अन्य मनभेदों के चलते परिवार ने उनके साथ अपने सारे संबंध तोड़ लिए थे।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार एम.ए. जोसफ, राज्यपाल-सीएम ने दी श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार एम.ए. जोसफ का गुरुवार की सुबह हार्टअटैक से निधन हो गया। वे रायपुर में जाना-पहचाना नाम थे।

Last Modified:
Friday, 30 April, 2021
ma-josheph545

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार एम.ए. जोसफ का गुरुवार की सुबह हार्टअटैक से निधन हो गया। वे रायपुर में जाना-पहचाना नाम थे। लंबे समय से पत्रकारिता से जुड़े जोसफ ने कई अखबारों में अपनी सेवाएं दी। वे अपनी तेज-तर्रार पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे। दैनिक ‘नवभारत’से लंबे अरसे तक वह जुड़े रहे। राज्य निर्माण आन्दोलन में भी अपनी लेखनी से अहम भूमिका निभाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार सुबह नहाने के बाद उन्हें पसीना आया और उनकी मौत हो गई। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य के वरिष्ठ पत्रकार एम.ए.जोसफ के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

राज्यपाल ने जारी शोक संदेश में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

वहीं, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी वरिष्ठ पत्रकार जोसफ के निधन पर दुख व्यक्त किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि एमए जोसफ छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार थे। छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में एमए जोसफ के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि जोसफ के परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दें और दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने जोसफ के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जोसेफ बहुत ही वरिष्ठ सरल सहज मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। उनके कलम से उनकी अलग ही पहचान रही। उनके निधन से पत्रकारिता जगत के साथ-साथ प्रदेश के लिए अपूर्णीय क्षति है। ईश्वर दुख की इस घड़ी में परिवारजनों को सहनशक्ति एवं दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे।

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SC ने पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की याचिका यूपी सरकार को दिया ये आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कोरोना के इलाज के संबंध में की गई एक याचिका पर यूपी सरकार को इस मामले में आदेश दिया है

Last Modified:
Thursday, 29 April, 2021
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सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कोरोना के इलाज के संबंध में की गई एक याचिका पर यूपी सरकार को इस मामले में आदेश दिया है। हाथरस जाते वक्त गिरफ्तार किए गए सिद्दीकी कप्पन को मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए दिल्ली शिफ्ट किया जाएगा। कोर्ट ने बुधवार को सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सिद्दीकी कप्पन का इलाज दिल्ली में होगा, जब वह ठीक न हो जाए और फिर उसे मथुरा जेल में शिफ्ट किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की जमानत की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यूपी सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सिद्दीक कप्पन की जमानत का विरोध किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की कोविड रिपोर्ट नेगेटिव आई है और उसे मथुरा के अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

सरकारी वकील तुषार मेहता ने कहा कि कप्पन के पास से एक अखबार तेजस का आईडी कार्ड मिला है, जिसका पत्रकार होना बताया जा रहा है, लेकिन हकीकत ये है कि वो अखबार तीन साल पहले बंद हो गया था। कप्पन फर्जी पहचान पत्र लेकर जा हाथरस जा रहा था।

तुषार मेहता ने कोर्ट से आगे कहा कि तेजस पीएफआई का मुखपत्र है। इसके सिमी के साथ भी संबंध हैं। तेजस चरमपंथी विचारधारा को प्रश्रय देता है। ये है अखबार ओसामा बिन लादेन को शहीद बताता है। कप्पन पीएफआई का एक सक्रिय सदस्य है। कप्पन फोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पीएफआई के सदस्यों के साथ जुड़ा हुआ है और पूरे देश में इसका सम्पर्क है।

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा है कि वो 45 मिनट में बताए कि क्या गिरफ्तार पत्रकार सिद्दीक कप्पन को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली शिफ्ट किया जा सकता है? इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि इसी तरह की बीमारी वाले हजारों कैदी हैं और रही बात दिल्ली की तो दिल्ली में पहले से ही अस्पताल अपनी क्षमता से अधिक भरे हुए हैं।

इसके बाद चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट बेंच ने केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट की याचिका पर यूपी सरकार को कप्पन का यूपी से बाहर इलाज कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ठीक होने के बाद उन्हें मथुरा जेल वापस भेजा जा सकता है।

इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट यूपी सरकार से कप्‍पन के मेडिकल रिकॉर्ड जमा करने को कहा था।

केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्‍ट ने आरोप लगाया था कि कप्‍पन को अस्‍पताल में चरपाई के साथ चेन से बांधा गया है। कप्‍पन बाथरूम में फिसल कर गिर गए थे। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्‍पताल लाया गया, जहां पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव हैं। यूपी सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया था।

पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को 5 अक्टूबर को हाथरस जाते समय रास्ते में गिरफ्तार किया गया था। वह हाथरस में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई दलित युवती के घर जा रहे थे। इस युवती की बाद में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

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गाजियाबाद में वरिष्ठ पत्रकार राजू मिश्रा का कोरोना से निधन

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण के कारण गाजियाबाद में वरिष्ठ पत्रकार राजू मिश्रा का बुधवार निधन हो गया है।

Last Modified:
Thursday, 29 April, 2021
Raju Mishra

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण के कारण गाजियाबाद में वरिष्ठ पत्रकार राजू मिश्रा का बुधवार निधन हो गया है। करीब 50 वर्षीय राजू मिश्रा इन दिनों गाजियाबाद में एक अखबार में कार्यरत थे। हिंडन स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। राजू मिश्रा के परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश में इटावा के मूल निवासी राजू मिश्रा ने कोरोना के लक्षण दिखने पर खुद को घर में आइसोलेट कर लिया था। हालात बिगड़ने पर परिजनों और कुछ पत्रकारों ने राजू मिश्रा को गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद यहां से उन्हें प्राइवेट अस्पताल के लिए रेफर किया गया, लेकिन बुधवार की सुबह वह कोरोना से जिंदगी की जंग हार गए। बता दें कि राजू मिश्रा के बड़े भाई मुकेश मिश्रा भी पत्रकार थे, जिनका निधन महामारी के पहले दौर में कोविड-19 के चलते हो गया था।

विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके राजू मिश्रा के निधन पर तमाम पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर धर्मसैनम

वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर धर्मसैनम का बुधवार को हैदराबाद में निधन हो गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 April, 2021
Last Modified:
Wednesday, 28 April, 2021
Sri

वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर धर्मसैनम का बुधवार को हैदराबाद में निधन हो गया। वे 56 वर्ष के थे और कोरोना वायरस से संक्रमित थे। उन्हें इलाज के लिए दस दिन पहले ही तेलंगाना इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (TIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। 

श्रीधर, टीवी प्रड्यूसर और मां हैदराबाद ऑर्गनाइजेशन के एडिटर थे। उन्होंने तीन अंग्रेजी अखबारों और कुछ टीवी चैनल्स में काम किया था, जिनमें जैन टीवी भी शामिल था। उन्होंने TV Takes & Blend Magazines में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर भी काम किया था। उन्होंने मां हैदराबाद ऑर्गनाइजेशन के जरिए तेलंगाना आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था।

इस बीच, मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने  ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाए व्यक्त की है।

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पत्रकार सिद्दीकी कप्पन मामले में इस तरह की खबरों से एडिटर्स गिल्ड निराश, उठाई ये मांग

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सोमवार को कहा कि वह केरल के गिरफ्तार पत्रकार सिद्दीकी कप्पन के साथ किए जा रहे अमानवीय व्यवहार की खबरों से बेहद निराश है।

Last Modified:
Tuesday, 27 April, 2021
Siddiquekappan457

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने सोमवार को कहा कि वह केरल के गिरफ्तार पत्रकार सिद्दीकी कप्पन के साथ किए जा रहे अमानवीय व्यवहार की खबरों से बेहद निराश है। गिल्ड ने मांग की कि कप्पन को उचित चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराया जाए और उनके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार किया जाना चाहिए।

केरल के पत्रकार कप्पन को उत्तर प्रदेश के हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था। वह एक दलित युवती के बलात्कार एवं हत्या के मामले को कवर करने जा रहे थे। कप्पन अक्टूबर 2020 से ही हिरासत में हैं।

गिल्ड ने एक बयान में उच्चतम न्यायालय से कप्पन की गिरफ्तारी के संबंध में लंबित रिट याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया।

बयान में कहा गया कि उनकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि मथुरा के एक अस्पताल में कोविड-19 का इलाज करा रहे कप्पन को खाट से बांधकर रखा गया है और वह ना ही भोजन करने में समर्थ हैं और ना ही शौचालय का उपयोग कर पा रहे हैं।

बयान के मुताबिक, ‘यह स्तब्ध करने वाला और राष्ट्र की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है कि एक पत्रकार के साथ ऐसे अमानवीय तरीके से पेश आया जा रहा है और उनके मूल अधिकारों का हनन हो रहा है।’

कप्पन को गैर कानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था।

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