'हम समस्या केन्द्रित पत्रकारिता करते हैं,जरूरत है समाधान केन्द्रित पत्रकारिता करें'

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में ‘स्वस्थ भारत मीडिया सम्मान-2019’ से सम्मानित हुईं देश की पांच प्रतिभाएं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 October, 2019
Last Modified:
Saturday, 05 October, 2019
Award

‘दिल्ली पत्रकार संघ’ (डीजेए) के अध्यक्ष मनोहर सिंह एवं आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार प्रो. केजी सुरेश ने देश की पांच प्रतिभाओं को नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में ‘स्वस्थ भारत मीडिया सम्मान-2019’ से सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में मीडिया प्राध्यापक डॉ. रामशंकर, शिक्षक विनीत उत्पल, शोधार्थी कमल किशोर उपाध्याय, लेखक डॉ. उत्सव कुमार सिंह और प्राध्यापक प्रभांशु ओझा शामिल हैं। यह सम्मान ‘स्वस्थ भारत डॉट इन’ के पांच वर्ष पूर्ण होने के मौके पर स्वास्थ्य संबंधी विषयों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत ‘स्वस्थ भारत मीडिया’ एवं ‘स्वस्थ भारत (न्यास)’ ने प्रदान किया।

कार्यक्रम के दौरान 'स्वास्थ्य पत्रकारिता दशा एवं दिशा' विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रो. अनिल निगम, डॉ. प्रमोद कुमार, दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अमलेश राजू, वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी, रवि शंकर, डॉ. ममता ठाकुर, डॉ अभिलाषा द्विवेदी, डॉ. आनंदवर्धन, डॉ आलोक रंजन पांडेय, सुबोध कुमार, जलज कुमार, आशुतोष कुमार सिंह, प्रियंका एवं धीप्रज्ञ द्विवेदी आदि उपस्थित थे।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में दिल्ली पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनोहर सिंह ने स्वस्थ भारत डॉट इन के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर स्वस्थ भारत मीडिया की मेहनत को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य पत्रकारिता को मजबूत बनाने की आज सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में डीजेए, स्वस्थ भारत डॉट इन के साथ मिलकर पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य रिपोर्टिंग पर वर्कशॉप आयोजित करायेगा। उन्होंने कहा कि देश को स्वास्थ्य संबंधी विषयों के बारे में सूचित एवं शिक्षित करना बहुत जरूरी है। उन्होंने इस परिसंवाद में भाग ले रहे सभी वक्ताओं की बातों को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य पत्रकारिता के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।

प्रो. के.जी सुरेश ने कहा कि अभी तक हम समस्या केन्द्रित पत्रकारिता करते रहे हैं, जबकि जरूरत इस बात की है कि हम समाधान केन्द्रित पत्रकारिता करें। स्वास्थ्य की शोधपरक रिपोर्टिंग पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य रिपोर्टिंग पर प्रशिक्षण की जरूरत है। उन्होंने तमाम उदाहरणों के माध्यम से यह समझाने की कोशिश की कि किस तरह से पश्चिम से आए किसी शोध पत्र की अनुशंसाओं को हम हूबहू छाप देते हैं। जबकि कई बार बाजार के दबाव में भ्रामक एवं बाजार को लाभ पहुंचाने के लिए भी कुछ खबरों को बढ़ावा दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि विगत पांच वर्षों में स्वस्थ भारत डॉट इन ने स्वास्थ्य पत्रकारिता एवं एक्टिविजम का सार्थक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का धर्म है सूचित करना, शिक्षित करना और साथ में प्रेरित करना।

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रमोद कुमार ने न्यूज रूम में पत्रकारों की सेहत पर किए गए अपने शोध का जिक्र करते हुए कहा कि पत्रकार गंभीर तनाव में काम कर रहे हैं। बदलती तकनीक और मीडिया के बदलते प्रतिमानों के परिणामस्वरूप न तो काम के घंटे तय हैं और न ही समय पर वेतन मिल पा रहा है और न ही रोजगार की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि 85 फीसद से अधिक पत्रकार ठेके पर काम कर रहे हैं और अधिकतर पत्रकार किसी न किसी बीमारी की चपेट में हैं। उन्होंने कहा कि यदि पिछले 10 साल के दौरान हुई पत्रकारों की मौतों की गहराई से जांच की जाए तो उनकी मौत का असली कारण न्यूज रूम में पनप रहा तनाव ही मिलेगा।

उन्होंने मीडिया संस्थानों और पत्रकार संगठनों को आगाह किया कि यदि पत्रकारों में पनप रहे इन तनावों को कम करने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह मीडिया के समक्ष एक गंभीर चुनौती पेश करेगा। न्यूयार्क टाइम्स, बिजनेस इनसाइडर, और फोर्ब्स जैसे मीडिया संस्थानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन संस्थानों ने पत्रकारों का तनाव कम करने के लिए सार्थक प्रयास किए हैं और इसके उन्हें सार्थक परिणाम भी मिले हैं।

वरिष्ठ पत्रकार प्रो. अनिल निगम ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य के क्षेत्र में पत्रकारिता की अनंत संभावनाएं हैं, स्वास्थ्य के क्षेत्र में संजीदगी के साथ इससे जुड़ी समस्याओं और मुद्दों को उठाया जाना चाहिए। सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वास्थ्य विषयक जनोपयोगी योजनाओं के बारे में लोगों को ठीक से सूचित किए जाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य संबंधी तमाम योजनाएं चला रही है। लेकिन अंतिम जन तक उसकी सूचना सही समय पर नहीं पहुंच पाती है। इस दिशा में भी पत्रकारों को काम करना चाहिए।

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार रवि शंकर का कहना था कि आज पत्रकारिता का अर्थ केवल राजनीतिक पत्रकारिता से समझा जाता है। इससे स्वास्थ्य जैसे जीवन के महत्त्वपूर्ण आयाम उपेक्षित हो जाते हैं। देखा जाए तो आज स्वास्थ्य का विषय भी राजनीति से ही संचालित हो रहा है। इसलिए राजनीतिक पत्रकारों को भी स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों की सही समझ होना आवश्यक है। केवल रिपोर्टिंग करना ही पत्रकारिता नहीं होती। उदाहरण के लिए यदि कोई शोध निष्कर्ष यह बताए कि घी खाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है, तो इसकी रिपोर्ट मात्र लिखने वाला रिपोर्टर होगा, पत्रकार नहीं। पत्रकार को इसकी तह तक जाना चाहिए। इसलिए एक पत्रकार के लिए व्यापक अध्ययन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि चूंकि अपने देश में स्वास्थ्य और चिकित्सा विज्ञान की एक लंबी परंपरा रही है, इसलिए स्वास्थ्य पत्रकार के लिए व्यापक अध्ययन तो आवश्यक है ही, साथ ही उसे देश की स्वास्थ्य परंपरा की भी गंभीर जानकारी होनी चाहिए। उदाहरण के लिए देश में हड्डी वैद्यों की जो परंपरा है, वह आज के चिकित्सा विज्ञान से कहीं उन्नत है, परंतु स्वास्थ्य पत्रकारों को इसकी जानकारी नहीं होती। कैंसर और एड्स जैसे लाइलाज रोगों को ठीक करने वाले वैद्यों के बारे में भी पत्रकारों को कोई जानकारी नहीं होती। इसके अलावा आयुर्वेद के विज्ञान से भी वे परिचित नहीं हैं। ऐसे में कोई पाश्चात्य शोध कितना विश्वसनीय है, इसे जानना उनके लिए कठिन हो जाता है।

स्वस्थ भारत (न्यास) के चेयरमैन एवं स्वस्थ भारत डॉट इन के संपादक आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि यह सम्मान उन लेखकों, मीडियाकर्मियों या शोधार्थियों को दिया गया है, जिन्होंने सेहत विषयक शोध लेख, आलेख या पुस्तक लिखे हैं और गंभीरता से काम किया है. ‘स्वस्थ भारत डॉट इन’ के पांच वर्ष के उपलक्ष्य में पांच व्यक्तियों को सम्मानित किया गया है लेकिन अगले वर्ष से सिर्फ तीन व्यक्तियों को सम्मानित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सम्मान के पात्रों का चयन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया गया, जिनमें वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी, दिल्ली पत्रकार संघ के पूर्व महासचिव डॉ. प्रमोद कुमार और भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ अधिकारी ऋतेश पाठक शामिल थे।

स्वस्थ भारत मीडिया की सीइओ प्रियंका सिंह ने बताया कि ‘स्वस्थ भारत’ का मुख्य उद्देश्य देश में स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर जागरूकता लाना है। इसके लिए स्वस्थ भारत मीडिया विभिन्न तरह गतिविधियों के माध्यम से जनसमान्य के बीच पहुंचने का प्रयास कर रहा है और मुख्यतः संचार के माध्यम से इन विषयों की समझ आम नागरिकों में विकसित करने की कोशिश कर रहा है।

स्वस्थ भारत मीडिया के इस आयोजन में दिल्ली पत्रकार संघ एवं स्वस्थ भारत (न्यास) सहआयोजक के रूप में रहे, जबकि इस आयोजन में मस्कट हेल्थकेयर, ब्रेन बिहेवियर रिसर्च फाउंडेशन ऑफ इंडिया (बीबीआरएफआई), वैदेही फाउंडेशन, कॉसमॉस अस्पताल, ज्ञानबिंदु शैक्षणिक संस्थान का संस्थागत सहयोग प्राप्त हुआ। मीडिया सहयोगी के रूप में युगवार्ता साप्ताहिक, बियोंड हेडलाइंस और डायलॉग इण्डिया का साथ मिला। कार्यक्रम का मंच संचालन वरिष्ठ शिक्षाविद संजय कुमार तिवारी ने किया।

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इस कार्यक्रम के जरिये याद किए जाएंगे वरिष्ठ पत्रकार अनुज गुप्ता

पिछले दिनों अचानक घर से लापता हो गए थे अनुज गुप्ता, नौ दिसंबर को उनका शव हरिद्वार में गंग नहर पथरी पावर हाउस रानीपुर झाल से मिला था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Sunday, 15 December, 2019
Last Modified:
Sunday, 15 December, 2019
Anuj Gupta

वरिष्ठ पत्रकार और दिल्ली में ‘नवभारत’ अखबार के ब्यूरो चीफ रहे अनुज गुप्ता की याद में 17 दिसंबर को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा। यह श्रद्धांजलि सभा नई दिल्ली में रफी मार्ग स्थित कांस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के डिप्टी स्पीकर हॉल में शाम तीन से चार बजे होगी।  

यह भी पढ़ें: वरिष्ठ पत्रकार अनुज गुप्ता की रहस्यमय हालात में मौत, कल हुए थे गायब

छत्तीसगढ़ में कोरबा के मूल निवासी अनुज गुप्ता नागपुर से पब्लिश होने वाले ‘नवभारत’ अखबार के दिल्ली में ब्यूरो चीफ थे। पूर्व में वह ‘जनसत्ता’ चंडीगढ़ में भी काम कर चुके थे। पिछले दिनों अनुज गुप्ता अचानक कहीं लापता हो गए थे। नौ दिसंबर को उनका शव हरिद्वार में गंग नहर पथरी पावर हाउस रानीपुर झाल से मिला था।

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मात्र छह मिनट में वरिष्ठ पत्रकार रमेश भट्ट इस तरह कराएंगे संपूर्ण उत्तराखंड के 'दर्शन'

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट विभिन्न मंचों पर उत्तराखंड के लोकगीतों को वर्षों से गाते आए हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 13 December, 2019
Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
Ramesh Bhatt

वरिष्ठ टीवी पत्रकार और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने उत्तराखंड के एक लोकगीत को अपने सुर दिए हैं। 'जय जय हो देवभूमि' टाइटल से नए रूप में लॉन्च होने जा रहे इस लोकगीत में आपको संपूर्ण उत्तराखंड के दर्शन हो जाएंगे। इस गीत को उत्तराखंड के मशहूर लोकगायक (अब दिवंगत) गोपाल बाबू गोस्वामी ने लिखा है।  

रमेश भट्ट ने यह गीत और इसका विडियो ट्रेलर सोशल मीडिया पर शेयर किया है। ट्रेलर देखें तो पता चल जाता है कि जितने सुंदर इस गीत के बोल हैं, उतना ही सुंदर इसका चित्रण है। इस गीत में उत्तराखंड के अध्यात्म, धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन के साथ-साथ संपूर्ण उत्तराखंड के सौंदर्य को दर्शाया गया है।

पहली ही नजर में देखने और सुनने में गीत का य़ह ट्रेलर दर्शकों के दिलोदिमाग पर छा रहा है। इस गीत में उत्तराखंड के गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार बावर का बेहतरीन चित्रण है। देवभूमि के चारों धामों के साथ ही गीत में तमाम छोटे-बड़े प्रसिद्ध सिद्धपीठों और पर्यावरणीय संतुलन का भी सजीव चित्रण है। गीत में उच्च हिमालयी क्षेत्र और यहां के जीवन के अदभुत दर्शन होते हैं।

अगर आपको भी उत्तराखंड के ‘संपूर्ण दर्शन’ सिर्फ 6 मिनट में करने हैं तो आप इस गीत को जरूर देखें। तड़क भड़क और डांसिंग मूड के गीतों के इस दौर में 'जय जय हो देवभूमि' गीत जहां प्रवासी पर्वतीय लोगों को लौटने का संदेश देता है वहीं विश्व को देवभूमि उत्तराखंड के सजीव दर्शन भी कराता है। गीत में संगीत संजय कुमोला ने दिया है जबकि इसका वीडियो निर्देशन अरविंद नेगी ने किया है। गीत में अभिनय खुद रमेश भट्ट ने किया है। 

इस बारे में रमेश भट्ट का कहना है कि वे विभिन्न मंचों पर उत्तराखंड के लोकगीतों को वर्षों से गाते आए हैं, लेकिन यह पहला मौका है, जब किसी गीत को प्रोफेशनल तरीके से स्टूडियो में गाया है और इसका फिल्मांकन कर म्यूजिक इंडस्ट्री में लॉन्च किया जा रहा है।

उन्होंने गीत के रचनाकार स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी को अपना प्रेरणास्रोत बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। इसके साथ ही इस गीत को गाने की अनुमति देने के लिए उनकी धर्मपत्नी मीरा गोस्वामी का भी आभार जताया है। गीत के फिल्मांकन और सहयोग के लिए पटवाल फिल्म्स का भी शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने भरोसा जताया कि यह गीत लोगों को काफी पसंद आएगा।

आप इस गीत का ट्रेलर यहां देख सकते हैं-

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‘नैतिक मूल्यों के ढहते महल को बचाने में पत्रकार अंगद के पांव बनें’

फिरोजाबाद के जिलाध्यक्ष अखिलेश सक्सेना को आगरा मण्डल का अध्यक्ष व आलोक तनेजा को उत्तराखंड का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 11 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
Journalist Meeting

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की प्रांतीय समिति की बैठक रविवार को उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के विंध्याचल स्थित गोयनका धर्मशाला में हुई। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश के प्रत्येक जिलों के अलावा पंजाब से भी ग्रामीण पत्रकारों की भागीदारी रही।

इस मौके पर सौरभ कुमार का कहना था कि नैतिक मूल्यों के ढहते महल को बचाने में पत्रकार अंगद के पांव बनें। उन्होंने कहा कि समाज की रक्षा वही पत्रकार कर सकता है, जो खुद अपने परिवार को सशक्त तथा सुदृढ़ बनाता है। प्रदेश महासचिव देवी प्रसाद ने संगठन को मजबूत करने पर बल दिया तथा पीत पत्रकारिता से दूर रहते हुए निडर होकर सही तथ्यों को समाज के सामने लाने की बात की, वहीं पत्रकार उत्पीड़न पर एकजुट रहकर संघर्ष का आह्वान किया। इस अवसर पर फिरोजाबाद के जिलाध्यक्ष अखिलेश सक्सेना को आगरा मण्डल का अध्यक्ष बनाया गया। आलोक तनेजा को उत्तराखंड का अतिरिक्त प्रभार सोंपा गया।

कार्यक्रम में तमाम वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए, जिनमें कुछ ने अपने अनुभव, कुछ ने कतिपय घटनाओं का उल्लेख, कुछ ने पत्रकारिता क्षेत्र में खुद के योगदान की चर्चा की तो कुछ ने आदर्श पत्रकारिता एवं मूल्यों के संरक्षण तथा बदलते दौर के साथ चलने की अपील की। वक्ताओं में प्रदेश के उपाध्यक्ष शंकर देव तिवारी, कैप्टन.वीरेन्द्र सिंह, श्रवण कुमार द्विवेदी, महामंत्री डॉ केजी गुप्ता, राजेन्द्र सोनी, डॉ केजी गुप्ता, कोषाध्यक्ष उमाशंकर चौधरी,जिलाध्यक्ष गौरीशंकर सिंह के अलावा स्थानीय पत्रकारों में दैनिक जागरण के प्रभारी सतीश रघुवंशी तथा मर्द/विंध्यप्रसाद के सम्पादक सलिल पांडेय शामिल थे।

स्थानीय पत्रकारों में राजेन्द्र मिश्र 'अतृप्त' संजय दुबे, प्रदीप शुक्ल, राजू सिंह,वतन शुक्ल, रघुवर मौर्य भी उपस्थित रहे। आए हुए अतिथियों को मंडल अध्यक्ष हौशिला प्रसाद त्रिपाठी व राजेश अग्रहरि ने माल्यार्पण कर व अंग वस्त्र से सम्मानित किया। बैठक का संचालन प्रांतीय संगठन मंत्री महेन्द्र सिंह ने किया।

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प्रतिभाओं को मिली नई पहचान, इस मंच पर हुआ सम्मान

हर साल चयनित बंदियों और जेल अधिकारियों को दिए जाते हैं ये अवॉर्ड्स, इस साल तीन श्रेणियों में हुआ चयन

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 11 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
Jail Awards

मानवाधिकार दिवस (10 दिसंबर) पर लखनऊ की जिला जेल में कैदियों व जेल प्रशासन को ‘तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड्स’ से सम्मानित किया गया। जेलों के सुधार की दिशा में कार्यरत ‘तिनका तिनका’ फाउंडेशन की ओर से पेंटिंग श्रेणी में 13 बंदियों को पुरस्कार दिया गया। (इनमें चार मुख्य पुरस्कार और 9 सांत्वना पुरस्कार दिए गए) इसके अलावा जेल में विशेष काम के लिए 8 बंदियों और विशेष जेल सेवा के लिए 8 जेलकर्मियों को पुरस्कार दिया गया।

यह पुरस्कारों का पांचवा साल है। इस साल ये पुरस्कार तीन श्रेणियों- पेंटिंग, विशेष प्रतिभा और जेल प्रशासकों के लिए पुरस्कार के तहत दिए गए। इस साल छत्तीसगढ़ की बिलासपुर जेल से अजय को पेंटिंग में प्रथम पुरस्कार दिया गया है। दूसरा पुरस्कार भोपाल केंद्रीय जेल के संजय फूल सिंह को दिया गया है। तीसरा पुरस्कार उत्तर प्रदेश के दो बंदियों को दिया गया है। 56 वर्षीय निगम पंवार को सहारनपुर जिला जेल से और बरेली जिला जेल से 30 वर्षीय बंदी दिनेश कुमार को यह पुरस्कार दिया गया है।

पेंटिग में 9 सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए हैं। इस बार छत्तीसगढ़ की सेंट्रल जेल, बिलासपुर जेल को 3 पुरस्कार दिए गए हैं। 30 साल के प्रेम सिंह तिहाड़ जेल में बंद हैं। वे पहले फिजियोथेरेपिस्ट थे। 27 वर्षीय भार्गव मनसुख बुटानी गुजरात में सूरत की लाजपोर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उत्तर प्रदेश से पूनम शाक्या और अरूण राणा को भी पुरस्कार दिए गए हैं। पूनम मैनपुरी जिला जेल की बंदी है और अरूण गाजियाबाद जिला जेल में बंदी हैं। मध्य प्रदेश की भोपाल सेंट्रल जेल में बंद 42 वर्षीय सचिन राय और सेंट्रल जेल, भटिंडा के 34 वर्षीय राजा राम को भी सांत्वना पुरस्कार मिला है। राजा राम ‘तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड 2018’ में पेंटिंग की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार जीते थे।

विशेष प्रतिभा की श्रेणी में 8 बंदियों को पुरस्कार दिए गए हैं। 46 वर्षीय नवीन आहूजा तिहाड़ जेल में सजायाफ्ता बंदी हैं। जेल में रहते हुए उन्होंने बी.कॉम. की डिग्री और कंप्यूटर में निपुणता हासिल की है। वह साबुन, डिटर्जेंट, हाथ धोने का साबुन व अगरबत्ती समेत अन्य चीज़ों को बनाने में निपुण हैं। वह अन्य बंदियों को इन्हें बनाने के लिए प्रशिक्षण भी देते हैं।  25 साल की संध्या उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में सजायाफ्ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल भारत को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त कराने को आगे बढ़ाते हुए संध्या जेल में कपड़े के थैले बना रही हैं। वह बंदियों के बच्चों को भी पढ़ाती हैं।

विशेष प्रतिभा में आगरा जिला जेल के उदय स्वरूप औऱ तुहिना को तिनका तिनका जेल सुधार मॉडल से जेल रेडियो चलाने के लिए सम्मानित किया गया। वे खास तौर पर इस समारोह के लिए बुलाए गए थे। इन दोनों बंदियों ने तिनका तिनका जेल सुधार के मॉडल पर आगरा जेल में रेडियो स्थापित करने में विशेष भूमिका निभाई है।

फिरोजाबाद जिला जेल में बंद 35 वर्षीय कमलेश अपनी साथी महिला बंदियों को बीमारी और जरूरत के समय में सहायता देती हैं। 22 साल की योगेश्वरी भोपाल जेल में सजायाफ्ता हैं। वह एक योग्य मनोवैज्ञानिक हैं और वह महिला बंदियों के जीवन में सुधार लाने के लिए सकारात्मक और रचनात्मक प्रयास कर रही हैं। 28 वर्षीय चरण सिंह राजस्थान की अलवर सेंट्रल जेल में सजायाफ्ता हैं। वह सीआरपीएफ  में सब-इंस्पेक्टर हैं। वह जेल रेडियो में जॉकी भी हैं। 60 वर्षीय, उत्तम शांतराम पोतदार इन-हाउस जेल रेडियो में एक रेडियो जॉकी के रूप में काम कर रहे हैं, जिसे ‘एफएम लाई भर्री’ कहा जाता है जिसमें उन्होंने जेल सुधारों से संबंधित कई कार्यक्रमों की रचना की है।

8 जेल अधिकारियों को भी इस साल ‘तिनका तिनका’ अवार्ड दिए गए। बांदा के जेलर रंजीत कुमार सिंह, लखनऊ से संतोष कुमार सिंह, कौशांबी से बी एस मुकुंद, मैनपुरी से ब्रजेश कुमार, नारी बंदी निकेतन लखनऊ से शबनम निगार, महाराष्ट्र से समाकांत चंद्रकांत शडगे, कपूरथला से सुरिंदर पाल खन्ना, अलवर से भरत लाल मीणा को सम्मानित किया गया है। लखनऊ जिला कारागार के सुपरिटेंडेंट पी एन पांडे को विशेष जेल सेवा सम्मान दिया गया।

इस मौके पर जेलों पर वर्तिका नन्दा की किताब ‘तिनका तिनका डासना’ का भी विमोचन किया गया। वर्तिका नन्दा को 2014 में भारत के राष्ट्रपति से स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। पुरस्कार के तहत बांदा जेल में बना विशेष मोमेंटो, जेल में बने कुछ थैले, जेलों पर किताबें और एक सर्टिफिकेट दिया गया है। बंदियों को जेल की अपनी तरह की खास कॉफी टेबल बुक ‘तिनका तिनका मध्य प्रदेश’ भी दी गई है।

ये सभी पुरस्कार देश के जेलों में सुधार के लिए लंबे समय से काम कर रहीं और ‘तिनका तिनका’ की संस्थापक वर्तिका नन्दा, उत्तर प्रदेश के कारागार महानिदेशक आनन्द कुमार, उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह ने दिए। ‘तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड्स’ हर साल चयनित बंदियों और जेल प्रशासन को देश की किसी जेल में दिए जाते हैं। इस साल निर्णायक मंडल में जावेद अहमद, (महानिदेशक, एनआईसीएफएस), राम फल यादव(महानिदेशक, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) और वर्तिका नन्दा ( संस्थापक, तिनका तिनका) शामिल रहे।

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पत्रकार दंपती को बेटे के इलाज के लिए आर्थिक मदद की जरूरत  

डॉक्टरों ने बच्चे के ऑपरेशन पर करीब साढ़े आठ लाख रुपए का खर्च बताया है, अगले महीने दिल्ली में होना है ऑपरेशन 

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 11 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
Alok Anjali

तमाम मीडिया संस्थानों में काम कर चुके पत्रकार दंपती आलोक वाणी और अंजलि तिवारी को अपने बेटे विराट के इलाज के लिए आर्थिक सहयोग की जरूरत है। दरअसल, विराट की उम्र अभी महज 14 महीने है और उसके फेफड़ों में गांठें (Systs) हैं। फिलहाल विराट की एक ही किडनी काम कर रही है। गांठों से प्रभावित फेफड़े के एक हिस्से को निकाला जाना है, ताकि यह आगे न फैलें। इसके लिए डॉक्टरों ने विराट का ऑपरेशन बताया है। 

इन दिनों मध्य प्रदेश के इंदौर में रह रहे अंजलि और आलोक को विराट की सर्जरी दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में करानी है। विराट की सर्जरी जनवरी 2020 के पहले हफ्ते में होनी है, लेकिन इसमें करीब साढ़े आठ लाख रुपए का खर्च आएगा। ऐसे में आलोक ने बेटे के इलाज के लिए आर्थिक रूप से मदद जुटाने के लिए एक कैंपेन चलाया है, ताकि उसका इलाज सही से हो सके और आर्थिक समस्या आड़े न आए। उन्होंने फंड जुटाने के लिए ‘मिलाप’ प्लेटफॉर्म का सहारा भी लिया है और इस बारे में पूरी जानकारी दी है।

इसके अलावा इच्छुक व्यक्ति अकाउंट नंबर : 20120475515, IFSC code: SBIN0003432 पर आर्थिक मदद कर सकते हैं। आलोक वाणी के नाम से ये खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का है। यूपीआई- alokvani@oksbi के द्वारा सीधे बैंक खाते में राशि जमा कराई जा सकती है। हालांकि, विराट की मदद के लिए कई लोग आगे आ रहे हैं, लेकिन अभी यह राशि पर्याप्त नहीं हुई है। आलोक से 9893111536 और अंजलि से 9479638659 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं।

बता दें कि आलोक और अंजलि ने ‘डीडी न्यूज’ के साथ पत्रकारिता की शुरुआत की थी। इसके बाद दोनों लंबे समय तक ‘इंडिया टीवी’, दिल्ली में कार्यरत रहे। फिर यहां से अपनी पारी को विराम देकर वे ‘सीएनबीसी’ में काम करने लगे। इसके बाद आलोक ने ‘नई दुनिया’ और ‘पीपुल्स समाचार’ के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई और फिर ‘विटीफीड’ से होते हुए ‘घमासान डॉट काम’ के साथ जुड़ गए। हालांकि, यहां से भी अब उन्होंने बाय बोल दिया है, लेकिन विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए वह अब भी लिख रहे हैं। वहीं, अंजलि ने ‘पीपुल्स समाचार’ आदि मीडिया संस्थानों में काम करने के बाद अब पूरी तरह घर की जिम्मेदारी संभाल ली है। फिलहाल आलोक व अंजलि बेटे विराट के ऑपरेशन के लिए धनराशि जुटाने में लगे हुए हैं।

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'टीवी पत्रकारिता में आ रही विश्वसनीयता की कमी को लेकर हमें समझनी होगी ये बात'

सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च एंड एनालिसिस की ओर से आयोजित ‘मीडिया मंथन 2019’ में वरिष्ठ पत्रकारों ने रखे अपने विचार

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 10 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 10 December, 2019
Media Manthan

नई दिल्ली के न्यू महाराष्ट्र सदन में मंगलवार को ‘मीडिया मंथन 2019’ का आयोजन किया गया। ‘सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च एंड एनालिसिस’ (CMRA) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में तमाम पत्रकारों और दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कई कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ ही आईआईएमसी, माखनलाल चतुर्वेदी,  श्रीनगर गढ़वाल यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने भी शिकरत की। 

 सम्मेलन के मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल का कहना था कि वर्तमान में मीडिया व्यावसायीकरण के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में वह सामाजिक उत्तरदायित्वों को पीछे छोड़ता जा रहा है। उनका कहना था कि किसी भी परिस्थिति में पत्रकार और पत्रकारिता के विद्यार्थियों को अपने सकारात्मक विचारों और राष्ट्रीयता की सोच को कभी मरने नहीं देना चाहिए। नागरिक संशोधन विधेयक के बारे में उनका कहना था कि विरोधी ताकतों द्वारा इस मुद्दे पर आम जनता को गुमराह करके धर्म के नाम पर बांटा जा रहा हैं। इसके साथ ही उन्होंने व्यावसायिक मीडिया के दुष्परिणामों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में खोजी पत्रकारिता दम तोड़ रही है।

पहले सत्र के वक्ता उमेश उपाध्याय ने बताया कि वर्तमान में टेलिविजन पत्रकारिता सिर्फ डिबेट तक सीमित होकर रह गई है। मीडिया ने अपने सिद्धांतों को भुलाकर समाज में नकारात्मक भाव को बढ़ाने वाली सामग्री को ज्यादा महत्व देना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में टीवी पत्रकारिता की विश्वसनीयता में कमी आयी है।

दूरदर्शन के वरिष्ठ संपादक अशोक श्रीवास्तव का कहना था कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों में वैचारिक मंथन होना बहुत जरूरी है। आज की मुख्य धारा की मीडिया का स्वरूप अराजकवादी हो चुका है। टीवी चैनल्स के डिबेट कार्यक्रमों में हिन्दू मुस्लिम का मुद्दा प्रमुखता से दिखाया जा रहा है। इस तरह की डिबेट का मकसद सिर्फ टीआरपी को बढ़ाना है। इसके चलते तमाम मीडिया चैनल्स झूठे तथ्यों को जनता को दिखाकर गुमराह करने का कार्य कर रहे हैं।  

‘ऑर्गेनाइजर’ के संपादक व वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर ने ब्रेकिंग न्यूज की अवधारणा को समाज के लिए घातक बताया। उनका कहना था कि टीआरपी के कारण मीडिया तथ्यों की जांच किए बिना ही समाचारों को दिखा रहा है। इस कारण फेक न्यूज तेजी से फैल रही है। उन्होंने मीडिया को सकारात्मक दिशा में कार्य करने की सलाह दी ।

द्वितीय सत्र के वक्ता विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने  संस्कृति को जीवन मूल्य बताते हुए कहा कि वर्तमान में भारतीय संस्कृति की सुरक्षा के तमाम सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में मीडिया को संस्कृति से संबंधित विषयों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है, ताकि भारतीय संस्कृति को संग्रहित किया जा सके। उन्होंने बताया कि पारिवारिक संस्कृति के अभाव का ही नतीजा है कि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही है। आलोक कुमार का कहना था कि सभ्यता आती-जाती रहती है, जबकि संस्कृति निरन्तर चलती रहती है।  

‘आईआईएमसी’ के पूर्व महानिदेशक के.जी सुरेश ने कहा कि समाज के अच्छे मुद्दों को मीडिया में लाकर सकारात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देना होगा। साथ ही उन्होंने नारी सशक्तिकरण को विकसित करने पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम संयोजक रविन्द्र चौधरी ने कहा कि मीडिया के अंदर राष्ट्रीय विचारों का प्रवाह होना चाहिए। सीएमआरए संगठन की उपयोगिता और उद्देश्य के बारे में बताते हुए उन्होंने सामाजिक,सांस्कृतिक विषयों पर चिंतन करने की जरूरत बताया। मंच का संचालन कर रहे शेखर त्रिवेदी ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

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इन आरोपों में घिरा 'हिन्दुस्तान' के आगरा एडिशन का रिपोर्टर, दर्ज हुई FIR

पत्रकार के भाई की ओर से भी दर्ज कराई गई है क्रॉस एफआईआर, फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है

पंकज शर्मा by
Published - Tuesday, 10 December, 2019
Last Modified:
Tuesday, 10 December, 2019
FIR

मारपीट के आरोप में पुलिस ने हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ के आगरा एडिशन में कार्यरत रिपोर्टर पवन तिवारी समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मारपीट में घायल व्यक्ति का अभी उपचार चल रहा है। उसके बयान के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पवन तिवारी का कहना है कि दूसरे पक्ष के लोग गाड़ियों में भरकर आए थे और मारपीट शुरू कर दी थी। पवन तिवारी के भाई अमित तिवारी पक्ष की ओर से भी इस मामले में क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई गई है।   

इस घटना के बारे में एत्माद्दौला थाने के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि पवन तिवारी के भाई अमित तिवारी इवेंट आयोजित करने का काम करते हैं। पिछले दिनों रामबाग में किसी कार्यक्रम के आयोजन को लेकर उनका शिकायकर्ता उजैर खां से विवाद हो गया था। इस विवाद में दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई थी। उजैर खां ने पवन तिवारी व अमित तिवारी समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

एफआईआर में उजैर खां ने बताया है कि इस विवाद के चलते पवन तिवारी ने अपने भाई और कई लोगों के साथ मिलकर मारपीट की घटना को अंजाम दिया। यही नहीं, उनकी गाड़ी के शीशे भी तोड़ दिए और 50 हजार रुपयों समेत कई महत्वपूर्ण कागज भी चुरा लिए। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

इस बारे में दर्ज कराई शिकायत की कॉपी आप यहां देख सकते हैं।

वहीं, पवन तिवारी पक्ष की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर की कॉपी आप यहां देख सकते हैं।

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जाते-जाते ‘साहस’ दिखा गये साहसी भारत के संपादक कादरी

‘साहसी भारत’ पत्रिका के संपादक अलीम कादरी को ब्रेन हैमरेज के बाद शनिवार को लखनऊ स्थित केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 06 December, 2019
Last Modified:
Friday, 06 December, 2019
Alim Qadri

लखनऊ के पत्रकार अलीम कादरी पांच दिन के कड़े संघर्ष के बाद दुनिया छोड़ गये। बृहस्पतिवार शाम चार बजे लखनऊ स्थित ‘केजीएमयू’ के चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शनिवार की शाम इस हट्टे कट्टे पत्रकार को जबरदस्त ब्रेन स्ट्रोक पड़ा था, जिसके बाद इन्हें ट्रामा सेंटर में वेंटीलेटर पर रखा गया था। अलीम अपने पीछे बूढ़ी मां, पत्नी और तीन छोटे-छोटे बच्चे छोड़ गये हैं। शुक्रवार को दोपहर दो बजे जुमे की नमाज के बाद लखनऊ के ऐशबाग स्थित कब्रिस्तान में इन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जायेगा।

'साहसी पत्रिका' के संपादक अलीम कादरी जाते-जाते तमाम ‘साहसी कारनामे’ दिखा गये। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार मौत के चार दिन पहले कादरी को इतना जबरदस्त ब्रेन हैमरेज हुआ था कि दिमाग की नसें लगभग फट गयी थीं , फिर भी वो चार दिन तक मौत से जंग लड़ते रहे।

कादरी के ब्रेन स्ट्रोक की घटना से लेकर उनकी मौत तक लखनऊ के पत्रकारों की तादाद ने बहुत कुछ संदेश दे दिए। साबित हो गया कि अपने हमपेशेवरों के बीच लोकप्रिय पत्रकार बनने के लिए बड़े बैनर की नहीं, बल्कि अपने काम, व्यवहार और विचार की अहमियत होती है, जिससे कोई भी हरदिल अजीज बन जाता है।

कादरी छोटी सी पत्रिका और न्यूज पोर्टल चलाते थे। उनकी प्रेस मान्यता भी नहीं थी। फिर भी जिस तरीके से पत्रकारों ने बीमारी से लेकर उनकी अंतिम यात्रा में शिरकत की तो लगा कि ये गलत धारणा है कि लखनऊ में मान्यता प्राप्त पत्रकारों और गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के बीच कोई खाई है। यही नहीं, मरहूम के इलाज के लिए हिंदू पत्रकार भाई मुस्लिम अजीजों से भी बहुत आगे रहे।

कादरी की इस कद्र को देखकर लगा कि उनके जैसे लोगों के व्यवहार, सौहार्द और संस्कारों की ताकत से ही हमारा देश साहसी भारत बना है। अलीम कादरी रहें न रहें, लेकिन इन जैसे पत्रकारों का इल्म और साहस भारतीय पत्रकारिता की नसों में दौड़ता रहेगा और भारत को साहसी भारत बनने की ताकत देता रहेगा।

अलविदा अलीम कादरी

(वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह की फेसबुक वॉल से साभार)

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'दैनिक जागरण' के युवा पत्रकार ने उठाया घातक कदम, साथी हैरान

मंगलवार की दोपहर से लापता चल रहा था पत्रकार, तभी से तलाश में जुटे हुए थे परिजन और मित्र

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
Mritunjay Shukla

दैनिक जागरण के आगरा संस्करण में कार्यरत पत्रकार मृत्युंजय शुक्ल ने आत्महत्या कर ली है। शुक्रवार को उनका शव रेलवे लाइन के पास मिला है। परिजनों ने कपड़ों से शव की शिनाख्त कर ली है। बताया जाता है कि डिप्रेशन के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है। मृत्युंजय मंगलवार से लापता चल रहे थे। उनका मोबाइल घर पर ही पड़ा मिला था। परिजन और मित्र तभी से उनकी तलाश में जुटे थे, लेकिन उनका पता नहीं चल पा रहा था।  

बहेड़ी (बरेली) के मूल निवासी मृत्युंजय लंबे समय से आगरा में मीडिया संस्थानों के साथ जुड़े हुए थे। अक्टूबर में ही मृत्युंजय के पिता का देहांत हुआ था। फिलहाल परिजन मृत्युंजय के शव को पोस्टमार्टम के बाद पैतृक निवास बरेली ले जा रहे हैं।। DNA के भी प्रयास हो रहे हैं।

मृत्युंजय के आत्महत्या करने की खबर सुनकर उनके पत्रकार साथी काफी हैरान और सदमे में हैं। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा है कि मृत्युंजय इस तरह का कदम उठा सकते हैं। इन पत्रकारों का कहना है कि मृत्युंजय पत्रकारिता में आकर बेहद उत्साहित था। न जाने ऐसा क्या हुआ कि उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। मृत्युंजय के आत्महत्या करने की बात सुनकर पत्रकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।

  

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दैनिक जागरण संवादी में इस बार क्या होगा खास, जानें यहां

13 से 15 दिसंबर तक लखनऊ में आयोजित किया जाएगा यह कार्यक्रम

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 04 December, 2019
Dainik Jagran

दैनिक जागरण ‘संवादी’ का छठा संस्करण 13 दिसंबर से 15 दिसंबर तक होने जा रहा है। यह आयोजन लखनऊ के गोमती नगर स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी में किया जाएगा। तीन दिवसीय इस उत्सव में साहित्य, राजनीति, संगीत, खान-पान, सिनेमा, धर्म और देशभक्ति समेत कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा होगी।

इस कार्यक्रम में भारतीय साहित्य के स्तंभ एवं मूर्धन्य साहित्यकार नामवर सिंह, केदारनाथ सिंह, कृष्णा सोबती एवं नवनीता देव सेन को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी। कार्यक्रम में प्रवेश निशुल्क रखा गया है।

हिंदी में मौलिक शोध को बढ़ावा देने के लिए ‘दैनिक जागरण’ के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ के तहत इस कार्यक्रम में ‘ज्ञानवृत्ति’ के विजेताओं की घोषणा भी की जायेगी। इस अभियान के विजताओं को कम से कम छह महीने और अधिकतम नौ महीने के लिए दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति दी जाती है।

‘संवादी’ में दैनिक जागरण की नई पहल ‘सृजन’ का कॉपीराइट बाजार भी लगेगा। इस कॉपीराइट बाजार में शामिल होने के लिए हिंदी के तमाम प्रकाशकों को आमंत्रित किया गया है। इसमें युवा लेखकों को प्रकाशकों के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर भी मिलेगा।

बता दें कि दैनिक जागरण सृजन देश के युवा लेखकों को प्रेरित और प्रोत्साहित करने का एक मंच है। यह मंच हिंदी में सृजनात्मक लेखन का जज्बा रखने वाले युवाओं को अपने सपने को हकीकत में बदलने का अवसर देता है। इस साल लखनऊ विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस उपलक्ष्य में विशेष रूप से तैयार किये सत्र का भी आयोजन भी यहां किया जाएगा

कार्यक्रम से संबंधित विस्तृत जानकारी http://jagranhindi.in/ अथवा www.jagranhindi.in पर क्लिक कर ली जा सकती है।

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