27 साल बाद पुलिस को आया 'होश', संपादक के खिलाफ की ये कार्रवाई

संपादक समेत आठ लोगों के खिलाफ वर्ष 1992 में दर्ज किया गया था मामला

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Tuesday, 25 June, 2019
Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
Editor

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में पुलिस ने सोमवार की रात उर्दू अखबार ‘अफाक’(Aafaq) के एडिटर और मालिक गुलाम जिलानी कादरी (Ghulam Jeelani Qadri) को गिरफ्तार किया है। 27 साल पुराने मामले में टाडा (TADA) कोर्ट द्वारा जारी सम्मन के बाद कादरी की गिरफ्तारी की गई है।

बताया जाता है कि 62 वर्षीय कादरी को पुलिस ने सोमवार की देर रात करीब साढ़े 11 बजे उस समय गिरफ्तार किया, जब वे अपने ऑफिस से घर पहुंचे थे। जिलानी कादरी के छोटे भाई मोरिफत कादरी (Morifat Qadri) का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें घर में अंदर नहीं जाने दिया और न ही कपड़े बदलने दिए।

कादरी के परिजनों के अनुसार, ‘पुलिस ने उन्हें बताया कि वर्ष 1992 में दर्ज मामले में कादरी फरार चल रहे थे।  इतने सालों तक कादरी रोजाना अपने ऑफिस जाते रहे, फिर कैसे कहा जा सकता है कि वे फरार चल रहे थे। इसके अलावा इसी मामले में दो अन्य पत्रकारों को राज्य सरकार द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है।’

पुलिस के इस कदम का विरोध जताते हुए कई पत्रकार कादरी के पक्ष में अदालत परिसर में एकजुट हुए। बता दें कि 1992 में कश्मीर में जब आतंकवाद चरम पर था, तब अखबारों के सर्कुलेशन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उस समय कादरी ‘जेएंडके न्यूज’ (J&K News) के नाम से न्यूज एजेंसी चलाते थे। उन पर उस दौरान आतंकवादी समूहों द्वारा जारी न्यूज और प्रेस रिलीज को पब्लिश करने का आरोप है। इसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, साल 1992 में कादरी और आठ अन्य पत्रकारों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिनमें से तीन आरोपी ख्वाजा सनाउल्लाह, गुलाम अहमद सोफी और शबान वकील की मौत हो चुकी है।

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लोकतंत्र के लिए कैसे खतरा है राजनीतिक हिंसा, बताएगी ये किताब

एनयूजेआई और प्रभात प्रकाशन द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किताब का दिल्ली में हुआ विमोचन

Last Modified:
Saturday, 20 July, 2019
Book Launching

नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया (एनयूजेआई) और प्रभात प्रकाशन द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित समसामयिक शोध पुस्तक ‘ब्लीडिंग बंगाल’ का विमोचन राजधानी दिल्ली के नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय में किया गया। यह पुस्तक मई 2019 से अब तक राज्य में हुई राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का तथ्यात्मक ब्यौरा सामने रखती है और राजनीतिक तथा प्रशासन के गिरते स्तर को प्रस्तुत करती है।

पुस्तक के विमोचन पर वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने कहा कि देश में फासीवाद का कोई खतरा है तो पश्चिम बंगाल में है। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि बंगाल में अधिकांश मीडिया संस्थान बिना कहे ही सरकार के आगे समर्पण कर गए हैं और सत्तारूढ़ दल की गलतियों को छापा नहीं जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब आफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी ने कहा कि राजनतिक हिंसा के चलते बंगाल की जो छवि बन रही है, उसे देख-सुनकर शर्म आती है। लोकतंत्र में हिंसा का न तो कोई स्थान हो सकता है और न ही कोई उसका समर्थन कर सकता है।

एनयूजेआई के राष्ट्रीय महासचिव मनोज वर्मा ने कहा कि मीडिया समाज का आईना है और यदि किसी राज्य में लगातार राजनीतिक हिंसा की घटनाएं हो रही हैं तो उन्हें देखकर मीडिया मूकदर्शक बना नहीं रह सकता। मनोज वर्मा का यह भी कहना था कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि यहां की स्थिति लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। एनयूजे आई के राष्ट्रीय महासचिव मनोज वर्मा ने कहा एनयूजेआई ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हिंसा पर ‘ब्लीडिंग बंगाल’ नाम से जो पुस्तक रूपी दस्तावेज तैयार किया है, उसमें घटनाओं को संकलित करने का काम किया है। मनोज वर्मा ने कहा समसामायिक विषयों पर एनयूजे आई की ओर से इस प्रकार की शोधपरक रिपोर्ट समय-समय पर जारी की जाती रही है।

कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कई आरोप लगाए। मेदिनीपुर से सांसद एवं भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी ने कला, साहित्य, दर्शन, संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम की चेतना वाले इस राज्य को अफगानिस्तान में तब्दील कर दिया है, जहां समाज को राजनीतिक कबीलों में बांटकर खूनी खेल खेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में फिल्म कलाकार, डॉक्टर, वकील, पत्रकार सभी राज्य की सत्ता से भयभीत हैं और उससे घृणा करने लगे हैं। एनयूजेआई के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राकेश आर्य ने भी पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखी।

‘ब्लीडिंग बंगाल’ के विमोचन कार्यक्रम में राज्यसभा टीवी के एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन,लोकसभा टीवी के संपादक श्याम सहाय, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर,वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार, संध्या जैन, अजय सेतिया, राम नारायण श्रीवास्तव, प्रमोद मजुमदार, योजना गोसाई, आलोक गोस्वामी, अनिल पांडे, अतुल गंगवार, परिजात कौल, दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राकेश शुक्ला,उपाध्यक्ष अनुराग पुनेठा, सचिव सचिन भदौलिया,सचिव संजीव सिन्हा,सचिव मंयक सिंह,डीजेए की कार्यकारिणी के सदस्य आदित्य भारद्धाज, राज कमल, उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश वत्स, महामंत्री प्रदीप शर्मा सहित अनेक पत्रकारों ने भाग लिया। एनयूजेआई के महासचिव मनोज वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने संचालन किया।

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पत्रकारों के मैंगो फेस्टिवल में आकर्षण का केंद्र रहा ये आम, शामिल हुईं कई हस्तियां

इस आम की खूबियों के बारे में जानने और उसके साथ फोटो खिंचाने को सभी आतुर दिखे

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Saturday, 20 July, 2019
Last Modified:
Saturday, 20 July, 2019
Mango Festival

नेशनल मीडिया क्लब की ओर से आयोजित 12वें मैंगो महोत्सव में बड़ी-बड़ी हस्तियों का जमावड़ा लगा और हर किसी ने मैंगो पार्टी का जमकर लुत्फ उठाया। दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में हुए महोत्सव में इस बार मोदी मैंगो आकर्षण का केंद्र रहा। इस मोदी मैंगो की खूबियों के बारे में जानने और उसके साथ फोटो खिंचाने को सभी आतुर दिखे। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी मोदी मैंगो के साथ फोटो खिंचाई।

महोत्सव में कैबिनेट मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की तो उद्घाटन केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री पुरुषोत्तम भाई रूपाला ने किया। भजन और गजल की संगीतमयी प्रस्तुति के बीच मीडिया मैंगो फेस्टिवल 2019 के नाम से हुए इस महोत्सव में आम की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें 300 से ज्यादा प्रजातियों के आमों को प्रदर्शित किया गया।

महोत्सव में बृज के कलाकारों और गायकों ने समां बांध दिया। फूलों की होली ने आये हुए अतिथियों का मन मोह लिया। इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। गजल गायकों ने भी लोगों को खूब प्रभावित किया। नेशनल मीडिया क्लब के अध्यक्ष सचिन अवस्थी द्वारा आयोजित इस महोत्सव में नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मैंगो पार्टी का यह आयोजन अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है। पुरुषोत्तम भाई रूपाला ने कहा कि यह आयोजन अपने आप में अद्भुत है।

आयोजन में अतिथियों के आने का क्रम शाम पांच बजे से ही शुरू हुआ, जो देर रात तक चला। महोत्सव में भजन गायक अनूप जलोटा, सिंगर सुरेश वाडेकर, हम सीरियल के मुख्य कलाकार अभिनव चतुर्वेदी, प्रख्यात कवि डॉक्टर सुनील जोगी, सहारा मीडिया के अभिजीत सरकार, जल संरक्षण मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संतोष गंगवार, केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास अठावले, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रताप सारंगी,  केंद्रीय राज्य मंत्री निरंजन ज्योति, केंद्रीय राज्यमंत्री देवश्री चौधरी, केंद्रीय राज्य मंत्री रामेश्वर तेली, पूर्व केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला, पूर्व केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहन भाई कुंडारिया सहित विभिन्न राज्यों के 60 से ज्यादा सांसदों ने शिरकत की।

इस कार्यक्रम की झलकियां आप यहां देख सकते हैं-

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Sanskar TV के CEO मनोज त्यागी को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मिली नई पहचान

वैश्विक स्तर पर अध्यात्म और वैदिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हुआ सम्मान

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Saturday, 20 July, 2019
Last Modified:
Saturday, 20 July, 2019
Manoj Tyagi

वैश्विक स्तर पर अध्यात्म और वैदिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संस्कार टीवी (Sanskar TV) के सीईओ मनोज त्यागी को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्डस, लंदन की ओर से सम्मानित किया गया है। हैरो (लंदन) के मेयर ऑफिस में उन्हें यह सम्मान वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्डस, लंदन के अध्यक्ष डॉ. दिवाकर सुकुल द्वारा दिया गया। इस अवसर पर मनोज त्यागी के साथ सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर, लंदन के प्रमुख राजराजेश्वर गुरु, हैरो के मेयर नितिन पारिख और पॉल वॉकर, कॉरपोरेट डायरेक्टर ( हैरो काउंसिल) भी उपस्थित थे।

एक साधारण परिवार में जन्मे मनोज त्यागी के शुरुआती दिन काफी संघर्ष भरे रहे। मनोज त्यागी की धार्मिक यात्रा ‘जी न्यूज’ पर प्रसारित होने वाले एक साप्ताहिक कार्यक्रम ‘काल कपाल महाकाल’ से हुई। वर्ष 2001 से 2016 तक मनोज त्यागी ‘आस्था चैनल’ से बतौर जीएम (मार्केटिंग एंड प्रोडक्शन) जुड़े रहे। वर्ष 2016 में योग गुरु बाबा रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण ने ‘आस्था’ चैनल के साथ-साथ ‘संस्कार’ और ‘सत्संग’ चैनल की भी जिम्मेदारी इन्हें दी। वर्ष 2017 में मनोज त्यागी को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए ‘संस्कार टीवी’ का सीईओ नियुक्त किया गया। वर्ष 2018 में मनोज त्यागी के नेतृत्व में ‘संस्कार टीवी’ का प्रसारण यूरोपीय देशों और यूनाइटेड किंगडम में शुरू हो चुका है।

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विधानसभा के बाहर प्रदर्शन को क्यों मजबूर हुई महिला पत्रकार, पढ़ें यहां

महिला पत्रकार के इस कदम के बाद विधानसभा की सुरक्षा को लेकर उठने लगे हैं सवाल

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Friday, 19 July, 2019
Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
Journalist

बिजनेसमैन पर नौकरी देने के बहाने दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए एक महिला पत्रकार ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। यह मामला ओडिशा का है। हालांकि, बाद में पुलिस उस महिला पत्रकार को अपने साथ ले गई। अब सवाल यह उठ रहा है कि विधानसभा क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा और धारा 144 लगी होने के बावजूद आखिर महिला पत्रकार कैसे वहां तक पहुंचने में कामयाब हो गई।  

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अपने साथ हुई इस तरह की घटना के विरोध में महिला पत्रकार पिछले करीब चार महीने से विरोध जता रही थी। उसने इस मामले में इंफोसिटी (Infocity) पुलिस स्टेशन में एक केस भी दर्ज कराया था। पुलिस द्वारा इस मामले में कोई कार्रवाई न किए जाने पर महिला पत्रकार ने पुलिस कमिश्नर और डीजीपी से मुलाकात कर उन्हें मेसेज भी भेजे थे।  

इस बारे में इंफोसिटी पुलिस स्टेशन के इंचार्ज बिश्वजीत मोहंती का कहना है, ‘महिला की शिकायत के बाद की गई शुरुआती जांच में पता लगा है कि आरोपित के साथ महिला के संबंध आपसी सहमति के आधार पर थे, जिससे वह गोवा में मिली थी। दोनों एक साथ कई देशों में भी जा चुके हैं। बिजनेमैन ने महिला के खिलाफ मारपीट का केस भी दर्ज कराया है।’ मोहंती का कहना है, ‘जांच में पता चला है कि बिजनेसमैन की शादी कहीं और होने और उसके फ्लैट पर कब्जा पाने में विफल रहने पर महिला ने उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है।’

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इस तरह की बातों के लिए प्रसार भारती के चेयरमैन ने की संपादक की खिंचाई

ए. सूर्यप्रकाश ने भारत के लोकतंत्र की जमकर की तारीफ

Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
Prasar Bharati

लंदन में ग्लोबल कॉन्फ्रेंस फॉर मीडिया फ्रीडम में 'धर्म और मीडिया' सत्र के दौरान भारत विरोधी व्याख्यान देने पर प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश ने 'कारवां' मैगजीन के कार्यकारी संपादक विनोद के. जोस की जमकर खिंचाई की। उन्होंने कहा कि जोस के कई बयान ‘गलत और अधूरे' थे। दरअसल, जोस ने सत्र के दौरान दावा किया था कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है।

अपने तर्क के समर्थन में उन्होंने अल्पसंख्यकों पर हमले के मीडिया कवरेज के क्लिप दिखाए थे। व्याख्यान के दौरान जोस ने दावा किया कि भारत में सैकड़ों ईसाइयों की हत्या कर दी गई। इसके अलावा 1984 में सिखों के नरसंहार को अंजाम दिया गया। उनके व्याख्यान के बाद संवाद सत्र के दौरान ए. सूर्यप्रकाश ने जोस के भाषण की आलोचना की।

सूर्यप्रकाश ने भारत के लोकतंत्र की तारीफ करते हुए कहा कि यह न सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि यह जीवंत भी है। इसमें विविध समाज के लोग रहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर श्रोताओं ने जोस की बातों पर भरोसा किया तो दुनिया भर में लोकतंत्र संदेह के घेरे में होगा।

प्रसार भारती के अध्यक्ष ने इसके साथ ही यह आरोप लगाया कि दुनिया के कुछ कार्यकर्ताओं को हाल में हुए चुनाव में भारत के मतदाताओं का निर्णय रास नहीं आया और उन्होंने अपनी बातों के लिए इस तरह के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा, 'आयोजकों द्वारा भारत विरोधी व्याख्यान के लिए इस तरह प्लेटफॉर्म मुहैया कराए जाने से मैं दुखी हूं।‘ बता दें कि सम्मेलन का आयोजन ब्रिटेन और कनाडा की सरकारों ने संयुक्त रूप से किया था। सत्र की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रमंडल और संयुक्त राष्ट्र के सचिव विम्बलडन के लॉर्ड अहमद ने सूर्यप्रकाश की टिप्पणियों का संज्ञान लेते हुए कहा कि वह भारत के लोकतंत्र का काफी सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि जातीय एवं अन्य संघर्षों पर चर्चा तो की जा सकती है, लेकिन लोकतांत्रिक देश में भारत की मजबूती पर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते हैं।

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PCI चेयरमैन जस्टिस सी.के.प्रसाद ने 'संपादकों' पर की कड़ी टिप्पणी

सोशल मीडिया विचार व्यक्त करने का एक सार्वजनिक मंच है, यह पत्रकारिता नहीं है

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Wednesday, 17 July, 2019
Last Modified:
Wednesday, 17 July, 2019
CK Prasad

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI)  के अध्यक्ष जस्टिस सी.के.प्रसाद का कहना है कि आज के दौर में पत्रकारिता की विश्वसनीयता खतरे में है। अब पत्रकारिता प्रोफेशनल संपादकों के बजाय मैनेजर्स द्वारा संचालित की जा रही है और पत्रकार चीयर लीडर की भूमिका निभा रहे हैं। पत्रकारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि जब तक पत्रकारों को नौकरी की सुरक्षा नहीं मिलेगी और पत्रकारिता जगत की कमान प्रोफेशनल संपादकों के हाथ में नहीं होगी, तब तक पत्रकारिता का संकट दूर नहीं होगा।

शिकायतों की सुनवाई के लिए दो दिवसीय दौरे पर पटना आए जस्टिस सीके प्रसाद ने कहा कि मैनेजर्स सिर्फ लाभ-हानि की भाषा ही समझते हैं और मालिकों को भी वे यही बात समझाते हैं। इन मैनेजर्स को कंटेंट से कोई मतलब नहीं होता। उन्होंने कहा है कि देश में या तो हाहाकारी पत्रकारिता हो रही है या जयजयकारी पत्रकारिता। यह न तो पत्रकारिता के लिए ठीक है और न ही पत्रकारों के लिए। इससे विश्वसनीयत प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया विचार व्यक्त करने का एक सार्वजनिक मंच है, जिस पर सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यह हमारे हिसाब से पत्रकारिता नहीं है। न्यूज अलग होती है और लोगों के विचार अलग होते हैं। सोशल मीडिया पर लोग अपने विचार रख सकते हैं, वे अन्य मंचों पर भी अपने विचार रख सकते हैं, लेकिन यह न्यूज नहीं होती है।

जस्टिस सी.के.प्रसाद का कहना था कि मीडिया के बारे में आप लोगों ने सुना होगा कि यह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, समाज का आईना है, लेकिन इसके बारे में यह भी कहा गया है कि मीडिया और पत्रकारिता जैविक आवश्यकता (बायोलॉजिकल नेसेसिटी) है।

जस्टिस सीके प्रसाद द्वारा मीडिया को लेकर कही गई बातों को आप नीचे दिए गए विडियो में देख सकते हैं-

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पत्रकार की पिटाई कर बुरे फंसे पुलिसकर्मी, यूं पड़ गए लेने के देने

बीच सड़क से गाड़ी हटाने के लिए कहने पर पुलिसकर्मियों ने कर दी थी पत्रकार की पिटाई

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Wednesday, 17 July, 2019
Last Modified:
Wednesday, 17 July, 2019
Police

पुलिस की गाड़ी को सड़क के बीच से हटाने के लिए कहने पर गुस्साए पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ बीच सड़क पर पत्रकार के साथ मारपीट कर दी, बल्कि बिना वजह उसे थाने में ले गए। घटना की जानकारी मिलते ही पत्रकारों में रोष व्याप्त हो गया। ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट समेत पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रात में ही एसएसपी शलभ माथुर को मामले से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।

पत्रकारों की मांग पर एसएसपी ने अड़ीग चौकी इंचार्ज व उप निरीक्षकों सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। उन्होंने इन पुलिसकर्मियों के गैर जोन में ट्रांसफर के लिए पुलिस मुख्यालय को पत्र भी लिखा। एसएसपी द्वारा आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ यह कदम उठाए जाने के बाद पत्रकारों का गुस्सा शांत हुआ।

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दैनिक इंकलाब के संपादक शकील हसन शम्सी को मिलेगा ये प्रतिष्ठित पुरस्कार

इस पुरस्कार में एक लाख एक हजार रुपए और स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Tuesday, 16 July, 2019
Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Shakeel Hasan

उर्दू अकादमी ने दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन दैनिक इंकलाब के संपादक शकील हसन शम्सी को इस वर्ष उर्दू में उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में हुई उर्दू अकादमी की कार्यकारी समिति की बैठक में इस बारे में निर्णय लिया गया। इस पुरस्कार के तहत एक लाख एक हजार रुपए नकद और स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है।

इसके अलावा अनुवाद के लिए प्रो. अनीसुर्रहमान आल इंडिया बहादुर शाह जफर पुरस्कार जेएनयू के पूर्व शिक्षक प्रो. शारिब रुदौलवी तथा पं बृजमोहन दत्तात्रेय कैफी पुरस्कार दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष अतीक़ुल्लाह को देने का फैसला किया गया। इन दोनों पुरस्कार में दो लाख 51 हजार रुपए एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है।

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दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्रकारिता के पाठ्यक्रम को लेकर हुआ विवाद

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन भी किया

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Tuesday, 16 July, 2019
Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Media Course

दिल्ली विश्वविद्यालय में पत्रकारिता कोर्स के नए पाठ्यक्रम को लेकर विवाद शुरू हो गया है। डीयू की अकादमिक परिषद के सदस्य रसल सिंह का आरोप है कि विश्वविद्यालय के अंग्रेजी पत्रकारिता के नए पाठ्यक्रम में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों और मॉब लिंचिंग से संबंधित पाठ भी शामिल किए गए हैं। आरोप है कि ऐसे पाठों का कंटेंट ‘पक्षपातपूर्ण’  न्यूज पोर्टल्स से लिया गया है, जो अक्सर सरकार की आलोचना करते हैं।

रसल सिंह ने यह भी कहा, ‘इस तरह के पाठ्यक्रम के द्वारा आरएसएस और उससे संबद्ध संगठनों, यहां तक कि प्रधानमंत्री को भी निशाना बनाया जा रहा है। मैं अकादमिक परिषद की बैठक में यह मुद्दा उठाऊंगा और सुनिश्चित करूंगा कि इसे अनुमति न मिले।’ इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। परिषद ने इस तरह के पाठों को हटाने की मांग की है।

इस बीच अंग्रेजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राज कुमार ने कहा कि उनका विभाग किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत न करने को लेकर प्रतिबद्ध है। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय की स्नातक पाठ्यक्रम संशोधन समिति पहले से ही इस मुद्दे को उठा चुकी है और विवादित हिस्सों में सुधार होगा। वहीं, पत्रकारिता के जिन शिक्षकों ने इस पाठ्यक्रम को तैयार किया है, उनका कहना है कि इन पाठों के द्वारा छात्र-छात्राओं को यह सिखाने की कोशिश की गई है कि संवेदनशील मुद्दों की रिपोर्ट कैसे की जाए।

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अखबार के खिलाफ मुकदमा करेंगे पूर्व पीएम के भाई, बताई ये वजह

पूर्व पीएम के भाई ने एक ट्वीट कर दी जानकारी, प्रधानमंत्री व उनके सहयोगी को भी लिया लपेटे में

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Tuesday, 16 July, 2019
Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Newspaper

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ ने कहा है कि वह ब्रिटेन के अखबार 'डेली मेल' (Daily Mail) के खिलाफ मुकदमा करेंगे। शहबाज के अनुसार वह यह मुकदमा उस ‘मनगढ़ंत और गुमराह’ करने वाली स्टोरी के लिए करेंगे, जिसमें उन्हें ब्रिटेन की विदेशी सहायता राशि चुराने के लिए दोषी बताया गया है।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज ने इस अखबार पर आरोप लगाया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके करीबी शहजाद अकबर के इशारे पर यह स्टोरी पब्लिश की गई, जिसके लिए वह उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करेंगे। शहबाज ने इस बारे में रविवार को एक ट्वीट भी किया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं।

पाकिस्तानी समाचार पत्र 'डॉन' के अनुसार, ‘द मेल’ ने रविवार को जांचकर्ताओं और ‘एक गोपनीय जांच रिपोर्ट’ का हवाला देते हुए एक स्टोरी पब्लिश की थी, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज ने वर्ष 2005 से 2012 के बीच जिस पैसे को चुराया है, वो ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग (डीएफआईडी) की वित्तपोषित परियोजनाओं का था। इसी स्टोरी को लेकर शहबाज खफा हैं और उन्होंने कानूनी कार्रवाई करने का मन बनाया है।

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