पत्रकार की शिकायत पर हरकत में आया प्रेस काउंसिल, उठाया ये कदम

'दैनिक जागरण' लखनऊ के पत्रकार धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने के मामले में अब ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ हरकत में आ गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 27 February, 2020
Last Modified:
Thursday, 27 February, 2020
PCI

'दैनिक जागरण', लखनऊ के पत्रकार धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर की नगर कोतवाली पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने के मामले में अब ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) हरकत में आ गया है। इस मामले में ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ ने उत्तर प्रदेश के गृह सचिव, डीजीपी व आइपीएस हिमांशु कुमार को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के अनुसार, प्रथमदृष्टया यह पाया गया है कि प्रेस की स्वतंत्रता पर तत्कालीन एसपी हिमांशु ने कुठाराघात किया था। ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ की ओर से जारी इस नोटिस में दो हफ्ते में लिखित जवाब देने के लिए कहा गया है।

बता दें कि सितंबर 2018 में 'दैनिक जागरण' ने अमेठी जिले के निवासी धर्मेंद्र मिश्र को सुल्तानपुर में ब्यूरो चीफ के पद पर तैनात किया था। धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ पिछले साल 16 नवंबर को जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें लूट का आरोप लगाते हुए घटना की तारीख दिसंबर 2018 बताई गई है। एक साल बाद इस मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद धर्मेंद्र मिश्र ने सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाते हुए पुलिस पर कई आरोप लगाए हैं।

धर्मेंद्र मिश्र का आरोप है कि सुल्तानपुर एसपी हिमांशु कुमार उनके द्वारा पुलिस की नाकामियों को उजागर करने वाले खबरों से नाराज थे और सच्चाई की आवाज दबाने के लिए उनके ऊपर लूट का फर्जी मुकदमा दर्ज करवाया गया है। यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी पहुंचा हुआ है।

अपने उत्पीड़न से परेशान पत्रकार धर्मेंद्र ने ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ से गुहार लगाई थी और पूरे मामले की लिखित शिकायत की थी। इस पर अब ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ ने संज्ञान लिया है।‘ प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ की ओर से जारी नोटिस की कॉपी आप यहां पढ़ सकते हैं।

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राष्ट्र स्तरीय इस प्रतियोगिता के लिए रचनाएं आमंत्रित

इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए 18 अक्टूबर 2020 तक अपनी प्रविष्टि भेजी जा सकती हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 21 September, 2020
Last Modified:
Monday, 21 September, 2020
Writing

बेटी बचाओ अभियान के तहत महिला बाल विकास एवं जनकल्याण समिति ‘सरोकार’ की ओर से ‘बिटिया के जन्मदिन के बधाई गीत लेखन’ राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रविष्टि भेजने की अंतिम तारीख 18 अक्टूबर 2020 रखी गई है।

इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

1: प्रतिभागी अपनी मौलिक रचना ही भेजें। रचना के साथ मौलिकता का प्रमाण लिखित में देना आवश्यक है।

2: रचनाएं हिंदी अथवा भारत की किसी भी लोकभाषा में हो सकती हैं।

3: एक या एक से अधिक रचनाएं भेजी जा सकती हैं।

4: प्रतियोगी द्वारा भेजी गई रचनाएं उनके नाम के साथ सरोकार के अभियान में उपयोग की जा सकेंगी।

5: अपनी रचना ई-मेल- sarokarzindagi@gmail.com अथवा वॉट्सऐप नंबर- 9926311225 पर लिखित में भेजी जा सकती हैं।

6: रचना के साथ अपनी एक रंगीन तस्वीर और परिचय में अपना नाम, उम्र, जेंडर, व्यवसाय, मोबाइल नंबर, ई-मेल तथा रचना की भाषा का उल्लेख अनिवार्य है। ऐसा न करने पर रचना अस्वीकृत कर दी जाएगी।

7: चयनित सर्वश्रेष्ठ रचनाकारों को सरोकार की ओर से एक प्रमाण पत्र और साथ उन्हें सरोकार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रचना की प्रस्तुति करने का अवसर दिया जाएगा।

इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए मोबाइल नंबर-9926311225 अथवा sarokarzindagi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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कोरोना ने निगल ली प्रसार भारती के पूर्व ADG अभय कुमार पाधी की जिंदगी

कोरोनावायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। तमाम लोग इसके कारण अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं कोरोना के संक्रमण से पीड़ित कई लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 21 September, 2020
Last Modified:
Monday, 21 September, 2020
Abhay Padhi

कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। तमाम लोग इसके कारण अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं कोरोना के संक्रमण से पीड़ित कई लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। ओडिशा से खबर है कि ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) के पूर्व एडीजी (Additional Director General) अभय कुमार पाधी (Abhay Kumar Padhi) का कोविड-19 की चपेट में आकर सोमवार को निधन हो गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 71 वर्षीय पाधी ने कुछ दिन पूर्व कोविड-19 का टेस्ट कराया था, जो पॉजिटिव आया था। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए ओडिशा के बारगढ़ कस्बे में स्थित कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार को उन्होंने आखिरी सांस ली।

रिपोर्टिस के अनुसार, पाधी ने प्रसार भारती को वर्ष 1976 में जॉइन किया था। उन्होंने ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) और ‘दूरदर्शन’ (DD) के साथ भी काम किया था। उन्होंने 1970 में गंगाधर मेहर कॉलेज से स्नातक और संबलपुर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रसारण एजेंसी में अपना करियर शुरू किया था। पूर्व में वह ‘आईआईएमसी’ (IIMC) ढेंकनाल में गेस्ट फैकल्टी भी रहे थे।  

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इस मंच पर जुटेंगे मीडिया जगत के दिग्गज, तमाम पहलुओं पर होगी चर्चा

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) 21 सितंबर को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारत में पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा की भविष्य की दिशा' विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन करने जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2020
IIMC

प्रमुख मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) 21 सितंबर को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारत में पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा की भविष्य की दिशा' विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन करने जा रहा है। वेबिनार का आयोजन गूगल मीट पर शाम चार बजे से 5:45 बजे तक किया जाएगा।

इस वेबिनार में मीडिया शिक्षा एवं पत्रकारिता क्षेत्र के बुद्धिजीवी भाग लेंगे। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे तथा वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. गीता बामजेई कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगी। कार्यक्रम की शुरुआत ‘आईआईएमसी’ के महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी के वक्तव्य से होगी।

प्रोफेसर द्विवेदी ने बताया कि इस वेबिनार में नवभारत, इंदौर के पूर्व संपादक प्रोफेसर कमल दीक्षित, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रोफेसर कंचन मलिक, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्विद्यालय के प्रोफेसर कृपाशंकर चौबे, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की प्रोफेसर पी. शशिकला एवं मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एहतेशाम अहमद खान भी अपने विचार रखेंगे।   

संस्थान की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, वेबिनार का संचालन ‘आईआईएमसी’ के भारतीय भाषायी पत्रकारिता के विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद प्रधान करेंगे। रेडियो एवं टेलिविजन विभाग की प्रो.शाश्वती गोस्वामी धन्यवाद ज्ञापन करेंगी।

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कोरोना ने निगल ली वरिष्ठ पत्रकार डॉ.अमी आधार की जिंदगी

कोरोनावायरस (कोविड-19) की चपेट में आकर आगरा के वरिष्ठ पत्रकार डॉ.अमी आधार ‘निडर’ का निधन हो गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2020
Ami Adhar

आगरा के वरिष्ठ पत्रकार डॉ.अमी आधार ‘निडर’ का निधन हो गया है। कोरोनावायरस (कोविड-19) पॉजिटिव होने के कारण करीब 15 दिन पूर्व उन्हें गुरुग्राम के मेदान्ता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

करीब 50 वर्षीय अमी आधार स्वराज्य टाइम्स, अमर उजाला व बीपीएन टाइम्स समेत तमाम अखबारों में कार्यरत रहे थे। वे मथुरा में दैनिक जागरण के प्रभारी भी रहे थे। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा व एक बेटी है।

अमी आधार के निधन पर तमाम पत्रकारों ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है और भगवान से पीड़ित परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है। गौरतलब है कि कोरोना की चपेट में आकर कुछ माह पूर्व ही दैनिक जागरण, आगरा के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का निधन हो गया था।  

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इस वरिष्ठ पत्रकार पर लगा देश व सेना की छवि को खराब करने का आरोप, FIR दर्ज

हाफिज ने पत्रकार पर आरोप लगाया है कि उसने देश और सेना को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2020
Asad Toor

पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार असद तूर के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कथित तौर पर पाकिस्तान की और यहां सेना की छवि खराब की और बदनाम करने की कोशिश की। रावलपिंडी में हाफिज एहतेशाम अहमद की शिकायत पर उनके खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया है।

हाफिज ने असद तूर पर आरोप लगाया है कि तूर ने देश और सेना को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया है। असद तूर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एफआईआर की कॉपी को साझा करते हुए लिखा कि शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि वह सोशल मीडिया का नियमित यूजर है और उसने पाया कि तूर कुछ दिनों से हाई लेवल सरकारी संस्थानों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, इनमें पाकिस्तानी सेना भी है। इस तरह वे सेना को बदनाम कर रहे हैं जो कानूनन अपराध है।’

पत्रकार असद पर पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 499 (मानहानि), 500 (मानहानि के लिए सार्वजनिक बयानबाजी) और धारा 11 (अभद्र भाषा), धारा 20 (किसी व्यक्ति की गरिमा के खिलाफ अपराध) और धारा 37 (गैरकानूनी ऑनलाइन सामग्री) के तहत मामला दर्ज कि गया है। इसके अलावा उनके खिलाफ पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक अपराध अधिनियम की धाराएं (Peca) 2016 भी लगाई गई हैं।

इस बीच पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने तूर के खिलाफ मामला दर्ज करने की निंदा की है। आयोग ने ट्विटर पर कहा कि पत्रकारों के खिलाफ हो रही इस तरह की कार्रवाई में खतरनाक वृद्धि इस बात की पुष्टि करती है कि सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करने पर तुली हुई है। आयोग की मांग है कि नागरिकों के अधिकारों का सम्मान किया जाए और सरकार और राज्य दोनों ही इसमें सुधार लाएं।

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‘न्यूज18 इंडिया’ के वरिष्ठ पत्रकार देवेश त्यागी पर हमला, दो गिरफ्तार

‘न्यूज18 इंडिया’ के वरिष्ठ पत्रकार देवेश त्यागी पर सोमवार की रात कुछ दबंगों ने हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आयी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 16 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2020
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‘न्यूज18 इंडिया’ के वरिष्ठ पत्रकार देवेश त्यागी पर सोमवार की रात कुछ दबंगों ने हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आयी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। मामला सहारनपुर के थाना सदर क्षेत्र का है, जहां उन्होंने दबंगो द्वारा कार आगे लगाने और अभद्रता करने का विरोध किया था।

हमले की रिपोर्ट पूर्व ब्लॉक प्रमुख घनश्याम चौधरी, उसके मित्र रवींद्र ठाकुर सहित अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई। फिलहाल पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पूर्व ब्लॉक प्रमुख सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

अपनी शिकायत में पत्रकार देवेश त्यागी ने बताया कि यह उनके साथ यह हमला तब हुआ, जब सोमवार की रात करीब आठ बजे कपिल विहार स्थित अपने घर से कार द्वारा खेलने के लिए स्टेडियम की ओर जा रहे थे। इसी दौरान कोर्ट रोड पुल पर सफेद रंग की कार खलासी लाइन की ओर से पुल पर चढ़ रही थी। उस कार के चालक अनिकेत ने अपनी कार उनकी कार के आगे लगा दी और अभद्रता करने लगा।

आरोप है कि विरोध करने पर कार में बैठे दो युवकों ने तमंचा दिखाया और आगे चलकर देख लेने की धमकी दी। जैसे ही वह जीपीओ रोड पर डाकघर के सामने पहुंचे तो कार चालक ने उनके आगे कार लगा दी। तभी एक स्कॉर्पियो भी वहां आ गई।

आरोप है कि रविंद्र ठाकुर, अनिकेत, पूर्व ब्लॉक प्रमुख घनश्याम चौधरी और आठ दस अन्य लोगों ने लाठी डंडे से उन पर हमला कर दिया, जिसके बाद में वहां जुटे कुछ लोगों ने घनश्याम और रवींद्र को पकड़ लिया। एसपी सिटी विनीत भटनागर भी मौके पर पहुंच गए। बाद में थाना सदर पुलिस दोनों आरोपियों को पकड़कर थाने ले गई। देवेश त्यागी की तहरीर पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख घनश्याम, रवींद्र ठाकुर, अनिकेत सहित दस अज्ञात लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला और धमकी देने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की है। एसपी सिटी ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।

  

 

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महिला पत्रकार से झपटमारी दो बदमाशों को कुछ यूं पड़ गई भारी

ऑटो से जा रही दूरदर्शन की महिला पत्रकार का मोबाइल झपटना बाइक सवार दो बदमाशों को काफी भारी पड़ गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 15 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2020
Female Journalist

दिल्ली में ऑटो से जा रही दूरदर्शन की महिला पत्रकार का मोबाइल झपटना बाइक सवार दो बदमाशों को काफी भारी पड़ गया। दरअसल, महिला पत्रकार ने दिलेरी दिखाते हुए न सिर्फ उन बदमाशों का ऑटो से पीछा किया, बल्कि ऑटो ड्राइवर की मदद से उन्हें दबोचकर पुलिस के हवाले भी कर दिया। घटना के दौरान महिला पत्रकार ऑटो से मालवीय नगर जा रही थीं। महिला पत्रकार की इस दिलेरी की पुलिस ने प्रशंसा की है और दो हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पकड़े गए आरोपितों की पहचान तुगलकाबाद (दिल्ली) निवासी संदीप और अमन के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके पास से लूटा गया मोबाइल और घटना में इस्तेमाल बाइक बरामद की है। पुलिस पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे नशे की लत को पूरा करने के लिए इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि 12 सितंबर की दोपहर करीब एक बजे एक महिला ने दो लुटेरों को पकड़ने की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों लुटेरों को हिरासत में ले लिया। महिला ने बताया कि वह दूरदर्शन में पत्रकार हैं। वह ऑटो से कहीं पर जा रही थीं। इस दौरान बाइक से आए दो झपटमारों ने उनका मोबाइल झपट लिया।

महिला ने दोनों आरोपितों का ऑटो से ही पीछा शुरू कर दिया। जगदंबा रोड पर अग्रवाल स्वीट के पास आरोपितों की बाइक गिर गई। इस पर महिला पत्रकार ने ऑटो ड्राइवर की मदद से दोनों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपितों के खिलाफ गोविंदपुरी थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

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वरिष्ठ पत्रकारों ने भारतीय भाषाओं में अंतर संवाद की जरूरत पर कुछ यूं दिया जोर

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) में सोमवार को हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 14 September, 2020
Last Modified:
Monday, 14 September, 2020
IIMC

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्‍थान’ (IIMC) में सोमवार को हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर ‘भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद’ विषय पर आयोजित वेबिनार में वरिष्‍ठ पत्रकार एवं माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय, भोपाल के पूर्व कुलपति अच्‍युतानंद मिश्र ने कहा, ‘भाषा का संबंध इतिहास, संस्‍कृति और परंपराओं से है। भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद की परंपरा काफी पुरानी है और ऐसा सैकड़ों वर्षों से होता आ रहा है, यह उस दौर में भी हो रहा था, जब वर्तमान समय में प्रचलित भाषाएं अपने बेहद मूल रूप में थीं। श्रीमद्भगवत गीता में समाहित श्रीकृष्‍ण का संदेश दुनिया के कोने-कोने में केवल अनेक भाषाओं में हुए उसके अनुवाद की बदौलत ही पहुंचा। उन दिनों अंतर-संवाद की भाषा संस्‍कृत थी, तो अब यह जिम्‍मेदारी हिंदी की है।’

मिश्र का यह भी कहना था, ‘भारतीय भाषाओं के बीच अंतर-संवाद में रुकावट अंग्रेजी के कारण आई और इसकी वजह हम भारतीय ही थे, जिन्‍होंने हिंदी या अन्‍य भारतीय भाषाओं के स्‍थान पर अंग्रेजी को अंतर-संवाद का माध्‍यम बना लिया। उन्‍होंने कहा कि हिंदी के विद्वानों, पत्रकारों और संस्‍थाओं को इस दिशा में कार्य करना चाहिए था, लेकिन उन्‍होंने यह जिम्‍मेदारी नहीं निभाई। जब डॉ. राम मनोहर लोहिया ने ‘अंग्रेजी हटाओ’ अभियान शुरू किया, तो उसका आशय ‘हिंदी लाओ’ कतई नहीं था, लेकिन दुर्भाग्‍यवश ऐसा प्रचारित किया गया। इससे राज्‍यों के मन में भ्रांति फैली। इसका निराकरण हिंदी के विद्वानों, पत्रकारों और संस्‍थाओं को करना चाहिए था। अन्‍य भारतीय भाषाओं के हिंदी के करीब आने का कारण मनोरंजन, पर्यटन और प्रकाशन क्षेत्र है। हिंदी की लोकप्रियता का श्रेय हिंदी के बुद्धिजीवियों को नहीं, अपितु इन क्षेत्रों को दिया जाना चाहिए।’

उन्‍होंने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा घोषित राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति को देखते हुए उससे कुछ अपेक्षाएं हैं। इसमें मातृभाषा में शिक्षा और भारतीय भाषाओं के प्रोत्‍साहन की बात हो रही है, अनुवाद की बात हो रही है। ऐसे में हिंदी से जुड़ी संस्‍थाएं यदि पहल करें तो हिंदी परस्‍पर आदान-प्रदान का व्‍यापक माध्‍यम बन सकती है।

जहां भाषा खत्‍म होती है, वहां संस्‍कृति भी दम तोड़ देती है: अद्वैता काला : मुख्‍य वक्‍ता, पटकथा लेखक एवं स्‍तंभकार अद्वैता काला ने कहा कि जहां भाषा खत्‍म होती है, वहां संस्‍कृति भी उसके साथ दम तोड़ देती है। हमें सभी भाषाओं को महत्‍व देना चाहिए, उन्‍हें समझना चाहिए और उनके संपर्क का माध्‍यम हिंदी है, इसे स्‍वीकार करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि वैसे भाषा बहुत निजी मामला है। इसके माध्‍यम से हम केवल दुनिया से ही नहीं, बल्कि स्‍वयं से भी संवाद करते हैं।

हिंदी की स्थिति की चर्चा करते हुए उन्‍होंने कहा कि फिल्‍मों की पटकथा और संवाद रोमन लिपि में लिखे जाते हैं, क्‍योंकि लोग हिंदी की लिपि नहीं पढ़ पाते, जबकि हिंदी मीडिया की पहुंच बहुत व्‍यापक है। सुश्री काला ने बताया कि उनकी खुद की हिंदी भी हिंदी में लेखन से जुड़ने के बाद ही बेहतर हुई और उन्‍हें लगता है कि शिक्षा प्रणाली यदि सही रही होती तो ऐसा नहीं होता। उनका सुझाव है कि बच्‍चों को अंग्रेजी और हिंदी के साथ-साथ कोई न कोई क्षेत्रीय भाषा भी पढ़ाई जानी चाहिए।

भाषाओं में अंतर-संवाद कोई नई बात नहीं: श्री मुकेश शाह: गुजराती भाषा के ‘साप्‍ताहिक साधना’ के प्रबंध संपादक मुकेश शाह ने कहा कि शब्‍दों को हमने ब्रह्म माना है और भाषाओं में अंतर-संवाद कोई नई बात नहीं है। उन्‍होंने महात्‍मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बापू ने अंग्रेजी में ‘हरिजन’ प्रकाशित किया, लेकिन उसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए उन्‍होंने उसे गुजराती और हिंदी में भी स्‍थापित किया। उन्‍होंने गुजराती में 70 पुस्‍तकों की रचना करने वाले फादर वॉलेस और गुजरात में विद्यालय, महाविद्यालय और विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना करने वाले सयाजीराव गायकवाड़ के योगदान का भी उल्‍लेख किया। उन्‍होंने कहा कि उत्‍तर-दक्षिण भारत की भाषाओं में व्‍यापक अंतर होने के बावजूद उनमें अंतर-संवाद और अनुवाद होता आया है। उन्‍होंने कहा कि भाषाओं का राष्‍ट्रीय चरित्र के निर्माण में योगदान होता है।

परस्‍पर आदान-प्रदान से ही भाषाएं समृद्ध होती हैं: स्‍नेहशीष सुर: कोलकाता प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष स्‍नेहशीष सुर ने कहा कि हिंदी दिवस पर भारतीय भाषाओं के बीच अंतर-संवाद विषय पर विमर्श का आयोजन करके आईआईएमसी ने दर्शाया कि हिंदी दिवस केवल हिंदी के लिए नहीं है। सभी भाषाओं के बीच संवाद, संपर्क, उनके कल्‍याण तथा विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता के पास बहुत विशाल विरासत और व्‍यावसायिक कौशल है लेकिन यह कौशल अंतरराष्‍ट्रीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए। समस्‍त भाषाएं आगे बढ़ें और उनकी पत्रकारिता आगे बढ़े, यह प्रयास होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि हिंदी भारतीय भाषाओं के बीच संपर्क का माध्‍यम है, इसमें कोई दो राय नहीं है। बीतते समय के साथ हिंदी के साथ अन्‍य भाषाओं के लोगों की भी सहजता बढ़ी है और परस्‍पर आदान-प्रदान से दोनों ही भाषाएं समृद्ध होती हैं।

भाषा ही मेल-मिलाप कराती है: अमीर अली खा: हैदराबाद से प्रकाशित होने वाले उर्दू दैनिक ‘डेली सियासत’ के संपादक अमीर अली खान ने कहा कि पाकिस्‍तान ने जब उर्दू को अपनी राजभाषा बनाया, तो यहां हिंदी और उर्दू में अंतर आ गया। खान ने कहा कि भारत छोटे यूरोप की तरह है, इसे एक ही दिशा में नहीं ले जा सकते। यहां विविध भाषाएं हैं और भाषा ही मेल-मिलाप कराती हैं। उन्‍होंने कहा कि हिंदी की किताबों को उर्दू में अनुवाद कराया जाना चाहिए, लेकिन अन्‍य भाषाओं की पुस्‍तकें भी हिंदी में अनुवाद होनी चाहिए। इससे अंतर-संवाद को बढ़ावा मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि अंतर संवाद को बढ़ावा देने में योगदान प्रदान कर हम खुद को गौरवान्वित समझेंगे।

समस्‍त भाषाएं, राष्‍ट्रीय भाषाएं हैं: प्रो. संजय द्विवेदी: विमर्श के अध्‍यक्ष एवं आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि सरकार की ओर से घोषित नई राष्‍ट्रीय नीति में सभी भारतीय भाषाओं को महत्‍व दिया गया है। हिंदी अकेली राष्‍ट्र भाषा नहीं है, क्‍योंकि समस्‍त भाषाएं इसी राष्‍ट्र के लोगों के द्वारा बोली जाती हैं, लिहाजा वे सभी राष्‍ट्रीय भाषाएं ही हैं। हर जगह संपर्क का माध्‍यम अंग्रेजी बन जाने से नुकसान पहुंचा है, क्‍योंकि बहुत कम लोग हैं, जो अंग्रेजी बोलते हैं। प्रो. द्विवेदी ने ऐसे अनेक विद्वानों का उल्‍लेख किया, जिन्‍होंने  हिंदी और भाषायी पत्रकारिता में अभूतपूर्व योगदान दिया है। नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति की विशेषताएं गिनाते हुए उन्‍होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में अंतर संवाद से वे एक-दूसरे के गुण अपनाएंगी और अंतत: सर्वव्‍यापी, सर्वग्राह्य बनेंगी। इससे भाषायी विद्वेष की भावना का अंत होगा, परंपराओं का समन्‍वय होगा और सभी को सामाजिक न्‍याय तथा आर्थिक न्‍याय प्राप्‍त होगा। उन्‍होंने कहा कि भाषायी विविधता और बहुभाषी समाज आज की आवश्‍यकता है और समस्‍त भाषाओं के लोगों ने ही विश्‍व में अपनी उपलब्धियों के पदचिह्न छोड़े हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत सदैव वसुधैव कुटुम्‍बकम की बात करता आया है और सभी भाषाओं को साथ लेकर चलने के पीछे भी यही भावना है।

भारतीय भाषाओं के बीच संवाद को व्‍यापक रूप से प्रोत्‍साहन दिया जाना चाहिए : प्रो. आनंद प्रधान : आईआईएमसी के भारतीय भाषायी पत्रकारिता विभाग के प्रो. आनंद प्रधान ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच संवाद को व्‍यापक रूप से प्रोत्‍साहन दिया जाना चाहिए। हिंदी दिवस के अवसर पर इस विषय पर विमर्श का आयोजन इस दिशा में काफी महत्‍वपूर्ण है। उन्‍होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में बीच संवाद सैंकड़ों वर्षों से जारी है और इनका विकास भी साथ-साथ ही हुआ है। मसलन, बांग्‍ला और मैथिली में इतनी समानता है कि उनमें अंतर करना मुश्किल है, इसी तरह अवधी और ब्रज भाष तथा हिंदी और उर्दू में भी ऐसा ही है। इस संबंध में उन्‍होंने एक शोध का हवाला दिया। प्रो. प्रधान ने बताया कि हिंदी और उर्दू दैनिकों की भाषा पर हुए एक शोध में देखा गया कि उनमें केवल 23 प्रतिशत शब्‍द ही अलग थे। उन्‍होंने कहा कि वैसे ही हिंदी पत्रकारिता के विकास में मराठी, बांग्‍ला और दक्षिण भारतीय भाषाओं के योगदान की अनदेखी नहीं की जा सकती।

इस कार्यक्रम में आईआईएमसी मुख्‍यालय, क्षेत्रीय केंद्रों के संकाय सदस्‍य, कर्मचारी अधिकारी, भारतीय सूचना सेवा के प्रशिक्षु और पूर्व छात्र शामिल हुए।

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IIMC में संवाद और विमर्श का माध्यम बनेगा हिंदी पखवाड़ा

हिंदी दिवस से की जाएगी कार्यक्रमों की शुरुआत, कोविड-19 महामारी के कारण बदली परिस्थितियों के बावजूद इस पखवाड़े के आयोजन को लेकर उत्साह और उमंग में कोई कमी नहीं है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 14 September, 2020
Last Modified:
Monday, 14 September, 2020
IIMC

देश का प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्‍थान’ (आईआईएमसी) हर बार की तरह इस वर्ष भी हिंदी पखवाड़े का आयोजन नए अंदाज और नए कलेवर के साथ कर रहा है। कोविड-19 महामारी के कारण बदली परिस्थितियों के बावजूद इस पखवाड़े के आयोजन को लेकर उत्‍साह और उमंग में कोई कमी नहीं है। 14 से 28 सितंबर 2020 तक मनाए जाने वाले इस पखवाड़े का शुभारंभ और समापन राष्‍ट्रीय स्‍तर के दो महत्‍वपूर्ण विमर्शों के आयोजन से होने जा रहा है, जिनमें सात राज्‍यों के विद्वान अपने विचार प्रकट करेंगे। यह जानकारी आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने दी।

प्रो. द्विवेदी ने बताया कि पखवाड़े का शुभारंभ 14 सितंबर को ‘भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद’ विषय पर वेबिनार से होगा। इस वेबिनार में जनसत्‍ता के पूर्व संपादक एवं माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय के पूर्व कुलपति अच्‍युतानंद मिश्र मुख्‍य अतिथि होंगे। भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद पर होने वाले इस विमर्श में गुजराती भाषा के ‘साप्‍ताहिक साधना’ के प्रबंध संपादक मुकेश शाह, हैदराबाद से प्रकाशित होने वाले उर्दू दैनिक ‘डेली सियासत’ के संपादक अमीर अली खान तथा कोलकाता प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष स्‍नेहशीष सुर अपने विचार प्रकट करेंगे।

आईआईएमसी के महानिदेशक ने बताया कि पखवाड़े का समापन ‘राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय भाषाएं’ विषय पर वेबिनार से होगा। इस वेबिनार में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री मुख्‍य अतिथि होंगे, जबकि अध्‍यक्षता महात्‍मा गांधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा करेंगे। इस वेबिनार के अन्‍य वक्‍ताओं में नवभारत टाइम्‍स– मुंबई (महाराष्‍ट्र) के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, दैनिक जागरण, नई दिल्‍ली  के सह-संपादक अनंत विजय और पुड्डूचेरी विश्‍वविद्यालय, पुड्डूचेरी के हिंदी विभाग के अध्‍यक्ष डॉ. सी जयशंकर बाबू शामिल हैं।

प्रो. द्विवेदी ने हिंदी पखवाड़े के आयोजन के बारे में विस्‍तार से चर्चा करते हुए कहा कि लंबे अर्से से भारतीय भाषाओं के बीच अंतर-संवाद, अनुवाद, साहित्यिक और सांस्‍कृतिक संचार को बढ़ावा देने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने की आवश्‍यकता महसूस की जाती रही है। चूंकि हिंदी देश में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है, ऐसे में यह भारतीय भाषाओं के बीच अतंर-संवाद का प्रबल माध्यम सिद्ध हो सकती है। इस अंतर-संवाद से न सिर्फ राष्ट्रीय एकता की भावना और भाषाई सद्भावना को बढ़ावा मिलेगा, अपितु हमारी भारतीय भाषाओं को भी सम्मान मिलेगा।

उन्‍होंने कहा कि हाल ही में घोषित राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में भारत सरकार ने भारतीय भाषाओं के सम्मान के लिए विशेष कदम उठाए हैं। अंतत: भारतीय भाषाओं की प्रगति से ही राष्ट्र गौरव, और समाज के आत्मविश्वास एवं स्‍वाभिमान में भी वृद्धि होगी। भारतीय भाषाओं को सम्‍मान मिलने से न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव हो सकते हैं, अपितु इससे रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो सकती है। इसलिए संस्‍थान इस वर्ष हिंदी पखवाड़े को भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाने की भावना से मनाने जा रहा है।

इन विमर्शों के अतिरिक्‍त इस हर साल की तरह इस बार भी हिंदी पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं की प्रदर्शनी, निबंध प्रति‍योगिता, हिंद टिप्पणी एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिता, हिंदी काव्य पाठ प्रतियोगिता, हिंदी टंकण प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस बार पखवाड़े के दौरान ही भारतीय सूचना सेवा के प्रशिक्षुओं के लिए कार्यशाला का आयोजन भी किया जा रहा है, ताकि उन्हें रोजमर्रा के सरकारी कामकाज को हिंदी में करने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जा सके। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि संस्‍थान की कोशिश है कि यह हिंदी पखवाड़ा कर्मकांड मात्र तक सीमित न रह जाए, बल्कि संवाद और विमर्श का प्रबल माध्‍यम सिद्ध हो।

 

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पत्रकार पर लगे गंभीर आरोप, पुलिस ने घर से किया गिरफ्तार

पत्रकार के परिजनों का आरोप है कि घर की तलाशी के दौरान पुलिस ने उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 12 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 12 September, 2020
Arrest

पाकिस्तान में शुक्रवार को एक वरिष्ठ पत्रकार को सेना की मानहानि और धार्मिक घृणा फैलाने के आरोप में उनके घर से गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंग्रेजी अखबार का यह पत्रकार सेना, सरकार और धार्मिक चरमपंथी समूहों का मुखर आलोचक रहा है।

बताया जाता है कि ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ (The Express Tribune) अखबार में कार्यरत बिलाल फारूकी (Bilal Farooqi) नामक इस पत्रकार ने सोशल मीडिया पर किए अपने तमाम पोस्ट में पाकिस्तानी सेना की मानहानि की और राज्य विरोधी तत्वों ने इन पोस्ट का इस्तेमाल अपने निहित स्वार्थों के लिए किया। आरोप यह भी है कि फारूकी ने अपने पोस्ट के माध्यम से धार्मिक घृणा फैलाने का काम भी किया।

फारूकी के परिजनों का आरोप है कि घर की तलाशी के दौरान पुलिस ने उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया। वहीं, तमाम पत्रकारों और प्रेस की स्वतंत्रता के पैरोकारों ने पाकिस्तानी सेना और उसकी एजेंसियों पर आलोचनात्मक कवरेज को कम करने के लिए मीडिया आउटलेट्स पर दबाव डालने का आरोप लगाया है।

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