जानें, कोविड-19 से पत्रकारों की मौत के मामले पर क्या बोले झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री

झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रेजिडेंट शाहनवाज हसन का कहना है कि कोविड-19 के कारण राज्य में कम से कम 30 पत्रकारों की मौत हुई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 09 September, 2021
Last Modified:
Thursday, 09 September, 2021
Jharkhand Government

झारखंड सरकार का कहना है कि कोविड-19 के कारण राज्य में किसी पत्रकार की मौत नहीं हुई है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ (The Indian Express) की एक रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में झारखंड सरकार का यह भी कहना है कि ऑक्सीजन की कमी का कारण राज्य में कोई भी मौत नहीं हुई है।

मंगलवार को अपनी पार्टी के सहयोगी और कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा, ‘पत्रकारों की मौत के संबंध में किसी भी सूत्र से कोई सूचना नहीं मिली है और न ही जिलों की आपदा प्रबंधन टीम की ओर से किसी की मौत की सूचना मिली है।’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी मौतों में मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है।

हालांकि, झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रेजिडेंट शाहनवाज हसन का कहना है कि कोविड-19 के कारण राज्य में कम से कम 30 पत्रकारों की मौत हुई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, हसन का कहना है, ‘हमने मुख्यमंत्री और राज्य के जनसंपर्क विभाग को पत्र लिखकर मौतों का विवरण और जिलेवार ब्यौरा दिया था। लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि क्यों स्वास्थ्य मंत्री ने अब इस मामले में यू-टर्न ले लिया है।’

इसके साथ ही हसन का कहना था कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों ने अपने राज्यों में कोविड-19 से मारे गए पत्रकारों के परिवार के सदस्यों को मुआवजा दिया है।

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‘ई-गेमिंग फेडरेशन’ ने उठाया ऑनलाइन स्किल गेमिंग सेक्टर का मुद्दा, रखी ये मांग

फिलहाल, गेमिंग प्लेरटफॉर्मों द्वारा प्रत्येक गेम के लिए संकलित कमीशन (ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू यानी जीजीआर) पर 18% की दर से कर आरोपित किया जाता है, जिसमें बेटिंग (सट्टा) या गैंबलिंग (जुआ) शामिल नहीं है।

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Tuesday, 17 May, 2022
EGF

देश में ऑनलाइन स्किल गेमिंग ऑपरेटर्स के प्रतिनिधि संगठन ‘ई-गेमिंग फेडरेशन’ (ईजीएफ) ने सरकार से जीएसटी लगाने के लिए सकल गेमिंग राजस्व (जीजीआर) का विचार करने और इस सेवा को 18% के स्लैब में रखने का अनुरोध किया है।

इस बारे में ‘ई-गेमिंग फेडरेशन’ की ओर से कहा गया है कि जीएसटी काउंसिल ने फरवरी 2022 में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) का पुनर्गठन किया था। जीओएम को विभिन्न कैसिनो, रेस कोर्स, और ऑनलाइन गेमिंग के लिए जीएसटी की दरों का अध्‍ययन करने का काम दिया गया। पैनल के विचारणीय विषय में कहा गया था कि यह विभिन्न कैसिनो, रेसकोर्स, और ऑनलाइन गेमिंग पोर्टलों द्वारा प्रस्तावित सेवाओं के मूल्य की और कुछ कैसिनो के लेन-देन की कर-देयता की जांच करेगा। ये सभी जांच वर्तमान कानूनी प्रावधानों और न्यायालय के आदेशों के सन्दर्भ के दायरे में किया जाएगा। इसके अलावा, अगर कोई विकल्प अनुशंसित किया जाता है, तब मंत्री-समूह कानूनी प्रावधानों में अपेक्षित बदलावों और इस प्रकार के मूल्यांकन प्रावधान के संचालन की जांच करेगा। समूह अन्य समान सेवाओं जैसे कि लॉटरी आदि पर प्रभाव का आकलन भी करेगा।

फेडरेशन के अनुसार, इसके पहले इसी महीने में मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा, संयोजक, मंत्री-समूह ने विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ ऑनलाइन गेमिंग के लिए संभावित जीएसटी दरों, कर आरोपित करने के लिए मूल्यांकन की विधियों, और इस प्रकार की गतिविधियों के सम्बन्ध में अन्य तकनीकी बातों पर चर्चा करने के लिए अन्य सदस्यों तथा अधिकारियों के साथ बैठक की।

फिलहाल, गेमिंग प्‍लेटफॉर्मों द्वारा प्रत्येक गेम के लिए संकलित कमीशन (ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू यानी जीजीआर) पर 18% की दर से कर आरोपित किया जाता है, जिसमें बेटिंग (सट्टा) या गैंबलिंग (जुआ) शामिल नहीं है। यह दर विश्व की सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों के अनुरूप है क्योंकि यूएसए, यूके, जर्मनी, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग की कर संरचना 15% से लेकर 20% तक है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। इस व्यावसायिक क्षेत्र से वर्ष 2020 में 115 बिलियन रुपये (आईएनआर) का राजस्व प्राप्त हुआ था और इसे 38% के चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के दर से वर्ष 2025 के आने तक 384 बिलियन रुपये (आईएनआर) तक बढ़ने का अनुमान है। इस उद्योग ने वर्ष 2020 में सरकारी खजाने में 15 से 20 बिलियन रुपये तक का योगदान किया था और अनुमान है कि वर्ष 2025 तक यह योगदान 35 से 50 बिलियन तक पहुंच जाएगा।

अगर मौजूदा करारोपण व्यवस्था को संशोधित किया जाता है और ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (जीजीआर) के बदले  बाजी की रकम (स्टेक) पर आरोपित किया जाता है, तो यह भारतीय ऑनलाइन गेमिंग उद्योग की बढ़ती संभावना के लिए विनाशकारी साबित होगा। बढ़ोतरी से कर लगभग 800%-900% तक बढ़ जाएगा और अवैध बाजार परिचालन को बढ़ावा मिलेगा। इसके चलते अनैतिक ऑपरेटर्स (मुख्यतः विदेशी) के साथ खिलाड़ियों का संपर्क होगा जिससे सरकार के लिए कर राजस्व काफी घटेगा, और एक विधि सम्मत उभरता व्यावसायिक क्षेत्र समाप्त हो जाएगा, जो वर्ष 2030 के आने तक 25 बिलियन डॉलर का वार्षिक राजस्व और लाखों नौकरियां पैदा कर सकता है।

इस बारे में ‘ईजीएफ’ के सीईओ समीर बर्डे का कहना है, ‘उच्चतर कर का बोझ होने से यह उद्योग अव्यवहार्य हो जाएगा। गेमिंग प्लेटफॉर्म के ऑपरेटर्स किसी अर्थपूर्ण स्तर पर परिचालन जारी रखने में असमर्थ हो जाएंगे। विकास, नवाचार, रोजगार के अवसर, सरकारी राजस्व और सबसे बढ़कर जिम्मेदार और सुरक्षित गेमिंग बड़े पैमाने पर प्रभावित होंगे। हम जीओएम से इस उद्योग की विशिष्ट जरूरतों पर विचार करने और 18% की दर को बरकरार रखते हुए जीजीआर पर जीएसटी की वर्तमान व्यवस्था को जारी रखने की अनुशंसा करने का अनुरोध करते हैं।’ उनका कहना है, ’ऑनलाइन गेमिंग जुआ से अलग है और सर्वोच्च न्यायालय तथा अनेक उच्च न्यायालयों ने कुशलता-आधारित गेम्स को विधि-सम्मत व्यावसायिक गतिविधि होने की पुष्टि की है। इसलिए, ऑनलाइन स्किल गेमिंग के तर्कसंगत करारोपण से सभी हिस्सेदारों के लिए परस्पर लाभकारी स्थिति पैदा करने में मदद मिलेगी।’

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के गेमिंग उद्योग को एक संभावित विश्‍व अग्रणी के रूप में अनुमोदित करते हुए वर्तमान वैश्वीकृत और डिजिटलीकृत अर्थव्यवस्था में इस उद्योग की सामाजिक-आर्थिक तथा सांस्कृतिक महत्व पर जोर दिया है। इस व्यावसायिक क्षेत्र को वित्त मंत्री द्वारा इस वर्ष के अपने बजट भाषण में एनीमेशन, विजुअल आर्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) कार्य बल की स्थापना की घोषणा के बाद और भी प्रोत्साहन मिला है। बर्डे के अनुसार, ’हमें भारत के गेमिंग सेक्टर में एक नए युग का आरम्भ दिख रहा है। यह तथ्य कि सरकार इस उद्योग को सहारा दे रही है, सचमुच उत्साहवर्द्धक है। फिर भी, इस व्यावसायिक क्षेत्र के असली विकास की कहानी प्रगतिशील और अनुकूल नीतियों सेनिर्धारित होगी जो  सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों को स्थापित करने और जिम्मेदार गेमिंग को प्रोत्साहित करने वाली होगी।’

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इस मंच पर पत्रकारों को दिए जाएंगे अवॉर्ड्स, वक्ताओं में शामिल होंगे ये बड़े नाम

साप्ताहिक राष्ट्रीय पत्रिका ‘पांचजन्य’ और ऑर्गनाइजर की मूल कंपनी ‘भारत प्रकाशन’ (दिल्ली) लिमिटेड ने मीडिया पुरस्कारों की घोषणा की है। 22 मई को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में दिए जाएंगे ये अवॉर्ड्स

Last Modified:
Tuesday, 17 May, 2022
Awards

साप्ताहिक राष्ट्रीय पत्रिका ‘पांचजन्य’ (Panchjanya) और ‘ऑर्गनाइजर‘ (Organiser) अपनी यात्रा के पचहत्तर वर्ष पूरे कर रहे हैं।  इस अवसर पर इन दोनों साप्ताहिकों की मूल कंपनी ‘भारत प्रकाशन’ (दिल्ली) लिमिटेड ने कैलेंडर वर्ष 2021 में किए गए कार्यों के लिए नौ श्रेणियों में मीडिया पुरस्कारों की घोषणा की है। ये अवॉर्ड्स 22 मई को दिल्ली में चाणक्यपुरी के डिप्लोमैटिक एंक्लेव स्थित द अशोक होटल में सुबह नौ बजे से रात साढ़े आठ बजे तक होने वाले एक कार्यक्रम में प्रदान किए जाएंगे।

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत कार्यक्रम में बतौर वक्ता शामिल होंगे।

जिन नौ श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाने हैं, वह इस प्रकार हैं।

हिंदी (प्रिंट, डिजिटल और एवी): यह विशिष्ट पुरस्कार हिंदी भाषा के लिए प्रिंट, डिजिटल और एवी मीडिया से प्रत्येक पत्रकार को प्रदान किया जाएगा, जिसका कवरेज उत्कृष्ट, स्वतंत्रता, गहराई, गुणवत्ता और प्रभाव वाला होगा।

अंग्रेजी (प्रिंट, डिजिटल और एवी): यह विशिष्ट पुरस्कार अंग्रेजी भाषा के लिए प्रिंट, डिजिटल और एवी मीडिया से प्रत्येक पत्रकार को प्रदान किया जाएगा, जिसका कवरेज उत्कृष्ट, स्वतंत्रता, गहराई, गुणवत्ता और प्रभाव वाला होगा।

क्षेत्रीय भाषा (प्रिंट, डिजिटल और एवी): यह विशिष्ट पुरस्कार क्षेत्रीय भाषा के लिए प्रिंट, डिजिटल और एवी मीडिया से प्रत्येक पत्रकार को प्रदान किया जाएगा, जिसका कवरेज उत्कृष्ट, स्वतंत्रता, गहराई, गुणवत्ता और प्रभाव वाला होगा।

पर्यावरण (प्रिंट, डिजिटल और एवी): यह विशिष्ट पुरस्कार जन जागरूकता और पर्यावरण के मुद्दों की समझ को बढ़ावा देने के लिए असाधारण योगदान के लिए किसी भी समाचार पत्र, पत्रिका या टेलीविजन में एक लेख या श्रृंखला के व्यक्ति को प्रदान किया जाएगा।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी (प्रिंट, डिजिटल और एवी): यह विशिष्ट पुरस्कार जन जागरूकता और विज्ञान और प्रौद्योगिकी की समझ को बढ़ावा देने के लिए असाधारण योगदान के लिए किसी भी समाचार पत्र, पत्रिका या टेलीविजन में एक लेख या श्रृंखला के व्यक्ति को प्रदान किया जाएगा।

व्यापार और आर्थिक पत्रकारिता (प्रिंट, डिजिटल और एवी): यह विशिष्ट पुरस्कार उस पत्रकार को प्रदान किया जाएगा जो व्यवसाय या अर्थव्यवस्था के किसी भी पहलू को कवर करते हुए स्वतंत्रता, कठोरता, गहराई और विश्लेषण के उच्चतम मानकों को दर्शाता है।

खेल (प्रिंट, डिजिटल और एवी): यह विशिष्ट पुरस्कार प्रिंट, डिजिटल और एवी मीडिया में प्रत्येक पत्रकार को प्रदान किया जाएगा, जिसका कवरेज नए रास्ते तलाशता है और खेल रिपोर्टिंग में एक नई दिशा पाता है।

कला, संस्कृति और मनोरंजन (प्रिंट, डिजिटल और एवी): यह विशिष्ट पुरस्कार कला, संस्कृति और मनोरंजन पर प्रिंट, डिजिटल और एवी मीडिया में प्रत्येक पत्रकार को प्रदान किया जाएगा, जिसका कवरेज बेहर होगा।

रचनात्मक अभियान के लिए पुरस्कार: यह विशिष्ट पुरस्कार जन जागरूकता और विज्ञान और प्रौद्योगिकी की समझ को बढ़ावा देने के लिए असाधारण योगदान के लिए किसी भी समाचार पत्र, पत्रिका या टेलीविजन में एक लेख या श्रृंखला के व्यक्ति को प्रदान किया जाएगा।

गौरतलब है कि इस योजना के तहत आवेदन करने की तिथि एक मई 2022 से लेकर 15 मई 2022 तक रखी गई थी। इन पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन आवेदन के साथ ‘भारत प्रकाशन’ के कार्यालय में हार्ड कॉपी जमा/भेजने की सुविधा भी दी गई थी।

प्रविष्टियों का आकलन करने के लिए जूरी सदस्यों का एक पैनल गठित किया गया है। जूरी में प्रख्यात पत्रकार और शिक्षाविद शामिल हैं। इस संबंध में जूरी का निर्णय अंतिम होगा।

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अल-जजीरा की पत्रकार के मारे जाने की भारतीय पत्रकार संगठनों ने की निंदा

भारत के पत्रकार संगठनों ने अल-जजीरा चैनल की एक महिला पत्रकार के मारे जाने की शनिवार को निंदा की।

Last Modified:
Monday, 16 May, 2022
shirin445

भारत के पत्रकार संगठनों ने अल-जजीरा चैनल की एक महिला पत्रकार के मारे जाने की शनिवार को निंदा की। वेस्ट बैंक के जेनिन में इजराइली सेना की छापामार कार्रवाई के दौरान गोली लगने से महिला पत्रकार की मौत हो गई थी। संगठनों ने इस मामले में एक स्वतंत्र जांच की मांग भी की।

इंडियन वूमेन प्रेस कॉर्प्स, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और प्रेस एसोसिएशन ने यहां एक संयुक्त बयान में कहा, ‘हम अंतरराष्ट्रीय पत्रकार समुदाय और अन्य द्वारा इस घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन करते हैं। भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए।’

गौरतलब है कि शिरीन अबू अक्लेह (51) अरब जगत की एक चर्चित पत्रकार थीं। वह पिछले 25 वर्षों से अल जजीरा के सेटेलाइट चैनल के लिए इजराइली शासन में फलस्तीनी नागरिकों के जीवन पर रिपोर्टिंग करने के लिए जानी जाती थीं। बुधवार को वेस्ट बैंक के जेनिन शहर में इजराइली सेना की एक कार्रवाई के दौरान गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी।

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मनोज बाजपेयी के संघर्ष व हुनर का अफसाना है पत्रकार पीयूष पांडे की ‘कुछ पाने की जिद’

मुंबई पहुंचने वाले हर युवा का सपना सच नहीं होता, लेकिन कुछ हासिल करने की जिद पाल ली जाए और उसके लिए मेहनत की अति कर दी जाए तो सफलता इंसान की मुट्ठी में आ ही जाती है।

Last Modified:
Friday, 13 May, 2022
Piyush Pandey Book

मीतेन रघुवंशी, वरिष्ठ पत्रकार।।

‘कुछ पाने की जिद’ किस तरह एक सामान्य से व्यक्ति को फर्श से अर्श पर पहुंचा सकती है, इसकी मिसाल है अभिनेता मनोज बाजपेयी के संघर्ष की कहानी। मुंबई पहुंचने वाले हर युवा का सपना सच नहीं होता, लेकिन कुछ हासिल करने की जिद पाल ली जाए और उसके लिए मेहनत की अति कर दी जाए तो सफलता इंसान की मुट्ठी में आ ही जाती है। मनोज बाजपेयी की बायोग्राफी को पढ़ते हुए बार बार अहसास होता है कि उनके संघर्ष की दास्तां को हर उस युवा को पढ़ना चाहिए, जो किसी भी क्षेत्र में नाम बनाना चाहता है। मनोज बाजपेयी की बायोग्राफी हाल में बाजार में आई है, जिसे लिखा है वरिष्ठ पत्रकार पीयूष पांडे ने।

पीयूष पांडे पेशे से टीवी पत्रकार हैं और इन दिनों ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में सीनियर पद पर हैं। लेकिन, उनका प्रोफाइल पत्रकार से अलग लेखक, संवाद लेखक, व्यंग्यकार का भी है। पीयूष के तीन चर्चित व्यंग्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। ‘कबीरा बैठा डिबेट में’ 2019 में प्रकाशित हुआ था, जिसने खासी सुर्खियां बटोरी थीं। इसके अलावा कोविड काल में पीयूष ने कॉमेडी सीरियल ‘महाराज की जय हो’ के कई एपिसोड के संवाद लिखे, जबकि कुछ बरस पहले आई फिल्म ब्लू माउंटेंस में वह एसोसिएट डायरेक्टर रह चुके हैं। लेकिन, बतौर व्यंग्यकार पीयूष अरसे से सक्रिय हैं। व्यंग्य अलग विधा है और बायोग्राफी लेखन बिलकुल अलग। लेकिन, पीयूष पांडे ने बहुत खूबसूरती से इस विधा को साधा है। पीयूष पांडे का मनोज बाजपेयी से पुराना परिचय है। लेकिन, इस जीवनी को लेकर जितना शोध किया गया है, उससे बायोग्राफी की विश्वसनीयता बहुत बढ़ जाती है। दरअसल, मनोज बाजपेयी की यह जीवनी एक फिल्मी सितारे की जीवनी नहीं है। मनोज बाजपेयी की यह जीवनी बिहार के एक छोटे से गांव से निकले एक युवा के संघर्ष की ऐसी कहानी है, जिसे ऐतिहासिक संदर्भ और अनूठी किस्सागोई दिलचस्प बनाते हैं। मसलन-जब पाठक पढ़ते हैं कि मनोज बाजपेयी गांव के जिस घर में रहते थे, वहां कभी गांधीजी भी आए थे तो पाठक चौंकते हैं।

अब कुछ किस्सों पर गौर फरमाइए-

मनोज के नाटक कौशल का एक उदाहरण उनके पिता राधाकांत बाजपेयी देते हैं। उन्होंने मुझे बताया, ‘एक बार ‘गार्जियन डे’ पर हम मनोज के स्कूल गए। वहां मनोज एक नाटक में हिस्सा ले रहा था। इसमें मनोज एक देहाती पंडित के चेले का रोल निभा रहा था। नाटक के एक दृश्य में पंडित जी और उनका चेला (मनोज) मंच पर आते हैं। चेला मिट्टी के एक बर्तन में मिठाई लाकर पंडित जी को देता है। पंडितजी बर्तन से एक-एक रसगुल्ला निकालकर खाते हैं। चेला उन्हें ललचाई नजर से देखता है। अचानक संवाद बोलते हुए एक रसगुल्ला पंडित जी के हाथ से फिसलकर मंच पर गिर जाता है। लेकिन जैसे ही रसगुल्ला स्टेज पर गिरता है, चेला फुर्ती से रसगुल्ला उठाता है और मुंह में डाल लेता है। ये सीन नाटक का हिस्सा नहीं था। लेकिन जिस चपलता से मनोज ने यह किया, उसे देखकर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। नाटक के मध्यांतर में मनोज मुझसे मिलने आया तो मैंने पूछा कि क्या वो हरकत नाटक का हिस्सा थी। वो बोला-नहीं। मैंने पूछा कि फिर कैसे किया? तो बोला-बस दिमाग में आया तो कर दिया। मुझे उसी वक्त लग गया था कि ये लड़का कुछ इधर-उधर का ही करेगा। इस नाटक का नाम था ‘बेमेल ब्याह’। इस नाटक में पहली बार मनोज ने बिना जाने वो कारनामा किया था, जिसे थिएटर और सिनेमा की भाषा में ‘इंप्रूवाइजेशन’ कहा जाता है।’

बेतिया के एक लड़के के लिए दिल्ली पहुंचना किसी सपने से कम नहीं था। दिल्ली का रंग ढंग मनोज के लिए अबूझ था। मनोज कहते हैं, ‘दिल्ली के शुरुआती दिनों की बात है। मुझे कुछ पता नहीं था। आलम ये कि मुझे 302 नंबर की बस पकड़ने को कहा गया तो मैं दो घंटे तक कमला नगर बस स्टॉप पर बसों की रजिस्ट्रेशन नंबर की प्लेट तकता रहा।’ इस किताब में 21 अध्याय हैं, जिसके शुरुआती अध्याय मनोज की पारिवारिक पृष्ठभूमि और मनोज के फिल्मी लत लगने के किस्सों से पटी पड़ी है। मनोज बाजपेयी कैसे बेतिया में फिल्म देखते हुए एक थिएटर में ऐसी लड़ाई में उलझ गए कि चाकू चल गए, उनके खिलाफ एफआईआर हो गई और उन्हें गोरखपुर भागना पड़ा-ऐसे तमाम किस्से किताब की शुरुआत में हैं।

पीयूष ने बेहद सरल भाषा में किताब को लिखा है और कई जगह उनका फिल्मी लेखन का अनुभव झलकता है, क्योंकि किताब पढ़ते हुए दृश्य दिमाग में कौंधने लगता है। खुद मनोज बाजपेयी ने एक इंटरव्यू में अपनी बायोग्राफी के विषय में कहा, ‘मुझे जीवन के कई पुराने किस्से याद आ गए, जिन्हें मैं भूल चुका था। पीयूष ने बहुत मेहनत से किताब को लिखा है और वो उन लोगों तक पहुंच गए हैं, जिनका मेरे जीवन में बहुत निकट संबंध रहा है।’ मनोज बाजपेयी की इस बायोग्राफी में कई ऐसे प्रसंग भी हैं, जिन्हें लेकर अभी तक ज्यादा कुछ नहीं लिखा गया या कहें कि इंटरनेट पर कोई जानकारी नहीं है। मसलन, उनकी पहली शादी के विषय में। या अनुराग कश्यप और रामगोपाल वर्मा से उनकी लड़ाई की असल वजह के विषय़ में।

मनोज बाजपेयी की इस जीवनी को उन लोगों के मनोज के विषय में अनुभव और खास बनाते हैं, जो उनसे बहुत करीब से जुड़े रहे हैं। लेखक ने अनुराग कश्यप, अनुभव सिन्हा, पीयूष मिश्रा, मकरंद देशपांडे, पंकज त्रिपाठी, प्रकाश झा, महेश भट्ट समेत कई नामचीन लोगों से बात की और उनकी बातों को मनोज की कहानी में इस तरह पिरोया है कि यह सब लोग कहानी का हिस्सा मालूम होते हैं।पेंगुइन इंडिया ने इस किताब को प्रकाशित किया है और हिंदी के बाद अंग्रेजी, मराठी और गुजराती संस्करण प्रकाशित होने वाले हैं।   

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

किताब का नाम- मनोज बाजपेयी : कुछ पाने की जिद

लेखक- पीयूष पांडे

पेज- 218

पब्लिशर- पेंगुइन इंडिया

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दुनिया को अलविदा कह गए मातृभूमि के पूर्व संपादक वी.पी. रामचंद्रन

प्रख्यात पत्रकार वी.पी. रामचंद्रन अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका निधन बुधवार को कोच्चि के पास कक्कानाडु स्थित अपने आवास में हुआ।

Last Modified:
Thursday, 12 May, 2022
VP-Ramachandara4545

प्रख्यात पत्रकार वी.पी. रामचंद्रन अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका निधन बुधवार को कोच्चि के पास कक्कानाडु स्थित अपने आवास में हुआ। वह 98 वर्ष के थे। उनके परिवार ने मीडिया को यह जानकारी दी।

रामचंद्रन ने 1959 में लाहौर से न्यूज एजेंसी पीटीआई के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर काम किया था। इसके बाद यूएनआई और एसोसिएट प्रेस न्यूज एजेंसी के साथ भी वे संवाददाता के रूप में काम कर चुके थे। 1978 में कार्यकारी संपादक के रूप में ‘मातृभूमि’ में शामिल हुए और बाद में वे ‘मातृभूमि’ अखबार के संपादक भी रहे।

वीपीआर के नाम से मशहूर रामचंद्रन ने 1990 के दशक में केरल प्रेस अकादमी के अध्यक्ष का पद भी संभाला था।

पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें केरल सरकार ने 2013 में सम्मानित किया था। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने रामचंद्रन के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

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PM मोदी के सियासी सफर पर लिखी इस किताब ने दी दस्तक, उपराष्ट्रपति ने किया विमोचन

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पीएम नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन के 20 वर्षों पर आई पुस्तक को राजनीति में सक्रिय लोगों के लिए गीता के समान बताया।

Last Modified:
Wednesday, 11 May, 2022
Book Launching

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 साल के सियासी सफर और उन पर दिए गए वक्तव्यों पर आधारित किताब ‘मोदी@ड्रीम्स मीट डिलीवरी’ (MODI@20 DREAMS MEET DELIVERY) 11 मई को लॉन्च की गई। दिल्ली के विज्ञान भवन में होने वाले एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने इस किताब का विमोचन किया। इस मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद रहे।

बता दें कि यह किताब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बुद्धिजीवियों और विशेषज्ञों के वक्तव्यों का संकलन है। ‘ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन’ (BlueKraft Digital Foundation) ने इस किताब को संपादित किया है। पांच चैप्टर और 21 सेक्शन वाली इस किताब को रूपा पब्लिकेशन ने पब्लिश किया है। कार्यक्रम को दूरदर्शन की सीनियर कंसल्टेंट और न्यूज एंकर रीमा पाराशर ने होस्ट किया।

किताब की लॉन्चिंग के मौके पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि जो लोग भारत के सर्वांगीण और समावेशी विकास पर विश्वास करते हैं,  विशेषकर समाज सेवा में काम करते है, उनके लिए ये पुस्तक गीता के समान है। मोदी जी के 20 साल को सबने देखा है, लेकिन इससे पहले के उनके 30 सालों के सफर को जाने बिना यह अधूरा है।

वहीं, उपराष्ट्रपति ने पुस्तक के लेखकों को विश्लेषण और प्रस्तुति के लिए बधाई देते हुए कहा कि लेखकों ने पीएम मोदी की 20 साल की यात्रा को कुशलता से लिखा है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि नरेंद्र भाई दामोदरदास मोदी ने पिछले 20 वर्षों में एक अलग स्थान बनाया है। वह लगभग 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और पिछले आठ सालों से देश के प्रधानमंत्री हैं।

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दानिश सिद्दकी समेत इन चार भारतीय पत्रकारों को मिला पुलित्जर पुरस्कार

पत्रकारिता, किताब, ड्रामा और संगीत के अलग-अलग क्षेत्रों में पुलित्जर पुरस्कार 2022 का ऐलान कर दिया गया है।

Last Modified:
Wednesday, 11 May, 2022
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पत्रकारिता, किताब, ड्रामा और संगीत के अलग-अलग क्षेत्रों में पुलित्जर पुरस्कार 2022 का ऐलान कर दिया गया है। दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी समेत चार भारतीयों को फीचर फोटोग्राफी श्रेणी में प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार 2022 से सम्मानित किया गया है। रायटर्स के दिवंगत दानिश सिद्दिकी को यह अवॉर्ड मरणोपरांत दिया गया है। इसके अलावा उनके सहयोगी अदनान अबिदी, सना इरशाद मट्टू, अमित दवे का नाम शामिल है।

दानिश सिद्दीकी और उनके सहयोगियों को ये पुरस्कार कोविड के दौरान उनके द्वारा खींची गई तस्वीरों के लिए दिया गया है।

38 वर्षीय दानिश सिद्दीकी पिछले साल जुलाई में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर कब्जे के दौरान हुए संघर्ष के कवरेज के दौरान गोली लगने से मारे गए थे। तब दानिश सिद्दीकी अफगानिस्तान में ड्यूटी पर थे। यह दूसरी बार है जब सिद्दीकी ने पुलित्जर पुरस्कार जीता है। रोहिंग्या संकट के कवरेज के लिए रॉयटर्स टीम के हिस्से के रूप में उन्हें 2018 में इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अफगानिस्तान संघर्ष, हॉन्गकॉन्ग विरोध और एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप की अन्य प्रमुख घटनाओं को व्यापक रूप से कवर किया था।

बता दें कि पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता के क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है। इसकी शुरुआत 1917 से हुई थी।

रूस के हमले से तबाह यूक्रेन के पत्रकारों को साल 2022 के पुलित्जर पुरस्कार विशेष प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया है। पत्रकारिता के टॉप सम्मानित जूरी ने कैपिटल पर 6 जनवरी को हुए हमले, अफगानिस्तान से वापसी और फ्लोरिडा में सर्फसाइड कॉन्डोमिनियम के ढहने के दौरान कवरेज को भी मान्यता दी है। पुलित्जर पुरस्कार अमेरिका में समाचार पत्र, पत्रिका, ऑनलाइन पत्रकारिता, साहित्य और संगीत रचना में उपलब्धियों के लिए एक पुरस्कार है।

पत्रकारिता में विजेताओं की यहां देखें पूरी सूची-

ब्रेकिंग न्यूज रिपोर्टिंग:
विजेता: मियामी हेराल्ड के कर्मचारी, फ्लोरिडा में समुद्रतट अपार्टमेंट टावरों के ढहने के कवरेज के लिए

खोजी रिपोर्टिंग:
विजेता: रेबेका वूलिंगटन के कोरी जी. जॉनसन और टैम्पा बे टाइम्स के एली मरे, इनको  फ्लोरिडा के एकमात्र बैटरी रीसाइक्लिंग प्लांट के अंदर अत्यधिक जहरीले खतरों को उजागर करने के लिए अवॉर्ड मिला है।

व्याख्यात्मक रिपोर्टिंग:
विजेता: क्वांटा पत्रिका के कर्मचारी, विशेष रूप से नताली वोल्चोवर, इनको वेब स्पेस टेलीस्कोप कैसे काम करता है, इस पर रिपोर्टिंग के लिए सम्मान मिला।

स्थानीय रिपोर्टिंग:
विजेता: बेटर गवर्नमेंट एसोसिएशन के मैडिसन हॉपकिंस और शिकागो ट्रिब्यून के सेसिलिया रेयेस को शिकागो के अधूरी भवन और अग्नि सुरक्षा संबंधी रिपोर्टिंग के लिए

राष्ट्रीय रिपोर्टिंग:
विजेता: द न्यूयॉर्क टाइम्स के कर्मचारी

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग:
विजेता: द न्यूयॉर्क टाइम्स के कर्मचारी

सार्वजनिक सेवा: 
विजेता: वॉशिंगटन पोस्ट, 6 जनवरी 2021 कैपिटल हिल पर हमले की रिपोर्टिंग के लिए

फीचर लेखन:
विजेता: द अटलांटिक के जेनिफर सीनियर

फीचर फोटोग्राफी:
विजेता: अदनान आबिदी, सना इरशाद मट्टू, अमित दवे और रॉयटर्स के दिवंगत दानिश सिद्दीकी, भारत में कोरोना समय में फोटो के लिए मिला सम्मान

कॉमेंट्री:
विजेता: मेलिंडा हेनेबर्गर 

आलोचना:
विजेता: सलामिशा टिलेट, द न्यूयॉर्क टाइम्स

इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री:
विजेता: फहमीदा अजीम, एंथोनी डेल कर्नल, जोश एडम्स और वॉल्ट हिक्की 

ऑडियो रिपोर्टिंग:
विजेता: फ्यूचूरो मीडिया और पीआरएक्स के कर्मचारी 

उपन्यास:
विजेता: द नेतन्याहूस, लेखक- जोशुआ कोहेन

नाटक:
विजेता: फैट हैम, जेम्स इजामेसो द्वारा

जीवनी:
विजेता: चेजिग मी टू माई ग्रेव

कविता:
विजेता: फ्रैंक: सॉनेट्स, डायने सीस द्वारा

सामान्य गैर-कथा:
विजेता: अदृश्य बच्चा: एक अमेरिकी शहर में गरीबी, जीवन रक्षा और आशा, एंड्रिया इलियट द्वारा

संगीत:
विजेता: रेवेन चाकोन, वॉयसलेस मास के लिए

 

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अब अतुल माहेश्वरी के नाम से जानी जाएगी प्रयागराज की यह प्रमुख रोड

सड़कों का नाम बदलने के क्रम में मंगलवार को रखे गए इस प्रस्ताव पर नगर निगम सदन की बैठक में मौजूद सभी पार्षदों ने ध्वनिमत से मुहर लगा दी।

Last Modified:
Wednesday, 11 May, 2022
Atul Maheshwari

प्रयागराज की प्रमुख सड़कों में शामिल क्लाइव रोड पर एक्सिस बैंक से जीएचएस चौराहे तक का हिस्सा अब पत्रकारिता, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले ‘अमर उजाला’ (Amar Ujala) के नवोन्मेषक अतुल माहेश्वरी के नाम से जाना जाएगा।

‘अमर उजाला’ में छपी एक खबर के अनुसार, सड़कों का नाम बदलने के क्रम में मंगलवार को नगर निगम के सदन में सिविल लाइंस स्थित क्लाइव रोड का नाम अतुल माहेश्वरी मार्ग करने का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव पर सदन की बैठक में मौजूद सभी पार्षदों ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। जल्द ही सड़क पर बदले हुए नाम का बोर्ड भी लगा दिया जाएगा।

बताया जाता है कि यह प्रस्ताव वर्ष 2018 में नगर निगम को दिया गया था, लेकिन कोरोना के कारण यह अटका हुआ था। अब निगम की कमेटी से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इस प्रस्ताव को सदन के पटल पर रखा गया, जहां निगम के सदन में सर्वसम्मति से इस पर मुहर लग गई।

गौरतलब है कि पत्रकारिता में अतुल माहेश्वरी का अतुलनीय योगदान रहा है। वह करीब 37 वर्षों तक मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय रहे और अमर उजाला समूह को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमर उजाला के प्रबंध निदेशक होने के साथ-साथ वह इंडियन न्यूज पेपर सोसाइटी में उत्तर प्रदेश शाखा के चेयरमैन, आईआरएस, सीआईआई जैसी संस्थाओं के सदस्य भी रहे थे।

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श्रीवर्धन त्रिवेदी ने बताया विचार का महत्व, सिखाए पत्रकारिता में सफल होने के गुर

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में ‘एंकरिंग कला’ पर विशेष व्याखान का हुआ आयोजन

Last Modified:
Wednesday, 11 May, 2022
MCU

जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज है विचार। इसमें भी महत्वपूर्ण है सही विचार। विचार ही हमारे व्यवहार को तय करता है। व्यवहार हमारे कार्य को प्रभावित करता है और ये कर्म ही हमारे जीवन को तय करते हैं। यानी हमारा जीवन हमारे हाथ में होता है। हमारे विचार अच्छे हैं तो जीवन भी सफल होगा। उन्होंने कहा कि हमें अपने मन–विचारों पर संकल्प रखना चाहिए। हम देखें कि हमारी विचार प्रक्रिया सही दिशा में हो। यह विचार जाने-माने टीवी न्यूज एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में ‘एंकरिंग कला’ पर आयोजित विशेष व्याख्यान में व्यक्त किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि टीवी पत्रकारिता में लोग एंकर्स से प्रभावित होकर आते हैं लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि इस क्षेत्र में काम के अन्य अवसर भी हैं। रिपोर्टिंग से लेकर शोध तक में अच्छे लोगों की आवश्यकता है। एंकरिंग में उच्चारण का बड़ा महत्व है। हमारी प्रस्तुति पर हमारी मातृभाषा का प्रभाव रहता है। शुद्ध उच्चारण के लिए बहुत अभ्यास करना होता है। इसके अलावा नामों का उच्चारण भी महत्व रखता है। एक एंकर को इसलिए हटाना पड़ गया क्योंकि उसने चीन के राष्ट्रपति के नाम को गलत ढंग से बता दिया। उन्होंने कहा कि एंकरिंग सिर्फ प्रस्तुति नहीं है, बल्कि उसके पीछे बहुत मेहनत रहती है। कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि आज पत्रकार को कम से कम एक विषय में पारंगत होना चाहिए। इससे पत्रकार को पहचान मिलती है। यह समय विशेषज्ञता का है।

वहीं, मुख्य वक्ता श्रीवर्धन त्रिवेदी ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में हमें हार नहीं माननी चाहिए। हमें अपने काम से प्रेम करना चाहिए। जब हम अपने काम से प्रेम करना सीख लेते हैं तो हमें भटकना नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग करें या एंकरिंग करें या फिर कोई और काम करें, हमें अपने काम पर विश्वास रखना चाहिए। यह विश्वास ही हमें सफलता दिलाता है। उन्होंने कहा कि हम पत्रकारिता में भले ही किसी से प्रेरित होकर आते हैं लेकिन समय के साथ हम स्वयं का मूल्यांकन कर लेते हैं और यह समझ लेते हैं कि हम किस काम के लिए बने हैं। सफलता का एक और मंत्र है–फोकस रहना। हमें अपने काम और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।

त्रिवेदी ने विद्यार्थियों को एंकरिंग के गुर सिखाते हुए कहा कि पत्रकारिता प्रोफेशन नहीं है, यह जीवन शैली है। यानी आपको पत्रकारिता को जीना पड़ता है। एंकर के लिए जरूरी है कि उसकी पकड़ कथ्य और तथ्य के साथ सत्य पर हो। अच्छा एंकर बनने के लिए आपको बहुत पढ़ना चाहिए।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रस्तावना जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष जोशी ने रखी। उन्होंने कहा कि एंकर बनने के लिए सिर्फ अच्छा दिखाना और अच्छी आवाज ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विविध विषयों का ज्ञान–समझ होना सबसे महत्वपूर्ण है। वहीं, संचालन विद्यार्थी अमृत प्रकाश ने और आभार प्रदर्शन सहायक प्राध्यापक डॉ. उर्वशी परमार ने किया। इस अवसर पर सभी विभागों के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। ऑनलाइन माध्यम से खंडवा, रीवा और दतिया परिसर के विद्यार्थी भी आयोजन में शामिल हुए।

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IIMC और MGAHV मिलकर इस दिशा में करेंगे काम, हुआ करार

एमओयू पर आईआईएमसी की ओर से महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने हस्ताक्षर किए।

Last Modified:
Wednesday, 11 May, 2022
MOU

भारतीय भाषाओं में अनुवाद और शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) नई दिल्ली और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के बीच मंगलवार को सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। एमओयू पर आईआईएमसी की ओर से महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने हस्ताक्षर किए।

सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि आईआईएमसी भारतीय भाषाओं के विकास को लेकर सजग है। संस्थान जम्मू और अमरावती परिसर में इसी वर्ष हिंदी पत्रकारिता पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। साथ ही इस वर्ष तीन परिसरों में डिजिटल पत्रकारिता पाठ्यक्रम की शुरुआत भी की जा रही है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि आईआईएमसी ने भारतीय भाषाओं में पाठ्य पुस्तकें तैयार करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इससे मीडिया में भारतीय भाषाओं के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आईआईएमसी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम आरंभ करने की तैयारी में है।

भारतीय भाषाओं में अनुवाद की आवश्यकता पर जोर देते प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि हिंदी और भारतीय भाषाओं के विद्यार्थियों को उनकी अपनी भाषा में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए दोनों संस्थान मिलकर प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय है। इस सहमति ज्ञापन के माध्यम से दोनों संस्थान भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण मीडिया शिक्षण हेतु ठोस प्रयास करेंगे।

प्रो. शुक्ल ने कहा कि इस सहमति ज्ञापन से दोनों संस्थानों के मीडिया पाठ्यक्रम में एकरूपता लाने के प्रयास भी किए जाएंगे, साथ ही संचार एवं मीडिया शोध से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी हम मिलकर काम करेंगे। इस अवसर पर आईआईएमसी के डीन (छात्र कल्याण) प्रो. प्रमोद कुमार ने कहा कि भारतीय जन संचार संस्थान 1965 से लेकर आज तक गुणवत्तापूर्ण मीडिया शिक्षा प्रदान कर रहा है और आईआईएमसी से तैयार पत्रकार देशभर के विभिन्न मीडिया संस्थानों में अग्रणी भूमिकाओं में हैं।

वहीं, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय वर्ष 1997 से हिंदी भाषा के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं के संवर्धन के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में कुल आठ विद्यापीठ हैं, जहां स्नातक और परास्नातक का अध्ययन और शोध कार्य होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद उनके विश्वविद्यालय को भारतीय जन संचार संस्थान के अनुभवों का लाभ मिलेगा इस अवसर पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. हनुमान प्रसाद शुक्ल और आईआईएमसी के डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह भी उपस्थित थे। 

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