मेटा (Meta) ने डिजिटल विज्ञापन के बाजार में बड़ा कदम उठाते हुए सात देशों में बाइटडांस (ByteDance) के विज्ञापनों पर रोक लगा दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मेटा (Meta) ने डिजिटल विज्ञापन के बाजार में बड़ा कदम उठाते हुए सात देशों में बाइटडांस (ByteDance) के विज्ञापनों पर रोक लगा दी है। बाइटडांस, टिकटॉक (TikTok) की मूल कंपनी है। यह रोक फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) और मेटा के दूसरे प्लेटफॉर्म पर लागू की गई है। इसके साथ ही दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा अब यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स तक सीमित न रहकर विज्ञापन के कारोबार तक पहुंच गई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह रोक गुरुवार, 8 अक्टूबर से लागू हुई है। अमेरिका, कनाडा, मिस्र, इंडोनेशिया, जापान, थाईलैंड और वियतनाम में बाइटडांस के विज्ञापन नहीं चलाए जा सकेंगे। इसमें बाइटडांस की ओर से सीधे दिए जाने वाले विज्ञापनों के साथ-साथ उन तीसरे पक्ष के विज्ञापनदाताओं के अभियान भी शामिल हैं, जो यूजर्स को टिकटॉक या बाइटडांस के दूसरे प्लेटफॉर्म पर ले जाते हैं।
मेटा ने इस फैसले को अपनी विज्ञापन नीतियों में व्यापक बदलाव के बजाय कारोबारी फैसला बताया है। कंपनी के प्रवक्ता क्रिस स्ग्रो ने ब्लूमबर्ग से कहा कि मेटा अपने उत्पादों और यूजर अनुभव के जरिए प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला करना जारी रखेगी। हालांकि, इस रोक के बाद बाइटडांस के लिए इन सात देशों में मेटा के विज्ञापन नेटवर्क का इस्तेमाल करके अपनी सेवाओं का प्रचार करना मुश्किल हो जाएगा।
यूजर्स और विज्ञापनदाताओं के लिए बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
यह फैसला दिखाता है कि सोशल मीडिया कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ने तक सीमित नहीं है। फेसबुक और इंस्टाग्राम की टिकटॉक से यूजर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और विज्ञापनदाताओं को लेकर सीधी प्रतिस्पर्धा है। छोटे वीडियो सोशल मीडिया का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं।
मेटा की इस रोक से बाइटडांस के पास नए यूजर्स तक पहुंचने का एक रास्ता सीमित हो सकता है। हालांकि, इससे कंपनी के कुल विज्ञापन कारोबार या नए यूजर्स जोड़ने की रणनीति पर कितना असर पड़ेगा, यह अभी साफ नहीं है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भी विवाद
दोनों कंपनियों के बीच यह खींचतान ऐसे समय में हो रही है, जब इंटरनेट पर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज है।
अगस्त में मेटा ने अमेरिका के कई राज्यों के साथ एक समझौता किया था, जिसकी कीमत 18 अरब डॉलर तक बताई गई। यह समझौता मेटा के प्लेटफॉर्म पर बच्चों और किशोरों को कथित नुकसान पहुंचने से जुड़े आरोपों के मामले में हुआ। इसके तहत फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कम उम्र के यूजर्स के इस्तेमाल को लेकर बदलाव करने होंगे। इनमें रोजाना इस्तेमाल की समय-सीमा, रात के समय इस्तेमाल पर रोक और उम्र के हिसाब से प्रतिबंधित सामग्री के लिए ज्यादा सुरक्षा उपाय शामिल हैं। मेटा ने इस मामले में लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।
इसके बाद मेटा ने टिकटॉक और गूगल के स्वामित्व वाले यूट्यूब (YouTube) से भी इसी तरह के सुरक्षा उपाय अपनाने की मांग की। कंपनी का कहना है कि किशोरों की सुरक्षा पूरे उद्योग की जिम्मेदारी होनी चाहिए, न कि किसी एक प्लेटफॉर्म की।
इस मुद्दे पर दोनों कंपनियों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। मेटा ने जरूरत से ज्यादा स्क्रीन इस्तेमाल और ऑनलाइन सुरक्षा पर होने वाली चर्चाओं में टिकटॉक की भूमिका की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है।
टिकटॉक ने भी उठाए कदम
विज्ञापन को लेकर दोनों कंपनियों के बीच विवाद का असर प्लेटफॉर्म की सुविधाओं पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, टिकटॉक ने यूजर प्रोफाइल से इंस्टाग्राम के लिए दिए जाने वाले खास लिंक हटा दिए हैं। हालांकि, यूजर्स अब भी अपनी प्रोफाइल में ऐसे वेबसाइट लिंक जोड़ सकते हैं, जो लोगों को दूसरी सेवाओं तक ले जाते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टिकटॉक ने किशोरों की सुरक्षा को लेकर समान प्रतिबद्धताएं अपनाने की मांग करने वाले मेटा के विज्ञापनों को अपने प्लेटफॉर्म पर जगह नहीं दी।
इस तरह दोनों कंपनियां दो मोर्चों पर मुकाबला कर रही हैं। एक ओर वे यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को अपने साथ जोड़ना चाहती हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अपनी बात भी आगे बढ़ा रही हैं। मेटा का विज्ञापनों पर रोक लगाने का फैसला इस प्रतिस्पर्धा में कारोबारी कदम है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी बहस इससे कहीं ज्यादा व्यापक है।
अमेरिका में टिकटॉक के 20 करोड़ से ज्यादा यूजर्स
टिकटॉक अमेरिका में एक ऐसे संयुक्त उपक्रम के जरिए काम कर रहा है, जिसमें अमेरिकी निवेशकों की बहुमत हिस्सेदारी है। यह व्यवस्था अमेरिकी यूजर्स के डेटा की सुरक्षा और देशभर में टिकटॉक पर प्रतिबंध से बचने के उद्देश्य से की गई है।
अमेरिका में टिकटॉक के 20 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। ऐसे में यह बाजार यूजर्स का ध्यान खींचने और विज्ञापन से होने वाली कमाई के लिहाज से काफी अहम है।
विज्ञापनदाताओं पर क्या होगा असर?
मेटा की रोक के बाद सात प्रभावित देशों में टिकटॉक और बाइटडांस की दूसरी सेवाओं का प्रचार करने वाले विज्ञापनदाताओं को अपने कैंपेंस की योजना बनाते समय इन प्रतिबंधों का ध्यान रखना होगा। यह रोक सिर्फ बाइटडांस के अपने विज्ञापनों तक सीमित नहीं है। उन तीसरे पक्ष के विज्ञापनदाताओं पर भी लागू होगी, जिनके अभियान यूजर्स को बाइटडांस के प्लेटफॉर्म पर ले जाते हैं।
इसलिए मेटा का यह फैसला केवल कुछ विज्ञापनों को रोकने तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया कंपनियां जब एक ही तरह के यूजर्स, क्रिएटर्स और कारोबारी साझेदारियों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, तो विज्ञापन चलाने की सुविधा भी मुकाबले का एक अहम हिस्सा बन गई है।
फिलहाल यह देखना बाकी है कि इस फैसले से यूजर्स के व्यवहार या विज्ञापन बजट पर कितना असर पड़ता है। इतना जरूर है कि मेटा और टिकटॉक के बीच प्रतिस्पर्धा में अब एक नया मोर्चा खुल गया है।
अंकिता आचार्य ने WPP मीडिया में नेस्ले के लिए ग्लोबल स्ट्रैटेजी डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह एसेंसमीडियाकॉम में एडिडास के लिए ब्रांड स्ट्रैटेजी डायरेक्टर थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अंकिता आचार्य (Ankitha Acharya) ने डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) में नेस्ले (Nestlé) के लिए ग्लोबल स्ट्रैटेजी डायरेक्टर (Global Strategy Director) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। इस नियुक्ति से पहले आचार्य एसेंसमीडियाकॉम (EssenceMediacom) में एडिडास (adidas) के लिए ब्रांड स्ट्रैटेजी डायरेक्टर, इमर्जिंग मार्केट्स (Brand Strategy Director, Emerging Markets) थीं। यहां उन्होंने 17 उभरते बाजारों में स्ट्रैटेजी की जिम्मेदारी संभाली।
इससे पहले वह माइंडशेयर (Mindshare) में वोल्वो (Volvo) के लिए प्लानिंग एंड स्ट्रैटेजी डायरेक्टर, यूरोप (Planning and Strategy Director, Europe) थीं। इस भूमिका में उन्होंने छह यूरोपीय बाजारों में प्लानिंग और स्ट्रैटेजी का नेतृत्व किया।
आचार्य वेवमेकर (Wavemaker) और परफॉर्मिक्स इंडिया (Performics India) सहित अन्य कंपनियों में भी अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं। उनके पास ग्लोबल और लोकल मार्केट्स में काम करने का अनुभव है। उनकी विशेषज्ञता ब्रांड स्ट्रैटेजी (Brand Strategy), प्लानिंग (Planning) और ऑडियंस प्लानिंग (Audience Planning) में है।
वंडर सीमेंट ने महेश सिंह को वाइस प्रेसिडेंट – कॉरपोरेट ब्रांड कम्युनिकेशन नियुक्त किया है। वह ब्रांड स्ट्रैटेजी, डिजिटल मार्केटिंग, पब्लिक रिलेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रमुख सीमेंट निर्माता कंपनी वंडर सीमेंट (Wonder Cement) ने महेश सिंह को वाइस प्रेसिडेंट – कॉरपोरेट ब्रांड कम्युनिकेशन (Vice President – Corporate Brand Communication) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी की कॉरपोरेट ब्रांड स्ट्रैटेजी और कम्युनिकेशन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
महेश सिंह के दायरे में डिजिटल और परफॉर्मेंस मार्केटिंग (Digital and Performance Marketing), पब्लिक रिलेशंस (Public Relations), ट्रेड, इवेंट्स, एग्जिबिशंस, स्पोर्ट्स और एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग (Experiential Marketing) शामिल होंगे।
महेश के पास मार्केटिंग और कम्युनिकेशंस के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है। उनके करियर में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री, एजेंसी और उद्यमिता से जुड़ी अलग-अलग भूमिकाएं रही हैं। उन्होंने होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (Honda Motorcycle & Scooter India) के साथ एक दशक से अधिक समय तक काम किया।
यहां उन्होंने इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन (Integrated Communication), मीडिया, डिजिटल, रिटेल और कंज्यूमर एंगेजमेंट से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उन्होंने कंपनी की डिजिटल मार्केटिंग क्षमताओं को विकसित करने में भी योगदान दिया।
वंडर सीमेंट से जुड़ने से पहले महेश डेंट्सु एक्स इंडिया (dentsu X India) में वाइस प्रेसिडेंट – स्ट्रैटेजी एंड प्लानिंग (Vice President – Strategy & Planning) थे। यहां उन्होंने ऑटोमोटिव, ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, एफएमसीजी, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, बीएफएसआई, अपैरल और ब्रांड कंसल्टिंग जैसी कई कैटेगरी में काम किया।
डेंट्सु एक्स में उनकी जिम्मेदारियों में मीडिया और मार्केटिंग स्ट्रैटेजी, प्रोडक्ट लॉन्च, कंटेंट, परफॉर्मेंस मार्केटिंग और कंज्यूमर एक्टिवेशन शामिल रहे। महेश की नियुक्ति के साथ वंडर सीमेंट को ऐसा मार्केटिंग प्रोफेशनल मिला है, जिसका अनुभव कम्युनिकेशंस इकोसिस्टम के ब्रांड, एजेंसी और एंटरप्रेन्योरियल—तीनों पक्षों में रहा है।
मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र की कंपनी Media One Global Entertainment Limited ने 30 जून 2026 को खत्म हुई पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र की कंपनी Media One Global Entertainment Limited ने 30 जून 2026 को खत्म हुई पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के बोर्ड ने 14 अगस्त 2026 को हुई बैठक में इन अनऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी। कंपनी ने इसकी जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को 8 अक्टूबर 2026 को दी।
कंपनी ने यह जानकारी BSE Limited को दी है। यह जानकारी सेबी के लिस्टिंग नियमों के तहत जारी की गई है। कंपनी के वित्तीय नतीजों के मुताबिक, 30 जून 2026 को खत्म तिमाही में कंपनी को 39.02 लाख रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। वहीं, 31 मार्च 2026 को खत्म पिछली तिमाही में कंपनी का शुद्ध घाटा 51.01 लाख रुपये था।
कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2025 को खत्म तिमाही में शुद्ध घाटा 64.95 लाख रुपये रहा था। वहीं, 31 मार्च 2026 को खत्म पूरे वित्त वर्ष में कंपनी का शुद्ध घाटा 277.56 लाख रुपये, यानी करीब 2.78 करोड़ रुपये रहा था। इस तरह पिछली तिमाही के मुकाबले जून 2026 तिमाही में कंपनी के घाटे में कमी आई है।
प्रति शेयर आय भी निगेटिव रही
कंपनी की 10 रुपये अंकित मूल्य वाले शेयर पर बेसिक और डाइल्यूटेड अर्निंग प्रति शेयर (EPS) जून 2026 तिमाही में माइनस 0.27 रुपये रही। मार्च 2026 की तिमाही में यह माइनस 0.35 रुपये, जून 2025 की तिमाही में माइनस 0.48 रुपये और पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में माइनस 1.89 रुपये रही थी।
कंपनी की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल 1,472 लाख रुपये, यानी 14.72 करोड़ रुपये है। प्रत्येक शेयर का फेस वैल्यू 10 रुपये है। कंपनी के बैलेंस शीट में रीवैल्यूएशन रिजर्व को छोड़कर रिजर्व माइनस 4,830.80 लाख रुपये दर्ज किया गया है।
कंपनी का कारोबार तीन हिस्सों में बंटा
Media One Global Entertainment ने अपने कारोबार को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा है। इनमें एग्जिबिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और प्रोडक्शन शामिल हैं। एग्जिबिशन कारोबार में फिल्मों की प्रदर्शनी से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं, जबकि डिस्ट्रीब्यूशन में फिल्मों के वितरण और प्रोडक्शन में फिल्मों के निर्माण से जुड़ा कारोबार शामिल है।
कंपनी ने भारतीय लेखा मानक यानी Ind AS 108 के तहत इन तीनों को अपने ऑपरेटिंग सेगमेंट के तौर पर बताया है। कंपनी की ओर से जारी वित्तीय नतीजों में ऑपरेशनल आय और खर्चों को इन्हीं अलग-अलग कारोबारी हिस्सों के आधार पर दिखाया गया है।
कुल खर्च में भी अलग-अलग मदें शामिल
कंपनी के खर्चों में सामग्री की लागत, स्टॉक-इन-ट्रेड की खरीद, तैयार माल और काम के दौरान मौजूद स्टॉक में बदलाव, कर्मचारियों पर होने वाला खर्च, वित्तीय लागत और मूल्यह्रास व अमोर्टाइजेशन जैसे खर्च शामिल हैं। प्रोडक्शन कारोबार के तहत तिमाही में स्टॉक और वर्क-इन-प्रोग्रेस में बदलाव माइनस 36.41 लाख रुपये दर्ज किया गया। कर्मचारियों पर खर्च 6.65 लाख रुपये और वित्तीय लागत 0.14 लाख रुपये रही।
कंपनी के अन्य खर्चों में बिजली और ईंधन तथा अन्य खर्च शामिल हैं। उपलब्ध वित्तीय विवरण के मुताबिक, बिजली और ईंधन पर खर्च 37.19 लाख रुपये, अन्य खर्च 13.34 लाख रुपये और कुल खर्च 114.89 लाख रुपये से संबंधित आंकड़े दिए गए हैं। वित्तीय परिणामों में जून 2026 तिमाही के लिए टैक्स से पहले का घाटा 39.02 लाख रुपये बताया गया है।
ऑडिटर ने की सीमित समीक्षा
कंपनी के सांविधिक ऑडिटर Vivekanandan Associates, Chartered Accountants ने जून 2026 तिमाही के वित्तीय नतीजों की सीमित समीक्षा (Limited Review) की है।
ऑडिटर ने कहा कि यह समीक्षा भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI) की ओर से जारी Standard on Review Engagements (SRE) 2410 के तहत की गई। सीमित समीक्षा में मुख्य रूप से कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ और वित्तीय आंकड़ों की विश्लेषणात्मक प्रक्रिया शामिल होती है। ऑडिटर ने स्पष्ट किया कि यह पूर्ण ऑडिट नहीं है और इसलिए उसने ऑडिट राय नहीं दी है।
ऑडिटर की समीक्षा के आधार पर ऐसी कोई बात सामने नहीं आई, जिससे यह माना जाए कि कंपनी के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन वित्तीय नतीजे लागू भारतीय लेखा मानकों और संबंधित नियमों के मुताबिक तैयार नहीं किए गए हैं या उनमें कोई महत्वपूर्ण गलत जानकारी दी गई है।
निवेशकों की शिकायतें लंबित नहीं
कंपनी ने बताया कि तिमाही की शुरुआत में निवेशकों की कोई शिकायत लंबित नहीं थी। तिमाही के दौरान भी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। कंपनी के पास निपटारे के लिए कोई शिकायत नहीं थी और तिमाही के अंत में भी कोई शिकायत लंबित नहीं रही।
कंपनी के मुताबिक, वित्तीय नतीजों की समीक्षा ऑडिट कमेटी ने की और इसके बाद इन्हें बोर्ड की बैठक में मंजूरी दी गई। कंपनी ने यह भी बताया कि वित्तीय नतीजे Companies Act, 2013 की धारा 133 के तहत लागू भारतीय लेखा मानकों और सेबी के लिस्टिंग नियमों के अनुसार तैयार किए गए हैं।
कंपनी ने पिछले साल के आंकड़ों को जहां जरूरी था, वहां दोबारा वर्गीकृत किया है, ताकि उनकी तुलना मौजूदा आंकड़ों से की जा सके। इन वित्तीय नतीजों को Media One Global Entertainment Limited की ओर से एजिशनल डायरेक्टर जयबालान जयकुमार ने जारी किया है।
वॉल्ट डिज्नी ने अमेरिका की एक अदालत से फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन यानी FCC की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वॉल्ट डिज्नी ने अमेरिका की एक अदालत से फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन यानी FCC की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। कंपनी ने कहा है कि FCC की ओर से उसके स्वामित्व वाले आठ एबीसी टीवी स्टेशनों के लाइसेंस की समय से पहले समीक्षा करना असामान्य है। डिज्नी का आरोप है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन कंपनी पर ऐसे कंटेंट को लेकर दबाव बना रहा है, जो उसे पसंद नहीं है।
डिज्नी ने इस मामले में अगस्त में मुकदमा दायर किया था। कंपनी का कहना है कि यह मामला अमेरिका के संविधान के पहले संशोधन (First Amendment) के तहत प्रसारकों की अभिव्यक्ति की आजादी और सरकार की मीडिया नीतियों के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी परीक्षा बन गया है।
‘हम संपादकीय फैसले अलग तरीके से ले रहे हैं’
मंगलवार को सुनवाई के दौरान डिज्नी की वकील बेथ विल्किन्सन ने अमेरिकी जिला जज लॉरेन अलीखान से कहा कि कंपनी को चिंता है कि मौजूदा स्थिति का उसके संपादकीय फैसलों पर असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि कंपनी अपने हर कदम को लेकर सावधानी बरत रही है, क्योंकि प्रशासन की नाराजगी और FCC की कार्रवाई का डर बना हुआ है। विल्किन्सन ने एबीसी की स्थिति की तुलना फ्रांसीसी क्रांति के दौरान सिर पर तलवार लटकने जैसी स्थिति से की।
उन्होंने कहा कि यहां तक कि राष्ट्रपति के किसी भाषण का लाइव प्रसारण नहीं करने जैसे फैसले पर भी प्रशासन की नाराजगी सामने आती है।
ट्रंप के भाषण का लाइव प्रसारण नहीं किया था ABC ने
विल्किन्सन जिस मामले का जिक्र कर रही थीं, वह 16 जुलाई का है। उस दिन एबीसी ने ट्रंप के एक भाषण का लाइव प्रसारण नहीं किया था। इस भाषण में ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर अपने पुराने आरोप फिर दोहराए थे।
कॉमकास्ट के स्वामित्व वाले एनबीसी ने भी इस भाषण का लाइव प्रसारण नहीं किया था। इसके बाद ट्रंप ने दोनों चैनलों के लाइसेंस रद्द करने की मांग की थी।
न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स समेत आठ स्टेशन जांच के दायरे में
FCC चेयरमैन ब्रेंडन कैर ने अप्रैल में डिज्नी के आठ एबीसी स्टेशनों के लाइसेंस की समय से पहले समीक्षा का आदेश दिया था। इनमें न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स, शिकागो और ह्यूस्टन जैसे बड़े शहरों के स्टेशन शामिल हैं। इनमें से कुछ स्टेशन डिज्नी के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले स्टेशन हैं।
इन स्टेशनों के लाइसेंस की सामान्य अवधि 2028 से 2031 के बीच खत्म होनी थी। हालांकि, कैर ने पिछले सप्ताह कहा था कि उन्होंने अभी यह तय नहीं किया है कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाया जाएगा।
प्रशासन ने ‘गिलोटिन’ वाली तुलना को गलत बताया
ट्रंप प्रशासन के वकील दिमितार जॉर्जिएव-रेमेल ने सुनवाई में डिज्नी की गिलोटिन वाली तुलना को गलत बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में डिज्नी को प्रशासनिक प्रक्रिया और उसके बाद न्यायिक समीक्षा के दौरान अपने एबीसी लाइसेंस बनाए रखने का अवसर मिलेगा।
जज अलीखान ने इससे पहले FCC को इन लाइसेंसों को सार्वजनिक सुनवाई के लिए भेजने संबंधी आदेश जारी करने से रोकने से इनकार कर दिया था। हालांकि, FCC ने अदालत को आगे की कार्रवाई से कम से कम 48 घंटे पहले सूचना देने पर सहमति जताई है।
करीब दो घंटे चली सुनवाई में जज को यह तय करना है कि डिज्नी की मांग पर FCC की कार्रवाई रोकने के लिए शुरुआती तौर पर रोक का आदेश जारी किया जाए या नहीं।
दस्तावेजों को लेकर शुरू हुआ था विवाद
FCC चेयरमैन ब्रेंडन कैर ने मार्च 2025 में डिज्नी की विविधता से जुड़ी नीतियों की जांच शुरू की थी। कैर के मुताबिक, कंपनी ने मांगे गए दस्तावेज पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराए थे।
ब्रेंडन कैर का कहना है कि दस्तावेजों की मांग का जल्द जवाब नहीं मिलने के कारण एबीसी स्टेशनों के लाइसेंस की समय से पहले समीक्षा की गई।
हालांकि, सुनवाई के दौरान जज अलीखान ने प्रशासन के इस तर्क पर सवाल उठाया कि मामला सिर्फ दस्तावेज उपलब्ध कराने से जुड़े विवाद का है। उन्होंने पूछा कि अगर ऐसे विवाद कई लाइसेंसधारकों के साथ होते हैं, तो एबीसी का मामला इतना अलग क्या है कि उसके लाइसेंस की समय से पहले समीक्षा की जरूरत पड़ी।
वहीं, प्रशासन ने तर्क दिया कि डिज्नी को यह मुकदमा सीधे संघीय अपील अदालत में दायर करना चाहिए था और पहले FCC के कर्मचारियों की ओर से लाइसेंस की समीक्षा के आदेश के खिलाफ अपील करनी चाहिए थी।
50 साल से ज्यादा समय बाद ऐसी कार्रवाई
रिपोर्ट के मुताबिक, FCC ने इससे पहले 50 साल से ज्यादा समय तक किसी प्रसारक के लाइसेंस की ऐसी समयपूर्व समीक्षा का आदेश नहीं दिया था। इस मामले में लाइसेंस की समीक्षा का आदेश उस समय आया, जब ट्रंप ने एबीसी से लेट-नाइट होस्ट जिमी किमेल को हटाने की मांग की थी।
अमेरिका में ब्रॉडकास्ट टीवी चैनलों को सार्वजनिक एयरवेव का इस्तेमाल करने के लिए FCC लाइसेंस की जरूरत होती है। लाइसेंस रद्द किए जाने के मामले बेहद दुर्लभ हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि लाइसेंस खोने की धमकी प्रसारकों पर दबाव बना सकती है और कार्यक्रमों से जुड़े संपादकीय फैसलों में सरकारी दखल की चिंता पैदा कर सकती है।
‘The View’ की भी FCC कर रहा जांच
FCC एबीसी के राजनीतिक चर्चा वाले डे-टाइम शो ‘The View’ की भी जांच कर रहा है। आयोग ने कहा है कि यह कार्यक्रम राजनीतिक उम्मीदवारों को समान अवसर देने से जुड़े संघीय नियमों के दायरे में आ सकता है।
डिज्नी का कहना है कि फरवरी से ‘The View’ में किसी भी राजनीतिक उम्मीदवार को नहीं बुलाया गया है और कंपनी ने इसके पीछे FCC के दबाव को कारण बताया है।
पिछले महीने जिमी किमेल ने भी कहा था कि FCC की धमकियों के कारण उनके शो में टेक्सस के डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार जेम्स तालारिको का इंटरव्यू प्रसारित नहीं हो सका। बाद में यह इंटरव्यू यूट्यूब पर जारी किया गया, जिसे अब तक 1.3 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
आनंद तोमर ने थियोब्रोमा में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह एलाइड ब्लेंडर्स, मैकडॉनल्ड्स और मैरिको में टेक्नोलॉजी और आईटी से जुड़ी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुके हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आनंद तोमर (Anand Tomar) ने थियोब्रोमा (Theobroma) में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (Chief Technology Officer) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। वह कंपनी के टेक्नोलॉजी फंक्शन (Technology Function) का नेतृत्व करेंगे।
थियोब्रोमा से पहले तोमर एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स लिमिटेड (Allied Blenders & Distillers Ltd.) में चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर (Chief Information Officer) थे। उन्होंने मई 2025 से सितंबर 2026 तक इस भूमिका में कंपनी की टेक्नोलॉजी और आईटी एजेंडा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली।
इससे पहले तोमर मैकडॉनल्ड्स (McDonald’s) से जुड़े थे, जहां उन्होंने अगस्त 2021 से मई 2025 तक हेड ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Head of Information Technology) के रूप में काम किया।
तोमर ने मैरिको लिमिटेड (Marico Limited) के साथ भी छह साल से ज्यादा समय तक काम किया। वह फरवरी 2015 से अगस्त 2021 तक कंपनी में टेक्नोलॉजी लीड (Technology Lead) रहे। उनके अनुभव में टेक्नोलॉजी लीडरशिप, सिस्टम इंटीग्रेशन और आईटी मैनेजमेंट शामिल हैं।
थियोब्रोमा में नई भूमिका में तोमर कंपनी की टेक्नोलॉजी स्ट्रैटेजी और डिजिटल पहलों (Digital Initiatives) का नेतृत्व करेंगे। कंपनी अपने ऑपरेशंस को आगे बढ़ा रही है और इसी विस्तार के बीच वह टेक्नोलॉजी से जुड़े काम की जिम्मेदारी संभालेंगे।
कर्नाटक की एक अदालत ने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को व्यक्ति और उसके परिवार से जुड़ी बिना पुष्टि वाली, आधारहीन या मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित और प्रसारित करने से रोक दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कर्नाटक की एक अदालत ने एक व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों से जुड़े मामले में मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बिना पुष्टि वाली, आधारहीन, मानहानिकारक या पक्षपातपूर्ण कंटेंट प्रकाशित और प्रसारित करने से रोक दिया है। अदालत ने मामले में एकतरफा अस्थायी रोक (एक्स-पार्टी टेंपरेरी इंजंक्शन) का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि यह ऐसा मामला है, जिसमें अगर प्रतिवादियों को पहले नोटिस जारी किया गया और इस दौरान समय बीत गया, तो राहत देने का उद्देश्य ही खत्म हो सकता है। इसी वजह से अदालत ने नोटिस जारी करने से पहले ही अस्थायी रोक लगाने को उचित माना।
अदालत के आदेश के मुताबिक, प्रतिवादी, उनके कर्मचारी या उनकी ओर से काम करने वाला कोई भी व्यक्ति अगली सुनवाई तक शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों से संबंधित ऐसी खबर, लेख, हेडलाइन, ऑडियो, वीडियो, इंटरव्यू आदि को प्रसारित, प्रकाशित, लिख, साझा या अपलोड नहीं कर सकता, जिनका कोई ठोस आधार नहीं है।
यह रोक विधान सौधा पुलिस द्वारा क्राइम नंबर 89/2026 में की जा रही जांच और कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़े कथित घोटाले में ED, CID और SIT की जांच से संबंधित कंटेंट पर लागू होगी।
पहले से प्रकाशित कंटेंट हटाने का भी निर्देश
अदालत ने केवल नई कंटेंट प्रकाशित करने पर रोक नहीं लगाई, बल्कि पहले से प्रकाशित कंटेंट को लेकर भी निर्देश दिया है। शिकायतकर्ता ने अदालत से ऐसी कंटेंट हटाने के लिए अनिवार्य रोक लगाने की मांग की थी।
इस पर अदालत ने संबंधित प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों के बारे में प्रकाशित या अपलोड की गई ऐसी खबरें, लेख, इंटरव्यू, ऑडियो और वीडियो को निष्क्रिय किया जाए, जिनमें आधारहीन खबरें दी गई हैं।
24 प्रतिवादियों के खिलाफ दायर किया मुकदमा
शिकायतकर्ता ने 24 नामित प्रतिवादियों के खिलाफ स्थायी रोक लगाने की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया था। इन प्रतिवादियों में बड़े टेलीविजन न्यूज चैनल, अखबार और गूगल, मेटा यानी फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
शिकायतकर्ता, जो खुद को तुमकुरु विश्वविद्यालय के सिंडिकेट का सदस्य बताता है, ने आरोप लगाया कि उसकी गिरफ्तारी के बाद कुछ मीडिया संस्थानों ने उसके खिलाफ 'मीडिया ट्रायल' किया।
उसका आरोप है कि मीडिया रिपोर्टों में उसे इस घोटाले का 'किंगपिन' और 'बिचौलिया' बताया गया। इसके अलावा कुछ खबरों में ऐसे सवाल और दावे भी किए गए, जैसे वह पांच साल में शून्य से करोड़पति कैसे बन गया और उसने कथित अपराध से मिले पैसों से जमीन खरीदी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इन आरोपों को बिना पर्याप्त पुष्टि के इस तरह पेश किया गया, जैसे वे साबित तथ्य हों। उसके मुताबिक, ऐसी रिपोर्टों से उसकी प्रतिष्ठा और समाज में उसकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
KPSC भर्ती घोटाले से जुड़ा है मामला
यह मामला कर्नाटक लोक सेवा आयोग की पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले से संबंधित है। मामले में विधान सौधा पुलिस के अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED), अपराध जांच विभाग (CID) और विशेष जांच दल (SIT) की जांच का भी उल्लेख अदालत के आदेश में किया गया है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर को कर्नाटक हाई कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें KPSC की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए SIT गठित करने और नए सिरे से जांच कराने का आदेश दिया गया था।
अदालत का मौजूदा आदेश अगली सुनवाई तक शिकायतकर्ता और उसके परिवार के खिलाफ जांच से जुड़ी ऐसी कंटेंट के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाता है, जिसे आधारहीन या अपुष्ट बताया गया है।
गीता प्रेस की पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी समारोह का आयोजन 7 अक्टूबर को गोरखपुर में होगा, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे और कई विद्वान संबोधित करेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गोरखपुर में गीता प्रेस की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी समारोह का आयोजन 7 अक्टूबर को किया जाएगा। शाम 4 बजे होने वाले इस समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।
यह आयोजन श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार के 134वें जयंती महोत्सव के अवसर पर किया जा रहा है। समारोह में देश के कई प्रख्यात विद्वान और विचारक ‘कल्याण’ की 100 साल की वैचारिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा पर अपने विचार रखेंगे।
समारोह को पूर्व सांसद प्रो. राकेश सिन्हा, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय, भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक डा. ओमजी उपाध्याय संबोधित करेंगे।
‘कल्याण’ ने एक शताब्दी से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चिंतन और नैतिक जीवन-मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह पत्रिका भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम रही है। शताब्दी समारोह में इसकी ऐतिहासिक भूमिका, वैचारिक योगदान और आज के समाज में इसकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा होगी।
एक महिला पत्रकार से कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) को सोमवार को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद पर प्रमोट किया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार से कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) को सोमवार को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (Additional Deputy Commissioner) के पद पर प्रमोट किया गया है। उनके साथ 11 अन्य पुलिस अधिकारियों को भी प्रमोशन दिया गया है।
एक आधिकारिक आदेश के मुताबिक, प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों में डॉ. विकास श्योकंद, ए. वेंकटेश, गुरसेवक सिंह, रेणु लता, विदुषी कौशिक, मनु हिमांशु, सकारिया मिहिर प्रवीनभाई, गरिमा तिवारी, विवेक भगत, आशीष कुमार, मनीष लडला और रोहित गुप्ता शामिल हैं।
पुलिस ने प्रमोशन को बताया नियमित प्रक्रिया
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ये प्रमोशन नियमित प्रक्रिया के तहत किए गए हैं और प्रमोशन के लिए अनुरोध काफी पहले ही भेजा गया था।
तीन महिला पत्रकारों ने लगाए थे आरोप
यह मामला 3 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। इस प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस को इन मामलों में शिकायतें मिली थीं और आगे की जांच के लिए इन्हें क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है।
दिल्ली पुलिस ने रविवार को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बताया था कि 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी थी। इसी दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। पुलिस के मुताबिक, निष्पक्ष और उचित जांच के लिए शिकायतों को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया गया है। इन आरोपों के बाद कई स्वतंत्र पत्रकारों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन भी किया और आरोपी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने चंडीगढ़ में अपना स्थानीय कार्यालय शुरू किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने चंडीगढ़ में अपना स्थानीय कार्यालय शुरू किया है। SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को चंडीगढ़ में इस स्थानीय कार्यालय का उद्घाटन किया।
SEBI का चंडीगढ़ स्थानीय कार्यालय SCO नंबर 20-25, दूसरी मंजिल, जीवन प्रकाश बिल्डिंग, सेक्टर 17B, चंडीगढ़-160017 में स्थित है।
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के लिए काम करेगा
चंडीगढ़ स्थित यह स्थानीय कार्यालय पंजाब और हरियाणा राज्यों तथा चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को कवर करेगा। यह कार्यालय SEBI के नई दिल्ली स्थित नॉर्दर्न रीजनल ऑफिस के प्रशासनिक नियंत्रण और अधिकार क्षेत्र के तहत काम करेगा।
निवेशकों की शिकायतों के निपटारे में मदद करेगा
चंडीगढ़ स्थानीय कार्यालय के प्रमुख कामों में सूचीबद्ध कंपनियों और बाजार से जुड़े बिचौलियों के खिलाफ निवेशकों की शिकायतों के निपटारे में मदद करना शामिल होगा।
इसके अलावा, कार्यालय के जरिए निवेशकों के बीच निवेशक शिक्षा और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को निवेश और वित्तीय मामलों से जुड़ी जानकारी देने और उनकी समझ बढ़ाने में मदद करना है।
SME और दूसरे बाजार से जुड़े क्षेत्रों पर भी रहेगा फोकस
SEBI का यह स्थानीय कार्यालय अपने अधिकार क्षेत्र में जारीकर्ता मंच (Issuers Forum), छोटे और मध्यम उद्यम (SMEs), सोशल स्टॉक एक्सचेंज, म्युनिसिपल बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों और संस्थाओं के साथ भी संपर्क करेगा। इसके अलावा, स्थानीय कार्यालयों को समय-समय पर सौंपे जाने वाले दूसरे काम भी यह कार्यालय करेगा।
SEBI के मुताबिक, चंडीगढ़ में स्थानीय कार्यालय खुलने से पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ क्षेत्र में निवेशकों से जुड़े मामलों और पूंजी बाजार से संबंधित गतिविधियों के लिए स्थानीय स्तर पर संपर्क और सुविधा उपलब्ध होगी।
टीम पंपकिन ने को-फाउंडर स्वाति नाथानी को नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त किया है। वह बिजनेस स्ट्रैटेजी और ग्रोथ का नेतृत्व करते हुए एजेंसी की इंटीग्रेटेड क्षमताओं को मजबूत करेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टीम पंपकिन (Team Pumpkin) ने अपनी को-फाउंडर स्वाति नाथानी (Swati Nathani) को नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (Chief Executive Officer) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह एजेंसी की बिजनेस स्ट्रैटेजी और ग्रोथ का नेतृत्व करेंगी।
स्वाति ने 2012 में टीम पंपकिन की सह-स्थापना की थी और डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस से एक इंटीग्रेटेड मार्केटिंग पार्टनर के तौर पर एजेंसी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नई जिम्मेदारी में उनका फोकस क्रिएटिव, परफॉर्मेंस, टेक्नोलॉजी, कम्युनिकेशंस और कॉमर्स को करीब लाने पर रहेगा।
स्वाति ने कहा कि एजेंसी बिजनेस में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में तेजी से बदलाव हो रहा है। एआई (AI) एक्सीक्यूशन के तरीके बदल रहा है, जबकि प्लेटफॉर्म ब्रांड्स की खोज के तरीके को प्रभावित कर रहे हैं। क्लाइंट्स अब आइडिया से बिजनेस रिजल्ट तक कम से कम साइलो चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि टीम पंपकिन का लक्ष्य हर नई टेक्नोलॉजी के पीछे भागना नहीं, बल्कि ऐसी एजेंसी तैयार करना है जो यह समझ सके कि टेक्नोलॉजी कहां वैल्यू जोड़ती है और कहां ह्यूमन जजमेंट सबसे ज्यादा जरूरी है।
स्वाति के नेतृत्व में टीम पंपकिन ब्रांड स्ट्रैटेजी, क्रिएटिव, डिजिटल, परफॉर्मेंस मार्केटिंग, सोशल मीडिया, पीआर, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, टेक्नोलॉजी और मार्केटप्लेस सर्विसेज में अपनी इंटीग्रेटेड पेशकश को मजबूत करेगी। एजेंसी एआई-आधारित क्षमताओं को भी आगे बढ़ाएगी।
स्वाति के अनुभव में ब्रांडिंग, डिजिटल स्ट्रैटेजी, एनालिटिक्स, एंटरप्रेन्योरशिप और टेक्नोलॉजी शामिल हैं। उनका अनुभव क्रिएटिव और बिजनेस सोच के बीच संतुलित नजरिया बनाने में मदद करता है।
टीम पंपकिन के अगले चरण में इंटीग्रेटेड क्षमताओं को मजबूत करने, टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं का विस्तार करने, लीडरशिप टीम को मजबूत करने, ग्लोबल विस्तार बढ़ाने और कम्युनिकेशन को मापने योग्य बिजनेस ग्रोथ से जोड़ने पर जोर रहेगा।