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पत्रकारों की निजता से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं: मद्रास हाई कोर्ट
मद्रास हाई कोर्ट ने पत्रकारों की निजता और प्रेस की स्वतंत्रता की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 year ago
मद्रास हाई कोर्ट ने पत्रकारों की निजता और प्रेस की स्वतंत्रता की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी पत्रकार को उसके व्यक्तिगत डेटा को उजागर करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
जस्टिस जी. के. इलानथिरायन ने अन्ना यूनिवर्सिटी में यौन उत्पीड़न के एक मामले की जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच दल) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। एसआईटी ने इस मामले की जांच के दौरान कई पत्रकारों को समन भेजा था और उनसे 50 से अधिक सवाल पूछे थे। इन सवालों में उनकी विदेश यात्राओं, संपत्तियों और निजी जीवन से जुड़े अन्य पहलुओं के बारे में जानकारी मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने पूरी तरह अनुचित और निजता के अधिकार का उल्लंघन करार दिया।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पत्रकारों से उनकी व्यक्तिगत जानकारियां मांगना और उन पर दबाव बनाना न केवल मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि प्रेस को डराने-धमकाने की कोशिश भी है। कोर्ट ने इस बात को भी रेखांकित किया कि प्रेस की स्वतंत्रता और निजता एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
चार पत्रकारों ने एसआईटी की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके स्मार्टफोन जब्त कर लिए गए और उनसे पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े कई सवाल पूछे गए। कोर्ट ने एसआईटी को फटकार लगाते हुए कहा कि उसने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पत्रकारों को परेशान किया। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी पत्रकारों के मोबाइल फोन और अन्य जब्त किए गए उपकरणों को 10 फरवरी तक वापस करे और उनसे आगे कोई भी अनावश्यक पूछताछ न करे।
कोर्ट ने यह भी पाया कि एसआईटी ने मामले की जांच के दौरान एफआईआर लीक करने वाले वास्तविक स्रोत का पता लगाने की कोशिश तक नहीं की। इसके बजाय, उसने सीधे पत्रकारों को निशाना बनाया, जो कि कानून की प्रक्रिया के विपरीत है। कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह अपनी जांच की प्रक्रिया को केस डायरी में दर्ज करे और भविष्य में पत्रकारों को अनावश्यक रूप से परेशान करने से बचे।
इस फैसले को प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पत्रकार स्वतंत्र रूप से अपनी जिम्मेदारी निभा सकें, बिना किसी अनुचित दबाव या उत्पीड़न के।
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