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पत्रकारों ने काली पट्टी बांधकर काम करने का लिया फैसला, बताई ये वजह
बैठक में कई क्षेत्रों के वरिष्ठ पत्रकार हुए शामिल, सभी सरकारी खबरों के बहिष्कार का भी लिया निर्णय
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
पुलिस-प्रशासन के पत्रकारिता विरोधी रवैये से नाराज पत्रकारों ने मप्र स्थापना दिवस यानी 1 नवंबर से हाथ में काली पट्टी बांधकर कार्य करने का फैसला किया है। वहीं, यह भी निर्णय लिया गया कि जब तक प्रशासन का रवैया पत्रकारिता के अनुकूल नहीं हो जाता, तब तक शासकीय खबरों का बहिष्कार किया जाएगा। इस बारे में 31 अक्टूबर को तय कार्यक्रम के अनुरूप जिला मुख्यालय के होटल आस्था में अनूपपुर, राजेन्द्रग्राम, अमरकंटक, जैतहरी, कोतमा, बिजुरी, राजनगर, पसान एवं शहडोल से आए वरिष्ठ पत्रकारों की उपस्थिति में बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में वरिष्ठ पत्रकार मो. अली, दिनेश अग्रवाल, मनोज द्विवेदी, कैलाश पाण्डेय, अजीत मिश्रा, राजेश शुक्ला, मनोज शुक्ला, मुकेश मिश्रा,राजनारायण द्विवेदी, राजेश पयासी, चैतन्य मिश्रा, आदर्श दुबे, बीजू थामस, विजय उर्मलिया, अमित शुक्ला, वीरेन्द्र सिंह, सुधाकर मिश्रा, कमलेश मिश्रा,आनंद पाण्डेय, अनुपम सिंह, आशुतोष सिंह,अजय जायसवाल, मनीष अग्रवाल राजन सिंह, उमेश पत्रिक, सुनील गुप्ता, ओमप्रकाश द्विवेदी, रमाकान्त शुक्ला, रमेश तिवारी, ज्ञान चन्द्र जायसवाल, प्रदीप मिश्रा, विनोद द्विवेदी, प्रदीप मिश्रा कोतमा, आशीष द्विवेदी,मो अनीश तिगाला,हिमांशु बियाणी, विनय उपाध्याय, ब्रजेन्द्र राठौर,अजय ताम्रकार, नितिन जैन, रामभुवन गौतम, दीपक सिंह और राम गौतम आदि मौजूद रहे।
बैठक में पत्रकार विनय उपाध्याय, विजय उर्मलिया, प्रदीप मिश्रा, अमित शुक्ला के साथ पुष्पराजगढ़ के कुछ पत्रकारों के विरुद्ध समाचार प्रकाशन के पश्चात प्रशासन/पुलिस के रवैये पर चिंता व्यक्त करते हुए पत्रकारिता के क्षेत्र में आ रही व्यवधान पर विस्तार से चर्चा की गयी। लगभग सभी पत्रकारों ने पत्रकार प्रताड़ना, कार्य क्षेत्र में आ रही दिक्कतों, पत्रकारों के आचरण सहित विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपने विचार एवं सुझाव रखे।
पत्रकारों ने कोतवाली नगर निरीक्षक की कार्यशैली पर भी आपत्ति व्यक्त की। एक पत्रकार को निरन्तर धमकी दिये जाने के मामले पर भी चर्चा हुई। यह आश्चर्य व्यक्त किया गया कि कई शिकायत किये जाने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की, उल्टा आरोपितों को कोतवाल ने कलेक्टर, एसपी के पास शिकायत करने को उकसाकर भेज दिया। प्रशासन एवं पुलिस के रवैये से नाराज पत्रकारों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि एक नवम्बर को मप्र स्थापना दिवस के कार्यक्रम अवसर से बांहों पर काली पट्टी लगाकर कार्य करेंगे।
इसके साथ ही यह निर्णय भी लिया गया कि जब तक पत्रकारों के प्रति प्रशासन एवं पुलिस अपना रवैया सुधार कर सकारात्मक नहीं होती, तब तक सभी सरकारी खबरों का बहिष्कार किया जाएगा। संभागीय मुख्यालय से आए वरिष्ठ पत्रकारों ने भी यह संकल्प दोहराया कि यदि जरूरत हुई काली पट्टी बांधने, सरकारी खबरों के बहिष्कार का कार्य शहडोल, उमरिया सहित अन्य जिलों में भी किया जाएगा। समाचार बहिष्कार तथा काली पट्टी लगाकर कार्य करने की खबरों को ट्विटर एवं ईमेल के जरिये मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गृहमंत्री तथा डीजीपी को नियमित भेजने का निर्णय भी लिया गया है।
प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज पत्रकारों ने बैठक में एक बड़ा फैसला यह लिया कि जनसम्पर्क विभाग और पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्तियों का बहिष्कार किया जायेगा और किसी भी खबर को न तो चैनलों पर दिखाया जाएगा और न ही अखबारों में छापा जायेगा। वहीं, प्रशासनिक कार्यक्रम में सभी पत्रकार काली पट्टी बांधकर जायेंगे।
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