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प्रेस क्लब समेत नौ पत्रकार संगठनों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, की ये मांग
बीते दिनों कुछ मीडिया संस्थानों व पत्रकारों के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई देखने को मिली है, इसके बाद से कई मीडिया संगठन एकजुट हो गए हैं
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
बीते दिनों कुछ मीडिया संस्थानों व पत्रकारों के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई देखने को मिली है, इसके बाद से कई मीडिया संगठन एकजुट हो गए हैं। सोमवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक बड़ी बैठक का आयोजन किया गया, जहां तमाम पत्रकारों ने धरना दिया। इसके बाद देश के करीब नौ पत्रकार संगठनों ने सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर उनसे मीडिया कर्मियों के खिलाफ ‘कठोर कानूनों’ का उपयोग करने के मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।
इस दौरान, उन्होंने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वुमेन प्रेस कॉर्प, प्रेस एसोसिएशन, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट, डिजिपब, फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब, केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स, वेटरन जर्नलिस्ट ग्रुप और ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन ने ‘भारत में स्वतंत्र मीडिया की अभूतपूर्व स्थिति’ को लेकर प्रदर्शन किया।
ज्ञापन में कहा गया है कि हजारों पत्रकारों की ओर से आज भारत में स्वतंत्र मीडिया के समक्ष उत्पन्न अभूतपूर्व स्थिति की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। पत्रकार के रूप में हम पिछले 75 वर्षों में हमारे देश ने जो प्रगति की है उस पर सामूहिक रूप से गर्व करते हैं। एक अंधकारमय दौर भी था जब चौथे स्तंभ को बेड़ियों से जकड़ दिया गया था, निश्चय ही ऐसा दौर हमारा लोकतंत्र दोहराते हुए नहीं देखना चाहेगा। आज हमारे समुदाय को एक समान लेकिन अधिक घातक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर, हमारे पेशे में अधिकांश लोग अनिश्चित कामकाजी परिस्थितियों का सामना करते हैं, दूसरी ओर पत्रकारों के खिलाफ कठोर कानूनों का उपयोग तेजी से बढ़ गया है। इनमें से कई कानून उस विशेष भूमिका को भी स्वीकार नहीं करते हैं जो हमारी स्वतंत्र प्रेस निभाती है, जो कि इस देश के इतने सारे विविध नागरिकों की आवाज है।
इनमें से कुछ कठोर कानूनों के तहत, अधिकारियों ने फोन, लैपटॉप और हार्ड डिस्क जैसे उपकरणों और सॉफ्टवेयर को जब्त करने के अपने निरंकुश अधिकार का इस्तेमाल किया है जो हमारे समुदाय के लिए आजीविका का स्रोत हैं। ये कानून जमानत का प्रावधान नहीं करते हैं जहां कारावास आदर्श है न कि अपवाद।
ज्ञापन में आगे कहा गया है कि किसी लोकतंत्र के फलने-फूलने और प्रगति के लिए उसका मीडिया स्वतंत्र होना चाहिए। अपनी सारी विविधता के साथ स्वतंत्र मीडिया आम लोगों के सामने आने वाले कई गंभीर मुद्दों को सामने लाने में सक्षम है उससे ऐसी ही भूमिका अपेक्षित है। हम सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकारी के रूप में आपके हस्तक्षेप का अनुरोध करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे संविधान में स्वतंत्रता की रक्षा की जाती है जिसमें बोलने की स्वतंत्रता, व्यवसाय आजीविका अपनाने की स्वतंत्रता शामिल है।
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