इस हादसे ने छीन ली पत्रकार समेत चार लोगों की जिंदगी

इलाज के लिए रिश्तेदार को कार से मेडिकल कॉलेज ले जा रहे थे पत्रकार अरविंद उपाध्याय

Last Modified:
Tuesday, 14 May, 2019
Arvind Updahyay

सड़क हादसे में कार सवार पत्रकार समेत चार लोगों की मौत हो गई। उत्तर प्रदेश में अंबेडकरनगर के सम्मनपुर क्षेत्र में खपुरा के पास मंगलवार को हुए इस हादसे में जान गंवाने वालों में सेना के एक रिटायर्ड कैप्टन, उनकी पत्नी और कार का चालक भी शामिल है। हादसे में पत्रकार समेत चार लोगों की मौत के बाद परिजनों के साथ ही पत्रकार बिरादरी में शोक व्याप्त है।

बताया जाता है कि जलालपुर क्षेत्र के बड़ेपुर निवासी कैप्टन (रिटायर्ड) लक्ष्मीकांत (65) पुत्र केदारनाथ उपाध्याय की तबीयत खराब चल रही थी। लक्ष्मीकांत के रिश्तेदार व पड़ोसी जिला जौनपुर निवासी पत्रकार अरविंद उपाध्याय (45) बड़ेपुर आकर लक्ष्मीकांत को दिखाने के लिए कार से जिले के मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर जा रहे थे। कार में उनके साथ लक्ष्मीकांत की पत्नी कांति उपाध्याय (62) भी थीं और कार बड़ेपुर निवासी चालक रामराज चला रहा था।

आजमगढ़ अकबरपुर मार्ग स्थित खपुरा के ईंट भट्ठे के पास बाइक सवार को बचाने के चक्कर में कार अनियंत्रित होकर डंपर से टकराकर पलट गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से चारों लोगों को बाहर निकाला, लेकिन चारों की मौत हो चुकी थी। इस हादसे में बाइक सवार अभिषेक (26) पुत्र श्यामलाल निवासी सुलेमपुर सम्मनपुर घायल हो गया। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बताया जाता है कि हाइवे पर सड़क से सटा ईंट भट्ठा होने की वजह से यह हादसा हुआ। सीओ सदर धर्मेंद्र सचान ने बताया कि सड़क पर अतिक्रमण करने वाले ईंट भट्ठा मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश पुलिस को दे दिया है। उन्होंने बताया कि हादसे के अन्य कारणों की भी छानबीन हो रही है। इस हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार CMR

‘द हिन्दू’ में करीब 40 साल तक काम किया था, उनकी लिखी कई किताबें हो चुकी हैं प्रकाशित

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Saturday, 13 July, 2019
Last Modified:
Saturday, 13 July, 2019
CMR

वरिष्ठ पत्रकार सीएम रामचंद्र का शुक्रवार को निधन हो गया। 94 वर्षीय रामचंद्र इन दिनों उम्र संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने ‘द हिन्दू’ (The Hindu) में करीब 40 साल तक काम किया था। 24 अप्रैल 1925 को जन्मे रामचंद्र ने अंग्रेजी अखबार ‘डेक्कन हेराल्ड’ (Deccan Herald) में चार साल काम करने के बाद एक जुलाई 1952 को ‘द हिन्दू’ जॉइन किया था। वह यहां से 1992 में सेवानिवृत्त हो गए थे, लेकिन इसकी मासिक पत्रिका ‘फ्रंटलाइन’ (Frontline) के लिए लगातार लिखते रहते थे।

सीएमआर के नाम से फेमस रामचंद्र को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिसंबर 1985 में राज्योत्सव अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। सीएमआर ने कई किताबें भी लिखी थीं। कर्नाटक की राजनीति को लेकर उनकी आखिरी किताब ‘Cockpit of India’s Political Battles - Karnataka’ इस साल मार्च में लॉन्च हुई थी। सीएमआर के निधन पर मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी समेत कई लोगों ने दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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IIMC की कोर्स को-ऑर्डिनेटर को 'ठगों' ने यूं लगाई चपत

वसंत कुंज के शॉपर्स स्टॉप से करने गई थीं खरीददारी, अब कराई एफआईआर

Last Modified:
Friday, 12 July, 2019
Fraud

प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में रेडियो और टीवी पत्रिका की पाठ्यक्रम संयोजक विष्णुप्रिया पांडे ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गई हैं। अपने साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इस बारे में एफआईआर भी कराई है। इस एफआईआर में विष्णुप्रिया पांडे का आरोप है कि वह वसंत कुंज के शॉपर्स स्टॉप में कपड़े खरीदने आईं थीं। यहां उन्हें ऑनलाइन शॉपिंग की राय देकर सेल्समैन ने घर का पता, फोन नंबर आदि जानकारियां हासिल कर ली और पेमेंट भी ले लिया। पांच दिन बाद विष्णुप्रिया पांडे के घर जब कपड़े का पैकेट पहुंचा, तब वह अधूरा था। परेशान विष्णुप्रिया पांडे ने जब लिफाफे पर दिए गए कॉल सेंटर नंबर 1-800-419-6684 पर कॉल किया तो एक बार फिर से उनसे एक लिंक भेज कर सारी जानकारियां ली गयी और उन्हें लगातार आश्वासन दिया गया कि उनका पैसा रिफंड किया जायेगा। इसी बीच कॉल सेंटर की लाइन डिस्कनेक्ट हो गयी और विष्णुप्रिया पांडे को 9330199375 से कॉल आया जिसमें पहले से बात कर रहे कॉल सेंटर एग्जिक्यूटिव ने मैसेज बॉक्स में भेजे गए उस लिंक को भरने का आग्रह किया।

9330238949 नंबर से आये उस लिंक को विष्णुप्रिया पांडे ने जैसे ही भरा, उसके चंद सेकेंड के भीतर उनके बैंक खाते से 49,000 रुपए दो-दो बार करके और एक-एक हजार रुपए दो बार निकाल लिए गए। यानी उन्हें चंद सेकेंड में ही पूरे एक लाख रुपए की चपत पड़ चुकी थी। पीड़िता को जब मालूम चला कि शॉपर्स स्टॉप के इस गिरोह ने उसे लाखों रुपए की साइबर लूट का निशाना बनाया है तो उसके होश उड़ गए। मामले की शिकायत साइबर अपराध थाने में कराई गई है और पुलिस अनुसंधान जारी है, पर जरूरत इस बात कि है कि हम एक ग्राहक के तौर पर सजग रहें और किसी भी परिस्थिति में बैंक सम्बंधी जानकारी किसी से भी साझा नहीं करें।

विष्णुप्रिया पांडे ने अपने साथ हुई ठगी को लेकर जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसे आप यहां देख सकते हैं। 

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श्रम मंत्री से मुलाकात में पत्रकारों ने उठाए कई मुद्दे, मिला ये आश्वासन

आईआईएमसी के पूर्व डीजी केजी सुरेश के नेतृत्व में श्रम मंत्री से मिला था प्रतिनिधिमंडल

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Friday, 12 July, 2019
Last Modified:
Friday, 12 July, 2019
Journalist-Delegation

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश  के नेतृत्व में वरिष्ठ पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने श्रम मंत्री संतोष गंगवार से मुलाकात की। वर्तमान में मध्य प्रदेश की जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी स्थित जागरण स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की फैकल्टी में बतौर एमरेटस प्रोफेसर (Emeritus Professor) कार्यरत केजी सुरेश ने इस दौरान श्रम मंत्री से मांग की कि मीडिया की स्वतंत्रता और संरक्षण के लिए नए श्रम प्रावधानों में पत्रकारों के लिए नौकरी की सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी मुद्दे शामिल किए जाएं।

बातचीत के दौरान गंगवार ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि न्ए श्रम कानूनों में पत्रकारों के अधिकारों और हितों की पूरी रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 में दिए गए प्रावधानों की रक्षा करने के अलावा नए श्रम कानूनों में पत्रकारों के लिए अन्य कई बेनिफिट भी शामिल किए जाएंगे। यही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेब पोर्ट्ल्स में काम कर रहे पत्रकारों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।’

श्रम मंत्री से मिलने वालों में केजी सुरेश के साथ ही हेमंत बिश्नोई और सर्जना शर्मा (NUJ-I), अनूप चौधरी, संजय उपाध्याय और नरेंद्र भंडारी (Working Journalists of India), डॉ. प्रमोद कुमार और उमेश चतुर्वेदी (DJA) और भारतीय मजदूर संघ के नॉर्थ जोन के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी पवन कुमार शामिल थे।

श्रम मंत्री के साथ बैठक में पत्रकारों से जुड़े कई मुद्दों के साथ ही यह मामला भी उठाया गया कि सबसे आखिर में गठित हुए प्रेस आयोग के बाद मीडिया के क्षेत्र में काफी बदलाव आए हैं। ऐसे में मीडिया के लिए कानूनी फ्रेमवर्क पर फिर से ध्यान देने की आवश्यकता है। दूसरे प्रेस आयोग की रिपोर्ट प्राइवेट टीवी और रेडियो चैनल्स के आने से पहले उस समय आई थी, जब न तो इंटरनेट था, न ऑनलाइन मीडिया था और न ही सोशल मीडिया था। ऐसे में नए जमाने की मीडिया को देखते हुए सरकार से मीडिया आयोग गठित करने की मांग की गई। बताया जाता है कि श्रम मंत्री ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को पत्रकारों के हितों से जुड़ी मांगों पर सहानुभूतिपूर्ण विचार करने का आश्वासन दिया है।

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'दिल को कचोटने वाला है पत्रकार चंदा बारगल का यूं दुनिया से चले जाना'

बेहद आत्मीय, विनम्र और हमेशा मुस्कुराने वाले थे चंदा बारगल

राजेश बादल by राजेश बादल
Published - Thursday, 11 July, 2019
Last Modified:
Thursday, 11 July, 2019
Chanda Bargal

यकीन नहीं आता। चंदा बारगल ने इस जहां से विदाई ले ली। मध्य प्रदेश में साल भर के भीतर यह दूसरी ‘विदाई’ कचोटने वाली है। दिल में दर्द का समंदर लिए पहले बेहद विनम्र पुष्पेंद्र सोलंकी का जाना और अब वैसे ही नरमदिल,पत्रकारिता के प्रपंचों से दूर चंदा बारगल का करियर की तड़प और कसक को पीते हुए, जीते हुए चले जाना ।

मुझे याद है। नई दुनिया इंदौर में उप संपादक के तौर पर जॉइन किया था। अस्सी का साल था। नई दुनिया की परंपरा के मुताबिक़ प्रत्येक पत्रकार की शुरुआत प्रूफ रीडिंग डेस्क से ही होती थी। चंदा उन दिनों प्रूफ रीडिंग विभाग में थे। उमर में लगभग साल भर छोटे थे, इसलिए परिचय दोस्ती में बदल गया। इसी डेस्क पर नवीन जैन, पवन गंगवाल, मीना राणा, मीना त्रिवेदी, जयंत कोपरगांवकर भी होते थे। हम लोगों का समूह दफ्तर में चर्चाओं का केंद्र रहता था।

चंदा बेहद आत्मीय, विनम्र, हमेशा मुस्कुराने वाला, अच्छी पढ़ाई-लिखाई वाला था। इसलिए घंटों बहस भी होतीं। अक्सर रात दो बजे अखबार निकालने के बाद साइकिलों से राजबाड़ा जाते,पोहे खाते,चाय पीते और सुबह होते-होते घर लौटते। चंदा ने हमेशा मुझे भाई साब ही संबोधित किया। कभी-कभी मैं या नवीन जैन भड़क जाते कि हम लोग बराबरी के ही हैं, सीधे नाम लो, मगर चंदा पर कोई असर नहीं पड़ा।

एक तो उन दिनों नई दुनिया की भाषा का प्रशिक्षण जबरदस्त होता था। कॉमा, फुलस्टॉप से लेकर नुक्ता और चंद्र बिंदु लगाने के मामले में शुद्धता की पूरी गारंटी याना चंदा बारगल। अखबार की स्टाइलशीट से कोई भी विचलित हुआ तो चंदा भाई सीधे भिड़ने के लिए भी तैयार रहते थे। चाहे राहुल बारपुते याने बाबा का लिखा हुआ हो या राजेन्द्र माथुर जी का, अपने चंदा भाई को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था।

चंदा के गोलाई लिए शब्द और हैंडराइटिंग आज भी चित्र की तरह चल रही है। जब राजेन्द्र माथुर जी ने मुझे परिवेश स्तंभ का प्रभारी बनाया तो चंदा के अनेक आलेख मैंने प्रकाशित किए। उसके लिखे पर कलम चलाने का कम ही अवसर आता था। हां, शीर्षक वो कभी नहीं देता था। हमेशा कहता था, 'शीर्षक तो आप ही दें'। उसके लेखन से प्रूफरीडिंग विभाग के प्रभारी किशोर शर्मा नाराज़ रहते थे। उन्हें लगता था कि आलेख लिखने से चंदा काम पर ध्यान नहीं दे पाता। पर यह सच नहीं था।

चंदा के करीब 30-40 आलेख मैंने छापे। उससे पहले वह संपादक के नाम पत्र भी लिखता था। उन दिनों एक-एक पत्र पर भी पाठकों में बहस होती थी। यह बहस कभी-कभी बड़ा मुद्दा बनकर उभरती थी। आजकल अखबार इस तरह का मानसिक व्यायाम अपने पाठकों का नहीं कराते। ऐसे कई पाठक चंदा के नाम से उसे लड़की समझते थे और सीधे पत्र लिखते थे। हम लोग ऐसे पाठकों का बड़ा मजा लेते। कुछ पाठकों को तो चंदा ने उत्तर भी दिए। बाद में भेद खुला तो पाठक शर्मिंदा हो गए।

शाहिद मिर्ज़ा पहले यह स्तंभ देखते थे, फिर प्रकाश हिंदुस्तानी जी ने जिम्मेदारी संभाली। प्रकाश हिंदुस्तानी धर्मयुग चले गए तो मुझ पर इस स्तंभ का भार आन पड़ा। चंदा खुश रहता था कि मैं उसके लिखे पत्रों में अधिक काट-छांट नहीं करता। पर मैं उसे यह कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं दे रहा था। वह लिखता ही ऐसा था। अक्सर हम लोग चोरल चले जाते। चोरल नदी में नहाते और घने जंगलों में ऐश करते। ऐसे न जाने कितने किस्से आज वेदना के साथ याद आ रहे हैं। कल ही तो करियर शुरू किया था और आज इस लोक से विदाई का सिलसिला भी शुरू हो गया।

इधर चंदा भोपालवासी हुए और कुछ समय बाद मैं दिल्ली जा बसा। बीच-बीच में कभी फोन पर तो कभी मिलने पर हम लोग उन दिनों की याद करते। फिर उसका वह लंबा खिंचने वाला ठहाका । उफ्फ....। इस कमबख्त ज़िंदगी ने काल के पहिए में ऐसा फंसाया है कि दोस्तों और अपनों से मिलना भी दुर्लभ होता जा रहा है। जब वे अचानक इस तरह विदा हो जाते हैं तो कलेजे में एक फांस की तरह कुछ अटका रह जाता है।

सच...बहुत याद आओगे चंदा।

(वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल की फेसबुक वॉल से)

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ABP की टीम पर हमले के आरोपित ने उठाया गलत कदम, हो गई मौत

दिल्ली पुलिस की टीम ने दो बदमाशों को किया था गिरफ्तार

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Wednesday, 10 July, 2019
Last Modified:
Wednesday, 10 July, 2019
Death

दिल्ली में बारापुला फ्लाईओवर पर पिछले दिनों ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) चैनल की टीम पर हुई गोलीबारी की घटना के मामले में गिरफ्तार तैय्यब नामक एक बदमाश ने मंगलवार को साकेत कोर्ट परिसर की पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना के दौरान पुलिसकर्मी उसे अदालत में पेश करने ले जा रहे थे, इसी दौरान शाम करीब पांच बजे उसने फरार होने के लिए पुलिसकर्मियों से हाथ छुड़ाकर छलांग लगा दी। गंभीर हालत में तैय्यब को ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’(एम्स) में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि आठ जून की रात ‘एबीपी न्यूज’ के रिपोर्टर सिद्धार्थ पुरोहित और कैमरामैन अरविंद कुमार पर यह हमला उस समय हुआ था, जब दोनों प्रसाद नगर थाना क्षेत्र में हुए एक हत्याकांड को कवर करने के लिए ड्राइवर चंदर सेन के साथ ऑफिस की कैब से जा रहे थे। दक्षिण दिल्ली में बारापुला फ्लाईओवर पर रात करीब डेढ़ बजे बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें रुकने का इशारा किया। शक होने पर उन्होंने ड्राइवर से कार की स्पीड बढ़ाने को कहा। इसके बाद बदमाशों ने कार पर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। इनमें से एक गोली कार के दरवाजे पर लगी, दूसरी ने ड्राइवर की तरफ की खिड़की को नुकसान पहुंचाया, जबकि तीसरी किसी तरह निशाने से चूक गई।

बताया जाता है कि बदमाशों ने चैनल की टीम का करीब आधा किलोमीटर तक पीछा भी किया। लेकिन करीब एक किलोमीटर दूर जाकर चैनल की टीम ने पीछे मुड़कर देखा तो आरोपित वहां से गायब हो चुके थे। आरोप है कि पत्रकारों ने आईएनए मेट्रो स्टेशन पर मौजूद पुलिसकर्मियों को इस घटना के बारे में बताते हुए मदद मांगी, लेकिन आसपास के थानों को सतर्क करने के बजाय पुलिसकर्मी मौके से चले गए। इस मामले में पुलिस की लापरवाही का मामला सामने आने पर दिल्ली पुलिस एएसआई जितेंद्र सिंह की सेवा समाप्त कर चुकी है।

बाद में पुलिस ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पकड़े गए बदमाशों की पहचान शाहदरा निवासी तैय्यब (23) और कबीर नगर निवासी शाहिद (20) के रूप में हुई थी। मंगलवार को हुए हादसे के दौरान तैय्यब को एक दिन की पुलिस रिमांड पर लेने के लिए प्रोडक्शन वारंट पर कोर्ट में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था।

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ताइक्वांडो चैंपियनशिप में सौरव पाठक ने जीता गोल्ड, जल्द जाएंगे कोरिया

कोरियन कल्चरल सेंटर इंडिया की ताइक्वांडो एकेडमी के स्टूडेंट रह चुके हैं सौरव पाठक

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Monday, 08 July, 2019
Last Modified:
Monday, 08 July, 2019
Saurav Pathak

ताइक्वांडो की ‘ओशिनिया पैरा चैंपियनशिप’ (Oceania Para Championship) 2019 में सौरव पाठक ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर अपना कब्जा जमाया है। यह प्रतियोगिता 28 जून 2019 को हुई थी। सौरव पाठक पूर्व में ‘कोरियन कल्चरल सेंटर इंडिया’ (KCCI) की ताइक्वांडो एकेडमी के स्टूडेंट रह चुके हैं। प्रतियोगिता जीतने के बाद वह KCCI भी गए। जल्द ही सौरव पाठक कोरिया में होने वाली इंटरनेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे।

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दुनिया को अलविदा कह गए पत्रकार घनश्याम सती

पिछले दिनों लगभग याददाश्त खो चुके थे और लोगों को पहचान पाने में असमर्थ थे

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Friday, 05 July, 2019
Last Modified:
Friday, 05 July, 2019
Ghanshyam Sati

रामनगर के वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम सती का असमय चले जाना पत्रकारिता और अभिनय क्षेत्र की बड़ी क्षति के साथ हमारे लिए व्यक्तिगत भी क्षति भी है। हमारे बाल सखा, उम्र में डेढ़-दो साल छोटे और रिश्ते में चाचा घनश्याम सती दबंग और मानवीय गुणों से भरपूर थे।

मनोहर कहानियां और सत्यकथा से लेखन की शुरुआत करने वाले घनश्याम सती गंभीर विषय पर लिखते रहे थे। रीजनल रिपोर्टर के वे रामनगर प्रतिनिधि रहे और उत्तराखंड की जल समस्या पर रीजनल रिपोर्टर में प्रकाशित उनका आलेख प्रतिनिधि आलेख था। रामनगर में पत्रकार संगठनों के वे आवश्यक अंग थे।

हम दोनों एक ही गांव-घर की उपज, चाहे उस भूमि के लिए कुछ न कर पाए हों, लेकिन हैं अल्मोड़ा जिला के रानीखेत प्रखण्ड फयाटनोला गांव की ही पैदावार। रामनगर और गैरसैंण की दूरी अधिक न होने और पत्रकारिता के कारण भी उनसे निकटता शायद अधिक रही होगी।

25 जून को जब उनसे अंतिम मुलाकात हुई वे लगभग याददाश्त खो चुके थे और पहचान पाने में असमर्थ थे। ठीक 10 दिन बाद आज प्रात: चाचा जी ख्याली दत्त असनोड़ा से घनश्याम सती जी के निधन की सूचना मिली। नश्वर शरीर को एक बार विदा होना है, लेकिन जो अच्छाई आप छोड़ गये, वहीं पुण्य संतत्ति के काम आयेंगे और आपकी याद को अक्षुण्ण रखेंगे।

विनम्र श्रद्धांजलि

(पत्रकार पुरुषोत्तम असनोड़ा की फेसबुक वॉल से)

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पत्रकारोें की आम की दावत में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में तीसरे मिथिला आम महोत्सव का आयोजन किया गया

Last Modified:
Thursday, 04 July, 2019
Mango Festival

मैथिल पत्रकार ग्रुप की ओर से दो जुलाई को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में तीसरे मिथिला आम महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्वनी चौबे ने कहा कि मिथिला के आम को दुनिया के बाजार में जगह दिलाने की कवायद की जाएगी। वाणिज्य मंत्रालय और अन्य व्यावसायिक संगठनों से इसके लिए चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां के मालदा, जर्दालु, बंबई किस्म के आम दुनिया के किसी भी अन्य आम की तुलना में किसी तरह कम नहीं हैं, जरूरत सिर्फ उन्हें बाजार तक पहुंच देने की है। अपनी क्वालिटी से ये आम अपनी जगह स्वयं बना लेंगे।

अश्वनी चौबे ने कहा, ‘केंद्र की नरेंद मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हर कदम उठा रही है। ऐसे में फलों के बड़े बाजार को भी हम इसके लिए उपयोग करना चाहते हैं। बिहार के मिथिलांचल में आम की कई किस्म ऐसी हैं कि वे दुनिया के श्रेष्ठतम आम का मुकाबला कर सकती हैं। उन्हें बाजार कैसे मिलेगा। उनकी पैदावर में किस तरह के सुधार या बेहतरी की जरूरत है, इसके लिए कैसे एक विस्तृत बाजार प्रवेश का अभियान चलाया जा सकता है, इस पर कार्य करने की जरूरत है। हम इसके लिए समुचित कदम उठाएंगे। मैथिल पत्रकार ग्रुप ने मिथिला के आम को दिल्ली में लोगों के बीच रखा है, इसके लिए हम उनका धन्यवाद भी करते हैं।‘  

मैथिल पत्रकार ग्रुप के संतोष ठाकुर और दीपक झा ने कहा, ‘हमारा प्रयास होगा कि हम अगले वर्ष से मिथिला के आम उत्पादकों को भी यहां पर लाएं। उनके आम को बिक्री के लिए यहां पर रखें। अब तक हम केवल आम खाने के लिए लोगों को आमंत्रित करते रहे हैं। लेकिन अगले वर्ष से आम की बिक्री का विकल्प भी दिया जाएगा, क्योंकि मिथिला के आम की काफी मांग यहां पर है। हमें उम्मीद है कि इसके माध्यम से हम मिथिलांचल बिहार के आम को एक बाजार देने में सफल रहेंगे।’ कार्यक्रम के सह आयोजक प्रेस एसोसिएशन, द वूमेंस प्रेस कॉपर्स एवं प्रेस क्लब ऑफ इंडिया थे। इस मौके पर जयशंकर गुप्त, गीता श्री, हर्षवर्धन त्रिपाठी, संजीव सिन्हा समेत कई वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए।

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India SME Conclave में जुटे कई दिग्गज, मिला अवॉर्ड

टेफ्लास की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी-बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Tuesday, 02 July, 2019
Last Modified:
Tuesday, 02 July, 2019
Awards

मुंबई के रेनेसांस होटल में 26 व 27 जून 2019 को इंडिया एसएमई कॉन्क्लेव और अवॉर्ड्स (India SME Conclave and Awards 2019) का रंगारंग आयोजन हुआ। टेफ्लास की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी-बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुंबई के मेयर विश्वनाथ महदेश्वर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की एडवाइजर श्वेता शालिनी, राज्य प्लानिंग कमीशन के राजेश क्षीरसागर, कृषि मंत्री डॉक्टर अनिल बोंदे, मोहित भारतीय, अमित वाधवानी, अजय ठाकुर, पवन अग्रवाल और अभिनेत्री पेरिजाद जोराबियन जैसी हस्तियां भी शामिल हुईं।

दो दिनों तक चले इस कार्यक्रम में अवॉर्ड्स देने के साथ ही म्यूजिक और फैशन शो का आयोजन भी हुआ। ऋचा सिंह और सीमा कलावड़िया के स्पर्श के फैशन शो में टीवी स्टार धीरज धूपर शो छाये रहे। सिंगर पारुल मिश्रा ने कई गीत गाये और लोगों ने संगीत का भरपूर आनंद उठाया।

कार्यक्रम की झलकियां आप यहां देख सकते हैं-

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कंटेंट निर्माण में जुटी इस बड़ी एजेंसी से जुड़े नरेंद्र त्रिपाठी, निभाएंगे अहम भूमिका

पूर्व में कई मीडिया समूहों के साथ काम कर चुके हैं नरेंद्र त्रिपाठी

Last Modified:
Tuesday, 02 July, 2019
Narendra Tripathi

‘स्मॉल स्क्रीन फिल्म एंड टेलिविजन प्राइवेट लिमिटेड’ (Small Screen Film & Television Pvt Ltd) ने नरेंद्र त्रिपाठी को डायरेक्टर (बिजनेस डेवलपमेंट) के पद पर नियुक्त किया है। नरेंद्र त्रिपाठी को सेल्स, मार्केटिंग और कंटेंट आयडिया के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। वह पूर्व में एनडीटीवी, चैनल7 (अब न्यूज18 इंडिया) औऱ चैनल वी के साथ ही Indya.com और रेडियो मिर्ची व रेडियो मंत्रा के साथ भी काम कर चुके हैं। भारतीय टीवी इंडस्ट्री के पहले लाइफ स्टाइल चैनल ‘एनडीटीवी गुड टाइम्स’ की लॉन्चिंग में उन्होंने काफी अहम भूमिका निभाई थी।  

अपनी नियुक्ति के बारे में नरेंद्र त्रिपाठी का कहना है, ‘4G के आने के साथ ही आज के समय में लगभग सभी के पास स्मार्टफोन है, ऐसे में कंटेंट के इस्तेमाल के तरीकों में काफी बदलाव आ रहा है। इस दौरान कंटेंट क्रिएशन एजेंसी ‘स्मॉल स्क्रीन’ ने भी खुद को एक बेहतर खिलाड़ी साबित किया है औऱ बड़े पैमाने पर क्वालिटी कंटेंट उपलब्ध कराने में कामयाब रही है, फिर चाहे हम टीवी की बात करें अथवा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की। आने वाले समय में ‘स्मॉल स्क्रीन’ जैसी बहुआयामी कंपनियां कंटेंट उत्पादन के क्षेत्र में सबसे आगे होंगी। मैं भी इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए तैयार हूं।‘

बता दें कि इस एजेंसी ने लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में कई बेहतरीन शो का कंटेंट तैयार किया है। एजेंसी टेलिविज़न और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के लिए ब्रैंडेड कंटेंट का भी निर्माण करती है। इस बारे में स्मॉल स्क्रीन के पार्टनर प्रशांत सरीन का कहना है, ‘हमने अपनी शुरुआत वर्ष 2000 में ‘Highway On My Plate with Rocky & Mayur’ के साथ की थी। इस दौरान डिजिटल टेक्नोलॉजी ने मीडिया फॉर्मेटेंस को काफी प्रभावित किया है।'

वहीं, स्मॉल स्क्रीन के पार्टनर रूपक कपूर का कहना है, ‘जिस तरह से फॉर्मेट और प्लेटफॉर्म्स बदलते हैं, कंटेंट तैयार करने का काम भी उसी हिसाब से होता है। हम इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। हम ब्रैंडेड कंटेंट और डिजिटल एड कैंपेन के लिए सीधे बैंड्स के साथ मिलकार काम कर रहे हैं। टीवी चैनल्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और ब्रैंड्स के साथ ‘स्मॉल स्क्रीन’ की नई साझेदारी बनाने में हमें नरेंद्र त्रिपाठी की काफी मदद मिलेगी।’

 

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