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मीडिया कवरेज पर रोक लगाने वाला आदेश सरकार ने लिया वापस, स्वास्थ्य मंत्री ने दी सफाई
छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में मीडिया कवरेज पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक आदेश को लेकर उपजे विवाद के बाद राज्य सरकार ने आखिरकार कदम पीछे खींच लिए हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 8 months ago
छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में मीडिया कवरेज पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक आदेश को लेकर उपजे विवाद के बाद राज्य सरकार ने आखिरकार कदम पीछे खींच लिए हैं। पत्रकारों के तीव्र विरोध और आंदोलन की चेतावनी के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
मंत्री जायसवाल ने कहा कि संबंधित आदेश को वापस लेने के निर्देश दिए जा चुके हैं और अधिकारियों को इस बाबत सूचित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग के सचिव इस समय विदेश दौरे पर हैं। उनके लौटने के बाद आपत्तिजनक बिंदुओं पर पत्रकार संगठनों के साथ चर्चा की जाएगी और सभी पक्षों की सहमति से संशोधित आदेश जारी किया जाएगा।
‘मीडिया की भूमिका को हम सम्मान देते हैं’
मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मीडिया की भूमिका को सराहते हुए कहा, "मीडिया हमारा आईना है। वह हमारी कमियों को सामने लाता है, जिन्हें हम तुरंत सुधारने का प्रयास करते हैं। हमारा उद्देश्य कभी भी मीडिया कवरेज को रोकना नहीं था।" उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में प्रेस क्लब और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ संवाद के बाद ही कोई भी नया दिशा-निर्देश जारी किया जाएगा।
पत्रकारों के आंदोलन के बाद बदला सरकार का रुख
गौरतलब है कि हाल ही में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एक आदेश में पत्रकारों के अस्पतालों में प्रवेश पर अप्रत्यक्ष रूप से रोक लगा दी गई थी। आदेश में कहा गया था कि अस्पतालों में नियुक्त पीआरओ (जनसंपर्क अधिकारी) ही मीडिया को जानकारी देंगे और कोई अन्य कर्मचारी या डॉक्टर मीडिया से बात नहीं करेगा। इस आदेश को पत्रकार संगठनों ने ‘तानाशाही’ करार देते हुए काला कानून बताया था।
राजधानी रायपुर समेत प्रदेशभर में पत्रकारों ने इस फरमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। रायपुर के अंबेडकर चौक पर पत्रकारों ने आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज किया और चेतावनी दी थी कि यदि तीन दिनों में आदेश वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
प्रेस क्लब ने सरकार के फैसले को बताया 'स्वागत योग्य'
रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने स्वास्थ्य मंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "हमारी मांग सिर्फ इतनी थी कि मीडिया पर लगाए गए अनुचित प्रतिबंधों को हटाया जाए। मंत्री ने हमारी बात सुनी और लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप निर्णय लिया, इसके लिए हम उनका आभार व्यक्त करते हैं।"
क्या था विवादित आदेश का सार
स्वास्थ्य विभाग के आदेश में कहा गया था कि अस्पतालों में जनसंपर्क अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी और वही मीडिया से संवाद करेंगे। किसी भी कर्मचारी या डॉक्टर को सीधे पत्रकारों से बात करने की अनुमति नहीं होगी। मीडिया को केवल पीआरओ से जानकारी लेने की अनुमति होगी। इसे पत्रकारों ने ‘मीडिया सेंसरशिप’ का प्रयास बताते हुए लोकतंत्र विरोधी कदम करार दिया था।
अब जबकि सरकार ने यह आदेश वापस ले लिया है, पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे जनहित से जुड़े विषयों पर अपनी जिम्मेदार भूमिका निभाते रहेंगे, लेकिन किसी भी तरह की अभिव्यक्ति पर बंदिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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