'बिहार की राजनीति को समझने के लिए 'गांधी मैदान...' को पढ़ना जरूरी'

संयोग देखिए कि पहली पटना यात्रा के 25 वर्षों के बाद ‘गांधी मैदानः Bluff of Social Justice’ जैसी उत्कृष्ट किताब पढ़ने को मिल गई। इसे लिखा है वरिष्ठ पत्रकार व संपादक अनुरंजन झा ने।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 November, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 November, 2020
GandhiMaidan454

विवेक शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार ।।

करीब 25 साल पहले पटना गया था। तब पटना में सदाकत आश्रम, पटना साइंस कॉलेज और गांधी मैदान को देखने की इच्छा थी। गांधी मैदान इसलिए देखना चाह रहा था, क्योंकि मेरी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली के रामलीला मैदान के करीब ही गुजरा था। रामलीला मैदान में कई बड़ी रैलियों को देखा था और गांधी मैदान में हुईं रैलियों को लेकर लगातार पढ़ा-सुना करता था।

संयोग देखिए कि पहली पटना यात्रा के 25 वर्षों के बाद ‘गांधी मैदानः Bluff of Social Justice’ जैसी उत्कृष्ट किताब पढ़ने को मिल गई। इसे लिखा है वरिष्ठ पत्रकार व संपादक अनुरंजन झा ने। अनुरंजन बहुत बेखौफ और बेबाक पत्रकार हैं। पत्रकारों की ये प्रजाति तेजी से विलुप्त हो रही है। जैसा कि इस किताब के नाम से ही साफ है, ये सिर्फ गांधी मैदान के इर्द-गिर्द ही नहीं घूमती। ये संभव भी नहीं है।

अनरंजन झा ‘गांधी मैदानः Bluff of Social Justice’ को शुरू करते हैं 5 जून,1974 को गांधी मैदान में हुई जयप्रकाश नारायण की हुई विशाल रैली से। उसके बाद किताब सोशल जस्टिस के दो सबसे अहम किरदारों क्रमश: लालू यादव और नीतीश कुमार पर मुख्य रूप से फोकस करती है।

जेपी ने उस 5 जून,1974 की रैली में संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया था। आजाद भारत ने जनता की भागीदारी के लिहाज से शायद ही इतनी बड़ी रैली कभी देखी हो। उस रैली में लालू यादव भी थे। वे नौजवान थे। आदर्शवादी थे। वे 1977 में महज 28 साल की उम्र में सांसद बन गए थे। वे दिल्ली में हिन्दुस्तान टाइम्स हाउस में अपने एक बाल सखा अरुण कुमार जी के पास बार-बार आते थे, ताकि उन्हें पालिका बाजार लेकर जा सकें। वे पालिका बाजार को ठंडी मार्केट कहते थे। वे पालिका बाजार से राबड़ी जी और बच्चो के लिए कपड़े खरीदते थे।

लालू आगे चलकर बिहार के मुख्यमंत्री बने। ‘गांधी मैदान के आंदोलन से निकले उस ब्लफ मास्टर की सारी राजनीति दिखाने की राजनीति थी। ये बिल्कुल नहीं था कि राज्य का पूरा पिछड़ा समाज लालू में गांधी देख रहा था, लेकिन लालू यादव में उसको अपना तारणहार जरूर नजर आ रहा था...’

‘लालू ने सत्ता पर काबिज होते ही मैथिली की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता रद्द कर दी, क्योंकि उनका मानना था कि इस भाषा का इस्तेमाल अधिकतर सवर्ण ही करते हैं। उसके बाद पटना का गोल्फ कोर्स यह कहकर बंद करवा दिया कि यह अमीरों का खेल है...।’

बिहार लालू राज के दौरान जंगल राज में तब्दील होता गया। राज्य से प्रतिभा पलायन तेज हो गया। सरकारी नौकरियों में अपनों को तरजीह मिलने लगी। लालू का ब्यूरोक्रेसी पर पूरा कब्जा हो चुका था। उद्योग धंधे तबाह होने लगे। लेकिन अपहरण और फिरौती उद्योग तेजी से जमने लगे। अनुरंजन झा एक तरह से मानते हैं कि बिहार के एकछत्र नेता ने राज्य का कोई भला नहीं किया।

तो क्या जिस नीतीश कुमार में लालू के बाद बिहार ने उम्मीद की किरण देखी थी वह उम्मीदों पर खरे उतरे? ‘नीतीश कुमार बिहार और बिहारी समाज के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा रखते थे... वे कमिटेड और ईमानदार थे।’ वे लालू जितने बड़े जननेता तो कभी नहीं थे। पर वे भी राज्य को बदहाली से निकालने में सफल नहीं हुए। उनके मुख्यमंत्रित्व काल में देश या विदेश का निवेश राज्य में नहीं आया। मीडिया फ्रैंडली नीतीश कुमार को मीडिया ने सुशासन बाबू का दर्जा दिलवा दिया।

बिहार से जुड़े कई लोगों का मत है कि बिहार के साथ बेईमानी हुई। केंद्र ने संतुलित तरीके से बिहार के लिए फंड का आवंटन नहीं किया। ठीक है, इस कारण बिहार का औद्योगिक विकास नहीं हो सका। बिहार उन्नत राज्यों में शामिल नहीं हो सका, लेकिन क्या बिहार में फाइव स्टार होटल बनाने के लिए भी केंद्र के फंड की आवश्यकता है। क्या ये काम लालू या नीतीश नहीं कर सकते थे... बिहार के अधिकतर घर सीवर से नहीं जुड़े हैं, क्या इसके लिए भी केंद्र जिम्मेदार रहा। गांव छोड़िए, शहरों के घरों में टैप वाटर नहीं आता है, क्या इसके लिए केंद्र जिम्मेदार है।

सच ये है कि बिहार पिछले 30 सालों में बार-बार फेल होता रहा। बिहार की जनता को छला गया। अर्थशास्त्री राजीव कुमार कहते हैं कि जीडीपी ग्रोथ रेट में बिहार सरकार खूब पीठ थपथपाती है, जरा यह भी टटोल लेना चाहिए कि बिहार में प्रति व्यक्ति आय क्या है, भारत के सभी राज्यों से कम। जिनको भरोसा नहीं है, वह चेक कर सकते हैं। ठीक है, औद्योगिक विकास नहीं हो सका। लेकिन सर्विस सेक्टर में तो विकास हो ही सकता था। वहां कौन सी जमीन और कौन से पोर्ट की आवश्यकता है। देश के जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान 50 फीसदी से अधिक है और देश के ग्रॉस वैल्यू एडेड में 55 फीसदी। बिहार इस 50 और 55 फीसद में अपनी हिस्सेदारी देख सकता है। पटना के अलावा एक भी एयरपोर्ट नहीं है, अब दरभंगा बना है, वह भी छोटे विमानों के लिए। एक भी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट नहीं है।

भारत के ज्ञान की राजधानी बिहार के पिछले 30 सालों की राजनीति, निराशा, हताशा को समझने के लिए गांधी मैदानः Bluff of Social Justice को पढ़ लेने में कोई बुराई नहीं है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

महिला पत्रकार ने फिल्म निर्माता-एक्टर पर लगाया ये आरोप, दर्ज कराई शिकायत

महिला पत्रकार ने इसे लेकर महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 19 January, 2021
Last Modified:
Tuesday, 19 January, 2021
FIR

असम में एक महिला पत्रकार ने एक फिल्म निर्माता और एक्टर के खिलाफ मारपीट करने और अपशब्द कहने का आरोप लगाया है और इस मामले में पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई है। एक स्थानीय दैनिक से जुड़ी पत्रकार ने रविवार को एक मीडिया एजेंसी को बताया कि फिल्म निर्माता उमाशंकर झा और एक्टर उत्तम सिंह ने अपनी हिंदी फिल्म ‘सेवन सिस्टर्स एंड वन ब्रदर’ की घोषणा के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें वे हिस्सा लेने पहुंची हुईं थीं।

महिला ने दावा किया कि जब उन्होंने फिल्म से संबंधित कुछ सवाल पूछे, तो निर्माता ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें अपशब्द भी कहे। महिला ने कहा कि कुछ समय बाद जब वह और एक फोटो-पत्रकार उनके पास गए औऱ उनके इस व्यवहार पर सवाल उठाया, तो उन्होंने साथी पत्रकार का हाथ खींच लिया और उसके साथ मारपीट की।

महिला पत्रकार ने इसे लेकर महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वहीं, गुवाहाटी प्रेस क्लब (जीपीसी) ने एक बयान में घटना की निंदा की और पुलिस से तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। जीपीसी के अध्यक्ष मनोज नाथ और महासचिव संजॉय रे ने कहा कि क्लब अपनी जांच में पुलिस को मदद देगा।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मुख्य अतिथि के तौर पर यूपी की राज्यपाल ने भरी हामी, कुछ ऐसा होगा बृज रत्न अवॉर्ड का लोगो

इंक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले बृज रत्न अवॉर्ड समारोह के चौथे व पांचवें संस्करण का संयुक्त रूप से आयोजन किया जाएगा

Last Modified:
Friday, 15 January, 2021
BrijRatnaAward554

इंक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले बृज रत्न अवॉर्ड समारोह के चौथे व पांचवें संस्करण का संयुक्त रूप से आयोजन किया जाएगा, जिसकी मुख्य अतिथि महामहिम यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल होंगी।

राज्यपाल से आगरा प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में शुक्रवार को इंक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन के चेयरमैन पूरन डावर, सचिव अजय शर्मा, संयोजक बृजेश शर्मा, डॉ. रामनरेश शर्मा ने मुलाकात की। इस दौरान राज्यपाल ने बृज रत्न अवॉर्ड के लोगो का अनावरण भी किया। साथ ही बृज रत्न अवॉर्ड में आगमन की अपनी स्वीकृति प्रदान की और तिथि शीघ्र निर्धारित करने की बात कही।

बृज रत्न अवॉर्ड कला, साहित्य, अध्यात्म, संगीत, अभिनय, खेल और चिकित्सा सहित विभिन्न 12 क्षेत्रों में प्रदान किया जाता है। विगत वर्ष कोरोना महामारी के चलते आयोजन स्थगित हो गया था। अब राज्यपाल के आगमन की स्वीकृति मिलने के बाद आयोजन की संभावित तिथि अगले माह के प्रथम सप्ताह में रहेगी।

कार्यक्रम को लेकर आयोजकों ने तेजी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। शीघ्र चयनित अवॉर्ड विजेताओं के नामों की भी घोषणा होगी। विगत वर्ष रत्न अवॉर्ड समारोह की उद्घोषणा उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने की थी।

शुक्रवार को आगरा के सर्किट हाउस में इंक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन के चेयरमैन पूरन डावर से तकरीबन 30 मिनट चली वार्ता के दौरान महामहिम राज्यपाल ने बृज क्षेत्र के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

सड़क हादसे ने छीन ली वीडियो पत्रकार प्रमोद कुमार की जिंदगी

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में सड़क दुर्घटना में वीडियो पत्रकार प्रमोद कुमार का निधन हो गया, जिसके बाद गुरुवार देर शाम उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

Last Modified:
Friday, 15 January, 2021
Accident

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में सड़क दुर्घटना में वीडियो पत्रकार प्रमोद कुमार का निधन हो गया, जिसके बाद गुरुवार देर शाम उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वे करीब 38 साल के थे। राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री चौ. लक्ष्मीनारायण और श्रीकांत शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने प्रमोद कुमार के आकस्मिक निधन पर दुख जताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रमोद कुमार के साथ काम कर चुके एक निजी पोर्टल के संचालक योगेश खत्री ने उनके छोटे भाई मनोज कुमार के हवाले से बताया, ‘बीती रात जब प्रमोद कुमार अपना काम समाप्त कर सौंख रोड स्थित अपने घर लौट रहे थे, तभी एक खंभे से उनका वाहन टकरा गया।’ हादसे में प्रमोद कुमार घायल हो गए और उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन हेमरेज होने की जानकारी दी और किसी बेहतर अस्पताल ले जाने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि प्रमोद को उसी समय जयपुर के एसएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। गुरुवार को प्रमोद कुमार का परिवार उनका पार्थिव शरीर मथुरा ले आया, जहां देर शाम उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पत्रकार पर पहले दबंगों ने घर में घुसकर किया हमला, अब वाहनों में लगा दी आग

छह दिन पहले कुछ दबंगों ने एक पत्रकार के घर में घुसकर उसे और घरवालों को लाठी-डंडों से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 January, 2021
Fire

अमेठी में पत्रकार कितने असुरक्षित हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छह दिन पहले कुछ दबंगों ने एक पत्रकार के घर में घुसकर उसे और घरवालों को लाठी-डंडों से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। तब दबंगों ने अवैध असलहे से हवाई फायरिंग कर जान से मारने की धमकी भी दी थी। वहीं, अब एक बार फिर दबंगों ने बुधवार अलसुबह पत्रकार के घर के सामने खड़ी कार और बाइक को आग के हवाले कर दिया।

इस मामले की शिकायत किए जाने के 3 दिन बाद भी पुलिस ने इस पर कोई कार्यवाही नही की थी, लिहाजा दोबारा से यह मामला सामने में आया। पुलिस की लापरवाही के चलते मोहनगंज थाने के एसएचओ को हटा दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, यह मामला मोहनगंज कोतवाली क्षेत्र के फत्तेपुर गांव का है, जहां पिछले हफ्ते शुक्रवार को शाम 6 बजे रास्ते के विवाद में दबंगों ने पत्रकार अग्रिवेश मिश्र के घर में घुसकर परिजनों से मारपीट की थी। आरोप है कि दबंग दुर्गा प्रसाद, काशी प्रसाद और अन्‍य लोगों ने कुल्हाड़ी, डंडा के साथ अवैध असलहा से लैस होकर पत्रकार के घर में घुसकर हमला कर दिया। इसमें पत्रकार के साथ उनके परिजन कमला देवी, देवेन्द्र कुमार और राजकुमारी को गंभीर चोटें आईं। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी को इलाज के लिए अस्‍पताल में भर्ती कराया।

इस मामले में पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया था, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करती नजर आई। पुलिस के लापरवाह रवैये के चलते बुधवार अलसुबह दबंगों ने पत्रकार के घर के सामने खड़ी कार व बाइक को आग के हवाले कर दिया।

पत्रकार अग्रिवेश मिश्र ने बताया कि गांव के दुर्गा प्रसाद ने अन्‍य लोगों के साथ मिलकर हमारे घर पर हमला कर दिया था, जिसमें हमारी माता, भाई और बुआ को गंभीर चोटें आईं। दबंगों ने अवैध असलहे से हवाई फायरिंग भी की और हमारे परिवार वालों को जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में एसपी दिनेश सिंह ने लापरवाही बरतने पर मोहनगंज थाने के एसएचओ विश्‍वनाथ यादव को हटा दिया है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

‘हेल्थ रिपोर्टिंग करते समय सनसनी फैलाने से बचें’

माखनलाल विश्वविद्यालय और यूनिसेफ ने जनस्वास्थ्य और तथ्यपरक पत्रकारिता पर संयुक्त रूप से आयोजित की कार्यशाला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 January, 2021
Health workshop

हेल्थ से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय अनावश्यक रूप से सनसनी फैलाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर पत्रकारिता जगत से जुड़े तमाम दिग्गजों ने चिंता जताई है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश का कहना है कि ऐसे मामलों पर संतुलित रिपोर्टिंग करनी चाहिए।

प्रो. केजी सुरेश ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय एवं यूनिसेफ द्वारा आयोजित द्वितीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत जनस्वास्थ्य और तथ्यपरक पत्रकारिता पर आधारित कार्यशाला में यह बात कही।

कार्यक्रम की अध्यक्ष करते हुए प्रो. सुरेश ने कहा कि स्वास्थ्य संचार बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। विश्वविद्यालय के पत्रकारिता पाठ्यक्रम में इस विषय को जल्द ही शामिल करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पत्रकारिता चूंकि सीधे-सीधे जनस्वास्थ्य एवं जन सरोकार से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें लापरवाही नहीं बरती जा सकती। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की जिम्मेदारी सिर्फ पत्रकार की ही नहीं, बल्कि सरकार एवं एनजीओ की भी है। इसलिए सभी को अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभानी चाहिए।

यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी का कहना था कि आज के समय में साक्ष्यों पर आधारित पत्रकारिता बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 में बिना डाटा के बहुत रिपोर्टिंग हुई है और बिना साक्ष्य के तथ्य सोशल मीडिया में भी पहुंचे हैं।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार संजय देव ने कहा कि स्वास्थ्य से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय पत्रकार को पूर्वाग्रहों से बाहर निकलकर पत्रकारिता करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चूंकि स्वास्थ्य पत्रकारिता मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा विषय है, इसलिए इसे समझने की जरूरत है। संजय देव ने कहा कि पत्रकारों को सजग रहते हुए रिपोर्टिंग करनी चाहिए। पत्रकार को पाठक के लिए काम की बात को आसान भाषा में पहुंचाना चाहिए।

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार संजय अभिज्ञान ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सच के लिए एवं जीवन के लिए लिखना है, यदि ऐसा नहीं किया गया तो लोग अमृत को विष समझ लेंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पत्रकारिता करते समय पाठकों को संशय में नहीं रहने देना चाहिए।

कार्यक्रम का समन्वय सहायक प्राध्यापक लाल बहादुर ओझा ने किया। आभार प्रदर्शन मेंटर डॉ. मणिकंठन नायर द्वारा किया गया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) अविनाश वाजपेयी, जनसंचार, प्रबंधन, न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी विभाग के साथ ही खंडवा, नोएडा एवं रीवा परिसर के सभी शिक्षक, प्रड्यूसर, ट्यूटर व प्रोडक्शन असिस्टेंट आदि मौजूद थे।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पत्रकार पर लगा यह गंभीर आरोप, पुलिस ने दर्ज की FIR

यह मामला उत्तर प्रदेश के एटा जिले से सामने आया है। पुलिस ने पत्रकार की गाड़ी भी जब्त कर ली है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 13 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 13 January, 2021
FIR

महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पुलिस ने संतोष यादव नामक एक पत्रकार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। यह मामला उत्तर प्रदेश के एटा जिले से सामने आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एटा जिले के थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के कचहरी रोड स्थित पुलिस कार्यालय पर कुछ समय पूर्व थाना मिरहची क्षेत्र की महिला ने पुलिस कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। हालांकि, पुलिस ने महिला के इस प्रयास को विफल कर दिया था।

आरोप है कि आत्‍महत्‍या का प्रयास करने वाली महिला और उसके समर्थक पत्रकार संतोष यादव की गाड़ी में ही आए थे। पुलिस ने वह गाड़ी जब्त कर ली है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

वरिष्ठ पत्रकार दीप जोशी का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

बताया जाता है कि पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य काफी खराब चल रहा था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 12 January, 2021
Last Modified:
Tuesday, 12 January, 2021
Deep Joshi

अल्मोड़ा के वरिष्ठ पत्रकार दीप जोशी का निधन हो गया है। वह हिंदी दैनिक ‘अमर उजाला’ के अल्मोड़ा कार्यालय में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। बताया जाता है कि पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य काफी खराब चल रहा था।

हल्द्वानी में निजी अस्पताल में चेकअप कराने के बाद उन्हे दिल्ली के नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार की देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया। दीप जोशी के परिवार में पत्नी व एक पुत्र है। दीप जोशी के निधन पर तमाम पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा दु:ख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

तीन साल की उम्र में खो दी थीं आंखें, अब दुनिया को अलविदा कह गए ये वरिष्ठ पत्रकार

भारतीय-अमेरिकी उपन्‍यासकार व वरिष्ठ पत्रकार वेद मेहता का निधन हो गया। उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 12 January, 2021
Last Modified:
Tuesday, 12 January, 2021
VedPratap

भारतीय-अमेरिकी उपन्‍यासकार व वरिष्ठ पत्रकार वेद मेहता का निधन हो गया। उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे 86 साल के थे। उन्हें 20वीं सदी के एक ऐसे लेखक के तौर पर जाना जाता है, जिन्होंने अमेरिकी पाठकों की भारत से पहचान कराई है।

एक पत्रकार के तौर पर वे ‘न्यूयॉर्कर’ मैगजीन के लिए 33 साल तक स्टाफ राइटर के तौर पर कार्य कर चुके हैं। इस मैगजीन का कहना है कि मेहता का निधन शनिवार को हुआ है। रविवार को मैगजीन की ओर से कहा गया है, ‘न्यूयॉर्कर’ के लिए 30 साल से अधिक समय तक लेखक के तौर पर काम करने वाले मेहता का 86 साल की उम्र में शनिवार सुबह निधन हो गया है।’

अविभाजित भारत में साल 1934 को लाहौर के एक पंजाबी परिवार में जन्मे वेद मेहता ने अपने जन्म के तीन साल के बाद मैनिंजाइटिस बीमारी के चलते अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। बावजूद इसके दृष्टिहीनता को मात देकर मेहता ने अपने लेखन के जरिये अमेरिकी पाठकों को भारत के बारे में बताया। हालांकि उन्होंने अपनी साहित्य से जुड़ी कला और करियर को ऊंचे मुकाम तक लाने के लिए कभी भी अपनी कमियों को आड़े नहीं आने दिया।  

उनकी लिखी एक बात थी, ‘मुझे ऐसा महसूस होता था कि दृष्टिहीनता एक गंभीर बाधा है और मैं केवल प्रयास करता था, वो सब करने का जो मेरी बड़ी बहनें और भाई करते थे। मैं किसी भी तरह उनके जैसा हो सकता था।’ मेहता की 24 किताबों में वॉल्किंग द इंडियन स्ट्रीट्स (1960), पोट्रेट ऑफ इंडिया (1970) और महात्मा गांधी एंड हिस एपोस्टल्स शामिल हैं।

वह सबसे ज्यादा 12-वॉल्यूम मेमोयर के लिए जाने जाते हैं, जिसमें आधुनिक भारत के मुश्किल भरे इतिहास और दृष्टिहीनता के कारण शुरुआती जीवन में उन्हें होने वाली मुश्किलों पर ध्यान दिया गया है।

वेद मेहता की आत्मकथा कृतियों 12-वॉल्यूम सीरीज में ‘डैडीजी’ पहली है। न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में साल 1982 में न्यूयॉर्कर के स्टोरी एडिटर विलियम शॉन ने कहा था, ‘वेद मेहता ने मैगजीन के सबसे प्रमुख लेखक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है।’ बता दें विलियम शॉन वही हैं, जिन्होंने 1961 में वेद मेहता को स्टाफ राइटर के तौर पर नियुक्त किया था।

मेहता ने कई सारी किताबें लिखने को लेकर एक साक्षात्कार में कहा था कि लेखक आंशिक रूप से अकेलेपन का परिणाम है। उनकी रचनाओं में ‘फ्लाई एंड द फ्लाई बॉटल: एनकाउंटर विद ब्रिटिश इंटेलेक्चुअल’, ‘ए फैमिली अफेयर: इंडिया अंडर थ्री प्राइम मिनिस्टर’, ‘ए वेद मेहता रीडर: द क्राफ्ट ऑफ द निबंध’ अन्य हैं। इन्हें पाठकों की ओर से खूब पसंद किया गया है।

मेहता महज 15 साल की उम्र में अमेरिका आए थे और यहां उन्होंने लिटिल रॉक में स्थित ‘अर्कांसस स्कूल फॉर द ब्लाइंड’ में दाखिला लिया। पोमोना कॉलेज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक लेखक के तौर पर काम करना शुरू किया। मैगजीन से वह 26 साल की उम्र में जुड़े।

उन्होंने भारतीय राजनीति, ऑक्सफोर्ड डॉन्स, धर्मशास्त्र सहित कई अन्य विषयों पर लेख लिखे हैं। भारत में जन्मी अभिनेत्री और कुकबुक लेखिका मधुर जैफरी ने एक बार न्यूयॉर्क टाइम्स के मॉरीन दौद से मेहता से अपनी पहली मुलाकात को लेकर कहा था, ‘मैं मदद के लिए उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही थी लेकिन उन्होंने मुझे खिसकने को कहा और तभी से हम दोस्त हैं।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार तुर्लपाटी कुटुम्ब राव का निधन

वरिष्ठ पत्रकार तुर्लपाटी कुटुम्ब राव (Turlapati Kutumba Rao) का रविवार रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

Last Modified:
Monday, 11 January, 2021
Turlapati

वरिष्ठ पत्रकार तुर्लपाटी कुटुम्ब राव (Turlapati Kutumba Rao) का रविवार रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनका इलाज विजयवाड़ा के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। वे करीब 87 वर्ष के थे।

कुटुम्बराव पत्रकारिता के पेशे का लंबा अनुभव रहा है। लगभग सात दशकों तक कई विषयों पर विश्लेषण किया है। एक पत्रकार, लेखक और आलोचक के रूप में तुर्लपाटी एक ऑल-राउंडर के रूप में जाने जाते थे।

कुटुम्बाराव का जन्म 10 अगस्त 1933 को विजयवाड़ा में हुआ था। उन्होंने 1946 में पत्रकारिता के पेशे में प्रवेश किया। इसके बाद आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री तंगुटुरी प्रकाशम पंतुलु के पास सचिव के रूप में कार्य किया। तुर्लपाटी ने अपनी पुस्तक '18 मुख्यमंत्रियों के साथ मेरी बातचीत’ में अनेक दिलचस्प बातों का खुलासा किया। 2002 में पद्मश्री पुरस्कार पाने वाले वे पहले तेलुगू पत्रकार थे।

कुटुम्ब राव ने प्रमुख नेता डॉ. भीम राव अंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू और राजाजी के साक्षात्कार तंत्रता सेनानियों, राष्ट्रवादियों और मशहूर हस्तियों की लगभग 6,000 आत्मकथाएं लिखीं। उन्होंने आंध्र प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों और विदेशों में लगभग 20,सम्मेलनों को संबोधित किया है। इसके चलते उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

इसी क्रम में तुर्लपाटी कुटुम्ब राव के निधन पर अनेक पार्टी के नेता और पत्रकारों ने भी गहरा शोक जताया है।  

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इस वजह से हुई थी पत्रकार के बेटे की हत्या, चाची समेत दो गिरफ्तार

झारखंड में सात जनवरी को पत्रकार के बेटे का अधजला शव लोधमा रोड स्थित छाता नदी के प्रेमघाघ जंगल से बरामद हुआ था।

Last Modified:
Monday, 11 January, 2021
Murder

झारखंड के खूंटी जिला अंतर्गत कर्रा थाना क्षेत्र में पिछले दिनों हुई वरिष्ठ पत्रकार अनिल मिश्र के छोटे बेटे संकेत कुमार मिश्र (28) की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। झारखंड के खूंटी जिला अंतर्गत कर्रा थाना क्षेत्र में पिछले दिनों हुई वरिष्ठ पत्रकार अनिल मिश्र के छोटे बेटे संकेत कुमार मिश्र (28) की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस का कहना है कि संकेत की हत्या उसकी चाची विद्यावती देवी ने अपने कथित प्रेमी घरेलू सहायक बिरसा मुंडा के साथ मिलकर की थी। संकेत के अपनी चाची के साथ अवैध संबंध थे। यही नहीं, संकेत की चाची ने अपने ही घरेलू सहायक के साथ भी अवैध संबंध बना लिए थे।

पुलिस का कहना है कि कुछ दिनों पूर्व चाची ने संकेत को प्रेमघाघ पिकनिक स्थल पर बुलाया था। यहां किसी बात को लेकर संकेत और उसकी चाची में विवाद हो गया। विवाद होता देखकर बिरसा मुंडा भी वहां पहुंच गया और संकेत पर हमला बोल दिया। हमले में संकेत की मौत हो गई। इसके बाद बिरसा मुंडा ने अपनी बाइक से पेट्रोल निकालकर संकेत के शव को आग लगा दी। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपित फरार हो गए। दोनों भागकर जशपुर में छुपे हुए थे, जहां से पुलिस ने उन्हों दबोच लिया।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपितों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में संकेत की चाची और बिरसा मुंडा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गौरतलब है कि सात जनवरी 2021 को संकेत कुमार का अधजला शव लोधमा रोड स्थित छाता नदी के प्रेमघाघ जंगल से बरामद हुआ था। पुलिस ने मौके से शराब और पानी के बोतल तथा गिलास भी बरामद किए थे।

संकेत पांच जनवरी  2021 को ससुराल से कर्रा के लिए निकला था। इसके बाद वह न तो घर पहुंचा और न ही ससुराल वापस लौटा। शाम करीब पांच बजे के बाद से उसका मोबाइल भी बंद हो गया। इसके बाद उसका शव बरामद हुआ।

संकेत कुमार मिश्र दो भाई और दो बहनों में सबसे छोटे थे। वर्ष 2017 में रांची पंडरा की फ्रेंड्स कॉलोनी में सीमा कुमारी के साथ उनकी शादी हुई थी। उनकी डेढ़ साल की बेटी है। वह रांची में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते थे।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए