जानें, क्यों पत्रकार पर भड़के नेताजी, दी केस दर्ज कराने की धमकी

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और आगरा के सांसद एसपी सिंह बघेल पर अन्य पत्रकारों के समझाने का भी नहीं हुआ कोई असर

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 October, 2019
Last Modified:
Wednesday, 23 October, 2019
Journalist and Politician

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और आगरा के सांसद एसपी सिंह बघेल एक पत्रकार पर जमकर नाराज हो गए। उनका कहना था कि हमेशा प्रेस को यही बिगाड़ता है ओर मंत्री का, सीएम का और डिप्टी सीएम का मूड खराब करता है। उन्होंने पत्रकार पर झूठ बोलने और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए मुकदमा कायम कराने की धमकी भी दी।

इस दौरान पत्रकार भी अपनी बात रखता रहा, लेकिन उन्होंने बीच में टोकते हुए कहा, ‘अच्छी खासी प्रेस कॉन्फ्रेंस का मूड करता है। सीएम को तू परेशान करता है और डिप्टी सीएम को तू परेशान करता है।’

हालांकि, अन्य मीडियाकर्मियों का सांसद से कहना था कि इस तरह के व्यवहार से गलत संदेश जा रहा है। यदि वे चाहें तो कंप्लेंट करा सकते हैं। इस पर सांसद ने जवाब दिया कि वे पूरी मीडिया को नहीं बल्कि उसी पत्रकार को कह रहे हैं। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि उक्त पत्रकार शहर की सभ्रांत महिला को परेशान कर उससे पैसों की मांग कर रहा था।

इस पूरी घटना का विडियो आप यहां देख सकते हैं।

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जांच में घिरे CM के खिलाफ स्टिंग करने वाले चैनल के अधिकारी

बेंगलुरू पुलिस ने सोमवार को उस न्यूज चैनल के अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है, जिसने बीते दिनों सीएम बीएस येदियुरप्पा के परिवार का एक स्टिंग दिखाया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2020
News Channel

बेंगलुरू पुलिस ने सोमवार को उस न्यूज चैनल के अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है, जिसने बीते दिनों सीएम बीएस येदियुरप्पा के परिवार का एक स्टिंग दिखाया था। इस स्टिंग में सीएम के परिवार के लोग कथित भ्रष्टाचार में शामिल दिखाए गए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने सोमवार को टीवी चैनल ‘पावर टीवी’ (Power TV) के ऑफिस की तलाशी ली। इसके अलावा बेंगलुरू पुलिस ने चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर राकेश शेट्टी के घर पर भी छापेमारी की और साथ ही चैनल के एक एंकर से भी पूछताछ की है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘पावर टीवी’ ने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक से कथित तौर पर मिली जानकारी के आधार पर कथित भ्रष्टाचार की खबर प्रसारित की थी, उसी कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक की शिकायत पर ही पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि चैनल ने बीते माह इस मामले पर कार्यक्रमों की एक पूरी सीरीज चलाई थी, जिसमें एक स्टिंग ऑडियो भी प्रसारित की गई थी।

कथित तौर पर यह स्टिंग ऑडियो चैनल के एमडी और एडिटर राकेश शेट्टी और बीएस येदियुरप्पा परिवार के एक अहम सदस्य के बीच का बताया गया था। इसके अलावा चैनल ने अपनी खबर में येदियुरप्पा परिवार के एक अन्य सदस्य और कंस्ट्रक्शन फर्म के निदेशक के बीच की वॉट्सऐप चैट को भी दिखाया था। इसके अतिरिक्त न्यूज चैनल ने अपनी खबर में कुछ दस्तावेज भी दिखाए थे, जिसमें यह बताया गया है कि येदियुरप्पा परिवार के एक सदस्य के बैंक खाते में बड़ी संख्या में रकम जमा की गई है।

वहीं स्टिंग के खुलासे के बाद विपक्षी पार्टियों ने सीएम बीएस येदियुरप्पा से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है। विपक्षी पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज द्वारा या फिर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाकर मामले की जांच कराने की भी मांग की है, जिसे कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मॉनीटर करें।

वहीं सीएम येदियुरप्पा ने विपक्ष को उन पर लगे आरोपों को सिद्ध करने की चुनौती दी है। हालांकि चैनल के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।

'इंडियन एक्सप्रेस' की पूरी खबर आप नीचे दी हेडिंग पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं-

Police search channel that aired sting on ‘corruption’ by BSY family

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‘आज समाज’ के संपादक अमित गुप्ता के पिताजी अनंत में लीन

हिंदी दैनिक ‘आज समाज’ के संपादक अमित गुप्ता के पिताजी रत्न प्रकाश का सोमवार को निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2020
ratnaprakash

हिंदी दैनिक ‘आज समाज’ के संपादक अमित गुप्ता के पिताजी रत्न प्रकाश का सोमवार को निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार थे। वे वायुसेना के के वारंट ऑफिसर से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने 1965 और 1971 की लड़ाई भी लड़ी थी। सोमवार की सुबह अंबाला कैंट स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली।

आईटीवी नेटवर्क के प्रधान संपादक अजय शुक्ल ने दुख की इस घड़ी में अमित गुप्ता व उनके परिवार के साथ गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आईटीवी नेटवर्क परिवार इस दुख की घड़ी में अमित गुप्ता के साथ है।

वहीं दूसरी तरफ, सोमवार को ‘आज समाज’ के परिवार के सदस्यों ने अमित गुप्ता के पिता रत्न प्रकाश के निधन पर कार्यालय में दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया। साथ ही दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

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नई शिक्षा नीति को दिग्गजों ने यूं बताया देश में ज्ञान विज्ञान की क्रांति का 'जनक'

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री का कहना है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
IIMC

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री का कहना है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं, इसलिए किसी भाषा को क्षेत्रीय भाषा और किसी को राष्ट्रीय भाषा कहना ठीक नहीं होगा। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा सोमवार को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय भाषाएं’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए प्रो. अग्निहोत्री का कहना था, ‘जिस दिन हमारे शिक्षकों ने भारतीय भाषाओं में पढ़ाना शुरू कर दिया, उस दिन हिन्दुस्तान अन्य देशों से बहुत आगे निकल जाएगा।'

प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य भारतीय भाषाओं को सम्मान दिलाना है। इस दिशा में सभी लोगों को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है। भाषा, ज्ञान नहीं है, बल्कि ज्ञान तक पहुंचने की कुंजी है। इसलिए अगर विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में ज्ञान लेंगे, तो उनका संपूर्ण विकास संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह मां का दूध बच्चे के लिए सुपाच्य यानी आसानी से पचने वाला और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है, उसी तरह मातृभाषा में लिया गया ज्ञान भी बच्चे के जीवन के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि इस नई शिक्षा नीति से भारत में ज्ञान विज्ञान की क्रांति होगी, जिसमें शिक्षकों को महत्वपूर्ण निभानी होगी।

अंग्रेजी के चक्रव्यूह से निकलेंगे आधुनिक अभिमन्यु: प्रो. संजीव शर्मा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि अंग्रेजी का जो चक्रव्यूह हमारे चारों तरफ है, उससे बाहर आने में आधुनिक अभिमन्यु पूरी तरह से सक्षम हैं। प्रो. शर्मा ने कहा कि ये भारत के शैक्षिक पुर्नजागरण का काल है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकों के निर्माण की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय का भाव आवश्यक है। भारतीय भाषाओं में कोई विभेद नहीं है, कोई संघर्ष नहीं है। अगर हमें भाषाओं को सींचना है, तो सभी को मिलजुलकर प्रयास करने होंगे, जिसमें महत्वपूर्ण भूमिका हिंदी भाषी लोगों को निभानी होगी।

बहती नदी है हिंदी: रंगनाथन

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रसिद्ध लेखिका एवं दैनिक हिन्दुस्तान की कार्यकारी संपादक जयंती रंगनाथन ने कहा, ‘हिंदी एक बहती नदी है। आप देखिए कि हिंदी के अखबार 30 वर्ष पहले सिर्फ 3 लाख प्रतियां छापते थे, लेकिन आज ये आंकड़ा 3 करोड़ के पार पहुंच चुका है। यही हिंदी की ताकत है।’

रंगनाथन का कहना था, ‘तमिल मेरी मातृभाषा है, पर हिंदी मेरी कर्म भाषा है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का जोर होता है कि बच्चे स्कूल में हिंदी में न बात करें, पर अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हुए बच्चों को हमने ये सिखाया ही नहीं कि जीवन में चुनौतियों का सामना किस तरह करना है। आज हम यह भूल गए हैं कि शिक्षा का मकसद क्या है।’ 

जिंदगी और शिक्षा पर उन्होंने कहा कि शिक्षा हमें ये सिखाती है कि जिंदगी भागने का नाम नहीं, बल्कि रुकने और संभलकर चलने का नाम है। एक अच्छा नागरिक बनना और आशावादी जिंदगी जीना, यही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है। रंगनाथन ने कहा कि आने वाले दिनों में ये नई शिक्षा नीति हमारे बच्चों को ज्ञान की दृष्टि से ताकतवर बनाएगी।

जोड़ती है मातृभाषा: सचदेव

नवभारत टाइम्स, मुंबई के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव ने कहा कि अंग्रेजी के माध्यम से हम दुनिया से तो जुड़ सकते हैं, लेकिन अपने आप से नहीं जुड़ सकते। अगर हमें स्वयं से जुड़ना है, तो हमें मातृभाषा का इस्तेमाल करना ही होगा। उन्होंने कहा कि किसी विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षित होकर आप अपने आप को पूर्ण शिक्षित नहीं मान सकते। शिक्षा के माध्यम से हम मनुष्य बन सकें, यही शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य होना चाहिए। सचदेव ने कहा कि जब तुर्की एक रात में अपनी भाषा को राष्ट्रभाषा घोषित कर सकता है, तो ये काम हमारे यहां क्यों नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि हमारा संकट ये नहीं है कि हमारी भाषा क्या होनी चाहिए, बल्कि हमारा संकट ये है कि किसी भी भाषा को सीखने का हमारा उद्देश्य क्या होना चाहिए। किसी भी शिक्षा नीति का उद्देश्य व्यक्ति को एक अच्छा इंसान बनाना होता है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि क्या पढ़ाया जाए और कैसे पढ़ाया जाए। सचदेव ने कहा कि नई शिक्षा नीति ये अहसास कराती है कि मातृभाषा में भी बच्चों को शिक्षित किया जा सकता है।

हिंदी और भारतीय भाषाओं को मिलकर चलना होगा: अनंत विजय

भारतीय भाषाओं पर अपनी बात रखते हुए दैनिक जागरण, नई दिल्ली के सह-संपादक अनंत विजय ने कहा कि हिंदी और भारतीय भाषाएं एक दूसरे के साथ मिलकर चलेंगी, तो दोनों मजबूत होंगी। उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा नीति के बाद अगर आप देखें, तो पहली बार एक संपूर्ण और नई शिक्षा नीति आई है। इससे पहले जितनी भी नीतियां आई हैं, उन्हें नई न कहकर संशोधित नीतियां कहना ज्यादा बेहतर होगा। 

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की ज्ञान परंपरा को केंद्र में रखते हुए काम करने पर जोर देती है। भाषा वो ही जीवित रहती है, जिससे आप जीविकोपार्जन कर पाएं और भारत में एक सोची समझी साजिश के तहत अंग्रेजी को जीविकोपार्जन की भाषा बनाया जा रहा है।

भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तक निर्माण की चुनौतियों पर अनंत विजय का कहना था कि भारत में लगभग 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं और करीब 850 राज्य विश्वविद्यालय हैं। अगर हम इसमें निजी विश्वविद्यालयों को भी शामिल कर लें, तो कुल मिलाकर लगभग 1,000 से अधिक विश्वविद्यालय होते हैं। अगर एक विश्वविद्यालय एक वर्ष में सिर्फ 2 पुस्तकों का भी निर्माण करे, तो एक वर्ष में लगभग 2,000 किताबें छात्रों के लिए तैयार होंगी।

उन्होंने कहा,’जैसे ही आप भारत कें​द्रित पाठ्यक्रम की बात करेंगे, तो लोग विरोध में खड़े हो जाएंगे। ऐसा कहा जाएगा कि भारतीय भाषाओं में ज्ञान की बात नहीं हो सकती, अगर आपको ज्ञान की बात करनी है, तो सिर्फ अंग्रेजी में ही हो सकती है। जबकि आप देखिए कि जर्मनी में लोग संस्कृत भाषा की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय किसी भी शिक्षा नीति को सफल बनाने का सबसे महत्वपूर्ण उपक्रम है।’

भारतीय भाषाओं के व्यावहारिक प्रयोग की आवश्यकता: डॉ. बाबु

पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी जयशंकर बाबु ने कहा कि भारतीय भाषाओं के व्यावहारिक प्रयोग पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया की कुल भाषाओं में से एक तिहाई भाषाएं हमारे पास हैं, लेकिन हमने अब तक मुठ्ठीभर भाषाओं को शिक्षण में अपनाया है।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में भाषा को लेकर शिक्षा नीति में अभी उतनी स्पष्टता नहीं है, जितनी प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर है, लेकिन हमें इससे प्रेरणा लेते हुए उच्च शिक्षा में भी भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए। डॉ. बाबु ने तमिलनाडु का जिक्र करते हुए कहा कि वहां राज्य की नौकरियों में मातृभाषा में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है, क्या ऐसी पहल अन्य राज्यों में नहीं होनी चाहिए।

डॉ. बाबु ने कहा कि तमिलनाडु में इंजीनियरिंग और चिकित्सा शिक्षा के पाठ्यक्रम तमिल भाषा में पढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। ये पहल सराहनीय है और ऐसे ही प्रयासों से भारतीय भाषाएं ताकतवर होंगी। कार्यक्रम का संचालन भारतीय जनसंचार संस्थान की छात्र संपर्क अधिकारी विष्णुप्रिया पांडे ने किया। वेबिनार के अंत में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने सभी वक्ताओं का धन्यवाद दिया।

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सिर्फ इतनी सी बात पर पत्रकार की कर दी जमकर पिटाई

पंजाब के लुधियान में किसानों के प्रदर्शन की कवरेज कर रहा था एक वेब चैनल का पत्रकार

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
Attack

प्रदर्शन की कवरेज के दौरान एक महिला कॉन्स्टेबल को वहां से गुजरने के लिए थोड़ा रास्ता दिए जाने की मांग करने पर प्रदर्शनकारियों में शामिल कुछ लोगों द्वारा एक पत्रकार को पीटे जाने का मामला सामने आया है। मामला पंजाब के लुधियाना का है।

पुलिस ने पत्रकार को पीटे जाने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पकड़े गए आरोपितों की पहचान जस्सी, सन्नी, सोनी और लवली के रूप में हुई है।

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में छपी रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एक वेब चैनल में कार्यरत निर्मल सिंह नामक पत्रकार ने पुलिस को शिकायत दी थी। अपनी शिकायत में निर्मल सिंह ने बताया कि वह हदिया मालवा गांव के पास किसानों के प्रदर्शन को कवर कर रहा था। शाम को प्रदर्ऩशकारी लौटने की तैयारी कर रहे थे। इस बीच एक महिला कॉन्स्टेबल ने क्षेत्र को पार करने की कोशिश करते हुए उनसे माछीवाड़ा जाने के लिए रास्ता खोजने में मदद करने का अनुरोध किया।

निर्मल सिंह ने जब प्रदर्शनकारियों से महिला कॉन्स्टेबल को निकलने के लिए रास्ता देने की गुजारिश तो उनमें से कुछ लोगों ने न सिर्फ निर्मल के साथ गाली-गलौज, बल्कि मारपीट भी कर दी और फरार हो गए। बताया जाता है कि पुलिस ने इस मामले में (Koom Kalan) थाने में एफआईआर दर्ज कर आरोपितों की धरपकड़ के प्रयास शुरू कर दिए हैं।  

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कोविड-19 से जूझ रहे वरिष्ठ पत्रकार गोलप सैकिया का निधन

कोविड-19 की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कुछ दिनों से गुवाहाटी स्थित अस्पताल में चल रहा था गोलप का इलाज

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
Golap Saikia

असम के जाने-माने न्यूज रीडर और वरिष्ठ पत्रकार गोलप सैकिया का शनिवार को निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 52 वर्षीय गोलप ने कुछ दिन पूर्व तबीयत बिगड़ने पर कोविड-19 की जांच कराई थी, जो पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उन्हें गुवाहाटी के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन कुछ दिनों से उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी और शनिवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।

असम के रहने वाले गोलप ने शुरू में ऑल इंडिया रेडियो में बतौर उद्घोषक काम किया था। वह गुवाहाटी दूरदर्शन समेत कई निजी सैटेलाइट चैनल्स जैसे- DY365, NewsLive, PrimeNews आदि में भी न्यूज बुलेटिन्स पढ़ते थे। उनके परिवार में पत्नी व एक बेटी है।

गोलप के निधन पर Journalists’ Forum Assam (JFA) समेत तमाम पत्रकारों ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है तथा ईश्वर से गोलप की आत्मा को शांति प्रदान करने और उनके परिजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

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NUJ(I) में इन वरिष्ठ पत्रकारों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

कोरोना संक्रमित होकर जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए अभियान चलाने का लिया गया निर्णय

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
NUJI

‘झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ के अध्यक्ष और ‘राष्ट्रीय खबर’ के मुख्य संपादक रजत कुमार गुप्ता तथा ‘वीर अर्जुन’ की फीचर संपादक सीमा किरण को ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ (इंडिया) का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। वहीं, ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ में एनयूजे के सदस्य और ‘दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन’ के पूर्व महासचिव आनंद राणा को संगठन सचिव मनोनीत किया गया है। महाराष्ट्र की शीतल करदेकर, पश्चिम बंगाल के दीपक राय और हिमाचल प्रदेश की सीमा मोहन को सचिव नियुक्त किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ से संबद्ध एनयूजेआई के महासचिव प्रसन्ना मोहंती ने बताया कि 11 सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी की अध्यक्षता हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में संगठन के संविधान संशोधन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया। ऑनलाइन अधिवेशन में देशभर में लगभग दो हजार सदस्यों ने हिस्सा लिया। अधिवेशन में पत्रकारों के हित और कल्याण से जुड़े कई प्रस्ताव पारित किए गए।

वहीं, एनयूजे अध्यक्ष रास बिहारी का कहना है कि देशभर में संगठन का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। अब देश के ज्यादातर राज्यों में एनयूजे से संबद्ध इकाइयां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित होकर जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए अभियान चलाया जाएगा।

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प्रो. संजय द्विवेदी ने मीडिया के लोगों के लिए मजबूत इच्छाशक्ति पर कुछ इस तरह दिया जोर

मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति की ओर से आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में IIMC के डीजी प्रो. संजय द्विवेदी का हुआ सम्मान, भविष्य की कार्ययोजनाओं पर भी हुई चर्चा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2020
Last Modified:
Monday, 28 September, 2020
Sanjay Dwivedi

मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति के अध्यक्ष प्रो. संजय द्विवेदी को देश के प्रमुख मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) का महानिदेशक नियुक्त किए जाने पर समिति की ओर से सम्मानित किया गया। इस मौके पर आयोजित ऑनलाइन सम्मान समारोह की अध्यक्षता भी प्रो.संजय द्विवेदी ने की। कार्यक्रम में मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति की संचालन परिषद व कोर कमेटी के पदाधिकारियों सहित देशभर से अनेक वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए। इस समारोह में मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति की भविष्य की कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा की गई। बता दें कि दिसंबर 2019 में मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए समिति के चुनाव में प्रो. संजय द्विवेदी को अध्यक्ष चुना गया था।

समारोह की शुरूआत में समिति सचिव बी.के व डॉ रीना ने प्रो. संजय द्विवेदी का सम्मान किया। समिति के संस्थापक व वरिष्ठ पत्रकार प्रो.कमल दीक्षित ने प्रो.द्विवेदी का सम्मान करने के साथ समिति की कार्यवाही से सभी सदस्यों को अवगत कराया।

वहीं, प्रो. द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में मीडिया के लोगों को मूल्यों के लिए प्रेरित व प्रभावित करना आसान नहीं है। लेकिन यदि फिर भी हम सभी अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के अनुसार तय कर लें तो ऐसा जरूर कर पाएंगे। उन्होंने संदेशवाहक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और मीडिया को भारतीय संस्कृति की दृष्टि से जोड़ने को लेकर बल दिया।

प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की इंदौर जोनल प्रमुख बीके हेमलता दीदी ने वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार मीडिया में अध्यात्म को जरूरी बताया। जयपुर से वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद प्रो. संजीव भानावत ने कोरोना काल मीडिया के समक्ष उपजी चुनौतियों के बारे में बताया और समिति के विस्तार पर चर्चा की।

भोपाल से वरिष्ठ पत्रकार विनोद नागर ने संस्था की गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने के कुछ नए प्रस्ताव रखे। प्रस्तावों को बैठक में मौजूद सदस्यों की सहमति से पारित भी किया गया। दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार वैभव वर्धन ने कहा कि मूल्यानुगत मीडिया के उद्देश्यों को अब एक मिशन के रूप में चलाया जाना चाहिए, ताकि इस अच्छे विचार से अन्य लोग भी लाभान्वित हों।

समिति के पूर्व अध्यक्ष संदीप कुलश्रेष्ठ, वरिष्ठ पत्रकार कल्याण कोठारी, समिति के कोषाध्यक्ष प्रभाकर कोहेकर, उपाध्यक्ष राजेश राजोरे, प्रियंका कौशल, श्रीगोपाल नरशन, दिलीप बोरसे, मुकेश नेमा आदि ने भी अपने विचार रखे। समारोह का तकनीकी समन्वय डॉ सोमनाथ वडनेरे ने व संचालन युवा पत्रकार सोहन दीक्षित ने किया। आयोजन के अंत में नारायण जोशी ने सभी का आभार जताया।

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भारत में नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की मांग हुई तेज, सरकार के सामने रखे गए ये प्रस्ताव

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों की रविवार सुबह 8 बजे आगरा में यमुना आरती स्थल एत्माद्दौला व्यू पॉइंट, पर नदियों का हमारे जीवन में महत्व और उनको प्रदूषण मुक्त बनाने के सम्बन्ध में सभा हुई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Sunday, 27 September, 2020
Last Modified:
Sunday, 27 September, 2020
Rivers Connect

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने आगरा में रविवार सुबह 8 बजे यमुना आरती स्थल एत्माद्दौला व्यू पॉइंट, पर नदियों का हमारे जीवन में महत्व और उनको प्रदूषण मुक्त बनाने के सम्बन्ध में सभा की, जिसमें रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने वर्तमान सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रस्ताव रखे हैं।  

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सूत्रधार ब्रज खंडेलवाल ने बताया कि आगरा यमुना रिवर कनेक्ट अभियान वर्ष 2014 से लगातार छह वर्षों से जीवनदायिनी यमुना में अविरल जलधारा व उसको प्रदूषण मुक्त कैसे किया जाए, इसके लिए समर्पित भाव से पूरी तरह प्रयासरत है। दुनिया की बहुत सारी नदियों की तरह आजकल भारतीय नदियों का पानी भी प्रदूषित हो चुका है, जबकि इन नदियों को हमारी संस्कृति में हमेशा पवित्र जगह दी जाती रही है। पर साथ ही, भारत के लोग इन नदियों से मुंह नहीं फेर सकते। वे देश की जीवन रेखाएं हैं और भारत का भविष्य कई रूपों में हमारी नदियों की सेहत से जुड़ा हुआ है।

भारत में नदी प्रदूषण को प्रदूषण मुक्त करने के प्रस्ताव-

1- वर्तमान नदियों में प्रदूषण की इस समस्या को कम समय में ही सुलझाया जा सकता है और इसके लिए टेक्नोलॉजी पहले से ही मौजूद है। बस जरूरत है सख्त नियमों की और उन्हें लागू कराने के लिए पक्के इरादों की। हमें स्वयं जाकर नदियों को साफ करने की जरूरत नहीं है। अगर हम नदियों को प्रदूषित करना छोड़ दें, तो वे स्वयं को एक बरसात के मौसम में ही साफ कर लेंगी।

2- भारत एक राष्ट्र के रूप में अगर नदी प्रदूषण पर काबू पाने के लिए पूरी तरह गंभीर है, तो इसके लिए केंद्रीय नदी प्राधिकरण बनाने की जरूरत है, क्योंकि अब तक इन नदियों को गम्भीरतापूर्वक प्राथमिकता नहीं दी गई है।

3- भारत में रासायनिक और औद्योगिक कचरे वाले कई उद्योग अपने गंदे जल का वाटर ट्रीटमेंट प्रोसेस तभी करते हैं, जब सम्बन्धित विभाग का इंस्पेक्टर मौजूद हो। जब उनके ऊपर निगरानी नहीं होती, तो कई उद्योग गंदे जल को साफ किए बिना ही नदियों में बहा देते हैं। अगर हम चाहते हैं कि यह वाटर ट्रीटमेंट प्रोसेस असरदार हो, तो यह महत्वपूर्ण है कि गंदे जल के उपचार को भी एक बढ़िया व्यवसाय बनाया जाए। सरकार को बस नदी में जाने वाले जल की गुणवत्ता के लिए मानक तय करने होंगे।

4- नदियों में मृत जानवरों को नहीं फेंकना चाहिए। नदी किनारे बसे लोगों को नदी में गंदे कपड़े नहीं साफ करने चाहिए, क्योंकि गंदे व दूषित कपड़े के रोगाणु पानी में दूर-दूर तक फैलकर बीमारी फैला सकते हैं। नदी में डिटर्जेंट पाउडर, साबुन का प्रयोग और जलीय जीवों के शिकार से परहेज करना चाहिए, क्योंकि नदी के जीवों जैसे मछली, कछुआ, घड़ियाल, मेढ़क आदि प्रदूषण को दूर करते हैं। प्रदूषण दूर करने को लेकर सरकार को जागरूकता कार्यक्रम चलाना चाहिए।

5- नदियों को प्रदूषण रहित बनाने के लिए शहर के गंदे नालों को रोकने के साथ-साथ नदी किनारे मल-मूत्र त्याग करने और धोबी-घाटों पर भी प्रतिबंध होना चाहिए। वर्तमान में पवित्र नदियों में शहर के गंदे पानी को गिरने से रोकने की प्रबल आवश्यकता है और हमारी पवित्र नदियों को प्रदूषण रहित बनाना वर्तमान में हरेक व्यक्ति का लक्ष्य होना चाहिए।

6- दिल्ली-आगरा के मध्य स्टीमर फेरी सेवा पर्यटको के लिए शीघ्र शुरू करें, जैसे कि वायदा किया था, माननीय मुख्यमंत्री योगी जी से मांग की गई कि यमुना पर ताज के डाउनस्ट्रीम बैराज का निर्माण अति शीघ्र किया जाए, मेट्रो का कार्य बाद में। यमुना की सफाई, डिसल्टिंग की पुख्ता व्यवस्था हो। नालो को टेप किया जाए।

7- रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने मोदी सरकार से राष्ट्रीय नदी नीति व केंद्रीय नदी प्राधिकरण के गठन की मांग की एवं बताया कि हिंदू धर्म में लोग जिस तरह आसमान में सप्त ऋषि के रूप में सात तारों को पूज्य मानते हैं, उसी तरह पृथ्वी पर सात नदियों को पवित्र मानते हैं, जिस प्रकार आसमान में ऋषि भारद्वाज, ऋषि वशिष्ठ, ऋषि विश्वामित्र, ऋषि गौतम, ऋषि अगत्स्य, ऋषि अत्रि एवं ऋषि जमदग्नि अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए विराजमान हैं, उसी तरह पृथ्वी पर सात नदियां गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, कावेरी, शिप्रा एवं गोदावरी अपने भक्तों की सुख एवं समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं। गंगा नदी को स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर लाने के लिए राजा भगीरथ द्वारा भगवान महादेव के तप की पौराणिक कथा पूरे देश में लोकप्रिय है।

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने बताया कि देश में नदियों के योगदान एवं महत्व का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि वाराणसी आज विश्व के प्राचीनतम नगर एवं प्राचीनतम जीवित सभ्यता के रूप में जाना जाता है और वाराणसी गंगा के तट पर बसा हुआ है। आज वाराणसी विश्व में धार्मिक, शैक्षिक, पर्यटन, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक नगर के रूप में प्रतिष्ठित है। इसके अलावा प्रयाग, अयोध्या, मथुरा, आगरा, नासिक, उज्जैन, गुवाहाटी, गया, पटना आदि सभी प्रमुख प्राचीन शहर नदियों के किनारे ही बसे हुए हैं। इसी तरह दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद, मैसूर, हुबली आदि आधुनिक नगर भी नदियों के तट पर ही बसे हुए हैं।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भारत में प्राचीन काल से ही नदियों का अत्यधिक महत्व रहा है और आज भी बहुत हद तक हमारा जीवन नदियों पर निर्भर है। इनके प्रति सम्मान का भाव बनाए रखना इसलिए जरूरी है ताकि हम इनकी स्वच्छता और पवित्रता को चिरकाल तक बनाए रख सकें। इनका जल हमारे लिए उपयोगी हो सकेगा और हम लंबे समय तक इनका लाभ उठा सकेंगे।

सभा में सर्व श्री श्रवण कुमार, पद्मिनी अय्यर, यमुना आरती महंत श्री नंदन श्रोत्रिय, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, जुगल श्रोत्रिय, राहुल राज, दीपक राजपूत, पंडित प्रमोद गौतम, शाहतोष गौतम, दिलीप जैन, अमित कोहली, निधि पाठक,  डॉ. हरेंद्र गुप्ता, विकास, जगन प्रसाद, मोहन, नीलम कश्यप, शिवम्, सोनवीर, सुरजीत, रोहित गुप्ता, रंजन शर्मा आदि ने भाग लिया।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव, CM ने जताया शोक

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक दुखद खबर सामने आई है। खबर है कि वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव का शुक्रवार को निधन हो गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2020
Mohan

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक दुखद खबर सामने आई है। खबर है कि वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव का शुक्रवार को निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने से मोहन राव का शुक्रवार बीती रात हैदराबाद में निधन हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका पार्थिव शरीर शनिवार दोपहर सड़क मार्ग के जरिए रायपुर लाया जा रहा है। पहले यह उम्मीद थीं कि उनकी अंतिम यात्रा सी-75 टैगोर नगर स्थित उनके आवास से दोपहर दो बजे निकलगी, लेकिन मार्ग में भीषण बारिश के चलते पार्थिव शरीर शाम छह-सात बजे तक यहां पहुंच पाएगा।

मोहन राव जी की एकमात्र पुत्री जो अमेरिका में रहती है वह भी रविवार सुबह दस बजे तक रायपुर पहुंच जाएगी। परिजनों के मुताबिक उनकी अंतिम विदाई का कार्यक्रम रविवार की सुबह 11 से 12 बजे के बीच राजेंद्र नगर स्थित मुक्तिधाम में होगा।

मोहन राव का पत्रकारिता जीवन ‘नवभारत’ और ‘पायनियर’ के नाम रहा। अंतिम समय में वे दैनिक ‘पायनियर’ में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हांलांकि उनके करियर की शुरुआत ‘रायपुर टाइम्स’ और ‘अग्रदूत’ से हुई लेकिन ‘नवभारत’ समाचार पत्र में करीब 30 सालों तक बतौर वरिष्ठ पत्रकार काम किया। उन्होंने राजनीतिक पत्रकार के तौर पर खुद को स्थापित किया।

मोहन राव के निधन सीएम भूपेश बघेल ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतक मोहन राव के ​परिजनों के लिए संबल प्रदान प्रदान करने की कामना की है। सीएम भूपेश ने ट्वीट कर लिखा है कि छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव जी के निधन की दुखद सूचना मिली। उनसे दशकों का आत्मीय रिश्ता रहा है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और परिवार को दुख की इस घड़ी में संबल प्रदान करें।

वहीं, छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव के निधन पर सूबे के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता जगत के लिए मोहन राव की सेवाओं को हमेशा याद किया जाएगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और परिजनों को यह वियोग सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

 

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हिंदी पखवाड़े का समापन कुछ यूं करेगा प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान IIMC

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘भारतीय जन संचार संस्थान’ (IIMC) में आयोजित हिंदी पखवाड़े का समापन 28 सिंतबर को आयोजित एक वेबिनार से होगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 25 September, 2020
Last Modified:
Friday, 25 September, 2020
IIMC

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘भारतीय जन संचार संस्थान’ (IIMC) में आयोजित हिंदी पखवाड़े का समापन 28 सिंतबर को आयोजित एक वेबिनार से होगा, जिसका विषय है ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय भाषाएं’। इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख विद्धान अपने विचार व्यक्त करेंगे।

भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि इस वेबिनार में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री मुख्य अतिथि होंगे, जबकि अध्यक्षता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा करेंगे। कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखिका और दैनिक हिन्दुस्तान की कार्यकारी संपादक जयंती रंगनाथन मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगी। वेबिनार के प्रमुख वक्ताओं के तौर पर ‘नवभारत टाइम्स’, मुंबई के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, ‘दैनिक जागरण’, नई दिल्ली के सह-संपादक अनंत विजय और पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी जयशंकर बाबू अपने विचार प्रकट करेंगे।

प्रो. द्विवेदी ने इस आयोजन के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हाल ही में घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारत सरकार ने भारतीय भाषाओं के सम्मान के लिए विशेष कदम उठाए हैं। भारतीय भाषाओं की प्रगति से ही राष्ट्र गौरव और समाज के आत्मविश्वास एवं स्वाभिमान में भी वृद्धि होगी। भारतीय भाषाओं को सम्मान मिलने से न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव हो सकते हैं, बल्कि इससे रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो सकती है। इसलिए संस्थान ने इस वर्ष हिंदी पखवाड़े का आयोजन भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाने की भावना के साथ किया है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि इस वर्ष हमारा ये प्रयास था कि हिंदी पखवाड़ा संवाद और विमर्श का प्रबल माध्यम सिद्ध हो। इसलिए इस बार हमने हिंदी पखवाड़े की शुरुआत ‘भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद’ विषय पर चर्चा से की। हर वर्ष की तरह इस बार भी हिंदी पखवाड़े के तहत भारतीय जन संचार संस्थान में हिंदी पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं की प्रदर्शनी, निबंध प्रतियोगिता, हिंदी टिप्पणी एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिता, हिंदी काव्य पाठ प्रतियोगिता, हिंदी टंकण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस बार पखवाड़े के दौरान भारतीय सूचना सेवा प्रशिक्षुओं के लिए एक कार्यशाला का आयोजन भी किया गया, ताकि उन्हें रोजमर्रा के सरकारी कामकाज को हिंदी में करने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जा सके।

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