कला संसार को कारोबार से जोड़ने की हुई अनूठी पहल, जुटीं कई हस्तियां

वरिष्ठ पत्रकार और फिल्मकार राजेश बादल ने ऐसे कार्यक्रमों को समूचे देश में विस्तार देने की जरूरत पर जोर दिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 04 November, 2019
Last Modified:
Monday, 04 November, 2019
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हिन्दुस्तान के मौजूदा सन्दर्भ में आज कला को कारोबार से जोड़ने की आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति में जीवन के प्रत्येक रंग को कला ने प्रभावित किया है, इसलिए कला को आज उद्यम से अलग करके नहीं देखा जा सकता। यह विचार नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (एनएसआईसी) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राम मोहन मिश्रा ने दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में जानी मानी सूफी गायिका सोनम कालरा की प्रस्तुति के बाद प्रकट किए।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई)  मंत्रालय के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन इंटरनेशनल मेलोडी फाउंडेशन ने किया था। इस अवसर पर एमएसएमई के सचिव डॉ. एके पांडा ने इस अनूठी पहल की सराहना की। गौरतलब है कि भारत में इस तरह के आयोजनों की अवधारणा राममोहन मिश्रा ने ही विकसित की है। इसमें कला और कारोबार के अन्तर्निहित रिश्तों को सार्वजनिक मंच दिया जाता है। 

फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष और फिल्मकार राजेश बादल ने मौजूदा माहौल में सूफी भावना का महत्त्व बताया। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को समूचे देश में विस्तार देने की जरूरत पर जोर दिया। फाउंडेशन की प्रोग्राम निदेशक पलक आहूजा और संयुक्त सचिव पूजा जैन ने समन्वय और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली।

फाउंडेशन के महासचिव डॉ. हरीश भल्ला ने इस आयोजन की जरूरत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान में कला और कारोबार का रिश्ता सदियों से रहा है। यह इस देश में देह और आत्मा जैसे संबंध की तरह है। तभी तो ढोलक बनाने वाला खुद भी अच्छी ढोलक बजाता है। मृदंग और तबला बनाने वाला उन्हें बजाकर दिखाता है।

उन्होंने कहा कि यही हाल सारंगी,  डफली, हारमोनियम, मंजीरे, खड़ताल, जल तरंग, बांसुरी और मटकी बजाने वालों का है। इन संगीत के उपकरणों को दिल के तारों से जोड़कर लोगों को सम्मोहित कर देने वाले कलाकारों को तो सारी दुनिया जानती है, लेकिन उन कला-शिल्पियों को कौन जानता है,जो कलाकारों के लिए इन वाद्ययंत्रों का निर्माण करते हैं। ठीक वैसे ही जैसे हम खादी के कपड़े,हथकरघे के दुशाले, शॉल, हस्तशिल्प, लौह शिल्प, काष्ठ शिल्प को कला से तो जोड़ देते हैं, लेकिन उन सैकड़ों अनाम शिल्पकारों को याद नहीं रखते। ऐसे कलाकारों को अब नेपथ्य में नहीं, मंच पर लाने की आवश्यकता भी है।

इन्हीं विचारों के संगम से उपजी शाम दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सैकड़ों लोगों के लिए कभी न भूलने वाली शाम बन गई। इस कार्यक्रम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के निदेशक सुरेंद्रनाथ त्रिपाठी, क्रिकेटर बिशनसिंह बेदी, पंजाब के मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस इकबाल अहमद, भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अजय चौधरी, शिक्षाविद कैप्टन एलएस बहल, जानी मानी गायिका रश्मि अग्रवाल,कनाडा से आईं डॉ. स्नेह ठाकुर जैसे अनेक संगीत रसिक, सूफियाना संस्कारों में पले-बढ़े लोग मौजूद थे।

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मुख्य अतिथि के तौर पर यूपी की राज्यपाल ने भरी हामी, कुछ ऐसा होगा बृज रत्न अवॉर्ड का लोगो

इंक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले बृज रत्न अवॉर्ड समारोह के चौथे व पांचवें संस्करण का संयुक्त रूप से आयोजन किया जाएगा

Last Modified:
Friday, 15 January, 2021
BrijRatnaAward554

इंक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले बृज रत्न अवॉर्ड समारोह के चौथे व पांचवें संस्करण का संयुक्त रूप से आयोजन किया जाएगा, जिसकी मुख्य अतिथि महामहिम यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल होंगी।

राज्यपाल से आगरा प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में शुक्रवार को इंक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन के चेयरमैन पूरन डावर, सचिव अजय शर्मा, संयोजक बृजेश शर्मा, डॉ. रामनरेश शर्मा ने मुलाकात की। इस दौरान राज्यपाल ने बृज रत्न अवॉर्ड के लोगो का अनावरण भी किया। साथ ही बृज रत्न अवॉर्ड में आगमन की अपनी स्वीकृति प्रदान की और तिथि शीघ्र निर्धारित करने की बात कही।

बृज रत्न अवॉर्ड कला, साहित्य, अध्यात्म, संगीत, अभिनय, खेल और चिकित्सा सहित विभिन्न 12 क्षेत्रों में प्रदान किया जाता है। विगत वर्ष कोरोना महामारी के चलते आयोजन स्थगित हो गया था। अब राज्यपाल के आगमन की स्वीकृति मिलने के बाद आयोजन की संभावित तिथि अगले माह के प्रथम सप्ताह में रहेगी।

कार्यक्रम को लेकर आयोजकों ने तेजी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। शीघ्र चयनित अवॉर्ड विजेताओं के नामों की भी घोषणा होगी। विगत वर्ष रत्न अवॉर्ड समारोह की उद्घोषणा उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने की थी।

शुक्रवार को आगरा के सर्किट हाउस में इंक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन के चेयरमैन पूरन डावर से तकरीबन 30 मिनट चली वार्ता के दौरान महामहिम राज्यपाल ने बृज क्षेत्र के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की।

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सड़क हादसे ने छीन ली वीडियो पत्रकार प्रमोद कुमार की जिंदगी

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में सड़क दुर्घटना में वीडियो पत्रकार प्रमोद कुमार का निधन हो गया, जिसके बाद गुरुवार देर शाम उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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Friday, 15 January, 2021
Accident

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में सड़क दुर्घटना में वीडियो पत्रकार प्रमोद कुमार का निधन हो गया, जिसके बाद गुरुवार देर शाम उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वे करीब 38 साल के थे। राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री चौ. लक्ष्मीनारायण और श्रीकांत शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने प्रमोद कुमार के आकस्मिक निधन पर दुख जताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रमोद कुमार के साथ काम कर चुके एक निजी पोर्टल के संचालक योगेश खत्री ने उनके छोटे भाई मनोज कुमार के हवाले से बताया, ‘बीती रात जब प्रमोद कुमार अपना काम समाप्त कर सौंख रोड स्थित अपने घर लौट रहे थे, तभी एक खंभे से उनका वाहन टकरा गया।’ हादसे में प्रमोद कुमार घायल हो गए और उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन हेमरेज होने की जानकारी दी और किसी बेहतर अस्पताल ले जाने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि प्रमोद को उसी समय जयपुर के एसएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। गुरुवार को प्रमोद कुमार का परिवार उनका पार्थिव शरीर मथुरा ले आया, जहां देर शाम उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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पत्रकार पर पहले दबंगों ने घर में घुसकर किया हमला, अब वाहनों में लगा दी आग

छह दिन पहले कुछ दबंगों ने एक पत्रकार के घर में घुसकर उसे और घरवालों को लाठी-डंडों से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 January, 2021
Fire

अमेठी में पत्रकार कितने असुरक्षित हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छह दिन पहले कुछ दबंगों ने एक पत्रकार के घर में घुसकर उसे और घरवालों को लाठी-डंडों से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। तब दबंगों ने अवैध असलहे से हवाई फायरिंग कर जान से मारने की धमकी भी दी थी। वहीं, अब एक बार फिर दबंगों ने बुधवार अलसुबह पत्रकार के घर के सामने खड़ी कार और बाइक को आग के हवाले कर दिया।

इस मामले की शिकायत किए जाने के 3 दिन बाद भी पुलिस ने इस पर कोई कार्यवाही नही की थी, लिहाजा दोबारा से यह मामला सामने में आया। पुलिस की लापरवाही के चलते मोहनगंज थाने के एसएचओ को हटा दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, यह मामला मोहनगंज कोतवाली क्षेत्र के फत्तेपुर गांव का है, जहां पिछले हफ्ते शुक्रवार को शाम 6 बजे रास्ते के विवाद में दबंगों ने पत्रकार अग्रिवेश मिश्र के घर में घुसकर परिजनों से मारपीट की थी। आरोप है कि दबंग दुर्गा प्रसाद, काशी प्रसाद और अन्‍य लोगों ने कुल्हाड़ी, डंडा के साथ अवैध असलहा से लैस होकर पत्रकार के घर में घुसकर हमला कर दिया। इसमें पत्रकार के साथ उनके परिजन कमला देवी, देवेन्द्र कुमार और राजकुमारी को गंभीर चोटें आईं। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी को इलाज के लिए अस्‍पताल में भर्ती कराया।

इस मामले में पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया था, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करती नजर आई। पुलिस के लापरवाह रवैये के चलते बुधवार अलसुबह दबंगों ने पत्रकार के घर के सामने खड़ी कार व बाइक को आग के हवाले कर दिया।

पत्रकार अग्रिवेश मिश्र ने बताया कि गांव के दुर्गा प्रसाद ने अन्‍य लोगों के साथ मिलकर हमारे घर पर हमला कर दिया था, जिसमें हमारी माता, भाई और बुआ को गंभीर चोटें आईं। दबंगों ने अवैध असलहे से हवाई फायरिंग भी की और हमारे परिवार वालों को जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में एसपी दिनेश सिंह ने लापरवाही बरतने पर मोहनगंज थाने के एसएचओ विश्‍वनाथ यादव को हटा दिया है।

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‘हेल्थ रिपोर्टिंग करते समय सनसनी फैलाने से बचें’

माखनलाल विश्वविद्यालय और यूनिसेफ ने जनस्वास्थ्य और तथ्यपरक पत्रकारिता पर संयुक्त रूप से आयोजित की कार्यशाला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 January, 2021
Health workshop

हेल्थ से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय अनावश्यक रूप से सनसनी फैलाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर पत्रकारिता जगत से जुड़े तमाम दिग्गजों ने चिंता जताई है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश का कहना है कि ऐसे मामलों पर संतुलित रिपोर्टिंग करनी चाहिए।

प्रो. केजी सुरेश ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय एवं यूनिसेफ द्वारा आयोजित द्वितीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत जनस्वास्थ्य और तथ्यपरक पत्रकारिता पर आधारित कार्यशाला में यह बात कही।

कार्यक्रम की अध्यक्ष करते हुए प्रो. सुरेश ने कहा कि स्वास्थ्य संचार बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। विश्वविद्यालय के पत्रकारिता पाठ्यक्रम में इस विषय को जल्द ही शामिल करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पत्रकारिता चूंकि सीधे-सीधे जनस्वास्थ्य एवं जन सरोकार से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें लापरवाही नहीं बरती जा सकती। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की जिम्मेदारी सिर्फ पत्रकार की ही नहीं, बल्कि सरकार एवं एनजीओ की भी है। इसलिए सभी को अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभानी चाहिए।

यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी का कहना था कि आज के समय में साक्ष्यों पर आधारित पत्रकारिता बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 में बिना डाटा के बहुत रिपोर्टिंग हुई है और बिना साक्ष्य के तथ्य सोशल मीडिया में भी पहुंचे हैं।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार संजय देव ने कहा कि स्वास्थ्य से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय पत्रकार को पूर्वाग्रहों से बाहर निकलकर पत्रकारिता करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चूंकि स्वास्थ्य पत्रकारिता मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा विषय है, इसलिए इसे समझने की जरूरत है। संजय देव ने कहा कि पत्रकारों को सजग रहते हुए रिपोर्टिंग करनी चाहिए। पत्रकार को पाठक के लिए काम की बात को आसान भाषा में पहुंचाना चाहिए।

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार संजय अभिज्ञान ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सच के लिए एवं जीवन के लिए लिखना है, यदि ऐसा नहीं किया गया तो लोग अमृत को विष समझ लेंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पत्रकारिता करते समय पाठकों को संशय में नहीं रहने देना चाहिए।

कार्यक्रम का समन्वय सहायक प्राध्यापक लाल बहादुर ओझा ने किया। आभार प्रदर्शन मेंटर डॉ. मणिकंठन नायर द्वारा किया गया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) अविनाश वाजपेयी, जनसंचार, प्रबंधन, न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी विभाग के साथ ही खंडवा, नोएडा एवं रीवा परिसर के सभी शिक्षक, प्रड्यूसर, ट्यूटर व प्रोडक्शन असिस्टेंट आदि मौजूद थे।

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पत्रकार पर लगा यह गंभीर आरोप, पुलिस ने दर्ज की FIR

यह मामला उत्तर प्रदेश के एटा जिले से सामने आया है। पुलिस ने पत्रकार की गाड़ी भी जब्त कर ली है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 13 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 13 January, 2021
FIR

महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पुलिस ने संतोष यादव नामक एक पत्रकार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। यह मामला उत्तर प्रदेश के एटा जिले से सामने आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एटा जिले के थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के कचहरी रोड स्थित पुलिस कार्यालय पर कुछ समय पूर्व थाना मिरहची क्षेत्र की महिला ने पुलिस कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। हालांकि, पुलिस ने महिला के इस प्रयास को विफल कर दिया था।

आरोप है कि आत्‍महत्‍या का प्रयास करने वाली महिला और उसके समर्थक पत्रकार संतोष यादव की गाड़ी में ही आए थे। पुलिस ने वह गाड़ी जब्त कर ली है।

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वरिष्ठ पत्रकार दीप जोशी का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

बताया जाता है कि पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य काफी खराब चल रहा था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 12 January, 2021
Last Modified:
Tuesday, 12 January, 2021
Deep Joshi

अल्मोड़ा के वरिष्ठ पत्रकार दीप जोशी का निधन हो गया है। वह हिंदी दैनिक ‘अमर उजाला’ के अल्मोड़ा कार्यालय में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। बताया जाता है कि पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य काफी खराब चल रहा था।

हल्द्वानी में निजी अस्पताल में चेकअप कराने के बाद उन्हे दिल्ली के नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार की देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया। दीप जोशी के परिवार में पत्नी व एक पुत्र है। दीप जोशी के निधन पर तमाम पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा दु:ख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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तीन साल की उम्र में खो दी थीं आंखें, अब दुनिया को अलविदा कह गए ये वरिष्ठ पत्रकार

भारतीय-अमेरिकी उपन्‍यासकार व वरिष्ठ पत्रकार वेद मेहता का निधन हो गया। उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 12 January, 2021
Last Modified:
Tuesday, 12 January, 2021
VedPratap

भारतीय-अमेरिकी उपन्‍यासकार व वरिष्ठ पत्रकार वेद मेहता का निधन हो गया। उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे 86 साल के थे। उन्हें 20वीं सदी के एक ऐसे लेखक के तौर पर जाना जाता है, जिन्होंने अमेरिकी पाठकों की भारत से पहचान कराई है।

एक पत्रकार के तौर पर वे ‘न्यूयॉर्कर’ मैगजीन के लिए 33 साल तक स्टाफ राइटर के तौर पर कार्य कर चुके हैं। इस मैगजीन का कहना है कि मेहता का निधन शनिवार को हुआ है। रविवार को मैगजीन की ओर से कहा गया है, ‘न्यूयॉर्कर’ के लिए 30 साल से अधिक समय तक लेखक के तौर पर काम करने वाले मेहता का 86 साल की उम्र में शनिवार सुबह निधन हो गया है।’

अविभाजित भारत में साल 1934 को लाहौर के एक पंजाबी परिवार में जन्मे वेद मेहता ने अपने जन्म के तीन साल के बाद मैनिंजाइटिस बीमारी के चलते अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। बावजूद इसके दृष्टिहीनता को मात देकर मेहता ने अपने लेखन के जरिये अमेरिकी पाठकों को भारत के बारे में बताया। हालांकि उन्होंने अपनी साहित्य से जुड़ी कला और करियर को ऊंचे मुकाम तक लाने के लिए कभी भी अपनी कमियों को आड़े नहीं आने दिया।  

उनकी लिखी एक बात थी, ‘मुझे ऐसा महसूस होता था कि दृष्टिहीनता एक गंभीर बाधा है और मैं केवल प्रयास करता था, वो सब करने का जो मेरी बड़ी बहनें और भाई करते थे। मैं किसी भी तरह उनके जैसा हो सकता था।’ मेहता की 24 किताबों में वॉल्किंग द इंडियन स्ट्रीट्स (1960), पोट्रेट ऑफ इंडिया (1970) और महात्मा गांधी एंड हिस एपोस्टल्स शामिल हैं।

वह सबसे ज्यादा 12-वॉल्यूम मेमोयर के लिए जाने जाते हैं, जिसमें आधुनिक भारत के मुश्किल भरे इतिहास और दृष्टिहीनता के कारण शुरुआती जीवन में उन्हें होने वाली मुश्किलों पर ध्यान दिया गया है।

वेद मेहता की आत्मकथा कृतियों 12-वॉल्यूम सीरीज में ‘डैडीजी’ पहली है। न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में साल 1982 में न्यूयॉर्कर के स्टोरी एडिटर विलियम शॉन ने कहा था, ‘वेद मेहता ने मैगजीन के सबसे प्रमुख लेखक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है।’ बता दें विलियम शॉन वही हैं, जिन्होंने 1961 में वेद मेहता को स्टाफ राइटर के तौर पर नियुक्त किया था।

मेहता ने कई सारी किताबें लिखने को लेकर एक साक्षात्कार में कहा था कि लेखक आंशिक रूप से अकेलेपन का परिणाम है। उनकी रचनाओं में ‘फ्लाई एंड द फ्लाई बॉटल: एनकाउंटर विद ब्रिटिश इंटेलेक्चुअल’, ‘ए फैमिली अफेयर: इंडिया अंडर थ्री प्राइम मिनिस्टर’, ‘ए वेद मेहता रीडर: द क्राफ्ट ऑफ द निबंध’ अन्य हैं। इन्हें पाठकों की ओर से खूब पसंद किया गया है।

मेहता महज 15 साल की उम्र में अमेरिका आए थे और यहां उन्होंने लिटिल रॉक में स्थित ‘अर्कांसस स्कूल फॉर द ब्लाइंड’ में दाखिला लिया। पोमोना कॉलेज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक लेखक के तौर पर काम करना शुरू किया। मैगजीन से वह 26 साल की उम्र में जुड़े।

उन्होंने भारतीय राजनीति, ऑक्सफोर्ड डॉन्स, धर्मशास्त्र सहित कई अन्य विषयों पर लेख लिखे हैं। भारत में जन्मी अभिनेत्री और कुकबुक लेखिका मधुर जैफरी ने एक बार न्यूयॉर्क टाइम्स के मॉरीन दौद से मेहता से अपनी पहली मुलाकात को लेकर कहा था, ‘मैं मदद के लिए उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही थी लेकिन उन्होंने मुझे खिसकने को कहा और तभी से हम दोस्त हैं।’

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पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार तुर्लपाटी कुटुम्ब राव का निधन

वरिष्ठ पत्रकार तुर्लपाटी कुटुम्ब राव (Turlapati Kutumba Rao) का रविवार रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

Last Modified:
Monday, 11 January, 2021
Turlapati

वरिष्ठ पत्रकार तुर्लपाटी कुटुम्ब राव (Turlapati Kutumba Rao) का रविवार रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनका इलाज विजयवाड़ा के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। वे करीब 87 वर्ष के थे।

कुटुम्बराव पत्रकारिता के पेशे का लंबा अनुभव रहा है। लगभग सात दशकों तक कई विषयों पर विश्लेषण किया है। एक पत्रकार, लेखक और आलोचक के रूप में तुर्लपाटी एक ऑल-राउंडर के रूप में जाने जाते थे।

कुटुम्बाराव का जन्म 10 अगस्त 1933 को विजयवाड़ा में हुआ था। उन्होंने 1946 में पत्रकारिता के पेशे में प्रवेश किया। इसके बाद आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री तंगुटुरी प्रकाशम पंतुलु के पास सचिव के रूप में कार्य किया। तुर्लपाटी ने अपनी पुस्तक '18 मुख्यमंत्रियों के साथ मेरी बातचीत’ में अनेक दिलचस्प बातों का खुलासा किया। 2002 में पद्मश्री पुरस्कार पाने वाले वे पहले तेलुगू पत्रकार थे।

कुटुम्ब राव ने प्रमुख नेता डॉ. भीम राव अंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू और राजाजी के साक्षात्कार तंत्रता सेनानियों, राष्ट्रवादियों और मशहूर हस्तियों की लगभग 6,000 आत्मकथाएं लिखीं। उन्होंने आंध्र प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों और विदेशों में लगभग 20,सम्मेलनों को संबोधित किया है। इसके चलते उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

इसी क्रम में तुर्लपाटी कुटुम्ब राव के निधन पर अनेक पार्टी के नेता और पत्रकारों ने भी गहरा शोक जताया है।  

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इस वजह से हुई थी पत्रकार के बेटे की हत्या, चाची समेत दो गिरफ्तार

झारखंड में सात जनवरी को पत्रकार के बेटे का अधजला शव लोधमा रोड स्थित छाता नदी के प्रेमघाघ जंगल से बरामद हुआ था।

Last Modified:
Monday, 11 January, 2021
Murder

झारखंड के खूंटी जिला अंतर्गत कर्रा थाना क्षेत्र में पिछले दिनों हुई वरिष्ठ पत्रकार अनिल मिश्र के छोटे बेटे संकेत कुमार मिश्र (28) की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। झारखंड के खूंटी जिला अंतर्गत कर्रा थाना क्षेत्र में पिछले दिनों हुई वरिष्ठ पत्रकार अनिल मिश्र के छोटे बेटे संकेत कुमार मिश्र (28) की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस का कहना है कि संकेत की हत्या उसकी चाची विद्यावती देवी ने अपने कथित प्रेमी घरेलू सहायक बिरसा मुंडा के साथ मिलकर की थी। संकेत के अपनी चाची के साथ अवैध संबंध थे। यही नहीं, संकेत की चाची ने अपने ही घरेलू सहायक के साथ भी अवैध संबंध बना लिए थे।

पुलिस का कहना है कि कुछ दिनों पूर्व चाची ने संकेत को प्रेमघाघ पिकनिक स्थल पर बुलाया था। यहां किसी बात को लेकर संकेत और उसकी चाची में विवाद हो गया। विवाद होता देखकर बिरसा मुंडा भी वहां पहुंच गया और संकेत पर हमला बोल दिया। हमले में संकेत की मौत हो गई। इसके बाद बिरसा मुंडा ने अपनी बाइक से पेट्रोल निकालकर संकेत के शव को आग लगा दी। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपित फरार हो गए। दोनों भागकर जशपुर में छुपे हुए थे, जहां से पुलिस ने उन्हों दबोच लिया।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपितों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में संकेत की चाची और बिरसा मुंडा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गौरतलब है कि सात जनवरी 2021 को संकेत कुमार का अधजला शव लोधमा रोड स्थित छाता नदी के प्रेमघाघ जंगल से बरामद हुआ था। पुलिस ने मौके से शराब और पानी के बोतल तथा गिलास भी बरामद किए थे।

संकेत पांच जनवरी  2021 को ससुराल से कर्रा के लिए निकला था। इसके बाद वह न तो घर पहुंचा और न ही ससुराल वापस लौटा। शाम करीब पांच बजे के बाद से उसका मोबाइल भी बंद हो गया। इसके बाद उसका शव बरामद हुआ।

संकेत कुमार मिश्र दो भाई और दो बहनों में सबसे छोटे थे। वर्ष 2017 में रांची पंडरा की फ्रेंड्स कॉलोनी में सीमा कुमारी के साथ उनकी शादी हुई थी। उनकी डेढ़ साल की बेटी है। वह रांची में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते थे।

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इस हादसे ने छीन ली UNI के पत्रकार की जिंदगी

पत्रकारिता के साथ बलरामपुर की जिला अदालत में वकालत भी करते थे फरीद आरजू

Last Modified:
Monday, 11 January, 2021
Accident

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में सड़क हादसे में एक पत्रकार की मौत का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उतरौला क्षेत्र के सुभाषनगर मोहल्ला निवासी फरीद आरजू (32) न्यूज एजेंसी ‘यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया’ (UNI) के संवाददाता थे। शनिवार की शाम वह बलरामपुर से अपने घर लौट रहे थे। उतरौला कोतवाली क्षेत्र के श्रीदत्तगंज बाईपास पर एक पशु को बचाने के चककर में उनकी मोटरसाइकिल गिर पड़ी।

हादसे में गंभीर रूप से घायल फरीद को सीएचसी श्रीदत्तगंज में भर्ती कराया गया, जहां से डाक्टरों ने उन्हें लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान फरीद की मौत हो गई।

आरजू कुछ वर्षों से यूएनआई से जुड़े हुए थे। वह बलरामपुर जिला अदालत में वकालत भी करते थे। इसके साथ ही वह बलरामपुर से प्रकाशित होने वाली धरोहर नामक पत्रिका के संपादक भी थे। फरीद के निधन पर क्षेत्र के तमाम चिकित्सकों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं व समाजसेवियों समेत तमाम लोगों ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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