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पत्रकारिता, तथ्य अथवा सत्य के प्रति AI की कोई प्रतिबद्धता नहीं: रितु कपूर
‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने ’भारत में प्रेस की स्वतंत्रता: वर्तमान और भविष्य’ विषय पर 15 मार्च 2024 को एक कॉन्क्लेव का आयोजन किया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
देश में संपादकों की शीर्ष संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने ’भारत में प्रेस की स्वतंत्रता: वर्तमान और भविष्य’ (Press Freedom in India: Present and the Future) विषय पर 15 मार्च 2024 को एक कॉन्क्लेव का आयोजन किया।
दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ (IIC) में 15 मार्च की सुबह करीब नौ बजे से शाम करीब छह बजे तक आयोजित इस कॉन्क्लेव में वरिष्ठ पत्रकार, पब्लिशर्स, वकील और तमाम मीडिया शोधकर्ता एक मंच पर जुटे और देश में प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े अहम मुद्दों पर पैनल डिस्कशंस के जरिये अपनी बात रखी।
‘Challenges in Digital Era’ (Misinformation/disinformation and fake news in the digital space and the emerging threat from AI. What is media’s response to the question of regulation) टॉपिक पर पैनल डिस्कशन में रितु कपूर (द क्विंट), धन्य राजेंद्रन (द न्यूज मिनट) और निखिल पाहवा (मीडियानामा) ने अपनी बात रखी। इस पैनल को ज्योति मल्होत्रा (आवाज साउथ एशिया) ने मॉडरेट किया।
इस दौरान रितु कपूर का कहना था, ‘स्वतंत्र पत्रकारों, न्यूजरूम और सरकार के बीच पहले से ही विश्वास की कमी है।‘ रितु कपूर का यह भी कहना था कि पब्लिशर्स को अपनी पत्रकारिता के लिए सर्च और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को खोजने की आवश्यकता है। जब कोई मध्यस्थ कानूनों के माध्यम से दबाव में होता है, तो इसका पब्लिशर्स पर सीधा प्रभाव पड़ता है। एआई (AI) की पत्रकारिता, तथ्य अथवा सत्य के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं है। वहीं धन्या राजेंद्रन का कहना था, ‘अगर डर ही काम नहीं करने दे रहा है तो यह पत्रकार बनने का अच्छा समय नहीं है।’
निखिल पाहवा का कहना था, ‘पत्रकारिता एक प्रक्रिया है। जब तक कोई इस प्रक्रिया का पालन करता है, वह पत्रकार है और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिए सबसे बड़ा स्थान सोशल मीडिया है।’ चर्चा के दौरान ज्योति मल्होत्रा का कहना था कि पत्रकारिता के इस डिजिटल युग में पत्रकारों की एक कम्युनिटी बनाने में बाधाएं क्यों आएंगी, जो डिजिटल पत्रकारिता के दौर में इन चुनौतियों का सामना कर सके?
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