100 दिवसीय टीबी अभियान को टीबी उन्मूलन होने तक सक्रिय रखना होगा

टीबी मृत्यु दर, देश की औसत टीबी मृत्यु दर के बराबर थी, जहाँ टीबी की नए रोगी दर देश के औसत नए टीबी रोगी दर से कम थी, उन 347 जिलों को इस अभियान में शामिल किया गया है।

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Monday, 06 January, 2025
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शोभा शुक्ला, बॉबी रमाकांत – सीएनएस।

भारत सरकार का 100 दिवसीय टीबी अभियान (7 दिसंबर 2024 से 24 मार्च 2025 तक) टीबी उन्मूलन की दिशा में एक सराहनीय कदम है। यह सरकार की ओर से एक देश व्यापी पहल है कि जिन लोगों को टीबी का खतरा सर्वाधिक है या जो लोग अक्सर टीबी या स्वास्थ्य सेवा से वंचित रह जाते हैं, उन तक टीबी की सर्वश्रेष्ठ सेवाएं पहुँचें।जब तक हर टीबी रोगी की सही जांच नहीं होगी तब तक उसे टीबी का प्रभावकारी इलाज कैसे मिलेगा?

जब तक उन्हें टीबी का प्रभावकारी इलाज नहीं मिलेगा, तब तक फेफड़े की टीबी फैलती रहेगी और टीबी  से पीड़ित लोग भी अनावश्यक पीड़ा झेलते रहेंगे और टीबी मृत्यु का खतरा भी अत्यधिक रहेगा। इसीलिए यह 100 दिवसीय टीबी अभियान अत्यंत अहम है क्योंकि यह उन  लोगों तक टीबी सेवाएं पहुँचाने के लिए केंद्रित है जो प्रायः स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में रहते हैं और जिन्हें टीबी की सही जाँच और उचित इलाज नहीं मिल पाता।

यह 100 दिवसीय टीबी अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संभवत: पहला राष्ट्र-व्यापी प्रयास है कि सभी लोग जिन्हें टीबी होने का खतरा अधिक है, उनकी टीबी जांच होनी है। टीबी के लक्षण हों या न हों, सभी की एक्स-रे जाँच होगी, यदि इसमें संभावित टीबी निकलेगी तो टीबी की पक्की जाँच (मॉलिक्यूलर टेस्ट) के लिए उनको भेजा जाएगा। जिनको टीबी निकलेगी उनको टीबी के प्रभावकारी इलाज से जोड़ा जाएगा और जिनको टीबी (या संभावित टीबी) नहीं निकलेगी उनको टीबी से बचने वाले इलाज (लेटेंट टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी) दी जाएगी जिससे कि निकट भविष्य में भी उनको टीबी रोग न हो।

इस अभियान के तहत उन लोगों तक पहुँचने का प्रयास किया जा रहा है जो कुपोषित हैं, एचआईवी के साथ जीवित हैं,  जिन्हें मधुमेह या डायबिटीज है, जो तंबाकू या शराब का सेवन करते हैं, जिनके किसी करीबी को टीबी रोग है, या अन्य किसी कारण से टीबी का खतरा अधिक है।टीबी के 4 लक्षण हैं: 3 हफ्तों से अधिक चलने वाली खाँसी, भूख न लगना या बिना करण वजन गिरना, बुखार होना या रात को बेवजह पसीना आना।

भारत सरकार के राष्ट्रीय टीबी सर्वेक्षण 2019-2021 के अनुसार, लगभग आधे टीबी रोगियों को कोई लक्षण था ही नहीं - उनके टीबी रोग होने की पुष्टि सिर्फ़ एक्स-रे होने पर हो सकी थी। देश के अनेक क्षेत्रीय टीबी सर्वेक्षण में भी यही निकल कर आया है कि आधे टीबी रोगियों को टीबी का कोई लक्षण था ही नहीं और एक्स-रे जाँच होने पर टीबी रोग की पुष्टि हो सकी - उन्हें जल्दी ही इलाज दिया गया और टीबी के फैलाव पर रोक लग सकी।

100 दिवसीय टीबी अभियान भारत के 33 प्रदेशों के 347 चिन्हित जिलों में चल रहा है (देश में लगभग 800 जिलें हैं)। जिन जिलों में टीबी मृत्यु दर, देश की औसत टीबी मृत्यु दर के बराबर या उससे अधिक थी, या जहाँ टीबी की नए रोगी दर देश के औसत नए टीबी रोगी दर से कम थी, उन 347 जिलों को इस अभियान में शामिल किया गया है।

कर्नाटक प्रदेश के सबसे अधिक जिले शामिल हैं (31), उसके बाद महाराष्ट्र (30)।विश्व के  अनेक देशों (जो टीबी से अधिक प्रभावित हैं) में चिकित्सकीय जाँच  लेबोरेटरी सेवाओं को जनता के क़रीब ले जाने के अनेक सफल प्रयास किए गए हैं।

तिमोर-लेसते देश में पिछले 3 सालों से एक छोटी-बस नुमा गाड़ी में एक्स-रे मशीन और भारत-निर्मित ट्रूनेट मॉलिक्यूलर टेस्ट, जो  विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुमोदित है, दूर-दराज इलाकों में जा कर लोगों की टीबी जाँच कर रही है और उन्हें टीबी सेवाओं से जोड़ रही है।  

उसी तरह बांग्लादेश में भी अनेक बस-नुमा विशेष-परिवर्तित गाड़ियों में भारत-निर्मित एक्स-रे (प्रोरेड/प्रोग्नॉसिस) सालों से दूर-दराज इलाकों में लोगों तक संभावित टीबी की जाँच पहुँचा रहा है।यदि टीबी जाँच को जनता के पास ले जाना है तो यह आवश्यक है कि जाँच मशीन को चलाने के लिए लेबोरेटरी-नुमा व्यवस्था न लगे।

ट्रूनेट मॉलिक्यूलर टेस्ट और अल्ट्रा पोर्टेबल एक्स-रे मशीन दोनों ही बैटरी पर भी घंटों चलती हैं, दोनों का उपयोग  बिना लेबोरेटरी-नुमा व्यवस्था के भी किया जा सकता है, और एक छोटे बैग में ले के जाया जा सकता है। एक्स-रे मशीन कुछ-कुछ 'डीएसएलआर' कैमरे जैसी दिखती है। यह एक्स-रे मशीन विशेष इसलिए भी है क्योंकि यह आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस युक्त है और कंप्यूटर-द्वारा संभावित टीबी की जाँच करती है।

ट्रूनेट मॉलिक्यूलर टेस्ट मशीन टीबी रोग की पक्की जाँच करती  है (और टीबी के अलावा  40 से अधिक अन्य रोगों की भी पक्की जाँच कर  सकती है जैसे कि हेपेटाइटिस, एचआईवी, मलेरिया, चिकनगुन्या, यौन संक्रमण, कोविड, आदि)।

दिल्ली और हरियाणा में मेदांता अस्पताल के टीबी-मुक्त भारत अभियान ने एक छोटी-बस नुमा गाड़ी को दूर-दराज इलाकों में भेज कर, पिछले 10 वर्षों में 10 लाख से अधिक लोगों को एक्स-रे जाँच उपलब्ध करवायी और जिनको टीबी निकली उनकी सरकारी टीबी कार्यक्रम से जुड़ने में सहायता की।

मेदांता अभियान में बस के अलावा एक मोटरसाइकिल पर स्वास्थ्यकर्मी भी एक पिट्ठू बैग (बैकपैक) में ट्रूनेट मशीन और प्रोरेड (प्रोग्नॉसिस) एक्स-रे को ले कर उन दूर-दराज इलाकों तक जाता है जहाँ चार-पहिया गाड़ी नहीं जा सकती।भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने पिछले माह ही बताया था कि भारत सरकार टीबी सेवाओं के विकेंद्रीकरण के लिए समर्पित है। टीबी जाँच लेबोरेटरी की संख्या 2014 में 120 थी जो 2024 में बढ़ कर 8,293 हो गई है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने हाल ही में एक लेख में लिखा था कि भारत में 7,700 मॉलिक्यूलर टेस्ट मशीन हैं। डॉ गुलेरिया ने लिखा कि ट्रूनेट भारत में निर्मित मॉलिक्यूलर टेस्ट है जिसके कारण टीबी  जाँच की क़ीमत काफ़ी कम हुई है और टीबी जाँच में जो समय लगता था वह भी घट कर एक घंटा रह गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसी ट्रूनेट  जाँच  जिले और ब्लॉक स्तर पर सक्रिय हैं। टीबी की पक्की  जाँच  के विकेंद्रीकरण में ट्रूनेट ने एक अहम भूमिका निभायी है।

100 दिवसीय टीबी अभियान के तहत, एक छोटी-बस नुमा गाड़ी जिसे निक्षय वाहन कहते हैं, इन जिलों में उन लोगों तक टीबी सेवाएं पहुंचा रही है जिन्हें टीबी का खतरा अधिक है। इस गाड़ी में एक्स-रे मशीन है जो बैटरी से भी चलती है और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस युक्त कंप्यूटर की मदद से संभावित टीबी की  जाँच करती है।

जिन लोगों को संभावित टीबी निकलती है उनको टीबी की पक्की मॉलिक्यूलर टेस्ट  जाँच उपलब्ध करवायी जाती है (या बलगम सैंपल इकट्ठा कर के निकटतम लेबोरेटरी में भेजा जाता है)।

भारत-निर्मित प्रोरेड (प्रोग्नॉसिस) एक्स-रे भी इन एक्स-रे मशीनों में से एक है।100 दिवसीय टीबी अभियान के तहत, असम के बारपेटा जिले से सरकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने एक तस्वीर साझा की है। इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पारित और भारत में निर्मित ट्रूनेट मॉलिक्यूलर टेस्ट मशीन को एक छोटी सी लकड़ी की बेंच पर खुले में रखे हुए देखा जा सकता है जो जनता को टीबी की पक्की  जाँच मुहैया करवा रही है।

ट्रूनेट से न केवल एक घंटे में  टीबी की पक्की जाँच होती है वरन् यह भी पता चल जाता  है कि दवा प्रतिरोधक टीबी है कि नहीं। इस तस्वीर में निक्षय वाहन को भी देखा जा सकता है।

100 दिवसीय टीबी अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने एएनआई को बताया कि भारत को टीबी मुक्त करने के लिए पिछले चंद सालों में उत्तर प्रदेश में टीबी जांच 4 गुना अधिक बढ़ी है। ट्रूनेट मॉलिक्यूलर टेस्ट मशीन और एक्स-रे मशीन की संख्या में भी वृद्धि हुई है। हिमाचल प्रदेश में भी निक्षय वाहन दूर-दराज इलाकों तक टीबी सेवाएं लोगों के निकट ले जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, बैजनाथ के  निकट देओल गांव में एक दिन में जिस समुदाय के लोगों को टीबी खतरा अधिक है उनके 89 लोगों के एक्स-रे किए गए।

यह एक्स-रे मशीनें सरकारी पॉवर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया द्वारा प्रदान की गई  हैं। कांगड़ा  जिले में 2 जनवरी 2025 तक, इस अभियान के तहत हज़ारों लोगों के एक्स-रे हुए, 2000 की टीबी जाँच  हुई और 35 लोगों में टीबी रोग पाया गया - जिनको उचित उपचार उपलब्ध करवाया गया।

गोवा के पोंडा क्षेत्र में "हॉल केरी" गाँव में एक दिन में (2 जनवरी 2025) 113 लोगों के एक्स-रे किए गए जिनमें से 37 लोगों में संभावित टीबी निकली - जिनके बलगम सैंपल को मॉलिक्यूलर टेस्ट पक्की जांच के लिए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। गोवा के बबल्याख़ली और नागमशीद बस्ती में भी एक दिन में 89 लोगों की एक्स-रे जाँच हुई। 31 दिसंबर 2024 को "आम कॉटोंबी" में अनेक लोगों की एक्स-रे जाँच हुई और 40 लोगों में संभावित टीबी निकली - जिनके बलगम सैंपल को ट्रूनेट मॉलिक्यूलर टेस्ट पक्की जांच के लिए भेजा गया।

भारत के सभी प्रदेशों में से गोवा सबसे पहला प्रदेश है जिसने टीबी की प्रथम जाँच के रूप में, माइक्रोस्कोपी  जाँच को 100% मॉलिक्यूलर टेस्ट  जाँच  से प्रतिस्थापित किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 7-8 साल पहले सभी देशों से, टीबी की प्रथम जाँच  के लिए माइक्रोस्कोपी  जाँच को 100% मॉलिक्यूलर टेस्ट से प्रतिस्थापित करने के लिए आह्वान किया था। माइक्रोस्कोपी टीबी की कच्ची  जाँच है जिसके द्वारा आधे या उससे भी कम टीबी रोग की पुष्टि होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पारित मॉलिक्यूलर टेस्ट से 1-2 घंटे में यह पक्का पता चलता है कि टीबी है या नहीं, और यदि टीबी रोग है तो रिफ़ैंपिसिन दवा से प्रतिरोधक है या नहीं।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हाल ही में बताया था कि निजी (प्राइवेट) स्वास्थ्य केंद्रों से भी टीबी रिपोर्टिंग में 8 गुना वृद्धि हुई है। गौर तलब है कि 2012 में भारत सरकार ने आदेश पारित किया था कि निजी स्वास्थ्य केंद्र भी सरकार को हर टीबी रोगी की पुष्टि करें। सरकार द्वारा हर महीने प्रत्येक टीबी रोगी को रू 500 सीधे बैंक खाते में दिए जाते हैं (पोषण आदि में सहयोग के लिए)। इस राशि को 1 नवंबर 2024 से बढ़ा कर रू 1000 कर दिया गया है। अब तक इस सहायता के तहत, 3000 करोड़ रुपए से अधिक राशि दी जा चुकी है।

पिछले लगभग 10 सालों में (2015-2023) के दौरान भारत की टीबी दर में 17.7% की गिरावट आई है और टीबी मृत्यु दर भी 21.4% कम हुई है। परंतु अभी भी, विश्व के  सभी देशों की तुलना में भारत में सबसे अधिक टीबी रोग है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम टीबी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 28 लाख लोग को 2023 में टीबी हुई जिनमें से 24 लाख से अधिक को जाँच-इलाज मिला।

सभी लोगों को, टीबी लक्षण हों या न हों, एक्स-रे द्वारा संभावित टीबी की जाँच, और जिनको संभावित टीबी हो उनको  मॉलिक्यूलर टेस्ट जाँच मिलनी ज़रूरी है - जिससे कि सभी टीबी रोगियों को बिना-विलंब सही प्रभावकारी इलाज मिल सके। इस 100 दिवसीय टीबी अभियान को हर दिन सक्रिय रखने की आवश्यकता है जब तक टीबी उन्मूलन का सपना साकार नहीं हो जाता।

शोभा शुक्ला, लखनऊ के लोरेटो कॉलेज की भौतिक विज्ञान की सेवा-निवृत्त वरिष्ठ शिक्षिका रहीं हैं और सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस) की संस्थापिका-संपादिका हैं। बॉबी रमाकांत सीएनएस से संबंधित हैं।

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‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव एंड शक्ति अवॉर्ड्स 2026’ में दिखी महिला नेतृत्व की ताकत

कार्यक्रम में 32 सत्रों के दौरान 80 से ज्यादा वक्ताओं ने अपनी बात रखी, जबकि 80 से अधिक महिला अचीवर्स को उनके योगदान और असाधारण यात्राओं के लिए सम्मानित किया गया।

Samachar4media Bureau by
Published - Sunday, 16 August, 2026
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Sunday, 16 August, 2026
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नई दिल्ली के द इंपीरियल होटल, जनपथ में आयोजित ‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव एंड शक्ति अवॉर्ड्स 2026’ में राजनीति, सार्वजनिक जीवन, मनोरंजन, चिकित्सा, सशस्त्र बलों, उद्यमिता और जमीनी स्तर पर काम कर रहीं महिलाओं के योगदान और नेतृत्व को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में 32 सत्रों के दौरान 80 से ज्यादा वक्ताओं ने अपनी बात रखी, जबकि 80 से अधिक महिला अचीवर्स को उनके योगदान और असाधारण यात्राओं के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख केंद्र ‘नमो शक्ति ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग मिशन’ रहा, जिसका उद्देश्य एआई आधारित, विकिरण-मुक्त और संपर्क रहित तकनीक के जरिए देशभर की महिलाओं तक स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग पहुंचाना है। इस पहल के तहत ‘नमो शक्ति रथ’ नाम की एआई-सक्षम मोबाइल मेडिकल वैन के जरिए देश के शहरों, कस्बों और गांवों तक गैर-आक्रामक और विकिरण-मुक्त थर्मल इमेजिंग तकनीक पहुंचाई जा रही है।

कॉन्क्लेव में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान, केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री जयंत चौधरी, दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, डॉ. शशि थरूर, सचिन पायलट, स्मृति ईरानी, कृति खरबंदा समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।

महिला सशक्तिकरण पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि महिलाओं को पुरुषों से सशक्त होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाएं जीवन का आधार हैं और उन्हें कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार स्वयं सहायता समूहों जैसे माध्यमों के जरिए महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कल्याणकारी योजनाओं में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण का मतलब लाभार्थियों को पूरी निर्णय लेने की क्षमता देना है, ताकि वे योजनाओं के डिजाइन से लेकर नवाचार तक सक्रिय भागीदार और प्रेरक शक्ति बन सकें।

दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि महिलाएं सैन्य सेवा, शासन, कारोबार, विज्ञान समेत जीवन के हर क्षेत्र में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल भागीदार नहीं हैं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था को आकार देने वाली प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला सशक्तिकरण को परिवार की पारंपरिक सीमाओं को पार कर स्वतंत्र फैसले लेने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण तब है, जब कोई बेटी अपने परिवार की पहली सदस्य बनकर अपनी पसंद का करियर चुनने जैसा कोई बड़ा फैसला लेती है।

डॉ. शशि थरूर ने कहा कि महिलाएं संसद में अलग तरह के अनुभव और संवेदनाएं लेकर आती हैं, जिससे देश समृद्ध होता है। वहीं स्मृति ईरानी ने महिला मतदाताओं की बदलती भूमिका पर बात करते हुए कहा कि आज महिलाएं स्वतंत्र मतदाता समूह के रूप में पहचानी जाती हैं और उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल महिलाओं की अपेक्षाओं को नजरअंदाज करते हैं, उन्हें महिलाओं का समर्थन खोने का जोखिम रहता है।

सचिन पायलट ने उन महिलाओं से प्रेरणा लेने की बात कही, जिन्होंने स्थापित सीमाओं को चुनौती देते हुए अपने लिए नई राह बनाई।

अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को सम्मान: कार्यक्रम में जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं, उद्यमियों, वर्दी में सेवाएं देने वाली महिलाओं और सार्वजनिक जीवन, चिकित्सा, कला एवं मनोरंजन से जुड़ी महिलाओं को सम्मानित किया गया।

राज्यसभा सांसद और ‘वी वुमन वांट’ तथा ‘नमो शक्ति मिशन’ के संस्थापक कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रभावशाली नेतृत्व को पहचान देना और अगली पीढ़ी की महिला नेताओं के लिए मंच तैयार करना है। उन्होंने कहा कि ‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव’ और ‘शक्ति अवॉर्ड्स’ समाज में महिला नेताओं की विविध भूमिकाओं का उत्सव हैं और यह ‘नमो शक्ति मिशन’ के स्तन कैंसर स्क्रीनिंग अभियान के उद्देश्य से भी जुड़ा है।

द संडे गार्जियन फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. ऐश्वर्या शर्मा ने कहा कि इस मंच ने वर्षों से महिला उपलब्धियों की प्रेरक कहानियों को सामने लाने का काम किया है और इन महिलाओं के काम, ऊर्जा, उत्साह और उद्देश्य को दर्शकों तक पहुंचाना सम्मान की बात रही है।

नमो शक्ति मिशन ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: कॉन्क्लेव में ‘नमो शक्ति ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग मिशन’ पर विशेष ध्यान दिया गया। इसे दुनिया का सबसे बड़ा स्तन कैंसर स्क्रीनिंग अभियान बताया गया है। इस अभियान ने मार्च 2026 में 24 घंटे में सबसे अधिक स्तन कैंसर स्क्रीनिंग करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

मिशन के शुरुआती महीनों में 1.5 लाख से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और 3,000 से अधिक ऐसे संभावित मामलों की पहचान की गई है, जिनमें शुरुआती पहचान से जान बचाई जा सकती है। इसके लिए ‘थर्मलिटिक्स’ नाम की एआई आधारित थर्मल इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जो दर्द रहित और विकिरण-मुक्त स्क्रीनिंग उपलब्ध कराती है।

2018 में हुई थी ‘वी वुमन वांट’ पहल की शुरुआत: ‘वी वुमन वांट’ पहल की शुरुआत 2018 में हुई थी और इसकी मेजबानी न्यूजएक्स करता है। यह मंच महिलाओं से जुड़े मुद्दों और महिला नेतृत्व वाले विकास पर केंद्रित है। इसके कार्यक्रमों में एसिड अटैक सर्वाइवर्स, वर्दी में काम करने वाली महिलाएं, न्यायविद, उद्यमी, राजनेता, फैक्ट्री वर्कर्स, पुलिसकर्मी और जमीनी स्तर पर काम करने वाले सामुदायिक नेताओं की कहानियां सामने लाई गई हैं।

इस वार्षिक कॉन्क्लेव के दिल्ली और मुंबई में 2021 से अब तक छह संस्करण आयोजित हो चुके हैं। वहीं ‘शक्ति अवॉर्ड्स’ की शुरुआत 2021 में हुई थी। इन पुरस्कारों के जरिए देशभर की उन महिलाओं को सम्मानित किया जाता है, जिनके नेतृत्व और असाधारण जीवन की कहानियों ने सामाजिक प्रभाव पैदा किया है। सम्मान पाने वालों में मछुआरा समुदाय की महिलाएं, ड्रोन दीदियां, आशा कार्यकर्ता, महिला अधिकार कार्यकर्ता, सशस्त्र बलों और रेलवे में कार्यरत महिलाएं, ऑटो चालक, उद्यमी, डिजाइनर, कारोबारी नेता, कंटेंट क्रिएटर और बॉलीवुड से जुड़ी हस्तियां शामिल रही हैं।

कार्यक्रम की खास झलकियां आप यहां देख सकते हैं।

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हिंदुस्तान टाइम्स’ के इतिहास में याद किए जाएंगे आर. सुकुमार : वीर सांघवी

वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी (Vir Sanghvi) ने हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) के एडिटर-इन-चीफ आर. सुकुमार (R Sukumar) के योगदान की सराहना की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 14 August, 2026
Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
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वरिष्ठ पत्रकार और फूड क्रिटिक वीर सांघवी (Vir Sanghvi) ने हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) के एडिटर-इन-चीफ आर. सुकुमार (R Sukumar) की जमकर तारीफ की है। सुकुमार के पद से हटने के फैसले के बाद सांघवी ने उनके योगदान को अखबार के इतिहास के महत्वपूर्ण दौर में से एक बताया है।

एचटी मीडिया ग्रुप (HT Media Group) ने हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स के संपादकीय नेतृत्व में बदलाव की घोषणा की है। इसके तहत कुणाल प्रधान (Kunal Pradhan) 1 अक्टूबर 2026 को संगठन से जुड़ेंगे और एक्टिंग एडिटर-इन-चीफ (Acting Editor-in-Chief) की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बाद नवंबर के मध्य में वह एडिटर-इन-चीफ का पद संभालेंगे। यह जिम्मेदारी फिलहाल आर. सुकुमार के पास है, जिन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया है।

सुकुमार की तारीफ करते हुए वीर सांघवी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हिंदुस्तान टाइम्स और भारतीय अखबारों के इतिहास में उसकी खास जगह की परवाह करने वाला हर व्यक्ति सुकुमार का आभारी है। उन्होंने कहा कि सुकुमार ने अखबार को स्थिर करने और उसे बेहतर तरीके से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सांघवी ने सुकुमार के काम करने के तरीके की भी सराहना की। उन्होंने उनके नेतृत्व को बेहतर समझ, क्षमता, शालीनता और निष्पक्षता से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि अखबार चलाना राजनीतिक और आर्थिक दबावों के बीच आसान काम नहीं है। ऐसे माहौल में भी सुकुमार ने अखबार की गुणवत्ता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

वीर सांघवी ने कहा कि जब हिंदुस्तान टाइम्स के इतिहास को लिखा जाएगा, तब सुकुमार का योगदान उसके महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सुकुमार को अखबार के बेहतरीन संपादकों में से एक के तौर पर याद किया जाएगा।

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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट देंगी इस्तीफा

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट (Karoline Leavitt) महीने के अंत में पद छोड़ेंगी। वह परिवार और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताना चाहती हैं।

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Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
Karoline Leavitt

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। व्हाइट हाउस (White House) की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट (Karoline Leavitt) इस महीने के अंत में अपना पद छोड़ देंगी। उन्होंने यह फैसला परिवार और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए लिया है।

कैरोलिन लेविट 28 साल की उम्र में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव बनी थीं और इस पद पर पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद उनकी विदाई की जानकारी दी और उन्हें अपने प्रशासन की एक महत्वपूर्ण नेता बताया।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि लेविट महीने के अंत में प्रेस सचिव की जिम्मेदारी छोड़ेंगी, ताकि वह अपने छोटे बच्चों और परिवार के साथ ज्यादा समय बिता सकें। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले को समझते और इसका सम्मान करते हैं।

प्रेस सचिव पद छोड़ने के बाद भी लेविट ट्रंप के साथ जुड़ी रहेंगी। ट्रंप के मुताबिक, वह उनकी सीनियर एडवाइजर (Senior Adviser) के तौर पर काम करेंगी और रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) में भी प्रभावशाली भूमिका निभाती रहेंगी।

कैरोलिन लेविट ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी प्रेस टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। इसके बाद ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उन्हें व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव बनाया गया। प्रेस सचिव के तौर पर उन्होंने ट्रंप प्रशासन की नीतियों और फैसलों को मीडिया के सामने रखने में अहम भूमिका निभाई। अब पद छोड़ने के बाद भी उनका ट्रंप प्रशासन से जुड़ाव बना रहेगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि लेविट उनके साथ आगामी मिडटर्म चुनाव (Midterm Elections) की रणनीति में काम करेंगी। उनके जाने के बाद व्हाइट हाउस में प्रेस सचिव की जिम्मेदारी कौन संभालेगा, इसे लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

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‘नेटवर्क18’ से इस्तीफे के बाद अमिश देवगन की अगली पारी पर नजर, जानिए 24 साल का पूरा सफर

भारतीय टेलीविजन न्यूज की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे हैं, जिनकी पहचान किसी एक चैनल या किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। वक्त के साथ वे खुद न्यूज इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप का हिस्सा बन जाते हैं।

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Published - Thursday, 13 August, 2026
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Thursday, 13 August, 2026
Amish Devgan..

भारतीय टेलीविजन न्यूज की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे हैं, जिनकी पहचान किसी एक चैनल या किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। वक्त के साथ वे खुद न्यूज इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप का हिस्सा बन जाते हैं। जाने-माने पत्रकार और लोकप्रिय न्यूज एंकर अमिश देवगन का करीब ढाई दशक का पत्रकारिता सफर भी कुछ ऐसा ही है।

वर्ष 2002 से अब तक उन्होंने प्रिंट से टेलीविजन तक, बिजनेस जर्नलिज्म से प्राइम टाइम एंकरिंग तक और रिपोर्टिंग से एडिटोरियल लीडरशिप तक कई महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए हैं और अब भी वह नए पड़ावों की ओर अग्रसर हैं।

अब तक के सफर की बात करें तो ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) से शुरू हुई उनकी यात्रा ‘जी मीडिया’ (Zee Media) के लंबे अध्याय से गुजरते हुए ‘नेटवर्क18’ (Network18) तक पहुंची, जहां उन्होंने एंकर के साथ-साथ संपादकीय जिम्मेदारियां भी संभालीं। हालांकि, करीब एक दशक तक नेटवर्क18 से जुड़े रहने के बाद अमिश देवगन ने हाल ही में यहां से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद अब मीडिया इंडस्ट्री में उनकी अगली पारी को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

सूत्रों के मुताबिक, नेटवर्क18 प्रबंधन उन्हें अपने साथ बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। वहीं, अमिश देवगन भी अपने अगले कदम को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। उनके सामने मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े कुछ प्रस्ताव और अन्य प्रोजेक्ट्स हैं, जिन पर वह मंथन कर रहे हैं। इसके अलावा, वह अपने किसी नए वेंचर के जरिए उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं।

ऐसे में करीब 24 साल की पत्रकारिता यात्रा के बाद अमिश देवगन की अगली पारी किस रूप में सामने आती है, इस पर इंडस्ट्री की नजर है। उनके लंबे अनुभव, मजबूत ऑन-स्क्रीन पहचान और एडिटोरियल लीडरशिप के अनुभव को देखते हुए उनकी अगली भूमिका को लेकर स्वाभाविक रूप से काफी दिलचस्पी बनी हुई है।

दरअसल, अमिश देवगन हिंदी टेलीविजन न्यूज के उन प्रमुख चेहरों में शामिल हैं, जिनकी अपनी एक विशिष्ट ऑन-स्क्रीन पहचान है। खास तौर पर उनका शो ‘आर-पार’ लंबे समय से उनकी पत्रकारिता की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

अमिश देवगन ने वर्ष 2002 में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन की ओर रुख किया और ‘जी मीडिया’ (Zee Media) से जुड़े। वर्ष 2005 में वह ‘जी बिजनेस’ से जुड़े, जहां आगे चलकर उनके करियर का एक लंबा और महत्वपूर्ण अध्याय बना।

यह वह दौर था जब भारतीय मीडिया तेजी से बदल रहा था। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ 24x7 न्यूज चैनलों का विस्तार हो रहा था और टेलीविजन पत्रकारिता के लिए नए अवसर बन रहे थे। इसी बदलते मीडिया माहौल में अमिश देवगन ने अपने करियर को नई दिशा दी।

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के बाद ‘जी मीडिया’ से जुड़ना अमिश देवगन के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। यहां उनकी करीब 13 साल की पारी ने उन्हें बिजनेस जर्नलिज्म और टेलीविजन एंकरिंग की दुनिया में स्थापित किया। उन्होंने ‘जी बिजनेस’ में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह डिप्टी एडिटर, एडिटर (आउटपुट) और एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) जैसे पदों पर रहे और मई 2015 में चैनल के चीफ एडिटर बने।

एक रिपोर्टर के तौर पर शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे उन्हें एडिटोरियल और एंकरिंग की बड़ी जिम्मेदारियों तक ले गया। बिजनेस न्यूज की दुनिया में उन्होंने कमोडिटी और एग्रीकल्चर से जुड़े विषयों पर भी विशेष रूप से काम किया। उन्होंने ‘Mandi Live’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए कमोडिटी मार्केट से जुड़े विषयों को दर्शकों तक पहुंचाया और इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।

‘जी बिजनेस’ में उनके कार्यकाल का एक प्रमुख कार्यक्रम ‘Big Story Big Debate’ रहा। इस शो में राजनीति, अर्थव्यवस्था, वित्तीय बाजार और देश-दुनिया से जुड़े बड़े मुद्दों पर बहस होती थी। बिजनेस न्यूज की पृष्ठभूमि से आने वाले अमिश देवगन ने इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए अपने दायरे को व्यापक बनाया। वह केवल बाजार और कारोबार की खबरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर भी चर्चा करने वाले एंकर के तौर पर अपनी पहचान मजबूत करते गए।

उनके इंटरव्यू कार्यक्रमों में देश के कई प्रमुख राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े चेहरे शामिल हुए। अलग-अलग मौकों पर उन्होंने देवेंद्र फडणवीस, मनोहर लाल खट्टर, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह, जयराम रमेश, आनंद शर्मा और कमलनाथ जैसे प्रमुख नेताओं से बातचीत की। इंटरव्यू और डिबेट का यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक और प्राइम टाइम एंकरिंग का मजबूत आधार बना।

अमिश देवगन की पहचान केवल स्टूडियो एंकर के रूप में नहीं बनी। उनके पत्रकारिता करियर में रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उनके प्रमुख पत्रकारिता कार्यों में कोयला घोटाला, ओडिशा का माइनिंग स्कैम और हवाला कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े खुलासे शामिल हैं।

यानी कैमरे के सामने दिखाई देने वाले प्राइम टाइम एंकर के पीछे एक ऐसा पत्रकार भी है, जिसने अपने करियर में जटिल और महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम किया। रिपोर्टिंग का यही अनुभव बाद में उनकी एंकरिंग और इंटरव्यू शैली में भी दिखाई देता है।

‘जी मीडिया’ में करीब 13 साल की लंबी पारी के बाद अमिश देवगन ने वर्ष 2016 में नेटवर्क18 का रुख किया। जून 2016 में उनके नेटवर्क18 से जुड़ने की खबर सामने आई। उस समय वह IBN7 (अब न्यूज18 इंडिया) के एग्जिक्यूटिव एडिटर और एंकर बने थे और चैनल की हिंदी स्ट्रैटेजी से जुड़ी जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई थी। यह उनके करियर का बड़ा मोड़ था। ‘जी बिजनेस’ के बिजनेस न्यूज स्पेस में अपनी पहचान बनाने के बाद अब वह राष्ट्रीय हिंदी न्यूज के बड़े मंच पर थे। यहीं से उनकी पहचान का एक नया अध्याय शुरू हुआ- ‘आर-पार’ के साथ।

अगर अमिश देवगन के टेलीविजन करियर के सबसे चर्चित कार्यक्रम की बात की जाए तो ‘आर-पार’ का नाम सबसे पहले आता है। इस शो के जरिए उन्होंने राजनीति, अर्थव्यवस्था और देश से जुड़े प्रमुख मुद्दों को प्राइम टाइम बहस का हिस्सा बनाया। सवाल पूछने का सीधा अंदाज, विषय की पृष्ठभूमि पर पकड़ और बहस को तेज गति से आगे बढ़ाने की शैली उनकी ऑन-स्क्रीन पहचान का हिस्सा बनी।

समय के साथ ‘आर-पार’ उनकी व्यक्तिगत एंकरिंग पहचान का एक मजबूत ब्रैंड बन गया। टेलीविजन के साथ डिजिटल ऑडियंस के बीच भी इस शो के जरिये उन्होंने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। नेटवर्क18 में अमिश देवगन की जिम्मेदारियां समय के साथ लगातार बढ़ती गईं। वह केवल प्राइम टाइम एंकर नहीं रहे, बल्कि न्यूज ऑपरेशन और एडिटोरियल मैनेजमेंट से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभालते रहे।

वर्ष 2019 में नेटवर्क18 ने उन्हें न्यूज18 (यूपी, मध्यप्रदेश और राजस्थान) का मैनेजिंग एडिटर बनाया। इस भूमिका के साथ उनकी जिम्मेदारी केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं रही, बल्कि न्यूज रूम और एडिटोरियल फैसलों तक भी पहुंची। इस तरह उनकी भूमिका एक प्राइम टाइम एंकर से आगे बढ़कर न्यूज ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप तक पहुंच गई।

अमिश देवगन की इस पूरी यात्रा की सबसे खास बात यही है कि उनकी कहानी किसी एक शो या किसी एक संस्थान की कहानी नहीं, बल्कि बदलते भारतीय न्यूज मीडिया के साथ एक पत्रकार के लगातार विकसित होते जाने की कहानी है। 2002 में शुरू हुआ यह सफर 24 साल पूरे कर चुका है, लेकिन यात्रा अभी जारी है और कहानी अभी बाकी है।

मिल चुके हैं कई सम्मान: करीब ढाई दशक के पत्रकारिता सफर में अमिश देवगन को विभिन्न मंचों पर सम्मान भी मिला है। उनके नाम IMF Young Emerging Editors Award 2015, Srishti Award for Business Journalism और Power Brand Trendsetter Award 2016 जैसे सम्मान दर्ज हैं।

इसके अलावा नेटवर्क18 में उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’(enba) में भी महत्वपूर्ण पहचान मिली। enba के मंच पर उन्हें एंकरिंग और एडिटोरियल लीडरशिप के लिए भी सम्मान मिला है। ये सम्मान उनके करियर के अलग-अलग पहलुओं जैसे- बिजनेस जर्नलिज्म, एंकरिंग और एडिटोरियल लीडरशिप को रेखांकित करते हैं। 

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मैग्नाइट में बड़ा बदलाव, चंद्रहास शेट्टी ने छोड़ी कंपनी

चंद्रहास शेट्टी (Chandrahas Shetty) ने मैग्नाइट (Magnite) में हेड ऑफ डिमांड, इंडिया (Head of Demand, India) का पद छोड़ दिया है। वह 2023 में कंपनी से जुड़े थे।

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Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
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मैग्नाइट (Magnite) के हेड ऑफ डिमांड, इंडिया (Head of Demand, India) चंद्रहास शेट्टी (Chandrahas Shetty) ने कंपनी से अलग होने का फैसला किया है। वह मैग्नाइट इंडिया की शुरुआती टीम का हिस्सा रहे हैं और 2023 में कंपनी से जुड़े थे।

चंद्रहास शेट्टी ने स्वतंत्र विज्ञापन प्लेटफॉर्म (Independent Advertising Platform) मैग्नाइट में करीब तीन साल काम किया। अपने कार्यकाल के दौरान वह भारत में डिमांड साइड बिजनेस को आगे बढ़ाने से जुड़े रहे।

मैग्नाइट से पहले शेट्टी ने मीडिया मैथ (MediaMath) में भी काम किया था। डिजिटल विज्ञापन के क्षेत्र में उन्हें 14 साल से ज्यादा का अनुभव है।

अपने करियर के दौरान उन्होंने डिजिटल एडवरटाइजिंग (Digital Advertising) से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया है। मैग्नाइट इंडिया की शुरुआती टीम का हिस्सा होने के कारण कंपनी के भारत में कारोबार के शुरुआती दौर में भी उनकी अहम भूमिका रही।

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Newslaundry विवाद: क्या मीडिया वॉचडॉग खुद के तय मानकों पर खरा उतर पाएगा?

डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म न्यूजलॉन्ड्री (Newslaundry) पर उसके कुछ पूर्व एम्प्लॉयीज की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है।

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Published - Wednesday, 12 August, 2026
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Wednesday, 12 August, 2026
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न्यूजलॉन्ड्री पर पूर्व एम्प्लॉयीज के आरोपों से उठे सवाल, संस्था ने कहा- 2017 से POSH नियमों का कर रहे पालन

डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म न्यूजलॉन्ड्री (Newslaundry) पर उसके कुछ पूर्व एम्प्लॉयीज की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है। इन आरोपों के बीच न्यूजलॉन्ड्री ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वह 2017 से POSH (Prevention of Sexual Harassment) कानून के तहत नियमों का पालन कर रहा है और उसके यहां इंटर्नल कम्प्लेंट्स कमेटी (ICC) भी मौजूद है।

संस्था के मुताबिक, अब तक यौन उत्पीड़न से जुड़ी चार शिकायतों पर ICC के जरिए कार्रवाई की गई है। इन मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर एम्प्लॉयीज की बर्खास्तगी और निलंबन जैसे कदम भी उठाए गए हैं।

न्यूजलॉन्ड्री ने कहा- हमसे भी सवाल पूछे जाने चाहिए

न्यूजलॉन्ड्री ने अपने बयान में कहा कि POSH नियमों का पालन करने का यह मतलब नहीं है कि संस्था बेहतर करने की कोशिश नहीं कर सकती। उसने अपने साथ जुड़े लोगों, जिसमें पूर्व एम्प्लॉयी भी शामिल हैं, से अपनी बात और शिकायतें सीधे संस्था तक पहुंचाने की अपील की है।

संस्था ने कहा कि वह पिछले पांच दिनों से न्यूजलॉन्ड्री और उसके एम्प्लॉयीज को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर नजर रख रही है। उसके मुताबिक, इस दौरान कुछ बिना आधार और गलत आरोप भी लगाए गए हैं।

न्यूजलॉन्ड्री ने यह भी कहा कि उसके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और एम्प्लॉयीज या संस्था की ओर से हर आरोप का जवाब नहीं देना किसी तरह की कमजोरी या बचाव की कोशिश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

‘हमने कभी खुद को परफेक्ट नहीं बताया’

अपने बयान में न्यूजलॉन्ड्री ने कहा कि उसने कभी खुद को परफेक्ट होने का दावा नहीं किया। संस्था के मुताबिक, वह लगातार सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती रही है।

न्यूजलॉन्ड्री ने अपनी उस पुरानी सोच को भी दोहराया कि किसी को भी जांच-पड़ताल और आलोचना से ऊपर नहीं होना चाहिए, खुद न्यूजलॉन्ड्री भी नहीं। यही बात अब मौजूदा विवाद के केंद्र में आ गई है।

‘सबकी धुलाई’ के सिद्धांत की अब खुद पर कसौटी

पिछले एक दशक से ज्यादा समय में न्यूजलॉन्ड्री ने मीडिया संस्थानों, न्यूजरूम की कार्यशैली और पत्रकारिता से जुड़े नैतिक सवालों पर खुलकर बात की है। उसका चर्चित विचार रहा है कि मीडिया समेत किसी भी संस्था को सवालों और आलोचना से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

लेकिन पूर्व एम्प्लॉयीज के आरोपों के बाद अब यही सवाल न्यूजलॉन्ड्री के अपने न्यूजरूम को लेकर उठ रहे हैं। विवाद ने पारदर्शिता, शिकायतों की प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।

मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि न्यूजलॉन्ड्री को अपने बचाव में जवाब देने का अधिकार है या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि जिस पारदर्शिता, जवाबदेही और कड़ी जांच-पड़ताल की मांग संस्था लंबे समय से दूसरे मीडिया संस्थानों, कंपनियों और सार्वजनिक संस्थाओं से करती रही है, क्या वही कसौटी अब उस पर भी लागू होनी चाहिए?

फिलहाल न्यूजलॉन्ड्री ने अपनी ओर से POSH अनुपालन और चार शिकायतों पर कार्रवाई की जानकारी दी है। हालांकि, उपलब्ध बयान में पूर्व एम्प्लॉयीज की ओर से लगाए गए विशिष्ट आरोपों का विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है। इसलिए मौजूदा विवाद में संस्था के बयान और पूर्व एम्प्लॉयीज के आरोपों के बीच तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि का सवाल अभी बना हुआ है।

 

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बिक्रम बसु बने ABD Maestro के वाइस चेयरमैन

एबीडी मेस्ट्रो (ABD Maestro) ने बिक्रम बसु (Bikram Basu) को वाइस चेयरमैन (Vice Chairman) नियुक्त किया है। वह मार्केटिंग और इनोवेशन की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।

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Published - Tuesday, 11 August, 2026
Last Modified:
Tuesday, 11 August, 2026
bikrambasu

एबीडी मेस्ट्रो (ABD Maestro) ने बिक्रम बसु (Bikram Basu) को वाइस चेयरमैन (Vice Chairman) नियुक्त किया है। इसके साथ ही वह एबीएल ग्रुप (ABDL Group) के चीफ मार्केटिंग एंड इनोवेशन ऑफिसर (Chief Marketing and Innovation Officer) की मौजूदा जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।

बिक्रम बसु अप्रैल 2025 से एबीडी मेस्ट्रो में मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) के पद पर हैं। नई जिम्मेदारी के बाद भी वह कंपनी के कामकाज की देखरेख करेंगे और एबीडीएल (ABDL) तथा एबीडी मेस्ट्रो के अलग-अलग ब्रांड्स के लिए मार्केटिंग और इनोवेशन से जुड़े काम को आगे बढ़ाएंगे।

नई लीडरशिप व्यवस्था के तहत बिक्रम बसु एबीडीएल के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer) प्रदीप्ता बसु (Pradipta Basu) और एबीडी मेस्ट्रो के डायरेक्टर–मार्केटिंग एंड स्पेशल अकाउंट्स–ऑन ट्रेड (Director – Marketing and Special Accounts – On Trade) अरविंद हंगल (Arvind Hangal) के साथ मिलकर काम करेंगे।

कंपनी के मुताबिक, नई व्यवस्था से ग्रुप की मार्केटिंग टीमों के बीच बेहतर तालमेल होगा। इसके साथ मार्केटिंग क्षमताओं को एक साथ लाने, इनोवेशन को तेज करने और अलग-अलग टीमों के अच्छे तरीकों को साझा करने में मदद मिलेगी।

बिक्रम बसु ने मार्च 2015 में एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स (Allied Blenders & Distillers) में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer) के तौर पर करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने ग्रुप में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं।

बाद में वह एबीडी मेस्ट्रो से जुड़े, जो कंपनी की सुपर-प्रीमियम और लग्जरी स्पिरिट्स (Super-premium and Luxury Spirits) के कारोबार पर फोकस करने वाली सब्सिडियरी है। अप्रैल 2025 में उन्हें एबीडी मेस्ट्रो का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया था।

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पत्रकार राम चंद्र हत्याकांड: राम रहीम को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर SC करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दे दी।

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Published - Tuesday, 11 August, 2026
Last Modified:
Tuesday, 11 August, 2026
RamRahim541

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दे दी। राम रहीम फिलहाल दो महिला अनुयायियों से यौन शोषण के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने राम रहीम के वकील आर. बसंत की उस दलील को नहीं माना, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह बरी किए जाने का मामला है और राज्य ने इस फैसले के खिलाफ कोई अपील भी दाखिल नहीं की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर विचार किए जाने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट की ओर से दर्ज की गई सजा को पलटा गया है। यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें हाई कोर्ट ने पहले से बरकरार रखे गए बरी होने के फैसले को फिर से पलटा हो। अदालत ने यह भी कहा कि उसे इस बात की जानकारी है कि राज्य यानी CBI इस बरी किए जाने के खिलाफ अपील नहीं करेगी।

2019 में ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद

सिरसा के पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में जनवरी 2019 में ट्रायल कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

अब पत्रकार के बेटे और इस मामले में शिकायतकर्ता अरिंदम छत्रपति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर राम रहीम को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट से मामले से जुड़े रिकॉर्ड मंगवाए हैं। इनमें गवाहों के बयान भी शामिल हैं। अदालत अब इस मामले की अंतिम सुनवाई नवंबर के आखिरी सप्ताह में करेगी।

मुख्य गवाह की गवाही पर उठे सवाल

राम रहीम की ओर से पेश वकील आर. बसंत ने अदालत में कहा कि हाई कोर्ट ने साफ तौर पर माना था कि मामले के मुख्य गवाह पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं किया जा सकता।

इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि वह मुख्य गवाह की गवाही से जुड़े विशेष परिस्थितियों और इस बात की जांच करेगी कि उसकी गवाही का सही तरीके से मूल्यांकन किया गया था या नहीं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जिस मुख्य गवाह का जिक्र कर रहा है, वह राम रहीम का पूर्व ड्राइवर है।

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि हाई कोर्ट ने राम चंद्र छत्रपति की हत्या की साजिश के अस्तित्व को लेकर ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष को बरकरार रखा था। साथ ही, तीन अन्य आरोपियों को IPC की धारा 120-B और धारा 302 के तहत दोषी ठहराए जाने को भी बरकरार रखा गया था।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद हाई कोर्ट इस नतीजे पर पहुंच गया कि बाबा गुरमीत सिंह यानी गुरमीत राम रहीम की हत्या की साजिश में भागीदारी साबित नहीं हुई है। याचिकाकर्ता ने इसी निष्कर्ष को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

स्थानीय पुलिस की जांच पर उठे थे सवाल

राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में स्थानीय पुलिस की जांच में कुछ कमियां सामने आने के बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने नवंबर 2003 में मामले की जांच CBI को सौंप दी थी। यह हत्या होने के करीब एक साल बाद का मामला था।

CBI ने इसके बाद मामले की जांच की और आगे की कानूनी कार्रवाई हुई।

अब सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि गुरमीत राम रहीम को बरी किए जाने के हाई कोर्ट के फैसले में कोई कानूनी या तथ्यात्मक गलती हुई थी या नहीं। मामले की अगली और अंतिम सुनवाई नवंबर के आखिरी सप्ताह में होने की उम्मीद है।

 

 

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फेक न्यूज रोकने के लिए बहु-एजेंसी व्यवस्था चाहती है संसदीय समिति

संसदीय स्थायी समिति ने फर्जी खबरों पर रोक के लिए स्वतंत्र निगरानी निकाय बनाने की सिफारिश की है। समिति ने AI जनित कंटेंट और सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी की जरूरत बताई।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 07 August, 2026
Last Modified:
Friday, 07 August, 2026
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संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee on Communications and Information Technology) ने केंद्र सरकार से फर्जी खबरों (Fake News) से निपटने के लिए एक स्वतंत्र और केंद्रीकृत संस्थागत व्यवस्था बनाने की मांग दोहराई है। 6 अगस्त को संसद में पेश अपनी 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (Action Taken Report) में समिति ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य के लिए पर्याप्त नहीं है।

समिति ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY), मीडिया संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों को शामिल करते हुए एक विशेष निगरानी निकाय या टास्क फोर्स गठित करने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि यह निकाय फर्जी खबरों की जांच कर आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने में सक्षम होना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फर्जी खबरें अब प्रिंट, टेलीविजन, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) से तैयार कंटेंट के जरिए तेजी से फैल रही हैं। ऐसे में केवल प्रेस सूचना ब्यूरो (Press Information Bureau-PIB) की फैक्ट चेक यूनिट (Fact Check Unit-FCU) पर निर्भर रहने के बजाय बहु-एजेंसी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। समिति ने PIB FCU के कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने की भी मांग की है और वर्ष 2019 से अब तक प्राप्त शिकायतों, उनके निपटान और सफलता दर का विस्तृत ब्यौरा मांगा है।

समिति ने AI जनित फर्जी सामग्री को उभरती हुई बड़ी चुनौती बताते हुए ऐसी सामग्री की अनिवार्य लेबलिंग, संभावित लाइसेंसिंग व्यवस्था, मीडिया संस्थानों में फैक्ट-चेकिंग तंत्र, आंतरिक लोकपाल, मीडिया साक्षरता कार्यक्रम और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने जैसे कई संरचनात्मक सुधारों की भी सिफारिश की है। समिति का कहना है कि भविष्य में फर्जी खबरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्थायी और बहु-एजेंसी नियामकीय ढांचे की आवश्यकता होगी।

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पिछले एक साल में प्रसार भारती की संपादकीय स्वतंत्रता को लेकर नहीं मिली कोई शिकायत: सरकार

यह जानकारी लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने सांसद अधिवक्ता प्रिया सरोज और पुष्पेंद्र सरोज के सवाल के लिखित जवाब में दी।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 07 August, 2026
Last Modified:
Friday, 07 August, 2026
PrasarBharati741

केंद्र सरकार ने कहा है कि पिछले एक वर्ष के दौरान प्रसार भारती की संपादकीय स्वतंत्रता (Editorial Autonomy), नियुक्तियों या सार्वजनिक प्रसारण सेवाओं के कामकाज को लेकर पत्रकारों, कर्मचारियों या किसी मीडिया संगठन की ओर से कोई शिकायत या औपचारिक प्रस्तुति (Representation) प्राप्त नहीं हुई है।

यह जानकारी लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने सांसद अधिवक्ता प्रिया सरोज और पुष्पेंद्र सरोज के सवाल के लिखित जवाब में दी।

BIND योजना को 2027 तक बढ़ाया गया

सरकार ने बताया कि देश में प्रसार भारती के प्रसारण ढांचे के विकास, आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए Broadcasting Infrastructure and Network Development (BIND) योजना चलाई जा रही है। यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना वर्ष 2021-26 के लिए मंजूर की गई थी, जिसे अब 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है।

सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत आवंटित बजट, वास्तविक खर्च और राजस्व से जुड़ी जानकारी प्रसार भारती की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

संपादकीय मामलों की नियमित समीक्षा

सरकार ने कहा कि समाचारों की गुणवत्ता, सटीकता, निष्पक्षता और प्रस्तुति सुनिश्चित करने के लिए संपादकीय मामलों की नियमित समीक्षा Editor-in-Chief और वरिष्ठ संपादकीय टीम करती है। जरूरत पड़ने पर समाचारों की गुणवत्ता सुधारने और प्रसार भारती की संपादकीय नीति तथा प्रोग्राम कोड का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और सुधारात्मक कदम भी उठाए जाते हैं।

सरकार ने बताया कि दर्शकों की ओर से मिलने वाली शिकायतों और सुझावों, जिनमें संपादकीय सामग्री से जुड़ी शिकायतें भी शामिल होती हैं, उन्हें संबंधित संपादकीय टीम के पास भेजा जाता है, जहां निर्धारित नीति के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

नियुक्तियों से जुड़ी 7 शिकायतें मिलीं

सरकार के अनुसार, पिछले एक वर्ष में संपादकीय स्वतंत्रता या कार्यप्रणाली से जुड़ी कोई शिकायत नहीं मिली, लेकिन नियुक्तियों से संबंधित 7 शिकायतें आवेदकों की ओर से प्राप्त हुई थीं।

आकाशवाणी की पहुंच 98% आबादी तक

सरकार ने बताया कि आकाशवाणी (Akashvani) की पहुंच देश की लगभग 98 प्रतिशत आबादी और 90 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र तक है। वहीं, DD Free Dish देश के किसी भी हिस्से में बिना किसी सब्सक्रिप्शन शुल्क के देखा जा सकता है।

दर्शकों की प्रतिक्रिया के आधार पर होता है सुधार

सरकार ने कहा कि प्रसार भारती नियमित रूप से दर्शकों की संख्या (Viewership Data), लोगों की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया एनालिटिक्स की समीक्षा करता है। इन आंकड़ों और सुझावों के आधार पर समाचारों की गुणवत्ता, कंटेंट और प्रस्तुति में लगातार सुधार किया जाता है, ताकि दर्शकों को बेहतर और संतुलित समाचार उपलब्ध कराए जा सकें।

 

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