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एंकर ने हिजाब पहनने से किया इनकार, राष्ट्रपति ने इंटरव्यू किया कैंसिल

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने हिजाब न पहनने पर अमेरिकी महिला पत्रकार को इंटरव्यू देने से इनकार कर दिया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 23 September, 2022
Last Modified:
Friday, 23 September, 2022
CNN458521

ईरान में पिछले कुछ दिनों से हिजाब को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की वजह से यह देश एक नई क्रांति का केंद्र बना हुआ है। हो सकता है आने वाले दिनों में यहां भी एक नया इतिहास लिखा जाए। लेकिन इस बीच गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने हिजाब न पहनने पर अमेरिकी महिला पत्रकार को इंटरव्यू देने से इनकार कर दिया।

बता दें कि CNN की पत्रकार क्रिस्टियन एमनपोर द्वारा हिजाब पहनने से मना करने के बाद, ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी का निर्धारित इंटरव्यू अचानक से रद्द कर दिया गया। एमनपोर ने ट्वीट किया कि उन्हें हिजाब पहनने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद इंटरव्यू कैंसिल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू के दौरान राष्ट्रपति से देश में हो रहे प्रदर्शनों पर चर्चा की जानी थी, जिसमें पुलिस हिरासत में महिला की मौत सहित कई घटनाएं शामिल हैं। पुलिस हिरासत में महिला की मौत के बाद लोग प्रदर्शन के दौरान अपने हिजाब जला रही हैं।

एमनपोर ने इंटरव्यू के लिए ईरानी राष्ट्रपति का 40 मिनट तक इंतजार किया, लेकिन वह नहीं आए। महिला पत्रकार को बताया गया कि यह मुहर्रम का पवित्र महीना चल रहा है, इसलिए हिजाब पहनना होगा। इस पर उन्होंने के कहा कि हम न्यूयॉर्क में हैं और यहां पर हिजाब को लेकर ऐसा कोई कानून लागू नहीं है। इससे पहले किसी भी ईरानी राष्ट्रपति ने ऐसी मांग नहीं रखी है, जब वह ईरान के बाहर इंटरव्यू कर रही हों।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब इस मिडिल ईस्ट देश में हिजाब का मुद्दा गरमाया हुआ है। दरअसल, हिजाब नियमों को तोड़ने को लेकर पुलिस हिरासत में हुई एक महिला की मौत के बाद लोग भड़क गए हैं और सड़कों पर उतर आए हैं।

 

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Google ने की 'मनमानी', लगा 4.12 अरब डॉलर का जुर्माना

गूगल की मोनोपॉली से इस समय कई देश परेशान हैं, लिहाजा कई देशों ने उसकी मनमानी के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 19 September, 2022
Last Modified:
Monday, 19 September, 2022
Google

गूगल की मोनोपॉली से इस समय कई देश परेशान हैं, लिहाजा कई देशों ने उसकी मनमानी के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जिनमें भारत भी शामिल है। लेकिन इन सबके बीच खबर है कि दिग्गज टेक कंपनी गूगल को हाल ही में यूरोपियन यूनियन (EU) ने बड़ा झटका दिया है। ईयू ने कंपनी पर 4.12 अरब डॉलर (करीब 32,000 करोड़ भारतीय रुपए) का जुर्माना लगाया है।  गूगल पर अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल करते हुए प्रतिस्पर्धा को खत्म करने का आरोप लगा था।

कोर्ट ने माना कि गूगल ने एंटीट्रस्ट लॉ (Antitrust Law) का उल्लंघन किया है। गूगल ने ऐसा अपने सर्च इंजन की लीडरशिप को मजबूत करने के लिए अपनी एंड्रॉयड स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी और उस मार्केट में उसके प्रभुत्व का इस्तेमाल करके किया है।

ईयू ही नहीं, दुनिया में कई जगहों पर गूगल मुकदमों का सामना कर रही है। ज्यादातर आरोप प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने को लेकर हैं। इससे पहले गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट और फेसबुक की मूल कंपनी मेटा पर जुर्माना लगा था। साउथ कोरिया में प्रतिस्पर्धा उल्लंघन मामले में इन दोनों कंपनियों पर 71 मिलियन डॉलर (करीब 565 करोड़ रुपये) का संयुक्त जुर्माना लगा था।

भारत भी गूगल की मोनोपॉली और एंटीट्रस्ट के खिलाफ कमर कसता जा रहा है, इससे गूगल के लिए राह मुश्किल हो सकती है, क्योंकि वह विश्व के विभिन्न हिस्सों में एक के बाद एक लड़ाई हार रहा है। भारत में कुछ संगठनों के नेतृत्व में यह लड़ाई लड़ी जा रही है, जिनमें गूगल और दूसरी टेक कंपनियों के एंटी ट्रस्ट बिहेवियर को चुनौती दी जा रही है। भारत सरकार की एंटीट्रस्ट वॉचडॉग कॉम्पिटीशन कमेटी ऑफ इंडिया (CCI) गूगल के खिलाफ दायर की गई याचिका की जांच कर रही है। यह याचिका डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) की ओर से दर्ज की गई है। इस याचिका में गूगल द्वारा अपनी कमाई का एक हिस्सा न्यूज पब्लिशर्स और मीडिया चैनल्स के साथ शेयर करने की मांग की गई है।

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पत्रकार ने महिला खिलाड़ियों के शॉर्ट्स पर कह दी ऐसी बात, जमकर पड़ी फटकार

कई लोगों ने खिलाड़ियों के कपड़ों पर ध्यान केंद्रित करने और उनकी उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित नहीं करने के लिए संवाददाता को कड़ी फटकार लगाई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 19 September, 2022
Last Modified:
Monday, 19 September, 2022
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पाकिस्तान की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम की खिलाड़ियों के शॉर्ट्स पहनने पर वहां के एक पत्रकार ने आपत्ति जताई है, जिसके बाद उसे आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान के इस पत्रकार का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

यह वीडियो सैफ महिला चैंपियनशिप के दौरान का है, जो नेपाल के काठमांडू में खेली जा रही है। उस पत्रकार को लोगों ने खूब लताड़ लगाई है।

काठमांडू में सैफ चैंपियनशिप के मुकाबले में पाकिस्तान की महिला टीम ने मालदीव को सात गोल से हराया। इसके बाद पाकिस्तानी पत्रकार ने खेल पर फोकस पर करने के बयाज खिलाड़ियों की ड्रेस और किट पर सवाल उठाया। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस पत्रकार ने टीम के मैनेजर और अन्य अधिकारियों से पूछा, ‘जैसा कि आप जानते हैं कि हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान से ताल्लुक रखते हैं जो एक इस्लामिक देश है, मैं पूछना चाहता हूं कि इन लड़कियों ने शॉर्ट्स क्यों पहन रखी हैं, लेगिंग क्यों नहीं?’

लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेते हुए पाकिस्तानी महिला टीम ने चैंपियनशिप में आठ साल में पहली जीत दर्ज की, लेकिन टूर्नामेंट को कवर करने वाले पत्रकार ने खिलाड़ियों की किट पर ध्यान केंद्रित करना पसंद किया।

कई लोगों ने खिलाड़ियों के कपड़ों पर ध्यान केंद्रित करने और उनकी उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित नहीं करने के लिए संवाददाता को कड़ी फटकार लगाई और सात में से चार गोल करने के लिए ब्रिटिश-पाकिस्तानी फुटबॉलर नादिया खान की तारीफ की।

राष्ट्रीय टीम के कोच आदिल रिजकी ने इस सवाल से स्पष्ट रूप से चकित होकर कहा कि खेलों में 'हर किसी को प्रगतिशील होना चाहिए'। उन्होंने कहा, 'जहां तक पोशाक का सवाल है तो हमने कभी किसी को रोकने की कोशिश नहीं की, यह कुछ ऐसा है जिसे हम नियंत्रित नहीं करते।'  

इसके बाद टीवी प्रेजेंटर और आरजे अनुषी अशरफ, स्क्वाश खिलाड़ी नूरेना शम्स और कई अन्य खिलाड़ियों के समर्थन में सामने आए। सभी ने पत्रकार को उसकी संकीर्ण मानसिकता के लिए फटकार लगाई।

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चाकू मारकर पत्रकार की हत्या, घर के बाहर पड़ा मिला शव

पुलिस ने आशंका जताई है कि पत्रकार का किसी शख्स के साथ झगड़ा हुआ था, जिस वजह से उन पर चाकू से हमला किया गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 06 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 06 September, 2022
Murder

अमेरिका में लास वेगास के एक खोजी पत्रकार की चाकू घोंपकर हत्या करने का मामला सामने आया है। करीब 69 वर्षीय जेफ जर्मन नामक इस पत्रकार का शव शनिवार को उसके घर के पास पड़ा मिला। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने आशंका जताई है कि ‘लास वेगास रिव्यू जर्नल’ (Las Vegas Review-Journal) अखबर से जुड़े जर्मन का किसी शख्स के साथ झगड़ा हुआ था, जिस वजह से उन पर चाकू से हमला किया गया।

लास वेगास मेट्रोपोलिटन पुलिस विभाग के प्रवक्ता कैप्टन डोरी कोरेन का कहना है कि इस मामले में पुलिस के हाथ कुछ सुराग लगे हैं और संदिग्ध की तलाश की जा रही है।

वहीं, ‘लास वेगास रिव्यू जर्नल’ के कार्यकारी संपादक ग्लेन कूक का कहना है कि जर्मन ने अखबार के अधिकारियों को अपनी सुरक्षा को खतरे के बारे में किसी तरह की आशंका व्यक्त नहीं की थी।

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प्रतिष्ठित अखबार का मीडिया लाइसेंस रद्द, संपादक को कोर्ट से भी झटका

अखबार के प्रधान संपादक ने फैसले को ‘राजनीतिक’ करार दिया और दावा किया कि इसका ‘कोई भी कानूनी आधार नहीं है।’

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 06 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 06 September, 2022
Newspaper

रूस की राजधानी मॉस्को की अदालत ने एक शीर्ष स्वतंत्र समाचारपत्र का लाइसेंस रद्द करने के रूसी अधिकारियों के प्रस्ताव को बरकरार रखा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समाचारपत्र ‘नोवाया गजेटा’ वर्षों से क्रेमलिन की आलोचना करता रहा है।

स्वतंत्र मीडिया, विपक्षी कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार समूहों के खिलाफ पिछले एक महीने से जारी कड़ी कार्रवाई की श्रृंखला में यह नवीनतम घटना है।

रूस के जाने-माने स्वतंत्र समाचारपत्र ‘नोवाया गजेटा’ के खिलाफ यह फैसला यूक्रेन में रूस का सैन्य अभियान जारी रहने और क्रेमलिन द्वारा आलोचकों को चुप कराए जाने के प्रयास के बीच आया है।

अखबार के प्रधान संपादक दिमित्री मुरातोव नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित हैं। उन्होंने सोमवार के फैसले को ‘राजनीतिक’ करार दिया और दावा किया कि इसका ‘कोई भी कानूनी आधार नहीं है।’ उन्होंने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही।

रूस के मीडिया और इंटरनेट नियामक रोसकोम्नाद्ज़ोर ने नोवाया गजेटा का लाइसेंस रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अधिकारियों को वह समय पर न्यूजरूम चार्टर प्रस्तुत करने में विफल रहा है।

नोवाया गजेटा ने 28 मार्च को घोषणा की थी कि वह यूक्रेन में ‘विशेष अभियान’ की अवधि के लिए अपना संचालन निलंबित कर रहा है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि मीडिया को यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के लिए ‘विशेष अभियान’ शब्द का उपयोग करना चाहिए।

हालांकि, इसकी टीम ने यूक्रेन में अभियान की आलोचना करते हुए विदेश से एक नयी परियोजना, नोवाया गजेटा यूरोप शुरू की।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा 24 फरवरी को यूक्रेन में सैनिकों को भेजने के कुछ दिनों बाद, रूस की क्रेमलिन-नियंत्रित संसद ने उस कानून को मंजूरी दे दी जो रूसी सेना की कथित निंदा या यूक्रेन में देश के सैन्य अभियान के बारे में ‘गलत जानकारी’ के प्रसार को प्रतिबंधित करता है।

परिणामस्वरूप दर्जनों रूसी स्वतंत्र मीडिया इकाइयों पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि अन्य ने यूक्रेन से संबंधित रिपोर्टिंग रोकने की घोषणा की।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने सोमवार को एक बयान में इस फैसले की निंदा की। प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने एक बयान में कहा, ‘नोवाया गजेटा के खिलाफ फैसला रूसी मीडिया की स्वतंत्रता के लिए एक और झटका है, जिसकी गतिविधियों को कानूनी प्रतिबंधों और सरकारी नियंत्रण में वृद्धि के बाद से और कमतर किया गया है।’

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पाकिस्तान में दो चैनलों पर लगा बैन, सामने आयी ये वजह

पाकिस्तान की शाहबाज शरीफ सरकार ने एक बार फिर से मीडिया पर स्ट्राइक करते हुए दो चैनलों के प्रसारण पर रोक लगा दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 06 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 06 September, 2022
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पाकिस्तान की शाहबाज शरीफ सरकार ने एक बार फिर से मीडिया पर स्ट्राइक करते हुए दो चैनलों के प्रसारण पर रोक लगा दी है। सोमवार को कराची के जिन दो टीवी चैनलों को बंद करने का फैसला लिया गया है, उसमें पहल है ‘बोल न्यूज’ और दूसरा चैनल है ‘बोल एंटरटेनमेंट’।

पाकिस्तान में मीडिया पर निगरानी रखने वाली संस्था (PEMRA) ने इस कदम की वजह गृह मंत्रालय से सिक्योरिटी क्लीयरेंस नहीं मिलना बताया है। पेमरा ने अपनी बैठक में फैसला लिया कि गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी मिलने तक चैनलों को संचालन की मंजूरी नहीं दी जा सकती। 

पेमरा की ओर से जारी बयान में कहा गया, पेमरा ने गृह मंत्रालय के सभी रिकॉर्ड, अदालती आदेश और नोटिस की समीक्षा की और तत्काल प्रभाव से ‘बोल न्यूज’ और ‘बोल एंटरटेनमेंट चैनल’ का लाइसेंस रद्द करने का फैसला किया।

बताया जा रहा है कि इस चैनल के ऊपर शाहबाज शरीफ की टेढ़ी नजर काफी समय से थी और इस चैनल पर यह भी आरोप लगाए जा चुके हैं कि वह सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन वाली खबरें ही दिखाता है। बैन लगते ही इमरान खान भड़क गए और उन्होंने सरकार पर जमकर भड़ास निकाली है। इमरान खान ने लिखा कि आज पाकिस्तान में हम जिस फासीवाद और सेंसरशिप को देख रहे हैं, ऐसा हमने पहले कभी नहीं देखा। सरकार मीडिया और पत्रकारों पर सेंसरशिप लगा रही है और फासीवादी स्तर तक उनका उत्पीड़न कर रही है। अब ‘बोल न्यूज’ का लाइसेंस सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि वह हमारी कवरेज कर रहा था।

बता दें कि इससे पहले भी शाहबाज सरकार ने मीडिया पर कार्रवाई करते हुए चैनलों को बैन किया था। कुछ दिन पहले ही देश के नामी ‘एआरवाई’ न्यूज चैनल का प्रसारण बंद कर दिया गया था। यह तब हुआ था जब पाकिस्तान सरकार एक आदेश सामने आया। आदेश के मुताबिक इस चैनल के प्रसारण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है और अब इसका प्रसारण अगल आदेश तक नहीं हो सकेगा।

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महिला रिपोर्टर के साथ घटी ये अप्रत्याशित घटना, वीडियो हुआ वायरल

न्यूज चैनल पर लाइव रिपोर्टिंग के दौरान कई बार रिपोर्टर के साथ ऐसी घटना घट जाती है, जिसकी कल्पना भी शायद ही किसी ने की हो।

Last Modified:
Tuesday, 30 August, 2022
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न्यूज चैनल पर लाइव रिपोर्टिंग के दौरान कई बार रिपोर्टर के साथ ऐसी घटना घट जाती है, जिसकी कल्पना भी शायद ही किसी ने की हो। ऐसा ही एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें लाइव रिपोर्टिंग के दौरान महिला रिपोर्टर के हाथ से एक कुत्ता माइक छीनकर भागता हुआ दिखाई देता है।

बताया जा रहा है कि यह 10 सेकेंड का वीडियो अमेरिका से वायरल हुआ है, जिसमें एक महिला रिपोर्टर सड़क के किनारे किसी घटना पर स्टूडियो से पूछे जा रहे सवालों का लाइव जवाब दे रही होती है। इसी बीच अचानक वहां पर एक कुत्ता दौड़ता हुआ आता है। इसके बाद वह रिपोर्टर के हाथ से माइक छीनकर भागने लगता है। वीडियो यहीं नहीं खत्म होता है। आप देख सकते हैं कि कैमरामैन इसके बाद का सीन भी दिखाता है और यह सीन टीवी पर चल जाता है। आप देख सकते हैं कि जब कुत्ता माइक लेकर भागता है तो महिला रिपोर्टर भी उसके पीछे भागती है।

इस अजीबोगरीब घटना को देख न्यूज पढ़ने वाली महिला एंकर का रिएक्शन भी देखने लायक होता है, जो इस वाकये को देखकर देख कर दंग रह जाती है। यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स हंसते-हंसते लोटपोट हो रहे हैं। 

वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर @FredSchultz35 नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। 10 सेकेंड का यह वीडियो लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि इसे अब तक 86 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। वीडियो को 82 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक भी कर लिया है।  

यहां देखें वीडियो:

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मैक्सिको में एक और पत्रकार की गोली मारकर हत्या

वर्ष 2022 मैक्सिको में पत्रकारों के लिए सबसे खराब साल रहा है। इस साल अब तक यहां 15 पत्रकारों की हो चुकी है हत्या

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 25 August, 2022
Last Modified:
Thursday, 25 August, 2022
Murder

मैक्सिको (Mexico) में एक और पत्रकार की गोली मारकर हत्या करने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रेडिड रोमन (Fredid Román) नामक इस पत्रकार की चिलपेंसिंगो शहर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने रोमन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं।

बताया जाता है कि रोमन दक्षिणी मेक्सिको में एक ऑनलाइन स्थानीय समाचार कार्यक्रम ‘द रिएयलटी ऑफ गूरेरो' चलाते थे। यह कार्यक्रम राज्य की राजनीति पर केंद्रित था। 35 से अधिक वर्षो तक एक पत्रकार के रूप में काम करने के बाद रोमन ने हाल ही में शिक्षा और राजनीति पर कई कॉलम लिखे थे। इससे पहले वह एक समाचार पत्र के निदेशक थे, जिसका प्रकाशन अब नहीं होता है।

बता दें कि इससे कुछ समय पहले ही देश के उत्तर-पश्चिम में पत्रकार जुआन अर्जन की हत्या कर दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रोमन समेत इस साल अब तक इस देश में कम से कम 15 पत्रकारों की हत्या हो चुकी है।

‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ द्वारा लगातार तीसरे वर्ष 2021 में पत्रकारों के लिए मैक्सिको को दुनिया के सबसे खतरनाक देश के रूप में स्थान दिया गया था। उस वर्ष सात मौतों की गिनती की गई थी। वर्ष 2022 मैक्सिको में पत्रकारों के लिए सबसे खराब साल रहा है, जिसे अब युद्ध क्षेत्र के बाहर पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देश माना जाता है।

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तालिबानी कब्जे के बाद अफगानिस्तान में मीडिया के लिए कितने बदल गए हालात, पढ़ें ये रिपोर्ट

‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ के अनुसार, महिला पत्रकारों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है और 76 प्रतिशत को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 13 August, 2022
Last Modified:
Saturday, 13 August, 2022
Press Freedom

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा किए जाने के एक साल के भीतर स्थानीय मीडिया पर क्या असर पड़ा है, इसे लेकर फ्रांस स्थित मीडिया की दशा-दिशा पर नजर रखने वाले गैर-सरकारी संगठन ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (आरएसएफ) ने एक सर्वे पब्लिश किया है।

इस सर्वे के अनुसार, एक साल पहले तालिबान द्वारा कब्जे के बाद से अब तक अफगानिस्तान के लगभग 60 प्रतिशत पत्रकार अपनी नौकरी खो चुके हैं या देश छोड़कर भाग गए हैं।

तालिबान द्वारा 15 अगस्त 2021 को सत्ता संभालने के बाद से देश के 547 मीडिया संस्थानों में से 219 ने अपना संचालन बंद कर दिया है। महिला पत्रकारों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है और 76 प्रतिशत को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। सर्वे में पाया गया कि काबुल में फिलहाल केवल 656 महिला पत्रकार काम कर रही हैं, जबकि एक साल पहले यह संख्या करीब 2,756 थी।

मीडिया रिपोर्ट्स में ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ के महासचिव क्रिस्टोफ डेलॉयर (Christophe Deloire) के हवाले से कहा गया है, ‘अफगानिस्तान में पिछले एक साल में पत्रकारिता समाप्त हो चुकी है। अधिकारियों को मीडिया कर्मियों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए और उन्हें अपना काम बिना छेड़छाड़ के करने देना चाहिए।‘

काबुल स्थित पत्रकार मीना हबीब ने ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ को बताया कि अफगानिस्तान में महिला पत्रकारों का रहन-सहन और काम करने की स्थिति हमेशा कठिन रही है, लेकिन आज वे लोग एक अभूतपूर्व स्थिति का सामना कर रहे हैं। यहां महिलाएं बिना किसी सुरक्षा के शारीरिक और मानसिक रूप से हिंसक और थकाऊ परिस्थितियों में काम करती हैं। कुछ मीडिया संस्थानों को म्यूजिक और अन्य कंटेंट के प्रसारण के कारण बंद करने के लिए मजबूर किया गया है, जबकि अन्य अंतरराष्ट्रीय फंडिंग के बिना जारी रखने में असमर्थ रहे हैं।

‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ का कहना है कि पिछले एक साल में सुरक्षा बलों ने कम से कम 80 पत्रकारों को अलग-अलग समय के लिए हिरासत में लिया, जिनमें से तीन को फिलहाल जेल में रखा गया है। इसके साथ ही ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ ने वर्ष 2022 के लिए अपने प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (Press Freedom Index) में 179 देशों में से अफगानिस्तान को 156वें नंबर पर रखा है।

इस सर्वे रिपोर्ट को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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कोर्ट ने महिला पत्रकार को नजरबंद रखने का दिया आदेश, जानिए क्या है पूरा मामला

दो बच्चों की मां इस पत्रकार को इस मामले में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल हो सकती है।

Last Modified:
Friday, 12 August, 2022
House Arrest

रूस की एक अदालत ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन विरोधी प्रदर्शन के लिए एक महिला पत्रकार को अक्टूबर तक घर में नजरबंद करने का आदेश दिया है। महिला पत्रकार पर यह एक्शन यूक्रेन पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हमले की निंदा करने के मामले में लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूसी टीवी पत्रकार मरीना ओव्स्यानिकोवा (Marina Ovsyannikova) ने विरोध प्रदर्शन के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अपने हाथों में एक पोस्टर ले रखा था, जिसमें पुतिन के खिलाफ कई बातें लिखी हुई थीं। इसके बाद जांचकर्ताओं ने 44 वर्षीय ओव्स्यानिकोवा को हिरासत में ले लिया। उन पर रूसी सशस्त्र बलों के बारे में गलत जानकारी फैलाने का आरोप है।

दो बच्चों की मां मरीना को इस मामले में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल हो सकती है। बता दें कि इसी साल मार्च में ‘चैनल वन टेलीविजन’ की तत्कालीन संपादक ओव्स्यानिकोवा ने दुनिया भर में काफी सुर्खियां बटोरीं थी, जब उन्होंने शाम के समाचार पढ़ते हुए ‘नो वॉर’ लिखा हुआ एक पोस्टर पकड़ा हुआ था।

हालांकि, इस नजरबंदी का उस विरोध प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। यह क्रेमलिन के पास जुलाई के मध्य में उस विरोध से जुड़ा हुआ है, जब ओव्स्यानिकोवा ने एक पोस्टर पकड़ रखा था, जिसमें कथित रूप से लिखा था कि पुतिन एक हत्यारा है, उसके सैनिक फासीवादी हैं।

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विरोध प्रदर्शन की कवरेज करने पर जापानी पत्रकार हिरासत में

इस दौरान दो अन्य प्रदर्शनकारियों को भी गिरफ्तार किया गया और उन्हें एक थाने में रखा गया है।

Last Modified:
Tuesday, 02 August, 2022
Protest

म्यांमार में सुरक्षाबलों ने देश के सबसे बड़े शहर यांगून में सैन्य शासन के खिलाफ निकाले गए विरोध मार्च को कवर कर रहे जापान के एक वीडियो पत्रकार को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए इस वीडियो जर्नलिस्ट का नाम तोरू कुबोता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तोरू टोक्यो स्थित एक वृत्तचित्र फिल्म निर्माता हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में विरोध मार्च का आयोजन करने वाले समूह ‘यांगून डेमोक्रेटिक यूथ स्ट्राइक’ के प्रमुख ताइप फोन के हवाले से बताया गया है कि तोक्यो के रहने वाले कुबोता को यांगून में शनिवार को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान सादा वर्दी में आए पुलिसकर्मियों ने हिरासत में ले लिया। इस दौरान दो अन्य प्रदर्शनकारियों को भी गिरफ्तार किया गया और उन्हें यांगून के एक थाने में रखा गया है। हालांकि, म्यांमार की सैन्य सरकार ने कुबोता को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि नहीं की है।

म्यांमार की सेना ने पिछले साल फरवरी में आंग सान सूकी की चुनी हुई सरकार को हटाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया था और तब से देश में सैन्य शासन ने असंतोष पर कड़ी कार्रवाई की है। म्यांमार की सैन्य सरकार (जुंटा) के नेता ने सोमवार को देश में सेना का शासन छह माह और बढ़ाने की घोषणा की।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि सैन्य सरकार ने अब तक लगभग 140 पत्रकारों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से लगभग 55 को विभिन्न आरोपों या मुकदमे की सुनवाई जारी रहने के कारण हिरासत में रखा गया है।

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